योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान: उत्तर प्रदेश बन रहा है निवेश और उद्योग का नया केंद्र

इंटरनेशनल फिल्म सिटी, अपैरल पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी परियोजनाओं से प्रदेश को मिलेगी नई पहचान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य तेज़ी से औद्योगिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इंटरनेशनल फिल्म सिटी, अपैरल पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, जो निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे को नई गति देंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थापित करना है। सरकार आधुनिक उद्योगों, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल वातावरण के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर एवं विकसित राज्य बनने की दिशा में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगा।

पेरिस में गूंजा भारतीय आयुर्वेद का परचम: योग-पंचकर्म पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उज्जैन के डॉ. चंद्र शर्मा का शोध बना आकर्षण

अमृत काल में योग एवं पंचकर्म की वैश्विक भूमिका पर मंथन, भारत के कई राज्यों के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने रखा वैज्ञानिक दृष्टिकोण

पेरिस में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में योग और पंचकर्म की वैश्विक उपयोगिता पर गहन मंथन हुआ। 23 और 24 जून को वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लेकर आयुर्वेद एवं योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर अपने शोध प्रस्तुत किए।

इस संगोष्ठी में उज्जैन के प्रसिद्ध पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. चंद्र शर्मा ने अस्थिक्षय (ऑस्टियोपोरोसिस) के उपचार प्रबंधन में तिक्तक्षीर बस्ती की प्रभावशीलता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध को विशेषज्ञों ने विशेष रुचि के साथ सुना और इसकी उपयोगिता पर चर्चा की।

आरडी आयुर्वेद कॉलेज, भोपाल के पूर्व प्राचार्य डॉ. मणिंद्र व्यास ने योग के मूल स्वरूप से हटकर उसके विकृत प्रचार-प्रसार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि योग की प्रामाणिकता और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, नई दिल्ली के गुरु डॉ. एस.एन. पांडे ने मूत्र नलिका अवरोध के उपचार में उत्तर बस्ती की प्रभावशीलता पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। वहीं शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, भोपाल की पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी सोनी ने आधुनिक जीवनशैली के कारण युवतियों में बढ़ रहे पीसीओडी के उपचार में पंचकर्म आधारित शोधन चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी में डॉ. आनंद सराफ ने योग और आयुर्वेद के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में गुवाहाटी, मुंबई, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए शोधार्थियों ने भी अपने शोध प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन के मुख्य समन्वयक डॉ. विनोद वैरागी ने की। उन्होंने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर विख्यात पंचकर्म विशेषज्ञ यू.एस. निगम की पुस्तक “क्लीनिकल पंचकर्म एवं अनुभूत चिकित्सा प्रबंधन” के तृतीय संस्करण की जानकारी डॉ. मोहन वर्मा (देवास) ने दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजन विशद (बरेली) ने किया तथा आभार डॉ. प्रणव शर्मा शास्त्री (पीलीभीत) ने व्यक्त किया।

मुख्य बातें

पेरिस में 23-24 जून को वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।

विषय: अमृत काल में योग एवं पंचकर्म की भूमिका।

डॉ. कामिनी सोनी ने पीसीओडी के उपचार में पंचकर्म आधारित शोधन चिकित्सा की अहम भूमिका बताई।

उज्जैन के डॉ. चंद्र शर्मा ने अस्थिक्षय के उपचार में तिक्तक्षीर बस्ती पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।

डॉ. मणिंद्र व्यास ने योग के विकृत स्वरूप के बढ़ते प्रचार पर चिंता जताई।

डॉ. एस.एन. पांडे ने मूत्र नलिका अवरोध में उत्तर बस्ती की उपयोगिता बताई।

देश के कई राज्यों के शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने सम्मेलन में भाग लिया।

प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए और पंचकर्म पर नई पुस्तक के तृतीय संस्करण का परिचय कराया गया।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से डॉ. अंजुल दादोरिया ने रसायन विज्ञान में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की

पाइरिडिल आधारित शिफ बेस से व्युत्पन्न संक्रमण धातु कॉम्प्लेक्स’ विषय पर किया शोध, परिवार और शुभचिंतकों ने दी बधाई

भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल ने रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) विषय में शोधार्थी डॉ. अंजुल दादोरिया को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की है। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, शिक्षाविदों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
डॉ. अंजुल दादोरिया, डॉ. पी. डी. दादोरिया एवं श्रीमती उर्मिला दादोरिया के सुपुत्र हैं। उनका शोध प्रबंध “कुछ पाइरिडिल आधारित शिफ बेस से व्युत्पन्न संक्रमण धातु कॉम्प्लेक्स – संश्लेषण और स्पेक्ट्रोस्कोपिक लक्षण वर्णन” विषय पर आधारित है। इस शोध में संक्रमण धातु कॉम्प्लेक्स के संश्लेषण एवं उनके स्पेक्ट्रोस्कोपिक विश्लेषण से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन किया गया है।
उन्होंने अपना शोध कार्य डॉ. सुमन मलिक के निर्देशन तथा डॉ. अर्चना सिंह, साधु वासवानी (स्वायत्त) महाविद्यालय, बैरागढ़, भोपाल के सह-निर्देशन में सफलतापूर्वक पूर्ण किया। विश्वविद्यालय द्वारा शोध कार्य का मूल्यांकन पूर्ण होने के बाद उन्हें पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई।
डॉ. अंजुल दादोरिया की इस उपलब्धि पर उनकी पत्नी शशि दादोरिया, पुत्री कनिष्का दादोरिया, बहनें सरोज किरार एवं अंजली किरार सहित परिवार के वरिष्ठ सदस्य इंजीनियर एम. आर. दादोरिया, श्री आर. जी. दादोरिया, एडवोकेट आई. पी. एस. दादोरिया, इंजीनियर आर. के. दादोरिया तथा समस्त दादोरिया परिवार, मित्रों, रिश्तेदारों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
डॉ. अंजुल दादोरिया की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि क्षेत्र के युवा शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है। स्थानीय शिक्षाविदों ने विश्वास जताया कि उनका शोध रसायन विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य के अनुसंधानों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

Viral Video: क्या संकट के समय दुश्मनी भी भूल जाते हैं जीव? वायरल वीडियो ने दिया मानवता का बड़ा संदेश

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर लोग भावुक हैं। यदि वीडियो वास्तविक है, तो यह बताता है कि कठिन समय में जीवन की रक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में दो ऐसे जीव, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है, जीवन बचाने के लिए साथ दिखाई देते हैं। हालांकि, चैटजीपीटी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता और इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होना अभी बाकी है।

यदि यह दृश्य वास्तविक है, तो यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में शत्रुता नहीं, बल्कि जीवन और करुणा ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

यदि यह वीडियो वास्तविक है, तो यह केवल एक दुर्लभ घटना नहीं, बल्कि जीवन का एक गहरा संदेश भी देता है। प्रकृति बार-बार यह सिखाती है कि जब अस्तित्व पर संकट आता है, तब शत्रुता का महत्व कम हो जाता है और जीवन की रक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है।

जब जीवन सबसे बड़ा सत्य बन जाता है: संकट में दुश्मनी नहीं, इंसानियत जीतती है

यही संदेश मानव समाज पर भी लागू होता है। कठिन परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं या किसी बड़े संकट के दौरान अक्सर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते हैं। ऐसे समय में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता ही सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लाखों बार देखा और साझा किया जा चुका है। कई यूजर्स इसे इंसानियत और सह-अस्तित्व का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसकी सत्यता पर सवाल भी उठा रहे हैं। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है।

यदि वीडियो का दावा सही साबित होता है, तो यह हमें एक महत्वपूर्ण सीख देता है—जीवन किसी भी दुश्मनी, मतभेद या संघर्ष से कहीं अधिक मूल्यवान है। संकट के समय सहयोग और करुणा ही वह शक्ति है, जो हर सीमा और हर शत्रुता से ऊपर उठ जाती है।

लोक कलाओं में शुरू होंगे नए सर्टिफिकेट कोर्स, राज्य मंत्री श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी के निर्देश

संस्कृति विभाग के विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक में प्रवेश, प्लेसमेंट, अधोसंरचना और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर; रिक्त पदों की भर्ती और लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश।

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लोक कलाओं से जुड़े नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं और कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे

बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के प्रवेश, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट, अधोसंरचना विकास और विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की गई। राज्य मंत्री ने शासन स्तर पर लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे और रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में वर्तमान में 122 पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें संगीत, नृत्य, ललित कला, नाट्य एवं रंगकर्म सहित विभिन्न विषय शामिल हैं। राज्य मंत्री ने विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों एवं पाठ्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इनका लाभ उठा सकें।

सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय ने बैठक में जानकारी दी कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में 16 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। राज्य मंत्री श्री लोधी ने शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

बैठक में संस्कृति विभाग के संचालक श्री एन.पी. नामदेव, उपसचिव श्री राजेश गुप्ता, राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्रबुद्धे, सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री रामनिवास गुप्ता सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

आरजीपीवी पेपर लीक पर अभाविप का बड़ा आंदोलन, 5 घंटे के प्रदर्शन के बाद परीक्षा नियंत्रक सभी दायित्वों से मुक्त

प्रश्नपत्र चोरी मामले में दोषियों के निलंबन और निष्पक्ष जांच की मांग तेज, अभाविप ने कहा— कार्रवाई पूरी होने तक चरणबद्ध संघर्ष रहेगा जारी।

भोपाल, 7 जुलाई। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में प्रश्नपत्र चोरी प्रकरण को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में करीब पांच घंटे तक प्रदर्शन किया। आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा नियंत्रक को तत्काल प्रभाव से सभी दायित्वों से मुक्त कर दिया और परीक्षा कार्य से जुड़े संविदा संकाय सदस्य सहित संबंधित अधिकारियों की विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया।

अभाविप ने इस कार्रवाई को विद्यार्थियों के शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन की पहली सफलता बताया, लेकिन स्पष्ट किया कि केवल दायित्वों से मुक्त करना पर्याप्त नहीं है। परिषद ने मांग की है कि जिन अधिकारियों की प्रथम दृष्टया प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए, ताकि पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से जांच पूरी कर सकें।

परिषद का कहना है कि प्रश्नपत्र चोरी केवल आपराधिक मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक जवाबदेही का भी गंभीर विषय है। दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय की साख और विद्यार्थियों का विश्वास बहाल हो सके।

अभाविप भोपाल महानगर मंत्री आरती ठाकुर ने कहा कि आरजीपीवी प्रदेश का एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय है, जहां लाखों विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा नियंत्रक को दायित्वों से मुक्त करना सकारात्मक कदम है, लेकिन दोषियों के निलंबन, निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई तक विद्यार्थी परिषद का चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

परिषद ने चेतावनी दी कि यदि समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो छात्रहित और विश्वविद्यालय की गरिमा की रक्षा के लिए आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

JCB ड्राइवर की बहादुरी: भयंकर बाढ़ में फंसे परिवार की बचाई जान

छोटी बच्ची, माँ और पिता को सुरक्षित बाहर निकालकर पेश की मानवता की मिसाल

भयंकर बाढ़ के बीच एक JCB ड्राइवर ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक परिवार की जान बचा ली। तेज़ बहाव और चारों ओर फैले पानी के बीच एक घर में एक छोटी बच्ची अपने माता-पिता के साथ फंसी हुई थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था।

ऐसे कठिन समय में JCB ड्राइवर ने अपनी जान की परवाह किए बिना मशीन को बाढ़ के पानी के बीच पहुँचाया और सावधानीपूर्वक परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सबसे पहले छोटी बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया, जिसके बाद उसकी माँ और पिता को भी सकुशल रेस्क्यू कर लिया गया।

इस साहसिक बचाव अभियान ने साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में हिम्मत, समझदारी और मानवता सबसे बड़ी ताकत होती है। स्थानीय लोगों ने JCB ड्राइवर की बहादुरी की जमकर सराहना की और उसे एक वास्तविक हीरो बताया।

मुख्य  बिंदु

  • भयंकर बाढ़ में एक परिवार घर के अंदर फंस गया था।
  • JCB ड्राइवर ने जोखिम उठाकर रेस्क्यू अभियान चलाया।
  • छोटी बच्ची और उसके माता-पिता को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
  • स्थानीय लोगों ने ड्राइवर की बहादुरी और मानवता की प्रशंसा की।

यह घटना हमें सिखाती है कि आपदा के समय साहस और मानवता से बढ़कर कुछ नहीं होता। JCB ड्राइवर का यह वीरतापूर्ण कार्य लंबे समय तक लोगों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

नाबालिग को बाइक देना पड़ा भारी: कोर्ट ने अभिभावक पर ₹30 हजार का जुर्माना लगाया

भोपाल में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

भोपाल में नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति देना एक अभिभावक को महंगा पड़ गया। गौतम नगर थाना पुलिस ने 17 वर्षीय नाबालिग को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक चलाते हुए पकड़ा। इसके बाद मामला मोटरयान अधिनियम के तहत न्यायालय में पेश किया गया।

अभिभावक ने कोर्ट में स्वीकार किया अपराध

सुनवाई के दौरान वाहन स्वामी एवं अभिभावक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद न्यायालय ने मोटरयान अधिनियम की धारा 5/180 और 199ए के तहत अभिभावक पर ₹30 हजार का अर्थदंड लगाया।

जुर्माने के साथ मिली न्यायालय उठने तक की सजा

कोर्ट ने जुर्माने के अलावा अभिभावक को न्यायालय उठने तक की सजा भी सुनाई। वहीं, निर्धारित जुर्माना जमा होने के बाद जब्त की गई बाइक को छोड़ने के आदेश दिए गए।

भोपाल पुलिस का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए भोपाल पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों के हाथ में वाहन सौंपने वालों के खिलाफ अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर भी लगातार सख्ती बरती जा रही है।

पुलिस की अपील

भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, नाबालिगों को वाहन चलाने के लिए न दें और स्वयं के साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

सरकार की शिक्षा व्यवस्था हाई कोर्ट के कटघरे में!

शिक्षकों के 1.15 लाख से अधिक पद रिक्त, हजारों स्कूल बिना शिक्षक और मूलभूत सुविधाओं के; सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। प्रदेश में स्वीकृत 2.89 लाख शिक्षक पदों में से 1,15,678 पद रिक्त हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक नहीं है।

शिक्षा का बुनियादी ढांचा भी गंभीर संकट से गुजर रहा है। प्रदेश के लगभग 5,000 स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है और 59,000 स्कूलों में कंप्यूटर जैसी आवश्यक डिजिटल सुविधाओं का अभाव है।

इन कमियों का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ा है। पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22.03 लाख विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों के घटते विश्वास को दर्शाती है।

इन्हीं परिस्थितियों को लेकर अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भी सरकार से जवाब तलब किया है। यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र भर्ती, स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँ। प्रदेश के बच्चों का भविष्य केवल प्रचार और घोषणाओं से नहीं, बल्कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेह शासन से सुरक्षित होगा।

देर रात बारिश में नाले में फंसे बुजुर्ग की पुलिस ने बचाई जान, जवान ने जान जोखिम में डालकर किया रेस्क्यू

देर रात बारिश में नाले में फंसे बुजुर्ग की पुलिस ने बचाई जान, जवान ने जान जोखिम में डालकर किया रेस्क्यू

भोपाल: लगातार हो रही बारिश के बीच राजधानी भोपाल में पुलिस की मुस्तैदी ने एक बुजुर्ग की जान बचा ली। हनुमानगंज थाना क्षेत्र में देर रात गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों ने नाले से मदद की आवाज सुनी और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

घटना रात करीब 12 बजे की है। आरक्षक मोहित शिवहरे और राजेंद्र रघुवंशी छोला रोड इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पुट्ठा मिल, अग्रवाल तिराहा के पास नाले से “बचाओ-बचाओ” की आवाज सुनाई दी।

मौके पर पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने देखा कि करीब 60 वर्षीय एक अज्ञात बुजुर्ग सिर में चोट लगने के बाद तेज बहाव वाले नाले में गिर गया था। बुजुर्ग दलदल और तेज पानी के बीच फंसा हुआ था और बाहर निकलने में असमर्थ था।

बिना समय गंवाए एक आरक्षक नाले में उतरा और साथी पुलिसकर्मी की मदद से बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर लाने के बाद पुलिसकर्मियों ने तत्काल सीपीआर देकर उसकी सांसें सामान्य करने की कोशिश की, जिससे उसकी जान बच गई।

इस पूरे रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मियों का साहस और त्वरित कार्रवाई साफ दिखाई दे रही है। लगातार बारिश के बीच पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।

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