मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल को मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। बिल में विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
यूसीसी बिल को कैबिनेट की मंजूरी
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल को मंजूरी दे दी है। अब इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
हलाला पर रोक
तलाक के बाद दोबारा शादी के नाम पर होने वाली हलाला जैसी प्रथा को दंडनीय अपराध माना जाएगा।
लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास अपना बयान दर्ज कराना होगा। दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए, वे पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र हो।
21 वर्ष से कम उम्र वालों की सूचना अभिभावकों को
यदि लिव-इन में रहने वाले किसी भी पार्टनर की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो इसकी जानकारी उनके माता-पिता या अभिभावकों को दी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड संबंधित पुलिस थाने को भी भेजेगा।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को मिलेगा पूरा अधिकार
लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें उत्तराधिकार का पूरा अधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो महिला अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) की मांग कर सकेगी।
नियम तोड़ने पर सजा का प्रावधान
– बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से अधिक लिव-इन में रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक जुर्माना।
– गलत जानकारी देने पर 3 महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना।
– रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी जानकारी नहीं देने पर 6 महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसा कानून लाया जा रहा है, जिसमें राम, रहीम, रवींद्र और रॉबिन सभी को समान अधिकार और समान न्याय मिलेगा।
अब सिर्फ एक ही शादी की अनुमति
प्रस्तावित कानून के तहत सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह की अनुमति होगी।
शादी की उम्र में कोई बदलाव नहीं
विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष ही रहेगी।
मौखिक और तीन तलाक अमान्य
मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायतों के फैसलों के आधार पर तलाक को मान्यता नहीं होगी। विवाह का समापन केवल कानून में निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकेगा।
महिलाओं को नया अधिकार
यदि विवाह के समय पति ने किसी अन्य महिला को गर्भवती किया हो, तो पत्नी विवाह को निरस्त घोषित कराने की मांग कर सकेगी।
शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। शहरी क्षेत्रों में ई-नगर पालिका पोर्टल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, नगर निकाय या पंचायत के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। रजिस्ट्रेशन नहीं होने से विवाह स्वतः अमान्य नहीं होगा, लेकिन नियमानुसार पंजीकरण कराना आवश्यक रहेगा।
