मध्य प्रदेश सरकार के टेंडरों और सौदों की जांच करेगी कांग्रेस, भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेरा

भोपाल। मध्य प्रदेश में विपक्षी दल कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद के कुछ सदस्यों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं और सरकार के कई निर्णयों में पारदर्शिता को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ है।

जीतू पटवारी ने दावा किया कि अब पार्टी सरकार के हर टेंडर और हर बड़े सौदे पर नजर रखेगी। पार्टी का कहना है कि वह एक-एक टेंडर की जांच करेगी और यदि कहीं भी अनियमितता या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें जनता के सामने लाया जाएगा।

जीतू पटवारी   ने कहा कि वह सरकारी योजनाओं, खरीद प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए गए टेंडरों की विस्तृत समीक्षा करेगी। पार्टी के अनुसार, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की परतें खोली जाएंगी और तथ्यों के आधार पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा और राज्य सरकार पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए अपनी कार्यप्रणाली को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बता चुकी है।

राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लगातार सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी।

“हर दो साल में देश बचाने की अपील क्यों? जीतू पटवारी का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला”

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि आखिर देश की स्थिति ऐसी क्यों बन रही है कि हर दो साल में देशवासियों से ‘देश बचाने’ की अपील करनी पड़ती है। पटवारी ने सरकार के कामकाज और राजनीतिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जीतू पटवारी ने कहा कि जिस देश को विश्वगुरु बनाने का दावा किया जा रहा है, वहां बार-बार जनता से देश बचाने की अपील किए जाने की नौबत क्यों आ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार की नीतियां सफल हैं तो फिर लगातार संकट और चेतावनियों का माहौल क्यों बनाया जा रहा है।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मूलभूत मुद्दों से जूझ रही है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रचार में व्यस्त दिखाई देती है। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक मायने:
पटवारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी तेज़ है। हाल के दिनों में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच कई मुद्दों पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं।

अब देखना होगा कि जीतू पटवारी के इस बयान पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श में कितना प्रभाव छोड़ता है। ऐसी ही राजनीतिक खबरों के लिए बने रहिए हमारे साथ।

मोहन भैया को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता को संदेश: “गालियों के जवाब में भी फूल देंगे” जीतू पटवारी 

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की विचारधारा का हवाला देते हुए जीतू पटवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ता को राजनीतिक सौहार्द और प्रेम की राजनीति का संदेश दिया है। जीतू पटवारी ने कहा कि उनके नेता राहुल गांधी ने उन्हें “मोहब्बत की राजनीति” सिखाई है।

अपने संदेश में उन्होंने कहा, “मेरे नेता आदरणीय राहुल गांधी जी ने हमें मोहब्बत की राजनीति सिखाई है। मोहन भैया, आप हमें कितनी भी गालियाँ दे दो, हम फिर भी आपको फूल ही देंगे।”

इस बयान को राजनीतिक मतभेदों के बीच संयम, संवाद और सकारात्मक राजनीति के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पी सी सी अध्यक्ष ने यह भी संकेत दिया कि उनकी राजनीति विरोधियों के प्रति कटुता के बजाय प्रेम और सम्मान पर आधारित है।

 

रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मिले कांग्रेस नेता, पेपर लीक मामले पर उठाए सवाल

रतलाम: कांग्रेस नेता ने रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान छात्रों ने बताया कि परीक्षा रद्द होने और उससे जुड़े विवादों के बाद वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण दोबारा तैयारी करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सहित देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्होंने वर्षों की मेहनत और अपने परिवारों की उम्मीदों के साथ परीक्षा की तैयारी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक प्रकरण ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

पोस्ट में उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस लगातार NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार को घेरती रही है। वहीं, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच की गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

छात्रों का कहना है कि वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी मेहनत और करियर प्रभावित न हो।

दिल्ली की एक मुलाकात से विधानसभा तक मचा सियासी भूचाल, 13 दिन में ऐसे बिखरी TMC

कोलकाता

दिल्ली में ‘संयोगवश’ हुई एक मुलाकात, हस्ताक्षर जालसाजी के आरोप, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर बढ़ता असंतोष और उत्तराधिकार की लड़ाई जैसी महज 13 दिन के भीतर तेजी से घटी इन सिलसिलेवार घटनाओं ने 28 वर्ष पुरानी पार्टी को उसके पहले विभाजन की दहलीज पर ला खड़ा किया। बंग भवन में 22 मई को तृणमूल के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच कथित तौर पर हुई ‘संयोगवश’ मुलाकात से शुरू हुआ घटनाक्रम बुधवार को उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब 58 विधायकों ने पार्टी के विधायक दल पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।

विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया और विधानसभा अध्यक्ष से भी इसकी मान्यता हासिल कर ली। इस बगावत ने औपचारिक रूप से उस पार्टी में विभाजन की रेखा खींच दी, जिसकी स्थापना ममता बनर्जी ने एक जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर की थी। हालांकि, विद्रोह के बीज काफी पहले ही पड़ चुके थे।
हार के बाद उभरने लगी थी कलह

विधानसभा चुनाव में चार मई को भाजपा के हाथों मिली हार के बाद पार्टी के भीतर कलह उभरने लगी थी। पार्टी के कुछ विधायकों को लगने लगा था कि संगठन और निर्णय प्रक्रिया में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे एवं सांसद अभिषेक बनर्जी का दखल लगातार बढ़ रहा है, जिससे असंतोष धीरे-धीरे गहराता चला गया। नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में छह मई को ममता बनर्जी ने कथित तौर पर विधायकों से चुनाव अभियान में अभिषेक बनर्जी की भूमिका के लिए खड़े होकर उनका अभिनंदन करने को कहा। हालांकि इसका उद्देश्य उनके योगदान को स्वीकारना था, लेकिन पार्टी के एक वर्ग में इस कदम को लेकर फुसफुसाहट शुरू हो गई। कुछ विधायकों को लगने लगा कि पार्टी का केंद्र धीरे-धीरे एक ही परिवार के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है।
जहांगीर को अभिषेक ने क्यों नहीं किया निष्कासित?

पार्टी में असंतोष पहली बार खुले तौर पर 19 मई को सामने आया। एक अन्य बैठक में ऋतब्रत बनर्जी और इंटाल्ली के विधायक संदीपन साहा ने सवाल उठाया कि फालटा विधायक जहांगीर खान द्वारा पुन: चुनाव से हटने की सार्वजनिक घोषणा किए जाने के बावजूद पार्टी ने उन्हें निष्कासित क्यों नहीं किया। चूंकि जहांगीर को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था, इसलिए इस आलोचना को व्यापक तौर पर तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव को सीधी चुनौती के रूप में देखा गया।
22 मई को ऋतब्रत ने की शुभेंदु से मुलाकात

वरिष्ठ विधायक कुणाल घोष ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं, हालांकि बाद में उन्होंने खुद को बागी खेमे से अलग कर लिया। घटनाक्रम ने तीन दिन बाद निर्णायक मोड़ लिया। ऋतब्रत बनर्जी राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 22 मई को दिल्ली गए हुए थे तभी वह दोपहर के भोजन के लिए बंग भवन पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से हो गई। इसके बाद ऋतब्रत ने सार्वजनिक रूप से विपक्षी विधायकों और सांसदों को प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में आमंत्रित करने के शुभेंदु अधिकारी के फैसले का स्वागत किया और इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा बताया। उनके इस बयान ने तत्काल राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
पहले से सुलग रहे असंतोष को और हवा दे दी

हालांकि, कुछ ही दिन में तृणमूल एक अलग विवाद में घिर गई। 25 मई को आरोप सामने आए कि विधानसभा में विधायक दल के नेतृत्व ढांचे से जुड़े दस्तावेजों पर कई विधायकों के जाली हस्ताक्षर कर विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए थे। इस आरोप ने पहले से सुलग रहे असंतोष को और हवा दे दी तथा पार्टी के भीतर जारी खींचतान को खुले टकराव में बदल दिया। इस विवाद ने 27 मई को कानूनी मोड़ ले लिया जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से औपचारिक शिकायत कर हस्ताक्षरों की जालसाजी का आरोप लगाया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने मामले को पुलिस के संज्ञान में दिया, जिसके साथ ही अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) की ओर से जांच शुरू हो गई।
अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला

अगले दो दिन के दौरान जब जांचकर्ताओं ने विधायकों से पूछताछ शुरू की, तो मामला महज एक प्रक्रियागत विवाद तक सीमित नहीं रहा बल्कि तेजी से राजनीतिक संघर्ष में बदल गया। यह राजनीतिक सकंट 30 मई को उस समय और गहरा गया, जब अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे के दौरान भीड़ ने हमला कर दिया। यद्यपि सभी राजनीतिक दलों ने इस घटना की निंदा की, लेकिन तृणमूल के कई नेताओं ने निजी तौर पर संगठन और विधायक दल के कुछ वर्गों की अपेक्षाकृत फीकी प्रतिक्रिया पर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, यह नेतृत्व और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के एक हिस्से के बीच बढ़ती दूरी का संकेत था।
ममता की बैठक में पहुंचे कम विधायक

इसके बाद 31 मई तक नेतृत्व की पकड़ कमजोर पड़ती साफ दिखाई देने लगी। ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, लेकिन उसमें अपेक्षा से कम उपस्थिति रही। निर्णायक रूप से विभाजन एक जून को मुख्यमंत्री शुभेंदु द्वारा सार्वजनिक रूप से यह खुलासा किए जाने के कुछ ही घंटे बाद सामने आया कि सीआईडी जांच रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायतों के आधार पर शुरू हुई है। तृणमूल कांग्रेस ने दोनों नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया। लेकिन संकट को थामने के बजाय इस कदम ने बगावत को और तेज कर दिया।
‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’

देखते ही देखते बागी खेमे के भीतर इस मुहिम को एक नाम भी मिल गया-‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’। यह राजनीतिक नाटक बुधवार को चरम पर पहुंच गया जब 58 विधायकों के एक समूह ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुने जाने और नई टीम के गठन की जानकारी दी। विधानसभा अध्यक्ष ने इस दावे को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक विधायक दल के रूप में मान्यता मिल गई। कुछ ही मिनट बाद इन्हीं में से कई विधायक राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई सरकारी समीक्षा बैठक में भी शामिल हुए।
अब तक के इतिहास की सबसे बड़ी दरार

दिल्ली में शुरू हुई यह बगावत, जिसने हस्ताक्षर जालसाजी के आरोपों, संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष और उत्तराधिकार की लड़ाई के सहारे रफ्तार पकड़ी थी, उसका अंतिम और निर्णायक अध्याय आखिरकार विधानसभा के भीतर ही लिखा गया। ममता बनर्जी के व्यक्तित्व और राजनीतिक प्रभुत्व के इर्द-गिर्द खड़ी हुई पार्टी ने महज 13 दिन में अपने अब तक के इतिहास की सबसे बड़ी दरार देखी।

BJP नेता सतर्क रहें, मंत्री स्वपन दासगुप्ता का TMC पर बड़ा हमला; बोले- पुराने पाप धोने की कोशिश

कलकत्ता

तृणमूल कांग्रेस आंतरिक कलह के कारण बिखर रही है. ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी फिसलती हुई दिख रही है. इस बीच सीएम शुभेंदु सरकार में मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपनी ही पार्टी को चेतावनी दी है. स्वपन दास गुप्ता ने टीएमसी के वैसे नेताओं की ओर इशारा किया है जो बीजेपी के करीब आने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि उन्हें यही उम्मीद है कि तोड़-फोड़ करने वालों की राजनीतिक संस्कृति पश्चिम बंगाल BJP को दूषित न करे. उन्होंने कहा है कि वे TMC के विनाश पर कोई भी आंसू नहीं बहा रहे हैं। 

TMC के 58 विधायकों के ऐसे गुट के नेता को प्रतिपक्ष की मान्यता मिल गई है, जिसे ममता बनर्जी का समर्थन प्राप्त नहीं है. इस गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी हैं. स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी है। 

कोलकाता के रासबिहारी से विधायक स्वपन दासगुप्ता ने एक्स पर लिखा, “TMC के आत्म-विनाश पर मैं कोई आंसू नहीं बहा रहा हूं. मेरी एकमात्र आशा यही है कि इन तोड़-फोड़ करने वालों की राजनीतिक संस्कृति पश्चिम बंगाल BJP को दूषित न करे। 

बंगाल बीजेपी को आगाह करते हुए स्वपन दासगुप्ता ने लिखा, “हमें झूठे दोस्तों से हमेशा सावधान रहना होगा जो आज हमारे करीब आ रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने पिछले पाप धोने की जरूरत है। 

मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने लिखा, “बंगाल की शुद्धिकरण प्रक्रिया अधूरी नहीं छोड़ी जा सकती। पत्रकार के रूप में सक्रिय रहने वाले स्वपन दासगुप्ता को सीएम शुभेंदु अधिकारी ने अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है। 

TMC में इतिहास की सबसे बड़ी टूट
3 जून 2026 को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूकंप आया. तृणमूल कांग्रेस के इतिहास में पहली बड़ी टूट हुई. विधानसभा स्पीकर रथींद्रनाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। 

 ऋतब्रत को ममता ने हाल ही में पार्टी से निष्कासित किया था. उन्होंने अपने पास 58 TMC विधायकों का हस्ताक्षर दिखाया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया. स्पीकर ने अभिषेक बनर्जी द्वारा नामित शोभनदेब चट्टोपाध्याय के दावे को खारिज कर दिया। 

ऋतब्रत ने खुद को ‘असली TMC’ का प्रतिनिधि बताया और ममता बनर्जी को मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि वे रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे. उनके गुट में संदीपन साहा, जावेद खान, शिउली साहा समेत कई प्रमुख विधायक शामिल हैं। 

इस घटनाक्रम से TMC में गहरा संकट पैदा हो गया है. ममता-अभिषेक गुट ने सभी पार्टी कमेटियों को भंग कर दिया है। 

 

देश के पहले CM बने डॉ. मोहन यादव, काफिले में शामिल की इलेक्ट्रिक कार; दिया विकसित भारत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक नई पहल करते हुए अपने आधिकारिक काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शामिल कर देशभर में मिसाल पेश की है। इसके साथ ही वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने अपने काफिले में इलेक्ट्रिक कार को जगह दी है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता और पर्यावरण संरक्षण की सोच को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के काफिले में अब महिंद्रा की XEV 9e इलेक्ट्रिक कार शामिल हो गई है। कंपनी के अनुसार यह कार एक बार फुल चार्ज होने पर लगभग 500 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 जून को इस नई इलेक्ट्रिक कार से मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर तक यात्रा की।

इस कार का पंजीयन नंबर MP-02-VB-2047 है। ‘VB’ को ‘विकसित भारत’ और ‘2047’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस इस इलेक्ट्रिक कार में 360 डिग्री कैमरा समेत कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है

पर्यावरण और सौर ऊर्जा पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर्यावरण संरक्षण और सौर ऊर्जा को लेकर लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे विभिन्न योजनाओं और अभियानों के माध्यम से हरित विकास को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के तहत विभिन्न क्षेत्रों में गिद्धों और मगरमच्छों को छोड़े जाने की पहल भी की थी। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के बिना विकास की कल्पना अधूरी है।

सादगी और मितव्ययता की लगातार मिसाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कार्यकाल में सादगी और मितव्ययता को प्राथमिकता देते रहे हैं। हाल ही में इंदौर दौरे के दौरान उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ टेम्पो ट्रैवलर बस में सफर किया था। वहीं सिंगरौली दौरे में भी वे टूरिस्ट बस से कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री काफिले में शामिल वाहनों की संख्या भी कम कर दी है।

मुख्यमंत्री की यह नई पहल न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और विकसित भारत के संकल्प का भी मजबूत संदेश देती है।

अल नीनो के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली। अल नीनो की संभावित परिस्थितियों और दक्षिण-पश्चिम मानसून पर उसके प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में कृषि, मौसम और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों एवं एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

बैठक में मानसून की प्रगति, अल नीनो के संभावित प्रभाव और किसानों के हितों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक की प्रमुख बातें

 अल नीनो की स्थिति पर लगातार निगरानी के निर्देश

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को अल नीनो से जुड़ी परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए।

मानसून की प्रगति पर विशेष फोकस

बैठक में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्तमान स्थिति और उसके संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को मौसम संबंधी अपडेट पर सतत निगरानी रखने को कहा गया।

राज्यों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत की जाए।

त्वरित कार्रवाई की तैयारी

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी रखी जाएं।

किसानों को समय पर सलाह और सहायता

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों तक मौसम और फसल प्रबंधन से संबंधित जरूरी सलाह समय पर पहुंचाई जाए तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

फसलों पर प्रभाव कम करने की रणनीति

बैठक में फसलों पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न वैकल्पिक योजनाओं और प्रबंधन रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया।

विभागों की तैयारियों की समीक्षा

कृषि, मौसम विज्ञान और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों की तैयारियों का आकलन किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वित रूप से कार्य करने और किसी भी संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के निर्देश दिए।

विधायक ट्रॉफी 2026 का भव्य शुभारंभ, 32 टीमें लेंगी हिस्सा

भोपाल, 1 जून। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विधायक ट्रॉफी 2026 का भव्य शुभारंभ आतिशबाजी, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खिलाड़ियों के उत्साह के बीच नेहरू नगर पुलिस ग्राउंड में हुआ। टूर्नामेंट के उद्घाटन अवसर पर करुणाधाम आश्रम के पीठाधीश्वर सुदेश शांडिल्य महाराज, विधायक भगवानदास सबनानी एवं भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यती विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान चालीसा एवं राष्ट्रगान के साथ हुई। इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी ने खिलाड़ियों और दर्शकों का स्वागत करते हुए कहा कि खेल जीवन में अनुशासन, मानसिक विकास, चरित्र निर्माण और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र प्रतिभाओं से समृद्ध है और उनका निरंतर प्रयास क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का है।

विधायक श्री सबनानी ने कहा कि खेल केवल हार-जीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संघर्ष, टीम भावना, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की सीख भी देते हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

नवप्रयास सांस्कृतिक एवं सामाजिक विकास समिति द्वारा आयोजित यह टेनिस बॉल नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट 1 जून से 9 जून तक चलेगा। प्रतियोगिता में 32 टीमें भाग ले रही हैं और मुकाबले नॉकआउट प्रारूप में खेले जाएंगे। फाइनल मैच 9 जून को आयोजित होगा।

उद्घाटन समारोह के बाद डॉक्टर एवं पत्रकारों के बीच एक रोमांचक शो मैच भी खेला गया, जिसने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतिदिन 8 ओवर के 3 से 4 मैच आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

महिलाओं और बच्चों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता, लापरवाही पर होगी कार्रवाई: सीएम डॉ. मोहन यादव

भोपाल, 1 जून। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनभागीदारी और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो तथा पोषण स्तर सुधारने के लिए स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागों के साथ निजी अस्पतालों और संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और अन्य राज्यों में सफल नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें अपनाने की कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि महिला कर्मियों की अधिक संख्या वाले औद्योगिक क्षेत्रों में पीपीपी मॉडल पर वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित किए जा रहे हैं। देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में ऐसे हॉस्टलों का निर्माण शुरू हो चुका है। वहीं संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद, इंदौर, धार सहित विभिन्न स्थानों पर वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।

बाल संरक्षण के क्षेत्र में चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से 51 जिला स्तरीय और एक राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर द्वारा 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता प्रदान की गई है। जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और मैपिंग का कार्य 13 जिलों में जारी है।

9.28 लाख बच्चों की हुई ग्रेजुएशन सेरेमनी

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिससे स्कूलों में उनका सहज प्रवेश सुनिश्चित हुआ। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

इसके अलावा, सक्षम आंगनबाड़ी उन्नयन कार्यक्रम के तहत एक साथ 12,670 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों में उन्नत किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।

लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं का लाभ

समीक्षा में बताया गया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से मई 2026 तक 1.25 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं को 47,775 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15.84 लाख बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई।

मातृ वंदना योजना में देश में अव्वल मध्यप्रदेश

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 15.51 लाख गर्भवती महिलाओं को 798.68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है। इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश पिछले ढाई वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है।

साथ ही प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बीमा योजना का लाभ प्रदान किया गया है। विभिन्न जिलों में पोषण सुधार के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी समीक्षा बैठक में जानकारी प्रस्तुत की गई।

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