यूसीसी बिल: मध्यप्रदेश में अब सिर्फ एक शादी, लिव-इन के लिए भी रजिस्ट्रेशन जरूरी

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल को मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। बिल में विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।

यूसीसी बिल को कैबिनेट की मंजूरी

मध्यप्रदेश कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल को मंजूरी दे दी है। अब इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

हलाला पर रोक

तलाक के बाद दोबारा शादी के नाम पर होने वाली हलाला जैसी प्रथा को दंडनीय अपराध माना जाएगा।

लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास अपना बयान दर्ज कराना होगा। दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए, वे पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र हो।

21 वर्ष से कम उम्र वालों की सूचना अभिभावकों को

यदि लिव-इन में रहने वाले किसी भी पार्टनर की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो इसकी जानकारी उनके माता-पिता या अभिभावकों को दी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड संबंधित पुलिस थाने को भी भेजेगा।

लिव-इन से जन्मे बच्चों को मिलेगा पूरा अधिकार

लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें उत्तराधिकार का पूरा अधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो महिला अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) की मांग कर सकेगी।

नियम तोड़ने पर सजा का प्रावधान

– बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से अधिक लिव-इन में रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक जुर्माना।

– गलत जानकारी देने पर 3 महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना।

– रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी जानकारी नहीं देने पर 6 महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसा कानून लाया जा रहा है, जिसमें राम, रहीम, रवींद्र और रॉबिन सभी को समान अधिकार और समान न्याय मिलेगा।

अब सिर्फ एक ही शादी की अनुमति

प्रस्तावित कानून के तहत सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह की अनुमति होगी।

शादी की उम्र में कोई बदलाव नहीं

विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष ही रहेगी।

मौखिक और तीन तलाक अमान्य

मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायतों के फैसलों के आधार पर तलाक को मान्यता नहीं होगी। विवाह का समापन केवल कानून में निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकेगा।

महिलाओं को नया अधिकार

यदि विवाह के समय पति ने किसी अन्य महिला को गर्भवती किया हो, तो पत्नी विवाह को निरस्त घोषित कराने की मांग कर सकेगी।

शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। शहरी क्षेत्रों में ई-नगर पालिका पोर्टल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, नगर निकाय या पंचायत के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। रजिस्ट्रेशन नहीं होने से विवाह स्वतः अमान्य नहीं होगा, लेकिन नियमानुसार पंजीकरण कराना आवश्यक रहेगा।

स्लीमनाबाद टनल से बदलेगी विंध्य-महाकौशल की तस्वीर, 1450 गांवों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1600 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना का किया निरीक्षण, सरकार का दावा—2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि होगी सिंचित।

मध्य प्रदेश के विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के किसानों के लिए स्लीमनाबाद टनल परियोजना बड़ी सौगात साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले के स्लीमनाबाद में निर्माणाधीन करीब 1600 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को गुणवत्ता एवं समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

परियोजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने इसे पूर्व प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने वाला कदम बताया है। पार्टी का दावा है कि टनल के पूरा होने के बाद नर्मदा का पानी विंध्य के उन इलाकों तक पहुंचेगा, जहां वर्षों से पानी की कमी बनी रही है। इससे लगभग 1450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होने की संभावना है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। उनका कहना है कि सिंचाई सुविधाएं बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी।

मुख्यमंत्री के निरीक्षण को लेकर सरकार का कहना है कि परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग से निर्माण कार्य तय समय पर पूरा होगा और इसका लाभ जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचेगा। सरकार इसे ‘किसान कल्याण’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है।

हालांकि, परियोजना के सभी दावों और लाभों का वास्तविक आकलन इसके पूर्ण होने और संचालन शुरू होने के बाद ही संभव होगा। फिलहाल क्षेत्र के किसान इस परियोजना के जल्द पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

भोपाल में UCC को लेकर सियासी संदेश वाले होर्डिंग, सीएम के बयान को बनाया प्रचार का आधार

मालवीय नगर सहित शहर के कई प्रमुख स्थानों पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने लगाए होर्डिंग। मुख्यमंत्री के बयान ‘राम एक शादी करेगा तो रहीम भी एक ही शादी करेगा’ को प्रमुखता दी गई। UCC को लेकर सरकार की पहल का जताया आभार।

भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर सियासी माहौल गर्म होता नजर आ रहा है। शहर के कई प्रमुख स्थानों पर विधायक रामेश्वर शर्मा की ओर से होर्डिंग लगाए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के उस बयान को प्रमुखता से जगह दी गई है, जिसमें कहा गया था— “राम एक शादी करेगा तो रहीम भी एक ही शादी करेगा।”

ये होर्डिंग मालवीय नगर स्थित विधायक कार्यालय सहित भोपाल के विभिन्न प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं। इनके माध्यम से केंद्र सरकार और मध्यप्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया गया है।

गौरतलब है कि UCC को लेकर सरकार की तैयारियां तेज हैं। जानकारी के मुताबिक, भोपाल के जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट बैठक के एजेंडे में समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि इसी मानसून सत्र में UCC को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ सकती है।

हालांकि, UCC को लेकर अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। इस बीच, राजधानी भोपाल में लगे ये होर्डिंग इस मुद्दे को लेकर सियासी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान: उत्तर प्रदेश बन रहा है निवेश और उद्योग का नया केंद्र

इंटरनेशनल फिल्म सिटी, अपैरल पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी परियोजनाओं से प्रदेश को मिलेगी नई पहचान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य तेज़ी से औद्योगिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इंटरनेशनल फिल्म सिटी, अपैरल पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, जो निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे को नई गति देंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थापित करना है। सरकार आधुनिक उद्योगों, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल वातावरण के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर एवं विकसित राज्य बनने की दिशा में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगा।

भोपाल: राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पास रखा प्रभार

मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला, लखन पटेल अब सिर्फ आनंद विभाग संभालेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास अब 11 विभागों की जिम्मेदारी।

भोपाल | विशेष रिपोर्ट

मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार वापस ले लिया है। सरकार के आदेश के अनुसार अब यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास रहेगा। इस फैसले के बाद लखन पटेल अब केवल आनंद विभाग के मंत्री रहेंगे।

MP Cabinet News: लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस, CM मोहन यादव के पास अब 11 विभाग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास अब कुल 11 विभागों की जिम्मेदारी हो गई है। इनमें सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय और पशुपालन एवं डेयरी विभाग शामिल हैं।

सरकार की ओर से जारी आदेश में विभागीय फेरबदल की जानकारी दी गई है। हालांकि, राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस लेने के पीछे की आधिकारिक वजह फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार की ओर से इस बदलाव को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है।

मुख्य बातें

राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिया गया।

अब लखन पटेल के पास केवल आनंद विभाग रहेगा।

पशुपालन विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास।

मुख्यमंत्री अब कुल 11 विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं।

विभागीय बदलाव की आधिकारिक वजह फिलहाल सामने नहीं आई।

मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला। राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिया गया। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास 11 विभागों का प्रभार है। पढ़ें पूरी खबर।

एलएलएम की पढ़ाई के लिए विधायक कमलेश्वर डोडियार ने 10 माह का वेतन-भत्ता छोड़ने का लिया फैसला

विधानसभा अध्यक्ष सहित कई मंत्रियों और अधिकारियों को लिखा पत्र, कहा— पढ़ाई के साथ विधानसभा और क्षेत्र की जिम्मेदारियां भी निभाऊंगा

सैलाना। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) में एलएलएम (पोस्ट ग्रेजुएट) की पढ़ाई के दौरान करीब 10 माह तक विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ता स्वेच्छा से नहीं लेने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में विधायक डोडियार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, संसदीय कार्य मंत्री, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, जनजातीय कार्य मंत्री, मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव तथा विधानसभा के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि 20 जुलाई 2026 से 15 मई 2027 तक उन्हें देय विधायक वेतन एवं भत्तों का भुगतान स्थगित किया जाए।

अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि वे 20 जुलाई 2026 से नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल में एक वर्षीय एलएलएम कोर्स की नियमित पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल रहेंगे। इसलिए उन्होंने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से वेतन-भत्ते नहीं लेने का निर्णय लिया है। भविष्य में आवश्यकता होने पर वे इसके लिए अलग से आवेदन प्रस्तुत करेंगे।

विधायक डोडियार ने स्पष्ट किया कि पढ़ाई के दौरान भी वे विधानसभा सत्रों में प्राथमिकता से उपस्थित रहेंगे और जनता के हितों से जुड़े मुद्दे उठाने के साथ अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे विधानसभा क्षेत्र में सरकारी कार्यक्रमों, जनसुनवाई और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए शासन-प्रशासन से नियमित संपर्क बनाए रखेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 10 माह तक वे स्वयं के खर्च पर विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे तथा जनता के बीच रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। उनका कहना है कि वे अध्ययन और जनप्रतिनिधि के दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए दोनों जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे।

तमिलनाडु में ऑपरेशन L तेज, AIADMK के 10 विधायक जल्द TVK में शामिल होंगे।

नई दिल्ली
तमिलनाडु की राजनीति में इस समय एक बड़ा सियासी भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्रि कड़गम (TVK) बहुमत के करीब पहुंचती दिख रही है। खबर आ रही है कि मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) के करीब 10 और असंतुष्ट विधायक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर 15 अगस्त से पहले औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो सकते हैं। विजय की पार्टी के भीतर इस योजना को ऑपरेशन एल (Operation L) का नाम दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि विधायकों के इस्तीफे की यह टाइमिंग बेहद सोच-समझकर तय की गई है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग जल्द ही विधानसभा उपचुनावों का ऐलान कर सकता है। वार्ता में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “इस्तीफे और दलबदल की यह पूरी प्रक्रिया स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरी कर ली जाएगी। मुख्य उद्देश्य यह है कि चुनाव आयोग द्वारा उपचुनावों की तारीखों की घोषणा करने से पहले इसे अंतिम रूप दे दिया जाए।”

यह राजनीतिक उठापटक पिछले कुछ हफ्तों से लगातार जारी है। मई महीने में जिन 25 AIADMK विधायकों ने अपनी ही पार्टी के व्हिप का उल्लंघन कर सरकार बनाने के लिए विजय का समर्थन किया था, उनमें से लगभग आधे या तो TVK का दामन थाम चुके हैं या शामिल होने की कगार पर हैं।

तमिलनाडु में क्या है सीटों का गणित
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा की वर्तमान में 227 विधायकों की क्षमता है। 7 सीटें फिलहाल खाली हैं। सत्तारूढ़ TVK के 107 विधायक हैं। वहीं, विपक्षी AIADMK में लगातार इस्तीफों के कारण घटकर विधायकों की संख्या 41 हो गई है। हाल ही में एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर और एम. आर. विजयभास्कर ने अपने पद से इस्तीफा देकर TVK की सदस्यता ली थी। इनके अलावा पूर्व मंत्री एम.एस.एम. आनंदन, एस. वलारमथी और कई पूर्व विधायक व जिला स्तरीय पदाधिकारी भी पाला बदल चुके हैं। इससे विपक्ष लगातार कमजोर हो रहा है और सत्तारूढ़ दल बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है।

सूत्रों का दावा है कि बागी विधायकों के अगले जत्थे में एआईएडीएमके के सबसे बड़े और प्रभावशाली क्षेत्रीय क्षत्रप माने जाने वाले एस. पी. वेलुमणि और सी. वी. शनमुगम के करीबी नेता शामिल हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक ये दोनों दिग्गज नेता खुद भी टीवीके में शामिल हो सकते हैं।

कैबिनेट मंत्री पद और टिकट का भरोसा
इस्तीफा देने वाले विधायकों को आगामी उपचुनावों में TVK के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा। वरिष्ठ नेताओं से वादा किया गया है कि दोबारा जीतकर आने पर उन्हें विजय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का पद सौंपा जाएगा। अन्य नेताओं को संगठन में जिला सचिव या राज्य स्तर पर पदाधिकारी बनाकर समायोजित किया जाएगा।

पलानीस्वामी पर तानाशाही के आरोप
पाला बदलने की तैयारी कर रहे एआईएडीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने आंतरिक कलह को उजागर करते हुए कहा कि यह कदम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि सालों की हताशा का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया, “पलानीस्वामी यानी कि EPS अपने आखिरी दिन तक पार्टी के महासचिव बने रहना चाहते हैं। जिला सचिव का पद छिन जाने के बाद भी हम में से कई लोगों ने इंतजार किया, लेकिन संकट को सुलझाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं हुआ।” एआईएडीएमके द्वारा वेलुमणि जैसे बड़े नेताओं के वफादार जिला सचिवों को हटाए जाने के कारण पार्टी के भीतर असंतोष की आग और भड़क गई थी।

वाशिंग मशीन से तुलना
इस पूरे दलबदल पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस खेल के पीछे भारी-भरकम वित्तीय प्रलोभन यानी कि हॉर्स-ट्रेडिंग शामिल है। इसके अलावा डीएमके (DMK) के नेताओं ने तंज कसते हुए इसे पॉलिटिकल वाशिंग मशीन करार दिया है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच का सामना कर रहे पूर्व मंत्रियों जैसे कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सी. विजयभास्कर को बचाने के लिए यह सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है। हालांकि, टीवीके ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कानूनी जांच अपनी जगह स्वतंत्र रूप से चलती रहेगी

इस बार मुख्यमंत्री विजय की रणनीति अन्य राजनीतिक दलों से काफी अलग है। वे थोक में दलबदल कराने के बजाय चरणों में नेताओं को शामिल कर रहे हैं। साथ ही वे इस बात पर अड़े हैं कि किसी भी विपक्षी विधायक को पार्टी के सिंबल पर रहते हुए शामिल नहीं किया जाएगा। उन्हें पहले इस्तीफा देना होगा और फिर उपचुनावों के जरिए जनता के बीच जाकर नया जनादेश हासिल करना होगा।

चुनाव के बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में कम से कम 5 बड़े एआईएडीएमके चेहरों को जगह मिल सकती है। इस कदम से मुख्यमंत्री विजय न केवल सहयोगियों पर अपनी निर्भरता कम करेंगे, बल्कि राज्य के जमीनी स्तर पर मजबूत विपक्षी चुनावी मशीनरी को अपनी नई नवेली पार्टी में समाहित कर लेंगे

उद्धव कैंप में बगावत की अटकलों के बीच दिल्ली की गुप्त बैठक की तस्वीरें वायरल

मुंबई 

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ और गुप्त मुलाकातों के दौर की यादें ताजा हो गई हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT गुट के जिन 6 लोकसभा सांसदों ने पिछले महीने पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थामा था, अब उनकी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ हुई एक ‘अघोषित बैठक’ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आ गई हैं।

इन तस्वीरों के सामने आने के बाद शिवसेना (UBT) को लगे इस सबसे बड़े झटके की इनसाइड स्टोरी और पुख्ता हो गई है, जिसे शिंदे गुट ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया था।

क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’ और दिल्ली में क्या हुआ?
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बेहद गुपचुप तरीके से महीनों से बुना जा रहा था, जिसका क्लाइमेक्स दिल्ली में देखने को मिला। सामने आई तस्वीरें 17 जून की उस सुबह की गवाही दे रही हैं जब इन सांसदों ने दिल्ली में पाला बदला।

    तड़के 6:30 बजे की हलचल: बागी सांसद ओमराजे निंबालकर सुबह करीब 6:30 बजे ही सबसे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दिल्ली आवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने दलबदल के कागजातों पर दस्तखत किए और तुरंत महाराष्ट्र के लिए रवाना हो गए।

    होटल लीला में जमावड़ा: बाकी के 5 सांसद- संजय दिना पाटील, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर और भाऊसाहेब वाकचौरे सुबह करीब 7:30 बजे दिल्ली के आलीशान होटल लीला पहुंचे। इनके साथ ही शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे और महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक भी अलग-अलग रास्तों से वहां पहुंचे ताकि किसी को भनक न लगे।

    अध्यक्ष के गार्डन में हस्ताक्षर: सुबह करीब 9:30 बजे यह पूरा ग्रुप ओम बिरला के घर पहुंचा, जहां बाकी सांसदों ने भी अलग गुट के रूप में मान्यता देने के लिए दस्तखत किए। वायरल तस्वीरों में ये पांचों सांसद लोकसभा अध्यक्ष के लॉन में एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

बगावत के पीछे सांसदों ने क्या दी दलील?
इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे पत्र में दावा किया कि वे यह कदम उठाने पर इसलिए मजबूर हुए क्योंकि उद्धव ठाकरे अपनी शिवसेना (UBT) का विलय कांग्रेस पार्टी में करने की योजना बना रहे थे, जो सांसदों और शिवसेना की मूल विचारधारा के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य था।

सांसदों ने यह भी सुनिश्चित किया कि उनके पास दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए आवश्यक दो-तिहाई संख्या बल (9 में से 6 सांसद) मौजूद है।

हमने चौका नहीं, सीधा छक्का मारा है: एकनाथ शिंदे
सांसदों के आधिकारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के सफल होने का एलान किया। इन सांसदों को जमीन से जुड़े “धुरंधर और शेर” बताते हुए शिंदे ने 2022 की अपनी ऐतिहासिक बगावत की यादें ताजा कीं।

उन्होंने कहा, “चार साल पहले (जून 2022) जब हमने शिवसेना के भीतर विद्रोह किया था, तब हमारे साथ 40 विधायक थे। उस समय हमने चौका मारा था। लेकिन इस बार, हमने चौका नहीं बल्कि सीधा छक्का (सिक्सर) मारा है। ये छह शेर अब अपनी असली शिवसेना फैमिली में वापस आ गए हैं।”

इस बड़े सियासी उलटफेर ने उद्धव ठाकरे खेमे को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। जहां उद्धव गुट इन सांसदों की वैधता पर सवाल उठा रहा है और कानूनी कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं इन ताजा तस्वीरों ने साफ कर दिया है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ की स्क्रिप्ट बेहद चालाकी और पुख्ता तैयारी के साथ लिखी गई थी।

दतिया टिकट विवाद पर कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान, बोले- आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीतेंगे

इंदौर 

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सामने आई नाराजगी पर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा में लोकतांत्रिक व्यवस्था है और कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि संगठन कार्यकर्ताओं से चर्चा कर सभी मतभेद दूर करेगा और आशुतोष तिवारी भारी मतों से चुनाव जीतेंगे।

विजयवर्गीय ने कहा कि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी भाजपा के लिए कोई असामान्य स्थिति नहीं है। पार्टी सभी कार्यकर्ताओं से संवाद करेगी और संगठन के निर्णय का सम्मान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा हर फैसला पूरी प्रक्रिया और विचार-विमर्श के बाद लेती है तथा पार्टी का निर्णय सभी के लिए सर्वोपरि होता है।

‘नरोत्तम मिश्रा पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता’
कैलाश विजयवर्गीय ने नरोत्तम मिश्रा की सराहना करते हुए कहा कि वे भाजपा के वरिष्ठ और समर्पित नेता हैं तथा पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी नरोत्तम मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर हजारों कार्यकर्ता चुनाव लड़ने की तैयारी करते हैं, लेकिन उम्मीदवार का चयन संगठन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है। टिकट घोषित होने के बाद उसे बदलने की परंपरा भाजपा में नहीं रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं लगता कि दतिया का टिकट बदला जाएगा। उनके अनुसार आशुतोष तिवारी पूर्व संगठन मंत्री रह चुके हैं और पार्टी के मजबूत कार्यकर्ता हैं।

कौन हैं नरोत्तम मिश्रा जिनके लिए हुआ बवाल
डबरा क्षेत्र से दतिया तक 33 साल का सियासी सफर रहा है नरोत्तम मिश्रा का। क्षेत्र में उन्हें दादा कहकर संबोधित किया जाता है। 15 अप्रैल 1960 में ग्वालियर में जन्मे नरोत्तम मिश्र के राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा युवा मोर्चा से हुई थी। 1998 में नरोत्तम मिश्रा जीवाजी यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर ग्वालियर स्टूडेंट यूनियन के सेक्रेटरी बन गए थे। डबरा से पहला चुनाव लड़ा और 1990 में पहली बार विधायक बने। वहीं 1998 और 2003 में इसी सीट से जीत दर्ज की। परिसीमन के बाद डबरा सुरक्षित सीट घोषित हो गई थी। इसलिए नरोत्तम ने दतिया का रुख किया। नरोत्तम 2008 में दतिया से चुने गए और यह सिलसिला 2018 तक जारी रहा। इसके बाद बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री रहे।

2023 में हार गए थे चुनाव
2023 में नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस के राजेंद्र भारती से महज 7 हजार वोटों के अंतर से हार गए थे। राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा की पुरानी प्रतिद्वंदिता के चलते यह सीट प्रतिष्ठा की सीट बन गई थी। हाल ही में कांग्रेस विधायक रहते हुए राजेंद्र भारती को बैंक के एक मामले में सजा हो गई। इसके बाद उनकी विधायकी खत्म हो गई थी। उसी के कारण दतिया में उपचुनाव हो रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा ने कुछ दिन पहले ही नामांकन फार्म खरीद लिया था और नरोत्तम के साथ ही सभी यह मानकर चल रहे थे कि वे ही यहां से उम्मीदवार बनाए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी का फैसला कुछ अलग ही रहा। वहां से पूर्व हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। जिसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शुक्रवार शाम से ही हंगामा शुरू कर दिया था।

जीतू पटवारी के भाई के ड्रग्स मामले पर कांग्रेस पर निशाना
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई द्वारा पूर्व में ड्रग्स लेने की बात स्वीकार किए जाने के मुद्दे पर भी कैलाश विजयवर्गीय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने घर की स्थिति भी देखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी के भाई ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह पहले ड्रग्स का सेवन करते थे और अब शराब भी नहीं पीते। विजयवर्गीय ने कहा कि यह उनका निजी मामला है, लेकिन जब स्वयं स्वीकारोक्ति हो चुकी है तो इस पर अधिक कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है।

साइकिल यात्रा पर भी साधा निशाना
जीतू पटवारी की प्रस्तावित साइकिल यात्रा पर टिप्पणी करते हुए विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि इससे पहले राहुल गांधी ने भी लंबी यात्राएं निकाली थीं, लेकिन उससे देश की राजनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के शीर्ष नेता की यात्रा से कोई विशेष बदलाव नहीं आया, तो जीतू पटवारी की साइकिल यात्रा से भी कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है।

दतिया में बीजेपी में बगावत: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, आशुतोष तिवारी उम्मीदवार घोषित, सड़क पर उतरे समर्थक

हजारों कार्यकर्ताओं ने हाईवे जाम किया, बाजार रहे बंद; जिलाध्यक्ष समेत पदाधिकारियों और पार्षदों के इस्तीफे का दावा, समर्थकों ने लगाए सरकार विरोधी नारे।

मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। टिकट घोषित होने के बाद आशुतोष तिवारी ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को अपना अभिभावक बताते हुए उनके मार्गदर्शन में चुनाव लड़ने की बात कही

वहीं, डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में विरोध तेज हो गया। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता जिला कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। विरोध के चलते शहर के कई बाजार भी बंद रहे।

इस बीच यह भी दावा किया जा रहा है कि भाजपा के जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित कई पदाधिकारियों और सभी भाजपा पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। साथ ही, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ नारेबाजी किए जाने की भी खबर सामने आई है।हालांकि, इस्तीफों, विरोध-प्रदर्शन और अन्य दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पार्टी नेतृत्व की ओर से होना अभी बाकी है। दतिया उपचुनाव में टिकट बदलने के फैसले के बाद भाजपा के भीतर असंतोष खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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