इंदौर में अपार्टमेंट के शोरूम में लगी भीषण आग, ऊपर फंसे 6 परिवारों को पड़ोसियों ने बचाया

इंदौर

इंदौर की स्कीम-136 के एक अपार्टमेंट की तल मंजिल के इलेक्ट्रिक वाहन के शोरूम में आग लग गई। अपार्टमेंट के ऊपर दो मंजिल पर छह परिवार रहते हैं। आग के कारण वे सीढ़ियों से नीचे नहीं आ पा रहे थे। इस कारण उन्हें आसपास के लोगों ने सीढ़ी और रस्सी की मदद से सुरक्षित निकाला। आग लगने की घटना सुबह सवा आठ बजे हुई। तब शोरूम नहीं खुला था। आग के कारण शोरूम में रखे सभी दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। जानकारी मिलने के बाद मौके पर पुलिस जवान भी पहुंचे और उन्होंने भी आग में फंसे परिवारों को निकालने में मदद की।  धुआं फ्लैट में घुसा तो खुली नींद
सुबह जब आग लगी, तब फ्लैट में परिवार के कई सदस्य सो रहे थे। जैसे ही फ्लैट में धुआं घुसा तो रहवासियों की नींद खुली और वे जाग गए। नीचे देखा तो शोरूम जल रहा था और नीचे उतरने की जगह भी नहीं थी।

अपार्टमेंट से सटी एक अन्य मल्टी में रहने वाले रहवासी आग में फंसे परिवारों की मदद के लिए आए। बचाव के लिए आए रहवासियों ने बीस से ज्यादा लोगों को छत पर आने के लिए कहा। इस बीच उन्होंने अपने घरों से रस्सी और सीढ़ी लाकर मुंडेर पर लगा दी। एक-एक कर परिवारों को सुरक्षित निकाला, हालांकि आग फ्लैट वाले हिस्से तक नहीं पहुंच पाई। इस कारण परिवारों की गृहस्थी का सामान भी सुरक्षित रहा।

रहवासी श्याम दुबे ने बताया कि हमने धुआं देखा तो तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। इस बीच रहवासी खुद बचाव कार्य में जुट गए और 20 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला। पुलिसकर्मी नरेंद्र मंडेलिया भी मौके पर आ गए थे और उन्होंने भी कई लोगों को आग से सुरक्षित निकाला। आग लगने की वजह पता नहीं चल पाई है। 

नगरीय विकास एवं आवास विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति: वित्तीय अनियमितताओं और कर्तव्यहीनता पर कार्यवाही

नगरीय विकास एवं आवास विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति: वित्तीय अनियमितताओं और कर्तव्यहीनता पर कार्यवाही

आयुक्त भोंडवे द्वारा विभिन्न नगरीय निकायों के अधिकारियों-कर्मचारियों पर पदावनति, वेतनवृद्धि रोकने एवं पेंशन कटौती की गई कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई

भोपाल

राज्य शासन के जनहितैषी संकल्पों के अनुरूप नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शासकीय कार्यों में शुचिता, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत कड़े कदम उठाए हैं। आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा विभिन्न नगरीय निकायों में लंबे समय से लंबित जांच प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के पश्चात दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अत्यंत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के अंतर्गत वित्तीय अनियमितताओं, निर्माण कार्यों में लापरवाही, शासकीय भूमि एवं राजस्व के गबन तथा कोरोना काल में सामग्री क्रय में बरती गई शिथिलता को अक्षम्य मानते हुए संबंधितों को कड़ा दंड दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता के पैसे का दुरुपयोग और शासकीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।

प्रशासनिक स्तर पर की गई इस कार्रवाई के अंतर्गत नगर परिषद नगौद में स्टॉप डेम निर्माण कार्य में गंभीर विसंगतियां पाए जाने पर तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी संजय पाण्डेय को प्रथम दृष्टया उत्तरदायी ठहराते हुए ‘परिनिंदा’ से दंडित किया गया है, जिसके फलस्वरूप वे आगामी एक वर्ष तक पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। इसी प्रकार, नगर परिषद जैतहरी (जिला अनूपपुर) में वैश्विक महामारी कोरोना के लॉकडाउन काल में सामग्री क्रय में वित्तीय नियमों की अवहेलना करने पर तत्कालीन भंडार प्रभारी मोहित शर्मा, तत्कालीन प्रभारी मुख्य लिपिक सह लेखपाल रजनीश लहंगीर तथा तत्कालीन स्वच्छता प्रभारी संजीव राठौर की चार-चार वार्षिक वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। जैतहरी में ही शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की भूमि एवं आय को क्षति पहुंचाने के कृत्य में संलिप्तता सिद्ध होने पर राजस्व निरीक्षक अवधेश बीझी तथा प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी भूपेंद्र सिंह की आगामी दो-दो वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकी गई हैं।

शासकीय सेवा से निवृत्त हो चुके कर्मियों की जवाबदेही तय करते हुए विभाग ने नगर परिषद जैतहरी के तत्कालीन प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम मिलन तिवारी को भूमि संबंधी गड़बड़ियों में दोषी पाते हुए उनकी देय पेंशन से 10 प्रतिशत तथा कोरोना काल की अन्य अनियमितता के लिए 20 प्रतिशत राशि की स्थायी रूप से कटौती करने की गंभीर कार्रवाई की है। इसके अतिरिक्त, नगर परिषद पिपलौदा में नीलामी प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय विसंगतियों हेतु प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी अरुण पाठक की तीन वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकी गई हैं। नगर पालिका परिषद शहडोल में मोहनराम मंदिर तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य में लापरवाही बरतने के कारण उपयंत्री देव कुमार गुप्ता एवं तत्कालीन सहायक यंत्री बृजेन्द्र प्रसाद शर्मा की आगामी तीन-तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकी गई हैं। इसी श्रृंखला में, तालाब संरक्षण योजना के तहत नगर पालिका परिषद धार के देवीसागर तालाब निर्माण में शिथिलता के लिए तत्कालीन उपयंत्री सुधीर ठाकुर एवं सहायक यंत्री देवेन्द्र कोल की एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी गई है।

प्रशासनिक अनुशासन की अवहेलना करने पर सोयतकलां नगर परिषद (जिला आगर मालवा) के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अशोक कुमार पांचाल द्वारा माधव चौक स्थित भूखंड मामले में शासन को 9 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाने पर उन्हें राजस्व निरीक्षक के पद से पदावनत (Demote) कर उप राजस्व निरीक्षक बना दिया गया है। साथ ही, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास के यांत्रिकी प्रकोष्ठ में सहायक वर्ग-2 के पद पर पदस्थ शेखर ठाकुर को दीर्घकालिक अनाधिकृत अनुपस्थिति और गंभीर अनुशासनहीनता के कारण तत्काल प्रभाव से अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान की गई है। आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा है कि शासकीय दायित्वों के निर्वहन में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार अथवा शिथिलता को कतई सहन नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी जनहित में दोषियों के विरुद्ध ऐसी दंडात्मक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

 

राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन पर जताया भरोसा, BJP ने तरुण चुग-रजनीश अग्रवाल को उतारा

भोपाल 

राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया गया है. इस फैसले के साथ ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार दो मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को दोबारा मौका नहीं दिया गया. पार्टी ने अन्य राज्यों में भी कई अहम नामों की घोषणा की है. मध्य प्रदेश में दो सीटों पर उम्मीदवार उतारकर बीजेपी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है, जिसके चलते क्रॉस वोटिंग की भी संभावना पर नजर रखी जा रही है। 

MP से दो उम्मीदवार, चुनाव होगा दिलचस्प
बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को टिकट दिया है. दोनों उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से यहां चुनाव होना तय माना जा रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर नजर बढ़ गई है। 

केंद्रीय मंत्रियों को नहीं मिला मौका
इस बार पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कूरियन को राज्यसभा नहीं भेजा है. दोनों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है, लेकिन नए सिरे से उन्हें मौका नहीं दिया गया. इस फैसले को भविष्य के राजनीतिक बदलावों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

तरुण चुग: संगठन के मजबूत रणनीतिकार
तरुण चुग वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी के
अनुभवी संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. पंजाब के अमृतसर से आने वाले चुग ने आरएसएस से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम किया है. वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी भूमिका निभा चुके हैं और कई राज्यों में संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

तरुण चुग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव हैं. वे पार्टी के संगठनात्मक रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं और कई राज्यों में चुनावी प्रबंधन व संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. तरुण चुग ने बेहद कम उम्र (लगभग 9 वर्ष) में RSS से जुड़कर सामाजिक कार्यों की शुरुआत की। 

इसके बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई.

    1989–1994: ABVP में जिला सचिव और राज्य कार्यकारिणी सदस्य
    1993: अमृतसर में BJYM (भारतीय जनता युवा मोर्चा) के जिला अध्यक्ष बने

तरुण चुग ने युवा राजनीति से अपने करियर को मजबूती दी और धीरे-धीरे संगठन में बड़े पदों तक पहुंचे

    1997: पंजाब BJP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष
    राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य (BJYM)
    राज्य महासचिव (युवा मोर्चा)

उन्होंने युवाओं को जोड़ने के लिए “युवा चेतना यात्रा” का नेतृत्व किया, जो 2100 किमी लंबी थी। 

BJP संगठन में प्रमुख पद

तरुण चुग संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं:

    प्रदेश भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ संयोजक
    राज्य मीडिया एवं प्रशिक्षण प्रकोष्ठ प्रभारी
    राज्य भाजपा सचिव
    पंजाब भाजपा महासचिव
    राष्ट्रीय महासचिव (वर्तमान)

जिम्मेदारियां और क्षेत्रीय प्रभारी

तरुण चुग को पार्टी ने कई महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है:

    जम्मू-कश्मीर प्रभारी
    लद्दाख प्रभारी
    तेलंगाना प्रभारी
    अंडमान-निकोबार प्रभारी
    दिल्ली भाजपा सह-प्रभारी

राजनीतिक महत्व

वे चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन और संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाते हैं. तरुण चुग का राज्यसभा के लिए चयन कई कारणों से अहम माना जा रहा है. इसे संगठन को महत्व देने के संकेत के साथ-साथ पंजाब और उत्तर भारत में राजनीतिक संतुलन और भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। 

रजनीश अग्रवाल को भी मिला मौका
रजनीश अग्रवाल, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश बीजेपी में प्रदेश मंत्री हैं, को भी राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है. उनकी नियुक्ति को प्रदेश संगठन में सक्रिय भूमिका और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है। 

अन्य राज्यों में भी बड़े नाम
बीजेपी ने अन्य राज्यों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा की है. राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजा जा रहा है. मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट दिया गया है, जबकि ओडिशा में देबाशीष सामंतराय को उम्मीदवार बनाया गया है, जो पहले बीजेडी से जुड़े थे। 

गुजरात में बीजेपी मजबूत स्थिति में
गुजरात में बीजेपी ने चारों सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है. यह पहली बार होगा जब गुजरात से कांग्रेस का कोई भी राज्यसभा सदस्य नहीं होगा। 

पंजाब राजनीति से जुड़ा फैसला
रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा में अवसर नहीं मिलने से यह संकेत मिल रहा है कि वे पंजाब विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि वे पंजाब लौटकर राजनीति में सक्रिय होंगे। 

मंत्रीमंडल फेरबदल के संकेत
दो केंद्रीय मंत्रियों को राज्यसभा टिकट न मिलने और “एक व्यक्ति, एक पद” की नीति को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि केंद्र सरकार में जल्द फेरबदल हो सकता है. कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। 

बीजेपी की रणनीतिक चाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इस सूची के माध्यम से संगठन और नेतृत्व के संतुलन को ध्यान में रखा है. अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को मौका देकर पार्टी ने भविष्य की रणनीति तैयार की है। 

राज्यसभा चुनाव पर सभी की नजर
अब सभी की नजर राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई है, जहां क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं. मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में यह चुनाव आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम को दिशा दे सकता है। 

मॉनसून में निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश, बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे कार्मिक

मॉनसून में उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के सभी प्रबंध करें

अनुमति उपरांत ही मुख्यालय छोड़ें कार्मिक

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों में विद्युत आपूर्ति और ऑपरेशन एंड मेन्टीनेंस से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नियंत्रणकर्ता अधिकारी से अनुमति लेकर ही कार्यस्थल / मुख्यालय छोड़ें। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि प्री-मॉनसून बारिश की बौछारें शुरू हो गईं हैं और अनेक बार आँधी और चक्रवाती तूफान और प्राकृतिक आपदा को देखते हुए कंपनी के मैदानी अफसरों से कहा गया है कि वे विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें। कोई कार्मिक अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। कंपनी ने कहा है कि गत वर्षों में पूरे जून माह की शिकायतों के आकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने सभी मैदानी कार्मिकों को उपभोक्ताओं को अनवरत् और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में विद्युत आपूर्ति बहाल रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। किसी भी आकस्मिक स्थिति में उपभोक्ता कंपनी के कॉल सेन्टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं। 

मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाइनमैनों के मोबाइल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखी जाए। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाये रखें।

बारिश के दौरान इन बातों का रखे ध्यान

मॉनसूनी मौसम के दौरान हवा में नमी के कारण करंट लगने की आशंका ज्यादा रहती है। करंट से लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन ज्यादातर मौतों को टाला जा सकता है। ज्यादातर मौतें घरों में अर्थिंग नहीं होने या कमजोर अर्थिंग की वजह से होती है। अर्थिंग या तो स्थानीय स्रोत से प्राप्त की जा सकती है या घर पर ही गहरा गढ़डा खोदकर खुद बनाई जा सकती है।

    बारिश में बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें 

         घर में अर्थिंग की उचित व्यवस्था करें।

         हरे रंग के तार को हमेशा याद रखें। इसके बिना कभी बिजली उपकरण का प्रयोग न करें। खास कर जब यह पानी के स्रोत को छू रहा हो। पानी करंट के प्रवाह की गति को बढ़ा देता है, इसलिए नमी वाले माहौल में अतिरिक्त सावधानी रखें।

         दो पिन वाले बिना अर्थिंग के उपकरणों का प्रयोग न करें।

         तीन पिन वाले प्लग का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि तीनों तार जुड़े हों और पिनें खराब न हों।

         तारों को सॉकेट में लगाने के लिए माचिस की तीलियों का प्रयोग न करें।

         किसी भी तार को तब तक न छुएं, जब तक बिजली बंद न कर दी गई हो ।

         अर्थिग के तार को न्यूट्रल के विकल्प के तौर पर प्रयोग न करें।

         सभी जोड़ों पर बिजली वाली टेप लगाएं, न कि सेलोटेप या बेंडेड ।

         गीज़र के पानी का प्रयोग करने से पहले गीज़र बंद कर दें।

         हीटर प्लेट का प्रयोग नंगी तार के साथ न करें।

         घर पर सूखी रबर की चप्पलें पहनें।

         घर पर मिनी सर्किट ब्रेकर और अर्थ लीक सर्किट ब्रेकर का प्रयोग करें।

         मेटलिक बिजली उपकरण पानी के नल के पास न रखें।

         रबर के मैट और रबर की टांगों वाले कूलर स्टैंड बिजली उपकरणें को सुरक्षित बना सकते हैं।

         केवल सुरक्षित तारें और फ्यूज का ही प्रयोग करें।

         अर्थिंग की जांच हर छह महीने में करते रहें।

         किसी भी आम टेस्टर से करंट के लीक होने का पता लगाया जा सकता है।

         फ्रिज के हैंडल पर कपड़ा बांध कर रखें।

         प्रत्येक बिजली उपकरण के साथ बताए गए निर्देश पढ़ें।

 

मध्य प्रदेश को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा, ₹4415 करोड़ से बनेंगे दो नए हाईवे

भोपाल 

 प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्ष्ता में दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में आयोजित की गई। इस मीटिंग में मध्य प्रदेश के रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े प्रस्ताव पास किए गए। मीटिंग में मध्य प्रदेश को दो हाईवे की सौगात देने का फैसला लिया गया। केंद्रीय कैबिनेट बैठक में नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग हिस्सों को अपग्रेड करने और चौड़ीकरण का फैसला लिया है। इस प्रोजेक्ट की लागत 4415 करोड़ रुपए होगी। प्रोजेक्ट की लंबाई 233.635 किमी होगी जिसमे प्रदेश के कई बड़े जिले शामिल होंगे। कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने दी। बता दें कि, 6 जून को पीएम मोदी का नरसिंहपुर दौरा प्रस्तावित है।

एमपी में दो मिलेंगे दो नए हाईवे
मोदी कैबिनेट ने नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने का फैसला लिया है। पहला हिस्सा हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूढ़ी सेक्शन के 125 किमी पर मौजूद नैरो लेन को दो लेन में अपग्रेड किया जाएगा। दूसरा हिस्सा 108.643 किमी के देशगांव-जुलवानिया सेक्शन है जिसे टू-लेन से फोरलेन किए जाने फैसला लिया गया है। इसके अलावा खरगोन में ट्रैफिक कम करने के लिए 16.20 किमी का ग्रीनफ़ील्ड बाईपास के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट से बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिले को बड़ा फायदा मिलेगा।

पीएम गति शक्ति का हिस्सा है प्रोजेक्ट
रेल मंत्री के अनुसार 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने वाल प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति पहल का हिस्सा है जिसमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक इंडस्ट्रियल पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। यह खंडवा और बड़वानी जिलों के साथ-साथ बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे आदिवासी जिलों सहित पांच सामाजिक नोड्स को भी जोड़ेगा।

एमपी आने वाले है पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मध्यप्रदेश के दौरे पर आ सकते हैं। इस बार प्रधानमंत्री का दौरा नरसिंहपुर जिले का प्रस्तावित है, जहां वे गाडरवारा तहसील में सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन विस्तार परियोजना के विस्तार के लिए भूमिपूजन करने आ सकते हैं। सीएम ने प्रधानमंत्री को गाडरवारा आने का न्योता दिया था। पीएम के संभावित दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल दौरा प्रस्तावित है, आधिकारिक आदेश नहीं आया है।

भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद धार में बढ़ा पर्यटन, अब सरस्वती लोक परियोजना की तैयारी

धार 

धार भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद वहां धार्मिक पर्यटन बढ़ गया है। आसपास के जिलों से लोग मंदिर को देखने आने लगे हैं। आम दिनों के अलावा रविवार और शनिवार को भोजशाला में ज्यादा भीड़ रहती है। फैसला आने के बाद मंगलवार और शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में दूसरे जिलों से लोग आने लगे हैं। जो पर्यटक मांडू देखने आ रहे हैं, उनमें से कई अपने प्लान में धार भोजशाला को भी शामिल कर रहे हैं, क्योंकि धार भोजशाला का पुरातत्व महत्व भी है।

उधर, मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में धार में सरस्वती लोक बनाने की मंजूरी मिल चुकी है और जल्दी ही इसके निर्माण की कवायद शुरू होगी। महाकाल लोक की तर्ज पर इसे बनाया जाएगा। लोक में सरस्वती माता की प्रतिमा, उनकी महिमा के भित्ति चित्र के अलावा राजा भोज शोध संस्थान भी बनाया जाना है। विद्युत सज्जा के अलावा भव्य गेट भी भोजशाला परिसर में बनाया जाएगा। जो मूर्तियां संग्रहालय में रखी गई है। उन्हें भी वापस भोजशाला में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। 
 
मालवा–निमाड़ के पर्यटक ज्यादा
मंदिर जैसी गतिविधियां शुरू होने के बाद भोजशाला में मालवा–निमाड़ के पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। भोजशाला मामले का केस जीतने वाले याचिकाकर्ता आशिष गोयल बताते हैं कि पहले की तुलना में लोगों की भोजशाला में आने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जब यह लोक के रूप में विकसित होगा तो धार्मिक पर्यटन की गतिविधियां और बढ़ेंगी भोजशाला के अलावा धार में प्राचीन कालका माता मंदिर भी काफी लोगों को आकर्षित करता है। सरकार पर्यटकों की सुविधा के इंतजाम भी भोजशाला में करेगी।

मध्यप्रदेश में और मजबूत होंगी सड़क संरचनाएं

मध्यप्रदेश में और मजबूत होंगी सड़क संरचनाएं

प्रधानमंत्री मोदी का मंत्री डॉ. शाह ने जताया आभार

कैबिनेट ने हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को अपग्रेड करने की दी मंजूरी

चार हजार करोड़ से अधिक लागत से संवरेगी 233 किमी लंबाई की सड़कें

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्यप्रदेश के निमाड़ – अंचल को महत्वपूर्ण सौंगात दी है। मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड (125.01 किमी) की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को पक्की शोल्डर मानक वाली टू लेन में अपग्रेड करने और देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) की मौजूदा टू लेन को फोर लेन में चौड़ा करने को हाइब्रिड वार्षिकी मोड पर मंजूरी दे दी है। इस पर 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय कुंवर शाह ने उनके विधानसभा क्षेत्र और निमाड़ – अंचल की सड़कों के उन्नयन के लिये प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में आधारभूत संरचनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही हे।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी और देशगांव-जुलवानिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से बेतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों के शहरी क्षेत्रों में मौजूद गंभीर ज्यामितीय खामियों, तिरछे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत खरगोन जिले के लिए 16.20 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा, जिससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना मध्यप्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। उन्नत कॉरिडोर 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 1 औद्योगिक पार्क, 2 सुपर थर्मल पावर प्लांट), 5 सामाजिक केंद्रों (2 आकांक्षी जिले – खंडवा और बडवानी, 3 आदिवासी जिले – बैतूल, खंडवा, खरगोन) और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (2 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे, 1 एमएमएलपी) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।

 

काठमांडू में गूंजेगी भोपाल के बाघों की कहानी, 42 देशों के वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शहरीकरण के बीच बाघों के जिंदा रहने और इंसानों के साथ उनके अनोखे तालमेल पर हुई एक बेहद अहम स्टडी को नेपाल की राजधानी काठमांडू में पेश किया गया है। काठमांडू में 3 से 5 जून 2026 तक चल रहे छठे कंजर्वेशन एशिया कांग्रेस में इस रिसर्च को दुनिया भर के वैज्ञानिकों के सामने रखा गया।

इस ग्लोबल इवेंट को ‘सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन बायोलॉजी एशिया रीजन’, नेपाल चैप्टर और बुरहान फाउंडेशन मिलकर आयोजित कर रहे हैं, जिसमें 42 देशों के 600 से ज्यादा एक्सपर्ट्स शामिल हुए हैं। खास बात यह है कि इस संस्था के एशिया चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ. कौस्तुभ शर्मा खुद भोपाल के रहने वाले हैं।

कैमरा ट्रैप और जीआईएस मैपिंग से खुला राज
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग के सहयोग से हुई इस रिसर्च में बायो-सोशल तरीका अपनाया गया। इसमें फील्ड सर्वे, कैमरा ट्रैप, जीआईएस मैपिंग और स्थानीय लोगों के इंटरव्यू शामिल किए गए। स्टडी में यह जानने की कोशिश की गई कि भोपाल के जंगल, तालाब और हरियाली वाले इलाके कैसे बाघों की आवाजाही में मददगार साबित हो रहे हैं।

रिसर्च में सामने आया कि भोपाल में प्राकृतिक जमीन का सही इस्तेमाल, आपस में जुड़े नदी-तालाब और हरियाली (ब्लू-ग्रीन स्पेस), जंगलों में पर्याप्त शिकार, स्थानीय लोगों की स्वीकार्यता और बाघों के बदलते बर्ताव की वजह से ही वे इस शहरी माहौल में भी खुद को बचाए हुए हैं।

बढ़ते हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से बड़ा खतरा
जहाँ एक तरफ भोपाल में बाघों का बचना बड़ी कामयाबी है, वहीं रिसर्चर्स ने एक गंभीर चेतावनी भी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में तेजी से फैल रही सड़कों और लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे रेलवे लाइन या बिजली के तार की वजह से बाघों के आने-जाने के रास्ते बदल रहे हैं और उनके जंगल छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहे हैं।

₹300 सस्ता LPG सिलेंडर कैसे पाएं? 10 करोड़ से ज्यादा परिवार उठा रहे इस योजना का लाभ

भोपाल 
एलपीजी सिलेंडर के दाम आपके शहर में चाहे जिस रेट पर मिल रहा हो, लेकिन उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये सस्ता मिल रहा है। वैसे निराश तो आपको भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत से काफी सस्ता सिलेंडर आपको भी मिल रहा है।

अगर दिल्ली का उदाहरण लें तो यहां उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर केवल ₹613 में मिल रहा है, जबकि बिना सब्सिडी वाले सामान्य उपभोक्ता को इसके लिए ₹913 देने पड़ते हैं। यह सप्लाई लागत ₹1,200 से काफी कम है।

देश में 10.55 करोड़ से अधिक महिलाओं को मार्केट रेट से 300 और सप्लाई लागत से करीब 587 रुपये सस्ता सिलेंडर मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 33 करोड़ कस्टमर घरेलू एलपीजी के हैं। 2014 में यह संख्या करीब 14.52 करोड़ थी।

नुकसान की कौन कर रहा भरपाई
एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत और मार्केट प्राइस में अंतर तथा उज्ज्वला सब्सिडी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल इन कंपनियों को ₹41,338 करोड़ का नुकसान हुआ था, जो इस साल बढ़कर लगभग ₹60,000 करोड़ हो सकता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने इस साल लगभग ₹30,000 करोड़ के मुआवजे का प्रावधान किया है।

आपको भी मिल सकता है 300 रुपये सस्ता सिलेंडर, जानें कैसे
उज्ज्वला योजना के कनेक्शन के लिए अपने नजदीकी डिस्ट्रीब्यूटर से मिलें। इसके तहत गैस कनेक्शन लेने के लिए 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की गरीब महिला होनी चाहिए, जिसके परिवार में पहले से LPG कनेक्शन नहीं है। ऐसी महिला आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और आवश्यक घोषणा पत्र जमा करके आवेदन कर सकती है।

बता दें उज्ज्वला योजना के तहत पात्र महिलाओं को बिना सिक्योरिटी मनी के गैस कनेक्शन दिया जाता है। साथ ही पहला भरा हुआ सिलेंडर और गैस चूल्हा भी मुफ्त मिलता है।

उज्ज्वला योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
केवाईसी (KYC) आवेदन फॉर्म। पहचान प्रमाण के लिए आवेदक के आधार कार्ड की फोटोकॉपी। एड्रेस प्रूफ (अगर वर्तमान पता आधार कार्ड में दर्ज पते से अलग है)। प्रवासी (माइग्रेंट) आवेदकों के लिए स्व-घोषणा पत्र। जिस राज्य में आवेदन किया जा रहा है, वहां का राशन कार्ड या परिवार के सदस्यों की जानकारी प्रमाणित करने वाला राज्य सरकार का कोई अन्य दस्तावेज।

आवेदक तथा परिवार के वयस्क सदस्यों के आधार कार्ड की फोटोकॉपी (जिनके नाम राशन कार्ड/पारिवारिक दस्तावेज में दर्ज हों)। बैंक पासबुक की फोटाकॉपी या कैंसिल चेक।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत क्या-क्या देती है सरकार
सरकार 14.2 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 2,050 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 1,300 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। यह सहायता राशि निम्न खर्चों को कवर करती है, जैसे…

सिलेंडर की सिक्योरिटी डिपॉजिट, जो 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 1,700 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 950 रुपये है। प्रेशर रेगुलेटर के लिए 150 रुपये, एलपीजी पाइप के लिए100 रुपये और घरेलू गैस उपभोक्ता कार्ड के लिए 25 रुपये। निरीक्षण, स्थापना और यूज करने का प्रदर्शन शुल्क 75 रुपये है। इसके अलावा, सभी उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से पहला LPG रिफिल (सिलेंडर भरवाना) और गैस चूल्हा (हॉट प्लेट) बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है।

गैस त्रासदी के जख्म भरने की पहल, भोपाल की जहरीली मिट्टी और भूजल को किया जाएगा शुद्ध

भोपाल 

मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के खात्मे के बाद अब प्रदेश और भोपाल पर लगे इस त्रासदी के आखिरी दाग को भी धोने की तैयारी शुरू कर दी है। यूनियन कार्बाइड (यूका) परिसर व आसपास के 2 किमी क्षेत्र में दूषित मिट्टी और भूजल का उपचार कराने के साथ जंग लगे यूका प्लांट के ढांचे को हटाने ओर जहर को विसंक्रमण करने का आकलन कराया जा रहा है। प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। जमीन और भूजल में घुले जहर को दूर करने के बाद आगे की योजना पर काम शुरू होगा।

यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआइएल) की शुरुआत 1969 में भोपाल में कीटनाशकों के निर्माण के लिए हुई थी। 1979 में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआइसी) निर्माण के लिए विशेष इकाई लगी। 1984 में गैस त्रासदी के बाद सरकार ने संयंत्र को कब्जे में लिया, फिर यहां कोई काम नहीं हुआ। त्रासदी के बाद यूका के जहरीले कचरे को बोरों में भरकर तलघर में रखवाया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने पीथमपुर में इसे नष्ट कराया।

हाईकोर्ट के निर्देशों पर अमल कर अब सरकार ने परिसर की मिट्टी और भूजल के साथ प्लांट का जहर भी खत्म कराने की तैयारी की है। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने इसके लिए एजेंसियों और संस्थानों से प्रस्ताव मंगाए हैं। 

तीन चरणों में होगा काम

पहले चरण में साइट का प्रारंभिक आकलन होगा। दूसरे चरण में सूक्ष्मता से इन्वेस्टिगेशन और तीसरे चरण में इम्पैक्ट असेसमेंट स्टडी कराई जाएगी।

    पहले चरण में विशेषज्ञों की टीम यूका परिसर के दस्तावेज- नक्शे देखेगी। आसपास के क्षेत्र का अध्ययन व नीरी, सीएसआइआर की पुरानी रिपोर्टों की जांच, फिर परिसर और आसपास के क्षेत्र की हाइड्रोजियोलोजी संबंधी डेटा और रिपोट्र्स देखेगी। परिसर की टोपोग्राफी, जियोलोजी, भूजल के एक्विफर और कैचमेंट एरिया का आकलन होगा। जमीन और भूजल के सैंपल के लिए जगह चिह्नित किए जाएंगे।

    हेल्थ और सुरक्षा प्लान बनेगा ताकि किसी को नुकसान न हो। हाइड्रोजियोलोजिकल स्टडी के दौरान सतह की मिट्टी के साथ तालाब, डंप एरिया से सैंपल लिए जाएंगे। प्रदूषण का फैलाव आंकेंगे। यूका परिसर और आसपास 2 किमी एरिया से मिट्टी के 50 सेंपल और भूजल के 15 सेंपल 189 पैरामीटर पर परखेंगे। संक्रमित कचरे का निपटारा होगा। एक रेमेडियल एंड रिहेबिलिटेशन एकशन प्लान भी बनेगा।

    खतरनाक अपशिष्ट और दूषित मिट्टी की सेंपलिंग और उपचार, भंडारण, निपटान का आकलन अध्ययन पर्यावरण प्रभाव (ईआइए) के सिद्धांतों और नियमों के अनुसार होगा। इसके तहत क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आकलन, मिट्टी, भूजल, सतही जल निकायों, स्वास्थ्य प्रभाव परिवहन- निस्तारण के खतरे का आकलन और उससे निपटने की तरीके भी तय किए जाएंगे।

प्रमुख बिंदु

यूका के दो किलोमीटर क्षेत्र में प्रदूषण
दूषित मिट्टी- भूजल होगा शुद्ध
विशेषज्ञों की टीम से जांच और समाधान की तैयारी
प्रस्ताव मंगाए

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