मॉनसून में निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश, बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे कार्मिक

मॉनसून में उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के सभी प्रबंध करें

अनुमति उपरांत ही मुख्यालय छोड़ें कार्मिक

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों में विद्युत आपूर्ति और ऑपरेशन एंड मेन्टीनेंस से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नियंत्रणकर्ता अधिकारी से अनुमति लेकर ही कार्यस्थल / मुख्यालय छोड़ें। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि प्री-मॉनसून बारिश की बौछारें शुरू हो गईं हैं और अनेक बार आँधी और चक्रवाती तूफान और प्राकृतिक आपदा को देखते हुए कंपनी के मैदानी अफसरों से कहा गया है कि वे विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें। कोई कार्मिक अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। कंपनी ने कहा है कि गत वर्षों में पूरे जून माह की शिकायतों के आकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने सभी मैदानी कार्मिकों को उपभोक्ताओं को अनवरत् और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में विद्युत आपूर्ति बहाल रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। किसी भी आकस्मिक स्थिति में उपभोक्ता कंपनी के कॉल सेन्टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं। 

मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाइनमैनों के मोबाइल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखी जाए। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाये रखें।

बारिश के दौरान इन बातों का रखे ध्यान

मॉनसूनी मौसम के दौरान हवा में नमी के कारण करंट लगने की आशंका ज्यादा रहती है। करंट से लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन ज्यादातर मौतों को टाला जा सकता है। ज्यादातर मौतें घरों में अर्थिंग नहीं होने या कमजोर अर्थिंग की वजह से होती है। अर्थिंग या तो स्थानीय स्रोत से प्राप्त की जा सकती है या घर पर ही गहरा गढ़डा खोदकर खुद बनाई जा सकती है।

    बारिश में बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें 

         घर में अर्थिंग की उचित व्यवस्था करें।

         हरे रंग के तार को हमेशा याद रखें। इसके बिना कभी बिजली उपकरण का प्रयोग न करें। खास कर जब यह पानी के स्रोत को छू रहा हो। पानी करंट के प्रवाह की गति को बढ़ा देता है, इसलिए नमी वाले माहौल में अतिरिक्त सावधानी रखें।

         दो पिन वाले बिना अर्थिंग के उपकरणों का प्रयोग न करें।

         तीन पिन वाले प्लग का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि तीनों तार जुड़े हों और पिनें खराब न हों।

         तारों को सॉकेट में लगाने के लिए माचिस की तीलियों का प्रयोग न करें।

         किसी भी तार को तब तक न छुएं, जब तक बिजली बंद न कर दी गई हो ।

         अर्थिग के तार को न्यूट्रल के विकल्प के तौर पर प्रयोग न करें।

         सभी जोड़ों पर बिजली वाली टेप लगाएं, न कि सेलोटेप या बेंडेड ।

         गीज़र के पानी का प्रयोग करने से पहले गीज़र बंद कर दें।

         हीटर प्लेट का प्रयोग नंगी तार के साथ न करें।

         घर पर सूखी रबर की चप्पलें पहनें।

         घर पर मिनी सर्किट ब्रेकर और अर्थ लीक सर्किट ब्रेकर का प्रयोग करें।

         मेटलिक बिजली उपकरण पानी के नल के पास न रखें।

         रबर के मैट और रबर की टांगों वाले कूलर स्टैंड बिजली उपकरणें को सुरक्षित बना सकते हैं।

         केवल सुरक्षित तारें और फ्यूज का ही प्रयोग करें।

         अर्थिंग की जांच हर छह महीने में करते रहें।

         किसी भी आम टेस्टर से करंट के लीक होने का पता लगाया जा सकता है।

         फ्रिज के हैंडल पर कपड़ा बांध कर रखें।

         प्रत्येक बिजली उपकरण के साथ बताए गए निर्देश पढ़ें।

 

मध्य प्रदेश को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा, ₹4415 करोड़ से बनेंगे दो नए हाईवे

भोपाल 

 प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्ष्ता में दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में आयोजित की गई। इस मीटिंग में मध्य प्रदेश के रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े प्रस्ताव पास किए गए। मीटिंग में मध्य प्रदेश को दो हाईवे की सौगात देने का फैसला लिया गया। केंद्रीय कैबिनेट बैठक में नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग हिस्सों को अपग्रेड करने और चौड़ीकरण का फैसला लिया है। इस प्रोजेक्ट की लागत 4415 करोड़ रुपए होगी। प्रोजेक्ट की लंबाई 233.635 किमी होगी जिसमे प्रदेश के कई बड़े जिले शामिल होंगे। कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने दी। बता दें कि, 6 जून को पीएम मोदी का नरसिंहपुर दौरा प्रस्तावित है।

एमपी में दो मिलेंगे दो नए हाईवे
मोदी कैबिनेट ने नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने का फैसला लिया है। पहला हिस्सा हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूढ़ी सेक्शन के 125 किमी पर मौजूद नैरो लेन को दो लेन में अपग्रेड किया जाएगा। दूसरा हिस्सा 108.643 किमी के देशगांव-जुलवानिया सेक्शन है जिसे टू-लेन से फोरलेन किए जाने फैसला लिया गया है। इसके अलावा खरगोन में ट्रैफिक कम करने के लिए 16.20 किमी का ग्रीनफ़ील्ड बाईपास के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट से बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिले को बड़ा फायदा मिलेगा।

पीएम गति शक्ति का हिस्सा है प्रोजेक्ट
रेल मंत्री के अनुसार 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने वाल प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति पहल का हिस्सा है जिसमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक इंडस्ट्रियल पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। यह खंडवा और बड़वानी जिलों के साथ-साथ बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे आदिवासी जिलों सहित पांच सामाजिक नोड्स को भी जोड़ेगा।

एमपी आने वाले है पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मध्यप्रदेश के दौरे पर आ सकते हैं। इस बार प्रधानमंत्री का दौरा नरसिंहपुर जिले का प्रस्तावित है, जहां वे गाडरवारा तहसील में सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन विस्तार परियोजना के विस्तार के लिए भूमिपूजन करने आ सकते हैं। सीएम ने प्रधानमंत्री को गाडरवारा आने का न्योता दिया था। पीएम के संभावित दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल दौरा प्रस्तावित है, आधिकारिक आदेश नहीं आया है।

भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद धार में बढ़ा पर्यटन, अब सरस्वती लोक परियोजना की तैयारी

धार 

धार भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद वहां धार्मिक पर्यटन बढ़ गया है। आसपास के जिलों से लोग मंदिर को देखने आने लगे हैं। आम दिनों के अलावा रविवार और शनिवार को भोजशाला में ज्यादा भीड़ रहती है। फैसला आने के बाद मंगलवार और शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में दूसरे जिलों से लोग आने लगे हैं। जो पर्यटक मांडू देखने आ रहे हैं, उनमें से कई अपने प्लान में धार भोजशाला को भी शामिल कर रहे हैं, क्योंकि धार भोजशाला का पुरातत्व महत्व भी है।

उधर, मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में धार में सरस्वती लोक बनाने की मंजूरी मिल चुकी है और जल्दी ही इसके निर्माण की कवायद शुरू होगी। महाकाल लोक की तर्ज पर इसे बनाया जाएगा। लोक में सरस्वती माता की प्रतिमा, उनकी महिमा के भित्ति चित्र के अलावा राजा भोज शोध संस्थान भी बनाया जाना है। विद्युत सज्जा के अलावा भव्य गेट भी भोजशाला परिसर में बनाया जाएगा। जो मूर्तियां संग्रहालय में रखी गई है। उन्हें भी वापस भोजशाला में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। 
 
मालवा–निमाड़ के पर्यटक ज्यादा
मंदिर जैसी गतिविधियां शुरू होने के बाद भोजशाला में मालवा–निमाड़ के पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। भोजशाला मामले का केस जीतने वाले याचिकाकर्ता आशिष गोयल बताते हैं कि पहले की तुलना में लोगों की भोजशाला में आने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जब यह लोक के रूप में विकसित होगा तो धार्मिक पर्यटन की गतिविधियां और बढ़ेंगी भोजशाला के अलावा धार में प्राचीन कालका माता मंदिर भी काफी लोगों को आकर्षित करता है। सरकार पर्यटकों की सुविधा के इंतजाम भी भोजशाला में करेगी।

मध्यप्रदेश में और मजबूत होंगी सड़क संरचनाएं

मध्यप्रदेश में और मजबूत होंगी सड़क संरचनाएं

प्रधानमंत्री मोदी का मंत्री डॉ. शाह ने जताया आभार

कैबिनेट ने हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को अपग्रेड करने की दी मंजूरी

चार हजार करोड़ से अधिक लागत से संवरेगी 233 किमी लंबाई की सड़कें

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्यप्रदेश के निमाड़ – अंचल को महत्वपूर्ण सौंगात दी है। मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड (125.01 किमी) की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को पक्की शोल्डर मानक वाली टू लेन में अपग्रेड करने और देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) की मौजूदा टू लेन को फोर लेन में चौड़ा करने को हाइब्रिड वार्षिकी मोड पर मंजूरी दे दी है। इस पर 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय कुंवर शाह ने उनके विधानसभा क्षेत्र और निमाड़ – अंचल की सड़कों के उन्नयन के लिये प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में आधारभूत संरचनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही हे।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी और देशगांव-जुलवानिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से बेतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों के शहरी क्षेत्रों में मौजूद गंभीर ज्यामितीय खामियों, तिरछे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत खरगोन जिले के लिए 16.20 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा, जिससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना मध्यप्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। उन्नत कॉरिडोर 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 1 औद्योगिक पार्क, 2 सुपर थर्मल पावर प्लांट), 5 सामाजिक केंद्रों (2 आकांक्षी जिले – खंडवा और बडवानी, 3 आदिवासी जिले – बैतूल, खंडवा, खरगोन) और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (2 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे, 1 एमएमएलपी) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।

 

काठमांडू में गूंजेगी भोपाल के बाघों की कहानी, 42 देशों के वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शहरीकरण के बीच बाघों के जिंदा रहने और इंसानों के साथ उनके अनोखे तालमेल पर हुई एक बेहद अहम स्टडी को नेपाल की राजधानी काठमांडू में पेश किया गया है। काठमांडू में 3 से 5 जून 2026 तक चल रहे छठे कंजर्वेशन एशिया कांग्रेस में इस रिसर्च को दुनिया भर के वैज्ञानिकों के सामने रखा गया।

इस ग्लोबल इवेंट को ‘सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन बायोलॉजी एशिया रीजन’, नेपाल चैप्टर और बुरहान फाउंडेशन मिलकर आयोजित कर रहे हैं, जिसमें 42 देशों के 600 से ज्यादा एक्सपर्ट्स शामिल हुए हैं। खास बात यह है कि इस संस्था के एशिया चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ. कौस्तुभ शर्मा खुद भोपाल के रहने वाले हैं।

कैमरा ट्रैप और जीआईएस मैपिंग से खुला राज
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग के सहयोग से हुई इस रिसर्च में बायो-सोशल तरीका अपनाया गया। इसमें फील्ड सर्वे, कैमरा ट्रैप, जीआईएस मैपिंग और स्थानीय लोगों के इंटरव्यू शामिल किए गए। स्टडी में यह जानने की कोशिश की गई कि भोपाल के जंगल, तालाब और हरियाली वाले इलाके कैसे बाघों की आवाजाही में मददगार साबित हो रहे हैं।

रिसर्च में सामने आया कि भोपाल में प्राकृतिक जमीन का सही इस्तेमाल, आपस में जुड़े नदी-तालाब और हरियाली (ब्लू-ग्रीन स्पेस), जंगलों में पर्याप्त शिकार, स्थानीय लोगों की स्वीकार्यता और बाघों के बदलते बर्ताव की वजह से ही वे इस शहरी माहौल में भी खुद को बचाए हुए हैं।

बढ़ते हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से बड़ा खतरा
जहाँ एक तरफ भोपाल में बाघों का बचना बड़ी कामयाबी है, वहीं रिसर्चर्स ने एक गंभीर चेतावनी भी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में तेजी से फैल रही सड़कों और लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे रेलवे लाइन या बिजली के तार की वजह से बाघों के आने-जाने के रास्ते बदल रहे हैं और उनके जंगल छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहे हैं।

₹300 सस्ता LPG सिलेंडर कैसे पाएं? 10 करोड़ से ज्यादा परिवार उठा रहे इस योजना का लाभ

भोपाल 
एलपीजी सिलेंडर के दाम आपके शहर में चाहे जिस रेट पर मिल रहा हो, लेकिन उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये सस्ता मिल रहा है। वैसे निराश तो आपको भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत से काफी सस्ता सिलेंडर आपको भी मिल रहा है।

अगर दिल्ली का उदाहरण लें तो यहां उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर केवल ₹613 में मिल रहा है, जबकि बिना सब्सिडी वाले सामान्य उपभोक्ता को इसके लिए ₹913 देने पड़ते हैं। यह सप्लाई लागत ₹1,200 से काफी कम है।

देश में 10.55 करोड़ से अधिक महिलाओं को मार्केट रेट से 300 और सप्लाई लागत से करीब 587 रुपये सस्ता सिलेंडर मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 33 करोड़ कस्टमर घरेलू एलपीजी के हैं। 2014 में यह संख्या करीब 14.52 करोड़ थी।

नुकसान की कौन कर रहा भरपाई
एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत और मार्केट प्राइस में अंतर तथा उज्ज्वला सब्सिडी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल इन कंपनियों को ₹41,338 करोड़ का नुकसान हुआ था, जो इस साल बढ़कर लगभग ₹60,000 करोड़ हो सकता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने इस साल लगभग ₹30,000 करोड़ के मुआवजे का प्रावधान किया है।

आपको भी मिल सकता है 300 रुपये सस्ता सिलेंडर, जानें कैसे
उज्ज्वला योजना के कनेक्शन के लिए अपने नजदीकी डिस्ट्रीब्यूटर से मिलें। इसके तहत गैस कनेक्शन लेने के लिए 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की गरीब महिला होनी चाहिए, जिसके परिवार में पहले से LPG कनेक्शन नहीं है। ऐसी महिला आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और आवश्यक घोषणा पत्र जमा करके आवेदन कर सकती है।

बता दें उज्ज्वला योजना के तहत पात्र महिलाओं को बिना सिक्योरिटी मनी के गैस कनेक्शन दिया जाता है। साथ ही पहला भरा हुआ सिलेंडर और गैस चूल्हा भी मुफ्त मिलता है।

उज्ज्वला योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
केवाईसी (KYC) आवेदन फॉर्म। पहचान प्रमाण के लिए आवेदक के आधार कार्ड की फोटोकॉपी। एड्रेस प्रूफ (अगर वर्तमान पता आधार कार्ड में दर्ज पते से अलग है)। प्रवासी (माइग्रेंट) आवेदकों के लिए स्व-घोषणा पत्र। जिस राज्य में आवेदन किया जा रहा है, वहां का राशन कार्ड या परिवार के सदस्यों की जानकारी प्रमाणित करने वाला राज्य सरकार का कोई अन्य दस्तावेज।

आवेदक तथा परिवार के वयस्क सदस्यों के आधार कार्ड की फोटोकॉपी (जिनके नाम राशन कार्ड/पारिवारिक दस्तावेज में दर्ज हों)। बैंक पासबुक की फोटाकॉपी या कैंसिल चेक।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत क्या-क्या देती है सरकार
सरकार 14.2 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 2,050 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 1,300 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। यह सहायता राशि निम्न खर्चों को कवर करती है, जैसे…

सिलेंडर की सिक्योरिटी डिपॉजिट, जो 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 1,700 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 950 रुपये है। प्रेशर रेगुलेटर के लिए 150 रुपये, एलपीजी पाइप के लिए100 रुपये और घरेलू गैस उपभोक्ता कार्ड के लिए 25 रुपये। निरीक्षण, स्थापना और यूज करने का प्रदर्शन शुल्क 75 रुपये है। इसके अलावा, सभी उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से पहला LPG रिफिल (सिलेंडर भरवाना) और गैस चूल्हा (हॉट प्लेट) बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है।

गैस त्रासदी के जख्म भरने की पहल, भोपाल की जहरीली मिट्टी और भूजल को किया जाएगा शुद्ध

भोपाल 

मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के खात्मे के बाद अब प्रदेश और भोपाल पर लगे इस त्रासदी के आखिरी दाग को भी धोने की तैयारी शुरू कर दी है। यूनियन कार्बाइड (यूका) परिसर व आसपास के 2 किमी क्षेत्र में दूषित मिट्टी और भूजल का उपचार कराने के साथ जंग लगे यूका प्लांट के ढांचे को हटाने ओर जहर को विसंक्रमण करने का आकलन कराया जा रहा है। प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। जमीन और भूजल में घुले जहर को दूर करने के बाद आगे की योजना पर काम शुरू होगा।

यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआइएल) की शुरुआत 1969 में भोपाल में कीटनाशकों के निर्माण के लिए हुई थी। 1979 में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआइसी) निर्माण के लिए विशेष इकाई लगी। 1984 में गैस त्रासदी के बाद सरकार ने संयंत्र को कब्जे में लिया, फिर यहां कोई काम नहीं हुआ। त्रासदी के बाद यूका के जहरीले कचरे को बोरों में भरकर तलघर में रखवाया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने पीथमपुर में इसे नष्ट कराया।

हाईकोर्ट के निर्देशों पर अमल कर अब सरकार ने परिसर की मिट्टी और भूजल के साथ प्लांट का जहर भी खत्म कराने की तैयारी की है। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने इसके लिए एजेंसियों और संस्थानों से प्रस्ताव मंगाए हैं। 

तीन चरणों में होगा काम

पहले चरण में साइट का प्रारंभिक आकलन होगा। दूसरे चरण में सूक्ष्मता से इन्वेस्टिगेशन और तीसरे चरण में इम्पैक्ट असेसमेंट स्टडी कराई जाएगी।

    पहले चरण में विशेषज्ञों की टीम यूका परिसर के दस्तावेज- नक्शे देखेगी। आसपास के क्षेत्र का अध्ययन व नीरी, सीएसआइआर की पुरानी रिपोर्टों की जांच, फिर परिसर और आसपास के क्षेत्र की हाइड्रोजियोलोजी संबंधी डेटा और रिपोट्र्स देखेगी। परिसर की टोपोग्राफी, जियोलोजी, भूजल के एक्विफर और कैचमेंट एरिया का आकलन होगा। जमीन और भूजल के सैंपल के लिए जगह चिह्नित किए जाएंगे।

    हेल्थ और सुरक्षा प्लान बनेगा ताकि किसी को नुकसान न हो। हाइड्रोजियोलोजिकल स्टडी के दौरान सतह की मिट्टी के साथ तालाब, डंप एरिया से सैंपल लिए जाएंगे। प्रदूषण का फैलाव आंकेंगे। यूका परिसर और आसपास 2 किमी एरिया से मिट्टी के 50 सेंपल और भूजल के 15 सेंपल 189 पैरामीटर पर परखेंगे। संक्रमित कचरे का निपटारा होगा। एक रेमेडियल एंड रिहेबिलिटेशन एकशन प्लान भी बनेगा।

    खतरनाक अपशिष्ट और दूषित मिट्टी की सेंपलिंग और उपचार, भंडारण, निपटान का आकलन अध्ययन पर्यावरण प्रभाव (ईआइए) के सिद्धांतों और नियमों के अनुसार होगा। इसके तहत क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आकलन, मिट्टी, भूजल, सतही जल निकायों, स्वास्थ्य प्रभाव परिवहन- निस्तारण के खतरे का आकलन और उससे निपटने की तरीके भी तय किए जाएंगे।

प्रमुख बिंदु

यूका के दो किलोमीटर क्षेत्र में प्रदूषण
दूषित मिट्टी- भूजल होगा शुद्ध
विशेषज्ञों की टीम से जांच और समाधान की तैयारी
प्रस्ताव मंगाए

MP को बड़ी सौगात, ₹4415 करोड़ से बनेगा बैतूल-खंडवा-जुलवानिया नेशनल हाईवे

खंडवा
खंडवा जिला इकॉनामिक कॉरिडोर के रूप में जल्द ही विकसित होने वाला है। बुधवार को नेशनल हाईवे 347बी हैवारखेड़ी (बैतूल) से जुलवानिया (बड़वानी) तक 233.653 किमी हाईवे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दे दी है। इस रोड की कुल लागत इसकी कुल लागत 4415.60 करोड़ की है। पहले पांच चरण में बनने वाला नेशनल हाईवे अब दो पैकेज में बनेगा। इस हाईवे के निर्माण से खंडवा सीधे गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ जाएगा।

कैबिनेट में दो पैकेज में किया रोड
एनएच-347बी पहले पांच चरणों में बनाया जाना था। इसमें हैवारखेड़ी से रोशनी, रोशनी से आशापुर, आशापुर से रूधि, रूधि से देशगांव और देशगांव से जुलवानिया तक रोड शामिल है। अब कैबिनेट ने इसे दो पैकेज में कर दिया है। इसमें हैवारखेड़ी से व्हाया रोशनी-आशापुर-रूधि तक कुल 125.01 किमी का रोड टू-लेन को पेव्ड शोल्डर स्टैंडर्ड (पक्की पटरी) के साथ बनाया जाएगा। इसमें 70.39 किमी का बायपास भी रहेगा। इसके आगे देशगांव-रूधि बायपास 28.680 किमी का काम पहले से ही चल रहा है, जो लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

देशगांव-जुलवानिया अब फोरलेन
कैबिनेट ने एनएच-347बी के दूसरे पैकेज में देशगांव-जुलवानिया सेक्शन में 108.643 किमी रोड को मंजूरी दी है। इस रोड को पहले टू-लेन बनाया जाना था, लेकिन केबिनेट ने इसे अब अपग्रेड करते हुए फोर-लेन बनाने की स्वीकृति दी है। इस रोड पर 54.273 किमी का बायपास आ रहा है। साथ ही इसमें खरगोन जिले में 16.20 किमी का ग्रीन फिल्ड भी शामिल है। ग्रीन फिल्ड में वन विभाग और खेती की जमीन अधिग्रहण करने की कार्रवाई की जाएगी। नेशनल हाईवे हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर बनाया जाएगा।

खंडवा बनेगा दो नेशनल हाईवे का सेंटर
एनएचएआइ द्वारा पहले ही इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे फोरलेन का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा का काम भी चल रहा है। खंडवा का देशगांव दो नेशनल हाईवे का क्रॉसिंग बन रहा है। दो नेशनल हाईवे के सेंटर में आने से खंडवा का इकानोनिक कॉरिडोर भी मजबूत होगा। बैतूल से आगे ये हाईवे नागपुर से जुड़ा हुआ है। खंडवा से नागपुर, बड़ोदरा के साथ सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इधर इंदौर-इच्छापुर हाईवे से खंडवा सीधे राजस्थान और महाराष्ट्र के मुक्तईनगर से आगे तेलंगाना से जुड़ जाएगा।

आर्थिक, सामाजिक, लॉजिस्टिक्स केंद्रों को कनेक्टिविटी
यह परियोजना पूरे राज्य के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को बिना रुकावट कनेक्टिविटी देगी। यह उन्नत कॉरिडोर 06 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों से जुड़ेगा, जिनमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक औद्योगिक पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। परियोजना 5 सामाजिक केंद्रों को भी एकीकृत करेगी, जिनमें खंडवा और बड़वानी जैसे दो आकांक्षी जिले, साथ ही बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे तीन आदिवासी जिले शामिल हैं। इसके अलावा, दो बड़े रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और एक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क सहित 5 लॉजिस्टिक्स केंद्र भी इस कॉरिडोर से जुड़ेंगे।

व्यापार उद्योग को मिलेगी हाइट
बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा नेशनल हाईवे को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इसमें रूधि-देशगांव और रोशनी-आशापुर के बीच काम चल रहा है। देशगांव जुलवानिया और हैवारखेड़ी-रोशनी के बीच भी जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। नेशनल हाईवे से इकॉनोमिक कॉरिडोर बनेगा और यहां व्यापार-उद्योग को हाइट मिलेगी।
आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

मध्यप्रदेश में HIV के बढ़ते मामले चिंता का कारण, केस दोगुने; जांच और जागरूकता पर सवाल

इंदौर.
 मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय संक्रमण दर लगातार बढ़ रही है, उसी समय जांचों की संख्या में कमी क्यों आ रही है. इंदौर जैसे बड़े शहर में वर्ष 2022 में जहां करीब 1.47 लाख लोगों की एचआईवी जांच की गई थी, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 85 हजार रह गई है. इसके बावजूद पॉजिटिव मरीजों की संख्या 492 से बढ़कर 615 तक पहुंच गई है. संक्रमण दर भी 0.33 प्रतिशत से बढ़कर 0.72 प्रतिशत हो गई है. यानी कम जांच के बावजूद ज्यादा संक्रमित सामने आ रहे हैं. यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर संक्रमण की वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। 

स्थिति केवल इंदौर तक सीमित नहीं है. राज्य एड्स नियंत्रण समिति के आंकड़े बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2020-21 में जहां 3771 संक्रमित गर्भवती महिलाएं दर्ज थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या 7167 तक पहुंच गई. इसी अवधि में 200 से अधिक नवजात बच्चों में संक्रमण मां से पहुंचने के मामले सामने आए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय निगरानी से इस तरह के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है. इसके बावजूद बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। 

इंदौर में क्यों बढ़ रही संक्रमण दर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में एचआईवी पॉजिटिविटी रेट लगभग दोगुना हो गया है. वर्ष 2022 में यह दर 0.33 प्रतिशत थी, जो 2023 में 0.67 प्रतिशत, 2024 में 0.70 प्रतिशत और 2025 में 0.72 प्रतिशत तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध और नशे के दौरान संक्रमित सुइयों का उपयोग संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। 

जांच कम होने से छिप रही असली तस्वीर
एचआईवी नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका व्यापक स्क्रीनिंग और समय पर पहचान है. लेकिन इंदौर में जांचों की संख्या लगातार कम हो रही है. इससे कई संक्रमित व्यक्ति समय पर सामने नहीं आ पा रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम स्क्रीनिंग के कारण संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो रहा है। 

गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ता खतरा
राज्य में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ना सबसे चिंताजनक पहलू माना जा रहा है. वर्ष 2025-26 में 743 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी दर्ज की गई. कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच नहीं हुई या उपचार बीच में छूट गया. परिणामस्वरूप संक्रमण मां से बच्चे तक पहुंचने का जोखिम बढ़ गया। 

क्यों नहीं रुक रहा संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण संक्रमण नियंत्रण में बाधा बन रहे हैं. इनमें समय पर जांच न होना, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी बीच में छोड़ देना, संक्रमण की जानकारी छिपाना, नवजात को आवश्यक दवा न देना और संक्रमित मां द्वारा चिकित्सकीय सलाह के बिना स्तनपान कराना शामिल है। 

केस स्टडी ने बढ़ाई चिंता
एक मामले में महिला की पहली गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच ही नहीं हुई. दूसरी गर्भावस्था में संक्रमण का पता चला. इसके बाद पति और पहला बच्चा भी संक्रमित पाए गए. दूसरे मामले में मां ने उपचार पूरा नहीं लिया और नवजात को निर्धारित दवा भी नहीं दी गई. बाद में बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। 

कमलनाथ ने जांच और निगरानी का मुद्दा उठाया
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से विशेष कदम उठाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी को केवल चिकित्सा नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता के माध्यम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। 

हरित विकास के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा: वीर एस. आडवाणी

विवेक झा, भोपाल। भारत की विकास यात्रा अब केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसे पर्यावरणीय संतुलन और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के साथ आगे बढ़ाना होगा। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरित और समावेशी विकास को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन एवं ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वीर एस. आडवाणी ने कही।

उन्होंने कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक समावेशन और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है।

पश्चिमी भारत को निभानी होगी नेतृत्वकारी भूमिका

वीर एस. आडवाणी ने कहा कि पश्चिमी भारत लंबे समय से देश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। उद्योग, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अग्रणी रहने वाला यह क्षेत्र अब पर्यावरण-अनुकूल और संसाधन-कुशल विकास मॉडल का नेतृत्व भी कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जल, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में पश्चिमी भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान भी संभव होगा।

सस्टेनेबिलिटी अब व्यवसायिक आवश्यकता बन चुकी है

आडवाणी ने कहा कि उद्योग जगत में नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और संसाधन दक्षता में लगातार बढ़ता निवेश इस बात का प्रमाण है कि सस्टेनेबिलिटी अब केवल कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) तक सीमित नहीं रह गई है।

उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में वही उद्योग आगे बढ़ पाएंगे जो पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को अपनी व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाएंगे। हरित तकनीकों और ऊर्जा दक्षता में निवेश से उद्योगों की लागत कम होगी और दीर्घकालिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।

विकसित भारत-2047 के लिए पर्यावरणीय जिम्मेदारी जरूरी

सीआईआई वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन ने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार हो सकता है जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को समान महत्व देना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।

जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती

वीर एस. आडवाणी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट और प्राकृतिक आपदाएं विकास की गति को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में उद्योगों को हरित भवनों, सतत विनिर्माण प्रक्रियाओं और निम्न-कार्बन विकास मॉडल को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

सीआईआई की पहलें बना रहीं सकारात्मक माहौल

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने में सीआईआई के सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सीआईआई-सीईएसडी) तथा इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (सीआईआई-आईजीबीसी) की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं उद्योगों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों, ऊर्जा दक्षता और हरित भवनों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

साझेदारी से ही मिलेगा समाधान

आडवाणी ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल सरकार या उद्योग अकेले नहीं कर सकते। इसके लिए उद्योग, सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा।

भविष्य उन्हीं का जो संतुलन साधेंगे

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वही अर्थव्यवस्थाएं और व्यवसाय सबसे अधिक सफल होंगे जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में सक्षम होंगे। हरित निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ उत्पादन प्रणाली भविष्य की आर्थिक सफलता की कुंजी साबित होंगे।

वीर एस. आडवाणी की प्रमुख बातें

  • विकसित भारत-2047 के लिए हरित विकास अनिवार्य।
  • आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी जरूरी।
  • नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा।
  • उद्योग, सरकार और समाज की साझेदारी से ही मिलेगा समाधान।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक।
  • हरित भवन और निम्न-कार्बन विकास मॉडल को बढ़ावा देने की जरूरत।
  • भविष्य में वही उद्योग सफल होंगे जो सस्टेनेबिलिटी को अपनाएंगे।
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