ट्रंप की ईरान को चेतावनी, हत्या की साजिश पर विनाशकारी जवाब की धमकी

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जारी तनाव एक बेहद खतरनाक और अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को ‘स्टैंडिंग ऑर्डर्स’ दे रखे हैं कि अगर ईरान उनकी हत्या की साजिश को अंजाम देता है, तो तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी पलटवार किया जाए।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान की तरफ से उन्हें “जान से मारने या हत्या के प्रयास” की लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 1,000 मिसाइलें “पूरी तरह से तैयार” हैं और उनका रुख ईरान की तरफ है। अगर ईरान ने कोई भी हिमाकत की, तो हजारों और मिसाइलें पीछे से दाग दी जाएंगी।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और अमेरिकी संविधान के मुताबिक, ट्रंप का यह दावा व्यावहारिक और कानूनी रूप से संभव नहीं है। अमेरिकी कानून में किसी भी ऑटोमेटिक या पहले से अधिकृत “डैड मैन्स स्विच” का कोई प्रावधान नहीं है, जो राष्ट्रपति की मौत होते ही सेना को अपने आप युद्ध शुरू करने का अधिकार दे दे।

राष्ट्रपति की मौत के बाद क्या होता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा प्रणाली में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जहां राष्ट्रपति की गैर-मौजूदगी में कोई कंप्यूटर या पूर्व-लिखित आदेश सीधे परमाणु या मिसाइल हमले शुरू कर दे।

अगर राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या होती है, तो अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और ‘प्रेसिडेंशियल सक्सेशन एक्ट 1947’ के तहत राष्ट्रपति की शक्तियां तत्काल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पास चली जाएंगी।

नए कमांडर-इन-चीफ के रूप में यह पूरी तरह जेडी वेंस पर निर्भर करेगा कि वे ट्रंप के आदेशों को लागू करते हैं, उनमें बदलाव करते हैं या उन्हें पूरी तरह खारिज कर देते हैं।

इतिहासकार और लेखक गैरेट एम. ग्रैफ ने कहा, “अमेरिका ने कई तरह के कारणों से कभी भी तकनीकी ‘डैड मैन्स स्विच’ का उपयोग नहीं किया है।”

ग्रैफ के मुताबिक, अमेरिका के पास आपातकालीन स्थितियों और परमाणु हमलों से निपटने के लिए बेहद विस्तृत ‘कंटिन्यूटी-ऑफ-गवर्नमेंट’ (सरकार चलाने की निरंतरता) की योजनाएं जरूर हैं, लेकिन वे योजनाएं भी राष्ट्रपति की मौत के बाद किसी भी स्वचालित सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं देती हैं।

ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने खाई बदले की कसम
ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराया। बता दें कि अयातुल्ला अली खामेनेई इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए थे, जिसके बाद यह युद्ध शुरू हुआ था।

मोजतबा खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, “हम इस आपराधिक और अपमानजनक हत्यारों से अपने पिता और दोनों युद्धों के सभी शहीदों के पवित्र खून का बदला लेने की कसम खाते हैं। यह बदला हमारे देश की इच्छा है और इसे निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा।”

ईरान में इस हफ्ते हुए अंतिम संस्कार के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत के नारे वाले पोस्टर और बैनर भी देखे गए।

ट्रंप को निशाना बनाने की नई साजिश, सुरक्षा में बदलाव
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों को ट्रंप को निशाना बनाने की ईरान की नई और बेहद गंभीर साजिशों के बारे में अलर्ट किया है। खुद ट्रंप ने तुर्की में हुए नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान इन खतरों का जिक्र करते हुए कहा था, “वे अमेरिकी नेता— यानी मुझे, रास्ते से हटाना चाहते हैं।”

सुरक्षा को लेकर चिंताएं क्यों बढ़ीं?
राष्ट्रपति ट्रंप इस हफ्ते तुर्की से वापस लौटते समय कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए अत्याधुनिक विमान के बजाय एक पुराने ‘एयर फोर्स वन’ (Air Force One) विमान से यात्रा करते दिखे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 400 मिलियन डॉलर के रेनोवेशन के बावजूद नए कतरी विमान में कुछ ऐसे मिसाइल डिटेक्शन और काउंटर-मेजर (मिसाइल रोधी) सिस्टम नहीं थे, जो पुराने विमानों में मौजूद हैं। सुरक्षा कारणों से यह बड़ा समझौता माना जा रहा है।

यह सुरक्षा चिंताएं ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका और ईरान ने एक बार फिर एक-दूसरे पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पिछले महीने हुआ युद्धविराम समझौता पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

अमेरिका-ईरान जंग फिर भड़की: 300 ठिकानों पर हमले, होर्मुज बंद होने से दुनिया पर तेल संकट का खतरा

नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव शुरू हो गया है. पिछले तीन दिन में ईरान ने अमेरिका का 6 बेस पर हमला किया तो अमेरिका ने तीन रातों में 300 टारगेट्स को निशाना बनाया. सीजफायर अब खत्म हो चुका है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी है. अमेरिका ने इसके जवाब में ईरान के सैकड़ों ठिकानों पर हमले किए हैं.

इस संघर्ष में दोनों तरफ से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं, जिसमें अमेरिकी बेसेस पर ईरानी मिसाइल हमले और अमेरिकी हमलों में ईरानी तटवर्ती इलाकों में विस्फोट शामिल हैं. इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है. दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं.

फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से कई बार युद्धविराम की कोशिशें हुईं, लेकिन वे टिक नहीं पाईं. हाल ही में एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसमें ईरान को कुछ छूट दी गई थी. लेकिन ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश की.

जब कुछ जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया और निर्धारित रूट से हट गए, तो ईरानी क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने उन पर हमला कर दिया. एक साइप्रस-ध्वज वाले कंटेनर जहाज M/V GFS Galaxy को नुकसान पहुंचा, एक क्रू मेंबर लापता है. जहाज में आग लग गई. ईरान का कहना है कि यह चेतावनी का गोला था, लेकिन अमेरिका इसे साफ हमला मानता है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान पर जवाबी कार्रवाई शुरू की. तीन रातों में 300 से ज्यादा ईरानी ठिकानों – मिसाइल साइट्स, ड्रोन बेस, नौसैनिक सुविधाएं, गोला-बारूद स्टोर और संचार नेटवर्क – को निशाना बनाया गया. ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास, सिरिक, क़ेश्म द्वीप, बुशहर और जास्क जैसे इलाकों में विस्फोटों की खबर दी. इस हमले के बाद ईरान ने जवाब दिया.

ईरान की जवाबी कार्रवाई: क्षेत्रीय बेस पर हमले
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर जवाब दिया. सबसे महत्वपूर्ण हमला जॉर्डन के मुवाफक सल्ती एयर बेस पर हुआ, जहां अमेरिकी F-35 विमान तैनात हैं. यह बेस पूरे युद्ध में ईरानी मिसाइलों से बचता रहा था, लेकिन इस बार सायरन बज गए और कुछ मिसाइलें लक्ष्य के करीब पहुंचीं.

IRGC का दावा है कि उन्होंने प्रिंस हसन एयर बेस पर कमांड सेंटर और MQ-9 रीपर ड्रोन हैंगरों को नष्ट कर दिया. इसके अलावा ईरान ने बहरीन में अमेरिकी 5वीं फ्लीट मुख्यालय, कुवैत, जॉर्डन, कतर, बहरीन, UAE और ओमान में अमेरिकी बेस पर हमले किए. बहरीन में धुआं उठता दिखा, जो ईरानी हमले की पुष्टि करता है.

ओमान में पेंटागन रिफ्यूलिंग स्टेशन पर भी सरप्राइज अटैक की खबर है. ईरान का कहना है कि यह अमेरिका के तीसरे हमले के जवाब में था. ईरानी वायुसेना अब हवा में एक्टिव है. तेहरान के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम चालू हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक अर्थव्यवस्था का गला
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है. ईरान ने इसे बंद कर दिया है. कहा है कि जब तक ‘ईरानी व्यवस्था’ नहीं बनेगी, यह खुला नहीं रहेगा. ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलना चाहता है. दक्षिणी रूट (ओमान के पानी) को अमेरिका बढ़ावा दे रहा है.

इस बंद से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, हालांकि तेल की कीमतें पहले के 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से कुछ कम हुई हैं. ईरान का मानना है कि वह इस युद्ध से क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में उभरा है. अमेरिका और इजराइल के मुख्य लक्ष्य पूरे नहीं हुए, इसलिए तेहरान लंबी खेल खेल रहा है.

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि हॉर्मुज केवल ‘ईरानी व्यवस्था’ के साथ खुलेगा. संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ भी इसी रुख पर हैं.

अमेरिका की रणनीति और ट्रंप प्रशासन
अमेरिका का कहना है कि वह नागरिक जहाजों की आजादी सुनिश्चित करने के लिए ईरान की क्षमता को कमजोर कर रहा है. डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने गलत चुनाव किया, अब उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी. अमेरिका ने ईरानी तेल बिक्री पर छूट वापस ले ली है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर और हमलों की धमकी दी है.

ओमान के साथ ईरान की बैठक हुई थी, जिसमें सुरक्षित जहाज आवागमन पर बातचीत हुई. लेकिन अमेरिका इसे पर्याप्त नहीं मानता. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि केवल आपसी सामंजस्य ही काम कर सकता है.

क्षेत्रीय प्रभाव और चुनौतियां
इस टकराव से खाड़ी के राजशाही देशों पर खतरा मंडरा रहा है. ईरान क्षेत्रीय वर्चस्व चाहता है, जिसे ‘पैक्स इरानिका’ कहा जा रहा है. लेकिन अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है. फिर भी ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की शपथ ली है.

जॉर्डन जैसे देश बीच में फंस गए हैं. जॉर्डन ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है. बहरीन, कुवैत, UAE और कतर में अमेरिकी बेसेस होने से ये देश भी लक्ष्य बन सकते हैं.

वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने से महंगाई बढ़ सकती है. चीन और भारत जैसे आयातक देशों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. अगर यह संघर्ष लंबा चला तो समुद्री व्यापार रुक सकता है. बीमा लागत

अमेरिका-ईरान युद्ध फिर तेज, होर्मुज बंद होने से बढ़ा वैश्विक संकट

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध तेज हो गया है. जून में हुए युद्धविराम और समझौते के बाद बनी शांति अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है. अमेरिका ने लगातार तीन रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जबकि जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही खाड़ी के कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 11 जुलाई को ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, नौसैनिक ठिकाने, हथियार भंडार, संचार नेटवर्क और तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया.

CENTCOM का दावा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर पिछले तीन दिनों में कुल 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को तबाह किया गया है. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Galaxy पर हुए ईरानी हमले के जवाब में की गई.

IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को किया बंद
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट को “अगले आदेश तक” बंद करने का ऐलान कर दिया. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में दखल देना बंद नहीं करता, तब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर उसकी शर्तें लागू रहेंगी. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट केवल “ईरान की व्यवस्था” के तहत ही खुलेगा, किसी अमेरिकी दबाव में नहीं.

इस बीच संघर्ष खाड़ी के दूसरे देशों तक भी फैल गया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया. बहरीन में दूसरी बार पूरे देश में सायरन बजाए गए. कुवैत ने भी रॉकेट और ड्रोन हमलों को रोकने की पुष्टि की, जबकि कतर ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी करने के बाद खतरा टलने की जानकारी दी.

ब्रेंट क्रूड की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंची
इस पूरी घटना का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होती है. संघर्ष बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो तेल और गैस की कीमतों में बड़ी तेजी आ सकती है.

भारत के लिए भी यह संकट चिंता का विषय है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है. हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में होर्मुज पर निर्भरता कम की है, लेकिन रसोई गैस (LPG) के मामले में स्थिति अलग है. भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और उसमें से करीब 90 प्रतिशत सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है. ऐसे में यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों पर असर पड़ सकता है.

अरब मुल्कों में ईरान के हमले
इसके अलावा खाड़ी के छह देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. इनमें बड़ी संख्या कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत में है, जहां हाल के दिनों में मिसाइल हमलों और एयर डिफेंस अलर्ट की घटनाएं सामने आई हैं. संघर्ष के दौरान अब तक कई भारतीयों की मौत की खबरें भी आई हैं. भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाजों तथा नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है.

कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो दुनिया को तेल संकट, महंगाई और क्षेत्रीय अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है.

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, 140 ठिकानों पर हमले से मिडिल ईस्ट दहला

 तेहरान
 मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। रविवार तड़के अमेरिका ने ईरान पर हमले का नया दौर शुरू किया। अमेरिका ने ईरान में 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात पर मिसाइल हमले किए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यह हमला होर्मुज में साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज पर हुए हमले के जवाब में किया गया।

CENTCOM ने एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में लिखा कि आज शाम 7:15 बजे (ET), U.S. सेंट्रल कमांड की फोर्स ने ईरान के खिलाफ इस हफ़्ते हमले का तीसरा दौर शुरू किया। यह कार्रवाई तब की गई जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की फोर्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज़ ‘M/V GFS Galaxy’ पर खुलेआम हमला किया।

इस हमले में जहाज के क्रू का एक सदस्य लापता है और जहाज पर आग लगने तथा इंजन रूम को काफी नुकसान पहुंचने के कारण वह अपनी यात्रा जारी नहीं रख पा रहा है।

व्यावसायिक जहाजों पर पहले हुए हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद, ईरान को ‘मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (समझौता ज्ञापन) का पालन करने का एक और मौका दिया गया था, लेकिन वह फिर से ऐसा करने में नाकाम रहा।

इसके जवाब में, अमेरिका ईरान की उस क्षमता को कम करके उसे भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रहा है, जिसके जरिए वह स्ट्रेट से गुजरने वाले आम नाविकों और व्यावसायिक जहाजों पर आसानी से हमले करता है। ये हमले कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर किए जा रहे हैं।

वहीं CENTCOM की X पोस्ट का जवाब देते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने गलत फैसला किया, अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।

CENTCOM के मुताबिक, जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया है, उनमें ईरान की मिसाइल और ड्रोन साइटें, नौसैनिक क्षमताएं, गोला-बारूद भंडारण सुविधाएं, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्र शामिल है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि इन हमलों से ईरान की स्ट्रेट से गुजरने वाले नागरिकों और जहाजों पर आसानी से हमला करने की क्षमता में कमी आएगी।

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद डिपो और रडार साइट को निशाना बनाया। जबकि बहरीन में अमेरिकी कम्युनिकेशन सिस्टम और रडार साइट को निशाना बनाया गया।

दोनों देशों के बीच तनाव के बीच ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अब एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो चुका है. गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हमने पहले ही कहा था-वादा निभाओ, नहीं तो कीमच चुकाओ। उन्होंने आगे लिखा, अब हकीकत सामने है।

ओमान तट जहाज हमले में 10 भारतीय सुरक्षित, एक की तलाश जारी

नई दिल्ली
विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान तट पर एक कमर्शियल जहाज ‘GFS गैलेक्सी’ पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में बताया कि जहाज पर सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी लापता है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ओमान के तट पर वाणिज्यिक जहाज ‘जीएफएस गैलेक्सी’ को निशाना बनाकर किए गए इस हमले के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था. जहाज पर सवार 11 भारतीयों में से 10 को तो बचा लिया गया, लेकिन एक लापता भारतीय की तलाश अभी-भी जारी है. ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और चल रहे सर्च-रेस्क्यू ऑपरेशन में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है. भारत ने संकट के इस समय में सहयोग देने के लिए ओमान के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है.

मंत्रालय ने अपने बयान में इस बात पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं जो बेहद चिंताजनक हैं. भारत सरकार ने वैश्विक मंच से एक बार फिर दोहराया है कि क्षेत्र में तनाव को तुरंत कम (डी-escalate) किया जाना चाहिए. इसके साथ ही जारी राजनयिक वार्ताओं को किसी तार्किक और शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि पूरे क्षेत्र में फिर से शांति और स्थिरता लौट सके.

भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने का ये सिलसिला अब हर हाल में बंद होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सिद्धांतों के अनुरूप, क्षेत्र के सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त और बेरोकटोक नौवहन तथा वाणिज्यिक गतिविधियों को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक व्यापार सुरक्षित तरीके से चल सके.

अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज, हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट अनिश्चितकाल के लिए बंद हुआ।

नई दिल्ली
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की जंग एक बार फिर से जोर पकड़ रही है। शनिवार देर रात अमेरिका ने ईरान के ऊपर आरोप लगाया कि उसने साइप्रस के झंडे वाले एक जहाज पर हमला किया है। इसके बाद अमेरिका की तरफ से ईरान के करीब 140 ठिकानों पर हमला किया गया। इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और कुवैत, बहरीन समेत मिडिल ईस्ट में मौजूद तमाम यूएस ठिकानों और लॉजिस्टिक्स बेसों को निशाना बनाया।’इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका आगे हमला करता है, तो वह तगड़ा पलटवार करेगा।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ, जब ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज के ऊपर क्रज मिसाइल से हमला कर दिया। साइप्रस के झंडे वाले इस जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और एक क्रू मेम्बर लापता हो गया। इसके बाद सेंटकॉम ने कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला किया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बुशहर, जस्क जैसे तमाम शहरों में धमाकों की आवाजें सुनाई दी हैं। अमेरिका ने इस हमले के बाद खुले तौर पर कहा कि ईरान ने होर्मुज से निकलने वाले जहाज पर हमला करके गलत किया है। इसका उन्हें जवाब दिया गया है।

ईरान ने साइप्रस के जहाज पर हमले की बात स्वीकारी
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने उस जहाज को रोकने की कोशिश की थी। लेकिन वह ट्रांसपोंडर बंद करके लगातार आगे बढ़ता रहा। इसके बाद उसे रोकने के लिए गोलियां चलाई गईं, लेकिन जब वह नहीं रुका। तो उस पर क्रूज मिसाइल दागी गई। विशेषज्ञों के मुताबिक मामला यहीं बिगड़ गया। शुक्रवार को ही ट्रंप ने ऐलान कर दिया था कि सीजफायर खत्म हो चुका है। अब अगर ईरान कोई हरकत करता है, तो वह हजारों मिसाइलें पहले ही उनकी तरफ तानकर बैठे हैं।

अमेरिका का मानना है कि होर्मुज को पूरी तरह से सब के लिए खुला रहना चाहिए। लेकिन अपने दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना कर चुका ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। ईरान की तरफ से साफ किया जा चुका है कि होर्मुज से अगर किसी को निकलना है, तो उसे तेहरान की इजाजत लेनी होगी।

हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अनिश्चितकाल के लिए किया बंद
अमेरिका की तरफ से हुए हमले और फिर ईरान के पलटवार के बाद एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट पर संकट खड़ा हो गया है। IRGC की तरफ से कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट फिलहाल बंद है। यह तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका इस क्षेत्र में हस्तक्षेप करना बंद नहीं कर देता। ईरान ने इसके साथ ही बताया कि उनकी मंजूरी के बिना स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे एक और जहाज को निशाना बनाया गया है।

ईरान के इस ऐलान के बाद एक बार फिर से वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा होना शुरू हो गया है। 60 दिनों का युद्धविराम समाप्त होने के बाद एक बार फिर से अमेरिका और ईरान युद्ध के मुहाने पर हैं।

16 जून को हुई डील का सम्मान करे अमेरिका-ईरान
इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच ईरान ने अमेरिका से 16 जून को हुई डील का सम्मान करने के लिए कहा है। ईरानी सेना की तरफ से कहा गया कि अमेरिका को 16 जून को हुई डील का सम्मान करना चाहिए। अगर अमेरिका इसे नहीं मानता है, तो ईरान को अपने हितों की रक्षा के लिए पश्चिम एशिया में मौजूद सभी यूएस ठिकानों को निशाना बनाना पड़ेगा। वहीं, दूसरी तरफ ईरान की तरफ से अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने वाले गालिबेफ ने कहा कि अब एक तरफा डील करने का दौर खत्म हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “एक तरफा डील करने का दौर अब खत्म हो गया है। हमने कहा था कि या तो अपने शब्दों पर कायम रहना या फिर कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना। हकीकत अब आपके सामने है।”

इसके साथ ही गालिबेफ ने डील के आर्टिकल 5 का भी जिक्र किया। इसमें लिखा था कि ईरान होर्मुज से निकलने वाले जहाजों के लिए रास्ता तैयार करेगा और सुरक्षा की व्यवस्था करेगा।

आपको बता दें, दोनों देशों के बीच में यह युद्ध ऐसे समय में बढ़ता दिख रहा है, जब दोनों देश शांति वार्ता में लगे हुए हैं। हालांकि, दोनों के बीच में अविश्वास की खाई काफी गहरी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पश्चिम एशिया से अपने ठिकाने हटाने होंगे, वहीं अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियार न रखने और होर्मुज को पूरी तरह से खुला रखने का दबाव बना रहा है।

हाल ही में खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के नारे लगाए गए थे। इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था कि अगर उनके ऊपर कोई हत्या का प्रयास किया जाता है, तो उन्होंने पहले ही आदेश दे दिए हैं। 1000 से ज्यादा मिसाइलें ईरान की तरफ रुख किए हुए हैं। कुछ गलत होने पर ईरान को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा।

नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, इजरायल में नई राजनीतिक बहस तेज हुई

 नई दिल्ली
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के परिवार से जुड़ा एक और नया विवाद सामने आया है। नेतन्याहू के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू ने अपना नाम बदलकर योनातन हुन कर लिया है। लीक हुए डेटा के मुताबिक, नेतन्याहू के बेटे ने यह काम पिछले दो सालों के दौरान ही किया है। क्योंकि 2024 में टैक्स भरने के दौरान उन्होंने अपने जन्म वाले नाम का ही प्रयोग किया था। लेकिन 2026 में जब उन्होंने टैक्स फाइलिंग की, तो अपना नाम बदलकर ‘योनातन हुन’ कर लिया है।

इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू परिवार टैक्स और भ्रष्टाचार के मामलों में फंसा हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री के बड़े बेटे के इस कदम को भी शक की नजर से देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि 34 साल के एक्टिविस्ट और पीएम नेतन्याहू के बेटे ने किन वजहों से यह नाम बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने नाम में यह बदलाव रेगुलेटरी अपडेट उनके मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर के तहत किया गया है। इसमें उन्होंने अपना रेसिडेंशियल एड्रेस बस ‘बाल्फोर 0’ के नाम से दिया है। यह एड्रेस इजरायल के प्रधानमंत्री आवास की तरफ इशारा करता है।

नाम बदलने के मकसद को लेकर लोगों में छिड़ी बहस
पिछले कई सालों से युद्ध में उलझे इजरायल के लोगों के बीच में प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर काफी चर्चा है। लोग इस फैसले के पीछे के मकसद को लेकर बंटे हुए हैं। क्योंकि एक तरफ जहां युद्ध के लिए सभी रिजर्व सैनिकों को बुलाया जा चुका है, वहीं 34 वर्षीय योनातन हुन 2023 से फ्लोरिडा में रह रहे हैं। विदेश में रहने की वजह से इजरायल में उनकी कड़ी आलोचना भी हुई थी। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने युद्ध में लड़ने से बचने के लिए यह तरकीब अपनाई है, वहीं कई लोग इसे टैक्स से जोड़कर देख रहे हैं।

‘योनातन हुन’ नाम में है ऐतिहासिक संदर्भ
इजरायल के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार ने भले ही बेटे के नाम बदलने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन लोगों ने इसका मतलब निकालना शुरू कर दिया है। इजरायली मीडिया के मुताबिक उनका पहला नाम ‘योनातन’ मुख्य रूप से उनके चाचा ;योनी नेतन्याहू’ को श्रद्धांजलि है। वह 1976 में एक युगांडा में एक मिशन को दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद वह इजरायल में एक हीरो के तौर पर देखे जाने लगे थे। बेंजामिन नेतन्याहू के शुरुआती करियर के दौरान उन्हें इसका काफी फायदा मिला था।

दूसरी ओर ‘हुन’ नाम नेतन्याहू परिवार की पुरानी जड़ों की पहचान करवाता है। नेतन्याहू परिवार के बुजुर्ग बेन आर्टजी जब इजरायल में आकर बसे थे, तब उनका नाम बेन नहीं था। यह नाम उन्होंने यहां इजरायल में आकर ही परिवर्तित किया था। आते समय उनका नाम सैमुअल हुन था। इन्हीं की याद में नेतन्याहू के बड़े बेटे ने अपना नाम के दूसरे शब्द में हुन शब्द का प्रयोग किया है। हालांकि, इससे पहले भी युवा नेतन्याहू अपने एक पॉडकॉस्ट के दौरान यायर हुन नाम का प्रयोग कर चुके हैं। लेकिन अब सरकारी काम में उपयोग करने से यह नाम पक्का हो चुका है।

इजरायल के प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नेतन्याहू या उनके ऑफिस की तरफ से भी इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, ट्रंप की 1000 मिसाइलों वाली धमकी से मचा हड़कंप

नई दिल्ली
ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को एक हवाई हमले से हुई थी जिसमें 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. ईरान ने इस सप्ताह खामेनेई को दफनाया. इससे पहले कई दिनों तक अंतिम संस्कार समारोह चला, जिसमें उनके शव को ईरान और इराक दोनों देशों के शहरों में ले जाया गया. खामेनेई की अंतिम यात्रा के बाद सुलह से ज्यादा संग्राम का जो डर लग रहा था, वो सही साबित होता दिख रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं.

वहीं सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अब बातचीत से इनकार कर दिया है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने रुख से पीछे नहीं हटता, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं होगी.

बता दें, इस पूरे हफ्ते अमेरिका और ईरान में सिर्फ बयानों का वार-पलटवार ही नहीं हुआ, मिसाइलों का प्रहार भी जमकर हुआ. होर्मुज में जहाजों पर हमलों से शुरू हुई लड़ाई कुछ ही घंटों में ईरान के अलग-अलग शहरों में बमबारी तक पहुंच गई.

एक तरफ ईरान अली खामेनेई को दफनाने की तैयारियों में जुटा था तो दूसरी तरफ उसे अमेरिका के हमले का जवाब देने के लिए कतर और बहरीन तक सैन्य ठिकानों पर निशाने लगाने पड़े. दोनों इतने पर ही नहीं रुके. अमेरिका ने तेहरान के आसपास कई इलाकों में ताबड़तोड़ हमले किए, पुल उड़ा डाले और ऑयल रिफाइनरी तक को निशाना बनाया.

वहीं, ईरान ने तेल अवीव और कई इलाकों में इजरायल के मिलिट्री बेस को बर्बाद कर दिया. सीजफायर की धज्जियां उड़ाते इन हालातों ने ट्रंप का गुस्सा और बढ़ा दिया. पहले उन्होंने बयान दिया कि हमने अच्छे होने की वजह से ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी है ताकि वो अपने नेता को अंतिम विदाई दे पाएं, फिर ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध में हमारे हाथों पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. लेकिन अब ट्रंप का जो ताजा बयान आया है, उसने तो हड़कंप मचा दिया है.

एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखने को तैयार
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शेयर की पोस्ट में कहा है कि अगर ईरान की सरकार ने अपनी उस धमकी पर अमल किया, जिसमें उसने अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति (यानी मुझपर) जानलेवा हमला करने या हत्या करने की बात कही है, तो ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं. इसके तुरंत बाद हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी. इसके लिए आदेश दिए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार और सक्षम है कि वो एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखे और ईरान के हर इलाके को पूरी तरह तबाह और बर्बाद कर दे.

ट्रंप ने इस पोस्ट के जरिए एक तरफ जहां अमेरिकी सेना के महायुद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का संदेश दिया है, वहीं ये भी साफ कर दिया है कि फिलहाल जो हालात हैं, उनमें युद्ध किसी भी पल फिर से शुरू हो सकता है. वैसे भी वो बार बार दोहरा रहे हैं कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है.

ईरान भी अमेरिका पर ही आरोप लगा रहा है कि ये सब उसी का किया धरा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर लिखा, ईरान ने अब तक अपना वादा निभाया है, जबकि अमेरिका ने MoU के पैरा 9 का उल्लंघन किया. अमेरिका एक के बाद एक उल्लंघन कर रहा है. सीजफायर के स्थायी होने की सारी उम्मीदें फिलहाल टूट चुकी हैं. अब दोनों देशों की मिसाइलें तैयार हैं. गरजने के लिए भी, बरसने के लिए भी.

बिजली संकट से जूझते पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक का सहारा, पावर ग्रिड सुधार के लिए $375.9 मिलियन की डील

इस्लामाबाद

वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान के बिजली ग्रिड को मजबूत करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए 375.9 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी है. यह रकम पाकिस्तान के ग्रिड स्टेबिलिटी एन्हांसमेंट प्रोजेक्ट के लिए दी गई है, जो ‘बेस्ट-पाक’ नाम के दस साल के बड़े कार्यक्रम का पहला चरण है. इस प्रोजेक्ट का मकसद बिजली कटौती को कम करना, ट्रांसमिशन नेटवर्क को आधुनिक बनाना और घरों, दुकानों और उद्योगों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाना है। 

वर्ल्ड बैंक की पाकिस्तान कंट्री डायरेक्टर बोलोरमा अमगाबाजार ने कहा कि पाकिस्तान की एनर्जी समस्याएं देश की आर्थिक स्थिति से गहराई से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने कहा कि मजबूत ट्रांसमिशन ढांचे में निवेश से बिजली की लागत घटेगी और ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड में जुड़ सकेगी। 

पाकिस्तान का बिजली नेटवर्क लंबे समय से अस्थिर ग्रिड और ट्रांसमिशन में रुकावटों से जूझ रहा है, जिससे लाखों लोगों को रोजाना बिजली कटौती, महंगी बिजली और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। 

इस प्रोजेक्ट के तहत तीन बड़े 500 केवी सब स्टेशनों पर स्टेटिक सिंक्रोनस कंपेनसेटर यानी सेटकॉम लगाए जाएंगे. इसके अलावा 26 ग्रिड सब स्टेशनों पर रिएक्टर और कैपेसिटर बैंक भी लगाए जाएंगे। 

इससे दक्षिणी पाकिस्तान में 640 मेगावाट विंड एनर्जी को ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा और वहां की कुल 1,840 मेगावाट पवन क्षमता का पूरा इस्तेमाल हो सकेगा. साथ ही करीब 491 मेगावाट की निजी क्षेत्र की रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को भी ग्रिड से जोड़ने में मदद मिलेगी। 

इन सुधारों से पाकिस्तान साल 2030 तक अपनी बिजली में 60 फीसदी हिस्सेदारी रिन्यूएबल एनर्जी से पूरी करने के लक्ष्य के करीब पहुंच सकेगा, जो पेरिस समझौते के तहत तय किया गया है. इस प्रोजेक्ट से हर साल करीब 8 लाख 32 हजार 500 टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, यानी 25 साल में कुल 2 करोड़ 8 लाख टन से ज्यादा। 

‘बेस्ट पाक’ कार्यक्रम के लीड एनर्जी स्पेशलिस्ट वलीद सालेह अलसुरैह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट बड़े पैमाने पर क्लीन एनर्जी लगाने, एनर्जी सुरक्षा मजबूत करने और आधुनिक ट्रांसमिशन क्षेत्र बनाने का रास्ता खोलेगा. यह प्रोजेक्ट नेशनल ट्रांसमिशन एंड डिस्पैच कंपनी यानी NTDC के पुनर्गठन में भी मदद करेगा। 

पाकिस्तान बाढ़ और भीषण गर्मी जैसे जलवायु खतरों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है. इसलिए नई सुविधाओं को ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा और 55 डिग्री सेल्सियस तापमान तक काम करने लायक बनाया जाएगा, ताकि मानसून और गर्मी के मौसम में भी बिजली आपूर्ति बनी रहे। 

पाकिस्तान 1950 से वर्ल्ड बैंक का सदस्य है और अब तक उसे 51.2 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता मिल चुकी है. मौजूदा समय में वर्ल्ड बैंक की 52 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 16.9 अरब डॉलर है। 

ट्रंप के बेटे पर ₹5700 करोड़ के नुकसान का आरोप, हजारों निवेशकों को भी लगा बड़ा झटका

वाशिंगटन

कभी सिर्फ बिटकॉइन माइनिंग के दम पर बड़ा मुनाफा कमाने का सपना दिखाने वाली अमेरिकन बिटकॉइन कॉर्प (American Bitcoin Corp.) अब खुद भारी मुश्किल में फंस गई है. यह कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बेटे एरिक ट्रंप (Eric Trump) की है. पिछले 10 महीनों में इसके शेयर 95 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं. इसका असर सीधे एरिक ट्रंप की दौलत पर पड़ा है. उनकी हिस्सेदारी की बाजार कीमत करीब 600 मिलियन डॉलर यानी लगभग 5722 करोड़ रुपये कम हो गई है। 

हालात इतने खराब हो गए कि कंपनी को नैस्डैक (Nasdaq) स्टॉक एक्सचेंज में अपनी लिस्टिंग बचाए रखने के लिए रिवर्स स्टॉक स्प्लिट करना पड़ा. इसके तहत 15 पुराने शेयरों को मिलाकर 1 नया शेयर बनाया गया. इसके बावजूद कंपनी का शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके बावजूद कंपनी का शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. यानी एरिक अपने साथ कंपनी के हजारों इन्वेस्टर्स की संपत्ति भी ले डूबे हैं। 

आखिर ऐसा क्या हुआ?
जब यह कंपनी शुरू हुई थी, तब इसकी पूरी रणनीति बिटकॉइन माइनिंग पर टिकी थी. कंपनी का मानना था कि ज्यादा से ज्यादा बिटकॉइन निकालकर और उसे जमा करके आगे बड़ा फायदा होगा. लेकिन पिछले कुछ महीनों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. बिटकॉइन की कीमतों में बड़ी गिरावट आ गई. दूसरी तरफ AI का कारोबार तेजी से बढ़ने लगा. ऐसे में निवेशकों ने उन कंपनियों को पसंद करना शुरू कर दिया, जिन्होंने अपनी बिजली, जमीन और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल AI डेटा सेंटर बनाने में शुरू कर दिया. यहीं पर अमेरिकी बिटकॉइन पीछे रह गई। 

दूसरी कंपनियां बदल गईं, यह नहीं बदली
रायट प्लेटफॉर्म्स (Riot Platforms), मारा होल्डिंग्स (MARA Holdings), सिफर डिजिटल (Cipher Digital) और टेरावुल्फ (TeraWulf) जैसी कई अमेरिकी कंपनियों ने बिटकॉइन माइनिंग के साथ साथ AI डेटा सेंटर का कारोबार भी शुरू कर दिया. इसका फायदा उन्हें मिला और इस साल उनके शेयर औसतन 60 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए. इसके उलट अमेरिकी बिटकॉइन सिर्फ बिटकॉइन पर ही भरोसा करती रही. इसी वजह से कंपनी के शेयर लगातार टूटते गए। 

AI में क्यों नहीं उतर पाई कंपनी?
असल में कंपनी के पास सिर्फ बिटकॉइन माइनिंग मशीनें और बिटकॉइन हैं. जबकि बिजली, जमीन, डेटा सेंटर और दूसरी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं उसकी साझेदार कंपनी हट 8 (Hut 8) के पास हैं. हट 8 ने अपनी रणनीति बदलते हुए AI डेटा सेंटर के कारोबार पर बड़ा दांव लगाया और उसके शेयर इस साल दोगुने से ज्यादा चढ़ गए. लेकिन अमेरिकी बिटकॉइन के पास ऐसा करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। 

फिर भी बिटकॉइन पर भरोसा कायम
इतनी गिरावट के बावजूद कंपनी पीछे हटने को तैयार नहीं है. एरिक ट्रंप का कहना है कि कंपनी अपने बिटकॉइन नहीं बेचेगी, जब तक कोई बेहद गंभीर स्थिति पैदा न हो जाए. इतना ही नहीं, कंपनी ने हाल ही में बाजार से 500 और बिटकॉइन खरीद लिए. उसका मानना है कि जब बाकी कंपनियां AI की तरफ जा रही हैं, तब बिटकॉइन नेटवर्क में प्रतिस्पर्धा कम होगी और भविष्य में ज्यादा बिटकॉइन कमाने का मौका मिलेगा। 

कंपनी को कितना नुकसान हुआ?
वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी को 118.2 मिलियन डॉलर का ऑपरेटिंग लॉस हुआ. इसमें सबसे बड़ा कारण उसके पास मौजूद बिटकॉइन की कीमत घटने से हुआ करीब 117.2 मिलियन डॉलर का नुकसान रहा। 

क्या आगे रिकवरी हो सकती है?
बाजार के कई जानकारों का मानना है कि बिटकॉइन अपने इस चक्र के निचले स्तर के आसपास हो सकता है. अगर आने वाले महीनों में इसकी कीमत दोबारा तेजी से बढ़ती है तो अमेरिकी बिटकॉइन को भी फायदा मिल सकता है. हालांकि फिलहाल कंपनी का पूरा भविष्य लगभग एक ही चीज पर टिका है. अगर बिटकॉइन की कीमत बढ़ी तो कंपनी संभल सकती है. लेकिन अगर गिरावट जारी रही तो एरिक ट्रंप की इस बड़ी क्रिप्टो कंपनी के सामने मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। 

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