सहारा मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनेगा SEBI की चुनौती याचिका

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) के उस फैसले के एक हिस्से को चुनौती दी गई है, जिसमें सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईसीसीएल) के प्रबंधकों और कंपनी सचिव को राहत दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। सेबी की याचिका के अलावा, शीर्ष अदालत ने सहारा समूह से जुड़े सभी लंबित मामलों, जिनमें निवेशकों के धन की वापसी का मामला भी शामिल है, को भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

निदेशकों की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को को इस मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए सहारा समूह के चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया था और इस याचिका को कंपनी से जुड़े लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया था। अदालत ने अधिकारियों को 13 जुलाई तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।
इससे पहले, नौ मार्च को सैट ने एसआईसीसीएल के खिलाफ सेबी की नियामकीय कार्रवाई को बरकरार रखते हुए कंपनी और उसके निदेशकों की अपील खारिज कर दी थी।

क्या है पूरा मामला?
मामला 1998 से 2008 के बीच कथित रूप से वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) के अवैध निर्गम से जुड़ा है। सैट की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि इस अवधि में एसआईसीसीएल द्वारा जारी ओएफसीडी सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक ऑफर) की श्रेणी में आते हैं, इसलिए वे सेबी के नियामकीय अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत हैं।

न्यायाधिकरण के अनुसार, कंपनी ने इन डिबेंचर के माध्यम से लगभग 1.98 करोड़ निवेशकों से करीब 14,106 करोड़ रुपये जुटाए थे। इतने बड़े पैमाने पर इतनी बड़ी संख्या में निवेशकों से धन जुटाने को निजी नियोजन नहीं माना जा सकता, जैसा कि कंपनी का दावा था। हालांकि, सैट ने कंपनी और उसके निदेशकों की अपील खारिज करते हुए चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव की अलग अपील स्वीकार कर ली थी।

सेबी ने सैट को उच्चतम न्यायालय में दी चुनौती
न्यायाधिकरण ने कहा था कि कर्मचारी होने के नाते उन्हें कंपनी के कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। सैट ने यह भी कहा था कि कंपनी सचिव ने निदेशकों द्वारा दी गई ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के आधार पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे और इस कारण अंतिम जिम्मेदारी निदेशकों की ही बनती है।
सेबी ने अब सैट के इसी हिस्से को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। यह मामला सेबी के अक्टूबर, 2018 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एसआईसीसीएल को ओएफसीडी के जरिये जुटाई गई राशि निवेशकों को लौटाने, अपनी परिसंपत्तियों का ब्योरा देने और कुछ अधिकारियों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया था।

 

डी-मार्ट का शानदार प्रदर्शन, पहली तिमाही में मुनाफा बढ़कर 860 करोड़ रुपये पहुंचा

 नई दिल्ली
रिटेल आउटलेट्स डी-मार्ट का संचालन करने वाली कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 11.33 प्रतिशत बढ़कर 860.44 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में 772.81 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। एवेन्यू सुपरमार्ट्स ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसकी ऑपरेटिंग रेवन्यू अप्रैल-जून तिमाही में 14.9 प्रतिशत बढ़कर 18,794.53 करोड़ रुपये हो गई, जो 2025-26 की समान तिमाही में 16,359.70 करोड़ रुपये थी। बता दें, इस कंपनी के प्रमोटर्स राधाकिशन दमानी है। Trendlyne के डाटा के अनुसार उनके पास 23 प्रतिशत हिस्सा है।

कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 74.50 प्रतिशत है। पब्लिक के पास 7.6 प्रतिशत हिस्सा है। एफआईआई के पास 9 प्रतिशत हिस्सा है। म्यूचुअल फंड्स के पास 6.8 प्रतिशत हिस्सा है। बता दें, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फंड और एसबीआई म्यूचुअल फंड की कंपनी में हिस्सेदारी है।

सोमवार को फोकस में रहेंगे शेयर
तिमाही नतीजे के सामने आने के बाद अब सोमवार को कंपनी के शेयरों फोकस में रहेंगे। शुक्रवार को बाजार के बंद होने के समय स्टॉक 0.09 प्रतिशत की तेजी के साथ 4083.05 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। बीते 6 महीने के दौरान कंपनी के शेयरों की कीमतों में 7.30 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। 2026 में यह स्टॉक 9.83 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। हालांकि, इसके बाद भी एक साल में यह स्टॉक 2.03 प्रतिशत गिरा है। इस दौरान सेंसेक्स इंडेक्स में 6.76 प्रतिशत लुढ़का है।

दो साल में एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड के शेयरों का दाम 15.63 प्रतिशत गिरा है। तीन साल में कंपनी के शेयरों का दाम 8.58 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। 5 साल में यह स्टॉक 20.84 प्रतिशत चढ़ा है। हालांकि यह सेंसेक्स इंडेक्स के 48.07 प्रतिशत के रिटर्न की तुलना में काफी कम है।

कंपनी के सीईओ ने क्या कुछ कहा
पारंपरिक स्टोर व्यवसाय के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कंपनी के एमडी एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अंशुल असावा ने कहा कि दो साल या उससे अधिक पुराने डी-मार्ट स्टोरों की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 5.5 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह 7.1 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा, “बड़े महानगरों में पुराने स्टोरों की वृद्धि दर इस तिमाही में स्थिर रही, जहां प्रति वर्ग फुट राजस्व काफी अधिक है। हालांकि, छोटे शहरों में स्टोरों की वृद्धि अच्छी बनी हुई है।”

E85 पेट्रोल की कीमत पर बड़ा खुलासा, केंद्रीय मंत्री ने बताया कितना सस्ता मिलेगा नया ईंधन

नई दिल्ली
 E20 को लेकर मचे बवाल के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E85 के संबंध में बड़ा ऐलान कर दिया है. उन्होंने इसकी कीमत के बारे में एक हिंट दे दी है. पुरी ने E20 से हुए फॉरेक्स रिजर्व के बारे में बताते हुए यह कहा कि E85 पर भी काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि इसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा. हालांकि, इसे अभी भी खरीदा जा सकता है लेकिन यह बहुत लिमिटेड लोकेशन पर ही मिलता है. बहरहाल, हरदीप पुरी ने साफ कहा है कि E85 की कीमत E20 से 20 रुपये कम होगी. मतलब यह फ्यूल 80-85 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर मिल सकता है। 

बता दें कि सरकार का लॉन्ग टर्म टारगेट एथेनॉल ब्लेंड को 85 फीसदी तक लेकर जाने का है. हालांकि, E85 फ्यूल केवल उन्हीं गाड़ियों में इस्तेमाल हो सकता है जिनका इजंन फ्लेक्स फ्यूल कंपेटिबल हो. इसके लिए वाहन कंपनियों को नई गाड़ियों का ही निर्माण करना होगा, जिसमें फिलहाल कुछ टाइम लगेगा. लेकिन उससे पहले ही हरदीप पुरी ने ऐलान कर दिया है कि 85 फीसदी ब्लेंड वाला फ्यूल E20 से भी 20 रुपये सस्ता बेचा जाएगा।

कितना पैसा बचा
इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से क्रूड के आयात में कितनी आई है. बकौल हरदीप पुरी, “पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से भारत को अब तक 309.98 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल बाहर से कम मंगाना पड़ा है.” यानी एथेनॉल ने इतने कच्चे तेल की जगह ले ली, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचा है. उन्होंने यह भी बताया E20 की वजह से वातावरण में 931.502 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाय-ऑक्साइड (सीओ2) का कम उत्सर्जन हुआ है. इससे प्रदूषण घटाने में काफी मदद मिली है। 

सुजूकी नहीं मिली शिकायत
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, “सुजूकी (मारुति-सुजूकी) ने 1.5 करोड़ गाड़ियों की सर्विसिंग की है. किसी भी गाड़ी में एथेनॉल के कारण किसी डैमेज की रिपोर्ट नहीं है. काफी अफवाह फैलाई जा रही है. कई कंपनियों ने कहा कि वह इंश्योरेंस कवर नहीं देंगी लेकिन अब वह मसला भी सुलझा लिया गया है.” गाड़ी की माइलेज और एफीशिएंसी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में हरदीप पुरी ने कहा है कि इससे गाड़ियों का इंजन नहीं खराब हो रहा. उनका कहना है, “जब आप माइलेज की बात करते हैं तो आपको बड़ी तस्वीर देखनी होती है. आपको बेहतर एक्सेलरेशन मिल रहा है. बेहतर ऑक्टेन काउंट मिल रहा है. इंजन को कोई डैमेज नहीं हो रहा है. आपको समय के साथ ऐसी टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ना होता है जो पर्यावरण के लिए बेहतर हो. एथेनॉल इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। 

वाहन चालक कर रहे शिकायत
जब से E20 फ्यूल को पूरी तरह से लागू किया गया है तब से कई चालक सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ अपना गुस्सा दिखा रहे हैं. उनका कहना है कि इससे उनकी गाड़ी का इंजन खराब हो रहा है. कई लोगों की शिकायत है कि उनकी गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो गया है. कुछ ने यह भी कि उनकी नई गाड़ियों का इंजन पूरी तरह बैठ गया और उन्हें कई हजारों की चपत लगी. हालांकि, सरकार ने इस तरह की किसी भी परेशानी को नकार दिया है। 

 

TCS का तिमाही मुनाफा ₹13,349 करोड़, कंपनी ने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का भी किया ऐलान

मुंबई 
टाटा ग्रुप (Tata Group) की सबसे बड़ी कंपनी और देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने 9 जुलाई 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीज पेश कर दिए हैं. कंपनी ने तिमाही नतीजों के साथ-साथ शेयरधारकों के लिए 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है। 

TCS द्वारा रेगुलेटरी फाइलिंग में दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी। 

TCS के प्रॉफिट में उछाल  

ग्लोबल चुनौतियों के बीच TCS का समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 4.62 फीसदी बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये रहा. पिछले वर्ष की इसी समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 12,760 करोड़ रुपये था। 

अगर रेवेन्यू की बात करें तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान इसमें 13.93 फीसदी की अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी गई. यह आंकड़ा पिछले साल के 63,437 करोड़ रुपये से बढ़कर इस बार 72,275 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। 

TCS के ये नतीजे आईटी क्षेत्र की स्थिरता और मजबूती को दर्शाते हैं. राजस्व में लगभग 14% और मुनाफे में 4.6% से अधिक की बढ़त के साथ-साथ 12 प्रति शेयर का डिविडेंड निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 

कैसे रहे टीसीएस के नतीजे?
    संचालन से होने वाला रेवेन्यू सालाना आधार पर 14% बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही (Q4) के मुकाबले रुपये में इसमें 2.2% और कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) में 0.4% की बढ़त रही।

    इस तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 24% और नेट मार्जिन 19.2% रहा।
    ऑपरेशन्स से मिलने वाला नेट कैश 12,412 करोड़ रुपये रहा, जो कंपनी की शुद्ध आय का 93% है।

कंपनी को मिले बड़े ऑर्डर
TCS ने इस तिमाही के दौरान 9.5 अरब डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। इनमें ये शामिल रहे:

    दिग्गज कंपनी SKF के साथ 80 करोड़ डॉलर की बड़ी एआई-आधारित ट्रांसफॉर्मेशन डील।
    ServiceNow के साथ कई मिलियन डॉलर की रणनीतिक साझेदारी।
    यूरोप की एक फॉर्च्यून ग्लोबल 50 कंपनी के साथ बड़ा कॉन्ट्रैक्ट।

AI बिजनेस में उछाल
कंपनी का एआई (AI) बिजनेस काफी तेजी से बढ़ रहा है। पहली तिमाही में टीसीएस का सालाना एआई रेवेन्यू रन रेट 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही से 13.6% ज्यादा है। कंपनी को आईटी ऑपरेशन्स, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, क्लाउड और सास (SaaS) इंप्लीमेंटेशन जैसे क्षेत्रों में कई एआई कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं।

TCS के शेयरों का हाल
TCS ने अपने नतीजों का ऐलान गुरुवार को बाजार बंद होने के बाद किया। गुरुवार को कंपनी का शेयर मामूली गिरावट के साथ 2,049.50 रुपये पर बंद हुआ। बीते कुछ समय से आईटी सेक्टर में जारी सुस्ती के कारण इस स्टॉक में पिछले एक महीने में 4% और साल 2026 में अब तक करीब 36% की गिरावट देखी गई है।

डिविडेंड का भी ऐलान
डिविडेंड पाने के लिए पात्र शेयरधारकों की योग्यता तय करने हेतु कंपनी ने बुधवार 15 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित किया है.कंपनी इस अंतरिम डिविडेंड का भुगतान शुक्रवार 31 जुलाई 2026 को करेगी। 

इस बीच गुरुवार को TCS के शेयर मामूली बढ़त के साथ 2,059 रुपये पर बंद हुआ. इस साल अब तक TCS का शेयर करीब 36 फीसदी गिर चुका है. जबकि एक साल में करीब 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. यही नहीं, पिछले 5 साल में भी टीसीएस के शेयर ने निवेशकों को निराश किया है।  5 साल कंपनी के शेयर ने निवेशकों को 35 फीसदी की नुकसान कराया है.

मुनाफे और कुल कमाई के ताजा आंकड़े क्या कहते हैं?
जून तिमाही के जारी नतीजों के मुताबिक, टीसीएस का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 5% बढ़कर ₹13,349 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹12,760 करोड़ था। वहीं, संचालन से प्राप्त राजस्व में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत का तगड़ा उछाल आया है और यह ₹72,275 करोड़ पर पहुंच गया है। तिमाही आधार पर (QoQ) कंपनी के राजस्व में रुपये के संदर्भ में 2.2% और कॉन्स्टेंट करेंसी के मामले में 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई है।

मार्जिन और कैश फ्लो के मोर्चे पर कैसी रही स्थिति?
चुनौतीपूर्ण माहौल में भी कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति को बेहद मजबूत बनाए रखा है। इस तिमाही के दौरान टीसीएस का ऑपरेटिंग मार्जिन 24% और नेट मार्जिन 19.2% रहा है (जिसमें असाधारण मदों को शामिल नहीं किया गया है)। कंपनी के पास नकदी का प्रवाह भी शानदार रहा है। परिचालन से हासिल शुद्ध नकदी ₹12,412 करोड़ रही, जो कंपनी की शुद्ध आय का लगभग 93% है। निवेशकों के लिए अच्छी खबर यह है कि टीसीएस ने अंतरिम लाभांश भुगतान के लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

कंपनी के पास कितने अरब डॉलर के नए ऑर्डर हैं?

    भविष्य में कंपनी की ग्रोथ कैसी रहेगी, इसका अंदाजा इसके मजबूत ऑर्डर बुक से लगाया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में टीसीएस के पास कुल $9.5 बिलियन (9.5 अरब डॉलर) की मजबूत डील पाइपलाइन रही। इसमें प्रमुख सौदों की बात करें तो:
    एसकेएफ के साथ $800 मिलियन का एआई-आधारित ट्रांसफॉर्मेशन डील शामिल है।
    सर्विसनाउ के साथ मल्टी-मिलियन डॉलर की रणनीतिक साझेदारी।
    यूरोप की एक फॉर्च्यून ग्लोबल 50 कंपनी के साथ मल्टी-मिलियन डॉलर का बड़ा सौदा शामिल है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में टीसीएस कहां खड़ी है?
एआई (AI) के क्षेत्र में कंपनी की रफ्तार काफी तेज हो चुकी है। पहली तिमाही में टीसीएस का सालाना एआई राजस्व रन रेट $2.6 बिलियन तक पहुंच गया, जिसमें पिछली तिमाही की तुलना में 13.6% की बढ़ोतरी देखी गई है। टीसीएस के सीईओ के. कृत्तिवासन ने बताया कि भू-राजनीतिक और व्यापक आर्थिक बाधाओं के बावजूद ग्राहकों का निवेश एआई, क्लाउड, साइबर सुरक्षा और प्लेटफॉर्म सरलीकरण में लगातार बढ़ रहा है। टीसीएस ने एंथ्रोपिक और मिस्ट्रल के साथ रणनीतिक साझेदारियां की हैं, जिसके तहत 50,000 कर्मचारियों को ‘क्लाउड’ का एक्सेस मिलेगा।

कर्मचारियों और नौकरी छोड़ने की दर की क्या स्थिति है?
जून के अंत में टीसीएस के कुल कर्मचारियों की संख्या 5,93,798 रही। आईटी सेवाओं में पिछले 12 महीनों की नौकरी छोड़ने की दर 13.6% दर्ज की गई है। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपने सभी कर्मचारियों के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि की प्रक्रिया पूरी कर ली है। साथ ही, अपने वेतन ढांचे को भारत के नए लेबर कोड (श्रम संहिता) की आवश्यकताओं के अनुरूप सुव्यवस्थित किया है।

 

मोबाइल रिचार्ज होगा महंगा! Jio, Airtel और Vi 15% तक बढ़ा सकते हैं प्लान की कीमतें

नई दिल्ली
 देश की दूरसंचार कंपनियां अगले तीन से चार महीनों के भीतर मोबाइल रिचार्ज में 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। माना जा रहा है कि टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होने और 4जी और 5जी सेवाओं की बढ़ती मांग के चलते कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना आसान हो गया है।

टेलीकॉम और इंटरनेट पर ब्रोकरेज फर्म सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टेलीकाम बाजार में अब सीमित बड़ी कंपनियां बची हैं, जिससे टैरिफ बढ़ाने की संभावना मजबूत हुई है। अगर ऐसा होता है तो प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के ग्राहकों को ज्यादा भुगतान रना पड़ सकता है।

प्रति यूजर कमाई में 1.5% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद
रिपोर्ट में टेलीकॉम सेक्टर के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का भी अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार जून तिमाही में देश की तीनों बड़ी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों यानी जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया के प्रति यूजर होने वाले औसत रेवेन्यू यानी एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) में तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर 1 से 1.5% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

2G से 4G-5G पर शिफ्ट हो रहे हैं ग्राहक
कंपनियों के ARPU में सुधार की सबसे बड़ी वजह ग्राहकों का तेजी से 2G नेटवर्क छोड़कर 4G और 5G नेटवर्क पर जाना है। इसके अलावा, पोस्टपेड ग्राहकों की बढ़ती संख्या से भी प्रति यूजर कमाई में बढ़ोतरी हो रही है।

जियो और एयरटेल के बढ़ेंगे ग्राहक
सेंट्रम की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के यूजर लगातार बढ़ रहे हैं। जून तिमाही में रिलायंस जियो के करीब 70 लाख नए ग्राहक जोड़ने की उम्मीद है। वहीं भारती एयरटेल के ग्राहकों में लगभग 50 लाख की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके मुकाबले वोडाफोन-आइडिया केवल 2 लाख ग्राहक ही जोड़ पाएगी।

अगले 3-4 महीनों में लग सकता है झटका
हाल ही में वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए टेलीकॉम और इंटरनेट सेक्टर पर सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च (Centrum Institutional Research) ने एक प्रीव्यू रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में एक बड़ा दावा किया गया है कि प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर्स अपने प्रीपेड प्लान्स की कीमतों में सीधे 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकते हैं। ग्राहकों के लिए चिंता की बात यह है कि यह बढ़ोतरी लागू होने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगेगा; रिपोर्ट के मुताबिक अगले 3 से 4 महीनों के भीतर ही नए और महंगे प्लान्स बाजार में आ सकते हैं।

आखिर क्यों महंगे हो रहे हैं प्लान्स?
इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह टेलीकॉम कंपनियों की कमाई का गणित है। पिछले एक या दो तिमाहियों से कंपनियों के प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU – Average Revenue Per User) में कोई खास और ठोस उछाल नहीं देखा गया है। इसके अलावा, रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में पिछले दो वर्षों से कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है।

रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि बाजार में अब केवल 3 प्राइवेट और 1 सरकारी खिलाड़ी ही बचे हैं, जिससे प्राइसिंग का माहौल कंपनियों के काफी अनुकूल हो गया है। ऐसे में हमें पूरी उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में टैरिफ में 12 से 15% का इजाफा होगा।

मौजूदा समय में कंपनियों के ARPU में जो थोड़ा-बहुत सुधार दिख रहा है, वह सिर्फ 2G ग्राहकों के 4G/5G नेटवर्क पर शिफ्ट होने और डेटा की खपत बढ़ने की वजह से है। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर टेलीकॉम कंपनियों को अपने मुनाफे और ARPU में वास्तविक वृद्धि चाहिए, तो उनके पास टैरिफ बढ़ाने के अलावा कोई और मजबूत विकल्प नहीं है।

सिर्फ महंगा रिचार्ज नहीं, बदल सकता है पूरा सिस्टम
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि इस बार टैरिफ बढ़ोतरी सिर्फ रिचार्ज महंगा करने तक सीमित नहीं रह सकती। कंपनियां प्राइसिंग स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव कर सकती हैं। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग तरह के इस्तेमाल के बावजूद कई यूजर्स एक जैसी कीमत चुकाते हैं। भविष्य में कंपनियां यूसेज-आधारित प्राइसिंग मॉडल अपना सकती हैं। 

5G कवरेज बढ़ने से डेटा का इस्तेमाल बढ़ा
देशभर में 4G और 5G नेटवर्क का दायरा बढ़ने के कारण ग्राहकों का डेटा यूसेज लगातार मजबूत बना हुआ है। रिलायंस जियो और एयरटेल ने देश के 90% से ज्यादा जिलों में अपनी 5G सर्विस पहुंचा दी है। अब इन कंपनियों का पूरा फोकस अपने नेटवर्क पर ज्यादा से ज्यादा 5G स्मार्टफोन को जोड़ने पर है।

इसके साथ ही दोनों कंपनियां 5G FWA (फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस) और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेगमेंट में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, क्योंकि इस बाजार में अभी ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं।

वोडाफोन आइडिया भी बढ़ा रही है दायरा
कमजोर ग्राहक ग्रोथ के बावजूद वोडाफोन आइडिया (VIL) भी देश में अपना 5G नेटवर्क बढ़ा रही है। फिलहाल वोडाफोन आइडिया का 5G नेटवर्क करीब 100 शहरों में पहुंच चुका है और कंपनी इसे तेजी से बढ़ा रही है।

एआरपीयू में ग्रोथ
रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में ग्राहक अब 5जी नेटवर्क की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। इसके अलावा पोस्टपेड ग्राहकों की संख्या भी बढ़ रही है। यही वजह है कि दूरसंचार कंपनियों की औसत प्रति ग्राहक आय (एआरपीयू) में जून तिमाही के दौरान 1 से 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर नेटवर्क सेवाओं और ज्यादा डेटा इस्तेमाल के कारण कंपनियों की कमाई लगातार बढ़ रही है। सेंट्रम ने कहा है कि वोडाफोन आइडिया की कीमत पर भारती एयरटेल और रिलायंस जियो बाजार हिस्सेदारी हासिल करना जारी रखेंगे।

अनुमान है कि जून तिमाही में रिलायंस जियो करीब 70 लाख नए ग्राहक जोड़ सकती है। वहीं भारती एयरटेल के साथ लगभग 50 लाख नए ग्राहक जुड़ सकते हैं। वहीं वोडाफोन आइडिया से केवल 2 लाख नए ग्राहक जुड़ने का अनुमान है।

ब्रॉडबैंड सेवाओं की मांग में आई तेजी
ब्राडबैंड सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो और एयरटेल अब देश के 90 प्रतिशत से अधिक जिलों में 5जी सेवाएं उपलब्ध करा चुके हैं। कंपनियां अब ज्यादा से ज्यादा 5जी स्मार्टफोन यूजर्स को अपने नेटवर्क से जोड़ने पर ध्यान दे रही हैं। इसके अलावा 5जी आधारित फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) और ब्राडबैंड सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि इस क्षेत्र में अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं। वोडाफोन आइडिया अपने 5जी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और यह बढ़कर 100 शहरों तक पहुंच गया है। साथ ही कंपनी का एजीआर बकाया भी कम हुआ है।

 

शेयर बाजार में महातबाही! सेंसेक्स 1900+ अंक टूटा, निफ्टी 462 अंक लुढ़का; ट्रंप बोले- अब ईरान से नहीं होगी बात

मुंबई 
शेयर बाजार में अचानक कोहराम (Stock Market Crash) मच गया है. सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को गिरावट के साथ खुलने के बाद आखिरी कारोबारी घंटे में बड़ा भूचाल आया और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1900 अंक से ज्यादा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी 550 अंक से ज्यादा फिसल गया. लार्जकैप, मिडकैप से लेकर स्मॉलकैप तक हर ओर बड़ी गिरावट देखने को मिली है. इस गिरावट का सीधे डोनाल्ड ट्रंप से कनेक्शन नजर आ रहा है, जिन्होंने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है और इसके बाद मार्केट क्रैश हो गया। 

रेड में ओपन, फिर क्रैश हुए सेंसेक्स-निफ्टी 
शेयर मार्केट में बुधवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ लाल निशान पर हुई थी और मार्केट बंद होने से घंटेभर पहले ही सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,180 की तुलना में गिरावट के साथ खुला और महज पांच मिनट के कारोबार के दौरान ही ये 550 अंक से ज्यादा फिसल गया था. इसके बाद काफी देर तर इस हल्की गिरावट में कारोबार करने के बाद खबर लिखे जाने तक दोपहर 2.37 बजे पर BSE Sensex करीब 1900 गिरकर 76,277 के लेवल पर आ गया। 

सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी इंडेक्स का भी बुरा हाल रहा. ये NSE इंडेक्स 24,398 के अपने पिछले बंद के मुकाबले खुलते ही गिरकर 24,259 पर आ गया और खबर लिखे जाने तक इसमें गिरावट की रफ्तार भी तेज हो गई. Nifty 550 अंक की गिरावट लेकर 23,845 पर कारोबार कर रहा था। 

अचानक मार्केट में क्यों चलने लगी गिरावट की आंधी
मार्केट में गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान में बढ़ता तनाव के साथ ग्लोबल मार्केट भी है। अमेरिकी सेना ने ईरान में 80 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देने वाली छूट को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया। इनके चलते ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 2.2% बढ़कर 75.84 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी साफ दिखा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) 5% से अधिक गिरकर तकनीकी मंदी में प्रवेश कर गया, क्योंकि यह जून के रिकॉर्ड हाई से 20% से अधिक नीचे आ गया। एआई से संबंधित शेयरों से निवेशकों के पलायन ने इस गिरावट को और तेज किया। अमेरिकी बाजारों की बात करें तो S&P 500 और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में गिरावट जारी रही। यूरोप का स्टॉक्स 600 (Stoxx 600) सूचकांक भी लगातार तीसरे दिन गिरकर 0.7% नीचे आ गया। हालांकि, इसके विपरीत हांगकांग में अलीबाबा के शेयरों में 11.5% तक की तेजी दर्ज की गई, जबकि चीनी बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली।

Trump ने ईरान पर क्या कहा? 
शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं ईरान के साथ किसी भी तरह की नई डील नहीं करना चाहता हूं. ईरान के साथ समझौते का दौर अब खत्म हो चुका है और उसके साथ बातचीत समय की बर्बादी है. Donald Trump यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने अपने बयान में ये तक कह दिया कि ईरानी बीमार लोग हैं. मैं उनसे कोई डील नहीं करना चाहता. ईरान के साथ किसी नए समझौते की उनकी कोई ख्वाहिश नहीं है. मेरा मानना है कि यह मुद्दा अब खत्म हो चुका है। 

कच्चे तेल में भी लगी आग
ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बड़े बयान का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पर भी देखने को मिला है. ब्रेंट क्रूड की कीमत अचानक 6.50 फीसदी की तगड़ी उछाल के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, तो वहीं WTI Crude Price भी इस तेजी के साथ 75 डॉलर का स्तर एक बार फिर पार कर गया है।  

 

Silver Price Crash: 3 दिन में ₹8,400 टूटी चांदी, जानिए आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का ताजा भाव

 नई दिल्ली

सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट (Gold-Silver Rate Fall) का सिलसिला थम नहीं रहा है. साल की शुरुआत में जहां इनके भाव गदर मचा रहे थे, तो अब हाल ये हैं कि हर रोज ये कीमती धातुएं सस्ती होती जा रही हैं. बुधवार को भी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर वायदा कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही गोल्ड-सिल्वर रेट फिसल गए। 

चांदी का तो मानो बुलबुला सा फूटता (Silver Bubble Burst) जा रहा है. जनवरी महीने में 4 लाख के पार निकलकर गदर मचा रही चांदी की कीमत करीब आधी 2.28 लाख रुपये प्रति किलो रह गई है. वहीं सोना भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर फिसलता जा रहा है। 

चांदी की कीमत में जारी गिरावट
एमसीएक्स पर चांदी की कीमत के ताजा हाल की बात करें, तो वायदा कारोबार में 4 सितंबर की एक्सपायरी वाली चांदी का दाम बीते कारोबारी दिन मंगलवार को 2,30,857 रुपये पर क्लोज हुआ था और बुधवार को ओपनिंग के साथ ही ये फिसलकर 2,28,925 रुपये प्रति किलो पर आ गया. वहीं इस सप्ताह की तीन कारोबारी दिनों में अब तक ये 8,485 रुपये सस्ती हो गई है. बता दें कि बीते शुक्रवार को 1 Kg Silver Price 2,37,410 रुपये था। 

तीन दिन में सोना इतना सस्ता
चांदी ही नहीं, बल्कि वायदा कारोबार में सोने की कीमत भी फिसलती जा रही है. 5 अगस्त की एक्सपायरी वाली ये कीमती पीली धातु इस सप्ताह के तीन कारोबारी दिनों में अब तक 2578 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ती हो चुकी है. दरअसल, बीते सप्ताह शुक्रवार को 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,47,378 रुपये था, जो बुधवार को गिरावट के साथ 1,44,800 रुपये के लेवल पर आ गया। 

सोना भी अपने हाई लेवल से लगातार फिसला है. चांदी की तरह Gold Rate ने भी एमसीएक्स पर बीते जनवरी महीने में ही अपना लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था और पहली बार 2 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया था. लेकिन अपने हाई को छूने के बाद ये लगातार टूटा है और अब इसकी कीमत में करीब 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। 

घरेलू मार्केट में सोना-चांदी के दाम
MCX Gold-Silver Rates अपडेट के बाद अगर बात करें, घरेलू बाजारों में इन कीमती धातुओं के भाव के बारे में, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, बीते कारोबारी दिन मंगलवार तक ही 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,46,344 रुपये से गिरकर 1,44,083 रुपये पर आ गया है यानी सोना दो दिन में 2261 रुपये सस्ता हुआ है. वहीं इस अवधि में चांदी की कीमत 6658 रुपये प्रति किलो घट गई है. इसका भाव बीते शुक्रवार के 2,33,858 रुपये से 2,27,200 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। 

सोना-चांदी की ज्वेलरी खरीदते समय इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है कि आईबीजेए के अपडेटेड रेट देशभर में समान होते हैं, लेकिन आभूषण खरीदने पर ग्राहकों को इन पर लागू जीएसटी के साथ ही मेकिंग चार्ज भी देना होता है, जिससे इनकी कीमत बढ़ जाती है। 

(नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ खरीदने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.)

US-Iran तनाव और होर्मुज संकट से शेयर बाजार में हाहाकार! खुलते ही Sensex 550 अंक लुढ़का, Nifty भी टूटा

मुंबई 

शेयर बाजार में फिर से खौफ देखने को मिल रहा है और खुलने के साथ ही बड़ी गिरावट आई है. बुधवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही 550 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी करीब 150 अंक फिसल गया. इससे पहले बीते कारोबारी दिन भी दोनों रेड जोन में बंद हुए थे। Stock Market में इस गिरावट की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी और इसका कनेक्शन सीधे होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा हुआ है, जो दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 फीसदी को पूरा करने के लिए अहम है. यहां फिर से अमेरिका और ईरान आमने-सामने आ गए हैं और दोनों ओर से हमले किए जा रहे हैं. इससे न सिर्फ भारत, बल्कि जापान-कोरिया समेत अन्य एशियाई देशों के शेयर बाजार बुरी तरह टूटे हैं। 

सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही धड़ाम 
शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,180 की तुलना में गिरावट के साथ खुला और महज पांच मिनट के कारोबार के दौरान ही ये 550 अंक से ज्यादा फिसलकर 77,611 के लेवल पर आ गया। 

सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी इंडेक्स में भी गिरावट बढ़ती हुई नजर आई. ये इंडेक्स 24,398 के अपने पिछले बंद के मुकाबले खुलते ही गिरकर 24,259 पर आ गया और फिर सेंसेक्स की चाल से चाल मिलाकर चलते हुए 150 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर 24,229 पर ट्रेड करता हुआ दिखा। 

बाजार में इसलिए फिर खौफ 
शेयर बाजार फिर से खौफ में नजर आ रहा है और इसके तार सीधे मिडिल ईस्ट से जुड़े हुए हैं. पहला कारण अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ना है. पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर मिसाइल अटैक किए, तो पलटवार करते हुए अमेरिक की ओर से भी तगड़ी स्ट्राइक ईरानी ठिकानों पर शुरू कर दी गई। 

दूसरे कारण की बात करें, तो दोनों देशों के बीच फिर तनातनी ने दुनियाभर के शेयर मार्केट में हलचल बढ़ा दी और US-Japan से South Korea तक के शेयर बाजार गिरावट में कारोबार करते हुए नजर आए, जिनसे भारतीय बाजार का सेंटीमेंट खराब हुआ. जापान का निक्केई खुलते ही 500 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो साउथ कोरिया का कोस्पी भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट लेकर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं Gift Nifty भी रेड जोन में था। 

फिर से डराने लगा कच्चा तेल
बाजार में गिरावट का तीसरा कारण
देखें, तो US-Iran Attacks की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर असर डाला और अचानक इसमें तेज उछाल आ गया. Brent Crude Oil Price 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, तो वहीं WTI Crude Oil Price भी 72 डॉलर के पार कारोबार कर रहा था. तेल की कीमतों में फिर से लगी आग ने दुनिया में महंगाई का जोखिम बढ़ाने का डर पैदा किया है और शेयर बाजार भी इसके दबाव में नजर आ रहे हैं। 

हर ओर मची दिखी भगदड़
शेयर बाजार में इस बड़ी गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों की बात करें, तो BSE की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल IndiGo Share (2.50%), Asian Paints Share (2.42%), Reliance Share (2.10%), Bajaj Finance Share (1.70%), ITC Share (1.60%), M&M Share (1.50%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Hindustan Petroleum Share (3.60%), Ashok Leyland Share (2.60%) की गिरावट में कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप लिस्ट में NBCC Share (2.20%), PNB Housing Finance Share (2.10%) टूटकर कारोबार करता दिखा। 

भारत में ‘तेल वाली दिवाली’! होर्मुज के बाद सऊदी अरब से आई बड़ी खुशखबरी, पेट्रोल-डीजल पर मिल सकती है राहत

नई दिल्ली

ग्‍लोबल एनर्जी मार्केट में सऊदी अरब के एक बड़े फैसले ने हलचल मचा दी है. दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अपने प्रमुख अरब लाइट (Arab Light) कच्चे तेल की आधिकारिक बिक्री कीमत (Official Selling Price-OSP) में अगस्त की आपूर्ति के लिए प्रति बैरल 11 डॉलर की भारी कटौती की है. यह पिछले 26 वर्षों में एशिया के लिए की गई सबसे बड़ी मंथली कटौती मानी जा रही है. इतना ही नहीं साल 2020 के बाद पहली बार सऊदी अरब ने अपने इस प्रमुख ग्रेड को ओमान-दुबई बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर उपलब्ध कराया है. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह फैसला केवल कीमत घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एशियाई बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है. खासकर ऐसे समय में जब रूस रियायती दरों पर तेल बेचकर भारत और चीन जैसे बड़े आयातकों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है. सऊदी अरब के इस ‘प्राइस वॉर’ से भारत के ऑयल इंपोर्ट बिल पर पॉजिटिव असर तय माना जा रहा है. भारत अपनी कुल जरूरतों का 85 फीसद तक आयात करता है. ‘मनीकंट्रोल’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत ने 35.5 अरब डॉलर (₹337970 करोड़) मूल्‍य का कच्‍चा तेल आयात किया था. सऊदी अरब की ओर से किए गए प्राइस कट और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सुचारू होने के बाद इंपोर्ट बिल में कमी आने की संभावना है. आगे चलकर कंज्‍यूमर को भी इसका फायदा मिलना तय माना जा रहा है। 

दरअसल, कुछ सप्ताह पहले तक वैश्विक तेल बाजार में चिंता का माहौल था. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग प्रभावित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार का रास्ता इसी स्‍ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में किसी भी तरह के खलल से ग्‍लोबल सप्‍लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था. हालांकि, अब हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सुचारु हो गई है, खाड़ी देशों का निर्यात सामान्य स्तर पर लौट आया है और बाजार में तत्काल आपूर्ति संकट की आशंका काफी कम हो गई है. इसके साथ ही तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस (OPEC+) ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित अन्य उत्पादक देशों ने भी उत्पादन बढ़ाया है। 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सऊदी का फैसला?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम रहती हैं तो भारत का इंपोर्ट बिल घट सकता है, चालू खाते का घाटा नियंत्रित रह सकता है और महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. कम कीमतों का लाभ केवल सरकार तक सीमित नहीं रहेगा. विमानन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और पेट्रोकेमिकल जैसे उद्योगों की लागत भी घट सकती है, क्योंकि ये सभी क्षेत्र पेट्रोलियम उत्पादों पर काफी हद तक निर्भर हैं. इससे उत्पादन लागत कम होने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना रहती है. इसका सीधा फायदा आम उपभोक्‍ताओं को मिलने की संभावन है। 

क्या सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल तुरंत सस्ते हो जाएंगे. भारत में खुदरा ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन, मालभाड़ा, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कर तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के मूल्य निर्धारण संबंधी निर्णय शामिल हैं. इसलिए यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है और तेल कंपनियां इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं, तभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना होगी। 

भारत और चीन पर फोकस
एशिया दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक क्षेत्र है. भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश सऊदी अरब के सबसे बड़े ग्राहक हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस बाजार में रूस की मौजूदगी तेजी से बढ़ी है. यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस ने रियायती कीमतों पर अपना तेल एशियाई देशों को बेचना शुरू किया. भारत और चीन रूस के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे. ऐसे में सऊदी अरब पर दबाव बढ़ा. विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में इतनी बड़ी कटौती का उद्देश्य एशियाई रिफाइनरियों को आकर्षित करना और उन्हें रूस या अन्य सप्‍लायर्स की बजाय सऊदी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है. इसके अलावा चीन की धीमी आर्थिक वृद्धि के कारण वहां तेल की मांग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जिससे भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 

Gold-Silver Rate Today: चांदी में बड़ी गिरावट, 2 दिन में ₹6,600 टूटी; सोना भी हुआ सस्ता

इंदौर 

घरेलू फ्यूचर्स मार्केट MCX में सोने और चांदी के भाव मंगलवार (7 जुलाई) सुबह गिर गए। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून नीति बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं, ताकि केंद्रीय बैंक की मोनेटरी पॉलिसी की दिशा के बारे में और सुराग मिल सकें। सुबह 9:05 बजे तक MCX पर अगस्त गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 0.52% यानी 767 रुपये की गिरावट के साथ ₹1,46,148 प्रति 10 ग्राम पर आ गए, जबकि सितंबर सिल्वर फ्यूचर्स 1.14% यानी 2859 रुपये टूटकर ₹2,33,416 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे थे।सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट (Gold-Silver Rate Fall) लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी जारी है. सोमवार को फिसलने के बाद मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज का चांदी की वायदा कीमत मंगलवार को भी ओपनिंग के साथ ही तेजी से गिरी है. MCX पर कारोबार शुरू होते ही 1 Kg Silver Price झटके में 5200 रुपये से ज्यादा कम होकर 2.31 लाख रुपये के लेवल पर आ गया. दूसरी ओर सोना भी फिसला है और इसकी वायदा कीमत में 1500 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई है। 

चांदी अचानक हुई इतनी सस्ती
सबसे पहले बताते हैं चांदी की कीमत में लगातार जारी गिरावट और ताजा सिल्वर प्राइस अपडेट के बारे में, तो एमसीएक्स वायदा कारोबार में 4 सितंबर की एक्सपायरी वाली चांदी की कीमत खुलते ही गिरकर 2,30,803 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जबकि बीते कारोबारी दिन ये फिसलते हुए 2,36,099 रुपये पर क्लोज हुई थी. इस हिसाब से 1 किलो चांदी अचानक 5296 रुपये सस्ती (Silver Cheaper) हो गई है।       

दो दिन से लगातार टूट रही Silver
इस सप्ताह की शुरुआत से ही चांदी के भाव में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ और ये लगातार दूसरे दिन भी जारी है. बता दें कि बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को वायदा चांदी 2,37,410 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और दो दिन की गिरावट में ये 6607 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है. इस ताजा गिरावट के बाद अब चांदी अपने लाइफ टाइम हाई 4.20 लाख रुपये की तुलना में करीब आधी कीमत (Silver Price Half From High) पर मिल रही है। 

सोने-चांदी में गिरावट के 3 अहम कारण
फेड के मिनट्स और ब्याज दरों पर अटकलें: अमेरिकी फेड की जून बैठक के मिनट्स 8 जुलाई को जारी होंगे। अधिकतर एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेड इस साल कम से कम एक बार ब्याज दरें बढ़ाएगा, क्योंकि मुद्रास्फीति अभी भी 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।

जून में बाजार को इस साल तीन बार दर बढ़ोतरी की उम्मीद थी, क्योंकि अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू गए थे और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ गया था। हालांकि, जून के पेरोल डेटा के उम्मीद से कमजोर आने ने इस साल आक्रामक मौद्रिक सख्ती की उम्मीदों को कम कर दिया है।

निवेशकों की नजर मिनट्स पर: मास्टर कैपिटल सर्विसेज के मुख्य शोध अधिकारी रवि सिंह ने कहा कि निवेशक अब फेड की जून बैठक के मिनट्स जारी होने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे भविष्य की ब्याज दरों के रास्ते पर स्पष्टता मिल सकती है और सोने में अगली दिशात्मक चाल तय होगी।

भू-राजनीतिक तनाव का असर: इधर, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाने की खबरों ने भू-राजनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा है। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि ईरान की सेना ने सोमवार रात होर्मुज से गुजर रहे व्यापारिक जहाजों पर दो मिसाइलें दागीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वाशिंगटन संभवतः ईरानी ठिकानों पर हमले करके जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

सोने-चांदी के लिए क्या हैं टिप्स
रवि सिंह ने बताया कि तकनीकी ढांचा अभी भी मजबूत बना हुआ है, और कीमतें ₹1,40,500 के अहम सपेार्ट जोन से ऊपर बनी हुई हैं। ऊपर की ओर तत्काल रेजिस्टेंस 21-दिवसीय EMA के करीब ₹1,48,000 पर है, और इस स्तर के ऊपर स्पष्ट ब्रेकआउट रिकवरी को ₹1,50,000–₹1,51,000 के जोन तक ले जा सकता है।

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन के अनुसार, आज के सत्र में सोने को $4,135 और $4,100 पर सपेार्ट तथा $4,194 और $4,220 पर रेजिस्टेंस है, जबकि चांदी को $61.20 और $59.80 पर सपोर्ट तथा $63.40 और $64.20 पर रेजिस्टेंस है। MCX सोने के लिए सपेार्ट ₹1,46,100 और ₹1,45,500 है, जबकि रेजिस्टेंस ₹1,47,400 और ₹1,48,200 पर है। चांदी के लिए समर्थन ₹2,33,300 और ₹2,30,000 तथा रेजिस्टेंस ₹2,38,800 और ₹2,41,000 पर है।

2026 में अब तक चांदी में बदलाव
Gold-Silver Rate में इस साल 2026 में अब तक आए उतार-चढ़ाव पर नजर डालें, तो 31 दिसंबर 2025 को वायदा चांदी की कीमत 2,54,082 रुपये प्रति किलोग्राम थी, इसके बाद जनवरी में ये रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 4 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर के पार निकल गई. हालांकि, इसके बाद चांदी जमकर टूटी भी और फिलहाल के रेट से तुलना करें, तो ये 23,279 रुपये सस्ती है। 
      
Gold रेट भी लगातार फिसल रहा
न सिर्फ चांदी, बल्कि वायदा कमोडिटी मार्केट में कीमती पीली धातु (Yellow Metal) भी सस्ती होती जा रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर मंगलवार को सोने की कीमत में भी गिरावट आई है. ये बीते कारोबारी दिन 1,46,917 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई थी और मंगलवार को खुलने के साथ ही फिसलकर 1,45,351 रुपये पर आ गई. इस हिसाब से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1566 रुपये कम हो गया।        

हाई से अब काफी सस्ती मिल रहा सोना
सोने की कीमत में इस सप्ताह लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. सोना बीते सप्ताह शुक्रवार को 147,378 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और अब तक 2027 रुपये सस्ता हो चुका है. वहीं चांदी की तरह सोना भी अपने हाई लेवल से काफी सस्ता हो चुका है, इस कीमती धातु ने भी जनवरी महीने में पहली बार 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा पार किया था.

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