30 हजार कर्मचारियों की छंटनी पर घिरी Amazon, AI पर 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश को लेकर बढ़ा विरोध

 नई दिल्ली

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक ऐमेजॉन इस समय एक अजीब दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है. एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरी जा रही है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐमेजॉन ने करीब 30,000 नौकरियां खत्म कर दी हैं. लेकिन इसी दौरान कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश जारी रखा है. यही वजह है कि अब कंपनी के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है। 

अमेरिका के सिएटल शहर में हुई एक सिटी काउंसिल हियरिंग में ऐमेजॉन के कुछ इंजीनियर्स ने खुलकर अपनी ही कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि जिस समय कंपनी बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर बना रही है, उसी समय कर्मचारियों की छंटनी करना गलत है। 

रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स निवेश कर रहा है. ऐसे में 30 हजार लोगों की छंटनी पर कई सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि ये पूरे वर्कगफोर्स का 8.6% है जो काफी ज्यादा है। 

इन इंजीनियर्स ने सिर्फ नौकरी कटौती पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि  डेटा सेंटर को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि ये डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और संसाधन खपत करते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर पड़ता है। 

दरअसल, Amazon ही नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री इस समय AI रेस में लगी हुई है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एनवीडिया जैसी कंपनियां भी इसी दौड़ में हैं. हर कंपनी चाहती है कि वह AI में आगे निकले, और इसके लिए अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। 

लेकिन इस दौड़ की कीमत कौन चुका रहा है? यही सवाल अब कर्मचारियों और आम लोगों के बीच उठने लगा है. Amazon के अंदर जो विरोध दिख रहा है, वह एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। 

हाल के दिनों में अमेरिका और यूरोप में एआई और डेटा सेंटर के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं. लोगों को डर है कि AI नौकरियां खत्म करेगा और साथ ही पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालेगा। 

Amazon के मामले में यह विरोध इसलिए और खास है क्योंकि यह कंपनी के अंदर से ही उठ रहा है. आम तौर पर कर्मचारी अपनी कंपनी के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाते, लेकिन यहां मामला अलग है। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई पर हो रहा भारी खर्च अभी कंपनियों के लिए कमाई में नहीं बदल पा रहा है. यानी कंपनियां पहले पैसा लगा रही हैं, लेकिन उसका फायदा तुरंत नहीं मिल रहा. ऐसे में लागत कम करने के लिए नौकरी कटौती का रास्ता अपनाया जा रहा है। 

यही वजह है कि अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या AI का यह मॉडल टिकाऊ है या नहीं. Amazon की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है. यह उस पूरी टेक दुनिया की तस्वीर दिखाती है, जहां भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए आज के कर्मचारियों की कीमत चुकाई जा रही है। 

आने वाले समय में यह साफ होगा कि AI वाकई उतना बड़ा बदलाव लाता है जितना दावा किया जा रहा है, या फिर यह भी एक महंगा प्रयोग साबित होता है. लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि Amazon के अंदर उठी यह आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है। 

 

80 अरब डॉलर की Googleई और उदय कोटक की चेतावनी, IPL खत्म होते ही भविष्य पर छिड़ी बड़ी बहस

मुंबई 

दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां भविष्य की दिशा आज लिए जा रहे फैसलों से तय हो रही है. टेक्नोलॉजी,पूंजी और निवेश का खेल अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है. इसी संदर्भ में गूगल का हालिया कदम बेहद महत्वपूर्ण है. जिस कंपनी के पास पहले से ही भारी नकद भंडार है. जिसने लगातार मुनाफे के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. वही कंपनी बाजार से अतिरिक्त 80 अरब डॉलर जुटाने जा रही है. उदय कोटक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस तरफ ध्यान दिलाया है और देसी कंपनियों को चेताया है. आईपीएल का मजा खत्म हुआ, अब भविष्य की तरफ देख लो. गूगल के आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं. सालाना मुनाफा लगभग 160 अरब डॉलर, एक तिमाही का मुनाफा 62 अरब डॉलर और कुल मार्केट वैल्यू 4.5 खरब डॉलर. इतना मार्केट कैप तो निफ्टी 50 और सेंसेक्स की कंपनियों को मिलाकर भी नहीं है। 

यहां सबसे अहम सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी और मजबूत कंपनी भी भविष्य को लेकर इतनी आक्रामक तैयारी कर रही है तो हम क्या कर रहे हैं. क्या हम भी उसी स्तर की तत्परता और दूरदृष्टि दिखा रहे हैं? हम अपनी स्थिति को देखें तो एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आता है. एक तरफ राजनीतिक स्थिरता और ताकत अपने चरम पर है. मजबूत नेतृत्व,लगातार चुनावी जीत और लगभग एकदलीय प्रभुत्व जैसी स्थिति है. कुल मिलाकर मोदी सरकार बेहद स्थिर है. दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ईरान वॉर ने चुनौतियां और बढ़ा दी है. विकास दर भले ही स्थिर दिखती हो लेकिन तीन चीजें चिंता पैदा कर रही है। 

कुछ लोगों को आर्थिक स्थिति गिरने की बात पचती नहीं है. वे तुरंत बताने लगते हैं कि भारत बड़ी इकॉनमी में सबसे तेज बढ़ने वाला देश है. हमारी जीडीपी 6 परसेंट के ऊपर है. लेकिन सच्चाई इतनी चमकीली नहीं है. अगर दुनिया के सभी देशों के देखें तो भारत से ज्यादा जीडीपी वृद्धि दर नाइजर और इथियोपिया की है. प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के मामले में भी हम आठवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश हमसे आगे है. हाल ही में पश्चिम एशिया जंग के कारण रुपया पिछले एक साल में लगभग 12% गिरा है और यह लगातार सातवां साल है जब इसमें गिरावट आई है. यह एक अजीब स्थिति है. महंगाई काबू में है. चालू खाता घाटा संतुलित है. विकास की गति भी ठीक है फिर भी मुद्रा कमजोर बनी हुई है। 

आर्थिक विकास का असली इंजन निवेश होता है. खासतौर पर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और विदेशी निवेश (FDI). यही निवेश नई टेक्नोलॉजी लाता है,रोजगार पैदा करता है और देश को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ता है. लेकिन अपने देश में प्राइवेट सेक्टर का निवेश उतनी तेजी से बढ़ नहीं रहा है. सरकार ने बजट में विकास के काम के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है लेकिन सिर्फ सरकारी निवेश से काम नहीं चलेगा. इस पूरी तस्वीर को अगर गूगल के उदाहरण के साथ जोड़कर देखें तो फर्क साफ दिखाई देता है. वहां कंपनियां यह मानकर चल रही हैं कि भविष्य अनिश्चित है, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और टेक्नोलॉजी तेजी से बदलेगी. इसलिए अभी से निवेश बढ़ाना जरूरी है. वहीं भारत में कई बार यह धारणा दिखती है कि हमारा बाजार इतना बड़ा है कि निवेशक खुद ही आएंगे. लेकिन वास्तविकता यह है कि निवेशक भरोसे और रिटर्न की गारंटी मिलने पर ही आते हैं। 

सीआईआई रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर ने सितंबर में 7.7 लाख करोड़ निवेश किया है. ये अच्छा संकेत है. लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़े को देखें तो कॉरपोरेट निवेश जीडीपी के 12 प्रतिशत पर स्थिर है. इसे हर हाल में बढ़ाना होगा. हमारे पास एक विशाल बाजार, युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक अहमियत है. लेकिन इन फायदों को वास्तविक आर्थिक ताकत में बदलने की जरूरत है। 

शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव: 500 अंक लुढ़का सेंसेक्स, बाद में हुई जोरदार रिकवरी

मुंबई 

शेयर मार्केट में गुरुवार को एक बार गिरावट आई और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स रेड जोन में खुले. लेकिन खास बात ये रही है कि तेज गिरावट लेकर खुलने के कुछ ही मिनटों में रिकवरी भी जोरदार देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ करीब 500 अंक फिसल गया, लेकिन कुछ देर में ही गिरावट की रफ्तार धीमी पड़ गई. कुछ ऐसा ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स के साथ ही देखने को मिला है। 

सेंसेक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल 
गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346 की तुलना में गिरकर 73,935 पर खुला और फिर अचानक फिसलकर 73,807 के लेवल पर आ गया. हालांकि गिरावट की तेज रफ्तार कुछ ही देर बाद धीमी पड़ गई और ये 30 शेयरों वाला इंडेस्क 200 अंक के आसपास फिसलकर कारोबार करता हुआ नजर आया। 

NSE Nifty की बात करें, तो ये पिछले बंद 23,405 के मुकाबले गिरावट लेकर 23,282 पर ओपन हुआ और फिसलते हुए कुछ ही मिनटों में 23,247 तक चला गया. इसके बाद इसमें भी सुधार आया और खबर लिखे जाने तक 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स सिर्फ 80 अंक फिसलकर 23,322 पर ट्रेड कर रहा था। 

शुरुआती कारोबार में निफ्टी पर Coal India, Adani Enterprises, Grasim, ONGC, Adani Ports तेज बढ़त के साथ ओपन हुए, तो वहीं Infosys, HCL Tech, Cipla, Eicher Motors और M&M के शेयरों ने रेड जोन में कारोबार की शुरुआत की। 

बुधवार को ऐसा था बाजार का हाल 
बीते कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 74,649 की तुलना में गिरकर 74,507 पर खुला था और फिर देखते ही देखते क्रैश (Sensex Crash) होकर 73,492 के लेवल पर आ गया था. हालांकि, अंत में ये तेज रिकवरी के साथ 303 अंक फिसलकर 74,346 पर क्लोज हुआ था। 

पहले ही मिले थे गिरावट के संकेत 
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही मिल रहे थे. जहां Gift Nifty 200 अंक फिसलकर कारोबार कर रहा था, तो वहीं तमाम एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ नजर आया था. जापान का निक्केई इंडेक्स (Japan Nikkei) करीब 1500 अंक, हांगकांग का हैंगसेंग (HangSeng) करीब 400 अंक और साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स (KOSPI) 170 अंक टूटकर कारोबार कर रहा था। 

इन शेयरों से बाजार को सपोर्ट 
शुरुआती तेज गिरावट से उबारने में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों का रोल रहा, जिन्होंने मार्केट को सपोर्ट दिया. इनमें बीएसई लार्जकैप में शामिल Eternal Share (2%), Titan Share (1.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप में Voltas Share (5%), Dixon Share (2%), Suzlon Share (1.90%) की तेजी में नजर आए। 

Trump फिर चलेंगे टैरिफ वाला दांव! भारत-चीन पर 12.5% शुल्क लगाने की तैयारी

 नई दिल्ली

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नया टैरिफ प्लान (Donald Trump Tariff Plan) तैयार कर लिया है और नए अमेरिकी टैरिफ रेट प्रस्तावित किए गए हैं. अमेरिका अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों से किए जाने वाले आयात पर कम से कम 10 फीसदी का टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं और उनका ये प्रपोजल जबरन श्रम प्रथाओं की जांच के बाद आया है.  रिपोर्ट्स की मानें, भारत और चीन को लेकर भी नया टैरिफ तय कर लिया गया है, जो 12 फीसदी से ज्यादा हो सकता है। 

India-China समेत किन देशों पर कितना टैरिफ? 
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित नए टैरिफ रेट्स को देखें, तो भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से आने वाले सामानों पर ट्रंप 12.5 फीसदी का टैरिफ लगा सकते हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने साफ किया है कि कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय यूनियन, ताइवान और ब्रिटेन समेत अन्य देशों से आयात पर 10 फीसदी की टैरिफ दर लागू होगी। 

इधर डील पर बात, उधर टैरिफ प्लान
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था. अब ट्रंप उन टैरिफ को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत को लेकर ये खास इसलिए भी है, क्योंकि Donald Trump Tariff Plan ऐसे समय में सामने आया है, जबकि US के मुख्य वार्ताकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US BTA) को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिनों की बातचीत कर रहे हैं। 

धारा 301, 60 जांचें, टैरिफ तैयारी
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि ने धारा 301 के तहत की गई 60 जांचों के निष्कर्ष जारी किए हैं, जिनमें भारत को उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है, जिन्होंने जबरन लेबर बेस्ड सामानों के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया है या प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है। 

अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) के एक नोटिस में कहा गया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं में जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध है, या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के माध्यम से प्रतिबद्धता जताई है, या जिनके पास कुछ जबरन श्रम से बने उत्पादों को प्रतिबंधित करने वाली सीमित व्यवस्थाएं हैं, उन्हें अतिरिक्त 10% शुल्क का सामना करना पड़ेगा। 

भारत सहित अन्य अर्थव्यवस्थाओं के लिए, अमेरिकी व्यापार मंत्रालय ने 12.5% ​​की हाई एक्स्ट्रा टैरिफ रेट प्रस्तावित किए हैं. ट्रंप प्रशासन के इस ने टैरिफ प्रपोजल में कपड़ों पर आयात का जिक्र भी किया गया है. जो कुछ अर्थव्यवस्थाओं से अमेरिका में एक निश्चित मात्रा में कपड़ा आयात को धारा 301 के तहत कम टैरिफ रेट पर करने की अनुमति देता है। 

Gold-Silver Rate: जानिए 20, 22 और 24 कैरेट सोने के ताजा भाव, चांदी हुई सस्ती

इंदौर 

सोना-चांदी की कीमतों में फिर गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुएं बुधवार को बाजार ओपन होने के साथ ही फिसल गईं. चांदी का वायदा भाव एक झटके में करीब 2000 रुपये कम हो गया, तो वहीं सोने के भाव में भी कमी आई है. इस ताजा गिरावट के बाद अब 1 किलो चांदी अपने हाई लेवल से 1.92 लाख रुपये सस्ती हो गई है. आइए जानते हैं 20, 22 और 24 कैरेट सोने का क्या रेट है? 

चांदी का भाव तेजी से टूटा 
एमसीएक्स सिल्वर प्राइस पर नजर डालें, तो सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को वायदा कारोबार की शुरुआत रेड जोन में हुई. 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव अपने पिछले बंद 2,66,707 रुपये प्रति किलो की तुलना में एक झटके में कम होकर 2,64,760 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो 1 Kg Silver Price 1947 रुपये कम हो गया। 

चांदी ने इसी साल जनवरी महीने में 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया था और लाइफ टाइम हाई लेवल 4,57,328 रुपये छुआ था. इसके बाद इस कीमती धातु का भाव लगातार क्रैश होता चला गया. तमाम उतार-चढ़ाव के बाद अब ताजा गिरावट के बाद वायदा चांदी हाई से 1,92,568 रुपये प्रति किलो तक सस्ती मिल रही है। 

सोना भी चांदी के साथ टूटा 
सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि एमसीएक्स पर सोने की कीमत में भी गिरावट आई है और ये कीमती धातु 1.60 लाख रुपये से नीचे आ गई है. MCX Gold Rate पर नजर डालें, तो बीते कारोबारी दिन ये कीमती पीली धातु 1,59,346 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई थी, जबकि बुधवार को खुलते ही 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold गिरकर 1,58,780 रुपये पर आ गया। 

सोने के हाई लेवल से वर्तमान रेट की तुलना करें, तो अब ये और भी सस्ता मिल रहा है. एमसीएक्स पर इस एक्सपायरी वाले वायदा गोल्ड का लाइफ टाइम हाई लेवल 2,04,375 रुपये है और यहां से अब सोना 45,595 रुपये सस्ता मिल रहा है। 

घरेलू मार्केट में सोना-चांदी का हाल
एमसीएक्स के अलावा अगर घरेलू मार्केट में सोना-चांदी के रेट में आए चेंज की बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, तो 24 कैरेट सोने का दाम 1,56,294 रुपये से कम होकर 1,55,264 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. वहीं चांदी की कीमत 2,65,300 रुपये प्रति किलो की तुलना में 3,300 रुपये कम होकर 2,62,000 रुपये पर आ गया. अलग-अलग क्वालिटी के गोल्ड रेट की बात करें, तो…

गोल्ड क्वालिटी गोल्ड रेट/10 ग्राम
24 Karat Gold 1,55,264 रुपये/10 ग्राम
22 Karat Gold 1,54,642 रुपये/10 ग्राम
20 Karat Gold 1,42,222 रुपये/10 ग्राम
18 Karat Gold 1,16,448 रुपये/10 ग्राम
14 Karat Gold 90,829 रुपये/10 ग्राम

ध्यान रहे, घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की ज्वेलरी खरीदने पर ग्राहक को आईबीजेए रेट्स के साथ ही मेकिंग चार्ज और इस पर लागू जीएसटी भी देना होता है, जिसके जुड़ने से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है। 

 

 

 

शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, IT शेयरों में भारी बिकवाली

मुंबई 

शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट (Stock Market Crash) देखने को मिली है. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले बुरी तरह फिसलकर ओपन हुए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex देखते ही देखते 800 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. इस दौरान आईटी शेयर, जो बीते कारोबारी दिन गदर मचाए हुए थे, भरभराकर क्रैश हो गए. इनमें टीसीएस से लेकर इंफोसिस तक शामिल हैं। 

सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही बिखरे 
शेयर मार्केट में शुरुआती कारोबार पर नजर डालें, तो पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार धड़ाम हो गया. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,649.84 के स्तर से बुरी तरह फिसलकर 74,507 पर खुला और फिर कुछ ही मिनटों में ये 890 अंकों की गिरावट लेकर 73,759 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया।  

एनएसई निफ्टी की चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही रही. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,483 के लेवल से फिसलकर 23,415 पर खुला और फिर देखते ही देखते ये इंडेक्स भी 200 अंकों से ज्यादा फिसलकर अचानक 23,244 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आया। 

IT शेयर देखते ही देखते क्रैश 
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच आईटी कंपनियों के शेयर देखते ही देखते क्रैश हो गए. BSE की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल TCS Share (6.20%), Tech Mahindra Share (4.30%), Infosys Share (3.20%), HCL Tech Share (3%) तक बिखरकर कारोबार कर रहे थे। 

वहीं मिडकैप कंपनियों में नजर डालें, तो Persistent Share (5%), Mphasis Share (3%), Coforge Share (2.90%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. खास बात ये है कि बीते कारोबारी दिन इन शेयरों में तूफानी तेजी देखने को मिली थी, जिस पर अचानक से ब्रेक लग गया। 

गिरावट का ये बड़ा कारण!
शेयर बाजार में बुधवार को सेंसेक्स-निफ्टी में अचानक मचे कोहराम के पीछे के कारणों पर नजर डालें, तो इसके पीछे अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर जारी अनिश्चितता सबसे अहम है. इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उथल-पुथल नजर आ रही है. ये बीते कुछ दिन टूटने के बाद अब फिर से छलांग लगाती हुई नजर आ रही हैं, खबर लिखे जाने तक Crude Oil Price 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब चल रहा था. दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली से भी भारतीय शेयर बाजार दबाव में बना हुआ है।  

Coca-Cola India IPO: 2027 में आ सकता है कोका-कोला का मेगा IPO, शेयर बाजार में बढ़ी हलचल

मुंबई 

दुनिया की जानी-मानी कोल्ड ड्रिंक कंपनी कोका-कोला ने भारत में एक बड़ा फैसला लिया है. कंपनी साल 2027 में अपनी भारतीय बॉटलिंग इकाई की मुख्य कंपनी ‘हिंदुस्तान कोका-कोला होल्डिंग्स’ (HCCH) का आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है. इसका मतलब है कि 2027 में आम लोग भी शेयर बाजार के जरिए इस कंपनी के शेयर खरीद सकेंगे. कंपनी ने बताया कि वह भारत के प्रमुख शेयर बाजारों—बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने के लिए शुरुआती काम शुरू कर चुकी है. हालांकि, यह पूरी योजना बाजार के माहौल और सरकारी मंजूरियों पर निर्भर करेगी। 

इस आईपीओ के जरिए कोका-कोला कंपनी भारतीय इकाई में अपनी कुछ हिस्सेदारी आम जनता और निवेशकों को बेचेगी. यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब एक साल पहले ही कोका-कोला ने अपनी इस कंपनी में 40 फीसदी हिस्सेदारी भारत के ‘जुबिलेंट भारतीय ग्रुप’ को बेची थी. हालांकि, उस समय यह सौदा कितने रुपये में हुआ था, इसकी जानकारी कंपनी ने छिपाई थी। 

क्या है कंपनी की योजना?
HCCH भारत में कोका-कोला के बोतलों में ड्रिंक भरने (बॉटलिंग) का काम करने वाली सबसे बड़ी कंपनी ‘हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज’ (HCCB) की मालिक है. कोका-कोला का यह कदम उसकी दुनिया भर में चल रही ‘एसेट-लाइट’ रणनीति का हिस्सा है. इस रणनीति के तहत कंपनी फैक्ट्रियां चलाने और भारी मशीनें लगाने जैसे कामों में अपना पैसा और समय कम लगाना चाहती है. कंपनी का मुख्य ध्यान अब केवल अपने ब्रांड को मजबूत बनाने, विज्ञापन करने और कोल्ड ड्रिंक का मुख्य फॉर्मूला (कॉन्संट्रेट) तैयार करने पर रहेगा। 

भारत में कोका-कोला का बड़ा कारोबार
पूरी दुनिया में भारत कोका-कोला के लिए पांचवां सबसे बड़ा बाजार है. भारत में कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा है—पहला ‘कोका-कोला इंडिया’ और दूसरा ‘HCCB’. इस बॉटलिंग कंपनी (HCCB) की शुरुआत 14 फरवरी 1997 को हुई थी. आज यह कंपनी पूरे देश में 14 बड़े और आधुनिक प्लांट चलाती है, जहां कोल्ड ड्रिंक को बोतलों में भरा जाता है। 

भारतीय बाजारों और घरों में कोका-कोला के प्रोडक्ट्स बहुत पसंद किए जाते हैं. कंपनी भारत में 8 अलग-अलग कैटेगरी में 37 तरह के ड्रिंक्स बनाती और बेचती है. इनमें कोका-कोला के अलावा थम्स अप, स्प्राइट, मिनट मेड, माजा, किनले पानी, लिम्का और फैंटा जैसे मशहूर नाम शामिल हैं. बाजार के जानकारों का मानना है कि जब यह कंपनी शेयर बाजार में आएगी, तो यह भारत का सबसे बड़ा और सफल आईपीओ साबित हो सकता है। 

SBI समेत कई बैंकों की स्पेशल FD स्कीम लॉन्च, 7.10% तक मिलेगा ब्याज

नई दिल्ली

 वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों के मन में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इस समय क्या कहां पैसा लगाएं? गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। शेयर बाजार पिछले एक साल में 7 प्रतिशत से अधिक लुढ़क चुका है। इस अनिश्चितता के माहौल में फिक्सड डिपॉजिट एक शानदार विकल्प हो सकता है। यहां रिटर्न की पूरी गारंटी रहती है। मौजूदा समय में कुछ बैंक 2.5 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक का रिटर्न फिक्सड डिपॉजिट पर दे रहे हैं। बैंकों की तरफ से कुछ खास एपडी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

यह स्कीम के तहत 444 दिन की एफडी ग्राहकों को करवानी होगी। इस योजना में कोई भी व्यक्ति 1000 रुपये से 3 करोड़ रुपये तक निवेश कर सकता है। स्कीम में मंथली, तिमाही और छमाही मैच्योरिटी का विकल्प प्रदान करता है। SBI Amrit Vrishti एफडी स्कीम पर सामान्य नागिरकों को 6.45 प्रतिशत का ब्याज बैंक की तरफ से दिया जा रहा है। सीनियर सिटीजन को बैंक 6.95 प्रतिशत ब्याज और सुपर सीनियर सिटीजन को बैंक की तरफ से 7.05 प्रतिशत तक ब्याज ऑफर किया जा रहा है। बता दें, समय से पैसा निकालने पर 5 लाख रुपये तक की एफडी पर 0.5 प्रतिशत की पेनाल्टी लगेगी। वहीं, अगर अमाउंट 5 लाख रुपये से अधिक है तब की स्थिति में पेनाल्टी 1 प्रतिशत होगी।

इंडियन बैंक IND सिक्योर एफडी
यह स्कीम भी 444 दिन की है। इस योजना के तहत ग्राहक 1000 रुपये से 3 करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकता है। सामान्य नागरिकों के लिए 6.60 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है। सीनियर सिटीजन के लिए बैंक की तरफ से 7.10 प्रतिशत और सुपर सीनियर सिटीजन को बैंक की तरफ से 7.35 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है। इस स्कीम में मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने की अनुमति ग्राहकों को है।
बैंक ऑफ बड़ौदा bob Square Drive Deposit Scheme

यह योजना भी 444 दिन की है। बैंक की तरफ से इस एफडी स्कीम पर 6.45 प्रतिशत से 7.10 प्रतिशत तक ब्याज ऑफर किया रहा है। सामान्य नागिरकों को बैंक 6.45 प्रतिशत तक ब्याज ऑफर कर रहा है। सीनियर सिटीजन को बैंक की तरफ से 6.95 प्रतिशत और सुपर सीनियर सिटीजन को बैंक की तरफ से 7.05 प्रतिशत तक ब्याज देने का फैसला किया गया है।

सीनियर सिटीज के लिए अलग एफडी स्कीम
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने वी केयर डिपॉडिट स्कीम को शुरू किया है। इस स्कीम के तहत बैंक की तरफ से 50 बेसिस प्वाइंट ब्याज 5 साल और 10 साल तक के एफडी पर ब्याज दिया जा रहा है। इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौडा और आईसीआईसीआई बैंक सीनियर सिटीजन को स्पेशल एफडी दे रहा है।

Trump Tariff Cut: ट्रंप ने 25% से घटाकर 15% किया टैरिफ, कई सेक्टर्स को मिला बड़ा फायदा

 नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ कट का ऐलान किया है. US Tariff में ये कटौती कुछ सेलेक्टेड एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और औद्योगिक उपकरणों पर की गई है. अब तक इन सामानों पर अमेरिका की ओर से 25% का टैरिफ लागू किया गया था, जिसे ट्रंप ने घटाकर 15% करने का ऐलान किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से कृषि और इंडस्ट्रियल उपकरणों की एक विस्तृत रेंज पर टैरिफ में अस्थायी कटौती अगले साल दिसंबर 2027 तक लागू रहेगी।

अमेरिका की ओर से ये फैसला निवेश को प्रोत्साहित करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था (US Economy) के प्रमुख क्षेत्रों का समर्थन करने के लिए लिया गया है. इससे सस्ते आयात के साथ-साथ अमेरिकी इस्पात और एल्यूमीनियम के अधिक उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। 

क्यों लिया ट्रंप ने ये फैसला? 
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई घोषणा के तहच ये टैरिफ कटौती दिसंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी. इस कदम का उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और कृषि उत्पादन को मजबूत करते हुए इस सेक्टर से जुड़े व्यवसायों के लिए लागत को कम करना है. Tariff Cut कंबाइन, हार्वेस्टर और अन्य कृषि उपकरणों समेत कई प्रकार की दूसरी कृषि मशीनों पर लागू होगी. व्हाइट हाउस (US White House) की ओर से कहा गया है कि कम टैरिफ से किसानों और कृषि उत्पादकों को कम लागत पर नए उपकरण खरीदने में मदद मिलेगी। 

ट्रंप प्रशासन ने कम टैरिफ रेट के लिए इंडस्ट्रियल उपकरणों की लिस्ट में बढ़ोतरी की है. खास बात ये है कि टैरिफ कट का ये ऐलान ऐसे समय में किया गया है, जबकि अमेरिका अपनी ट्रेड एंड इंडस्ट्रियल पॉलिसी के एक प्रमुख हिस्से के रूप में टैरिफ का इस्तेमाल जारी रखे हुए है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह अस्थायी कटौती कृषि, आवास और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को समर्थन देने के साथ-साथ कंपनियों को उपकरण और उत्पादन क्षमता में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन की गई है। 

क्या भारत को मिलेगा लाभ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की ओर से टैरिफ कट (US Tariff Cut) की ये राहत उन देशों को दी गई है, जिनके साथ ट्रेड समझौता है. यानी अमेरिका के व्यापार समझौतों के अंतर्गत आने वाले देशों से आयात किए जाने वाले बुलडोजर, फोर्कलिफ्ट और इसी तरह की औद्योगिक मशीनरी और फार्म उपकरणों पर अब 15% का टैरिफ लगेगा, जो पहले 25% था. यहां बता दें कि भारत को इसका फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि अभी तक US-Iran Trade Deal फाइनल नहीं हुई है। 

ट्रंप ने ये स्कीम भी शुरू की
Donald Trump प्रशासन ने घरेलू स्तर पर उत्पादित स्टील और एल्यूमीनियम की डिमांड को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अतिरिक्त प्रोत्साहन योजना की भी शुरुआत का ऐलान किया है. इसके तहत, विदेशी निर्माता 10% के और भी कम टैरिफ रेट का लाभ उठा सकेंगे, इसके लिए शर्त ये होगी कि उनके द्वारा आयात किए गए कैपिटल इक्विपमेंट में वजन के हिसाब से कम से कम 85% स्टील या एल्युमीनियम अमेरिका का यूज हो। 

Keeway का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर इस महीने भारत में लॉन्च, ABS और 14-इंच व्हील्स से होगा लैस

मुंबई 

 भारत का इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट तेजी से बेहतर हो रहा है. बाजार में अगले माह एक नए इलेक्ट्रिक स्कूटर की एंट्री होने वाली है. स्कूटर निर्माता कंपनी Keeway जून में अपनी EZI Hypevolt ई-स्कूटर लॉन्च करने वाला है। 

बता दें कि Keeway – Adishwar Auto Ride India (AARI) का हिस्सा, जो QJ Motor और Benelli को भी हैंडल करता है. Keeway भारतीय बाजार में एक छोटी इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनी है, और पहले ही Vieste 300 और Sixties 300i जैसे हाई-कैपेसिटी वाले पेट्रोल स्कूटर बेच रही है. हालांकि, Keeway अब भारतीय मार्केट में अपना पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर ला रहा है, जिसे चीन में उसके ‘EZI’ सब-ब्रांड से लिया गया है। 

क्या है EZI
इलेक्ट्रिक टू-व्ही
लर्स की एक रेंज बाजार में उतारने के लिए, Keeway ने साल 2020 में EZI शुरू किया. EZI की चीन के ज़ियांग, सिचुआन में एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है, और यह कंपनी अभी कई तरह के स्कूटर और इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बनाता है, जिसमें स्क्रैम्बलर, क्रूज़र और मैक्सी-स्कूटर वगैरह शामिल हैं। 

Keeway EZI Hypevolt का डिजाइन
डिज़ाइन की बात करें तो, Keeway EZI Hypevolt कुछ लोगों को BMW CE 04 की याद दिलाता है, क्योंकि इसका आकार लंबा और नया है. इसमें BMW CE 04 जैसी बेंच सीट भी दी गई है, जो राइडर और पीछे बैठने वाले के लिए अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है। 

Keeway EZI Hypevolt में स्प्लिट LED हेडलाइट्स हैं, जिनके दोनों तरफ वर्टिकल LED डेटाइम रनिंग लाइट्स लगाई गई हैं, और इसका स्टांस ऊंचा होगा, क्योंकि इसमें बड़े, 14-इंच के एलॉय व्हील्स लगे हैं. सीट की ऊंचाई 770 mm है, और स्कूटर का वज़न 145 kg है। 

Keeway EZI Hypevolt का पावरट्रेन
चीनी बाजार में, Keeway EZI Hypevolt दो 2.
5 kWh बैटरी के साथ पेश किया जाएगा, जिनकी कुल क्षमता 5 kWh है. अपने घरेलू बाज़ार में, यह स्कूटर हब मोटर या मिड-ड्राइव मोटर के साथ मिल बेची जाती है. मिड-ड्राइव मोटर का कंटीन्यूअस आउटपुट 6 kW (8 bhp) है, जबकि पीक आउटपुट 12 kW (16 bhp) है. EZI के अनुसार, इसकी टॉप स्पीड 115 kmph है। 

Keeway EZI Hypevolt सेफ्टी और फीचर्स
नई EZI Hypevolt के सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो इसमें आगे और पीछे डिस्क ब्रेक दिए जाएंगे, और चीन में यह कॉम्बी-ब्रेकिंग सिस्टम (CBS) वाले एक वेरिएंट के साथ आता है, लेकिन भारत में संभावना है है कि इंडिया-स्पेक स्कूटर डुअल-चैनल एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) के साथ आएगा। 

इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में दूसरे ज़रूरी सेफ्टी इक्विपमेंट के तौर पर ट्रैक्शन कंट्रोल, हिल डिसेंट कंट्रोल और हिल होल्ड कंट्रोल शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि अपने होम मार्केट में, Hypevolt में रियर कैमरा और ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम भी मिलता है, लेकिन यह देखना बाकी है कि इंडिया-स्पेक स्कूटर में ये फीचर्स शामिल किए जाते हैं या नहीं। 

Keeway EZI Hypevolt की कीमत
इस इलेक्ट्रिक स्कूटर को जून के बीच में लॉन्च किया जा सकता है, जिसके साथ, EZI Hypevolt एक नई जगह पर जाएगा, क्योंकि यह एक महंगा ई-स्कूटर होने की संभावना है. हालांकि यह BMW जितना महंगा नहीं होगा, जैसा कि यह दिखता है, लेकिन Hypevolt – अपनी ट्विन बैटरी और इक्विपमेंट लेवल के साथ – की कीमत 3 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से ज़्यादा होने की उम्मीद है। 

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