श्रद्धा का सैलाब, आस्था का महापर्व — श्री जगन्नाथ रथयात्रा

जब लाखों श्रद्धालुओं की भक्ति एक साथ उमड़ती है, तब सड़कें छोटी पड़ जाती हैं और हर दिशा में गूंजता है— जय जगन्नाथ!

हर कदम पर भक्ति, हर चेहरे पर उत्साह और हर हृदय में प्रभु के दर्शन की अभिलाषा— यही है जगन्नाथ रथयात्रा की दिव्य अनुभूति।

श्रद्धा का ऐसा सैलाब कि सड़कें भी छोटी पड़ गईं।

महाप्रभु श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा में उमड़ा जनसागर इस बात का सजीव प्रमाण है कि आस्था की शक्ति समय, दूरी और सीमाओं से कहीं बड़ी होती है।

महाप्रभु श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है। जब प्रभु अपने भव्य रथ पर विराजमान होकर भक्तों के बीच आते हैं, तब लाखों श्रद्धालुओं का जनसागर उमड़ पड़ता है। हर ओर “जय जगन्नाथ” के जयघोष, भक्ति-गीतों की मधुर ध्वनि और श्रद्धा से भरे हृदय इस दिव्य यात्रा को अलौकिक बना देते हैं।

रथयात्रा हमें यह संदेश देती है कि भगवान अपने भक्तों के बीच स्वयं आते हैं। यहाँ कोई छोटा-बड़ा नहीं होता, कोई भेदभाव नहीं होता—हर व्यक्ति को प्रभु के दर्शन और उनकी कृपा प्राप्त करने का समान अवसर मिलता है। यही इस महापर्व की सबसे बड़ी विशेषता है, जो मानवता, समानता और प्रेम का संदेश पूरे विश्व तक पहुँचाती है

जब श्रद्धा अपने चरम पर पहुँचती है, तब समय, दूरी और सीमाएँ भी छोटी पड़ जाती हैं। दूर-दराज़ से आए लाखों श्रद्धालु एक ही भावना से जुड़ते हैं—महाप्रभु के दर्शन और उनके आशीर्वाद की कामना। यह दृश्य केवल आँखों से नहीं, बल्कि हृदय से अनुभव किया जाता है।

महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन माता सुभद्रा की यह पावन यात्रा हम सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करे। प्रभु का आशीर्वाद प्रत्येक परिवार पर बना रहे और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा सेवा की भावना निरंतर बढ़ती रहे।

आइए, इस दिव्य अवसर पर हम सभी श्रद्धा और भक्ति के साथ महाप्रभु के श्रीचरणों में नमन करें और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।

जय जगन्नाथ! 🙏

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में शामिल होंगे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल, नर्मदा परिक्रमा पर भी फोकस: राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की समीक्षा बैठक में गैर-शासकीय मंदिरों के जीर्णोद्धार, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और प्रमुख मंदिरों की ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश।

भोपाल। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और मां नर्मदा की नर्मदा परिक्रमा को मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में शामिल करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप अंतरराज्यीय तीर्थ दर्शन के लिए बस संचालन की योजना पर भी तेजी से काम करने के निर्देश दिए।

मंत्रालय में आयोजित धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की समीक्षा बैठक में राज्य मंत्री ने गैर-शासकीय मंदिरों के जीर्णोद्धार की योजना बनाने, शासन संधारित मंदिरों की भूमि और विभागीय परिसंपत्तियों की स्थिति की समीक्षा करने तथा प्रमुख मंदिरों के दस्तावेजीकरण को गति देने के निर्देश दिए।

बैठक में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के मंदिरों के विकास तथा जनप्रतिनिधियों से प्राप्त प्रस्तावों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

 

राज्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों की प्रमाणिक जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाजनक और विश्वसनीय जानकारी मिल सके।

बैठक में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के संचालक आशीष सिंह, तीर्थस्थान एवं मेला प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

Viral Video: क्या संकट के समय दुश्मनी भी भूल जाते हैं जीव? वायरल वीडियो ने दिया मानवता का बड़ा संदेश

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर लोग भावुक हैं। यदि वीडियो वास्तविक है, तो यह बताता है कि कठिन समय में जीवन की रक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में दो ऐसे जीव, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है, जीवन बचाने के लिए साथ दिखाई देते हैं। हालांकि, चैटजीपीटी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता और इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होना अभी बाकी है।

यदि यह दृश्य वास्तविक है, तो यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में शत्रुता नहीं, बल्कि जीवन और करुणा ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

यदि यह वीडियो वास्तविक है, तो यह केवल एक दुर्लभ घटना नहीं, बल्कि जीवन का एक गहरा संदेश भी देता है। प्रकृति बार-बार यह सिखाती है कि जब अस्तित्व पर संकट आता है, तब शत्रुता का महत्व कम हो जाता है और जीवन की रक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है।

जब जीवन सबसे बड़ा सत्य बन जाता है: संकट में दुश्मनी नहीं, इंसानियत जीतती है

यही संदेश मानव समाज पर भी लागू होता है। कठिन परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं या किसी बड़े संकट के दौरान अक्सर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते हैं। ऐसे समय में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता ही सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लाखों बार देखा और साझा किया जा चुका है। कई यूजर्स इसे इंसानियत और सह-अस्तित्व का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसकी सत्यता पर सवाल भी उठा रहे हैं। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है।

यदि वीडियो का दावा सही साबित होता है, तो यह हमें एक महत्वपूर्ण सीख देता है—जीवन किसी भी दुश्मनी, मतभेद या संघर्ष से कहीं अधिक मूल्यवान है। संकट के समय सहयोग और करुणा ही वह शक्ति है, जो हर सीमा और हर शत्रुता से ऊपर उठ जाती है।

योग की उत्पत्ति की प्रथम कथा पर आधारित भारत का शोधपरक नाट्य अनुभव

“मनुष्य की एक ही समस्या है—खंडित होना। योग का अर्थ है स्वयं से और समस्त सृष्टि से जुड़ना।”

‘आदियोगी’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, योग-दर्शन और रंगमंच का अद्भुत संगम है। लगभग दो वर्षों के गहन शोध के उपरांत युवा रंगनिर्देशक नितिन तेजराज द्वारा लिखित एवं निर्देशित यह प्रस्तुति उस प्राचीन कथा को रंगमंच पर जीवंत करती है, जिसे योग की उत्पत्ति की प्रथम कहानी माना जाता है।

कथा हमें लगभग 15,000 वर्ष पूर्व कांति सरोवर के दिव्य तट पर ले जाती है, जहाँ समाधिस्थ आदियोगी के समक्ष सप्तऋषि अपने जीवन के गहन प्रश्नों, दुखों, क्रोध, ज्ञान के अहंकार और आंतरिक अशांति का समाधान खोजने के लिए वर्षों से तप कर रहे हैं। जब आदियोगी अपनी समाधि से जागृत होते हैं, तब वे उन्हें योग का वह दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं, जो केवल शरीर का अभ्यास नहीं, बल्कि चेतना के विस्तार और आत्मबोध का विज्ञान है।

नाटक में योग के सात मार्गों, आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध, चक्र तथा ऊर्जा विज्ञान को अत्यंत कलात्मक और नाटकीय शैली में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक दृश्य दर्शकों को बाहरी संसार से भीतर की यात्रा की ओर ले जाता है और यह अनुभव कराता है कि वास्तविक शांति बाहर नहीं, स्वयं के भीतर निवास करती है।

शास्त्रीय संगीत, कांति सरोवर की भव्य मंच-सज्जा, प्रभावशाली प्रकाश योजना तथा कलाकारों का सशक्त अभिनय इस प्रस्तुति को एक आध्यात्मिक एवं सौंदर्यपूर्ण रंगानुभव में परिवर्तित कर देता है। विशेष रूप से आदियोगी के अंतिम संवाद दर्शकों के मन में लंबे समय तक गूंजते रहते हैं—

“जब भी कोई मनुष्य आँखें बंद करके स्वयं को खोजेगा, वह मुझे अपने भीतर पाएगा। मैं कोई व्यक्ति नहीं हूँ, मैं एक संभावना हूँ। मैं ही शिव हूँ। जो नहीं है, वही मैं हूँ।”

‘आदियोगी’ भारतीय संस्कृति, योग और रंगमंच की उस विरासत का उत्सव है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़ने, जीवन में संतुलन स्थापित करने और चेतना के उच्चतम आयामों तक पहुँचने की प्रेरणा देती है। यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि आत्मखोज, योग और सनातन ज्ञान की एक अविस्मरणीय रंगयात्रा है।

निरंतर नाट्य संस्था, भोपाल गर्व के साथ इस शोधपरक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय योग परंपरा को रंगमंच पर एक नई अभिव्यक्ति प्रदान करती है।

स्लोवाकिया में PM मोदी की यादगार सेल्फी, योग करते बच्चों ने जीत लिया दुनिया का दिल!

योग के रंग में रंगा स्लोवाकिया, बच्चों के बीच PM मोदी और राष्ट्रपति पेलेग्रिनी की खास सेल्फी

स्लोवाकिया में एक यादगार सेल्फी: योग ने जोड़ा युवाओं को

स्लोवाकिया: भारत के प्रधानमंत्री और Peter Pellegrini ने स्लोवाकिया के स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत विशेष योग प्रदर्शन का आनंद लिया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने बच्चों के उत्साह और योग के प्रति उनकी रुचि की सराहना की।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के नजदीक आते ही दुनिया भर में योग के प्रति बढ़ती जागरूकता देखने को मिल रही है। स्लोवाकिया में बच्चों द्वारा किया गया यह योग प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि नई पीढ़ी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को योग से जुड़ते देखना बेहद सुखद है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण के साझा उद्देश्य से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है।

इस अवसर पर दोनों नेताओं ने बच्चों के साथ यादगार तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग और मित्रता का प्रतीक बनीं।

मुख्य संदेश:

योग आज वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, संतुलन और एकता का माध्यम बन चुका है, और युवाओं की बढ़ती भागीदारी इसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं के रिकॉर्ड पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं के रिकॉर्ड पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

अयोध्या: राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और दान प्रबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक नया दावा सामने आया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से प्राप्त लगभग 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दावों के अनुसार, इन शिलाओं में सोने-चांदी तथा रत्नों से अलंकृत शिलाएं भी शामिल थीं। यह भी कहा जा रहा है कि सबसे मूल्यवान शिलाओं में से एक मॉरीशस से प्राप्त हुई थी, जबकि मुंबई के एक व्यापारी द्वारा हीरे जड़ी शिला भेंट किए जाने का दावा किया गया है।

रिकॉर्ड और निगरानी को लेकर सवाल

मामले को लेकर कई प्रश्न उठाए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख सवाल यह हैं कि इन शिलाओं का आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है, उनकी जिम्मेदारी किसके पास थी और उनके संरक्षण एवं निगरानी की व्यवस्था किसके अधीन थी।

स्थानीय स्तर पर इस विषय पर चर्चा तेज बताई जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि यदि किसी विशेष जांच दल (SIT) का गठन होता है और उसके जांच दायरे में यह विषय शामिल किया जाता है, तो इन पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

दान राशि प्रबंधन पर भी उठ रहे सवाल

इसी बीच राम मंदिर से जुड़ी दान राशि के प्रबंधन को लेकर भी विभिन्न प्रकार के आरोप और दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि दान राशि के उपयोग और लेखा-जोखा में अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

जांच और जवाबदेही की मांग

मामले को लेकर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और कुछ स्थानीय लोगों द्वारा पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

वहीं, इस पूरे मामले में अब तक किसी जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए सभी आरोपों और दावों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप और दावे विभिन्न पक्षों द्वारा लगाए गए हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि या न्यायिक सत्यापन अभी शेष है। निष्पक्ष जांच के निष्कर्ष आने तक किसी भी पक्ष को दोषी मानना उचित नहीं होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हनुमान चालीसा एवं प्रार्थना कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल, 11 जून। मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav बुधवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi के राष्ट्रसेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भोपाल स्थित Gufa Mandir में आयोजित हनुमान चालीसा पाठ एवं विशेष प्रार्थना कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं राष्ट्र के सतत विकास और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास, सुशासन और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने राष्ट्रहित और जनकल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की निरंतर सफलता की कामना करते हुए सामूहिक प्रार्थना में भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रसेवा के भाव के साथ संपन्न हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : जनसेवा, सुशासन और विकास का नया अध्याय

लोकतांत्रिक नेतृत्व का ऐतिहासिक कीर्तिमान

आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक रूप से सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर सेवा देने का रिकॉर्ड, जो पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के नाम था, उसे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पार कर एक नया इतिहास रचा है। यह उपलब्धि देशवासियों के विश्वास, मजबूत नेतृत्व और निरंतर जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

मजबूत नेतृत्व, सशक्त संगठन

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने देशभर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

17 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार।

22 राज्यों में NDA गठबंधन की सरकार।

केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।

विकास और सुशासन के एजेंडे को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार।

साधारण परिवार से देश के प्रधानसेवक तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक का सफर तय किया और स्वयं को देश के “प्रधानसेवक” के रूप में स्थापित किया।

उनकी प्रेरणादायी यात्रा

साधारण पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर।

जनसेवा को राजनीति का मूल उद्देश्य बनाना।

गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान।

राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्यशैली।

हर वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास और कल्याण को प्राथमिकता दी है।

प्रमुख फोकस  क्षेत्र

गरीब कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा।

महिला सशक्तिकरण।

किसान हित और कृषि विकास।

युवाओं के लिए रोजगार और अवसर।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा का विस्तार।

डिजिटल और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण।

विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी नई पहचान बनाई है। विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

विकास के प्रमुख आयाम

विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण।

डिजिटल परिवर्तन और तकनीकी नवाचार।

आर्थिक विकास और निवेश को बढ़ावा।

वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा।

आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन।

मुख्यमंत्री का संदेश

“आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक रूप से सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर सेवा देने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम दर्ज हुआ है। उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी 17 राज्यों में तथा NDA 22 राज्यों में सरकार का नेतृत्व कर रहा है। एक साधारण परिवार से निकलकर देश के प्रधानसेवक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी जी समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और राष्ट्र के विकास के लिए निरंतर समर्पित हैं।”

डॉ मोहन यदव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर सात दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ आज से

27 मई से 2 जून तक में होगा आयोजन, मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ; इसरो, बीएचयू और आईआईएम बोधगया के विशेषज्ञ होंगे शामिल

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित सात दिवसीय “सदानीरा समागम” का शुभारंभ 27 मई से भोपाल के भारत भवन में होने जा रहा है। यह आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें जल संरक्षण, पंचमहाभूत, भारतीय ज्ञान परंपरा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ मंथन करेंगे।

समागम का उद्घाटन मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और विभिन्न जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

कार्यक्रम में , और सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेकर अपने विचार साझा करेंगे।

समागम के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। लोकगायन, नृत्य-नाटिकाओं और भारतीय नौसेना बैंड की विशेष प्रस्तुति दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

इसके साथ ही जल संरक्षण विषयक प्रदर्शनियां, चित्रांकन कार्यशालाएं और पुस्तकों का लोकार्पण भी आयोजित किया जाएगा। आयोजन के वैचारिक सत्र प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 6 बजे से में आयोजित होंगे।

100 करोड़ की लागत से तेजी से आकार ले रहा श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर

मंत्री विश्वास सारंग ने किया निरीक्षण, कहा – आस्था, संस्कृति और विकास का बनेगा नया प्रतीक

राजधानी भोपाल के प्राचीन और प्रसिद्ध श्रद्धा केंद्र श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर परिसर में लगभग 100 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन “श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर” तेजी से आकार ले रहा है। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों को तय समय सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मंत्री श्री सारंग ने कहा कि छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। सदियों पुरानी इस आस्था को भव्य स्वरूप देने के उद्देश्य से “विरासत भी और विकास भी” की भावना के साथ हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।

करीब 21 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस भव्य कॉरिडोर को महाकाल लोक की तर्ज पर आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। परियोजना में श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था, आकर्षक कॉरिडोर, दर्शक दीर्घा, पार्किंग, सार्वजनिक आयोजनों के लिए आधुनिक अधोसंरचना और सौंदर्यीकरण कार्य शामिल हैं।

मंत्री श्री सारंग ने बताया कि मंदिर परिसर का विकास प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला के अनुरूप किया जा रहा है, जिसमें राजस्थान के व्हाइट मार्बल का उपयोग होगा। साथ ही सुंदरकांड की झलक प्रस्तुत करने वाला आध्यात्मिक और भव्य कॉरिडोर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगा।

दशहरा मैदान में भी आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यहां विशाल मंच, दर्शक दीर्घा, रावण दहन स्थल और सार्वजनिक आयोजनों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की जाएंगी। परिसर के चारों ओर 15 मीटर चौड़ी कांक्रीट सड़क भी बनाई जा रही है, जिससे यातायात और आवागमन सुगम होगा।

परियोजना के तहत दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं, स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में “श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर” भोपाल की नई पहचान बनकर उभरेगा।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu