अमृत काल में योग एवं पंचकर्म की वैश्विक भूमिका पर मंथन, भारत के कई राज्यों के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने रखा वैज्ञानिक दृष्टिकोण
पेरिस में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में योग और पंचकर्म की वैश्विक उपयोगिता पर गहन मंथन हुआ। 23 और 24 जून को वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लेकर आयुर्वेद एवं योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर अपने शोध प्रस्तुत किए।
इस संगोष्ठी में उज्जैन के प्रसिद्ध पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. चंद्र शर्मा ने अस्थिक्षय (ऑस्टियोपोरोसिस) के उपचार प्रबंधन में तिक्तक्षीर बस्ती की प्रभावशीलता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध को विशेषज्ञों ने विशेष रुचि के साथ सुना और इसकी उपयोगिता पर चर्चा की।
आरडी आयुर्वेद कॉलेज, भोपाल के पूर्व प्राचार्य डॉ. मणिंद्र व्यास ने योग के मूल स्वरूप से हटकर उसके विकृत प्रचार-प्रसार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि योग की प्रामाणिकता और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना समय की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, नई दिल्ली के गुरु डॉ. एस.एन. पांडे ने मूत्र नलिका अवरोध के उपचार में उत्तर बस्ती की प्रभावशीलता पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। वहीं शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, भोपाल की पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी सोनी ने आधुनिक जीवनशैली के कारण युवतियों में बढ़ रहे पीसीओडी के उपचार में पंचकर्म आधारित शोधन चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में डॉ. आनंद सराफ ने योग और आयुर्वेद के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में गुवाहाटी, मुंबई, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए शोधार्थियों ने भी अपने शोध प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन के मुख्य समन्वयक डॉ. विनोद वैरागी ने की। उन्होंने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर विख्यात पंचकर्म विशेषज्ञ यू.एस. निगम की पुस्तक “क्लीनिकल पंचकर्म एवं अनुभूत चिकित्सा प्रबंधन” के तृतीय संस्करण की जानकारी डॉ. मोहन वर्मा (देवास) ने दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजन विशद (बरेली) ने किया तथा आभार डॉ. प्रणव शर्मा शास्त्री (पीलीभीत) ने व्यक्त किया।
मुख्य बातें
पेरिस में 23-24 जून को वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।
विषय: अमृत काल में योग एवं पंचकर्म की भूमिका।
डॉ. कामिनी सोनी ने पीसीओडी के उपचार में पंचकर्म आधारित शोधन चिकित्सा की अहम भूमिका बताई।
उज्जैन के डॉ. चंद्र शर्मा ने अस्थिक्षय के उपचार में तिक्तक्षीर बस्ती पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।
डॉ. मणिंद्र व्यास ने योग के विकृत स्वरूप के बढ़ते प्रचार पर चिंता जताई।
डॉ. एस.एन. पांडे ने मूत्र नलिका अवरोध में उत्तर बस्ती की उपयोगिता बताई।
देश के कई राज्यों के शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने सम्मेलन में भाग लिया।
प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए और पंचकर्म पर नई पुस्तक के तृतीय संस्करण का परिचय कराया गया।
