शिक्षकों के 1.15 लाख से अधिक पद रिक्त, हजारों स्कूल बिना शिक्षक और मूलभूत सुविधाओं के; सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। प्रदेश में स्वीकृत 2.89 लाख शिक्षक पदों में से 1,15,678 पद रिक्त हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक नहीं है।
शिक्षा का बुनियादी ढांचा भी गंभीर संकट से गुजर रहा है। प्रदेश के लगभग 5,000 स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है और 59,000 स्कूलों में कंप्यूटर जैसी आवश्यक डिजिटल सुविधाओं का अभाव है।
इन कमियों का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ा है। पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22.03 लाख विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों के घटते विश्वास को दर्शाती है।
इन्हीं परिस्थितियों को लेकर अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भी सरकार से जवाब तलब किया है। यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र भर्ती, स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँ। प्रदेश के बच्चों का भविष्य केवल प्रचार और घोषणाओं से नहीं, बल्कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेह शासन से सुरक्षित होगा।
