भोपाल में शराब दुकान हटाने को लेकर एबीवीपी का प्रदर्शन, बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश, कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

भोपाल में शराब दुकान हटाने को लेकर एबीवीपी का प्रदर्शन, बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश, कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

भोपाल। राजधानी भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित प्रोफेसर्स कॉलोनी में संचालित शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र मौके पर पहुंचे और शराब दुकान को तत्काल हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

छात्रों ने लगाए प्रशासन के खिलाफ नारे

प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का कहना था कि रिहायशी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास शराब दुकान का संचालन नियमों के विरुद्ध है, फिर भी प्रशासन अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी छात्र

पुलिस और प्रशासन रहा पूरी तरह अलर्ट मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी

स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। एडिशनल कमिश्नर, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, एसडीएम सहित पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया और किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोक दिया।

क्या है छात्रों की मांग?

एबीवीपी का कहना है कि प्रोफेसर्स कॉलोनी में संचालित शराब दुकान आबकारी विभाग की गाइडलाइन के विपरीत संचालित हो रही है। संगठन का आरोप है कि यह दुकान रिहायशी क्षेत्र और विद्यार्थियों के आवागमन वाले इलाके में होने के कारण सामाजिक और शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित कर रही है। छात्रों ने दुकान को तत्काल हटाने की मांग की है।

पहले भी दिया गया था आश्वासन

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था और आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण उन्हें दोबारा सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा।

प्रदर्शनकारी छात्रों से चर्चा करते कलेक्टर प्रियंक मिश्रा

कलेक्टर ने छात्रों से की बातचीत

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से चर्चा की। उन्होंने मामले पर पुनः विचार कर उचित निराकरण का आश्वासन दिया। हालांकि छात्रों ने स्पष्ट किया कि इस बार वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि शराब दुकान हटाने को लेकर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

मुख्य बातें 

– पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित प्रोफेसर्स कॉलोनी में एबीवीपी का प्रदर्शन।

– शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर छात्रों ने की नारेबाजी।

– बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश, पुलिस ने रोका।

– एडिशनल कमिश्नर, कलेक्टर, एसडीएम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

– छात्रों का आरोप—आबकारी गाइडलाइन के विपरीत संचालित हो रही है शराब दुकान।

– कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कार्रवाई और निराकरण का आश्वासन दिया।

– छात्रों ने कहा—पहले भी मिल चुका है आश्वासन, अब चाहिए ठोस कार्रवाई।

“जो कहते हैं – ‘मैं नहीं कर पाऊँगा’… उन्हें यह ज़रूर देखना चाहिए!”

“जो कहते हैं – ‘मैं नहीं कर पाऊँगा’… उन्हें यह ज़रूर देखना चाहिए!” 

कई बार ज़िंदगी में ऐसा वक्त आता है जब हमें लगता है कि हम नहीं कर पाएँगे। हालात मुश्किल होते हैं, लोग हमारा साथ छोड़ देते हैं, और सबसे बड़ा दुश्मन हमारा अपना डर बन जाता है।

लेकिन सच यह है कि हार हमारी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारी सोच तय करती है।

जो लोग आज सफल हैं, उन्होंने भी कभी असफलता देखी थी। फर्क सिर्फ इतना था कि उन्होंने “मैं नहीं कर सकता” को “मैं कोशिश करूँगा” में बदल दिया।

यह वीडियो सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसी सीख है जो आपको फिर से खड़े होने की ताकत देगी। अगर कभी आपको लगा है कि आपके सपने पूरे नहीं हो सकते, तो इस वीडियो को अंत तक ज़रूर देखिए।

हो सकता है, अगले कुछ मिनट आपकी सोच बदल दें… और जब सोच बदलती है, तभी ज़िंदगी बदलना शुरू होती है।

याद रखिए:

“सफल वही होता है जो हार मानने से पहले एक कोशिश और करता है।”

अगर यह वीडियो आपको प्रेरित करे, तो इसे अपने उन दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ भी ज़रूर शेयर करें जो आज खुद पर भरोसा खो चुके हैं।

योग की उत्पत्ति की प्रथम कथा पर आधारित भारत का शोधपरक नाट्य अनुभव

“मनुष्य की एक ही समस्या है—खंडित होना। योग का अर्थ है स्वयं से और समस्त सृष्टि से जुड़ना।”

‘आदियोगी’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, योग-दर्शन और रंगमंच का अद्भुत संगम है। लगभग दो वर्षों के गहन शोध के उपरांत युवा रंगनिर्देशक नितिन तेजराज द्वारा लिखित एवं निर्देशित यह प्रस्तुति उस प्राचीन कथा को रंगमंच पर जीवंत करती है, जिसे योग की उत्पत्ति की प्रथम कहानी माना जाता है।

कथा हमें लगभग 15,000 वर्ष पूर्व कांति सरोवर के दिव्य तट पर ले जाती है, जहाँ समाधिस्थ आदियोगी के समक्ष सप्तऋषि अपने जीवन के गहन प्रश्नों, दुखों, क्रोध, ज्ञान के अहंकार और आंतरिक अशांति का समाधान खोजने के लिए वर्षों से तप कर रहे हैं। जब आदियोगी अपनी समाधि से जागृत होते हैं, तब वे उन्हें योग का वह दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं, जो केवल शरीर का अभ्यास नहीं, बल्कि चेतना के विस्तार और आत्मबोध का विज्ञान है।

नाटक में योग के सात मार्गों, आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध, चक्र तथा ऊर्जा विज्ञान को अत्यंत कलात्मक और नाटकीय शैली में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक दृश्य दर्शकों को बाहरी संसार से भीतर की यात्रा की ओर ले जाता है और यह अनुभव कराता है कि वास्तविक शांति बाहर नहीं, स्वयं के भीतर निवास करती है।

शास्त्रीय संगीत, कांति सरोवर की भव्य मंच-सज्जा, प्रभावशाली प्रकाश योजना तथा कलाकारों का सशक्त अभिनय इस प्रस्तुति को एक आध्यात्मिक एवं सौंदर्यपूर्ण रंगानुभव में परिवर्तित कर देता है। विशेष रूप से आदियोगी के अंतिम संवाद दर्शकों के मन में लंबे समय तक गूंजते रहते हैं—

“जब भी कोई मनुष्य आँखें बंद करके स्वयं को खोजेगा, वह मुझे अपने भीतर पाएगा। मैं कोई व्यक्ति नहीं हूँ, मैं एक संभावना हूँ। मैं ही शिव हूँ। जो नहीं है, वही मैं हूँ।”

‘आदियोगी’ भारतीय संस्कृति, योग और रंगमंच की उस विरासत का उत्सव है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़ने, जीवन में संतुलन स्थापित करने और चेतना के उच्चतम आयामों तक पहुँचने की प्रेरणा देती है। यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि आत्मखोज, योग और सनातन ज्ञान की एक अविस्मरणीय रंगयात्रा है।

निरंतर नाट्य संस्था, भोपाल गर्व के साथ इस शोधपरक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय योग परंपरा को रंगमंच पर एक नई अभिव्यक्ति प्रदान करती है।

“एक साँप… जो सिर्फ अपनी जान बचाना चाहता था”

“एक साँप… जो सिर्फ अपनी जान बचाना चाहता था”

ज़रा इस दृश्य की कल्पना कीजिए…

एक साँप धीरे-धीरे रास्ता बदलकर जंगल या किसी सुरक्षित जगह की ओर जा रहा था।

उसने किसी का पीछा नहीं किया, किसी पर हमला नहीं किया और न ही किसी को डराने की कोशिश की।

उसकी बस एक ही कोशिश थी—किसी तरह इंसानों से दूर निकल जाए और अपनी जान बचा ले।

लेकिन तभी एक व्यक्ति उसके सामने आ गया।

उसने  बार-बार क्यों उसे जाने देने के बजाय बार-बार लात मारकर, डंडे से डराकर और उसे उसी दिशा में धकेलना शुरू कर दिया जहाँ से वह बचकर निकलना चाहता था।

अब ज़रा खुद से कुछ सवाल पूछिए।

अगर कोई जीव आपसे दूर जाना चाहता है, तो क्या उसे रोकना सही है?

क्या किसी बेजुबान जानवर को सिर्फ मनोरंजन के लिए डराना या परेशान करना इंसानियत कहलाता है?

क्या यही एक सभ्य समाज की पहचान है कि जो कमजोर हो, जो बोल न सके, उसे सताया जाए?

हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?

क्या हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि किसी लाचार जीव को तंग करना बहादुरी है?

या फिर यह कि हर जीव के जीवन का सम्मान करना ही असली संस्कार है?

अक्सर लोग कहते हैं कि जंगल के जानवर खतरनाक होते हैं।

लेकिन सच्चाई यह है कि ज़्यादातर जंगली जानवर इंसानों से बचकर निकलना चाहते हैं।

वे तब आक्रामक हो सकते हैं जब उन्हें लगे कि उनकी जान खतरे में है या उन्हें निकलने का रास्ता नहीं दिया जा रहा।

अब सोचिए…

अगर उस साँप ने डर और दर्द में किसी को काट लिया होता, तो अगले ही पल लोग क्या कहते?

“साँप बहुत खतरनाक था…”

लेकिन शायद ही कोई यह पूछता कि उसे बार-बार उकसाया किसने?

यही तो सबसे बड़ा सवाल है।

कई बार हादसे जानवर नहीं, बल्कि इंसानों की लापरवाही और क्रूरता पैदा करती है।

एक सभ्य समाज की पहचान उसकी ताकत से नहीं होती, बल्कि उसकी संवेदनशीलता से होती है।

सभ्य समाज वह है जहाँ इंसान सिर्फ इंसानों का ही नहीं, बल्कि हर जीव के जीवन का सम्मान करे।

अगर रास्ते में कोई साँप, पक्षी, कुत्ता या कोई भी जंगली जीव दिखाई दे, तो सबसे समझदारी का काम यही है कि उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उसे निकल जाने दें। यदि ज़रूरत हो, तो स्थानीय वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

याद रखिए…

इंसान होने का मतलब सिर्फ बोलना या सोच पाना नहीं है।

इंसान होने का मतलब है—दया, संवेदना और ज़िम्मेदारी।

क्योंकि किसी बेजुबान को दर्द देना कभी बहादुरी नहीं हो सकती।

और आप बताइए—क्या सभ्य समाज में किसी बेबस जीव को इस तरह बार-बार परेशान करना सही है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखिए।

नीट परीक्षा को लेकर सीएम मोहन यादव की बड़ी समीक्षा, 30 जिलों में 283 केंद्र तैया

21 जून की नीट परीक्षा पर सख्त निगरानी, सरकार और एनटीए

अलर्ट मोड में

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) 2026 परीक्षा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। प्रदेश के 30 जिलों में बनाए गए 283 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने परीक्षा के सुचारु, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, निगरानी और अभ्यर्थियों की सुविधाओं से जुड़े सभी प्रबंध समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

नीट री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक, एनटीए ने किया स्वागत

इधर, नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले केन्द्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगा दी है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम परीक्षा से जुड़ी फर्जी सूचनाओं, कथित पेपर लीक और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा तथा परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है।

गौरतलब है कि नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए देशभर में सुरक्षा व्यवस्थाएं कड़ी कर दी गई हैं। एनटीए ने अभ्यर्थियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।हेडलाइन सुझाव:

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, कुलपति के इस्तीफे की मांग

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, कुलपति के इस्तीफे की मांग

भोपाल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में कथित अकादमिक अनियमितताओं, प्रशासनिक अव्यवस्था और आर्थिक भ्रष्टाचार के विरोध में बुधवार से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। परिषद ने विश्वविद्यालय के कुलपति के तत्काल इस्तीफे तथा विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर शासन द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने की मांग उठाई है।

एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय में एमबीए प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर सहित कई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणाम लंबे समय से लंबित हैं। वहीं पुनर्मूल्यांकन के नतीजे भी एक वर्ष से अधिक समय से घोषित नहीं किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय का अकादमिक कैलेंडर वर्षों से अस्त-व्यस्त है और पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन भी लंबे समय से नहीं हुआ है।

परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नर्सिंग महाविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई है, शिक्षकों की नियुक्तियां लंबित हैं, छात्रावासों की स्थिति खराब है और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में संबद्धता प्रक्रिया, विभिन्न टेंडरों, गोपनीय प्रिंटिंग कार्यों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान कार्यप्रणाली से छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और संबद्ध महाविद्यालय सभी प्रभावित हैं।

परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं होता और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। एबीवीपी ने दोहराया कि कुलपति के इस्तीफे तक यह अनिश्चितकालीन धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

एबीवीपी के इस आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र हितों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : जनसेवा, सुशासन और विकास का नया अध्याय

लोकतांत्रिक नेतृत्व का ऐतिहासिक कीर्तिमान

आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक रूप से सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर सेवा देने का रिकॉर्ड, जो पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के नाम था, उसे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पार कर एक नया इतिहास रचा है। यह उपलब्धि देशवासियों के विश्वास, मजबूत नेतृत्व और निरंतर जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

मजबूत नेतृत्व, सशक्त संगठन

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने देशभर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

17 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार।

22 राज्यों में NDA गठबंधन की सरकार।

केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।

विकास और सुशासन के एजेंडे को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार।

साधारण परिवार से देश के प्रधानसेवक तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक का सफर तय किया और स्वयं को देश के “प्रधानसेवक” के रूप में स्थापित किया।

उनकी प्रेरणादायी यात्रा

साधारण पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर।

जनसेवा को राजनीति का मूल उद्देश्य बनाना।

गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान।

राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्यशैली।

हर वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास और कल्याण को प्राथमिकता दी है।

प्रमुख फोकस  क्षेत्र

गरीब कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा।

महिला सशक्तिकरण।

किसान हित और कृषि विकास।

युवाओं के लिए रोजगार और अवसर।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा का विस्तार।

डिजिटल और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण।

विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी नई पहचान बनाई है। विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

विकास के प्रमुख आयाम

विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण।

डिजिटल परिवर्तन और तकनीकी नवाचार।

आर्थिक विकास और निवेश को बढ़ावा।

वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा।

आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन।

मुख्यमंत्री का संदेश

“आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक रूप से सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर सेवा देने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम दर्ज हुआ है। उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी 17 राज्यों में तथा NDA 22 राज्यों में सरकार का नेतृत्व कर रहा है। एक साधारण परिवार से निकलकर देश के प्रधानसेवक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी जी समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और राष्ट्र के विकास के लिए निरंतर समर्पित हैं।”

डॉ मोहन यदव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मिले कांग्रेस नेता, पेपर लीक मामले पर उठाए सवाल

रतलाम: कांग्रेस नेता ने रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान छात्रों ने बताया कि परीक्षा रद्द होने और उससे जुड़े विवादों के बाद वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण दोबारा तैयारी करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सहित देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्होंने वर्षों की मेहनत और अपने परिवारों की उम्मीदों के साथ परीक्षा की तैयारी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक प्रकरण ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

पोस्ट में उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस लगातार NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार को घेरती रही है। वहीं, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच की गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

छात्रों का कहना है कि वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी मेहनत और करियर प्रभावित न हो।

महिलाओं और बच्चों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता, लापरवाही पर होगी कार्रवाई: सीएम डॉ. मोहन यादव

भोपाल, 1 जून। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनभागीदारी और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो तथा पोषण स्तर सुधारने के लिए स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागों के साथ निजी अस्पतालों और संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और अन्य राज्यों में सफल नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें अपनाने की कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि महिला कर्मियों की अधिक संख्या वाले औद्योगिक क्षेत्रों में पीपीपी मॉडल पर वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित किए जा रहे हैं। देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में ऐसे हॉस्टलों का निर्माण शुरू हो चुका है। वहीं संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद, इंदौर, धार सहित विभिन्न स्थानों पर वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।

बाल संरक्षण के क्षेत्र में चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से 51 जिला स्तरीय और एक राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर द्वारा 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता प्रदान की गई है। जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और मैपिंग का कार्य 13 जिलों में जारी है।

9.28 लाख बच्चों की हुई ग्रेजुएशन सेरेमनी

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिससे स्कूलों में उनका सहज प्रवेश सुनिश्चित हुआ। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

इसके अलावा, सक्षम आंगनबाड़ी उन्नयन कार्यक्रम के तहत एक साथ 12,670 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों में उन्नत किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।

लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं का लाभ

समीक्षा में बताया गया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से मई 2026 तक 1.25 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं को 47,775 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15.84 लाख बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई।

मातृ वंदना योजना में देश में अव्वल मध्यप्रदेश

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 15.51 लाख गर्भवती महिलाओं को 798.68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है। इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश पिछले ढाई वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है।

साथ ही प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बीमा योजना का लाभ प्रदान किया गया है। विभिन्न जिलों में पोषण सुधार के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी समीक्षा बैठक में जानकारी प्रस्तुत की गई।

गंजबासौदा के उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों की पिटाई का आरोप, शिक्षक का वीडियो वायरल

छड़ी से मारने और छात्रों को मुर्गा बनाने का आरोप, स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना के भी गंभीर सवाल

विदिशा जिले के गंजबासौदा स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ एनसीसी शिक्षक अनिल दुबे ने छात्रों की छड़ी से पिटाई की और उन्हें सजा के तौर पर मुर्गा भी बनाया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

बताया जा रहा है कि शासन द्वारा स्कूलों में बच्चों की पिटाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद विद्यालय में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। आरोप यह भी हैं कि प्रभारी प्राचार्य महेश चंद शर्मा और शिक्षक अनिल दुबे द्वारा स्कूल के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मामले की जांच कर संबंधित शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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