अजय सिंह यादव का जीतू पटवारी पर हमला, बोले— “झूठ का पुलिंदा बन गई है कांग्रेस की राजनीति”

अजय सिंह यादव का जीतू पटवारी पर हमला, बोले— “झूठ का पुलिंदा बन गई है कांग्रेस की राजनीति”

भोपाल।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे लगातार झूठे और निराधार आरोप लगाकर प्रदेश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी न्यास को निजी संस्था बताना जीतू पटवारी की राजनीतिक अपरिपक्वता और तथ्यों की अनदेखी को दर्शाता है।

अजय सिंह यादव ने कहा कि कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता द्वारा जीतू पटवारी के दावों की पोल खोले जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस झूठ की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम स्वयं कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को यह स्वीकार नहीं हो रहा कि पिछड़े वर्ग से आने वाला एक नेता प्रदेश का नेतृत्व कर रहा है, इसलिए वह भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।

अजय सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस की इस राजनीति को भली-भांति समझ चुकी है और झूठ एवं भ्रम फैलाने वालों को उचित जवाब देगी।

नोट: यह समाचार भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव द्वारा जारी बयान पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोप संबंधित पक्ष के दावे हैं।

उज्जैन की 500 करोड़ की जमीन सिर्फ 1 रुपए में? कांग्रेस का बड़ा आरोप, सरकार पर उठे सवाल

उज्जैन की 500 करोड़ की जमीन सिर्फ 1 रुपए में? कांग्रेस का बड़ा आरोप, सरकार पर उठे सवाल

उज्जैन की करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन…

क्या वाकई सिर्फ 1 रुपए में एक ट्रस्ट को दे दी गई?

यह आरोप लगाया है मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने।

पटवारी का दावा है कि जिस ट्रस्ट को यह जमीन दी गई, उसके ट्रस्टी श्री राम जी हैं, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार भी बताए जाते हैं।

कांग्रेस का सवाल है कि आखिर इतनी मूल्यवान जमीन 1 रुपए में क्यों दी गई?

पटवारी ने यह भी कहा कि यदि इस मामले से जुड़ी रिपोर्टें गलत हैं, तो सरकार ने अब तक संबंधित रिपोर्टों पर कानूनी कार्रवाई या एफआईआर क्यों नहीं की?

कांग्रेस ने इस मामले में पारदर्शिता, दस्तावेज सार्वजनिक करने और स्वतंत्र जांच की मांग की है।

वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताया है और पहले भी ऐसे आरोपों को निराधार करार दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है…

क्या इस जमीन आवंटन की पूरी जानकारी सार्वजनिक होगी?

क्या सरकार इन आरोपों पर विस्तृत जवाब देगी?

और क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी?

इस पूरे विवाद पर आपकी क्या राय है? कमेंट करके जरूर बताइए।

प्रदेश की राजनीति में जमीन और भ्रष्टाचार के आरोपों पर सियासी घमासान

प्रदेश की राजनीति में जमीन और भ्रष्टाचार के आरोपों पर सियासी घमासान

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार और जमीन से जुड़े आरोपों को लेकर सियासी माहौल गर्म है। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव से जुड़े लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। वहीं, विपक्ष ने अयोध्या में चंदा संग्रह और उज्जैन के महाकाल क्षेत्र में जमीन आवंटन से जुड़े मामलों को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों ने अपने-अपने जवाब दिए हैं और कई मामलों में आरोपों की स्वतंत्र या न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप आम होते हैं, लेकिन लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच और सत्यापित तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकलना आवश्यक है।

दर्शकों और पाठकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और विश्वसनीय समाचार स्रोतों की जानकारी अवश्य देखें।

जनता के सवाल: जवाब कौन देगा?

जनता के सवाल: जवाब कौन देगा?

मध्य प्रदेश की राजनीति में हाल के दिनों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े भूमि खरीद के आरोपों को लेकर बहस तेज हुई है। आरोप लगाए गए हैं, उनका खंडन भी किया गया है। लेकिन लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण है—तथ्यों के साथ स्पष्ट जवाब।

जनता जानना चाहती है:

1. क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने जमीन खरीदी?

यदि हाँ, तो कितनी जमीन, कहाँ-कहाँ और किस प्रक्रिया के तहत खरीदी गई?

2. क्या यह सही है कि खरीदी गई जमीन का बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों में है, जहाँ बाद में सरकारी विकास परियोजनाएँ या मास्टर प्लान लागू हुए?

यदि नहीं, तो सरकार आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक कर भ्रम दूर क्यों नहीं करती?

3. क्या सरकार उन सभी विकास परियोजनाओं की पूरी टाइमलाइन सार्वजनिक करेगी?

परियोजना की घोषणा, स्वीकृति, भूमि उपयोग में बदलाव और जमीन की खरीद—इन सभी की तारीखें सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

4. यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो क्या भारतीय जनता पार्टी स्वतंत्र न्यायिक जांच के लिए तैयार है?

एक निष्पक्ष जांच से सभी पक्षों के सामने तथ्य आ सकते हैं और जनता का विश्वास मजबूत होगा।

5. क्या मुख्यमंत्री अपने परिवार द्वारा वर्ष 2023 के बाद खरीदी गई सभी जमीनों पर श्वेत पत्र जारी करेंगे?

यदि सभी लेन-देन नियमों के अनुसार हुए हैं, तो विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, जनता का भी अधिकार है। इन सवालों का जवाब तथ्यों, दस्तावेजों और पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या विवाद का निष्पक्ष समाधान हो सके।

केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाना प्राथमिकता : बारेलाल अहिरवार

जिला स्तर पर जल्द शुरू होंगे जन शिकायत निवारण शिविर

मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य बारेलाल अहिरवार ने कहा है कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

बारेलाल अहिरवार ने कहा कि उनकी विशेष प्राथमिकता अनुसूचित जाति, पिछड़े एवं अशिक्षित परिवारों को समय पर न्याय और शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना है। उन्होंने बताया कि आयोग लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहा है तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि पात्र हितग्राहियों तक केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचे।

उन्होंने जानकारी दी कि आयोग अब तक प्रदेश के 12 से अधिक जिलों का दौरा कर चुका है। इस दौरान अनुसूचित जाति सहित अन्य वर्गों के लोगों से प्राप्त शिकायतों का मौके पर ही संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए जा रहे हैं।

अहिरवार ने बताया कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को शासन की योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही जिला स्तर पर जन शिकायत निवारण शिविरों का आयोजन शुरू किया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से लोगों की शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसी भी पीड़ित परिवार को न्याय के लिए भटकना न पड़े।

उन्होंने कहा कि भोपाल प्रवास के दौरान भी वे नियमित रूप से आमजन की शिकायतें सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देते हैं। साथ ही, शासन की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे पात्र हितग्राहियों को अधिकतम लाभ मिल सके।

बारेलाल अहिरवार ने बताया कि इसी माह एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें जनजागरूकता अभियान, जन शिकायत निवारण शिविरों की रूपरेखा और अनुसूचित जाति वर्ग के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

भोपाल में शराब दुकान हटाने को लेकर एबीवीपी का प्रदर्शन, बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश, कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

भोपाल में शराब दुकान हटाने को लेकर एबीवीपी का प्रदर्शन, बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश, कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

भोपाल। राजधानी भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित प्रोफेसर्स कॉलोनी में संचालित शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र मौके पर पहुंचे और शराब दुकान को तत्काल हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

छात्रों ने लगाए प्रशासन के खिलाफ नारे

प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का कहना था कि रिहायशी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास शराब दुकान का संचालन नियमों के विरुद्ध है, फिर भी प्रशासन अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी छात्र

पुलिस और प्रशासन रहा पूरी तरह अलर्ट मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी

स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। एडिशनल कमिश्नर, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, एसडीएम सहित पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया और किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोक दिया।

क्या है छात्रों की मांग?

एबीवीपी का कहना है कि प्रोफेसर्स कॉलोनी में संचालित शराब दुकान आबकारी विभाग की गाइडलाइन के विपरीत संचालित हो रही है। संगठन का आरोप है कि यह दुकान रिहायशी क्षेत्र और विद्यार्थियों के आवागमन वाले इलाके में होने के कारण सामाजिक और शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित कर रही है। छात्रों ने दुकान को तत्काल हटाने की मांग की है।

पहले भी दिया गया था आश्वासन

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था और आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण उन्हें दोबारा सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा।

प्रदर्शनकारी छात्रों से चर्चा करते कलेक्टर प्रियंक मिश्रा

कलेक्टर ने छात्रों से की बातचीत

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से चर्चा की। उन्होंने मामले पर पुनः विचार कर उचित निराकरण का आश्वासन दिया। हालांकि छात्रों ने स्पष्ट किया कि इस बार वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि शराब दुकान हटाने को लेकर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

मुख्य बातें 

– पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित प्रोफेसर्स कॉलोनी में एबीवीपी का प्रदर्शन।

– शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर छात्रों ने की नारेबाजी।

– बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश, पुलिस ने रोका।

– एडिशनल कमिश्नर, कलेक्टर, एसडीएम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

– छात्रों का आरोप—आबकारी गाइडलाइन के विपरीत संचालित हो रही है शराब दुकान।

– कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कार्रवाई और निराकरण का आश्वासन दिया।

– छात्रों ने कहा—पहले भी मिल चुका है आश्वासन, अब चाहिए ठोस कार्रवाई।

“जो कहते हैं – ‘मैं नहीं कर पाऊँगा’… उन्हें यह ज़रूर देखना चाहिए!”

“जो कहते हैं – ‘मैं नहीं कर पाऊँगा’… उन्हें यह ज़रूर देखना चाहिए!” 

कई बार ज़िंदगी में ऐसा वक्त आता है जब हमें लगता है कि हम नहीं कर पाएँगे। हालात मुश्किल होते हैं, लोग हमारा साथ छोड़ देते हैं, और सबसे बड़ा दुश्मन हमारा अपना डर बन जाता है।

लेकिन सच यह है कि हार हमारी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारी सोच तय करती है।

जो लोग आज सफल हैं, उन्होंने भी कभी असफलता देखी थी। फर्क सिर्फ इतना था कि उन्होंने “मैं नहीं कर सकता” को “मैं कोशिश करूँगा” में बदल दिया।

यह वीडियो सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसी सीख है जो आपको फिर से खड़े होने की ताकत देगी। अगर कभी आपको लगा है कि आपके सपने पूरे नहीं हो सकते, तो इस वीडियो को अंत तक ज़रूर देखिए।

हो सकता है, अगले कुछ मिनट आपकी सोच बदल दें… और जब सोच बदलती है, तभी ज़िंदगी बदलना शुरू होती है।

याद रखिए:

“सफल वही होता है जो हार मानने से पहले एक कोशिश और करता है।”

अगर यह वीडियो आपको प्रेरित करे, तो इसे अपने उन दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ भी ज़रूर शेयर करें जो आज खुद पर भरोसा खो चुके हैं।

भूकंप के दौरान मालकिन के साथ डटा रहा घोड़ा! वायरल CCTV वीडियो ने लोगों को किया भावुक

भूकंप के दौरान मालकिन के साथ डटा रहा घोड़ा! वायरल CCTV वीडियो ने लोगों को किया भावुक

सोशल मीडिया पर एक CCTV वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भूकंप के दौरान एक घोड़े ने अपनी मालकिन का साथ नहीं छोड़ा। वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही तेज झटकों से तबेला हिलने लगता है और छत से मलबा गिरना शुरू होता है, घोड़ा घबराकर भागने के बजाय अपनी मालकिन के पास पहुंच जाता है।

वीडियो में घोड़ा अपनी मालकिन के बेहद करीब खड़ा होकर उसे सुरक्षित रखने की कोशिश करता नजर आता है। कुछ क्षण बाद वह उसके साथ नीचे बैठ जाता है, मानो उसे हर खतरे से बचाने का प्रयास कर रहा हो। इस भावुक दृश्य ने सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया है।

वीडियो को लेकर लोग घोड़े की वफादारी और इंसानों के प्रति उसके गहरे लगाव की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि जानवर भी अपनेपन और भरोसे की भाषा अच्छी तरह समझते हैं और मुश्किल वक्त में अपने मालिक का साथ निभाना जानते हैं।

हालांकि, इस वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और लाखों लोग इसे देखकर भावुक हो रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा: दादरी की आदर्श कॉलोनी में घर की छत पर भीषण आग, दमकल ने पाया काबू

ग्रेटर नोएडा: दादरी की आदर्श कॉलोनी में घर की छत पर भीषण आग, दमकल ने पाया काबू

ग्रेटर नोएडा। दादरी क्षेत्र की आदर्श कॉलोनी में एक मकान की छत पर भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें और उठता धुआं देखकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए।

जानकारी के अनुसार, छत पर रखे कपड़े और अन्य घरेलू सामान ने आग पकड़ ली, जिससे देखते ही देखते आग फैल गई। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया और घटना की सूचना तुरंत दमकल विभाग को दी।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

फिलहाल आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और दमकल विभाग मामले की जांच में जुटे हैं।

योग की उत्पत्ति की प्रथम कथा पर आधारित भारत का शोधपरक नाट्य अनुभव

“मनुष्य की एक ही समस्या है—खंडित होना। योग का अर्थ है स्वयं से और समस्त सृष्टि से जुड़ना।”

‘आदियोगी’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, योग-दर्शन और रंगमंच का अद्भुत संगम है। लगभग दो वर्षों के गहन शोध के उपरांत युवा रंगनिर्देशक नितिन तेजराज द्वारा लिखित एवं निर्देशित यह प्रस्तुति उस प्राचीन कथा को रंगमंच पर जीवंत करती है, जिसे योग की उत्पत्ति की प्रथम कहानी माना जाता है।

कथा हमें लगभग 15,000 वर्ष पूर्व कांति सरोवर के दिव्य तट पर ले जाती है, जहाँ समाधिस्थ आदियोगी के समक्ष सप्तऋषि अपने जीवन के गहन प्रश्नों, दुखों, क्रोध, ज्ञान के अहंकार और आंतरिक अशांति का समाधान खोजने के लिए वर्षों से तप कर रहे हैं। जब आदियोगी अपनी समाधि से जागृत होते हैं, तब वे उन्हें योग का वह दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं, जो केवल शरीर का अभ्यास नहीं, बल्कि चेतना के विस्तार और आत्मबोध का विज्ञान है।

नाटक में योग के सात मार्गों, आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध, चक्र तथा ऊर्जा विज्ञान को अत्यंत कलात्मक और नाटकीय शैली में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक दृश्य दर्शकों को बाहरी संसार से भीतर की यात्रा की ओर ले जाता है और यह अनुभव कराता है कि वास्तविक शांति बाहर नहीं, स्वयं के भीतर निवास करती है।

शास्त्रीय संगीत, कांति सरोवर की भव्य मंच-सज्जा, प्रभावशाली प्रकाश योजना तथा कलाकारों का सशक्त अभिनय इस प्रस्तुति को एक आध्यात्मिक एवं सौंदर्यपूर्ण रंगानुभव में परिवर्तित कर देता है। विशेष रूप से आदियोगी के अंतिम संवाद दर्शकों के मन में लंबे समय तक गूंजते रहते हैं—

“जब भी कोई मनुष्य आँखें बंद करके स्वयं को खोजेगा, वह मुझे अपने भीतर पाएगा। मैं कोई व्यक्ति नहीं हूँ, मैं एक संभावना हूँ। मैं ही शिव हूँ। जो नहीं है, वही मैं हूँ।”

‘आदियोगी’ भारतीय संस्कृति, योग और रंगमंच की उस विरासत का उत्सव है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़ने, जीवन में संतुलन स्थापित करने और चेतना के उच्चतम आयामों तक पहुँचने की प्रेरणा देती है। यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि आत्मखोज, योग और सनातन ज्ञान की एक अविस्मरणीय रंगयात्रा है।

निरंतर नाट्य संस्था, भोपाल गर्व के साथ इस शोधपरक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय योग परंपरा को रंगमंच पर एक नई अभिव्यक्ति प्रदान करती है।

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