सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गृहिणी की मौत पर ₹30 हजार मासिक आय मानकर तय होगा मुआवजा

नई दिल्ली
एक्सीडेंट में जब किसी इंसान की मौत होती है, तब उसकी कमाई या सैलरी के हिसाब से मुआवजा तय होता है. लेकिन होम मेकर महिलाओं से जुड़े केस में यह मामला उलझ जाता है, क्योंकि होम मेकर महिलाओं की कोई तय कमाई नहीं होती. अब सुप्रीम कोर्ट ने होम मेकर (गृहिणियों) के मुआवजे को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि जब किसी दुर्घटना के कारण गृहिणी की मौत हो जाती है, तब उसका मुआवजा तय करते हुए उनके योगदान का आकलन आवश्यक है. अदालत ने कहा कि गृहिणियों का योगदान केवल परिवार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वो मानव संसाधन और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  ऐसे में उन्हें केवल “होममेकर” कहने के बजाय “नेशन बिल्डर” कहा जाना चाहिए। 

होम मेकर की मौत पर 30 हजार रुपए मंथली के हिसाब से तय हो मुआवजा
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गृहिणी द्वारा किए जाने वाले घरेलू काम और देखभाल की सेवाओं का आर्थिक मूल्य है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. दुर्घटना की शिकार गृहणियों के मामले में मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए होम मेकर महिलाओं की मौत पर 30 हजार रुपए महीना के हिसाब से मुआवजा तय करने की बात कही। 

एक्सीडेंट से जुड़े एक दावे की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 
वाहन दुर्घटना के दावों से जुड़ी एक अपील पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने कहा कि घर संभालने वाली महिला (होममेकर) का योगदान सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि देश के निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका होती है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा तय करते समय घर संभालने वाली महिला की मौत या अक्षमता के कारण परिवार को घरेलू देखभाल के मामले में जो नुकसान होता है, उसे अलग से मान्यता दी जानी चाहिए। 

जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसी उद्देश्य से घरेलू देखभाल के नुकसान (Loss of Domestic Care) का मूल्य ₹30,000 प्रति माह निर्धारित किया है. पीठ ने यह भी कहा कि यह सिद्धांत पहले दिए गए फैसले में निर्धारित मानकों के अतिरिक्त है। 
मुआवजा निर्धारण के लिए एक नया मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करता है। 

2001 में पंजाब की महिला की हादसे में मौत पर आया फैसला

यह फैसला पंजाब में एक मोटर एक्सीडेंट दावे से जुड़ी अपील पर आया, जिसमें नवंबर 2001 में रेशमा नाम की एक महिला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. उसके पति और तीन बच्चों ने मुआवज़े के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल का दरवाज़ा खटखटाया था. ट्रिब्यूनल ने 2003 में मुआवजा दिया, लेकिन यह मामला सालों तक मुकदमे में उलझा रहा, और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपील पर दिसंबर 2024 में जाकर फैसला सुनाया। 

दुर्घटना के दो दशक से भी ज्यादा समय बाद इस तरह की देरी पर चिंता जताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे के दाले पर आम तौर पर एक साल के अंदर फैसला हो जाना चाहिए. बेंच ने कहा ऐसे मामलों का फैसला आम तौर पर एक साल के अंदर हो जाना चाहिए। 

    कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों की मॉनिटरिंग करने और यह पक्का करने के लिए सही एडमिनिस्ट्रेटिव निर्देश जारी करने को कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा तय समय में हो जाए। 

    इस फैसले के दूरगामी असर होने की उम्मीद है क्योंकि पूरे भारत में कोर्ट आम तौर पर मृतक होममेकर्स के लिए मौजूदा न्यूनतम वेतन के आधार पर उन्हें एक काल्पनिक इनकम देकर मुआवजा तय करते हैं, और अक्सर उन्हें स्किल्ड या अनस्किल्ड वर्कर्स के बराबर मानते हैं। 
    सुप्रीम कोर्ट का फैसला उस तरीके से अलग है, यह मानते हुए कि घरेलू देखभाल के काम को पारंपरिक लेबर-मार्केट बेंचमार्क तक कम नहीं किया जा सकता। 

    कोर्ट की ये बातें उन मिसालों पर आधारित हैं जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि होममेकर्स के योगदान की, बिना पेमेंट के भी, मापने लायक आर्थिक वैल्यू है। 

    कीर्ति बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2021) और अरुण कुमार अग्रवाल बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2010) सहित कई पिछले फैसलों में, सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने होममेकर्स द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को गैर-कानूनी मानने के खिलाफ चेतावनी दी थी। 
    अदालत का यह ताजा फैसला एक कदम और आगे बढ़कर घरेलू देखभाल के नुकसान का आकलन करने के लिए हर महीने ₹30,000 का एक ठोस न्यूनतम बेंचमार्क तय करता है। 

    यह बेंचमार्क नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम प्रणय सेठी (2017) में संविधान बेंच द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के साथ काम करेगा, जो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवजा तय करने के लिए एक मिसाल है। 

Hormuz LPG Crisis: भारत पर नया ऊर्जा संकट! होर्मुज से आई बुरी खबर, LPG और ईंधन कीमतों पर बढ़ेगा दबाव

नई दिल्ली

 भारत पर एक बार फिर तेल-एलपीजी वाला नया खतरा मंडराने लगा है. भारत से कोसों दूर हुई घटना ने एक बार फिर सबके कान खड़े कर दिए हैं. जी हां, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है. इससे भारत की एलपीजी और तेल सप्लाई पर एक बार फिर असर पड़ सकता है। 

दरअसल, अपाचे हेलिकॉप्टर के गिराए जाने से अमेरिका गुस्से में है. अमेरिका दो दिनों से ईरान पर लगातार अटैक कर रहा है. इसके जवाब में ईरान ने अब होर्मुज को बंद करने का फैसला लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है. होर्मुज के रास्ते भारत का करीब 60 फीसदी से अधिक एलपीजी और तेल आता है. इतना ही नहीं, वैश्विक स्तर पर करीब 20% तेल और बड़ी मात्रा में LNG इसी होर्मुज के रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है। 

होर्मुज बंद होने से मचेगा हाहाकार
होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचेगा. इसकी झलक पूरी दुनिया पिछले कुछ समय में देख चुकी है. ईरान ने जब पहली बार होर्मुज बंद किया तो पूरी दुनिया में एलपीजी से लेकर तेल की किल्लत हो गई. मगर बात में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद होर्मुज खुल गया था. मगर अब अमेरिकी हमलों के कारण ईरान ने फिर इसे बंद करने का फैसला किया है. अगर होर्मुज फिर से लंबे वक्त तक बंद रहता है तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। 

भारत के लिए कितनी चिंता की बात
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल का करीब 40-50% हिस्सा, LNG का करीब 60% हिस्सा और LPG की बड़ी मात्रा इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं. भारत क्योंकि एलपीजी और तेल का आयातक देश है, तो इसकी भी निर्भरता होर्मुज पर ही है। 

एलपीजी सप्लाई पर बढ़ेगा दबाव
अगर होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो भारत में सबसे पहले LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. भारत में करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं और LPG का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है.  ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ सकता है. वैसे भी अब भी भारत में एलपीजी सप्लाई पहले की तरह नॉर्मल नहीं हो पाया है। 

तेल के भी बढ़ेंगे दाम?
इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल और महंगा हो सकता है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है. हालांकि, भारत के पास अब भी तेल और गैस का भंडार है। 

फर्टिलाइजर की आपूर्ति भी होगी प्रभावित
इतना ही नहीं, होर्मुज के बंद होने से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है. भारत यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए भी खाड़ी क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में लंबे समय तक संकट रहने पर कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों के पास कुछ समय के लिए रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मौजूद हैं, जिससे तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है। 

Iran-US War: फिर बंद हुआ होर्मुज, समंदर में अमेरिका-ईरान आमने-सामने; UN में भारत का कड़ा संदेश, 3 भारतीय क्रू का मामला गंभीर

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया फिर जलने लगा है. ईरान जंग की आग और भड़क उठी है. डील की बातें कर रहा अमेरिका अब युद्ध करने लगा है. ईरान पर अमेरिका लगातार अटैक कर रहा है. अपाचे हेलिकॉप्टर के मार गिराए जाने से अमेरिका आगबबूला हो चुका है. इसी से गरमाकर डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर अब ताबड़तोड़ अटैक कर रहे हैं. जी हां, पश्चिम एशिया यानी मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है. दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग होर्मुज में फिर हाहाकार मच गया है. होर्मुज के पास लगातार बम-गोलों की बरसात हो रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. इसी बीच ईरानी मीडिया में दावा किया गया है समुद्र में अमेरिकी और ईरानी नौसेनाओं के बीच झड़प हुई है. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. इतना ही नहीं, ईरान ने होर्मुज को भी फिर से बंद कर दिया है. वहीं, समंदर में जहाजों पर अटैक से चिंता बढ़ गई है. इसे लेकर भारत ने यूएन में भी आवाज उठाई है। 

दरअसल, ईरानी अखबार तेहरान टाइम्स ने दावा किया कि अमेरिकी और ईरानी सैन्य जहाजों के बीच समुद्री टकराव की खबरें हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने आ गईं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. दोनों नौसेनाओं के बीच झड़प हुई है. ईरान की मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, होर्मुज में भीषण झड़पें और गोलीबारी की खबरें हैं, क्योंकि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई तटीय इलाकों में हमले किए हैं। 

3 भारतीय क्रू के लापता होने का मामला गहराया

ओमान के तट के पास एक टैंकर पर हुए हमले और तीन भारतीय नाविकों के लापता होने के मामले ने भारत-अमेरिका संबंधों में नई मुश्किलें पैदा कर दी है. इस घटना के बाद भारत ने नई दिल्ली में अमेरिका के सबसे वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया था. अब अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर भारत सरकार के सीधे संपर्क में है। 

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, “स्टेट डिपार्टमेंट इस मामले को लेकर भारत सरकार के साथ सीधे संपर्क में है.” यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने ओमान के पास हुए हमले की निंदा करते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 

समंदर में ईरान-अमेरिका के बीच झड़प
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने इस जलमार्ग में अमेरिकी सेना का मुकाबला किया. आगे बताया गया कि अमेरिकी सेना ने अब तक कम से कम सात तटीय ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें बंदर अब्बास, सिरिक, केशम द्वीप और हेंगाम द्वीप के आसपास के इलाके शामिल हैं। 

यहां बताना जरूरी है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है. अमेरिका बीते कुछ समय से शांत था. वह ईरान संग डील करने को बेताब था. उसने इजरायल को भी अटैक करने से रोक रखा था. मगर अब अपाचे के गिरने के बाद अमेरिका ने ईरान पर फिर अटैक करना शुरू कर दिया है। 

दरअसल, बुधवार को भारत ने टैंकर सेटेबेलो पर हुए हमले की कड़ी आलोचना की थी. इस हमले में जहाज पर सवार 24 भारतीय क्रू में से 3 भारतीय क्रू लापता बताए जा रहे हैं. भारत ने इस मामले में अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय बुलाकर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के US डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को बुलाने के फैसले और दो जहाजों पर हमलों के बारे में एक सवाल के जवाब में, स्टेट डिपार्टमेंट के एक प्रवक्ता ने कहा, “डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट इस मामले में भारत सरकार के सीधे संपर्क में है। 

अमेरिका ने पलाऊ फ्लैग टैंकर पर किया था हमला
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने अमेरिकी पक्ष को स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय नाविकों की जान को खतरे में डालने वाली किसी भी कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता. हालांकि, भारत के आधिकारिक बयान में हमले के लिए किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन मामले से जुड़े जानकारों के मुताबिक, पलाऊ-फ्लैग वाले टैंकर सेटेबेलो को अमेरिकी बलों ने निशाना बनाया था. आरोप है कि जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को दरकिनार करने की कोशिश कर रहा था। 

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि तीन भारतीय अभी भी लापता हैं. ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान की निगरानी कर रहा है। 

जानकारी के मुताबिक, सेटेबेलो चीन के लियानयुंगांग बंदरगाह से संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह जा रहा था. जहाज पर कुल 28 लोग सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक रूसी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल थे. ओमान की सशस्त्र सेनाओं ने 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया। 

ओमानी नौसेना ने किया थे भारतीय क्रू को रेस्क्यू
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि ओमान के सोहार बंदरगाह से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में जहाज के इंजन रूम में आग लग गई थी. समुद्री सुरक्षा कंपनी वैनगार्ड के मुताबिक, जहाज ने संकट संदेश भेजकर बताया था कि उस पर मिसाइल हमला हुआ है, जिसके बाद आग लग गई. इसके बाद ओमान की नौसेना ने राहत अभियान शुरू किया। 

भारत ने इस पूरी घटना को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का नतीजा बताते हुए तत्काल तनाव कम करने की अपील की है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए. साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही बहाल की जानी चाहिए। 

गौरतलब है कि, 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर रखी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अब तक सात जहाजों को रोका गया है, 134 जहाजों का रास्ता बदला गया है और 42 मानवीय सहायता से जुड़े जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है। 

होर्मुज एक बार फिर हुआ बंद
अमेरिकी अटैक का असर अब होर्मुज में साफ दिख रहा है. ईरान ने एक बार फिर होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरानी सरकारी मीडिया का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान ने गुरुवार को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों सहित सभी तरह के यातायात के लिए बंद कर दिया गया है. ईरानी सेना ने चेतावनी दी कि होर्मुज से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज पर गोली चलाई जाएगी। 

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है. खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है। 

अमेरिका ने ईरान पर किया हमला, होर्मुज एक बार फिर बंद.

जहाजों पर हमले को लेकर भारत यूएन में गरजा

    इधर, होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने कहा कि समुद्री जहाजों को निशाना बनाया जाना बेहद चिंताजनक है. उन्होंने बताया कि इन हमलों में कई भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि कुछ भारतीय अब भी लापता हैं। 

    भारत ने साफ कहा कि वह वाणिज्यिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर हमलों का कड़ा विरोध करता है. पी. हरिश ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. उनकी सुरक्षा और भलाई भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है. भारत ने यह भी कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हित भी इस क्षेत्र की स्थिरता पर काफी हद तक निर्भर करते हैं. ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव न केवल स्थानीय देशों बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। 

    संयुक्त राष्ट्र में भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की. भारत ने कहा कि किसी भी पक्ष को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे हालात और खराब हों. नई दिल्ली ने जोर देकर कहा कि बातचीत, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान ही मौजूदा संकट से निकलने का सबसे बेहतर रास्ता है. गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी से ही युद्ध जारी है. बीचे में सीजफायर हुई थी. हालांकि, अब हालात और बिगड़ने लगे हैं। 

 

जहां कभी था जहांगीर खान का दबदबा, उसी इलाके में हाफ पैंट पहन पुलिस ने निकाली परेड

कलकत्ता

एक समय जिस इलाके में तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान का दबदबा और खौफ माना जाता था, वहीं अब एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आई है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जहागीर खान को हाफ पैंट पहनाकर सड़कों पर पैदल घुमाया, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मियों के बीच जहागीर खान सड़क पर चलते नजर आ रहे हैं. यह तस्वीर उस छवि से बिल्कुल उलट है, जिसमें कभी उनका रसूख और दबदबा चर्चा में रहता था और अब वही शख्स सरेआम इस तरह पेश किया जा रहा है। 

भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान
जहांगीर खान को उत्तरी बंगाल के पानीटंकी इलाके में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ़्तार किया गया था. खान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली. इस सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होने से कुछ दिन पहले से ही खान को दक्षिण 24 परगना ज़िले के उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं देखा गया था। 

डायमंड हार्बर की एक अदालत ने सरकारी पक्ष की अपील पर, फाल्टा पुलिस थाने में खान के खिलाफ दर्ज सात प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26 मई को खान को मिला अंतरिम संरक्षण हटा दिया था. खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा पुलिस थाने में सात प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। 

जहांगीर के ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा: द राइज़’ के ‘झुकेगा नहीं’ मशहूर डॉयलॉग को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई थी. उपचुनाव से पहले केंद्रीय बलों और पुलिस ने जहांगीर के घर पर छापा मारा था. इस कार्रवाई का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षकों में से एक अजय पाल शर्मा ने किया था. इस घटना के बाद तृणमूल ने पुलिस पर्यवेक्षक के अधिकार पर सवाल उठाए थे. जहांगीर ने कहा था कि यदि वह पुलिस अधिकारी ‘शेर’ है, तो वह भी ‘पुष्पा’ है. वे चुनाव आयोग के कथित पक्षपाती व्यवहार के आगे नहीं झुकेंगे। 

राज्यसभा चुनाव को लेकर दिग्विजय सिंह का निर्वाचन आयोग पर निशाना

राज्यसभा चुनाव को लेकर दिग्विजय सिंह का निर्वाचन आयोग पर निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस आशंका को विपक्ष लगातार जता रहा था, वही हुआ है। सिंह ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने मामले में कोई फैसला नहीं लिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट से आज ही निर्णय देने की मांग की गई थी।

उन्होंने कहा कि शाम चार बजे राज्यसभा चुनाव की घोषणा भी कर दी गई, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। दिग्विजय सिंह ने इसे “चोरी” बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी और पूरे देश में इस मुद्दे को उजागर करेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लड़ाई अंतिम दम तक लड़ी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी हर संभव प्रयास करेगी और मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा भेजकर रहेगी।

दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है।

केरल में निपाह वायरस की दस्तक! 43 वर्षीय व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर

कोझिकोड

केरल में निपाह वायरस के एक मामले की पुष्टि हो गई है. शुरुआती जांच में 43 साल के व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. कोझिकोड के फेरोक के रहने वाले संदिग्ध मरीज की शुरुआती जांच में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है. यह जांच कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में की गई थी.स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ अस्पताल के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में आया था और माना जा रहा है कि निपाह का संदिग्ध मरीज़ माने जाने से पहले वह कई लोगों के संपर्क में आया था। 

अधिकारियों को शक है कि यह संक्रमण किसी गोदाम की सफाई के दौरान हुआ हो सकता है, हालांकि इसके सही स्रोत की अभी पुष्टि नहीं हुई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) से अंतिम पुष्टि गुरुवार को होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ की हालत अभी स्थिर है. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार सुबह मेडिकल बोर्ड की बैठक बुलाई गई है. कोझिकोड ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अलग समीक्षा बैठक भी होगी. कंटेनमेंट ज़ोन घोषित करने और पाबंदियां लगाने का फ़ैसला समीक्षा बैठकों और NIV टेस्ट के नतीजों के आधार पर लिया जाएगा.स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज़ के कई लोगों के संपर्क में आने की वजह से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। 

घबराने की जरूरत नहीं: केरल के स्वास्थ्य मंत्री
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को कहा कि कोझिकोड के जिस व्यक्ति की शुरुआती जांच में निपाह की पुष्टि हुई है, वह कई लोगों के संपर्क में आया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय घबराने की कोई वजह नहीं है.मंत्री ने कहा कि 43 साल के मरीज़ ने उस प्राइवेट अस्पताल के कई विभागों का दौरा किया था जहां उसने शुरू में इलाज कराया था, जिससे दूसरों के भी संक्रमित होने की चिंता बढ़ गई है.मंत्री ने बताया कि एहतियात के तौर पर, अस्पताल के जिन कर्मचारियों के मरीज़ के संपर्क में आने की संभावना है, उन्हें क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया है। 

मंत्री ने आगे कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है और वे हालात पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य मंत्री के ऑफ़िस में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई है. मरीज़ का सैंपल पुष्टि के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भेजा गया है, जबकि ज़िला और राज्य स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी तैयारी के उपाय कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि मरीज़ की हालत स्थिर बनी हुई है। 

 

राज्यसभा निर्वाचन मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर विधायक रामेश्वर शर्मा की प्रतिक्रिया

भोपाल। राज्यसभा निर्वाचन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर विधायक Rameshwar Sharma ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्णय देगा, वह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होगा।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत में मामला विचाराधीन है, इसलिए सभी पक्षों को न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया में निहित है। शर्मा ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगा।

फिलहाल राज्यसभा निर्वाचन से जुड़े मामले पर देशभर की राजनीतिक निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं।

विकसित भारत के निर्माण में सभी दें योगदान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

विकसित भारत के निर्माण में सभी दें योगदान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

14 जून को होगा विशेष ऑनलाइन योग सत्र, टोल-फ्री नंबर पर मिस कॉल देकर करें पंजीयन

भोपाल। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज पूरे विश्व को स्वस्थ और संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के 7वें काउंटडाउन के अवसर पर 14 जून को प्रातः 6:30 बजे से 7:35 बजे तक विशेष ऑनलाइन योग सत्र आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को योग से जोड़कर स्वस्थ, जागरूक और निरोग समाज का निर्माण करना है।

डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे इस ऑनलाइन योग सत्र में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनें।

कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इच्छुक नागरिक टोल-फ्री नंबर 18003157008 पर मिस कॉल देकर अपना पंजीयन करा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आइए, हम सभी “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” के संकल्प के साथ स्वस्थ मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें तथा हर घर योग के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अभियान का हिस्सा बनें। :::

ग़ायब होने की खबरों के बीच सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार की फेसबुक पोस्ट, कहा— 18 जून को बताऊंगा किसे दिया वोट

रतलाम। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल के बीच सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक कमलेश्वर डोडियार के कथित रूप से लापता होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा। इस बीच विधायक डोडियार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

फेसबुक पोस्ट में डोडियार ने लिखा, “मेन स्ट्रीम मीडिया को सूचित करता हूँ कि राज्यसभा चुनाव के बारे में 18 जून को ही बताऊंगा कि मैंने वोट किसको दिया। और हाँ, दल्लों और गल्लों के सवालों का जवाब नहीं दूँगा। हमें सुझाव देने वाले पहले पंच या पार्षद बनना चाहिए।”

विधायक की इस पोस्ट के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। गौरतलब है कि उनके संपर्क में नहीं होने और मोबाइल फोन बंद होने की खबरों के बीच विभिन्न आदिवासी संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही थीं। वहीं सोशल मीडिया पर भी उनके वोट को लेकर अटकलें और टिप्पणियां की जा रही थीं।

डोडियार ने अपनी पोस्ट के माध्यम से आलोचकों और सुझाव देने वालों पर कटाक्ष करते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि वह राज्यसभा चुनाव में अपने मतदान संबंधी निर्णय का खुलासा निर्धारित समय पर ही करेंगे। साथ ही उन्होंने ट्रोलिंग और अनावश्यक टिप्पणियों पर भी नाराजगी जाहिर की।

अब सभी की निगाहें 18 जून पर टिकी हैं, जब विधायक कमलेश्वर डोडियार राज्यसभा चुनाव में अपने मतदान को लेकर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। :::

ग़ायब होने की चर्चाओं के बीच विधायक कमलेश्वर डोडियार का बड़ा बयान, बोले- 18 जून को बताऊंगा किसे दिया वोट

सैलाना विधायक डोडियार की फेसबुक पोस्ट से बढ़ी सियासी हलचल, आलोचकों पर साधा निशाना

फोन बंद और लापता होने की खबरों के बीच डोडियार का जवाब, कहा- दल्लों-गल्लों के सवालों का नहीं दूंगा उत्तर

 

 

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, कुलपति के इस्तीफे की मांग

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, कुलपति के इस्तीफे की मांग

भोपाल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में कथित अकादमिक अनियमितताओं, प्रशासनिक अव्यवस्था और आर्थिक भ्रष्टाचार के विरोध में बुधवार से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। परिषद ने विश्वविद्यालय के कुलपति के तत्काल इस्तीफे तथा विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर शासन द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने की मांग उठाई है।

एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय में एमबीए प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर सहित कई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणाम लंबे समय से लंबित हैं। वहीं पुनर्मूल्यांकन के नतीजे भी एक वर्ष से अधिक समय से घोषित नहीं किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय का अकादमिक कैलेंडर वर्षों से अस्त-व्यस्त है और पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन भी लंबे समय से नहीं हुआ है।

परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नर्सिंग महाविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई है, शिक्षकों की नियुक्तियां लंबित हैं, छात्रावासों की स्थिति खराब है और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में संबद्धता प्रक्रिया, विभिन्न टेंडरों, गोपनीय प्रिंटिंग कार्यों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान कार्यप्रणाली से छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और संबद्ध महाविद्यालय सभी प्रभावित हैं।

परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं होता और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। एबीवीपी ने दोहराया कि कुलपति के इस्तीफे तक यह अनिश्चितकालीन धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

एबीवीपी के इस आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र हितों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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