कर्नाटक में बड़ा सत्ता परिवर्तन! डीके शिवकुमार होंगे नए CM, सिद्धारमैया 3 बजे देंगे इस्तीफा

बेंगलुरु

 कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. सीएम सिद्धारमैया ने मंत्रियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग में यह ऐलान किया। सिद्धारमैया ने राज्यपाल से मुलाकात के लिए तीन बजे का समय मांगा है. सिद्धारमैया तीन बजे लोकभवन पहुंचकर सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंपेंगे. लेकिन इस बीच एक नया ट्विस्ट आ गया है. राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद ही नहीं हैं. ऐसे में सिद्धारमैया अपना इस्तीफा राज्यपाल के प्राइवेट सेक्रेटरी को सौंपेंगे।

डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के सीएम, सिद्धारमैया ने प्रस्तावित किया नाम
कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार की विदाई का वक्त तय हो गया है. सिद्धारमैया शाम तीन बजे लोकभवन पहुंचकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. सिद्धारमैया ने इस्तीफे से पहले अगले मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा है. डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

सिद्धारमैया ने सहयोगियों का किया धन्यवाद
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है. सीएम सिद्धारमैया ने सभी मंत्रियों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया और सूबे की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चर्चा की. सीएम ने सहयोगियों को बताया कि पिछले तीन वर्षों में उनकी अगुवाई वाली सरकार ने क्या-क्या किया, कांग्रेस की चुनावी गारंटियां पूरी करने के लिए योजनाएं किस तरह से लागू कीं और सामने आई चुनौतियों से किस तरह पार पाया।

डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया मिले गले
इससे पहले, बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आधिकारिक आवास पर अपने कैबिनेट सहयोगियों के लिए नाश्ते की मेजबानी की। इस बैठक में डी.के. शिवकुमार सहित कई अन्य मंत्री शामिल हुए। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई तस्वीरों में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच की दूरियां मिटती दिखीं। एक तस्वीर में सिद्धारमैया शिवकुमार को गले लगाते नजर आ रहे हैं, जबकि एक अन्य तस्वीर में भावी मुख्यमंत्री माने जा रहे शिवकुमार, सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक के दौरान सिद्धारमैया ने शिवकुमार के लिए रास्ता साफ करने और अपने इस्तीफे की घोषणा करने की योजना बनाई थी।

कांग्रेस हाईकमान का निर्देश और राहुल गांधी की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए अपना पद छोड़ने को कहा है। पार्टी ने 77 वर्षीय दिग्गज नेता सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट के साथ दिल्ली में कोई अहम भूमिका देने की पेशकश की है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इस प्रस्ताव को तत्काल स्वीकार नहीं किया है।

राहुल गांधी का संदेश
बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने का यह संदेश सीधे राहुल गांधी की ओर से आया है। सिद्धारमैया पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अगर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) उन्हें पद छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वह सहर्ष ऐसा करेंगे। इससे पहले मंगलवार को सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाया गया था। वहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल व रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच लगातार अहम बैठकें हुईं।

राज्यपाल की अनुपस्थिति से इस्तीफे में देरी
तय कार्यक्रम के अनुसार, सिद्धारमैया को बृहस्पतिवार को ही राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपना था। उन्होंने इसके लिए राजभवन से समय भी मांगा था। हालांकि, राजभवन के सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल व्यक्तिगत कारणों से इंदौर गए हुए हैं और फिलहाल शहर में नहीं हैं।

 शाम तीन बजे लोकभवन जाएंगे सिद्धारमैया
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया शाम तीन बजे लोकभवन जाएंगे. सीएम सिद्धारमैया लोकभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे. राज्यपाल बेंगलुरु में नहीं हैं, ऐसे में वह अपना इस्तीफा राजभवन सचिवालय को सौंपेंगे. गौरतलब है कि राज्यपाल रात के 10.30 बजे निकल गए थे।

कर्नाटक के प्रभारी एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मीडिया से अटकलें न लगाने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक राज्य में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की कोई बैठक नहीं बुलाई गई है और न ही कोई अंतिम निर्णय लिया गया है। आमतौर पर विधायक दल ही अपने नेता (मुख्यमंत्री) का चुनाव करता है।

समर्थकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं (जश्न और विरोध)
इस संभावित बदलाव को लेकर राज्य में सियासी पारा काफी चढ़ गया है और दोनों नेताओं के समर्थकों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। डी.के. शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की पक्की होती खबरों के बीच बेंगलुरु और रामनगर सहित राज्य के कई हिस्सों में उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री के पद छोड़ने की अटकलों के बीच उनके समर्थक भारी संख्या में उनके आधिकारिक आवास के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन किया।

पिछड़ा वर्ग महासंघ की चेतावनी
कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग समुदाय महासंघ ने कांग्रेस और हाईकमान को चेतावनी दी है कि यदि सिद्धारमैया को हटाया गया तो पार्टी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। महासंघ का तर्क है कि कांग्रेस सत्ता में ‘अहिंदा’ (AHINDA – अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों का कन्नड़ संक्षिप्त नाम) के समर्थन से आई है और पार्टी में सिद्धारमैया के कद का कोई दूसरा नेता नहीं है।

क्या है ‘रोटेशनल सीएम’ फॉर्मूला?
मई 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धारमैया और प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के बीच कड़ी टक्कर थी। उस समय पार्टी ने शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर विवाद सुलझाया था। उस दौरान ऐसी खबरें थीं कि दोनों नेताओं के बीच ‘रोटेशनल चीफ मिनिस्टर’ (ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने) के फॉर्मूले पर समझौता हुआ है। 20 नवंबर 2025 को कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा (ढाई साल) समय पूरा कर लिया था, जिसके बाद से ही इस नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई थी। हालांकि, पार्टी ने कभी इस फॉर्मूले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।

 
गवर्नर राज्य में नहीं फिर भी इस्तीफा दे सकते सिद्धारमैया, जानिए ऑप्शन
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पद से इस्तीफा देने वाले हैं और राज्यपाल बेंगलुरु से बाहर हैं. ऐसे में प्रक्रिया और संविधान के प्रावधान क्या कहते हैं?

बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल! TMC के 50 विधायक भाजपा के संपर्क में होने का दावा

कलकत्ता

णमूल कांग्रेस में जल्द ही बड़ी टूट हो सकती है। भारतीय जनता पार्टी सांसद का दावा है कि आधे से ज्यादा टीएमसी सांसद पार्टी बदलने के लिए तैयार हैं। वहीं, करीब 20 सांसद भी टीएमसी का साथ छोड़ सकते हैं। हालांकि, टीएमसी ने अब तक इसे लेकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। 4 मई को घोषित नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 80 विधायक हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा सांसद सौमित्र खान ने बुधवार को दावा किया है कि करीब 50 विधायक टीएमसी से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसी ही स्थिति 20 सांसदों की है। भाजपा सांसद का दावा है कि अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सहमति देता है, तो ये नेता पार्टी बदलकर भाजपा में आने के लिए तैयार हैं। हालांकि, अब तक भाजपा आलाकमान की तरफ से इसे लेकर घोषणा नहीं की गई है।

खत्म हो जाएगी टीएमसी
भाजपा सांसद का कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो टीएमसी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व एक बार कह देता है, तो टीएमसी पार्टी ही नहीं बचेगी। सभी लोग आने के लिए तैयार हैं। करीब 50 विधायक पार्टी से नाखुश हैं और 20 सांसद शामिल होने के लिए तैयार हैं।’ अटकलें हैं कि मॉनसून सत्र के आसपास टीएमसी सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

संकट में टीएमसी?
खास बात है कि खान की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब 100 से ज्यादा पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, कहा जा रहा है कि काकोली घोष दस्तीदार और फिरहाद हाकिम जैसे पार्टी के बड़े चेहरे नेतृत्व से खफा हैं। हालांकि, विधायक हाकिम ने खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन दस्तीदार नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। उनके बेटे ने संभावनाएं जताई थीं कि वह सांसद पद से भी इस्तीफा दे सकती हैं।

20 सांसद बदल सकते हैं पाला
संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा है कि 12 टीएमसी सांसदों ने भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की तैयारी कर ली है। इसके अलावा दल बदलने की तैयारी कर रहे सांसदों की लिस्ट में 5 से 6 नाम और हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि ये सांसद कौन होंगे और कब तक दल बदल की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 12 से ज्यादा सांसदों से चर्चा चल रही है और आंकड़ा 20 तक पहुंच सकता है।

तृणमूल के दो विधायकों की शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात
तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से मुलाकात की और इस दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां मौजूद थे। चुनावी हार के बाद विपक्षी दल के भीतर बदलते समीकरणों के बीच यह घटनाक्रम नई अटकलों को जन्म दे रहा है।  यह मुलाकात आधिकारिक तौर पर ‘शिष्टाचार भेंट’ बताई गई लेकिन यह दिल्ली स्थित पुराने बंग भवन में ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु की हालिया मुलाकात के कुछ ही दिन बाद हुई है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की चुनाव बाद की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में नए समीकरण उभरने की अटकलें तेज हो गई हैं।

शिवपुरी में महिला से बेरहमी: लुधावली क्षेत्र में आरती प्रजापति की पिटाई का वीडियो वायरल, कार्रवाई की मांग तेज

दबंगों पर गंभीर मारपीट के आरोप, नई एसपी से सख्त एक्शन की उम्मीद; कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के लुधावली क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां महिला के साथ बेरहमी से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़िता की पहचान के रूप में बताई जा रही है।

आरोप है कि कुछ दबंगों ने आरती प्रजापति के साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और लोग आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि आरती प्रजापति पहले भी कई विवादों और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं। हालांकि वायरल वीडियो के बाद अब पूरे मामले को लेकर कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

इसी बीच हाल ही में शिवपुरी जिले में नई पुलिस अधीक्षक की तैनाती हुई है, जिन्हें लोग “LadySingham” के नाम से भी जानते हैं। ऐसे में जनता को उम्मीद है कि इस मामले में जल्द और सख्त कार्रवाई देखने को मिलेगी।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

“ताली-थाली के बाद… अब सिलेंडर क्यों पीटा जा रहा है?”

“महंगाई पर जनता का तंज या सरकार को धन्यवाद?”

“एक समय था…

जब लोगों ने ताली पीटी…

थाली पीटी…”

 

“और आज…

लोग सिलेंडर पीट रहे हैं।”

“कोई कह रहा है विरोध है…

कोई कह रहा है व्यंग्य है…

और कुछ लोग पूछ रहे हैं —

क्या ये बढ़ते दामों पर धन्यवाद है?”

 

“क्योंकि रसोई का बजट अब

हर महीने नई परीक्षा बन चुका है।”

 

“जब सिलेंडर महंगा होता है…

तो आवाज़ सिर्फ लोहे की नहीं,

आम आदमी की भी सुनाई देती है।”

 

“महंगाई पर आपकी क्या राय है?”

Comment करके बताइए।

दिग्विजय सिंह के बयान पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले— “हिंदू कभी सांप्रदायिक नहीं रहा”

भोपाल में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस और दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना, कहा— कांग्रेस ने हमेशा हिंदुओं को गलत नजरिए से देखा और देश में अलगाववाद को बढ़ावा दिया।

भोपाल में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह  के बयान पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा  ने तीखा पलटवार किया है।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू से लेकर दिग्विजय सिंह तक कांग्रेस नेताओं की नजरों में हमेशा हिंदू समाज खटकता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा हिंदुओं को सांप्रदायिक बताने की राजनीति की है।

बीजेपी विधायक ने कहा कि वर्ष 1947 में देश का विभाजन हिंदुओं ने नहीं कराया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जिन्ना हिंदू थे? शर्मा ने आरोप लगाया कि देश विभाजन कराने वाली ताकतों के साथ उस समय भी कांग्रेस खड़ी थी और आज भी कांग्रेस अल्पसंख्यक राजनीति के नाम पर मुसलमानों को मुख्यधारा से जोड़ने के बजाय अलगाववाद की ओर धकेल रही है।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति कट्टरता और तुष्टिकरण पर आधारित रही है, यही कारण है कि आज पार्टी की दुर्दशा हो रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व पर हिंदू विरोधी मानसिकता रखने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज कभी सांप्रदायिक नहीं रहा और हिंदू ही दुनिया में मानवता और मातृभूमि के सम्मान की भावना रखने वाला समाज है।

शर्मा ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने “चहेतों” से पूछना चाहिए कि मांग का सिंदूर किसने उजाड़ा और देश के मठ-मंदिर किसने तोड़े।

बीजेपी विधायक ने कहा कि आज हिंदू समाज जाग चुका है और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार खड़ा है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर भोपाल में कांग्रेस का श्रद्धांजलि कार्यक्रम, दिग्विजय सिंह ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रोशनपुरा चौराहे से लेकर राजीव गांधी सभागार तक आयोजित कार्यक्रमों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पंडित नेहरू के आदर्शों को अपनाने का लिया संकल्प

राजधानी भोपाल में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न Jawaharlal Nehru की पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेस द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने रोशनपुरा चौराहे पर स्थापित पंडित नेहरू की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय स्थित राजीव गांधी सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें कांग्रेस नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पंडित नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सभा के दौरान पंडित नेहरू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

अपने संबोधन में Digvijaya Singh ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माण के शिल्पकार थे। उन्होंने देश को लोकतांत्रिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव प्रदान की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, उद्योग, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नेहरू जी की दूरदर्शी नीतियों का लाभ देश आज भी प्राप्त कर रहा है।

उन्होंने वर्तमान समय में पंडित नेहरू के विचारों और सिद्धांतों को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कार्यकर्ताओं से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए नेहरू जी के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने पंडित नेहरू के आदर्शों पर चलने तथा देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर सात दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ आज से

27 मई से 2 जून तक में होगा आयोजन, मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ; इसरो, बीएचयू और आईआईएम बोधगया के विशेषज्ञ होंगे शामिल

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित सात दिवसीय “सदानीरा समागम” का शुभारंभ 27 मई से भोपाल के भारत भवन में होने जा रहा है। यह आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें जल संरक्षण, पंचमहाभूत, भारतीय ज्ञान परंपरा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ मंथन करेंगे।

समागम का उद्घाटन मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और विभिन्न जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

कार्यक्रम में , और सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेकर अपने विचार साझा करेंगे।

समागम के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। लोकगायन, नृत्य-नाटिकाओं और भारतीय नौसेना बैंड की विशेष प्रस्तुति दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

इसके साथ ही जल संरक्षण विषयक प्रदर्शनियां, चित्रांकन कार्यशालाएं और पुस्तकों का लोकार्पण भी आयोजित किया जाएगा। आयोजन के वैचारिक सत्र प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 6 बजे से में आयोजित होंगे।

भुवनेश्वर में अभाविप की केंद्रीय कार्यसमिति बैठक संपन्न, पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित

शैक्षिक विसंगतियों, नक्सलवाद और छात्र हितों के मुद्दों पर अभाविप का मंथन; देशभर से आए प्रतिनिधियों ने संगठनात्मक विस्तार और राष्ट्रीय विषयों पर की चर्चा

महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरा भुवनेश्वर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एक-दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति बैठक ‘शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान’ विश्वविद्यालय में संपन्न हुई। बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, युवाओं की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक एवं आर्थिक विषयों सहित समसामयिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की।

बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए जनमानस के अभिनंदन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी और राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

बैठक में ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम अभियान’, ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’, ‘छात्रावास सर्वेक्षण अभियान’, ‘प्रा. यशवंतराव केलकर जन्मशती वर्ष’, ‘आपातकाल निषेध के 50 वर्ष’ तथा ‘मिशन साहसी’ जैसे विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था भारतीय दर्शन और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे युवाओं के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके। वहीं राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों, पेपर लीक, छात्रवृत्ति और छात्र हितों से जुड़े विषयों पर लगातार रचनात्मक आंदोलन और संघर्ष कर रही है।

बैठक में यह भी कहा गया कि अभाविप देशभर में छात्राओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण, छात्र सम्मेलनों और छात्र हितों के विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से युवाओं के बीच अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

केंद्रीय कार्यसमिति की यह बैठक आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की दिशा तय करने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक गति देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! TMC सांसद काकोली घोष ने सभी संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है. अब पार्टी को बड़ा झटका लगा है. बारासात से TMC पार्टी की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संगठन में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें आ रही थीं, जिस पर अब इस इस्तीफे ने मुहर लगा दी है।

प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजा पत्र
सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपना इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेज दिया है. अपने पत्र में उन्होंने साफ किया है कि वह पार्टी संगठन के सभी पदों को छोड़ रही हैं. बता दें कि इससे पहले उन्होंने बारासात के जिलाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह कोई बड़ा कदम उठा सकती हैं।

सांसद बनी रहेंगी काकोली घोष
हालांकि, काकोली घोष ने अभी तक तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है. वह लोकसभा में बारासात सीट से टीएमसी की सांसद बनी रहेंगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह कदम पार्टी नेतृत्व को एक कड़ा संदेश है, जिससे यह साफ है कि वह संगठन के कामकाज के तरीके से खुश नहीं हैं।

पार्टी में बढ़ता असंतोष ममता के लिए चिंता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी के अंदर कई सांसद और विधायक नाराज चल रहे हैं. काकोली घोष जैसी सीनियर नेता का इस तरह पदों से किनारा करना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी चिंता का विषय बन सकता है. फिलहाल इस पूरे मामले पर टीएमसी आलाकमान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

ममता बनर्जी के इस कदम से काकोली घोष आहत और नाराज चल रही हैं. काकोली घोष ने सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. काकोली घोष को टीएमसी के चीफ व्हिप से हटाए जाने के कुछ ही घंटों में केंद्र सरकार ने उनको वाई सिक्योरिटी दे दी थी. ऐसा तब था, जब अभिषेक बनर्जी से लेकर टीएमसी के तमाम नेताओं की सिक्योरिटी में कटौती की गई थी।

एक दिन पहले ही काकोली घोष टीएमसी के छह विधायकों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में भी शामिल हुई थीं. काकोली घोष टीएमसी की स्थापना के पहले से ममता बनर्जी की करीबी रही हैं।

I PAC को मैनर्स नहीं, बदतमीजी से बात करते थे
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी संगठन, चुनावी हार, आई-पैक की भूमिका और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब पार्टी सत्ता में नहीं थी और कार्यकर्ताओं को सड़कों पर प्रताड़ित किया जाता था, लेकिन कुछ लोग बाहर से आकर पार्टी को नुकसान पहुंचा गए।

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने पार्टी के कठिन समय में संघर्ष किया और मेहनत के दम पर संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दिया। मैं अच्छे समय में पार्टी में नहीं आई थी। जब लोग सड़कों पर पीटे जाते थे, तब भी मैं पार्टी के साथ थी। हमने लंबे संघर्ष के बाद पार्टी को मजबूत किया और करीब 20 साल बाद सत्ता हासिल की।

व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी में आए कुछ लोग
काकोली घोष ने इशारों में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधा, जो पार्टी के सत्ता में आने के बाद जुड़े। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति में आए। उन्होंने संगठन को मजबूत करने में कोई विशेष योगदान नहीं दिया। बंगालविधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार और चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसी आई-पैक की भूमिका पर काकोली घोष दस्तीदार ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी का काम करने का तरीका गलत था और उसके प्रतिनिधियों का व्यवहार पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति अपमानजनक था।

ममता बनर्जी के नौकर नहीं टीएमसी कार्यकर्ता
काकोली ने कहा कि हमारे कार्यकर्ता किसी के नौकर नहीं हैं। वे ममता बनर्जी और पार्टी के प्रति प्रेम और विश्वास के कारण काम करते हैं, लेकिन आई-पैक के लोगों ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी के कुछ सदस्य खुद को बहुत बड़ी सत्ता मानने लगे थे और स्थानीय नेताओं की राय को महत्व नहीं देते थे। उनके अनुसार, चुनाव प्रचार का संचालन करने वाली इस बाहरी एजेंसी के पास जमीनी राजनीति का पर्याप्त अनुभव नहीं था, जबकि पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

I-PAC में काम करने का बिल्कुल भी सलीका नहीं था। वे बहुत ही बदतमीज़ी से बात करते थे। हमारे ये कार्यकर्ता कोई नौकर नहीं हैं। हम इन्हें कोई तनख्वाह नहीं देते। ये तो ममता दीदी और पार्टी के प्रति अपने प्यार की वजह से काम करते हैं। वे लोगों के साथ बुरा बर्ताव करते थे, और उनका घमंड इतना बढ़ गया था कि आखिरकार उन्होंने हमारे साथ भी बुरा बर्ताव करना शुरू कर दिया। उन्हें ऐसा लगता था मानो वे प्रधानमंत्री से भी ज़्यादा ऊंचे ओहदे पर बैठे हों। मुझे नहीं लगता कि I-PAC सीधे तौर पर उनके (ममता बनर्जी के) नियंत्रण में था, क्योंकि I-PAC एक अलग ही संस्था है।

‘गंदा धर्म’ बयान पर घिरीं ममता बनर्जी, TMC में भी उठने लगे विरोध के स्वर

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सिलीगुड़ी में ममता बनर्जी के खिलाफ एक वकील की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले साल कोलकाता में ईद के एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर ममता बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। ममता के खिलाफ धारा 351 (1)- आपराधिक धमकी, धारा 352- शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किया गया अपमान और धारा 353- विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी, नफरत या द्वेष की भावना को बढ़ावा देना के तहत मामला दर्ज किया गया है।

यह शिकायत वकील रिंकी चटर्जी द्वारा दर्ज कराई गई है। उन्होंने अपनी शिकायत में साल 2025 में कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर के कार्यक्रम में दिए गए ममता बनर्जी के भाषण का हवाला दिया है।

क्या कहा था ममता ने?
पिछले साल ईद के मंच से भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कथित तौर पर कहा था, “मैं उस गंदे धर्म को नहीं मानती जिसे इस ‘जुमला पार्टी’ ने जानबूझकर गढ़ा है।” आरोप है कि उन्होंने भाजपा द्वारा प्रचारित हिंदू धर्म के स्वरूप को गंदा धर्म कहकर संबोधित किया था।

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख ने 31 मार्च 2025 को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, ‘क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (तत्कालीन) ममता बनर्जी के लिए सनातन धर्म एक गंदा धर्म है? उनके शासनकाल में कई हिंदू-विरोधी दंगे होने के बावजूद, उनमें हिंदुओं का मजाक उड़ाने और उनकी आस्था का अपमान करने की हिम्मत है। एक बार फिर उन्होंने मुसलमानों को हिंदुओं को निशाना बनाने की खुली छूट दे दी है। इस बार एक ऐसे धार्मिक मंच से, जो ईद मनाने के लिए था। उन पर शर्म आती है।’

वहीं, शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी का कहना है कि एक मुस्लिम धार्मिक सभा के मंच से सनातन धर्म को गंदा कहना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इससे भारत सहित दुनिया भर के हिंदुओं का अपमान हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कानून इस मामले में उचित और सख्त कार्रवाई करेगा। रिंकी चटर्जी ने अपनी शिकायत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रियों ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार हिंदू धर्म को निशाना बनाया है, जिसमें ममता बनर्जी का यह बयान सबसे गंभीर था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ममता बनर्जी ने साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी हिंदू समुदाय को परोक्ष रूप से धमकी दी थी।

TMC के भीतर से उठे विरोध के सुर
इस कानूनी कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है। जब इस एफआईआर को लेकर टीएमसी की दार्जिलिंग इकाई के महासचिव और पेशे से वकील अत्री शर्मा से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने पार्टी प्रवक्ता के रूप में तो कुछ नहीं कहा लेकिन व्यक्तिगत तौर पर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। अत्री शर्मा ने स्वीकार किया कि जब तृणमूल सत्ता में थी तब भी पार्टी के भीतर कई लोग इस बयान के खिलाफ थे। उन्होंने कहा, “उस समय सत्ता की कमान संभालते हुए ममता बनर्जी के लिए इस तरह की टिप्पणी करना वास्तव में अनुचित था। यहां तक कि हममें से जो लोग उस समय से पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं, उन्होंने भी उन विशेष टिप्पणियों का कभी समर्थन नहीं किया। देश के हर नागरिक को शिकायत दर्ज कराने का नैतिक अधिकार है।”

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