“महंगाई पर जनता का तंज या सरकार को धन्यवाद?”
“एक समय था…
जब लोगों ने ताली पीटी…
थाली पीटी…”
“और आज…
लोग सिलेंडर पीट रहे हैं।”

“कोई कह रहा है विरोध है…
कोई कह रहा है व्यंग्य है…
और कुछ लोग पूछ रहे हैं —
क्या ये बढ़ते दामों पर धन्यवाद है?”
“क्योंकि रसोई का बजट अब
हर महीने नई परीक्षा बन चुका है।”
“जब सिलेंडर महंगा होता है…
तो आवाज़ सिर्फ लोहे की नहीं,
आम आदमी की भी सुनाई देती है।”
“महंगाई पर आपकी क्या राय है?”
Comment करके बताइए।
