अजय सिंह यादव का कांग्रेस पर निशाना, कहा- हार नहीं, कुर्सी बचाने की लड़ाई में उलझी है पार्टी

अजय सिंह यादव का कांग्रेस पर निशाना, कहा- हार नहीं, कुर्सी बचाने की लड़ाई में उलझी है पार्टी

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की स्थिति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पार्टी के लिए चुनावी हार कोई मुद्दा नहीं है, बल्कि नेताओं के बीच एक-दूसरे की कुर्सी छीनने की होड़ चल रही है।

अजय सिंह यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं का लगातार अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुभवी नेताओं को न तो अपनी बात रखने का अवसर दिया जा रहा है और न ही संगठन में सम्मानजनक स्थान मिल रहा है। उनके अनुसार, वरिष्ठ नेताओं को हाशिए पर धकेलने की राजनीति कांग्रेस की कार्यशैली को उजागर करती है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस के भीतर वर्चस्व और पद की लड़ाई चरम पर है तथा पार्टी के नेता जनता के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय एक-दूसरे को कमजोर करने में लगे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी प्रकार के आंतरिक संघर्ष और नेतृत्व विवादों के कारण जनता कांग्रेस को गंभीरता से नहीं लेती।

अजय सिंह यादव ने कहा कि कांग्रेस को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है, लेकिन पार्टी नेतृत्व चुनावी हार के कारणों पर चर्चा करने के बजाय अंदरूनी खींचतान में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है।

 

— अजय सिंह यादव, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं के रिकॉर्ड पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं के रिकॉर्ड पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

अयोध्या: राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और दान प्रबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक नया दावा सामने आया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से प्राप्त लगभग 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दावों के अनुसार, इन शिलाओं में सोने-चांदी तथा रत्नों से अलंकृत शिलाएं भी शामिल थीं। यह भी कहा जा रहा है कि सबसे मूल्यवान शिलाओं में से एक मॉरीशस से प्राप्त हुई थी, जबकि मुंबई के एक व्यापारी द्वारा हीरे जड़ी शिला भेंट किए जाने का दावा किया गया है।

रिकॉर्ड और निगरानी को लेकर सवाल

मामले को लेकर कई प्रश्न उठाए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख सवाल यह हैं कि इन शिलाओं का आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है, उनकी जिम्मेदारी किसके पास थी और उनके संरक्षण एवं निगरानी की व्यवस्था किसके अधीन थी।

स्थानीय स्तर पर इस विषय पर चर्चा तेज बताई जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि यदि किसी विशेष जांच दल (SIT) का गठन होता है और उसके जांच दायरे में यह विषय शामिल किया जाता है, तो इन पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

दान राशि प्रबंधन पर भी उठ रहे सवाल

इसी बीच राम मंदिर से जुड़ी दान राशि के प्रबंधन को लेकर भी विभिन्न प्रकार के आरोप और दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि दान राशि के उपयोग और लेखा-जोखा में अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

जांच और जवाबदेही की मांग

मामले को लेकर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और कुछ स्थानीय लोगों द्वारा पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

वहीं, इस पूरे मामले में अब तक किसी जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए सभी आरोपों और दावों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप और दावे विभिन्न पक्षों द्वारा लगाए गए हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि या न्यायिक सत्यापन अभी शेष है। निष्पक्ष जांच के निष्कर्ष आने तक किसी भी पक्ष को दोषी मानना उचित नहीं होगा।

नागपुर में कथित रेप, ब्लैकमेल और जबरन धर्मांतरण का मामला, दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

नागपुर में कथित रेप, ब्लैकमेल और जबरन धर्मांतरण का मामला, दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

महाराष्ट्र के नागपुर से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसे नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किया गया, आपत्तिजनक वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया गया और बाद में कथित तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन कर निकाह कराया गया। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अय्याज ताज मदारे और अमीन शेख के रूप में हुई है। वहीं, मामले में नामजद एक मौलाना फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पीड़िता के पति भारतीय वायुसेना में अधिकारी हैं और वर्तमान में दूसरे शहर में तैनात हैं।

महिला की शिकायत के मुताबिक, मुख्य आरोपी अय्याज ताज मदारे उसका पुराना परिचित था। दोनों स्कूल में साथ पढ़ चुके थे। आरोप है कि प्लॉट खरीदने के सिलसिले में संपर्क बढ़ने के बाद आरोपी उसे वर्धा रोड स्थित एक होटल में ले गया, जहां कथित तौर पर जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया। पीड़िता का आरोप है कि बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया गया और आपत्तिजनक वीडियो बना लिए गए।

शिकायत में कहा गया है कि आरोपी बाद में वीडियो और तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर महिला को लगातार ब्लैकमेल करता रहा। आरोप है कि इसी दबाव में उससे लाखों रुपये की उगाही की गई और उसका लगातार यौन शोषण भी किया गया।

महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले महीने उसे नागपुर के पास कामठी क्षेत्र में ले जाया गया, जहां कथित तौर पर तांत्रिक और सम्मोहन जैसी रस्मों के जरिए उसका धर्म परिवर्तन कराया गया और अय्याज के साथ जबरन निकाह पढ़वाया गया। शिकायत में यह आरोप भी शामिल है कि उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध गौमांस खाने के लिए मजबूर किया गया।

पुलिस ने मामले में दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, जबरन धर्मांतरण समेत महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय, अनिष्टकारी एवं अघोरी प्रथाओं तथा जादू-टोना विरोधी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

फिलहाल, दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि फरार आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और सभी आरोपों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: इस खबर में शामिल आरोप पीड़िता की शिकायत और पुलिस में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित हैं। आरोपियों का पक्ष सामने आने और जांच पूरी होने के बाद तथ्य बदल सकते हैं।

श्रमिक कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सुविधाओं का विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मंत्री पटेल

भोपाल

श्रमिकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्रमिक कल्याण से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने यह निर्देश मध्यप्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मंडल, मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल तथा मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दिए।

मंत्री  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। नई श्रम संहिताएं श्रमिकों को नया संरक्षण प्रदान करते हुए उनके कल्याण के लिए संचालित व्यवस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप श्रम कल्याण संबंधी प्रावधानों को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जाए, जिससे कर्मचारी और नियोक्ता के मध्य बेहतर संबंध स्थापित हों और औद्योगिक विकास को गति मिले।

श्रम मंत्री  पटेल की पहल पर श्रमिकों के बच्चों के लिए “मेधा छात्र उन्नयन छात्रवृत्ति योजना”। प्रारंभ करने का बड़ा निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश और सीबीएसई बोर्ड में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले 100 मेधावी विद्यार्थियों को 7,500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसके अलावा, श्रमिकों को स्वास्थ्य से जोड़ने के लिए प्रदेश के 422 संस्थानों में योग गतिविधियां चलाई जा रही हैं। बुरहानपुर और नरसिंहपुर में आदर्श श्रम कल्याण केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, जबकि इंदौर और ग्वालियर में भी ऐसे केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है।

बैठक में जानकारी दी गई कि नई श्रम संहिताओं (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं नियम-2026) के माध्यम से श्रमिकों को अधिक सुरक्षा और सुविधाएं मिलेंगी। इसके तहत न्यूनतम वेतन का दायरा सभी वर्गों तक बढ़ाया गया है, मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह सुनिश्चित किया गया है तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्करों की सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही, असंगठित श्रमिकों के उपचार के लिए शीघ्र ही एक नई स्वास्थ्य सहायता योजना शुरू की जाएगी और पंजीकृत श्रमिकों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की जाएगी।

निर्माण श्रमिकों के कल्याण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मंडल द्वारा प्रसूति सहायता योजना में 190.84 करोड़ रुपये और अनुग्रह सहायता में 23.36 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 92.95 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। बैठक में योजनाओं की बेहतर निगरानी के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और पोर्टल का सिक्योरिटी ऑडिट कराने तथा मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करने पर सहमति बनी। श्रमिकों तक सीधी मदद पहुंचाने के लिए ‘श्रम साथी योजना’ के तहत स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी। नई शिक्षा नीति के अनुरूप भोपाल के पांच महाविद्यालयों में श्रम एवं कौशल आधारित शिक्षा की पायलट परियोजना भी शुरू की जाएगी। इस अवसर पर संबंधित अधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

 

साइबर अपराधों के विरुद्ध 15 दिवसीय “Safe Click 2.0” वृहद जनजागरूकता अभियान चलेगा

भोपाल 

प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम तथा नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 दिवसीय प्रदेशव्यापी साइबर वृहद जन-जागरूकता अभियान 24 जून से 8 जुलाई तक “Safe Click 2.0” नाम से प्रारंभ किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य साइबर सुरक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक साइबर अपराधों से बचाव संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना है।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्‍यम से समस्‍त जोनल पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि इस अभियान को अधिक व्यापक, प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित स्वरूप में संचालित किया जाए।

डीजीपी ने कहा कि फरवरी 2025 में संचालित साइबर जागरूकता प्रयासों में सभी इकाइयों द्वारा सराहनीय कार्य किया गया, जिसके परिणामस्वरूप डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों की घटनाओं में कमी देखने को मिली।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए जनता को निरंतर जागरूक करना आवश्यक है तथा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलकर इस अभियान को सफल बनाना होगा।

अभियान के दौरान प्रदेशभर में विभिन्न स्तरों पर व्यापक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें संस्थागत गतिविधियों के अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, शासकीय कार्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य संस्थानों में साइबर सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सामुदायिक जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से ग्राम पंचायतों, नगरीय क्षेत्रों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों को साइबर अपराधों के नए तौर-तरीकों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी।

अभियान के अंतर्गत जागरूकता वाहन के माध्यम से जनसंदेश प्रसारित किए जाएंगे, साइबर सुरक्षा मेले आयोजित होंगे तथा युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए “स्कैम हैकथॉन” जैसे नवाचार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति प्रतिबद्ध करने हेतु साइबर सुरक्षा शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही “मानव क्यूआर कोड” जैसी अभिनव गतिविधियों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संदेशों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। अभियान अवधि में साइबर जागरूकता श्रृंखला के तहत विभिन्न विषयों पर नियमित जनसंपर्क एवं संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि, साइबर ठगी अथवा फर्जी संदेश की सूचना तत्काल पुलिस एवं साइबर हेल्पलाइन को दें तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाकर साइबर सुरक्षित मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें।

 

कृषक कल्याण वर्ष में अन्नदाताओं के सम्मान और सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर किसान कल्याण के निर्णयों के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों के कल्याण के कार्य निरंतर होंगे। अन्नदाता को सम्मान के साथ उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रतिनिधि मंडल ने गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश की उपलब्धि के लिए हर्ष व्यक्त करते हुए किसानों के लिए की गई बेहतर व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश ने समर्थन मूल्य पर 13.42 लाख किसानों से 104.36 लाख मे.टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। किसान संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत में प्रथम है। उपार्जन की दृष्टि से पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में 9अप्रैल से 28 मई की अवधि में उपार्जन किया गया। समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल के साथ ही 40रुपए बोनस राशि मिलाकर किसान को प्रति क्विंटल 2625 रुपए प्रति क्विंटल के भुगतान की व्यवस्था करवाई गई। किसानों को 27 हजार 196.48 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान प्रदेश में किया जा चुका है।

किसानों ने ऋण अदायगी के लिए 31 मार्च की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 मई किए जाने और विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा देने का प्रावधान करने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने कहा कि राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णय प्रशंसनीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर किसानों ने कृषक हित से संबंधित कुछ सुझाव भी दिए। इनमें मूंग खरीद व्यवस्था और मूंग-उड़द के लिए पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण करवाने, नहरों को तालाबों से जोड़ने के सुझाव शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में  कमल सिंह आंजना,  चंद्रकांत गौर के साथ  सर्वज्ञ दीवान,  लक्ष्मी नारायण पटेल,  प्रह्लाद पटेल आदि शामिल थे।

 

नीट (UG) परीक्षा-2026 की सुरक्षा एवं निष्पक्ष संचालन को लेकर तैयारियों की व्यापक समीक्षा

भोपाल

प्रदेश में 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के सुरक्षित, पारदर्शी एवं निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। बैठक में परीक्षा से संबंधित संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था, अंतर-विभागीय समन्वय, साइबर निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा तथा परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा प्रश्नपत्रों के प्राप्त होने से लेकर उनके सुरक्षित भंडारण, परीक्षा केंद्रों तक परिवहन, परीक्षा संपन्न होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं एवं सामग्री की सुरक्षित वापसी तक संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्णतः सुरक्षित एवं त्रुटिरहित बनाए रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा में चूक की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी जिलों में पुलिस, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA), शिक्षा विभाग, बैंकिंग संस्थाओं तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी पुलिस अधीक्षक 20 जून तक परीक्षा केंद्रों, प्रश्नपत्र भंडारण स्थलों एवं संबंधित बैंकों का स्वयं निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण करें। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD), सुरक्षा बलों की तैनाती तथा अभ्यर्थियों की प्रवेश व्यवस्था का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए।

डीजीपी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से अपने जिले के प्रत्येक परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करें तथा प्रश्न-पत्रों के परिवहन, स्ट्रांग रूम, गोपनीय सामग्री की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की समुचित समीक्षा कर सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करें।

उन्‍होनें कहा कि साइबर माध्यमों से होने वाली किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर नजर रखने के लिए प्रदेश के 38 साइबर कमांडो सक्रिय रहेंगे। उन्होंने पेपर लीक, अफवाहों एवं अनुचित साधनों के उपयोग को रोकने के लिए साइबर निगरानी को और सुदृढ़ करने, सोशल मीडिया गतिविधियों पर सतत नजर रखने तथा पूर्व में परीक्षा संबंधी अपराधों में संलिप्त रहे व्यक्तियों एवं संदिग्ध तत्वों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। डीजीपी ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सभी अधिकारी पूर्ण संवेदनशीलता, समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना, पेपर लीक संबंधी दुष्प्रचार अथवा अनुचित गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई की जाए। उन्होंने “पेपर लीक के प्रति शून्य सहिष्णुता” (Zero Tolerance) की नीति अपनाने के निर्देश दिए।

पुलिस महानिदेशक ने बैठक में यह भी निर्देश दिए कि परीक्षा अवधि के दौरान होटल, लॉज, कोचिंग संस्थानों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों की आवश्यक जांच की जाए। जिला स्तरीय समन्वय समितियां लगातार सक्रिय रहें तथा अंतिम 72 घंटों के दौरान विशेष सतर्कता बरती जाए। परीक्षा समाप्ति के बाद प्रश्नपत्रों एवं अन्य गोपनीय सामग्री की सुरक्षित वापसी प्रक्रिया को भी उतनी ही गंभीरता से संचालित किया जाए जितनी गंभीरता से परीक्षा पूर्व सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जाती है।

बैठक में बताया गया कि मध्‍यप्रदेश में 283 परीक्षा केन्‍द्रों पर लगभग 1 लाख 18 हजार अभ्‍यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इंदौर, भोपाल, ग्‍वालियर एवं जबलपुर में सर्वाधिक परीक्षा केन्‍द्र बनाए गए हैं।

बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक  तरूण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, पुलिस अधीक्षक एटीएस  प्रणय नागवंशी, एवं एआईजी मती विनीता मालवीय उपस्थित रहे।

 

अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगा सकेंगे कलेक्टर, सरकार ने सीमित किए अधिकार

भोपाल 

प्रदेश में अवैध कालोनी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री रोकने या उस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। सरकार का कहना है कि अवैध कालोनी में रजिस्ट्री रोकने का निर्णय कलेक्टर नहीं ले सकते। अवैध कालोनी अधिनियम में तय प्रावधानों के अनुसार उनका अधिकार केवल संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करने तक ही सीमित है। 

बिना न्यायिक आदेश के लीगली वैध नहीं
आपको बता दें वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी, स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उनका कहना है कि इन स्थितियों के बिना खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं माना जा सकता। 

कलेक्टरों को निर्देश 
आपको बता दें वाणिज्यिक कर विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि रजिस्ट्री के दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता । वह केवल पक्षकारों के बीच हुई लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र एक सार्वजनिक साक्ष्य होता है। 

संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर जारी 
इस संबंध में ​सरकार के वित्त विभाग ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर लिख कर जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन की जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है।

रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इन स्थितियों के बगैर खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं है।

वाणिज्यिक कर विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं बल्कि पक्षकारों के बीच लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है।

सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन के आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है।

प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर विभाग अमित राठौर ने यह पत्र जारी कर कहा है कि ऐसे आदेश या निर्देश के अवलोकन से यह भी साफ हुआ है कि इनमें से अधिकांश में प्रतिबंध के आधार स्वरूप किसी वैधानिक प्रा‌वधान का उल्लेख नहीं रहता है तथा जिन मामले में अधिनियम या नियम का उल्लेख किया भी जाता है तो उनमें रजिस्ट्री पर रोक संबंधी कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं होता है।

कई प्रकरणों में पंजीयन अधिकारी पर पंजीयन से पहले वैध कालोनी के संबंध में जांच का भार भी डाला गया है, यह नियम विरुद्ध है।

रजिस्ट्री से पहले पहचान और सहमति की पुष्टि अनिवार्य
प्रमुख सचिव  के अनुसार संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर कानून में स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी को दस्तावेज के पंजीयन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान का सत्यापन करना होता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उसकी रजिस्ट्री के लिए अपनी सहमति दे रहा है।

उन्होंने कहा कि पंजीयन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के साथ आवश्यक अभिलेखों की सूची और उनकी प्रक्रिया मध्यप्रदेश पंजीयन नियम, 1939 में निर्धारित की गई है। इन नियमों के तहत जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, केवल उन्हीं मामलों में पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकता है।

प्रमुख सचिव के अनुसार, नियमों में निर्धारित कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर दस्तावेज के पंजीयन को अस्वीकार करने का अधिकार पंजीयन अधिकारी को प्राप्त नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही निर्णय लेना होगा।

विभाग की जांच में यह तथ्य आए सामने
विभाग द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह स्थिति पाई गई है।

    खरीदी-बिक्री और प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर रोक के अलावा संबंधित प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर भी सीधे तौर पर रोक लगी है।

    रजिस्ट्री पर रोक का स्पष्ट उल्लेख न करते हुए सब रजिस्ट्रार या जिला रजिस्ट्रार को आदेश या निर्देश जारी किए गए हैं।

    रजिस्ट्री से पहले ऐसे निषेधात्मक आदेश या पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी की अनुमति लेने की अपेक्षा की गई है।

    रजिस्ट्री से पूर्व वैध कालोनी के लिए सभी दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की अपेक्षा सब रजिस्ट्रार से की गई है।

कालोनी विकास नियम भी स्पष्ट नहीं होते
प्रमुख सचिव ने कहा है कि कई पत्रों में मध्यप्रदेश
नगरपालिका कालोनी विकास नियम 2021 के नियम का उल्लेख कर रजिस्ट्री पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की शर्त लगाई गई है। यह नियम तय तारीख के पूर्व अस्तित्व में आई अनधिकृत कालोनी के परिप्रेक्ष्य में है। इसलिए रजिस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते।

रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करना जरूरी

प्रमुख सचिव राठौर ने कहा है कि पंजीयन अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्टर्ड होने वाले दस्तावेजों के संबंध में स्थिति स्पष्ट है। इस अधिनियम को लेकर काम करने वाले पंजीयन अधिकारी के लिए पंजीयन पूर्व जांच में प्रावधान अधिनियम में व्यवस्था है।

इसके अनुसार पंजीयन अधिकारी को रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। पंजीयन के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेज के साथ नियमानुसार अपेक्षित दस्तावजों के संबंध में मध्यप्रदेश पंजीयन नियम 1939 के नियम में प्रावधान किए गए हैं। पंजीयन नियम में बताई गई परिस्थितियों में पंजीयन अधिकारी दस्तावेज की रजिस्ट्री इनकार करने में सक्षम है। इसके अलावा अन्य किसी भी आधार पर दस्तावेज के पंजीयन से इनकार करने में पंजीयन अधिकारी वैधानिक रूप से सक्षम नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध माना है
सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश को अलग-अलग निर्णय में अवैध माना है। इन तथ्यों के आधार पर प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने कहा है कि अवैधानिक रूप से विकसित की जा रही कालोनियों पर नगरीय आवास और विकास विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित अधिनियमों, नियमों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1956, मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 या अन्य किसी अधिनियम के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी या सक्षम न्यायालय द्वारा संपत्ति विशेष का स्पष्ट ब्यौरा देते हुए न्यायिक और अर्द्ध न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही आदेश जारी कर सकता है।

इस तरह की प्रॉपर्टी के ट्रांसफर, बिक्री पर रोक लगाए जाने की स्थिति में ऐसे आदेशों का नियमानुसार पालन किए जाने की भी आवश्यकता व्यक्त की है।

प्रतिबंध लगाया जाना लीगली वैध नहीं, प्रतिबंध खत्म करें
राठौर ने कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं होकर पक्षकारों के बीच संव्यवहार के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है। इसलिए दस्तावेजों की रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारता और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रकरण के अधीन प्रतिबंध लगाया जाना या खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश, निर्देश के पंजीयन अधिकारियों से पालन करना लीगली वैध नहीं है।

राठौर ने कहा कि दस्तावेजों के पंजीयन पर कोई विधि विरुद्ध प्रतिबंध नहीं लगाए गए। अगर इस तरह के प्रतिबंध प्रभावशील हैं तो उन्हें तत्काल समाप्त किया जाए। कुछ प्राधिकारियों द्वारा सामान्य पत्राचार या बिना सक्षम प्राधिकारिता के अवैधानिक रूप से दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है तो न्यायसंगत नहीं है।

ऐसे निर्देश या आदेश निष्फल मान्य किए जाएं। यह भी कहा गया है कि ये निर्देश नगरीय आवास और विकास ‌विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की सहमति से जारी किए जा रहे हैं।

एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले, इंदौर मेट्रो समेत कई परियोजनाओं पर ₹24,200 करोड़ खर्च को मंजूरी

 भोपाल

भोपाल के बाद सरकार ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की लागत में वृद्धि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। अब इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की कुल लागत 19,472 करोड़ रुपये होगी। इसमें 6,582 करोड़ रुपये की ऋण राशि भी शामिल है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दी गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने बताया कि मेट्रो रेल परियोजना की लागत में भूमिगत लाइन सहित अन्य कारण से वृद्धि हुई है। इसकी मूल लागत 7,500 करोड़ रुपये थी, जिसमें 5,388 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889 करोड़ रुपये होगी। इसके अतिरिक्त परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6,582 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

प्रोजेक्ट टाइगर, एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए 2,381 करोड़ की स्वीकृति

बैठक में प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा संबंधी योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक चलाने की स्वीकृति दी गई। इस अवधि में 2,381 करोड़ रुपये व्यय होंगे। इससे प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्रोतों का विकास, वन मार्गों का रखरखाव, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैंप निर्माण, दवाई क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था के काम होंगे। संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती और रातापानी टाइगर रिजर्व के साथ ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों का पुनर्वास किया जाएगा।
श्रमिक कल्याण, शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना रहेगी निरंतर

बैठक में श्रमिक कल्याण, जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन तथा 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखी जाने वाली योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, इंदौर में स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण, बाल श्रमिक सर्वेक्षण, बंधक मजदूरों का पुनर्वास, असंगठित शहरी व ग्रामीण कर्मकार मंडल की स्थापना सहित अन्य योजनाएं शामिल हैं।

 

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व हुआ “इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026” में प्रतिष्ठित पुरस्कार से पुरस्कृत

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश के गौरव एवं विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव पर्यटन स्थल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को “इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026” में “Editor’s Choice Award – Best Wildlife Destination” श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को वन्यजीव संरक्षण, उत्कृष्ट पर्यटन प्रबंधन, पर्यटकों को उच्च स्तरीय अनुभव प्रदान करने तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत एवं मुख्यमंत्री गोवा, डॉ. प्रमोद सावंत द्वारा गोवा में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व की ओर से फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय, बाँधवगढ़ टाइगर रिज़र्व तथा अपर मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव  एल. कृष्णमूर्ति ने प्राप्त किया।

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी समृद्ध जैव-विविधता, बाघों की अच्छी संख्या, प्राकृतिक सौंदर्य एवं प्रभावी संरक्षण प्रबंधन के लिए विशेष पहचान रखता है। पुरस्कार बाँधवगढ़ में कार्यरत समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय समुदायों तथा संरक्षण सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

पुरस्कार न केवल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण है तथा राज्य की पहचान को देश के अग्रणी वन्यजीव पर्यटन गंतव्यों में और अधिक सुदृढ़ करता है। 

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