पश्चिम बंगाल में बढ़ता जनता का भरोसा, भाजपा बन रही समाधान की आवाज़

भाजपा की शिकायत एवं सहायता व्यवस्था से आम नागरिक सीधे जनप्रतिनिधियों तक पहुँचा रहे हैं अपनी समस्याएँ — जनता को मिल रही है नई उम्मीद और भरोसेमंद नेतृत्व

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। प्रतिदिन भाजपा कार्यालयों के बाहर उमड़ती जनता की भीड़ इस बात का संकेत है कि अब लोग केवल वादे नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान चाहते हैं।

भाजपा द्वारा शुरू की गई शिकायत एवं सहायता व्यवस्था आम नागरिकों के लिए एक मजबूत माध्यम बनकर सामने आई है। अब लोग अपनी समस्याएँ सीधे लिखकर जनप्रतिनिधियों तक पहुँचा रहे हैं और उन्हें सुनवाई की उम्मीद भी मिल रही है। यही कारण है कि जनता का विश्वास लगातार भाजपा के प्रति बढ़ रहा है।

वर्षों तक कांग्रेस, लेफ्ट और तृणमूल सरकारों के दौरान आम लोगों की समस्याएँ अनसुनी रहीं। व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी थी कि लोगों को अपनी बात रखने के लिए कोई प्रभावी मंच नहीं मिलता था। लेकिन आज स्थिति बदलती दिखाई दे रही है।

भाजपा जनसेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही के संकल्प के साथ पश्चिम बंगाल की जनता के बीच लगातार काम कर रही है। यही वजह है कि राज्य के हर वर्ग के लोग भाजपा से जुड़ रहे हैं और इसे बदलाव की नई उम्मीद के रूप में देख रहे हैं।

आज बंगाल की जनता को यदि कहीं विश्वास और समाधान की उम्मीद दिखाई दे रही है, तो वह भाजपा की जनसेवा और मजबूत नेतृत्व में दिखाई दे रही है। 🚩

#SuvenduAdhikari #BharatiyaJanataParty #BJP #BJP4India #WestBengal #भाजपा #जनसेवा

गंजबासौदा के उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों की पिटाई का आरोप, शिक्षक का वीडियो वायरल

छड़ी से मारने और छात्रों को मुर्गा बनाने का आरोप, स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना के भी गंभीर सवाल

विदिशा जिले के गंजबासौदा स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ एनसीसी शिक्षक अनिल दुबे ने छात्रों की छड़ी से पिटाई की और उन्हें सजा के तौर पर मुर्गा भी बनाया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

बताया जा रहा है कि शासन द्वारा स्कूलों में बच्चों की पिटाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद विद्यालय में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। आरोप यह भी हैं कि प्रभारी प्राचार्य महेश चंद शर्मा और शिक्षक अनिल दुबे द्वारा स्कूल के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मामले की जांच कर संबंधित शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

ट्विशा केस में रिटायर्ड जज गिरिबाला को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की रद्द

भोपाल

 भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने बुधवार को कई घंटों की बहस के बाद देर रात आदेश जारी किया। जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। इसी के साथ अब CBI पूर्व जज गिरिबाला को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने हाईकोर्ट में ​अग्रिम जमानत निरस्त करने की याचिका लगाई थी। मध्यप्रदेश सरकार ने भी पूर्व जज गिरिबाला पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। बुधवार को दिन में पौने तीन घंटे की बहस के बाद रिजर्व किया गया हाईकोर्ट का ऑर्डर गुरुवार को रात्रि एक बजे के बाद बाहर आया। दरअसल, कोर्ट ने बुधवार को शाम पांच बजकर 20 मिनट पर ही साफ कर दिया था कि आदेश पारित करेंगे।

हाईकोर्ट में बुधवार की सुनवाई में सीबीआई ने दोनों मामलों में पक्षकार बनाए जाने और संशोधन के लिए आवेदन दायर किए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार किया था। मामला ट्विशा सिंह की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है।

ट्विशा की शादी नौ दिसंबर, 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई, 2026 को ट्विशा की मौत फांसी पर लटकी अवस्था में हुई। बाद में कटारा हिल्स थाने में एफआईआर दर्ज हुई। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भोपाल ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे चुनौती दी गई।

सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप
हाई कोर्ट ने कहा कि वाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने 15 मई, 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करते हुए आदेश दिया। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।

पूर्व जज को गिरफ्तार कर सकेगी CBI
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा सकेगा। मामले की जांच कर रही CBI उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

12 मई की रात हुई थी ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत

12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है।

24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा की डेड बॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी।

आरोपियों ने ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की
हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग भी नहीं किया। आरोपी ने मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की, जो जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है। मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी को पक्षकार बनाना जरूरी है।

चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं
कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं। इसी बिंदु को अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण माना और कहा कि इन परिस्थितियों में गहन जांच की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से आरोप लगाए गए हैं कि सास और पति उस पर गर्भपात का दबाव डाल रहे थे। साथ ही दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगातार सामने आए हैं।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया था कि केवल विवाह के सात साल के भीतर हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट ने यह भी माना था कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में पैसे भेजता था।

व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य शिकायत पति के खिलाफ दिखाई देती है। इन्हीं आधारों पर अग्रिम जमानत दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और सबूतों की गहराई से जांच करने पर अलग तस्वीर सामने आती है।

हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर क्या-क्या कहा ?

    जमानत देना मामले की गंभीरता के हिसाब से सही नहीं था।
    ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।
    आरोपी पक्ष चोटों का सही जवाब नहीं दे पाया।
    आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया।
    मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश।
    पोस्टमॉर्टम में फांसी के अलावा भी चोटें मिलीं।
    ये चोटें सिर्फ शव उतारने से नहीं हो सकतीं।
    गवाहों ने गर्भपात का दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।
    अग्रिम जमानत केवल खास हालात में दी जानी चाहिए।

आखिर में क्या बोला हाईकोर्ट?
अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी। इसी के साथ कोर्ट ने 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द (Quash) कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

CBI और राज्य सरकार की दलीलें
    गर्भावस्था के बाद पति और सास ने ट्विशा पर चरित्र को लेकर शक किया।
    गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया, जिसका उल्लेख व्हाट्सऐप चैट्स में है।
    ट्विशा ने अपने परिवार को लगातार मानसिक प्रताड़ना की जानकारी दी थी।
    आरोपी प्रभावशाली हैं और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ (custodial interrogation) जरूरी है।

ट्विशा के पिता के वकील की दलीलें
    व्हाट्सऐप चैट्स में स्पष्ट है कि ट्विशा को मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी।
    पति गर्भ में पल रहे बच्चे पर शक करता था और गर्भपात का दबाव डालता था।
    ट्विशा ने कई बार मायके ले जाने की गुहार लगाई थी।
    परिवार को जांच और घटना की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
    ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।
    CCTV फुटेज से छेड़छाड़ और जल्दबाज़ी में जमानत देने का आरोप।

आरोपी पक्ष की दलीलें
    ट्विशा ने आत्महत्या की थी।
    घटना के बाद उसे तुरंत एम्स ले जाया गया था।
    पुलिस ने उसी दिन मोबाइल और DVR जब्त कर लिए थे, इसलिए सहयोग न करने का आरोप गलत है।
    व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य आरोप पति पर हैं, सास पर नहीं।
    अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए असाधारण परिस्थितियां आवश्यक हैं, जो इस मामले में नहीं हैं।

आदेश के बाद मामले में क्या हो सकता है?

1. अग्रिम जमानत खत्म मानी जाएगी
हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। इसका मतलब है कि अब आरोपी गिरिबाला सिंह को गिरफ्तारी से मिलने वाली कानूनी सुरक्षा नहीं रहेगी।

2. CBI अब तेजी से आगे की कार्रवाई कर सकती है
चूंकि मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है, इसलिए एजेंसी आगे कई अहम कदम उठा सकती है। इसमें आरोपी से पूछताछ, हिरासत में पूछताछ, मोबाइल चैट्स और डिजिटल सबूतों की जांच, CCTV फुटेज की पड़ताल, पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का गहराई से विश्लेषण शामिल हो सकता है।

3. गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मामला गंभीर है और जांच अभी शुरुआती चरण में है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पक्ष जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रहा था। ऐसे में CBI आरोपी की गिरफ्तारी कर सकती है।

4. सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है
आरोपी पक्ष के पास अब भी सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रहेगा। वे वहां स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल कर सकते हैं। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने और दोबारा जमानत देने की मांग भी कर सकते हैं।

भोपाल मेट्रो के लिए चलेगा बुलडोजर! न्यू मार्केट-रोशनपुरा में कई दुकानें और मकान हटेंगे

भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन की ब्लू लाइन के लिए अब न्यू मार्केट से लगे रोशनपुरा, मालवीय नगर में दुकानों की बड़ी तोड़फोड़ होगी। यहां दरवेश बर्तन भंडार की लाइन और इसके आसपास के क्षेत्र की दुकानों को नोटिस देकर आगाह किया गया है। अगले दो माह में यहां काम शुरू होगा। मेट्रो ट्रेन के इन नोटिस से पूरे क्षेत्र में लोगों में डर है। ये मेट्रो ट्रेन अफसरों से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। यहां सरकारी जमीन है और प्रोजेक्ट की डिजाइन में बदलाव कर दुकानों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

न्यू मार्केट और मालवीय नगर में स्टेशन की डिजाइन में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। छोटी बड़ी 15 दुकानें इससे प्रभावित होने की स्थिति है। रोशनपुरा मेट्रो स्टेशन कांग्रेस के जवाहर भवन के पास है। इसकी डिजाइन को लेकर कई आपत्तियां आईं। कुछ बड़े कॉम्प्लेक्स इसमें जा रहे थे, जिन्हें डिजाइन बदलकर बचाया गया। मालवीय नगर की ओर बड़ी संख्या में स्लम है।

जहांगीराबाद बाजार और आवासीय क्षेत्र भी चिंता में
मेट्रो की तोड़फोड़ से सिर्फ न्यू मार्केट मालवीय नगर ही नहीं, जहांगीराबाद बाजार से लेकर आवासीय क्षेत्र तक चिंता में है। यहां 600 मीटर लंबा हिस्सा मेट्रो के लिए तोड़ा जाएगा। इसमें कई बड़े व्यवसायिक भवन शामिल है। दुकानों के अंदर तक निशान लगाए हुए हैं। 20 मकान भी है, जिन्हें तोड़ा जाएगा। इसके लिए लोगों ने कलेक्ट्रेट से लेकर कोर्ट तक याचिका लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

रेलवे लाइन के किनारे से हटाई गईं 85 झुग्गिया
जिला प्रशासन व नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में छोला रेलवे लाइन के पास 85 झुग्गियों को हटाया गया। इन्हें हटाने के लिए रेलवे ने प्रक्रिया की थी। जिस जगह झुग्गियां बना ली थी वह रेलवे की जमीन है। यहां हाल में ही तेजी से जमीन पर कब्जा करने के लिए झुग्गियां बनाई जा रही थी। रेलवे ने जिला प्रशासन व नगर निगम की मदद से इन झुग्गियों को हटवाया। इस दौरान पुलिस बल उपस्थित रहा।

रेलवे के लिए खतरा थी झुग्गियां
गोविंदपुरा एसडीएम भुवन गुप्ता के अनुसार ये अभी नई झुग्गियां बनी थी। रेलवे की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी। इसके साथ ही रेलवे यहां अपनी जमीन को संरक्षित करने फेंसिंग का काम शुरू करने वाला है। मौके पर प्रशासन व पुलिस बल सुबह ही पहुंच गया था। इन झुग्गियों में से अधिकतर में छोटी दुकानें संचालित की जा रही थी। ये लोग पास की ही कॉलोनी के थे। इन्हें हटाया गया। जमीन खाली कराई, अब रेलवे यहां फेंङ्क्षसग कर जमीन को संरक्षित करेगा।

 

हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में उमड़ा आस्था का सैलाब, 11 दिन में पहुंचे 2 लाख श्रद्धालु

धार
 धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के बाद यहां आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अभूतपूर्व वातावरण देखने को मिल रहा है। फैसले के बाद से भोजशाला में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि पिछले मात्र 11 दिनों में यहां दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच चुके हैं।

विशेष बात यह है कि भोजशाला में अब केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दिल्ली सहित प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडेय ने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से शाम तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। अब तक यह स्थिति मुख्य रूप से मंगलवार तक सीमित रहती थी, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद सप्ताह के हर दिन भोजशाला में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक नियमित पूजा-अर्चना और आरती का क्रम जारी है, जिससे पूरे परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण और अधिक सशक्त हुआ है।

मुख्यमंत्री के प्रवास के बाद से लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के हालिया भोजशाला प्रवास के बाद लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं। श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को अब इस बात का इंतजार है कि यहां प्रस्तावित शोध संस्थान को किस स्वरूप में विकसित किया जाएगा तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भविष्य में कौन-कौन सी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं के विस्तार की मांग भी तेज हो गई है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भोजशाला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा का गौरवशाली प्रतीक है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री भोजशाला आएंगी
हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री का इंदौर-धार प्रवास 27 से 30 मई तक प्रस्तावित है। भोजशाला प्रकरण की कानूनी लड़ाई की सूत्रधार, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री इंदौर-धार प्रवास के दौरान भोजशाला में दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगी। रंजना अपने साथ लखनऊ के प्रसिद्ध महादेव मंदिर के तालाब से 108 कमल पुष्प मां वाग्देवी के चरणों में अर्पित करने के लिए ला रही हैं। हिंदू फ्रंट फार जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने बताया कि अग्निहोत्री ने श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ी है।

भोपाल के हुजूर-बैरसिया क्षेत्र में 2.10 लाख मकानों की गिनती का कार्य पूरा

भोपाल

जिले में जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों के सूचीकरण का काम किया जा रहा है।इसमें नगरीय क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में तहसील व पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके तहत हुजूर, कोलार, बैरसिया ग्रामीण और नगर पालिका क्षेत्र में जनगणना का काम पूरा कर लिया गया है। इन क्षेत्रों में 956 ब्लाक के 919 प्रगणकों ने करीब दो लाख दस हजार से अधिक मकानों की गिनती पूरी कर ली है।

इन मकानों में रहने वाले परिवारों से 33 तरह के सवाल भी रिकार्ड में दर्ज किए गए है।बता दें कि देश में 15 साल बाद जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानाें के सूचीकरण का काम किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार नगर निगम के 85 वार्ड में जनगणना के पहले चरण में मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 80 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। यह काम 30 मई तक पूरा करना पड़ेगा।

इसी बीच जनणना कार्य का निरीक्षण करने केंद्र से टीम आने वाली है, जो कि नगर निगम, पंचायत व नगर पालिका इलाके में पहुंचकर जनगणना के कार्य का सर्वे करेगी।

जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि जिले में नगर निगम, बैरसिया नगर पालिका, बैरसिया ग्रामीण, हुजूर और कोलार क्षेत्र में अलग-अलग जनगणना का काम किया गया है।

चार चार्ज अधिकारियों ने काम पूरा कर लिया है। नगर निगम क्षेत्र में कुछ काम बाकी है। इन मकानों की गणना के बाद डिजिटल जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। जिसके आधार पर जनगणना के दूसरे चरण का काम शुरु किया जाएगा।
7.10 लाख मकानों की गणना

नगर निगम के शहरी क्षेत्र में दो हजार 900 प्रगणकों ने सात लाख 10 हजार से अधिक मकानों की गणना का काम पूरा कर लिया है।नगर जनगणना अधिकारी हीरेन्द्र सिंह कुशवाहा की लापरवाही की वजह से निगम क्षेत्र में जनगणना के काम में देरी हो रही है, हालांकि 30 मई तक काम पूरा किया जाना है।
टीम नहीं आई तो 1855 पर करें काॅल

जनगणना में मकानों पर नंबरिंग करने के बाद उनकी जानकारी को अपलोड कर दिया गया है। अगर अब तक किसी मकान की गणना और परिवार से जुड़ी 33 सवालों की जानकारी नहीं ली गई है, तो आम लोग 1855 पर काल कर जानकारी दे सकते हैं। आनलाइन जानकारी को सत्यापन किया जाएगा।

कलेक्टर ने किया चार्ज अधिकारी का सम्मान

कोलार ग्रामीण क्षेत्र व नगरीय क्षेत्र बैरसिया में जनगणना के प्रथम चरण “मकान सूचीकरण व मकानों की गणना” का कार्य शत प्रतिशत हो गया है।इस पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बुधवार को कोलार ग्रामीण क्षेत्र के चार्ज अधिकारी यशवर्धन सिंह और सीएमओ बैरसिया नगर परिषद राजेन्द्र कुमार सक्सेना को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया ।

 

MP में बैंक, स्कूल और सरकारी दफ्तर कई दिन रहेंगे बंद, जरूरी काम पहले ही निपटा लें

भोपाल

एमपीवासियों के लिए इस वक्त एक अहम खबर सामने आ रही है। दरअसल, जून का महीना शुरू होने वाला है। जून के महीने में स्कूलों और बैंक आदि में निम्नलिखित अनुसार छुट्टी रहेगी। ऐसे में आपको बैंक से जुड़े जरूरी काम करने से पहले छुट्टियों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। वहीं, स्कूली बच्चों के लिए भी छुट्टी किसी त्योहार से कम नहीं है। जी हां आपको बता दें कि जून 2026 में स्कूल, बैंक और सार्वजनिक अवकाश कितने दिन रहने वाले हैं और किन-किन तारीखों में छुट्टी मिलेगी।

जून में छात्रों को वैकल्पिक व सरकारी अवकाश रहेगा

17 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – छत्रसाल जयंती / महाराणा प्रताप जयंती
23 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – महेश नवमी
24 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – वीरांगना दुर्गावती बलिदान दिवस
26 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – मुहर्रम
29 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – कबीर जयंती

MP में इस दिन रहेगा सार्वजनिक अवकाश

26 जून 2026 – मुहर्रम

यहां जानिए बैंकों में कितने दिन रहेगी छुट्टी

7 जून 2026  – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
13 जून 2026 – दूसरा शनिवार
14 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
21 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
26 जून 2026 – मुहर्रम
27 जून 2026 – चौथा शनिवार
28 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)

यदि आप बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजना तैयार करें। इस जानकारी से आप जून महीने में बैंकिंग कार्यों में किसी तरह की असुविधा से बच सकते हैं।

अंतरधार्मिक विवाह पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- हर मामले में सुरक्षा देना संभव नहीं

जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा है कि केवल सामान्य आशंकाओं या संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर लगातार व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा की मांग के लिए स्पष्ट और ठोस खतरे के प्रमाण होना जरूरी है।

इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 14 मई को रतलाम निवासी दंपती द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दंपती ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी कार रोकने की कोशिश की, उनके घर के पास संदिग्ध वाहन घूमते रहे और अन्य संदिग्ध घटनाएं हुईं। इसके आधार पर उन्होंने 24 घंटे पुलिस सुरक्षा और रात में विशेष सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी असाधारण सुरक्षा मांगने वाली प्रत्येक याचिका में स्पष्ट खतरे के पुख्ता प्रमाण होना जरूरी है। केवल सामान्य आशंकाएं या संदिग्ध वाहनों की आइसोलेटेड घटनाएं व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड तैनात करने का आधार नहीं बन सकतीं। ऐसे मामलों में नियमित पुलिस गश्त और जांच पर्याप्त होती है।

याचिका के अनुसार, दंपती ने वर्ष 2019 में दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। महिला विवाह से पहले इस्लाम धर्म मानती थी और उसने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया था। महिला ने जब अपने परिवार को विवाह और धर्म परिवर्तन की जानकारी दी, तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं।

धमकियां जारी रहने पर महिला ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय अदालत ने रतलाम पुलिस अधीक्षक को दंपती के आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

पहले कड़ी जांच आवश्यक-हाईकोर्ट
वर्तमान याचिका में दंपती ने अदालत को बताया कि 13 अप्रैल को बिना किसी प्रशासनिक कारण के उनकी सुरक्षा में तैनात सशस्त्र गार्ड हटा दिया गया और उसकी जगह एक होमगार्ड जवान को तैनात कर दिया गया, जिसके पास न हथियार था और न मोबाइल फोन।

अदालत ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में लगभग हर अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह के मामले में दंपती लगातार पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दायर कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में किसी आसन्न खतरे के ठोस और निर्विवाद प्रमाण नहीं होते।

तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के दिए गए निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में उसने केवल पुलिस अधीक्षक को आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, इसे दंपती को स्थायी 24 घंटे सुरक्षा देने का न्यायिक आदेश नहीं माना जा सकता।याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रोमैनेजमेंट) रिट क्षेत्राधिकार के तहत संभव नहीं है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का यह संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है कि ऐसी शिकायत मिलने पर वह तुरंत और उचित कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए।

 

MP में जन्म लेते ही हर बच्चे पर ₹55 हजार का कर्ज! सरकारी योजनाओं से बढ़ा बोझ

भोपाल 

एमपी की धरती पर पैदा होने वाले हर बेटा-बेटी पर 55323 रुपए का कर्ज है। यह कर्ज उसने या उसके मां-बाप का नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा बाजार से लिए जा रहे कर्ज के रूप में है जिसकी भरपाई सरकार प्रदेश वासियों से वसूले जाने वाले टैक्स के रूप में करती है.

प्रदेश की आबादी के वास्तविक आंकड़े फरवरी 2027 में आएंगे पर राज्य सरकार द्वारा जो औसत आबादी मानी जा रही है वह नौ करोड़ है। इसके आधार पर एमपी के हर व्यक्ति पर कर्ज की यह राशि सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी सरकार पर कर्ज की राशि 488714.17 करोड़ रुपए हैं जो इसके बाद के दो महीने में लिए गए 9200 करोड़ के कर्ज के चलते बढ़कर अब 497914 करोड़ रुपए हो गई है। बता दें कि सरकार ने पिछले साल 2025-26 में लिए गए कर्ज के मुकाबले 29 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाए हैं। माना जा रहा है कि यह किसी बड़ी योजना के बराबर की राशि है जिसका ब्याज सरकार ने चुकाया है।

प्रदेश सरकार का मौजूदा कर्ज और कर्ज देने वाली संस्थाओं पर बकाया राशि

    वित्त विभाग ने कहा है कि प्रदेश सरकार पर वर्तमान में 488714.17 करोड़ का कर्ज है। कर्ज की यह राशि सरकार ने अलग-अलग सेक्टर से ली है।

    राज्य सरकार ने बाजार से 333278.21 करोड रुपए का लोन लिया है। कंपनसेशन और अदर बॉन्ड जिसमें पावर बांड्स भी शामिल हैं, के जरिये सरकार ने 4416. 45 करोड़ रुपए उधार लिए हैं।

    साथ ही वित्तीय संस्थानों से 17737.58 करोड़ रुपए सरकार ने लिए हैं। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से लोन और एडवांस राशि के रूप में 81152.31 करोड़ रुपए ले रखे हैं।

    इसके अलावा अदर लायबिलिटी कैटेगरी में 13951.57 करोड़ रुपए का कर्ज होने की जानकारी दी गई है।

    केंद्र सरकार के नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से भी सरकार ने 38178.05 करोड़ रुपए ले रखे हैं। इस तरह कुल 488714.17 करोड रुपए का कर्ज राज्य सरकार पर है।

31 मार्च 2025 की स्थिति में था 421740 करोड़ का कर्ज
पिछले साल 31 मार्च 2025 की स्थिति में राज्य सरकार पर कुल कर्ज 421740.27 करोड़ रुपए था। अगर 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी की आबादी 8.80 करोड़ मानी जाए तो प्रदेश के हर व्यक्ति पर कुल कर्ज 47925 रुपए होता है। यानी एक साल में प्रति व्यक्ति कर्ज घटने के बजाय छह हजार रुपए बढ़ गया है और इस स्थिति में सुधार आने की कोई गुंजाइश फिलहाल दिखाई नहीं देती है क्योंकि योजनाओं की पूर्ति के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 में अप्रेल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया है।

लाड़ली बहना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने बढ़ाया कर्ज
राज्य सरकार पर कर्ज की बढ़ती राशि के पीछे मुफ्त में बांटी जाने वाली राशि को भी कारण बताया जा रहा है। सरकार भले ही दावे करे कि जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह अधोसंरचना विकास और प्रदेश के विकास के लिए खर्च हो रहा है लेकिन हकीकत यही है कि हर माह ली जाने वाली कर्ज की रकम लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्जवला योजना जैसे अन्य योजनाओं पर खर्च की जा रही है और प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने ले लिया है 9200 करोड़ का कर्ज
मोहन सरकार ने पिछले साल लिए गए 488714 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में अप्रेल और मई के महीनों में 9200 करोड़ रुपए का कर्ज चार बार में ले लिया है। अगर इसे भी कर्ज की कुल राशि में जोड़ दिया जाए तो वर्तमान में सरकार पर कुल कर्ज 4 लाख 97 हजार 914 करोड़ रुपए हो जाता है। इस नजरिये से देखें तो प्रदेश के हर नागरिक पर कर्ज का आंकड़ा 54301 से बढ़कर 55323 रुपए हो जाता है।

MP में रिकॉर्ड गेहूं खरीदी! 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

अब तक कुल 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित

सीमांत एवं लघु कृषकों से हुआ 32.14 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन
गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी

भोपाल

मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में अव्वल है। अब तक 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इसमें से 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी की गई है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है।

मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग

मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूँ का उपार्जन हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है।

किसानों को 22,842.9 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,842.9 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।

 

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu