जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर सात दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ आज से

27 मई से 2 जून तक में होगा आयोजन, मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ; इसरो, बीएचयू और आईआईएम बोधगया के विशेषज्ञ होंगे शामिल

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित सात दिवसीय “सदानीरा समागम” का शुभारंभ 27 मई से भोपाल के भारत भवन में होने जा रहा है। यह आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें जल संरक्षण, पंचमहाभूत, भारतीय ज्ञान परंपरा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ मंथन करेंगे।

समागम का उद्घाटन मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और विभिन्न जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

कार्यक्रम में , और सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेकर अपने विचार साझा करेंगे।

समागम के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। लोकगायन, नृत्य-नाटिकाओं और भारतीय नौसेना बैंड की विशेष प्रस्तुति दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

इसके साथ ही जल संरक्षण विषयक प्रदर्शनियां, चित्रांकन कार्यशालाएं और पुस्तकों का लोकार्पण भी आयोजित किया जाएगा। आयोजन के वैचारिक सत्र प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 6 बजे से में आयोजित होंगे।

भुवनेश्वर में अभाविप की केंद्रीय कार्यसमिति बैठक संपन्न, पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित

शैक्षिक विसंगतियों, नक्सलवाद और छात्र हितों के मुद्दों पर अभाविप का मंथन; देशभर से आए प्रतिनिधियों ने संगठनात्मक विस्तार और राष्ट्रीय विषयों पर की चर्चा

महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरा भुवनेश्वर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एक-दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति बैठक ‘शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान’ विश्वविद्यालय में संपन्न हुई। बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, युवाओं की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक एवं आर्थिक विषयों सहित समसामयिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की।

बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए जनमानस के अभिनंदन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी और राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

बैठक में ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम अभियान’, ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’, ‘छात्रावास सर्वेक्षण अभियान’, ‘प्रा. यशवंतराव केलकर जन्मशती वर्ष’, ‘आपातकाल निषेध के 50 वर्ष’ तथा ‘मिशन साहसी’ जैसे विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था भारतीय दर्शन और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे युवाओं के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके। वहीं राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों, पेपर लीक, छात्रवृत्ति और छात्र हितों से जुड़े विषयों पर लगातार रचनात्मक आंदोलन और संघर्ष कर रही है।

बैठक में यह भी कहा गया कि अभाविप देशभर में छात्राओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण, छात्र सम्मेलनों और छात्र हितों के विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से युवाओं के बीच अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

केंद्रीय कार्यसमिति की यह बैठक आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की दिशा तय करने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक गति देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बकरीद से पहले बंगाल में बड़ा एक्शन, बांग्लादेशी घुसपैठियों की घर वापसी शुरू

कलकत्ता
एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं। 

अपने वतन लौट रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासी           
एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, ‘हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। 
 
बंगाल सरकार का सख्त एक्शन
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, ‘बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे… ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं… अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 

हकीमपुर चेक पॉइंट पर प्रवासियों की भीड़                    
उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है। 

दलाल की मदद से आए भारत             
हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. “सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे,” सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, ‘क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?’

बॉर्डर चेकपॉइंट के पास जमा हुई भारी भीड़
बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। 

1. अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई:
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़े निर्देश दिए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाए गए हैं. पकड़े गए संदिग्ध घुसपैठियों को जेल भेजने के बजाय 30 दिनों तक इन सेंटर्स में रखकर उनकी पहचान और बायोमेट्रिक जांच की जाएगी. इसके बाद उन्हें बीएसएफ (BSF) को सौंपकर उनके देश वापस भेजा जाएगा. डर के कारण कई घुसपैठिए वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं। 

2. सीएए (CAA) के तहत नागरिकता:
बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए सीएए (CAA) सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी। 

3. 5 रुपये में ‘माछ-भात’ योजना और नई पाबंदियां:
चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करते हुए, नई सरकार ने पूरे राज्य में 400 कैंटीन खोलने का फैसला किया है, जहाँ 5 रुपये में मछली-चावल (माछ-भात) मिलेगा. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। 

4. टीएमसी (TMC) नेताओं पर जनता का आक्रोश:
वसूली, भ्रष्टाचार और बाहुबल के आरोपों के चलते टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम लोगों में भारी गुस्सा है. कुछ नेताओं के घरों से भारी मात्रा में कैश मिला है, तो कई नेताओं को जनता द्वारा पीटे जाने और कोर्ट में ‘चोर-चोर’ के नारे लगने की खबरें हैं। 

5. टीएमसी में भारी टूट और बगावत की अटकलें:
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के दो विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिससे टीएमसी में बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि 60 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं और टीएमसी के 12 से 20 सांसद एक साथ बीजेपी में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचा जा सके। 

जो CAA के दायरे से बाहर हैं, उन्हें माना जाएगा घुसपैठिया
    बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी. 
इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 

12 साल बाद PM मोदी से मिले थलपति विजय, दिल्ली में हुई अहम मुलाकात

 नई दिल्ली

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री, जोसेफ विजय अपनी कुर्सी संभालने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं. इस मुलाकात में उन्होंने प्रधानमंत्री से तमिलनाडु की उन मांगों को लेकर बात की जो केंद्र सरकार के सामने काफी लंबे समय से पेंडिंग हैं. विजय, तमिलनाडु के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं. उनकी मुलाकात का पूरा एजेंडा तो सामने नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री के अलावा और भी कई राजनीतिक हस्तियों से मिल सकते हैं।

तमिलनाडु हाउस पहुंचे विजय
दिल्ली पहुंचने के बाद विजय सबसे पहले, सेंट्रल दिल्ली में तमिलनाडु हाउस पहुंचे. प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात शाम 4 बजकर 30 मिनट के लिए शिड्यूल थी. शाम को प्रधानमंत्री से मिलने विजय सेवा तीर्थ पहुंचे. वहां करीब 25 मिनट तक दोनों की मीटिंग चली. इस मीटिंग में विजय और पीएम मोदी की बातचीत के बारे में डिटेल्स सामने आने का अभी इंतजार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर दी थी बधाई
विजय का सिनेमा सुपरस्टार से, पॉलिटिक्स का हीरो बनना बड़ी खबर थी. जब उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई दी थी. पीएम के एक्स हैन्डल से शेयर हुए पोस्ट में लिखा था, ‘थिरु सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बधाई. उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं. केंद्र सरकार लोगों का जीवन बेहतर करने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी।

दो साल पहले ही अपनी पार्टी TVK के साथ विजय ने राजनीति में एंट्री ली थी. तमिलनाडु चुनावों में शानदार जीत के बावजूद उनके पास बहुमत की कमी थी जिसके चलते उनका मुख्यमंत्री बन पाना लगातार खबरों में था. लेकिन की दशकों के बाद राज्य में तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन की सरकार चला रहे विजय, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही लगातार एक्शन में नजर आ रहे हैं।

असम में UCC विधेयक पास! उत्तराखंड-गुजरात के बाद ऐसा करने वाला तीसरा राज्य बना

गुवाहाटी
असम विधानसभा चुनाव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड ( समान नागरिक संहिता ) बिल को पास कर दिया है। इसी के साथ देश में उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम तीसरा राज्य बन गया है। जहां की विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल काेड बिल को पास किया है। बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में यूनिफॉर्म सिविल काेड लागू करने का वादा किया था। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद सीएम बने हिमंत बिस्वा सरमा ने पहली कैबिनेट में यूसीसी बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। असम में बहुविवाह के साथ लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रवाधान किया गया है।

UCC संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है : सीएम हिमंता

‘समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- प्रस्तावित कानून विपक्ष के बीजेपी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, समान नागरिक संहिता का लंबा इतिहास है. इसकी मांग सबसे पहले कांग्रेस ने 1925 में की थी. 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका सुझाव दिया था. वही कांग्रेस आज इसका विरोध कुरान और शरीयत के नजरिए से कर रही है, न कि हिंदू, ईसाई या आदिवासी दृष्टिकोण से।

कांग्रेस केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है : सीएम हिमंता
हिमंता ने कहा- कांग्रेस समान नागरिक संहिता का विरोध कर रही है. वह सभी जातियों, पंथों और धर्मों का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है. कांग्रेस असम की भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करती. मुख्यमंत्री ने कहा, आज की कांग्रेस को देखकर बहुत दुख और पीड़ा होती है. हमारे वक्तव्यों में सभी धर्मों और सभी लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. मुझे लगता है कि कांग्रेस को सांप्रदायिक पार्टी में बदलने के बजाय भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा का पालन करना चाहिए।

असम यूसीसी बिल की बड़ी बातें:

    शादी-तलाक का अनिवार्य पंजीकरण: सभी शादियों और तलाक का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है
    विवाह की न्यूनतम आयु: आदिवासियों को छोड़कर सभी धर्मों के लिए लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल तय की गई है।

    धोखे से शादी पर सजा: पहचान छिपाकर, धोखे या जबरदस्ती से शादी करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।

    बहुविवाह पर प्रतिबंध: सभी धर्मों में एक से अधिक शादियां करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है। विवाहित रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।

    लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, संबंध टूटने पर भी सरकार को जानकारी देनी होगी। लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलेगा।

    महिलाओं को समान अधिकार: सभी महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा और माता-पिता की संपत्ति में बेटी का भी पूरा हक होगा। इसके अलावा, छोटे बच्चों (5 वर्ष से कम) की कस्टडी का अधिकार आमतौर पर मां को दिया गया है।

    आदिवासी समुदायों (ST) को छूट: राज्य की अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को इन नए यूसीसी नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है। वे अपनी पारंपरिक रूढ़ियों और सामुदायिक कानूनों का पालन करना जारी रख सकते हैं।

(नोट: उत्तराखंड और गुजरात ने भी इसी तरह के नियम बनाए हैं। असम तीसरा राज्य है जिसकी विधानसभा में यूसीसी पास हुआ है।)

यूसीसी विधेयक की मूल बातें
154 पन्नों के इस बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य विवाह और तलाक़, उत्तराधिकार, लिव-इन रिश्तों से संबंधित क़ानूनों को नियंत्रित और विनियमित करना है और इससे जुड़े मामलों का संचालन करना है।

असम सरकार ने इस बिल के संदर्भ में एक बयान जारी कर कहा, “अगर यह बिल पास हो जाता है, तो धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी शादियों और तलाक़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हो जाएगा. जोड़ों को समारोह के 60 दिनों के भीतर उप-रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह ज्ञापन प्रस्तुत करना होगा।

विवाह संबंधी प्रावधानों के तहत, यह विधेयक एक विवाह को अनिवार्य बनाता है और दूल्हों के लिए 21 वर्ष और दुल्हनों के लिए 18 वर्ष की एक समान क़ानूनी आयु निर्धारित करता है।

विधेयक में कहा गया है, “यह प्रस्तावित क़ानून रीति-रिवाजों की पूरी आज़ादी देकर सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करता है. इसके तहत शादियाँ किसी भी मौजूदा धार्मिक समारोह या रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न की जा सकती हैं. इनमें वैदिक विवाह, अहोम
चकलोंग, सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, पवित्र मिलन और आनंद कारज शामिल हैं।

अतुल बोरा ने पेश किया था बिल
असम की विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने पेश किया था। यूसीसी में अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। वे ‘पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों’ को करती रहेंगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड चार विषयों को कवर करेगा। इसमें शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार, और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामले शामिल हैं। यह सभी धर्मों पर लागू होगा। जब हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली सरकार ने इस बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने विरोध किया था। यूसीसी बीजेपी का बड़ा वादा था, जिस सीएम सरमा ने पूरा कर दिया है।

 

80 करोड़ लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी! मोदी कैबिनेट ने राशन योजना में किए 3 बड़े बदलाव

 नई दिल्‍ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला हुआ है. कैबिनेट के इस फैसले से राशन लेने वाले 80 करोड़ लोगों पर सीधा असर पड़ेगा.  सरकार ने राशन व्यवस्था (PDS- पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला किया.  इसके लिए ‘सार्थक-पीडीएस’ (SARTHAK-PDS) योजना शुरू की गई है.  इस पूरी योजना पर करीब 25,530 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना के तहत सरकार हर महीने 80 करोड़ लोगों को राशन दे रही है. अब इस स्‍कीम को सही से चलाने के लिए कैबिनेट ने SARTHAK PDS योजना जारी रखने की मंजूरी दी है और इसके तहत कुछ बड़े सुधार किए हैं, जिसका लाभ गरीब परिवारों को मिलेगा. इन सुधारों से राज्‍यों को सपोर्ट देने से लेकर राशन की चोरी रोकने जैसी चीजें शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि इस योजना का मकसद देश की पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (PDS) यानी राशन व्यवस्था को ज्यादा मजबूत, आधुनिक और पारदर्शी बनाना है. इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹25,530 करोड़ का केंद्रीय आवंटन मंजूर किया है. इस स्‍कीम के तहत तीन खास बदलाव करने की बात कही गई है।

योजना के तहत तीन खास बदलाव
राज्‍यों की राशन ढुलाई में मदद करना: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कैबिनेट में बड़ा फैसला लेते हुए कहा गया है कि राज्‍यों की आर्थिक मदद की जाएगी. सरकार राज्‍यों की एजेंसियों को खाद्यान को एक राज्‍य के भीतर गोदामों से दुकानों तक पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता देगी. इससे ट्रांसपोर्ट कॉस्‍ट कम होगी और गरीबों तक राश समय पर पहुंच सकेगा. दूरदराज के इलाकों में इसका सबसे ज्‍यादा लाभ होगा।

फेयर प्राइस शॉप: इसका मतलब है कि सरकार राशन की दुकानों को भी सपोर्ट देगी. अश्विनी वैष्‍णव ने कहा कि लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी, जो काफी कम थी और अब राशन डीलरों को डिजिटल उपकरण, बेहतर स्‍टोरेज और संचालन के लिए सहायता मिलेगी. इससे दुकानों की वर्क सिस्‍टम मजबूत होगा और राशन डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में गड़बड़ी कम होगी. राशन दुकानदारों को आर्थिक राहत भी मिल सकती है।

तीसरा बड़ा बदलाव: कैबिनेट में तीसरा सुधार पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (PDS) का मॉर्डनाइजेशन है. सरकार राशन की व्‍यवस्‍था को मॉर्डनाइज करने जा रही है और इसे टेक्‍नोलॉजी बेस्‍ड बनाने जा रही है. इसमें ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रैकिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, स्‍मार्ट डिवाइस और ट्रांसपैरेंसी टूल शामिल है. इससे चोरी, ब्‍लैकमार्केटिंग कम होगी और जरूरतमंदों तक इसका सीधा लाभ मिलेगा।

बता दें सरकार का उद्देश्य वन नेशन-वन राशन कार्ड जैसी व्यवस्थाओं को भी ज्यादा प्रभावी बनाना है, ताकि देशभर में राशन वितरण अधिक सीमलेस और ट्रांसपैरेंसी हो सके. इसका करोड़ों लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। 

बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पुनरीक्षण को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, SIR को बताया वैध

नई दिल्ली

मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास SIR का अधिकार है. एसआईआर पर दायर यायिकाओं से जुड़े मामले में सर्वोच्च अदालत ने मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने के भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार को बरकरार रखा है. अदालत ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि ECI ने SIR का प्रयोग करके अपनी वैधानिक शक्तियों के बाहर जाकर कार्य किया है. इसे ‘अल्ट्रा वायर्स’ भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह कार्य-प्रणाली उस सामान्य प्रक्रिया से भिन्न है जो आमतौर पर अपनाई जाती है। 

SIR पर सीजेआई ने क्या कुछ कहा?
SIR पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पक्षों की अलग-अलग दलीलों पर गौर करने के बाद, और घटनाओं के क्रम को देखने के बाद, पार्टियों की ओर से पेश की गई दलीलों और रिकॉर्ड में रखी गई सामग्री को देखने के बाद, हमारा मानना ​​है कि इन मुद्दों का एनालिसिस करने की ज़रूरत है. सीजेआई ने तीन सवालों के जरिए अपनी बात रखीं। 

SIR पर सीजेआई के तीन सवाल
    क्या भारत के इलेक्शन कमीशन के पास SIR जैसी कार्रवाई करने का अधिकार है?
    क्या SIR के तहत जांच किसी जायज़ मकसद पर आधारित है और अगर ऐसा है, तो क्या इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाए गए उपाय, हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों के हिसाब से सही हैं?
    क्या SIR के तहत जांच करने में इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाया गया तरीका रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 के नियमों के खिलाफ़ है या उनका उल्लंघन करता है?

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार है, तो यह भी देखना होगा कि उसकी प्रक्रिया क्या होगी। हालांकि, केवल प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के आधार पर पूरे एसआईआर को अवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। पीठ ने यह भी कहा कि यह सवाल उठाया गया कि क्या इस समय एसआईआर कराने की कोई वैध आवश्यकता है। अदालत की राय में एसआईआर के दौरान उठाए गए कदम जरूरत के मुताबिक थे।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एसआईआर बिहार में चुनाव प्रक्रिया और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक दायित्व से ध्यान नहीं भटकाता। उन्होंने मतदाताओं पर खुद को साबित करने का बोझ डालने वाली दलील को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने निवास स्थान से कहीं और रहने लगा है, तब भी वह पुरानी एसआईआर प्रक्रिया से बाहर नहीं हो जाता। उसका या उसके परिवार का नाम पुराने रिकॉर्ड में मौजूद होगा।

अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर उन्हें सूची में शामिल किया है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि एसआईआर का उद्देश्य लोगों को मतदाता सूची से बाहर करना था। अगर कोई दस्तावेज सही नहीं पाया जाता है, तो चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम शामिल करने से इनकार कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग नागरिकता तय कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए क्या-क्या टिप्पणी की, उन्हें बिंदुवार जानते हैं-

1. चुनाव आयोग की शक्तियां बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष और शुद्ध मतदाता सूची तय करने का अधिकार है. अदालत ने यह भी माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपनाना संविधान और कानून के खिलाफ नहीं है. इसलिए SIR पूरी तरह वैध है और इसे प्रोसेस करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है. आयोग इसकी शक्ति रखता है.

2. कोई प्रक्रिया थोड़ी अलग हो तो अवैध नहीं हो जाती है- सुप्रीम कोर्ट
बिहार में यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है. अदालत ने कहा, ‘यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है. 11 दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के माध्यम से आधार कार्ड को शामिल किए जाने के बाद हम इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है.”

सुप्रीम कोर्ट की खास टिप्पणी-
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SIR प्रक्रिया को केवल इसलिए ‘अल्ट्रा वायर्स’ (अवैध) करार देकर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मतदाता सूचियों के संशोधन की सामान्य प्रोसेस से अलग है.

3. वोटर लिस्ट से नाम हटना, नागरिकता जाना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मतलब यह नहीं है कि किसी की नागरिकता खत्म हो गई. यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना था कि चुनाव आयोग का SIR अभियान ‘पिछले दरवाजे से नागरिकता जांच’ जैसा है.

4. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं- सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता के सवाल को सिर्फ इस सीमित दायरे में देख सकता है कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या हटाया जाए. अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है वह व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहा. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है.

5.  SIR ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ और संबंधित नियमों के विपरीत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SIR कानूनी रूप से मान्य और उचित है इसलिए यह ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (RP Act) का उल्लंघन भी नहीं करता है.

पीठ ने कहा कि अदालत का निष्कर्ष है कि एसआईआर संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की कसौटी पर खरा उतरता है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इतने विस्तृत कार्य को देखते हुए चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता। हालांकि, वह संदिग्ध लोगों के मामलों को केंद्र सरकार को भेज सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चुनाव आयोग जिन लोगों की नागरिकता पर संदेह जताता है, उनकी जानकारी 4 सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकरण को दे। सक्षम प्राधिकरण अगले चुनाव से पहले तक उनके बारे में निर्णय ले।

इस मामले में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, पीयूसीएल समेत कई संगठनों और विपक्षी नेताओं ने याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाकर्ताओं में मनोज झा, महुआ मोइत्रा, के. सी. वेणुगोपाल, पप्पू यादव और राजद सांसद सुधाकर सिंह भी शामिल हैं।

प्रक्रिया को अमान्य नहीं ठहराया जा सकताः सुप्रीम कोर्ट
SC ने आगे कहा कि जब कानून खुद ही किसी भी समय, दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर और उस तरीके से, जिसे चुनाव आयोग उचित समझे, एक विशेष संशोधन की अनुमति देता है तो इस विवादित प्रक्रिया को केवल इसलिए अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि यह नियमित संशोधन के लिए तय की गई सामान्य प्रक्रियाओं के हर पहलू के अनुरूप नहीं है।  

SC ने कहा कि हमारी सुविचारित राय में, यह विवादित SIR, ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of the People Act) और उसके नियमों की जगह नहीं लेता है. बल्कि, यह धारा 21(3) द्वारा निर्धारित सटीक कानूनी सीमाओं के भीतर, अनुच्छेद 324 के तहत दिए गए संवैधानिक आदेश में नई जान डालता है। 

लोकतंत्र की रक्षा में सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

संविधान, चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर देश का विश्वास हुआ और मजबूत।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और संविधान की गरिमा को और अधिक सशक्त करने वाला है।

यह फैसला उन सभी निराधार आरोपों और राजनीतिक भ्रमों का उत्तर है, जो लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जा रहे थे। चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की आधारशिला है।

एक स्वच्छ, पारदर्शी और विश्वसनीय मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान होती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय उसी दिशा में एक सकारात्मक और ऐतिहासिक कदम है।

मैं इस महत्वपूर्ण निर्णय का हृदय से अभिनंदन करती हूँ और देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अपनी पूर्ण आस्था व्यक्त करती हूँ।

Gunjan Chowksey

Advocate, Supreme Court of India

State Media Panelist, BJP Madhya Pradesh

District Vice President, BJP Bhopal

 

उमस भरी गर्मी से मिलेगी राहत, 8 डिग्री तक लुढ़केगा पारा; तूफान का अलर्ट

नई दिल्ली

देश के अलग-अलग राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान में इसकी जानकारी दी है। आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अगले 2-3 दिनों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में दस्तक देने की संभावना है। इसके लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में 28 मई से आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 60-80 किमी/घंटे की रफ्तार से चक्रवाती तूफान भी आ सकता है।

आईएमडी के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लू और रात में उमस वाली गर्मी का प्रकोप रहेगा। हालांकि, इसके बाद राहत मिल सकती है। 28 और 29 मई को पूरे उत्तर प्रदेश में धूल भरी आंधी चलने की आशंका है। इस दौरान 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। अलग-अलग हिस्सों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी है। इसके बाद तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।

बिहार में आंधी-तूफान का अलर्ट
27 से 30 मई के दौरान बिहार में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। 27 और 29 मई को बिहार में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। सबसे गंभीर चेतावनी 29 मई के लिए है। इस दिन 80 किमी/घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी और तूफान आने की आशंका है।

दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। 28-29 मई को इन राज्यों में मौसम पूरी तरह पलट जाएगा। दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में ओलावृष्टि के साथ 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की संभावना है, जिससे तपती गर्मी से भारी राहत मिलेगी।

पहाड़ों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में छिटपुट स्थानों पर लू चलेगी। गरज-चमक के साथ अलग-अलग जगहों पर बारिश होगी। 28 और 29 मई को इन तीनों पहाड़ी राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 70 किमी/घंटे रहने की संभावना है। आईएमडी ने इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

कैसा रहेगा बंगाल का मौसम
पश्चिम बंगाल में 27 से 29 मई के दौरान 50 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान की संभावना है। 27 मई को भारी बारिश हो सकती है। वहीं, झारखंड में अगले 7 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। 27 से 29 मई के बीच यहां 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ चलने की संभावना है। 27 मई को यहां लू का भी असर रहेगा।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मौसम
मध्य प्रदेश में 27 मई को भीषण लू की स्थिति रहेगी। 28 से 30 मई के बीच 40-50 किमी/घंटे की तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश शुरू होगी, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। छत्तीसगढ़ में 27 और 28 मई को लू चलने के बाद 27 से 30 मई के दौरान राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ेंगी, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी।

होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत, जयशंकर की कूटनीति लाई बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली
ईरान में होर्मुज संकट के बीच एक ऐसी खबर आई है, जो भारत को खुश करने वाली है. दरअसल ईरान में हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को आखिरकार रिहा कर दिया गया है. ये भारत सरकार की ओर से लगातार हो रही कूटनीतिक कोशिशों के बाद मिली सफलता है. एक लंबी वार्ता और प्रक्रिया के बाद इन नाविकों की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी है. भारतीय शिपिंग प्राधिकरण के मुताबिक ये नाविक एमवी हार्बर फीनिक्स नाम के तेल टैंकर पर तैनात थे। 

आपको बता दें कि ये मामला जुलाई, 2025 का है, जिसमें ईरान के जास्क पोर्ट के पास इस जहाज को रोके जाने के बाद नाविकों को हिरासत में ले लिया गया था. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने बयान जारी कर कहा कि नाविकों को अब सुरक्षित रूप से रिहा कर दिया गया है और उन्हें वापस भारत लाने की तैयारी की जा रही है. इस मामले कोई भी सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है और बेहद शांति से भारत सरकार ने नाविकों की वापसी सुनिश्चित की है। 

भारत-ईरान के अच्छे संबंधों का सबूत 
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक और ऊर्जा संबंध रहे हैं. हालांकि भारत अमेरिका और इजरायल के साथ भी करीबी रिश्ते बनाए रखता है, इसलिए ऐसे मामलों में नई दिल्ली काफी संतुलित और सावधानी भरी नीति अपनाती है. ईरानी सुरक्षा बल अक्सर खाड़ी क्षेत्र में उन जहाजों को पकड़ने का दावा करते हैं, जिन पर अवैध रूप से ईंधन ले जाने का शक होता है. हालांकि भारतीय नाविकों की गिरफ्तारी की सटीक वजह या जहाज से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. शिप ट्रैकिंग वेबसाइट्स के मुताबिक एमवी हार्बर फीनिक्स पलाऊ झंडे वाला एक ऑयल टैंकर है. भारतीय सरकार ने इस पूरे मामले में सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए शांत कूटनीति की रणनीति अपनाई. माना जा रहा है कि इसी वजह से बातचीत के जरिए नाविकों की रिहाई का रास्ता निकल पाया। 

होर्मुज पर बना हुआ है संकट 
भारत दुनिया के सबसे बड़े मर्चेंट नेवी कार्यबल वाले देशों में शामिल है. खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर हजारों भारतीय नाविक काम करते हैं. वहीं 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी इसी रास्ते से होकर गुजरता है. भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है, अपनी लगभग आधी कच्चे तेल की जरूरत होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए पूरी करता है. हालांकि इस बीच भारत के कई टैंकर होर्मुज से गुजरे हैं. पिछले एक हफ्ते में भारत के लिए एलएनजी ला रहे दो जहाजों ने भी इस रास्ते को क्रॉस किया है, जिसके बाद गैस संकट का दबाव थोड़ा कम जरूर होगा। 

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu