केरल में लेट हुआ मॉनसून, जानिए दिल्ली-UP में कब तक होगी बारिश की एंट्री

नईदिल्ली

मॉनसून कहां है और कब तक दस्तक देगा। भीषण गर्मी से जूझ रहे उत्तर पश्चिम भारत के राज्यों में यही सवाल जारी है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले संभावनाएं जताई थीं कि 26 मई के आसपास मॉनसून केरल में एंट्री कर सकता है। हालांकि, अब दो दिन गुजर चुके है और बारिश भी जारी है, लेकिन मॉनसून का ऐलान अब तक विभाग ने नहीं किया है।

विभाग ने यह भी कहा था कि राज्य में इसकी दस्तक में चार दिन की जल्दी या देरी हो सकती है। पिछले साल मॉनसून ने 24 मई को केरल में दस्तक दी थी।

क्यों मॉनसून को हुई देरी
केरल में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है, लेकिन संभावनाएं जताई जा रही थीं कि बारिश समय से पहले दस्तक दे सकती हैं। माना जा रहा है कि देरी की वजह मॉनसूनी हवाओं का कमजोर होना है। एक और वजह केरल तट के पास लगातार बारिश नहीं होना है। हालांकि, मौसम विभाग ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।

खबरें हैं कि मॉनसूनी हवाओं के कमजोर होने की वजह बंगाल की खाड़ी पर बन रहा चक्रवात है। इसके चलते मॉनसून में देरी हो रही है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि मॉनसून की रफ्तार में आई सुस्ती ज्यादा चिंता की बात नहीं है।

अभी कहां हैं मॉनसून
मौसम विभाग के गुरुवार को बताया है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने को लेकर स्थिति अनुकूल बनी हुईं हैं। अगले 2-3 दिनों में मॉनसून अरब सागर, लक्षद्वीप, बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ सकता है।

भारत में 70 फीसदी से अधिक सालाना बारिश मॉनसून के महीनों में होती है। इसके मद्देनजर इस मौसम को कृषि, पेयजल आपूर्ति, पनबिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन और भूजल पुनर्भरण के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।

दिल्ली कब तक पहुंचेगा मॉनसून
संभावनाएं जताई जा रही हैं कि मॉनसून 1 जून तक केरल और तमिलनाडु पहुंच सकता है। इन राज्यों में मॉनसून के पहुंचने की सामान्य तारीख है। वहीं, भीषण गर्मी का सामना कर रही राजधानी दिल्ली को मॉनसून की बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। यहां मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 30 जून है। इसके अलावा राजस्थान के कुछ हिस्सों में 25 जून, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 15 जून है।

यहां हो सकती है बारिश
IMD का पूर्वानुमान है कि पश्चि
म और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 से 31 मई तक बारिश के आसार हैं। वहीं, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड में 28 से 30 मई, हिमाचल प्रदेश में 28 और 29 मई को बारिश हो सकती है। बिहार में 28, 29 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 28 मई, ओडिशा में 29 और 30 को बारिश के आसार हैं।

राजौरी में आतंकियों की घेराबंदी, जंगलों में ड्रोन-हेलिकॉप्टर से चल रहा बड़ा ऑपरेशन

 श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों का आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन पिछले छह दिनों से जारी है. सूत्रों के अनुसार, 2 से 3 शीर्ष लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी जंगल के इलाके में छिपे हुए हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षाबलों ने गुरुवार सुबह पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।

अधिकारियों ने बताया कि राजौरी के गंभीर मुगलान इलाके में कुछ आतंकियों को छिपे होने का इनपुट मिला था. इसके आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा संयुक्त रूस आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है जो छठे दिन भी जारी है. सूत्रों का कहना है कि इस इलाके में 2 से 3 लश्कर के आतंकी छिपे हुए हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल ने किया सैन्य क्षेत्र का दौरा
आतंकवाद विरोधी इस बड़े ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने बुधवार को खुद इस सैन्य क्षेत्र का दौरा किया था. उन्होंने अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों से मुलाकात की और कमान संभाल रहे अधिकारियों के साथ जारी काउंटर टेरर ऑपरेशन की रणनीतिक समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए।

उन्होंने बताया कि शनिवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच सुबह करीब साढ़े 11 बजे भीषण मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घने जंगल वाले इलाके से खदेड़ दिया।

इस बेहद घने जंगल क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए सेना द्वारा आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है. अत्याधुनिक ड्रोन और सैन्य हेलिकॉप्टरों के जरिए पूरे जंगल के कोने-कोने पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि छिपे हुए आतंकियों को भागने का कोई मौका न मिले।

PF निकालना होगा बेहद आसान! अगले महीने से ATM से भी निकाल सकेंगे पैसा, मंत्री ने दी जानकारी

 नई दिल्ली

PF अमाउंट अब ATM से निकलेगा, पिछले काफी समय से इसकी चर्चा हो रही है. अगर ATM से पीएफ के पैसे निकलेंगे लगेंगे, तो एक नौकरीपेशा लोगों की इससे जुड़ी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

दरअसल, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान बड़ा ऐलान कर दिया है, उन्होंने कहा कि अगले महीने यानी जून से आप अपना PF अमाउंट UPI का इस्तेमाल कर ATM से निकाल पाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को पूरी तरह से डिजिटाइज किया जा रहा है, जिससे PF निकालना और भी आसान हो जाएगा, सरकार का लक्ष्य है कि पीएफ खाताधारकों को अपना ही पैसा निकालने के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और न ही लंबे-चौड़े फॉर्म भरने पड़ें।

ATM और UPI से निकाल सकेंगे पैसे
मनसुख मांडविया ने बताया कि एक नया सिस्टम सुनिश्चित किया गया है, जिसके तहत खाताधारक अपने कुल पीएफ फंड का 25% हिस्सा जमा रखकर बाकी 75% पैसा एटीएम (ATM) या यूपीआई (UPI) के जरिए जब चाहें तब निकाल सकेंगे. यह सुविधा अगले महीने से लागू करने की तैयारी है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि EPFO 2.0 और ऑटोमैटिक क्लेम प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है, जिससे क्लेम सेटलमेंट पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगा, पहले जो 10-12 कॉलम के फॉर्म भरने पड़ते थे, उस पेचीदा सिस्टम को खत्म कर दिया गया है।

WhatsApp चैटबॉट की सुविधा
उन्होंने कहा कि पीएफ से जुड़ी जानकारियों को और आसान बनाने के लिए इसे WhatsApp चैटबॉट से जोड़ा जा रहा है. खाताधारक सिर्फ व्हाट्सऐप पर मैसेज करके अपने अकाउंट बैलेंस, ब्याज अमाउंट और बीमारी या शादी के लिए फंड विड्रॉल की पात्रता जैसी सारी जानकारियां तुरंत हासिल कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि मैसेज से लोग ये भी जान पाएंगे कि वो अभी कितना अमाउंट निकाल सकते हैं, पहले कब-कब निकाले थे, ये सारा व्हाट्सऐप पर मैसेज से कर्मचारियों को मिल जाएगा. पूरा सिस्टम डिजिटल में तब्दील हो जाएगा।

कैसे निकलेगा ATM से पैसा?
एटीएम और यूपीआई से पैसे निकालने की इस सुविधा को आधार से लिंक किया जाएगा, आपकी पहचान पूरी तरह डिजिटल तरीके से (आधार वेरिफिकेशन के जरिए) प्रमाणित होगी, जिससे बिना किसी कागजी कार्रवाई के तुरंत पैसा ट्रांसफर हो सकेगा।

हालांकि अगर फटाफट यानी ATM से तुरंत पैसे निकलने लगेंगे तो फिर अधिकतर लोगों के PF अकाउंट खाली हो जाएंगे, क्योंकि उन्हें जब जरूरत होगी, तब पीएफ के पैसे निकाल लेंगे. इसपर एक्सपर्ट्स भी चिंता जता रहे हैं. जब पैसा निकालना इतना आसान हो जाएगा तो स्वाभाविक रूप से लोगों में इसे खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिससे रिटायरमेंट फंड समय से पहले खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है।

हालांकि सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खुली छूट नहीं बनाया है. केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि आप चाहकर भी अपना पूरा PF अकाउंट खाली नहीं कर सकते हैं, कुल जमा राशि का 25% हिस्सा हमेशा पीएफ अकाउंट में लॉक रहेगा. आप केवल ऊपरी 75% हिस्से का ही इस्तेमाल कर पाएंगे।

बता दें, पीएफ पर मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज तब सबसे ज्यादा फायदा देता है जब पैसे को लंबे समय तक छुआ न जाए, बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाला अंतिम फंड बहुत छोटा हो जाएगा।

हिमाचल में झील टूटने का खतरा, 34 बस्तियां और अटल टनल पर मंडराया संकट

 नई दिल्ली
लाहौल-स्पीति के सिस्सू गांव में रहने वाले लोग अब शांतिपूर्ण पहाड़ी जीवन नहीं जी पा रहे हैं. अटल टनल खुलने के बाद यहां पर्यटकों की भारी भीड़ आ गई है, लेकिन गांव के ठीक ऊपर एक बड़ी समस्या पैदा हो रही है. 4,068 मीटर की ऊंचाई पर बनी घेपन झील हर साल बड़ा होती जा रही है. वैज्ञानिकों को डर है कि अगर यह झील फट गई तो सिस्सू गांव पर बहुत बड़ा खतरा आ सकता है. एकदम 2013 में केदारनाथ में आई आपदा की तरह। 

सिस्सू गांव चंद्रा नदी के किनारे बसा है. अटल टनल से निकलते ही यह पहला बड़ा गांव है. कुछ साल पहले तक यहां शांति थी. लोग खेती और पशुपालन करते थे. लेकिन अक्टूबर 2020 में अटल टनल खुलने के बाद रोजाना हजारों गाड़ियां यहां से गुजरती हैं. पीक सीजन में 5000 गाड़ियां तक आती हैं। 

DTE की रिपोर्ट के मुताबिक नदी किनारे अब बोटिंग, जिपलाइन, ऑफ-रोड वाहन और पर्यटक गतिविधियां चल रही हैं. गांव में होमस्टे और कैफे खुल गए हैं. लेकिन इस खूबसूरती के पीछे एक बड़ा खतरा छिपा है. गांव से करीब 11 किलोमीटर ऊपर हिमालय की घेपन झील (घेपांग घट) लगातार बढ़ रही है। 

झील का आकार तेजी से बढ़ रहा है
घेपन ग्लेशियर झील है. 1989 में इसका क्षेत्रफल सिर्फ 36.49 हेक्टेयर था. 2022 तक यह बढ़कर 101.30 हेक्टेयर हो गया है – यानी लगभग तीन गुना. वैज्ञानिकों के अनुसार, घेपन ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है. 1962 से अब तक ग्लेशियर 2.76 किलोमीटर पीछे हट चुका है. राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि यह झील अतिसंवेदनशील है. अगर झील फटी तो सबसे पहले सिस्सू गांव पर असर पड़ेगा। 

वैज्ञानिकों ने 8 अलग-अलग स्थितियों का अध्ययन किया है. सभी में सिस्सू गांव रेड जोन में आता है. सबसे खतरनाक स्थिति में झील फटने के सिर्फ 21 मिनट में बाढ़ का पानी सिस्सू पहुंच सकता है. पानी की रफ्तार 43 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है. इस बाढ़ में सिर्फ पानी नहीं आएगा। 

भारी मलबा, चट्टानें, पत्थर और ग्लेशियर के टुकड़े भी साथ आएंगे. इसकी चपेट में 34 बस्तियां, 204 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन, 57 पुल और 106 किलोमीटर सड़कें आ सकती हैं. मनाली-लेह हाईवे, अटल टनल और पूरा पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो सकता है. बाढ़ का असर चिनाब नदी के रास्ते जम्मू-कश्मीर तक पहुंच सकता है। 

ग्लेशियर पिघलने के कारण
वैज्ञानिक भानु प्रताप और अनिल कुलकर्णी जैसे विशेषज्ञ बताते हैं कि हिमालय का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. पहले ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरती थी, अब बारिश हो रही है. बारिश बर्फ को बहुत तेजी से पिघलाती है.  1962 के बाद से घेपन ग्लेशियर हर साल औसतन 53 मीटर सिकुड़ रहा है. झील का बढ़ता पानी ग्लेशियर को और तेजी से पिघला रहा है. यह एक साइकिल बन गया है जो लगातार तेज होता जा रहा है। 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने झील को अतिसंवेदनशील घोषित किया है. NRSC, केंद्रीय जल आयोग, NCPOR और CDAC जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं. सिस्सू की कृत्रिम झील पर एक पायलट अलर्ट सिस्टम लगाया गया है, जिसमें सेंसर, कैमरा और सैटेलाइट आधारित चेतावनी व्यवस्था है. लेकिन यह टेस्टिंग फेज में है। 

समस्या यह है कि गांव में अभी कोई पूरा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, सायरन, चेतावनी बोर्ड या स्पष्ट निकासी रास्ते नहीं हैं. जमीनी स्तर पर तैयारी काफी कमजोर दिख रही है. घेपन झील अकेली नहीं है. हिमाचल प्रदेश में 2016 में 805 ग्लेशियर झीलें थीं, जो 2022 तक बढ़कर 1,619 हो गईं। 

पूरे हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर क्षेत्रफल तेजी से घट रहा है. जलवायु परिवर्तन के कारण नई-नई झीलें बन रही हैं, जो भविष्य में बड़े खतरे बन सकती हैं. घेपन झील सिस्सू गांव के लिए एक टाइम बम की तरह है. एक तरफ पर्यटन से हो रही कमाई, दूसरी तरफ बढ़ता पर्यावरणीय खतरा। 

वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं और झीलें बढ़ रही है. स्थानीय लोगों को डर के साथ जीना पड़ रहा है. सरकार और वैज्ञानिकों को अब जल्दी से जल्दी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, निकासी योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। 

सिस्सू की कहानी पूरे हिमालय के लिए चेतावनी है. जलवायु परिवर्तन अब दूर की समस्या नहीं रहा- यह हमारे पहाड़ों, गांवों और जिंदगियों को सीधे प्रभावित कर रहा है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो एक दिन यह खतरा हकीकत बन सकता है। 

कहीं ₹3 तो कहीं ₹80 किलो भिंडी! सब्जियों के दामों ने बिगाड़ा लोगों का बजट, गांव-शहर दोनों परेशान

नईदिल्ली
हरी सब्जियों के रेट कहीं आसमान पर हैं तो कहीं जमीन पर। शहर वाले जहां हैरान हैं तो वहीं गांव और छोट कस्बे के लोग मौज काट रहे हैं। छोटी मंडियों में भिंडी 3 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा जबकि, तोरई 6 रुपये किलो बिक रही। हालांकि, यही सब्जियां छोटे कस्बों और गांव की फुटकर मंडियों में 10 रुपये किलो हैं तो दिल्ली और मुंबई में 40 से 80 रुपये किलो।

सबसे पहले बात करते हैं कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की कप्तानगंज थोक मंडी की। यहां मंगलवार को तोरई 6 रुपये किलो बिकी, भिंडी सुबह 3 रुपये बिक रही थी, लेकिन दो घंटे बाद ही इसे 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा था। परवल इस मंडी में 100 रुपये में 5 किलो मिल रहा था।

कुशीनगर के मथौली नगर पंचायत की फुटकर मंडी में हरी सब्जियों रेट जमीन पर आ गए हैं।
मुंबई में हरी सब्जियों के दाम सुनकर रह जाएंगे दंग

अब मुंबई का रेट भी सुन लीजिए। कुशीनगर जिले के दीनानाथ रस्तोगी एक सब्जी की दुकान मुंबई में है। उन्होंने हिन्दुस्तान को जो फुटकर रेट बताया, उन्हें सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। जिस भिंडी को कुशीनगर में 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा, वही मुंबई में 60 से 80 रुपये किलो बिक रही है। 15 रुपये किलो वाला करेला मुंबई में 80 रुपये फुटकर में और थोक में 60 रुपये किलो है।

यहां 10 रुपये वाला बैगन भी वहां 60 रुपये किलो है। ग्वारफली 60, नेनुआ यानी तोरई 60 रुपये बिक रहा है। जो परवल कुशीनगर में 20 रुपये किलो था, वह मुंबई में 60 रुपये किलो है।

दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट
शिवसागर दिल्ली में सब्जी की दुकान लगाते हैं। उनके मुताबिक दिल्ली की आजादपुर मंडी में मंगलवार को भिंडी 16 रुपये, करेला 4 रुपये, गोभी 20 रुपये, तोरई 40 रुपये किलो बिकी। दूसरे नंबर की तोरई 6 रुपये और एक नंबर तोरई 13 -18 रुपये किलो थी। दूसरी ओर लौकी 5 रुपये, टिंडा 13 से 15 रुपये, मटर 40 से 55 रुपये, खीरा 24 रुपये, ग्वार फली 20 रुपये, ककोड़ा 45 रुपये और मूली 10 रुपये प्रति किलो के रेट से बिकी।

दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट
दिल्ली में फुटकर में खीरा 50 रुपये किलो और गोभी 80 रुपये किलो बिक रही हैं। तोरई भी 60 रुपये और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रही है। करेला 40 रुपये किलो और मटर 30 रुपये में 250 ग्राम यानी 120 रुपये किलो बिक रही है। टिंडा भी 100 से 120 रुपये किलो है।

थोक और फुटकर रेट में क्यों है इतना अंतर
सब्जी बिक्रेता शिवसागर बताते हैं कि मंडी से रेहड़ी तक सब्जियों को लाने में ढुलाई पहले की तुलना में अब अधिक लग रही है। कच्चा सौदा होने के कारण 10 प्रतिशत सब्जियां शाम तक खराब हो जाती हैं। ग्राहक को एक नंबर का माल चाहिए ऐसे में सब्जियों की छंटाई होती है। उन्होंनें बताया कि अगर 10 किलो तोरई मंडी से 13 रुपये के हिसाब से लाते हैं तो 130 रुपये पड़ती है। माल भाड़ा, दुकान का किराया और अपनी मेहनत जोड़ लें तो यह कुल 180 रुपये ही हो जाएगी।

धनिया-मिर्चा जिसे मुफ्त समझते हैं, वह भी फ्री नहीं मिलते
अब इसकी छंटाई करें तो मुश्किल से 6 किलो की तोरई एक नंबर की निकलेगी। यानी अब इसी खरीद रेट करीब 30 रुपये हो जाएगी। इसी तरह का नियम सभी हरी सब्जियों पर लागू होता है। वहीं, दीनानाथ रस्तोगी बताते हैं कि मुंबई में कीमतें थोक में भी बहुत अधिक हैं और मार्जिन कम है, ऊपर से मुफ्त धनिया-मिर्चा देना पड़ता है। इनका भी रेट इन्हीं सब्जियों पर रखने की मजबूरी है।

अभी और तड़पाएगी गर्मी, 29 मई से 8 डिग्री तक गिरेगा तापमान; तूफान का अलर्ट

नईदिल्ली 

दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार 28 मई तक उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान में कोई बड़ी कमी आने की संभावना नहीं है। इसके बाद 29 से 31 मई के बीच तापमान में छह से आठ डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

हालांकि यह राहत पूरी तरह से नहीं होगी, क्योंकि ‘नौतपा’ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। नौतपा अर्थात साल के वे नौ सबसे गर्म दिन होते हैं। यह अवधि मई के अंत में शुरू होकर जून के पहले सप्ताह तक की होती है। इस समय सूर्य भूमध्य रेखा के काफी करीब होता है और कर्क रेखा की ओर बढ़ता है, जिसके कारण मैदानी इलाकों का तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।

दूसरी ओर एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ जारी है, साथ ही 28 मई, 2026 से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से उत्तर-पश्चिमी भारत के कई राज्यों में धूल भरी आंधी, हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है।

फिलहाल 28 मई तक देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में लू या हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है। इन राज्यों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, विदर्भ और पश्चिम राजस्थान में भीषण लू चलने का अंदेशा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रह सकता है। दोपहर के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

वहीं पश्चिम बंगाल में गंगा के तटीय इलाकों, कोंकण-गोवा, सौराष्ट्र-कच्छ और तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा कराईकल के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम के बने रहने की आशंका है। उमस के कारण लोगों को अधिक पसीना और बेचैनी महसूस हो सकती है। समुद्री क्षेत्रों में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा परेशान करेगी।

जबकि, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में रात के समय भी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में ‘वार्म नाइट’ की स्थिति रहने की आशंका जताई है। इसका मतलब है कि रात का तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जिससे लोगों को नींद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

क्या दिल्ली-एनसीआर में भीषण लू से मिलेगी राहत?

दिल्ली-एनसीआर में 26 और 27 मई को भी गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग ने भीषण लू के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अधिकतम तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 29 से 32 डिग्री के बीच रहने का पूर्वानुमान है। दिनभर आसमान साफ रहेगा, जिससे धूप और ज्यादा तेज महसूस होगी। गर्म हवाओं के कारण लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।

विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते 28 और 29 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में; 28, 30 और 31 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में; और 28 तथा 31 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ बारिश व 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं के 70 किमी प्रति घंटे में तब्दील होने के आसार हैं। इन राज्यों में तापमान में गिरावट आएगी और तपिश से राहत मिलने की संभावना है।

कई राज्यों में आंधी और बारिश के आसार

वर्तमान में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम तेजी से बदल रहा है। बिहार, झारखंड, कर्नाटक और कई दक्षिणी राज्यों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल और पश्चिम बंगाल में भी गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है।

पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट

पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। चेरापूंजी में सात सेमी और अगरतला में आठ सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

वहीं आज, 26 मई, 2026 को भी असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। यहां बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका जताई है। लोगों को नदी और पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है।

दक्षिण भारत में भी बदलेगा मौसम

केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल। विभाग ने यहां बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम भी बना रहेगा।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाएं चलने के आसार हैं। समुद्र में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

मानसून की आगे बढ़ने की स्थिति
दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में मानसून अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इससे दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।

किसानों के लिए यह समय खेतों की तैयारी का है। जिन क्षेत्रों में मानसून पहुंचने वाला है वहां किसान बुवाई की तैयारी शुरू कर सकते हैं। हालांकि मौसम में तेजी से बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतने की भी जरूरत है।

लोगों के लिए जरूरी सलाह
मौसम विभाग ने लोगों को गर्मी के दौरान ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है। धूप में निकलते समय सिर को ढककर रखना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए।

आंधी और बिजली गिरने के दौरान घरों के अंदर रहना सुरक्षित माना जाता है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का कम इस्तेमाल करने की सलाह भी दी गई है। तेज हवाओं के समय खुले स्थानों से दूर रहना चाहिए।

किसानों और पशुपालकों के लिए सलाह
किसानों को सलाह दी गई है कि वे सुबह या शाम के समय ही सिंचाई करें ताकि फसलों को गर्मी से राहत मिल सके। तेज हवाओं और बारिश की संभावना को देखते हुए तैयार फसलों की कटाई समय पर कर लें। खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।

पशुपालकों को अपने पशुओं को छांव में रखने और पर्याप्त पानी देने की सलाह दी गई है। गर्मी के कारण पशुओं में कमजोरी और बीमारी बढ़ सकती है। इसलिए उन्हें दोपहर के समय खुले में न छोड़ें।

आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि 29 मई के बाद उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट शुरू हो सकती है। धूल भरी आंधी और हल्की बारिश से लोगों को कुछ राहत मिलेगी। हालांकि गर्मी पूरी तरह खत्म होने में अभी समय लगेगा। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

शिवपुरी में महिला से बेरहमी: लुधावली क्षेत्र में आरती प्रजापति की पिटाई का वीडियो वायरल, कार्रवाई की मांग तेज

दबंगों पर गंभीर मारपीट के आरोप, नई एसपी से सख्त एक्शन की उम्मीद; कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के लुधावली क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां महिला के साथ बेरहमी से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़िता की पहचान के रूप में बताई जा रही है।

आरोप है कि कुछ दबंगों ने आरती प्रजापति के साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और लोग आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि आरती प्रजापति पहले भी कई विवादों और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं। हालांकि वायरल वीडियो के बाद अब पूरे मामले को लेकर कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

इसी बीच हाल ही में शिवपुरी जिले में नई पुलिस अधीक्षक की तैनाती हुई है, जिन्हें लोग “LadySingham” के नाम से भी जानते हैं। ऐसे में जनता को उम्मीद है कि इस मामले में जल्द और सख्त कार्रवाई देखने को मिलेगी।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

“ताली-थाली के बाद… अब सिलेंडर क्यों पीटा जा रहा है?”

“महंगाई पर जनता का तंज या सरकार को धन्यवाद?”

“एक समय था…

जब लोगों ने ताली पीटी…

थाली पीटी…”

 

“और आज…

लोग सिलेंडर पीट रहे हैं।”

“कोई कह रहा है विरोध है…

कोई कह रहा है व्यंग्य है…

और कुछ लोग पूछ रहे हैं —

क्या ये बढ़ते दामों पर धन्यवाद है?”

 

“क्योंकि रसोई का बजट अब

हर महीने नई परीक्षा बन चुका है।”

 

“जब सिलेंडर महंगा होता है…

तो आवाज़ सिर्फ लोहे की नहीं,

आम आदमी की भी सुनाई देती है।”

 

“महंगाई पर आपकी क्या राय है?”

Comment करके बताइए।

दिग्विजय सिंह के बयान पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले— “हिंदू कभी सांप्रदायिक नहीं रहा”

भोपाल में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस और दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना, कहा— कांग्रेस ने हमेशा हिंदुओं को गलत नजरिए से देखा और देश में अलगाववाद को बढ़ावा दिया।

भोपाल में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह  के बयान पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा  ने तीखा पलटवार किया है।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू से लेकर दिग्विजय सिंह तक कांग्रेस नेताओं की नजरों में हमेशा हिंदू समाज खटकता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा हिंदुओं को सांप्रदायिक बताने की राजनीति की है।

बीजेपी विधायक ने कहा कि वर्ष 1947 में देश का विभाजन हिंदुओं ने नहीं कराया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जिन्ना हिंदू थे? शर्मा ने आरोप लगाया कि देश विभाजन कराने वाली ताकतों के साथ उस समय भी कांग्रेस खड़ी थी और आज भी कांग्रेस अल्पसंख्यक राजनीति के नाम पर मुसलमानों को मुख्यधारा से जोड़ने के बजाय अलगाववाद की ओर धकेल रही है।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति कट्टरता और तुष्टिकरण पर आधारित रही है, यही कारण है कि आज पार्टी की दुर्दशा हो रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व पर हिंदू विरोधी मानसिकता रखने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज कभी सांप्रदायिक नहीं रहा और हिंदू ही दुनिया में मानवता और मातृभूमि के सम्मान की भावना रखने वाला समाज है।

शर्मा ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने “चहेतों” से पूछना चाहिए कि मांग का सिंदूर किसने उजाड़ा और देश के मठ-मंदिर किसने तोड़े।

बीजेपी विधायक ने कहा कि आज हिंदू समाज जाग चुका है और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार खड़ा है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर भोपाल में कांग्रेस का श्रद्धांजलि कार्यक्रम, दिग्विजय सिंह ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रोशनपुरा चौराहे से लेकर राजीव गांधी सभागार तक आयोजित कार्यक्रमों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पंडित नेहरू के आदर्शों को अपनाने का लिया संकल्प

राजधानी भोपाल में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न Jawaharlal Nehru की पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेस द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने रोशनपुरा चौराहे पर स्थापित पंडित नेहरू की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय स्थित राजीव गांधी सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें कांग्रेस नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पंडित नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सभा के दौरान पंडित नेहरू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

अपने संबोधन में Digvijaya Singh ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माण के शिल्पकार थे। उन्होंने देश को लोकतांत्रिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव प्रदान की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, उद्योग, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नेहरू जी की दूरदर्शी नीतियों का लाभ देश आज भी प्राप्त कर रहा है।

उन्होंने वर्तमान समय में पंडित नेहरू के विचारों और सिद्धांतों को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कार्यकर्ताओं से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए नेहरू जी के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने पंडित नेहरू के आदर्शों पर चलने तथा देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

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