बेकाबू बैल का विकलांग व्यक्ति पर हमला, लोगों की बहादुरी से बची जान

सड़क पर मचा हड़कंप: बेकाबू बैल ने व्हीलचेयर पर बैठे दिव्यांग व्यक्ति पर किया हमला, लोगों ने दिखाई इंसानियत और बहादुरी

शहर की सड़क पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक बेकाबू बैल ने व्हीलचेयर पर बैठे एक दिव्यांग व्यक्ति पर अचानक हमला कर दिया। आसपास मौजूद लोग कुछ पल के लिए सहम गए, लेकिन फिर कई लोगों ने साहस दिखाते हुए तुरंत मौके पर पहुंचकर व्यक्ति को बचाने की कोशिश शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बैल काफी उग्र था और लगातार व्यक्ति की ओर बढ़ रहा था। इसी बीच कुछ युवकों और स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बैल को वहां से भगाया और व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग बहादुरी दिखाने वाले युवकों की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं इस घटना ने शहर में आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय प्रशासन से अब इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आवारा पशुओं पर नियंत्रण की मांग की जा रही है।

केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी, मौसम विभाग ने बताई देरी की वजह

नई दिल्ली

 देशभर में बदलते मौसम के बीच मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। अंडमान सागर और श्रीलंका तक समय से पहले पहुंचने वाला मानसून भारत की मुख्य भूमि के करीब आकर ठहर गया है।

इसकी सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ चक्रवाती मौसम सिस्टम और हवाओं के बदले हुए रुख को माना जा रहा है। मौसम विभाग ने पहले 26 मई के आसपास केरल में मानसून पहुंचने का अनुमान किया था, लेकिन अब इसके तीन से चार जून के बीच दस्तक देने की संभावना है।

केरल में मानसून अब 3-4 जून को पहुंचेगा

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा शुक्रवार को मानसून का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी करेंगे, जिसके बाद स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी। मौसम विज्ञानी एवं स्काइमेट के अध्यक्ष जेपी शर्मा का कहना है कि इस बार मानसून की शुरुआत धीमी और संतुलित रह सकती है।

उनके मुताबिक अगर मानसून तीन-चार जून तक केरल पहुंच भी जाता है तो शुरुआत में इसकी रफ्तार कमजोर रहेगी और यह तेजी से उत्तर भारत की ओर आगे नहीं बढ़ेगा। उन्होंने इसे मानसून की सॉफ्ट लैंडिंग बताया है।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुख्य कारण

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की चाल अभी पूरी तरह समुद्री हवाओं पर निर्भर है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम ने मानसूनी हवाओं को अपनी ओर खींच लिया है।

इससे अरब सागर से केरल की तरफ बढ़ने वाली नमी भरी दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। यही कारण है कि मानसून की प्रगति रुक गई और उत्तर की ओर बढ़ने की उसकी रफ्तार धीमी हो गई।

मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अरब सागर, लक्षद्वीप एवं बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों तक आगे बढ़ चुका है, लेकिन केरल तट पर इसके आगमन के लिए जरूरी परिस्थितियां अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। निचले स्तर की हवाएं धीरे-धीरे मजबूत हो रही हैं, मगर ऊपरी स्तर की हवाएं अभी सही दिशा में नहीं बह रहीं। इसी वजह से मानसून को आगे बढ़ने में समय लग रहा है।

श्रीलंका में भी देरी से पहुंच रहा मानसून 

श्रीलंका में मानक समय से छह दिन की देरी से आधिकारिक तौर पर मानसून पहुंच गया है। श्रीलंका पहुंचने के लगभग एक सप्ताह बाद मानसून केरल पहुंचता है। ऐसे में अब दो से चार जून के बीच केरल में मानसून के प्रवेश की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है। हालांकि केरल में अभी भारी बारिश हो रही है, लेकिन उसे प्री-मानसून की श्रेणी में रखा गया है।

एल नीनो का शुरुआती प्रभाव भी संभव

मानसून घोषित करने के लिए मौसम विभाग के तय 14 केंद्रों में से कम से कम 60 प्रतिशत केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज होना जरूरी होता है। इसके साथ हवा की गति, दिशा और बादलों की स्थिति भी तय मानकों पर खरी उतरनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी और मानसून की देरी का सीधा संबंध समुद्री और वायुमंडलीय हालात पर निर्भर है। प्रशांत महासागर की स्थिति अभी धीरे-धीरे अलनीनो की ओर बढ़ती दिख रही है। मौसम विभाग का कहना है कि एल-नीनो की शुरुआती छाया मानसून की गति एवं वर्षा के वितरण को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल इसका असर शुरुआती चरण में ही माना जा रहा है।

 

PNG यूजर्स के लिए राहत, LPG कनेक्शन सरेंडर करने की नहीं होगी जरूरत

नई दिल्ली

शहर बदलते हैं, तो सामान तो पैक हो जाता है, लेकिन रसोई की गैस वाली मुसीबत कई लोगों के लिए ‘गले की हड्डी’ बन जाती थी. अक्सर लोग पीएनजी यानी पाइप वाली गैस लेने से कतराते थे, क्योंकि डर यही रहता था कि अगर कल को कहीं और शिफ्ट होना पड़ा, तो फिर से नए कनेक्शन के चक्कर में कौन धक्के खाएगा. अब दिल्ली सरकार और केंद्र के नए आदेश के बाद इस मामले में भी राहत मिल रही है. दरअसल, सरकार ने एलपीजी नियमों में गजब के बदलाव किए हैं, जिसके बाद अब आपका पुराना कनेक्शन ‘डेड’ नहीं होगा, बल्कि उसे ‘पॉज’ माना जाएगा।

अगर आपके घर में भी नया पीएनजी कनेक्शन लगा है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. HPCL ने ग्राहकों को बताया है कि जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन एक्टिव हो चुका है, उनके पास अब 2 रास्ते हैं. या तो वे पीएनजी लगने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर करके हमेशा के लिए खत्म कर दें, या फिर एक खास ट्रांसफर वाउचर ले लें. इस ट्रांसफर वाउचर का फायदा यह है कि अगर आप भविष्य में किसी ऐसे इलाके या शहर में शिफ्ट होते हैं जहां पीएनजी की पाइपलाइन मौजूद नहीं है, तो आप इसी वाउचर की मदद से अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन फिर से चालू करवा सकते हैं। गैस डिस्ट्रीब्यूशन को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए सरकार इस दिशा में काफी तेजी से कदम उठा रही है. HPCL ने कहा है कि ये नई गाइडलाइंस 25 मई 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो चुकी हैं. नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस बदले हुए नियम के बारे में खुद को अपडेट रखें और बिना किसी गड़बड़ी के सुचारू रूप से गैस सप्लाई का लाभ उठाने के लिए इन नए नियमों का पालन करें. यह पूरा फैसला असल में सरकार के लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस अमेंडमेंट ऑर्डर 2026 के तहत लिया गया है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस ने नोटिफाई किया है।

इस समय इस तरह के कड़े और सूझबूझ वाले नियमों की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर गैस और ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. मध्य पूर्व में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे भारी तनाव और संकट की वजह से दुनिया भर में गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस रास्ते में पैदा हुई रुकावटों के कारण वैश्विक बाजार में गैस की किल्लत की स्थिति बन गई है, जिससे कच्चे माल और गैस के दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. भारत अपनी जरूरत की एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर हमारे देश की घरेलू गैस सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

कैसे मिलेगी गैस की सुविधा
नियम ये है कि पीएनजी लगवाने के 30 दिनों के भीतर आपको अपना पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन बंद करने की अर्जी देनी होगी, लेकिन इसका फायदा ‘ट्रांसफर वाउचर’ में है. अगर आप कल किसी ऐसे शहर या इलाके में शिफ्ट होते हैं, जहां पाइप वाली गैस नहीं है, तो बस ये वाउचर दिखाइए और अपना सिलेंडर वाला कनेक्शन फिर से चालू करवा लीजिए. यानी कि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और पेपरवर्क की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।

किसके लिए है ये काम की खबर?
खासकर उन लोगों के लिए जो काम के सिलसिले में शहर-दर-शहर भटकते हैं, या फिर वो छात्र जो रेंट पर रहते हैं. अब आप बेफिक्र होकर पीएनजी अपनाएं, क्योंकि सुरक्षा और सुविधा के बीच अब आपको किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. सरकार का यह कदम वाकई में आम आदमी की ‘किचन लाइफ’ को बहुत सहूलियत देने वाला है।

कुल मिलाकर, यह नियम उन लोगों के लिए किसी ‘वरदान’ से कम नहीं है जो बार-बार घर बदलते हैं. अब ‘ट्रांसफर वाउचर’ के जरिए आपकी गैस की गाड़ी कभी नहीं रुकेगी. बस अपने पेपर संभाल कर रखिए और बेफिक्र होकर अपनी रसोई को स्मार्ट बनाइए।

 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज संकट के कारण पैदा हुई गैस की किल्लत को देखते हुए भारत सरकार के लिए अपने घरेलू संसाधनों का सही और सटीक इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो गया है. यही वजह है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह नया संशोधन उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है जिनकी नौकरियां ट्रांसफरेबल हैं या जो अक्सर घर बदलते रहते हैं. सरकार ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि ट्रांसफर होने वाले कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किरायेदारों और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रहने वाले छात्रों को भविष्य में कोई दिक्कत न हो. मान लीजिए आज आप किसी ऐसे फ्लैट में रह रहे हैं जहां पीएनजी लगी है, लेकिन कल को किसी कारण से आपको किसी ऐसी जगह जाना पड़े जहां अभी पाइपलाइन नहीं बिछी है, तो आपके पास मौजूद ट्रांसफर वाउचर सिस्टम ही आपके काम आएगा।

यह नया नियम असल में केंद्र सरकार के ‘एक घर, एक गैस कनेक्शन’ वाले बड़े अभियान का एक अहम हिस्सा है. सरकार का मुख्य उद्देश्य डुप्लिकेट एलपीजी कनेक्शनों के इस्तेमाल पर लगाम लगाना, सब्सिडी का फायदा सीधे सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना और होर्मुज संकट जैसी वैश्विक दिक्कतों के बीच एलपीजी की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ रहे भारी दबाव को कम करना है. भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी बाजारों में से एक है, जहां एचपीसीएल, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले और मार्केट रेट वाले सिलेंडरों की डिलीवरी करती हैं, इसलिए इस पूरी व्यवस्था को सुरक्षित और व्यवस्थित करना बेहद जरूरी हो गया था।

8वें वेतन आयोग से पहले पेंशन पर बड़ा फैसला संभव, OPS विकल्प पर बढ़ी चर्चा

 नई दिल्‍ली

देशभर में 8वें वेतन आयोग को लेकर बैठक चल रही है. इस बीच, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पेंशन स्‍ट्रक्‍चर को लेकर एक बड़ा बदलाव हो सकता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रिटायरमेंट सिस्‍टम के तहत सरकारी कर्मचारियों को अपनी पेंशन विकल्‍प चुनने में ज्‍यादा लचीलापन देने के संबंध में चर्चा चल रही है।

केंद्रीय सरकारी कर्मचारी संघ के एक सदस्य ने बताया कि अगर बातचीत सकारात्मक तौर पर जारी रहती है, तो अगले दो से चार महीनों के भीतर प्रस्ताव पर आगे कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

अपनी पसंद की पेंशन सेलेक्‍ट करने का विकल्‍प
पेंशन में लचीलेपन और कर्मचारियों की पसंद को लेकर पॉजिटिव बातचीत हो रही है. कर्मचारी रिटायरमेंट बेनिफिट्स के संबंध में ज्‍यादा क्लियरटी और सुरक्षा चाहते हैं. अगर बातचीत सही रहती है और प्रस्‍ताव मान लिया जाता है तो आगे कर्मचारियों को अपनी पसंद का पेंशन मिल सकता है।

पुराने पेंशन बहाली की मांग
यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि चल रहे 8वें वेतन आयोग के परामर्शों के दौरान NPS वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन संबंधी चिंताएं सबसे बड़े मुद्दों में से एक के रूप में उभरी हैं. इनमें से ज्‍यादातर कर्मचारी पुराने पेंशन बहाली को लेकर आयोग से मांग कर रहे हैं।

अभी NPS के जरिए मिलता है पेंशन
अभी 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती किए गए ज्‍यादातर केंद्रीय कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्‍टम के तहत आते हैं, जो कंट्रीब्‍यूशन बेस्‍ड है और मार्केट के प्रदर्शन पर रिटर्न मिलता है. NPS के तहत कर्मचारी अपने सैलरी का एक हिस्‍सा पेंशन में योगदान देता है, जबकि सरकार भी अलग से योगदान देती है।

इसके बाद, मार्केट रिटर्न और जमा फंड पर निर्भर करता है कि आपको कितना पेंशन मिलेगा. जबकि पुरानी पेंशन योजना (OPS) अंतिम प्राप्त वेतन और महंगाई भत्ता (DA) से जुड़ी गारंटीकृत पेंशन देती थी।

यूपीएस का भी है विकल्‍प
हाल ही में सरकार ने यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) शुरू की है, जो कंट्रीब्‍यूश्‍न बेस्‍ड पेशन को कुछ तय पेंशन सुरक्षा देती है. चर्चाओं में शामिल कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार, नए प्रस्‍ताव से कर्मचारियों को पेंशन सिस्‍टम के भीतर अलग-अलग पेंशन विकल्‍पों में से चुनने की अनुमति मिल सकती है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा आश्वासन, बोले- किसी भी छात्र की शिकायत लंबित नहीं रहेगी

नई दिल्ली

CBSE की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक, पारदर्शी और छात्रों के हित में बनाई गई है. उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि किस तरह पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन कर छात्रों को भरोसेमंद और निष्पक्ष परिणाम देने की कोशिश की गई है. CBSE OSM में गड़बड़ियों पर धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत अनसुलझी नहीं रहेगी।

40 करोड़ पेज स्कैन:पहली बार हुआ इतना बड़ा डिजिटल मूल्यांकन
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी. इन परीक्षाओं में लगभग 98 लाख आंसर शीट्स को सुरक्षित रखा गया. हर आंसर शीट औसतन 40 पन्नों की थी यानी कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए.उन्होंने कहा कि CBSE ने पहली बार OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग के जरिए मूल्यांकन किया जो दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज और संस्थानों में तेजी से अपनाई जा रही आधुनिक प्रणाली है।

छात्रों के लिए फायदेमंद
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक OSM पूरी तरह स्टूडेंट फ्रेंडली सिस्टम है. इससे छात्रों को अपने अंकों की जानकारी पारदर्शी तरीके से मिलती है और मूल्यांकन प्रक्रिया में भरोसा बढ़ता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में छात्र इस व्यवस्था से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।

आंकड़े खुद बता रहे हैं छात्रों का भरोसा
बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक कुल 18.57 लाख पंजीकृत छात्रों में से केवल 4.06 लाख छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया.OSM के तहत कुल 98.66 लाख आंसर बुक्स स्कैन की गईं, जबकि 11.38 लाख आंसर बुक्स ही देखने के लिए मांगी गईं. इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश छात्र मूल्यांकन प्रक्रिया से संतुष्ट हैं।

अफवाहों से निपटने के लिए CBSE की सख्त रणनीति
OSM एक तकनीक आधारित सुधार है इसलिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अफवाहों से बचने के लिए मजबूत कम्युनिकेशन रणनीति अपनाई.CBSE ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स @cbseindia29 के जरिए लगातार जानकारी दी, ताकि गलत या भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जा सके और सिस्टम की संरचना व सुरक्षा उपायों को समझाया जा सके।

केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील
बोर्ड ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर छात्रों, अभिभावकों और मीडिया से अपील की है कि वे असत्यापित और सनसनीखेज सोशल मीडिया दावों से बचें और केवल CBSE वेबसाइट पर जारी आधिकारिक सर्कुलर पर ही भरोसा करें. इस पूरे माहौल में कई छात्र, शिक्षक और स्कूल प्रिंसिपल सामने आए हैं और उन्होंने OSM के जरिए हुई मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं.CBSE ने साफ किया है कि बोर्ड ने न तो कोई लिखित आदेश जारी किया है और न ही किसी पर दबाव डाला गया है कि वे इस प्रक्रिया के समर्थन में बयान दें।

केरल में ED रेड पर बवाल: पी विजयन के करीबी ठिकानों पर कार्रवाई, समर्थकों ने गाड़ियों में की तोड़फोड़

ईडी की छापेमारी के दौरान माहौल हुआ तनावपूर्ण, समर्थकों के विरोध के बीच कई वाहनों को नुकसान पहुंचाने का आरोप

केरल में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई के दौरान बड़ा हंगामा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के करीबी ठिकानों पर ईडी की रेड के बीच समर्थकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कुछ समर्थक उग्र हो गए और ईडी की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। घटनास्थल पर तनावपूर्ण माहौल बन गया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी।

बताया जा रहा है कि ईडी की टीम कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच के लिए पहुंची थी। हालांकि, विपक्ष ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है, जबकि जांच एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। घटना के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ गई है।

2028 में मध्य प्रदेश में किसानों की सरकार बनेगी

हम पूरे देश के सामने एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करेंगे, जहां किसान केवल कर्ज और संकट की बात नहीं करेगा, बल्कि सम्मान, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ेगा।

“सालों से मध्य प्रदेश का किसान दिन-रात मेहनत करता रहा।

कभी बारिश की चिंता, कभी फसल के दाम की लड़ाई,

कभी कर्ज का बोझ, तो कभी व्यवस्था की अनदेखी।

जिस किसान ने पूरे देश का पेट भरा,

उसी किसान को अपने भविष्य के लिए संघर्ष करना पड़ा।

लेकिन अब समय बदलने वाला है।

2028 में मध्य प्रदेश में किसानों की सरकार बनेगी।

ऐसी सरकार…

जहां किसान सिर्फ वोट नहीं,

बल्कि व्यवस्था का केंद्र होगा।

हम एक ऐसा मॉडल बनाएंगे,

जहां खेत सिर्फ मेहनत का प्रतीक नहीं,

बल्कि समृद्धि का रास्ता बनेंगे।

जहां हर किसान को उसकी फसल का सम्मानजनक दाम मिलेगा।

जहां गांवों में रोजगार पैदा होगा।

जहां युवा खेती को मजबूरी नहीं, अवसर समझेगा।

जहां आधुनिक तकनीक, सिंचाई और मजबूत बाजार व्यवस्था

किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी।

हम ऐसा मध्य प्रदेश बनाएंगे

जहां किसान कर्ज और संकट की बात नहीं करेगा,

बल्कि सम्मान, विकास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा।

यह सिर्फ चुनाव का वादा नहीं…

यह किसानों के सम्मान का संकल्प है।

आइए,

मिलकर बनाएं एक नया मध्य प्रदेश।

किसान मजबूत होगा,

तो प्रदेश समृद्ध होगा।”

भोपाल में शराब के नशे में युवकों का हुड़दंग, कार की छत पर चढ़कर किया डांस

नर्मदापुरम रोड स्थित पेट्रोल पंप पर कर्मचारियों से बदतमीजी, बागसेवनिया थाना क्षेत्र की घटना

राजधानी भोपाल में शराब के नशे में धुत युवकों का हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मामला बागसेवनिया थाना क्षेत्र के नर्मदापुरम रोड स्थित एक पेट्रोल पंप का है, जहां कुछ युवक कार की छत पर चढ़कर डांस करते नजर आए।

बताया जा रहा है कि युवक शराब के नशे में थे और पेट्रोल पंप परिसर में जमकर हुड़दंग मचाया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ बदतमीजी भी की। युवकों की हरकतों से पेट्रोल पंप पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना का वीडियो वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद बागसेवनिया थाना पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गई है।

पुलिस का कहना है कि वीडियो के आधार पर युवकों की पहचान की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल में बढ़ता जनता का भरोसा, भाजपा बन रही समाधान की आवाज़

भाजपा की शिकायत एवं सहायता व्यवस्था से आम नागरिक सीधे जनप्रतिनिधियों तक पहुँचा रहे हैं अपनी समस्याएँ — जनता को मिल रही है नई उम्मीद और भरोसेमंद नेतृत्व

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। प्रतिदिन भाजपा कार्यालयों के बाहर उमड़ती जनता की भीड़ इस बात का संकेत है कि अब लोग केवल वादे नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान चाहते हैं।

भाजपा द्वारा शुरू की गई शिकायत एवं सहायता व्यवस्था आम नागरिकों के लिए एक मजबूत माध्यम बनकर सामने आई है। अब लोग अपनी समस्याएँ सीधे लिखकर जनप्रतिनिधियों तक पहुँचा रहे हैं और उन्हें सुनवाई की उम्मीद भी मिल रही है। यही कारण है कि जनता का विश्वास लगातार भाजपा के प्रति बढ़ रहा है।

वर्षों तक कांग्रेस, लेफ्ट और तृणमूल सरकारों के दौरान आम लोगों की समस्याएँ अनसुनी रहीं। व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी थी कि लोगों को अपनी बात रखने के लिए कोई प्रभावी मंच नहीं मिलता था। लेकिन आज स्थिति बदलती दिखाई दे रही है।

भाजपा जनसेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही के संकल्प के साथ पश्चिम बंगाल की जनता के बीच लगातार काम कर रही है। यही वजह है कि राज्य के हर वर्ग के लोग भाजपा से जुड़ रहे हैं और इसे बदलाव की नई उम्मीद के रूप में देख रहे हैं।

आज बंगाल की जनता को यदि कहीं विश्वास और समाधान की उम्मीद दिखाई दे रही है, तो वह भाजपा की जनसेवा और मजबूत नेतृत्व में दिखाई दे रही है। 🚩

#SuvenduAdhikari #BharatiyaJanataParty #BJP #BJP4India #WestBengal #भाजपा #जनसेवा

गंजबासौदा के उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों की पिटाई का आरोप, शिक्षक का वीडियो वायरल

छड़ी से मारने और छात्रों को मुर्गा बनाने का आरोप, स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना के भी गंभीर सवाल

विदिशा जिले के गंजबासौदा स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ एनसीसी शिक्षक अनिल दुबे ने छात्रों की छड़ी से पिटाई की और उन्हें सजा के तौर पर मुर्गा भी बनाया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

बताया जा रहा है कि शासन द्वारा स्कूलों में बच्चों की पिटाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद विद्यालय में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। आरोप यह भी हैं कि प्रभारी प्राचार्य महेश चंद शर्मा और शिक्षक अनिल दुबे द्वारा स्कूल के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मामले की जांच कर संबंधित शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu