खजराना गणेश मंदिर में स्वर्णिम श्रृंगार, गणेशजी के साथ रिद्धि-सिद्धि भी पहनेंगी सोने के मुकुट

इंदौर
 विश्व प्रसिद्ध इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालु लगातार दिल खोलकर दान कर रहे हैं. दानपेटियों में नगदी के अलावा सोना-चांदी भी भक्त दान कर रहे हैं. इसके अलावा कई भक्त मंदिर प्रबंधन समिति को सीधा सोना दान कर रहे हैं. ये स्वर्ण दान उस अभियान में कारगर साबित होने वाला है, जिसके तहत गर्भगृह में भगवान गणेश के साथ ही रिद्धि-सिद्धि भी स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी. इसके अलावा गर्भगृह में शुभ और लाभ की प्रतिमाओं को भी सोने का मुकुट सुशोभित किया जाएगा। 

स्वर्ण मुकुट अभियान: अभी ढाई किलो सोना और चाहिए
अभी तक खजराना मंदिर प्रबंधन समिति को करीब साढ़े 5 किलो सोना दान में मिल चुका है. टारगेट 8 किलो सोना जुटाने का है. इस सोने से 5 स्वर्ण मुकुट बनाए जाने हैं. 3 दिन पहले ही एक श्रद्धालु ने दो तोला सोना भगवान गणेश को अर्पित किया है. अभी 5 स्वर्ण मुकुट बनाने के लिए करीब ढाई किलो सोने की और जरूरत है. अभी खजराना गणेश को 1 किलो सोने का मुकुट तिल चतुर्थी, गणेश चतुर्थी पर पहनाया जाता है. योजना के अनुसार नए मुकुट के साथ एक किलो का स्वर्ण छत्र, मां रिद्धि-सिद्धि के मुकुट 600-600 ग्राम के नए के बनेंगे. लाभ-शुभ के मुकुट 100-100 ग्राम के नए बनवाए जाएंगे। 

श्रद्धालु दानपेटी में अर्पित करते हैं सोने की ज्वैलरी
खजराना गणेश मंदिर में पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां दान करते हैं. विदेश में रहने वाले बप्पा के भक्त भी दानराशि भेजते हैं. हाल ही में दान पेटियां जब खोली गईं और काउंटिंग की गई तो ये राशि करीब 1.78 करोड़ निकली. दान पेटियों में सोना, चांदी, हीरे जड़े आभूषण भी मिले. नगद राशि को मंदिर के विकास में इस्तेमाल किया जाता है. भक्तों के लिए सुविधाए विकसित की जाती हैं। 

दानपेटी और प्रत्यक्ष रूप से मिले सोने को सहेजकर रखा जाता है, क्योंकि इसी सोने से स्वर्ण मुकुट बनने हैं. गणेश चतुर्थी पर खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणपति का 5 करोड़ के गहनों से श्रृंगार किया गया. सिर पर हीरे मोती से जड़ा सोने का मुकुट धारण किए हुए खजराना गणेश सुसज्जित हुए, बप्पा का मनमोहक श्रृंगार देख भक्त भावविभोर हो गए थे। 

सोने के रेट बढ़ने का असर भी दिखा
हालांकि बीते एक से डेढ़ साल के अंदर सोने के बेतहाशा बढ़ते रेट के कारण दान में कुछ कमी आई है. लेकिन इसके बाद भी भक्तों के साथ ही मंदिर प्रबंधन समिति को भरोसा है कि 8 किलो सोना इकट्ठा करने का टारगेट बहुत जल्द पूरा होगा. खजराना गणेश मंदिर के पंडित अशोक भट्ट बताते हैं “गर्भगृह स्थित भगवान गणेश महाराज के साथ ही रिद्धि, सिद्धि, शुभ और लाभ की प्रतिमाओं के लिए नए स्वर्ण मुकुट तैयार करने की प्लानिंग है. स्वर्ण मुकुट की स्पेशल डिजाइन तैयार हो चुकी है. इस काम के लिए लक्ष्य के अनुसार कुल 8 किलो सोना चाहिए। 

डेढ़ हजार लोगों को रोजाना मुफ्त भोजन
खजराना गणेश मंदिर में आने वाली दानराशि का इस्तेमाल केवल मंदिर के विस्तार व विकास के लिए नहीं होता बल्कि यहां अन्न क्षेत्र में रोजाना करीब डेढ़ हजार लोगों को मुफ्त में भोजन कराया जाता है. इसके साथ ही गरीब व असहाय लोगों के इलाज पर राशि खर्च की जाती है. इस कार्य में पूरा इंदौर शहर साथ देता है। 

MP के 55 जिलों को मिलेगा विकास का नया इंजन, 6 नए कॉरिडोर से बदल जाएगी तस्वीर

 भोपाल
 ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे। 

 मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा:

1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी)
मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा।

2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी)
करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा।

3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी)
बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी।

4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी)
चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे।

5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी)
नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा।

6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी)
यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

 

MP की दहलीज पर पहुंचा मानसून, बारिश के साथ 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं

भोपाल
 मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट ली है। IMD ने अगले 5 दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और उसके प्रभाव से प्रदेश में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

MP में मानसून का इंतजार अब अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। आईएमडी के अनुसार सोमवार को प्रदेश का वातावरण तेजी से मानसूनी स्वरूप ग्रहण कर रहा है। रात के तापमान में गिरावट, हवा में बढ़ती नमी और अधिकांश क्षेत्रों में हो रही बारिश संकेत है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।

प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है। राजगढ़, दमोह, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिलों में भी रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे दर्ज हुआ। यह स्थिति बताती है कि बादलों और नमी की उपस्थिति के कारण वातावरण में शीतलता बनी हुई है।

शिवपुरी में सबसे अधिक बारिश दर्ज
पिछले 24 घंटों में शिवपुरी में 20.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा मालांजखंड, ग्वालियर, जबलपुर और गुना में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। हालांकि वर्षा अभी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि वातावरण में पर्याप्त नमी और अस्थिरता मौजूद है।

    अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना।

    कुछ जिलों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं तेज हवाएं।

    भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा समेत कई जिले अलर्ट पर।

    ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में भी मौसम बदलेगा।

    मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है।

प्रदेश के किन इलाकों में रहेगा ज्यादा असर
मौसम विभाग के अनुसार 16 से 20 जून के बीच भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

दिन-रात के तापमान में 2 से 5 डिग्री गिरावट
बारिश की गतिविधियों के चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में मौसम सुहावना बना हुआ है।

खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होगी बारिश
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों तक समुद्री नमी का प्रवाह इसी तरह बना रहता है तो मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का तेजी से विस्तार हो सकता है। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की निगाहें अब उस पहली व्यापक मानसूनी बारिश पर टिकी हैं, जो गर्मी से राहत देने के साथ खरीफ फसलों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

मौसम विभाग की सलाह
    खराब मौसम के दौरान पेड़ों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।
    बिजली चमकने पर खुले मैदान में न जाएं।
    किसान फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करें।
    तेज हवा और बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।

मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार और तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

भोपाल 

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनु वास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां ऊर्जा सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का माध्यम बनेंगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, नीति समर्थन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिलेगी। मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक  अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और प्रभावी ग्रिड प्रबंधन के माध्यम से विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है तथा इससे राज्य की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक विमोचन भी किया।

“मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परिनियोजन को आगे बढ़ाना” विषय पर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, परियोजना विकासकर्ताओं, शोधकर्ताओं, डिस्कॉम प्रतिनिधियों तथा सरकारी एवं निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यशाला में मध्यप्रदेश में एग्रीफोटोवोल्टिक्स पर व्यापक कानूनी एवं व्यवहार्यता मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसके साथ ही सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रदर्शन विश्लेषण, रिएक्टिव पावर मापन, रिले एवं ट्रांसफार्मर समन्वय, 11 केवी ग्रिड इंजेक्शन से जुड़ी चुनौतियों तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।कार्यशाला में जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय, जर्मन दूतावास, जीआईजेड इंडिया तथा केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी नवाचार और संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।

 

आंगनवाड़ी दीदी के प्रयास से कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर आई मासूम माहिका

भोपाल 

जब सरकारी प्रयास और एक माँ का संकल्प आपस में मिलते हैं, तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती को भी मात दी जा सकती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी प्रयासों और ‘पोषण पखवाड़ा’ अभियान की सफलता की एक बेहद भावुक और प्रेरक कहानी ग्वालियर जिले से सामने आई है। यहाँ के शहरी परियोजना-01 के अंतर्गत आने वाले पीएचई कॉलोनी (सेक्टर 3, वार्ड 7) आंगनबाड़ी केंद्र की सजगता से ‘सैम’ (SAM – Severe Acute Malnutrition) यानी गंभीर कुपोषण की शिकार एक मासूम बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य श्रेणी में आ चुकी है। इस सफलता ने न केवल एक परिवार को खुशियाँ लौटाई हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कुपोषण के खिलाफ जंग में एक अनूठा उदाहरण पेश किया है।

ग्वालियर की पीएचई कॉलोनी में रहने वाली  मोना के घर 14 मार्च 2025 को बेटी माहिका का जन्म हुआ था। जन्म के कुछ महीनों बाद ही माहिका का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और वह शारीरिक रूप से कमजोर होने लगी। जनवरी 2026 में जब आंगनबाड़ी केंद्र पर उसका वजन और लंबाई मापी गई, तो आंकड़े बेहद चिंताजनक थे। महज 5 किलो 500 ग्राम वजन और 68 सेंटीमीटर लंबाई के साथ माहिका ‘सैम’ (गंभीर कुपोषण) की श्रेणी में जा चुकी थी। एक माँ के लिए अपनी संतान को इस हालत में देखना किसी सदमे से कम नहीं था।

माहिका की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  माधुरी राजावत ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने 19 जनवरी 2026 को माहिका को विशेष ‘C-SAM’ कार्यक्रम के तहत पंजीकृत किया और उस पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। इस पूरी मुहिम में बड़ा बदलाव तब आया जब अप्रैल माह में आयोजित 8वें पोषण पखवाड़े के दौरान परियोजना अधिकारी डॉ. मनोज गुप्ता और सेक्टर पर्यवेक्षक  सुमन पांडे ने खुद इस मामले में गहरी रुचि ली।

कार्यक्रम में आंगनबाड़ी टीम ने केंद्र पर आए हितग्राहियों को परामर्श देते हुए भोजन में मोटे अनाज, मौसमी सब्जियों, फलों और ‘तिरंगा भोजन’ के महत्व को समझाया। इसके साथ ही 6 माह से 2 वर्ष के बच्चों के लिए नियमित स्तनपान के साथ दिन में तीन से चार बार ऊपरी आहार देने की सलाह दी गई। इस आयोजन में माहिका की माँ मोना भी सम्मिलित हुईं और उन्होंने वहाँ दी गई हर सीख को गहराई से समझा।

विभागीय अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की टीम ने माहिका के घर जाकर गृहभेंट की और परिवार का हौसला बढ़ाया। आंगनबाड़ी केंद्र से मिली सीख को  मोना ने पूरी निष्ठा से अपने जीवन में लागू किया। उन्होंने आंगनबाड़ी से मिलने वाले टेक होम राशन (THR) का सही उपयोग कर अपनी बेटी के लिए नियमित रूप से पौष्टिक हलवा और खिचड़ी बनाना शुरू किया। पोषण के साथ माँ ने माहिका के मानसिक विकास पर भी ध्यान दिया, जिसके तहत उन्होंने बच्ची के साथ खेलना, उसे कविताएं सुनाना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना प्रारंभ किया।

सघन प्रयास के बाद प्रत्येक सप्ताह माहिका की ग्रोथ मॉनिटरिंग की जाने लगी, जिसके सुखद परिणाम अब सामने आ चुके हैं। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और माँ की अथक मेहनत से वर्तमान में माहिका का वजन और लंबाई दोनों ही पूरी तरह से सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं। मासूम माहिका के स्वास्थ्य में आया यह क्रांतिकारी सुधार देखकर उसके माता-पिता और पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। आंगनबाड़ी दीदी की इस ममतामयी पहल और विभाग की मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि सही पोषण, सही देखभाल और निरंतर निगरानी से हर आंगन को खुशहाल बनाया जा सकता है।

 

 

मुरैना के डायल-112 हीरोज कुएँ में गिरकर घायल हुए 45 वर्षीय व्यक्ति को पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

मुरैना जिले के थाना कैलारस क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता से कुएँ में गिरकर घायल हुए 45 वर्षीय व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर समय पर अस्पताल पहुँचाया गया। त्वरित सहायता के कारण घायल व्यक्ति को शीघ्र चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जा सका।

16 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कैलारस क्षेत्र अंतर्गत डोंगरपुर नरवुआ के पास एक व्यक्ति कुएँ में गिर गया है तथा उसे तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कैलारस थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया या।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक  विजयपाल गुर्जर एवं पायलट  संतोषी ने मौके पर पहुंचकर पाया कि 45 वर्षीय व्यक्ति कुएँ में गिर जाने से गंभीर रूप से घायल हो गया था।

डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए स्थानीय लोगों की सहायता से घायल व्यक्ति को सुरक्षित कुएँ से बाहर निकाला और एफआरव्ही वाहन से शासकीय अस्पताल कैलारस पहुँचाकर भर्ती कराया।

डायल-112 की समयबद्ध एवं संवेदनशील कार्यवाही से घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं के साथ नागरिकों की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर तत्पर है।

 

सड़क चौड़ीकरण में घर टूटने पर छात्रा का सवाल, इंदौर कलेक्टर से पूछा- विकास के नाम पर मकान तोड़ना जरूरी है क्या?

 इंदौर

स्कूल चले हम अभियान के अंतर्गत कलेक्टर शिवम वर्मा ने मंगलवार को शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बाल विनय मंदिर में विद्यार्थियों से संवाद किया। संवाद के दौरान मुसाखेड़ी क्षेत्र की रहने वाली छात्रा सानिया ने कलेक्टर वर्मा से सवाल पूछा कि उज्जैन और इंदौर में विकास के लिए घर तोड़े जा रहे हैं, यह जरूरी है?

लोगों को इसके लिए मुआवजा या रहने की जगह नहीं दी जाती। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी सड़क बनती है तब इस तरह की परिस्थिति बनती है। इसके लिए लोगों को मुआवजा भी दिया जाता है और रहने की जगह भी दी जाती है।

छात्रा ने बताया कि रामनगर पालदा में चौड़ीकरण के दौरान मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई, लेकिन कई लोगों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला। जब घर पर इस तरह की बातें सुनीं तो यह सवाल किया। संवाद के दौरान कलेक्टर वर्मा ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल अकादमिक शिक्षा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि प्रभावी संवाद कौशल (कम्युनिकेशन स्किल) और नेतृत्व क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं है, बल्कि यह जीवन के अनेक महत्वपूर्ण कौशल सीखने का मंच भी है। मित्रों, शिक्षकों और सहपाठियों के साथ संवाद करते हुए बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति क्षमता, टीमवर्क और नेतृत्व जैसे गुण विकसित होते हैं, जो आगे चलकर उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समय के साथ स्वयं को करें अपडेट

कलेटर वर्मा ने कहा कि समय के साथ तकनीक में कितने बड़े बदलाव आए हैं और आने वाले वर्षों में भी यह परिवर्तन लगातार जारी रहेगा। विद्यार्थियों को नई तकनीकों, नए उपकरणों और नई जानकारियों को सीखने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। जो लोग समय के साथ स्वयं को अपडेट रखते हैं, वही भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो पाते हैं। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी भार्गव, प्राचार्य पूजा सक्सेना आदि मौजूद रहीं।

जिन स्कूलों को मरम्मत की जरूरत, वहां नहीं गए अधिकारी

डीपीसी कार्यालय से जारी सूची के अनुसार 154 स्कूलों में कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को पढ़ाने के लिए जाना था। लेकिन कार्यालय से सिर्फ उन्हीं स्कूलों को चिह्नित किया जो हाईटेक हैं और वहां समस्याएं नहीं हैं। जबकि जर्जर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई नहीं गया। हर वर्ष की तरह वे राह देखते रह गए कि कोई अधिकारी आए और व्यवस्थाओं में सुधार लाए।
एसडीएम, सीएमएचओ नहीं गए पढ़ाने

एसडीएम प्रिया वर्मा, सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी सहित 20 प्रतिशत अधिकारी विद्यार्थियों को स्कूल में पढ़ाने के लिए ही नहीं पहुंचे। विद्यार्थी सुबह से इनकी राह देखते रहे कि कोई अधिकारी आएगा, जिनसे वे अपने सवाल पूछ सकेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि एसडीएम वर्मा अवकाश पर होने के कारण नहीं जा पाईं।
विद्यार्थियों ने कलेक्टर से पूछे सवाल

सवाल: अच्छे लीडर की क्या खूबियां होती हैं? – अदिति, कक्षा 12वीं

जवाब: एक अच्छा लीडर वही होता है जो अपने साथ काम करने वाले लोगों के लक्ष्य, उनकी आवश्यकताओं और उनकी सोच को समझकर उन्हें प्रेरित कर सके तथा सही दिशा दिखा सके।

सवाल: मुझे डांस, म्यूजिक पसंद है। क्या सिर्फ पढ़ाई करके ही करियर बना सकते हैं? – तपस्या त्रिपाठी, कक्षा 12वीं

जवाब: समाज में अक्सर कला, संगीत, नृत्य, चित्रकला गतिविधियों को केवल सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के रूप में देखा जाता है, जबकि वर्तमान समय में ये उत्कृष्ट करियर विकल्प के रूप में भी उभरकर सामने आए हैं।

सवाल: करियर के लिए कई विकल्प होते हैं, सही का चयन कैसे करें? – आदित्य शर्मा, कक्षा 11वीं

जवाब: जब मैं कॉलेज में था, तब वहां प्रशासनिक अधिकारी आते थे, उन्हें देखकर लगा था कि यह अच्छा करियर है। यदि किसी क्षेत्र में रुचि हो तो उसे पूरे समर्पण और ईमानदारी के साथ अपनाना चाहिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और हर उपलब्धि के पीछे कठोर परिश्रम छिपा होता है।

 

स्लोवाकिया में PM मोदी की यादगार सेल्फी, योग करते बच्चों ने जीत लिया दुनिया का दिल!

योग के रंग में रंगा स्लोवाकिया, बच्चों के बीच PM मोदी और राष्ट्रपति पेलेग्रिनी की खास सेल्फी

स्लोवाकिया में एक यादगार सेल्फी: योग ने जोड़ा युवाओं को

स्लोवाकिया: भारत के प्रधानमंत्री और Peter Pellegrini ने स्लोवाकिया के स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत विशेष योग प्रदर्शन का आनंद लिया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने बच्चों के उत्साह और योग के प्रति उनकी रुचि की सराहना की।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के नजदीक आते ही दुनिया भर में योग के प्रति बढ़ती जागरूकता देखने को मिल रही है। स्लोवाकिया में बच्चों द्वारा किया गया यह योग प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि नई पीढ़ी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को योग से जुड़ते देखना बेहद सुखद है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण के साझा उद्देश्य से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है।

इस अवसर पर दोनों नेताओं ने बच्चों के साथ यादगार तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग और मित्रता का प्रतीक बनीं।

मुख्य संदेश:

योग आज वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, संतुलन और एकता का माध्यम बन चुका है, और युवाओं की बढ़ती भागीदारी इसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

नीट परीक्षा को लेकर सीएम मोहन यादव की बड़ी समीक्षा, 30 जिलों में 283 केंद्र तैया

21 जून की नीट परीक्षा पर सख्त निगरानी, सरकार और एनटीए

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) 2026 परीक्षा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। प्रदेश के 30 जिलों में बनाए गए 283 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने परीक्षा के सुचारु, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, निगरानी और अभ्यर्थियों की सुविधाओं से जुड़े सभी प्रबंध समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

नीट री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक, एनटीए ने किया स्वागत

इधर, नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले केन्द्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगा दी है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम परीक्षा से जुड़ी फर्जी सूचनाओं, कथित पेपर लीक और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा तथा परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है।

गौरतलब है कि नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए देशभर में सुरक्षा व्यवस्थाएं कड़ी कर दी गई हैं। एनटीए ने अभ्यर्थियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।हेडलाइन सुझाव:

40 रुपये के बन-मक्खन के चक्कर में पकड़ा गया नकली IPS, चायवाले पर झाड़ रहा था रौब

40 रुपये के बन-मक्खन के चक्कर में पकड़ा गया नकली IPS, चायवाले पर झाड़ रहा था रौब

लखनऊ के महानगर इलाके से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 40 रुपये के बन-मक्खन का भुगतान करने से बचने के लिए एक शख्स ने खुद को IPS अधिकारी बताकर रौब जमाने की कोशिश की। लेकिन उसकी यह चाल ज्यादा देर नहीं चली और आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी के मुताबिक, मिथलेश शुक्ला नाम का व्यक्ति महानगर क्षेत्र की एक चाय की दुकान पर पहुंचा। वहां उसने बन-मक्खन खाया और चाय पी। जब भुगतान की बारी आई तो उसने पैसे देने के बजाय खुद को नोएडा में तैनात IPS अधिकारी बताना शुरू कर दिया।

चायवाले ने जब पैसे मांगे तो दोनों के बीच बहस होने लगी। मामला बढ़ता देख चायवाले ने पास की पुलिस चौकी पर मौजूद सिपाहियों को बुला लिया। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के सामने भी मिथलेश शुक्ला ने खुद को IPS अधिकारी बताते हुए उन्हें सैल्यूट करने के लिए कहा।

सिपाहियों को उसकी बातों पर शक हुआ। उन्होंने कहा कि यदि वह वास्तव में अधिकारी हैं तो पहचान और पद से जुड़े दस्तावेज दिखाएं। पूछताछ के दौरान उसकी बातों में लगातार विरोधाभास सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने गहन जांच की।

जांच में खुलासा हुआ कि मिथलेश शुक्ला कोई IPS अधिकारी नहीं है और झूठी पहचान बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी।

महज 40 रुपये बचाने के लिए IPS अधिकारी बनने का नाटक करने वाले मिथलेश शुक्ला की यह कहानी अब चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

 

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