एक्सपो केवल मशीनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि नए अवसरों, हुनर और निवेश का बड़ा मंच है : राज्यमंत्री गौर

एक्सपो केवल मशीनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि नए अवसरों, हुनर और निवेश का बड़ा मंच है : राज्यमंत्री गौर

इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एक्सपो-2026 का किया शुभारंभ

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि “इस तरह के इंडस्ट्रियल एक्सपो सिर्फ मशीनों को दिखाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये उद्योगों, नए विचारों, नवाचारों, स्किल डेवलपमेंट और निवेश के नए अवसर देने का एक बड़ा माध्यम बनते हैं। हमारे स्थानीय उद्योगों की तकनीकी तरक्की मध्यप्रदेश के विकास को एक नई रफ्तार दे रही है।” राज्यमंत्री श्रीमती गौर भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ‘इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एक्सपो-2026’ के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर आधुनिक मशीनों की कार्यप्रणाली को करीब से देखा। उन्होंने गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में निर्मित मशीनों की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता और औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय उद्योगों की तकनीकी प्रगति प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने का कार्य कर रही है।

प्रदर्शनी में ऑटोमेशन, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल उपकरणों और अत्याधुनिक मशीनरी से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित उद्योगों ने अपनी तकनीकों का प्रदर्शन किया। एक्सपो का आयोजन फ्यूचर कम्युनिकेशन और गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। कार्यक्रम में गोविंदपुरा एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गौड़ और फ्यूचर कम्युनिकेशन के लक्ष्मण दुबे मौजूद रहे।

 

महादेव ऐप केस का भोपाल कनेक्शन, टिकटों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप; आहूजा बंधुओं पर लुकआउट सर्कुलर जारी

भोपाल
 देश के बहुचर्चित महादेव बेटिंग ऐप मामले में भोपाल कनेक्शन एक बार फिर सामने आया है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में भोपाल के दो भाइयों विशाल आहूजा और धीरज आहूजा के खिलाफ चार्जशीट पेश की है. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है. हालांकि इस पूरे मामले में सीबीआई ने कुल 11 चार्जशीट दाखिल की है. जिसमें 6 चार्जशीट महादेव ऐप से जुड़े करप्शन और बची 5 चार्जशीट सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े मामले में की है। 

भोपाल के 2 भाईयों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
देश का चर्चित महादेव बेटिंग ऐप मामले में भोपाल के दो भाइयों पर सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है. इसके साथ ही उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. जानकारी के मुताबिक, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा राजधानी भोपाल के लालघाटी क्षेत्र में संचालित एक ट्रेवल्स के संचालक हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों को महादेव बेटिंग ऐप के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर का राइट हैंड माना जाता है. जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। 

CBI ने लुकआउट सर्कुलर भी कराया जारी, किया जा सके गिरफ्तार
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी आहूजा बंधुओं के ठिकानों पर छापेमारी कर चुका है. बताया जाता है कि ईडी की कार्रवाई के बाद दोनों भाई देश छोड़कर विदेश फरार हो गए थे. इसके बाद से जांच एजेंसियां लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई हैं. अब सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के साथ ही दोनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तेज हो गई है. एजेंसी ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कराया है, ताकि देश लौटने या किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। 

महादेव ऐप अवैध ऑनलाइन सट्टे का सिंडिकेट
बताया जा रहा है कि जांच में यह सामने आया है कि महादेव ऐप देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का सिंडिकेट है. इसका संचालन विदेश से किया जा रहा था. मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक इस नेटवर्क को पहुंचाया. सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार किया जा चुका है। 

देश का सबसे बड़ा सट्‌टेबाजी नेटवर्क का खुलासा
जांच में सामने आया है कि महादेव ऐप देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट है, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक इस नेटवर्क का विस्तार किया।

देशभर में अलग-अलग बेटिंग पैनल संचालित कर अवैध कमाई की जाती थी, जिसे फर्जी बैंक खातों और अन्य माध्यमों से विदेश भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि (प्रोटेक्शन मनी) के रूप में दिया जाता था।

प्रमोटर और सहयोगी पश्चिम एशियाई देशों में बसे
सीबीआई ने बताया कि महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई सहयोगी वर्षों पहले पश्चिम एशियाई देशों में भाग गए थे और वहीं से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। मुख्य चार आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है। साथ ही उन्हें फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण की जांच
जांच एजेंसी का कहना है कि सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क, राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण तथा अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है। आने वाले समय में इस मामले में और भी चार्जशीट दाखिल की जाएंगी।

चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामला
गौरतलब है कि महादेव बेटिंग ऐप मामला देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में से एक है. इस मामले में करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन, हवाला नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित सट्टेबाजी सिंडिकेट की जांच सीबीआई और ईडी सहित कई केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं. भोपाल के आहूजा बंधुओं का नाम सामने आने के बाद मध्य प्रदेश से जुड़े इस नेटवर्क की जांच भी और गहन हो गई है। 

 

14 आरोपियों को उम्रकैद सुनाने वाली महिला जज को मिली सुरक्षा, DGP ने कोर्ट में पेश किया हलफनामा

नर्मदापुरम

 नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में कथित गो तस्करी के बाद उग्र भीड़ की हिंसा में हुई हत्या के मामले में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली सेशन जज तबस्सुम खान को इंटरनेट मीडिया पर मिली धमकियों के मामले में गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ के समक्ष पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से हलफनामा पेश कर महिला न्यायाधीश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा दिया गया।

महिला न्यायाधीश को धमकियां मिलने की घटना को न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।

युगलपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग से हलफनामा प्रस्तुत कर यह बताने के निर्देश दिए थे कि न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि महिला जज को सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है तथा आपत्तिजनक इंटरनेट मीडिया पोस्ट के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई की गई है।

पूर्व सुनवाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि फैसले का जवाब अपील है, जज को धमकी नहीं। अदालत ने कहा कि कानून के शासन में असहमति का अधिकार है, लेकिन न्यायाधीश को डराने या दबाव बनाने का अधिकार किसी को नहीं है।

 

अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाये जाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाये जाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अतिथि विद्वानों की मांगों के संबंध में विचार के लिए सरकार ने गठित की है समिति
उच्च शिक्षा में हमारी सकल पंजीयन दर राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर
मप्र को 2029 तक नशामुक्त प्रदेश बनाने सभी एकजुट होकर करेंगे प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन में हुआ अभिनंदन

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि हम पूरी वसुधा को अपना कुटुंब समझते हैं। हम सबके कल्याण की कामना करते हैं। सदियों से गुरूकुल शिक्षा पद्धति हमारी पहचान रही है। गुरू-शिष्य परम्परा से हमारी कई पीढ़ियां शिक्षित-दीक्षित, पोषित और पल्लवित हुई हैं। हमारे महाविद्यालय उसी परम्परा के प्रतीक हैं। इनमें शिक्षा देने वाले अतिथि विद्वान युवा पीढ़ी का भविष्य संवारने वाले पावन मंदिर के पुजारी हैं, जो अनेक युवाओं के जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं। अतिथि विद्वानों के परिश्रम का सम्मान करते हुए राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वानों की सभी मांगों पर विचार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। इस समिति की अनुशंसाएं आना अभी शेष है। समिति की अनुशंसाएं प्राप्त होते ही सरकार उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालयों में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों द्वारा इनके हित में कई नवाचारी एवं सम्मानपूर्ण निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय अभिनदंन किया गया। अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री का अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर एवं तुलसी का पौधा भेंटकर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अतिथि विद्वान हमारे परिवार के सदस्य हैं। इनके कल्याण के लिए हम हमेशा से प्रतिबद्ध हैं। अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति देश के दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी और मध्यप्रदेश में सबसे बेहतर मॉडल वाली व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश के हर जिले में एक-एक पीएमएक्सीलेंस कॉलेज खोले हैं। खरगौन, गुना और सागर में नए शासकीय विश्वविद्यालयों की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। बेहतर स्कूल शिक्षा के लिए राज्य में सांदीपनि विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले राज्य के सकल पंजीयन दर और राष्ट्रीय दर में बड़ा अंतर था, परंतु आज प्रदेश का सकल पंजीयन दर (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर हो गई है। स्कूल शिक्षा में भी मध्यप्रदेश की ड्रॉप आउट दर शून्य पर आ गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति: 2020 लागू है। अब केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि इससे आगे बढ़कर सोचने की आवश्यकता है। वर्तमान दौर में नई संभावनाएं, नवाचार, संवेदनाएं और नैतिक मूल्यों के आधार पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आगे लेकर जाने की जरूरत है। भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है और इसमें भी मध्यप्रदेश सबसे युवा आबादी वाला राज्य है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए 13 आकस्मिक और 3 ऐच्छिक अवकाश देने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही महिला अतिथि विद्वानों के लिए प्रसूति अवकाश भी सुनिश्चित किया गया है। अतिथि विद्वानों को उनके घर के पास ही कॉलेज चुनने की सुविधा भी दी गई थी। साथ ही मप्र लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अतिथि विद्वानों के लिए 25 प्रतिशत पद आरक्षित करते हुए इन्हें आयु सीमा में 10 वर्ष की छूट भी दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में 117 और वर्ष 2024 में 48 अतिथि विद्वान सहायक प्राध्यापक के शासकीय नियमित पद पर नियुक्ति प्राप्त कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अतिथि विद्वानों के हित में अग्रणी भारतीय मजदूर संघ की सराहना करते हुए कहा कि इस संघ ने हमेशा सच्चाई और अच्छाई के लिए अपनी महती भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कई प्रकार की चुनौतियों के बीच पारदर्शी और संवदेनशील सोच से निरंतर आगे बढ़ रही है। हम मध्यप्रदेश के समग्र विकास के लिए कटिबद्ध हैं। सभी क्षेत्रों में हर वर्ग के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। सरकार का काम तमाम बाधाओं को दूर करते हुए असरदार तरीके से होना चाहिए। हमारी सरकार ने शासकीय कामकाज को और भी जनहितैषी एवं असरकारी बनाया है।

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ ने ‘देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम’ के राष्ट्रहितैषी नारे के साथ सदैव मजदूर वर्ग की आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अतिथि विद्वानों के हित में 5 बड़े निर्णय लेकर इनके हितों की रक्षा की गई है। सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अतिथि विद्वानों को 25 प्रतिशत पदों पर आरक्षण हम दे रहे हैं। अतिथि विद्वानों को वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन करने और फॉल-आउट होने की स्थिति में प्रत्येक माह दो अवसर देकर दोबारा काम पर रखने की व्यवस्था की गई है।

अतिथि विद्वान सम्मेलन को कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी संबोधित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योग-व्यापार को प्राथमिकता देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं। राज्य सरकार ने अतिथि विद्वानों के हित में इनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

सम्मेलन में मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक डॉ. अशोक कड़ेल, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा मनीष सिंह, राज्य अतिथि विद्वान संघ के बी.एल. दोहरे, डॉ. देवराज सिंह, डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया सहित बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आए उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वान उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश इस वर्ष नक्सलवाद जैसी समस्या से मुक्त हो गया है। अब हमारी लड़ाई समाज में व्याप्त हर प्रकार की नशाखोरी से है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नशामुक्त मध्यप्रदेश बनाने के लिए नया संकल्प लिया है। नशे से लड़ाई में पूरा देश एकजुट है। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने वर्ष 2029 तक नशामुक्त भारत का संकल्प लिया है। इसमें मध्यप्रदेश भी अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अतिथि विद्वानों सहित सभी युवाओं से अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को वर्ष 2029 तक नशामुक्त प्रदेश बनाने के लिए हम सब कदम से कदम मिलाकर काम करें।

 

कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, बैंक फ्रॉड केस में सजा बरकरार

दतिया

दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. वह मानकर चल रहे थे कि फैसला उनके हक में आएगा, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने भारती की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी. कल कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. भारती ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपी हैं. उन्हें ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था और तीन साल की सजा सुनाई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में 3 साल की सजा सुनाई थी। राजेंद्र भारती ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती की याचिका खारिज कर दी है और ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। 

जब ट्रायल कोर्ट ने राजेंद्र भारती को दोषी माना था, तब उनकी विधानसभा की सदस्यता चली गई थी. इसके बाद चुनाव आयोग ने दतिया में उपचुनाव का ऐलान कर दिया था. यहां पर उम्मीदवारों के नामांकन की आखिरी तारीख 13 जुलाई है. जब भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है, तो इससे साफ हो गया है कि उपचुनाव होगा. बीजेपी और कांग्रेस ने अभी तक उपचुनाव के लिए अपने-अपने कैंडिडेट का ऐलान नहीं किया है, क्योंकि दोनों दल शायद इस फैसले का ही इंतजार कर रहे थे। 

दरअसल, राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने एक पुराने कॉपरेटिव बैंक एफडी घोटाले और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया था. अदालत ने 2 अप्रैल 2026 को उन्हें 3 साल की जेल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

हाई कोर्ट में क्या हुआ?
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले उनकी जेल की सजा को निलंबित कर दिया था. हालांकि दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी मांग पर राहत नहीं मिली. अब अदालत ने उनकी अपील भी खारिज कर दी है. राजेंद्र भारती ने अदालत से चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी राहत मांगी थी, लेकिन उन्हें इसमें भी सफलता नहीं मिली। 

CM योगी का दावा: ‘बस्ती में कब्रिस्तान के नाम पर हो रहे कब्जे को कार्यकर्ताओं ने हटवाया’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस्ती की एक पुरानी घटना का किया जिक्र, कहा— सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष की शिकायत पर कराई गई थी कार्रवाई।

बस्ती: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस्ती की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि कब्रिस्तान के नाम पर हो रहे कथित अवैध कब्जे को उनकी पहल पर हटवाया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय समाजवादी पार्टी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष उनके पास आए थे। उनके घर के पास कब्रिस्तान के नाम पर जबरदस्ती कब्जा किया जा रहा था। उन्होंने कहा, “वे मेरे पास आए और कहने लगे कि लखनऊ में बैठे लोगों को केवल कब्रिस्तान दिखाई देता है, हम जैसे लोग नहीं दिखाई देते।”

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने तत्काल कार्यकर्ताओं को मौके पर भेजा और कब्रिस्तान के नाम पर हो रहे कथित कब्जे को हटवाया।

मुख्यमंत्री ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना रही है।

मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: केन-बेतवा परियोजना के हर विस्थापित को ₹12.50 लाख, मुआवजे के लिए ₹202 करोड़ अतिरिक्त मंजूर

पन्ना 
 मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने केन बेतवा लिंक परियोजना से जुड़ी मझगाय डैम और रुंझ डैम परियोजना के विस्थापितों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने विस्थापित के लिए अहम फैसला लेते हुए 202.50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि स्वीकृत कर दी है. इसका सीधा फायदा मुआवजा पाने वाले विस्थापितों को मिलेगा। 

कितना होगा विस्थापितों को फायदा?
रुंझ डैम परियोजना व मझगाय डैम परियोजना के विस्थापितों को सीधे तौर पर 7.5 लाख रु का अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा. पहले जहां ये राशि ₹5 लाख रु थी, तो वहीं अब इसमें 7.5 लाख रु और जोड़ दिए गए हैं. इससे विस्थापितों को मुआवजा राशि 12 लाख 50 हजार दिए जाएंगे. लंबे समय से विस्थापित यही मांग कर रहे थे कि उन्हें मुआवजे का पैकेज 12.50 लाख रु दिया जिसे मोहन यादव सरकार ने स्वीकार करते हुए पन्ना जिले के लिए 202.50 करोड रुपए का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है। 

12.50 लाख हर विस्थापित के खाते में
कैबिनेट के इस फैसले के बार में बताते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री व पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, ” मुख्यमंत्री द्वारा केन बेतवा लिंक परियोजना एवं रुन्झ डैम परियोजना और मझगाय डैम परियोजना के लिए अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया गया है. यह राहत भरी राशि है क्योंकि बहुत दिनों से ग्रामीण इसकी मांग कर रहे थे. अब उन्हें 5 लाख रु की जगह 12.50 लाख रु का पैकेज दिया जाएगा. भूमि अधिकरण की धारा 11 के तहत मुआवजा पन्ना जिले में 2022 में लागू हुआ था और छतरपुर जिले में 2024 में लागू हुआ था यह विसंगति केन बेतवा लिंक परियोजना में थी इसलिए इसमें सुधार कर अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है. यह बहुत ही हर्ष का विषय है. मैं पन्ना की जनता की तरफ से मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं। 

पानी की सप्लाई रोक दी
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने विरोध स्थल पर पीने के पानी की सप्लाई रोक दी है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजर्गों को नदी का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पानी पीने के बाद कई लोग बीमार पड़ गए हैं। उन्होंने अधिकारियों पर उनकी शिकायतों को दूर करने के बजाए उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

पात्र परिवारों को मिलेंगे 12.5 लाख रुपए मिलेंगे एकमुश्त
इस बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री और पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार ने मझगवां, रुंज और केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्टस से विस्थापित परिवारों के लिए एक विशेष पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दी है। इस पैकेज के तहत पात्र परिवारों को 12.5 लाख रुपए तक एकमुश्त पुनर्वास अनुदान मिलेगा।

दोषियों पर कार्रवाई तक आंदोलन चलेगा सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बताया कि यह केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि आंशिक सफलता मिली है, लेकिन जब तक हर प्रभावित परिवार को न्याय नहीं मिलता और कथित दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

वर्तमान में धरना स्थल पर आमरण अनशन, मिट्टी सत्याग्रह, जल सत्याग्रह और चिता आंदोलन एक साथ चल रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी सभी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

आंदोलन वापस नहीं लेंगे
वहीं, उफनदी नदी में कमर तक पानी में खड़े प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। जय किसान संगठन के बैनर तले हो रहे इस विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में मिट्टी सत्याग्रह भी चल रहा है।

Viral Video: क्या संकट के समय दुश्मनी भी भूल जाते हैं जीव? वायरल वीडियो ने दिया मानवता का बड़ा संदेश

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर लोग भावुक हैं। यदि वीडियो वास्तविक है, तो यह बताता है कि कठिन समय में जीवन की रक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में दो ऐसे जीव, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है, जीवन बचाने के लिए साथ दिखाई देते हैं। हालांकि, चैटजीपीटी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता और इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होना अभी बाकी है।

यदि यह दृश्य वास्तविक है, तो यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में शत्रुता नहीं, बल्कि जीवन और करुणा ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

यदि यह वीडियो वास्तविक है, तो यह केवल एक दुर्लभ घटना नहीं, बल्कि जीवन का एक गहरा संदेश भी देता है। प्रकृति बार-बार यह सिखाती है कि जब अस्तित्व पर संकट आता है, तब शत्रुता का महत्व कम हो जाता है और जीवन की रक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है।

जब जीवन सबसे बड़ा सत्य बन जाता है: संकट में दुश्मनी नहीं, इंसानियत जीतती है

यही संदेश मानव समाज पर भी लागू होता है। कठिन परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं या किसी बड़े संकट के दौरान अक्सर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते हैं। ऐसे समय में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता ही सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लाखों बार देखा और साझा किया जा चुका है। कई यूजर्स इसे इंसानियत और सह-अस्तित्व का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसकी सत्यता पर सवाल भी उठा रहे हैं। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है।

यदि वीडियो का दावा सही साबित होता है, तो यह हमें एक महत्वपूर्ण सीख देता है—जीवन किसी भी दुश्मनी, मतभेद या संघर्ष से कहीं अधिक मूल्यवान है। संकट के समय सहयोग और करुणा ही वह शक्ति है, जो हर सीमा और हर शत्रुता से ऊपर उठ जाती है।

MP Weather: मध्य प्रदेश में बारिश ने पूरा किया 25% कोटा, 32 जिलों में सामान्य से ज्यादा बरसात; पन्ना-सतना में भारी बारिश का अलर्ट

भोपाल
मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश में अब तक निर्धारित बारिश का 25 प्रतिशत कोटा पूरा हो चुका है। अब तक 234.4 मिमी (9.4 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 212.3 मिमी (8.3 इंच) की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन सहित 32 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। अगले 24 घंटों में पन्ना और सतना जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई माह में बारिश का सिलसिला लगातार जारी रहेगा, जिससे बारिश का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश की संभावना जताई गई है। पन्ना और सतना जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जहां अगले 24 घंटे में 4 इंच या उससे अधिक वर्षा हो सकती है।

मौसम विभाग ने 4 दिन तक प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हलकी बारिश का अनुमान जताया है। पन्ना और सतना जिले में भारी बारिश का अलर्ट है। 24 घंटे के दौरान यहां 4 इंच या इससे ज्यादा पानी गिर सकता है।

इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी बारिश का अनुमान है।

गुरुवार को भी कई जिलों में बरसे बादल
गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मंडला में लगभग पौन इंच वर्षा हुई, जबकि सिंगरौली में आधा इंच से अधिक और बालाघाट में करीब आधा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बैतूल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना और सीधी में भी बारिश हुई।

जुलाई के नौ दिनों में बदली तस्वीर
जून महीने में आंधी और बारिश का दौर रहने के बावजूद प्रदेश में सामान्य से 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में हुई अच्छी बारिश ने यह कमी पूरी कर दी। अब प्रदेश में औसत से 10 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अब भी सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 29 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

मंडला में पौन इंच बारिश, ग्वालियर-जबलपुर समेत 11 जिलों में गिरा पानी
प्रदेश में गुरुवार को भी बारिश का दौर रहा। मंडला में पौन इंच पानी गिर गया। सिंगरौली में आधा इंच से अधिक और बालाघाट में आधा इंच बारिश हुई। बैतूल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सीधी में भी पानी गिरा।

प्रदेश में 10 प्रतिशत बारिश ज्यादा
प्रदेश में इस बार पूरे जून महीने आंधी-बारिश का दौर रहा। इसके बावजूद कोटे से 30 प्रतिशत पानी कम बरसा, लेकिन जुलाई के 9 दिन ने यह कोटा न सिर्फ पूरा कर दिया, बल्कि 10 प्रतिशत ज्यादा पानी बरसा दिया।

आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में अब तक कुल 234.4 मिमी यानी, 9.4 इंच पानी गिर चुका है। यह सामान्य बारिश 212.3 मिमी (8.3 इंच) से 10 प्रतिशत ज्यादा है। पूर्वी हिस्से में 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 29 प्रतिशत पानी ज्यादा गिरा है।

पूर्व IAS नियाज खान का विवादित बयान, बोले- मुस्लिम तुर्की जैसा पहनावा अपनाएं; मॉब लिंचिंग का किया जिक्र

भोपाल
अपने बयानों और किताबों को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाले मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी नियाज खान ने एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट से नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बार उन्होंने देश में होने वाली ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ द्वारा हिंसा) की घटनाओं को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय को एक अजीबोगरीब और बड़ी सलाह दी है। नियाज खान ने मुसलमानों से अपील की है कि वे भीड़ की हिंसा का शिकार होने से बचने के लिए अपना पहनावा और पारंपरिक हुलिया बदल लें।

‘कुर्ता, पैजामा, दाढ़ी और टोपी’ के कारण आसानी से होती है पहचान
पूर्व IAS नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत में अब तक मुस्लिमों की जितनी भी मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं, उनमें से अधिकतर मामलों में पीड़ित कुर्ता, पैजामा, दाढ़ी और टोपी वाले पारंपरिक पहनावे में थे। नियाज खान के मुताबिक, इस खास पहनावे के कारण उनकी पहचान बहुत आसानी से हो जाती है और वे उपद्रवियों या हिंसक भीड़ के निशाने पर आ जाते हैं।

तुर्की के मुसलमानों की तरह ड्रेसअप रखने की सलाह
नियाज खान ने भारतीय मुसलमानों को इस स्थिति से बचने के लिए ‘तुर्की मॉडल’ अपनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने लिखा-मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से सुरक्षित रहने के लिए मुस्लिम समुदाय को अपना ड्रेस कोड और हुलिया बदल लेना चाहिए। भारतीय मुसलमानों को तुर्की के मुसलमानों की तरह आधुनिक कपड़े (ड्रेसअप) पहनने चाहिए, ताकि भीड़ के बीच उनकी धार्मिक पहचान छिपी रहे और वे सुरक्षित रह सकें।

लोकतंत्र पर भी उठाए सवाल
एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लोकतंत्र पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कई आजाद देशों ने लोकतंत्र तो अपनाया, लेकिन उसके मूल सिद्धांत नहीं अपनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के नाम पर नेता और अफसर जमकर पैसा लूटते हैं, जबकि जनता मुफ्त की सुविधाओं में व्यस्त रहती है।

भौतिकवाद और राजनीति पर भी पोस्ट
9 जुलाई को किए गए अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लिखा कि भौतिकवाद ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है और लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम और ईमानदार लोगों को राजनीति में आना चाहिए, क्योंकि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के चुने जाने से लोकतंत्र कमजोर होता है।

दृष्टिकोण से एक व्यावहारिक उपाय बताया
पूर्व आईएएस ने सुझाव दिया कि भारतीय मुसलमानों को तुर्की के मुसलमानों की तरह आधुनिक और सामान्य ड्रेस पहनने पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि धार्मिक पहचान पहली नजर में स्पष्ट नहीं होगी तो भीड़ द्वारा निशाना बनाए जाने की आशंका कम हो सकती है। उन्होंने इसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक व्यावहारिक उपाय बताया।

सांस्कृतिक परंपराओं से समझौता करने वाली सलाह बताया है
हालांकि, नियाज खान की इस सलाह पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से एक व्यवहारिक सुझाव दिया है। वहीं, बड़ी संख्या में लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं से समझौता करने वाली सलाह बताया है।

नियाज खान इससे पहले भी अपने बेबाक बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है, जिस पर कई बार विवाद भी हुआ है।

विपक्ष में अपनी-अपनी राय रख रहे
फिलहाल, उनके इस नए बयान ने मॉब लिंचिंग, व्यक्तिगत सुरक्षा, धार्मिक पहचान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग पक्ष और विपक्ष में अपनी-अपनी राय रख रहे हैं, जबकि इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

पहले भी बयानों से बटोर चुके हैं सुर्खियां
यह कोई पहली बार नहीं है जब नियाज खान ने इस तरह का कोई बड़ा या लीक से हटकर बयान दिया हो। इससे पहले भी वे ब्राह्मण समुदाय, बॉलीवुड फिल्मों और मुस्लिम समाज की आंतरिक कुरीतियों पर खुलकर अपनी राय रख चुके हैं, जिस पर काफी राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ चुकी है।

अब पूर्व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा सीधे तौर पर पहनावा बदलने और पहचान छिपाने की इस सलाह के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। जहां कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिहाज से व्यावहारिक सुझाव मान रहे हैं, वहीं एक बड़ा वर्ग इसे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और संस्कृति से समझौता करने की बात कहकर इसका विरोध भी कर रहा है।

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