नई चुनौतियों को अवसर में बदलें, नेतृत्व क्षमता बढ़ाएं: किरण बेदी

विवेक झा, भोपाल। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की भोपाल शाखा द्वारा शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं सामाजिक चिंतक डॉ. किरण बेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। वहीं आईसीएआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीए प्रफुल्ल छाजेड़ तथा पीडीएससी चेयरमैन सीए अभय छाजेड़ की विशेष उपस्थिति रही। सेमिनार में प्रदेशभर से आए लगभग 200 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने सहभागिता की।

बदलते दौर में सीए की भूमिका पर जोर

सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि आज का दौर तेजी से बदलती तकनीक, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और नए आर्थिक मॉडल का है। ऐसे समय में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को पारंपरिक कार्यशैली से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में अवसर तलाशने होंगे। वक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप एडवाइजरी, फाइनेंशियल कंसल्टेंसी, रिस्क मैनेजमेंट और कॉरपोरेट गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में सीए की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

“लीडर वही जो चुनौतियों में रास्ता बनाए” : किरण बेदी

मुख्य अतिथि डॉ. किरण बेदी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि किसी भी प्रोफेशन में सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता से मिलती है। उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स देश की आर्थिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं और उन्हें केवल अकाउंट्स तक सीमित न रहकर समाज एवं संस्थाओं में नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हर चुनौती अपने भीतर एक अवसर लेकर आती है। यदि व्यक्ति लगातार सीखने की आदत बनाए रखे और समय के साथ खुद को अपडेट करता रहे, तो वह किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने “आर्ट ऑफ लिविंग” के संदर्भ में मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और कार्य-जीवन संतुलन को भी जरूरी बताया।

प्रोफेशनल स्किल के साथ व्यक्तित्व विकास भी जरूरी

आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष सीए प्रफुल्ल छाजेड़ ने कहा कि वर्तमान समय में केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। एक सफल प्रोफेशनल बनने के लिए कम्युनिकेशन स्किल, निर्णय क्षमता और व्यक्तित्व विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को क्लाइंट्स और उद्योग जगत की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि आज सीए केवल टैक्सेशन और ऑडिट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कॉरपोरेट स्ट्रेटेजी, फाइनेंशियल प्लानिंग और बिजनेस एडवाइजरी में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले समय में यह क्षेत्र युवाओं के लिए और अधिक संभावनाएं लेकर आएगा।

युवाओं को प्रेरित करने वाला रहा आयोजन

पीडीएससी चेयरमैन सीए अभय छाजेड़ ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन प्रोफेशनल्स को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आईसीएआई भोपाल शाखा लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिनसे सदस्यों को नई जानकारी और व्यावसायिक दृष्टिकोण प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने करियर, नेतृत्व और प्रोफेशनल चुनौतियों से जुड़े प्रश्न पूछे। सेमिनार के अंत में प्रतिभागियों ने इसे उपयोगी और प्रेरणादायी आयोजन बताया।

डिजिटल इंडिया के दौर में राजगढ़ में ‘झगड़ा प्रथा’ का खेल, नाबालिग लड़की पर थाने के सामने 20 लाख की पंचायत

 राजगढ़

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अगर आपको लगता है कि बाल विवाह और ‘झगड़ा प्रथा’ जैसी कुप्रथाएं सिर्फ इतिहास के पन्नों या दूर-दराज के जंगलों तक सीमित रह गई हैं, तो राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से आई यह तस्वीर आपकी आंखें खोल देगी।

यहाँ कानून के रखवालों की नाक के ठीक नीचे, थाने के सामने स्थित गायत्री मंदिर परिसर में घंटों तक एक ऐसी पंचायत चली, जिसका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ एक 16 साल की नाबालिग लड़की का सौदा करने और ‘झगड़ा’ की रकम तय करने पर था।

सबसे शर्मनाक बात यह कि थाने के ‘जिम्मेदारों’ को इसकी भनक तक नहीं लगी (या उन्होंने देखना जरूरी नहीं समझा)।
फ्लैशबैक: 6 साल की उम्र में तय हो गया था ‘भविष्य’

मामले की जड़ें 10 साल पुरानी हैं। खिलचीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रघुनाथपुरा की रहने वाली इस मासूम की शादी महज 6 साल की उम्र में छीपीपुरा गांव के एक लड़के से कर दी गई थी। बचपन का वो बाल विवाह आज इस लड़की के लिए जी का जंजाल बन चुका है।

एक ‘फोटो’ और शुरू हो गया 20 लाख का बवंडर

कुछ दिन पहले लड़की के मायके में एक शादी समारोह था, जहाँ उसने अपने एक रिश्तेदार के साथ एक सामान्य फोटो खिंचवाई। यह फोटो किसी तरह लड़की के ससुराल पक्ष तक पहुंच गई और इसे ‘नाक का सवाल’ बना लिया गया।

ससुराल पक्ष की जिद: “लड़की को तुरंत हमारे घर (ससुराल) भेजो।”

मायके पक्ष की दलील: “लड़की अभी 16 साल की नाबालिग है, 18 साल पूरे होने से पहले विदाई नहीं करेंगे।”

बस, इसी बात पर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्ष शिकायत करने थाने पहुंचे। लेकिन थाने के भीतर जाने के बजाय, थाने के ठीक सामने ही पंचों ने अपनी ‘अदालत’ (पंचायत) लगा दी।
नाबालिग के अधिकारों पर ‘झगड़ा प्रथा’ भारी

घंटों चली इस पंचायत में न तो किसी को इस बात की चिंता थी कि बाल विवाह कानूनन अपराध है, और न ही किसी को उस 16 साल की बच्ची के भविष्य और अधिकारों की परवाह थी। पूरा फोकस इस बात पर था कि ‘झगड़ा’ (सहमति या अलगाव के बदले दी जाने वाली सामाजिक रकम) कैसे तय हो।

लड़की के भाई ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के लोग उसकी बहन को जबरन ले जाने पर अड़े हैं और ऐसा न करने के बदले 20 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे हैं।

अंजाम: पंचायत बेनतीजा, अब आगजनी की धमकी!

जब घंटों की सिरपच्ची के बाद भी बात नहीं बनी और पंचायत बेनतीजा समाप्त हो गई, तो लड़के पक्ष के लोग कथित तौर पर कानून हाथ में लेने और आगजनी करने की धमकी देते हुए वहां से चले गए।

बड़ा सवाल: थाने के ठीक सामने समाज को दीमक की तरह चाट रही कुप्रथाओं का यह तमाशा होता रहा, धमकी भरे अल्टीमेटम दिए गए, लेकिन पुलिसिया सिस्टम मूकदर्शक बना रहा।

अब देखना यह है कि क्या राजगढ़ प्रशासन इस होनहार नाबालिग को इंसाफ दिला पाता है या कुप्रथाओं के आगे कानून ऐसे ही नतमस्तक रहेगा?

 

मध्य प्रदेश में गर्मी का प्रचंड प्रहार, 37 जिलों में लू का अलर्ट; कई शहरों में जनजीवन बेहाल

भोपाल
 राजधानी समेत पूरे मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी और लू ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और रात में भी गर्म हवाओं से राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग ने इंदौर, उज्जैन सहित कई जिलों में लू और वॉर्म नाइट का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है।

ऑरेंज अलर्ट जारी, कई जिलों में लू चलने की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और धार जिलों में लू के साथ वॉर्म नाइट का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में रात का तापमान भी सामान्य से काफी अधिक बना रह सकता है, जिससे लोगों को रात में भी गर्म हवाओं का सामना करना पड़ेगा। वहीं भोपाल, ग्वालियर, सागर, विदिशा, रायसेन, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, छतरपुर, दमोह, रीवा और सिंगरौली समेत कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है।

सबसे ज्यादा गर्म खंडवा रहा, जहां तापमान 45.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 37 जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार और देवास में तीव्र लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं कई जिलों में दिन के साथ रातें भी तपेंगी। इंदौर, उज्जैन और मंडला में वॉर्म नाइट की स्थिति रहेगी, यानी रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। 

इन जिलों में चलेगी लू
भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, सीहोर, राजगढ़, मंदसौर, नीमच, झाबुआ, छतरपुर, सागर, दमोह समेत कई जिलों में लू का असर रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक इन इलाकों में दोपहर के समय हालात ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

कहीं लू तो कहीं ओले
प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ कई जिले भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ इलाकों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि भी हुई। कटनी में तेज हवाओं के साथ ओले गिरे, जबकि उमरिया में आंधी और बारिश से खरीदी केंद्रों में रखा गेहूं भीग गया। सागर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, गुना, शिवपुरी और रायसेन समेत कई जिलों में भी शाम को मौसम बदला।

बड़े शहरों का तापमान

खंडवा – 45.1 डिग्री
शाजापुर -44.6 डिग्री
खरगोन – 44.2 डिग्री
रतलाम  – 44 डिग्री
भोपाल – 42.8 डिग्री
उज्जैन – 42.5 डिग्री
इंदौर – 41.8 डिग्री
जबलपुर – 41.8 डिग्री
ग्वालियर – 40.9 डिग्री

अगले 4 दिन तक राहत नहीं
मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे के मुताबिक 16 से 19 मई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी बनी रहेगी। दोपहर 12 से 3 बजे के बीच लू का असर सबसे ज्यादा रहेगा। लोगों को बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि मई के ज्यादातर दिनों में प्रदेश में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का असर रहा। 15 दिनों में 13 दिन मौसम बदला रहा, लेकिन अब अचानक तेज गर्मी ने हालात बिगाड़ दिए हैं। फिलहाल शनिवार को बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।

मौसम विभाग की एडवाइजरी
– दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें
– लंबे समय तक धूप में न रहें
– हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें
– बच्चे और बुजुर्ग विशेष सावधानी रखें
– दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें 

प्रदेश के इन जिलों पर बरस सकते हैं बादल
इसके अलावा मौसम विभाग ने सागर और दमोह जिलों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की है। जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, कटनी, शहडोल, अशोकनगर, गुना, शिवपुरी, विदिशा, रायसेन और पन्ना जिलों में धूलभरी आंधी के साथ हल्की बारिश होने के आसार हैं। मौसम के इस बदले हुए मिजाज का असर शुक्रवार शाम देखने को भी मिला, जब कटनी में तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि हुई। वहीं उमरिया में बारिश के कारण खरीदी केंद्रों में रखा गेहूं भीग गया। डिंडौरी के मेहदवानी और शहपुरा क्षेत्रों में भी तेज आंधी और बारिश के बाद तापमान में करीब 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली।

45.1 डिग्री के साथ खंडवा रहा सबसे गर्म
प्रदेश में शुक्रवार को खंडवा सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा शाजापुर में 44.6 डिग्री, खरगोन में 44.2 डिग्री और रतलाम तथा नौगांव में 44 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी भोपाल में पारा 42.8 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री जबकि इंदौर और जबलपुर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

मौसम विभाग ने की शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील 
लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। विभाग ने नागरिकों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील की है। साथ ही दोपहर के समय धूप में ज्यादा देर तक न रहने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच गर्मी सबसे ज्यादा प्रभावी रहती है, इसलिए इस दौरान बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।

10 जून के बाद झमाझम
इधर भीषण गर्मी के बीच मानसून को लेकर भी राहत भरी खबर है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून 10 से 16 जून के बीच मध्य प्रदेश में दस्तक दे सकता है। अनुमान है कि मानसून पहले केरल पहुंचेगा और उसके बाद आगे बढ़ते हुए प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों खंडवा, खरगोन, बड़वानी और बुरहानपुर के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। मानसून के आगमन से प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ, श्रद्धालुओं ने किए मां वाग्देवी के दर्शन

धार 
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने के बाद शनिवार को यहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर फैसला सुनाए जाने के बाद हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है। फैसले के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की। 

हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार हुई पूजा
शनिवार सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों के साथ श्रद्धालु भोजशाला परिसर में एकत्र हुए। यहां पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर में यह पहली पूजा मानी जा रही है।

भोजशाला परिसर में पूजा के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया और हिंदू पक्ष को वहां पूजा करने का अधिकार दिया। अदालत ने उन याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया, जिनमें भोजशाला परिसर हिंदुओं को सौंपने और परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने से रोकने की मांग की गई थी।

शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।

भोजशाला फैसले पर उषा ठाकुर का दिग्विजय सिंह पर हमला, बोलीं- तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे

धार भोजशाला को लेकर आए न्यायालय के फैसले के बाद पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के शासनकाल में भोजशाला आंदोलन से जुड़े लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय हिंदू संगठनों और आंदोलनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश की गई थी. उषा ठाकुर ने कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे हैं और अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति के कारण आज भी हाई कोर्ट के फैसले पर बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भोजशाला हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और वर्षों पुराने संघर्ष के बाद अब न्यायपालिका से न्याय मिला है. पूर्व मंत्री ने कहा कि बरसों पुराना सपना अब पूरा हुआ है. मां सरस्वती और मां वाग्देवी का आशीर्वाद समाज को मिला है. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि एक मंदिर को मंदिर कहलाने में इतना लंबा समय गुजर गया. हालांकि अब अदालत के फैसले ने सत्य को सामने ला दिया है और सत्य की जीत हुई है. उषा ठाकुर ने कहा कि दिग्विजय सिंह जैसे नेता अपने वोट बैंक की राजनीति के कारण इस तरह के बयान देते रहेंगे, लेकिन हिंदू समाज की आस्था भोजशाला से जुड़ी है और अब यहां प्रतिदिन पूजा होगी. उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं वर्षों से भोजशाला आंदोलन से जुड़ी रही हैं. आंदोलन के संघर्ष को उन्होंने बहुत करीब से देखा है और पूरे घटनाक्रम की साक्षी रही हैं. उनके मुताबिक यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक पहचान की भी जीत है। 

भोजशाला में अभी चित्र ले जाने की अनुमति नहीं, संयम में श्रद्धालु, उत्साह से किए दर्शन

इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार की भोजशाला पहुंचे. दर्शन करने वालों में महिलाएं और बच्चियां भी शामिल रहीं. कई श्रद्धालु अपने साथ हनुमान जी और मां सरस्वती के चित्र लेकर पहुंचे थे. श्रद्धालुओं ने धार्मिक चित्रों को परिसर के भीतर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी. सुरक्षा कर्मियों ने श्रद्धालुओं को बताया कि उन्हें अभी तक हाई कोर्ट के नए आदेशों या प्रशासन की ओर से किसी बदलाव संबंधी निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं. ऐसे में फिलहाल पुरानी व्यवस्था और निर्धारित नियमों के तहत ही प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जा रही है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनुबंध एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि स्पष्ट आदेश मिलने के बाद ही किसी नई व्यवस्था को लागू किया जा सकेगा. हालांकि इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. लोग शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन और पूजा-अर्चना करते नजर आए. परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी को नमन कर आशीर्वाद लिया. वहीं भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की. समिति ने कहा कि हाई कोर्ट के विस्तृत दिशा-निर्देश और आधिकारिक आदेश मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. पदाधिकारियों ने समाज से कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने का आग्रह किया.

कोर्ट ने कहा – भोजशाला का धार्मिक स्वरूप मंदिर का
अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र एक संरक्षित स्मारक है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है, जहां देवी सरस्वती का मंदिर स्थित है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह स्थान देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर था। साथ ही यह जगह प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी जानी जाती थी। 

पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
शनिवार सुबह सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया।

श्रद्धालु बोले- भोजशाला मंदिर थी, है और रहेगी
दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सालों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, “भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है।”

मुस्लिम पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला मंदिर था, मंदिर है और हमेशा मंदिर ही रहेगा। फिलहाल पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में 2 कैविएट याचिकाएं दायर
मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में 2 कैविएट याचिकाएं दायर की हैं। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है।

रिश्वतखोर पटवारी लोकायुक्त के जाल में फंसा, रंगे हाथ गिरफ्तार

रीवा

लोकायुक्त संभाग रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश एवं डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई।

जानकारी के अनुसार, ग्राम खजुआ कला निवासी कमलेश पटेल ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया कि सीमांकन कार्य में भूमि की सीमा बरकरार रखने के एवज में हल्का पटवारी मनोज पांडे द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी जा रही है। सत्यापन के दौरान आरोपी 10 हजार रुपये पहले ही ले चुका था और शेष 5 हजार रुपये की मांग कर रहा था।

लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को रीवा के राजीव मार्ग निराला नगर में जाल बिछाकर आरोपी पटवारी को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ ट्रैप कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार ने किया। टीम में निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया सहित 12 सदस्यीय दल शामिल रहा।

दो पंचायत सचिव निलंबित, CEO की बड़ी कार्रवाई से विभाग में हड़कंप

ग्वालियर

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जिला पंचायत CEO ने बड़ी कार्रवाई की है। एक साथ दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया। सरकारी कार्यों में लापरवाही एवं बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर यह कार्रवाई की गई है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कल्याणी के सचिव रामलखन गुर्जर ने स्व. सुरेश जाटव का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के एवज में अवैध राशि मांगने का आरोप लगा है। वहीं, ग्राम पंचायत आरोली के सचिव गौतम सिंह कौरव को लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायत पर निलंबित किया गया है।

सरपंच ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। जिला पंचायत CEO सोजान सिंह रावत ने दोनों मामलों में निलंबन आदेश जारी कर दिए हैं। इस कार्रवाई से दोनों ग्राम पंचायत में हड़कंप की स्थिती बनी है।

भोजशाला को अयोध्या मॉडल पर विकसित करने की तैयारी, Mohan Yadav का बड़ा बयान

भोपाल 

लंबे समय से चल रहे धार की भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है वहीं कोर्ट ने इसे वाग्देवी मंदिर माना है. जहां सनातन समुदाय में इस फैसले से खुशी का माहौल है वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस खुशी को दोगुना कर दिया है. हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने एक कहा है कि इस जगह पर अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. राज्य सरकार ने संकेत दे दिया है कि वह पूरे धार क्षेत्र को अयोध्या मॉडल पर विकसित करने की तैयारी में है। 

बता दें कि भोजशाला पर शुक्रवार को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है. ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार मानकर फैसला सुनाया है और भोजशाला को मूल चरित्र से मां सरस्वती का मंदिर माना है. इस फैसला का राज्य सरकार ने खुलकर स्वागत किया है। 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंटरव्यू में कहा है कि राजधानी भोपाल स्थित भोजशाला को अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट से सरकार को बड़ा सहयोग मिला है और अब सरकार भोजशाला को भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। 

उन्होंने कहा कि भोजशाला मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि जैसे अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण के बाद वहां का विकास हुआ, उसी तरह भोजशाला क्षेत्र का भी समग्र विकास किया जाएगा. सीएम मोहन यादव ने साफ कहा कि दोनों पक्ष से बातचीत कर रास्ता निकाला जाएगा और धर्म की आड़ में माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्ती की जाएगी।

 क्या मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी जमीन
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के हर आदेश का पालन होगा. दोनों पक्षों के धर्म गुरुओं से बात करके रास्ता निकालेंगे. अगर मुस्लिम पक्ष मस्जिद बनाने के लिए जमीन चाहेगा तो हम उस पर भी जरूर विचार करेंगे। 

माता वाग्देवी की प्रतिमा को वापस कब कर लाएंगे?
पीएम मोदी अब तक देश की 1200 धरोहर वापल ला चुके हैं. उनसे मिलकर आग्रह करेंगे कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूर्ति के लिए केंद्र स्तर से प्रयास हो. प्रयास करेंगे कि मूर्ति जल्दी मंदिर में स्थापित हो…

संदीप पाठक पर FIR को लेकर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- जानकारी देने में हिचक क्यों?

चंडीगढ़ 
राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर पंजाब सरकार की चुप्पी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- आप संकोच क्यों कर रहे हैं, एफआईआर है तो बता दीजिए, नहीं है तो भी बता दीजिए। अदालत ने सुनवाई टालते हुए बिना उसकी पूर्व अनुमति पाठक पर किसी कठोर कार्रवाई पर रोक जारी रखी। यह राहत अगले सप्ताह तक रहेगी।

पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन आज भी वही स्थिति है। 8 मई को सरकार ने कहा था- जानकारी नहीं, आज फिर वही जवाब।

राय ने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसे जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में उसे सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है।

पंजाब सरकार के वकील ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आशंका है। याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत यह समझने में असमर्थ है कि राज्य यह बताने में क्यों हिचक रहा है कि संज्ञेय अपराध दर्ज हुआ या नहीं। कोर्ट ने साफ किया- जब तक फैसला नहीं होता, बिना अदालत की इजाजत पाठक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

 अगली सुनवाई अगले सप्ताह
संजीव अरोड़ा की दलीलों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, फिलहाल नहीं दी कोई राहत

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपनी गिरफ्तारी व रिमांड को पूर्वनियोजित, कानूनविहीन और संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ बताया। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा- ईडी ने पीएमएलए की प्रक्रियाओं की अवहेलना कर गिरफ्तारी को औपचारिकता बना दिया। हाईकोर्ट ने लंबी बहस के बाद असंतुष्टि जताते हुए फिलहाल कोई राहत नहीं दी।

अरोड़ा के वकीलों ने बताया कि उन्हें वास्तव में सुबह 7:15 बजे हिरासत में ले लिया गया जबकि आधिकारिक गिरफ्तारी का समय शाम 4 बजे दर्शाया गया। अदालत में कहा गया- यह स्वतंत्रता पर प्रहार है और गिरफ्तारी की पारदर्शिता व वैधानिकता पर सवाल खड़े करता है। घंटों नियंत्रण में रखकर बाद में गिरफ्तारी दिखाना कानून की मूल भावना के विपरीत है।

अदालत को बताया गया कि 5 मई के ईसीआईआर और 9 मई की छापेमारी के बीच ईडी ने धारा 50 के तहत कोई समन जारी नहीं किया, न स्वतंत्र पूछताछ की, न कोई नया साक्ष्य जुटाया। बचाव पक्ष ने कहा- पुराने फेमा मामले की सामग्री को पीएमएलए गिरफ्तारी का आधार बनाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

अरोड़ा की ओर से एक और बड़ा सवाल उठाया गया- जिस अधिकारी ने पहले फेमा में शिकायतकर्ता की भूमिका निभाई, वही पीएमएलए की धारा 19 के तहत रीजन टू बिलीव कैसे बना सकता है। इसे अपने मामले का जज बताते हुए कहा गया कि पूर्वाग्रहग्रस्त अधिकारी से निष्पक्ष संतुष्टि संभव नहीं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामला सोमवार दोपहर के लिए टाल दिया। फिलहाल अरोड़ा को राहत नहीं मिली है। गौरतलब है कि अरोड़ा के खिलाफ गुरुग्राम में केस दर्ज हुआ था।

 

खंभों पर गणेश जी की आकृतियां, दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’… भोजशाला की ग्राउंड रिपोर्ट में कई अहम खुलासे

 धार

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर शुक्रवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है. कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर बताया. फैसले के अगले ही दिन हमारी  टीम भोजशाला परिसर के अंदर पहुंची, जहां कैमरे में कई ऐसे चिन्ह और आकृतियां कैद हुईं, जिन्हें हिंदू पक्ष लंबे समय से अपने दावों का आधार बताता रहा है। 

हमारे कैमरे में भोजशाला परिसर के अंदर मौजूद प्राचीन खंभों और दीवारों पर कई सनातन प्रतीक साफ तौर पर दिखाई दिए. भोजशाला में कुल 104 प्राचीन खंभे मौजूद हैं, जिन पर अलग-अलग धार्मिक आकृतियां उकेरी गई हैं. इनमें भगवान गणेश की आकृति, घंटियां, रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक और अन्य पारंपरिक हिंदू चिन्ह शामिल हैं. कई खंभों पर बनी नक्काशी मंदिर वास्तुकला की शैली से मेल खाती नजर आई। 

दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ और छतों पर कमल के फूल की आकृति
हमारे कैमरे में भोजशाला की दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ सरस्वती नमः’ जैसे धार्मिक शब्द भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिए. इसके अलावा छत पर कमल के फूल की आकृति भी मौजूद है, जिसे हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रतीक इस बात के प्रमाण हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर था। 

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी अपनी रिपोर्ट में इन प्रतीकों और आकृतियों का उल्लेख किया था. परिसर में मौजूद कई चिन्ह पहले चूने की परत से ढक दिए गए थे. बाद में सफाई और संरक्षण कार्य के दौरान ये आकृतियां और शिलालेख फिर से सामने आए. भोजशाला को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चला आ रहा है. हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी यानी सरस्वती मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता रहा है.

इसी विवाद को लेकर मामला अदालत में पहुंचा था. हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब भोजशाला एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक बहस के केंद्र में आ गया है. फैसले के बाद परिसर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. 

 

जल संरक्षण में देश के लिए मिसाल बना मध्यप्रदेश, मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने गिनाईं उपलब्धियां

जनसहयोग से जल संरक्षण कार्यों में अग्रणी बना है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नदियां हमारी प्रत्यक्ष शक्तियां हैं : दादा गुरू
साधक और शासक समाज के बीच कार्य करते हैं, तो मिलते हैं श्रेष्ठ परिणाम : आर्य
रवीन्द्र भवन में हुई नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी, सेवाभावियों को मिला समर्थ नर्मदा सम्मान

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पानी को बचाने और सहेजने के लिए सरकार के साथ ही आम नागरिक भी सजग और सक्रिय हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार द्वारा करवाए गए जल संरक्षण और जन संचयन के कार्यों में अग्रणी राज्य है। नर्मदा मिशन जैसी संस्थाएं जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश में सभी शासकीय विभाग पानी बचाने और लोगों को जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए मिलकर कार्य करने की भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने परिसर स्थल में देशी उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बाल चित्रकार विक्रम लोधी ने मां नर्मदा का चित्र भेंट किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर दादा गुरु भगवान ने प्रवचन द्वारा मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और दादा गुरु ने स्मित अपराजिता की पुस्तक “समर्थ दृष्टि: साधना के शिखर” का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न श्रेष्ठ सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों को समर्थ नर्मदा अलंकरण प्रदान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कुंए, बावड़ियां, पोखर, नहर और अन्य जल स्त्रोतों एवं जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्य चल रहे हैं। गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हुए जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियां आगामी 30 जून तक निरंतर चलेंगी। इतनी लंबी अवधि के इस अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं को उपयोगी बनाना और पानी के प्रति जन जागृति बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संवर्धन अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। प्रदेश में अनेक त्यौहार भी शासन-प्रशासन के साथ मिलकर मनाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास और विरासत के संरक्षण के आहवान पर मध्यप्रदेश अमल कर रहा है।

पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों के उद्गम स्थलों के अवलोकन और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की दिशा में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयासों में सराहनीय जनभागीदारी मिल रही है। वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक गोपाल आर्य ने कहा कि हमारे देश में अमृता देवी जैसी महिलाएं हुई हैं, जो वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान से भी पीछे नहीं हटी। साधक और शासक जब समाज के बीच में रह कर कार्य करते हैं तो श्रेष्ठ परिणाम सामने आते हैं।

कार्यक्रम में दादा गुरू ने कहा कि भारत की संस्कृति ने दुनिया को दर्शन दिया है। हमारी प्रकृति यह संकेत दे रही है कि हम सभी मिलकर पर्यावरण की चिंता करें। हमारी नदियां हमारी शक्ति है। गंगा-यमुना-नर्मदा जल के रूप में प्रवाहित होने वाली प्रत्यक्ष शक्तियां हैं। नर्मदा पथ व्यक्तित्व निर्माण का पथ है। दादा गुरू ने मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में हो रहे कार्य की प्रशंसा की। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने प्रदेश में जनसहयोग से जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्यों का विवरण दिया। कार्यक्रम में खेल मंत्री विश्वास सारंग, राज्यसभा सदस्य श्रीमती माया नारोलिया, विधायक भगवानदास सबनानी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

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