सावित्री ठाकुरका दावा: 2017 में ब्रिटिश म्यूजियम मान चुका था प्रतिमा वापसी, कोर्ट फैसले के बाद तेज हलचल

 धार

 ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद धार सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने दावा किया है कि ब्रिटिश संग्रहालय वर्ष 2017-18 में ही प्रतिमा लौटाने पर सहमत हो गया था, लेकिन एक शर्त के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।

सावित्री ठाकुर ने बताया कि वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने के लिए तत्कालीन राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी केंद्र सरकार की ओर से ब्रिटिश म्यूजियम प्रबंधन से चर्चा कर रहे थे। वर्ष 2014 से 2017 के बीच सुब्रमण्यम स्वामी ने चार बार भोजशाला का दौरा भी किया था।

सावित्री ठाकुर का कहना है कि वर्ष 2017-18 में ब्रिटिश म्यूजियम ने शर्त रखी थी कि वाग्देवी की प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए, जहां पर वह पहले स्थापित थी। उस समय मामला हाई कोर्ट में लंबित होने के कारण यह शर्त पूरी नहीं हो सकी। हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रतिमा को भोजशाला में पुनर्स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वह स्वयं इस संबंध में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करेंगी।

बहुचर्चित भोजशाला परिसर में अलग ही भावनात्मक, धार्मिक और ऐतिहासिक वातावरण है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानते हुए शुक्रवार को दिए महत्वपूर्ण फैसले के बाद श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना जारी है। श्रद्धालु निर्धारित शुल्क (एक रुपया प्रति व्यक्ति) देकर परिसर में प्रवेश कर मां वाग्देवी की प्रतिमा के स्थान पर पहुंचकर श्रद्धा, आस्था और भावुकता के साथ नमन कर रहे हैं।

लगता है जैसे जीवन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा हो गया हो
मंदिर पक्ष में आए फैसले के बाद भोजशाला मुक्ति आंदोलन से जुड़े बुजुर्ग कार्यकर्ताओं और हिंदू समाज के वरिष्ठ लोगों की आंखों में संतोष, भावुकता और वर्षों के संघर्ष के बाद विजय की खुशी एक साथ दिखाई दी। 90 वर्षीय हिंदू नेता विमल गोधा ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के कई दशक भोजशाला मुक्ति आंदोलन को समर्पित किए हैं। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब भोजशाला की बात उठाना ही संघर्ष माना जाता था। अब लगता है जैसेजीवन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा हो गया हो।

आंदोलन से जुड़े रहे 75 वर्षीय सुरेशचंद्र भंडारी ने कहा कि यह आंदोलन सांस्कृतिक अस्मिता और इतिहास को बचाने की लड़ाई भी था। शुरुआती दौर में बहुत कम लोग खुलकर आंदोलन के साथ खड़े होते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह जन आस्था का आंदोलन बन गया। अब ऐसा लग रहा है जैसे संघर्ष की हर पीड़ा सार्थक हो गई।

 

ग्वालियर में जनभागीदारी जनगणना अभियान की बैठक, महिला विंग के 31 सदस्य नियुक्त

आज जनभागीदारी जनगणना कार्य की मीटिंग डॉ अजित जैन के ग्वालियर निवास पर हुई जिसमें जनगणना कार्य में जनजागृति अभियान से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्णय लिए गए। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय संयोजक डॉ अजित  जैन ने इस कार्य के लिए महिला इकाई के 31 सदस्यों का गठन करते हुए भारत के संपूर्ण नगरों में कार्य हेतु महिला विंग को यह जिम्मेदारी सौंपी । महिला विंग के सभी पदाधिकारीगण और सदस्यों ने शपथ ली कि वे 15 दिवस में ही सभी नगरों में अपनी अपनी टीम गठित करके अति शीघ्र ही यह कार्य प्रारंभ कर देंगी।

मप्र में सेवानिवृत्त कर्मचारी केस,सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद भी भुगतान लंबित, उठे सवाल

शासकीय अधिकारियों की हठधर्मिता

माननीय उच्चतम न्यायालय का भी आदेश नहीं मान रहे अधिकारी।
मप्र सरकार में ऐसे अधिकारियों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है जो माननीय न्यायालयों के आदेशों के प्रति टाल-मटोल का रवैया अपना रहे हैं। और ऐसी फायलो पर बजाय आदेश क्रियान्वयन के एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय घुमाया जाता है। इस तरह के अनेकों प्रकरण इस दफ्तर से उस दफ्तर में घूमते मिल जाएंगे । ऐसा ही एक प्रकरण 2016 में भोपाल से सेवानिवृत्त हुई श्रीमती लाजवर का है। सेवानिवृत्त होंने के पश्चात उनसे अधिक भुगतान वसूली की गई। न्याय दृष्टांतों के विपरीत होंने से माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की प्रिंसीपल बैंच ने वसूली आदेश निरस्त कर वसूली गई राशि 8 प्रतिशत व्याज सहित याचिकाकर्ता को भुगतान करने के आदेश पारित किए। किन्तु प्रशासन द्वारा आदेश का पालन न कर माननीय उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल की गई। यह अपील माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 12-2-2026 को निरस्त करते हुए प्रिंसीपल बैंच जबलपुर का आदेश पालन करने का आदेश दिया गया। किंतु तीन माह व्यतीत होने के बाद भी आवेदिका को भुगतान नहीं किया गया है। शासन को इस मुद्दे पर गहराई से विचार करना चाहिए कि माननीय न्यायालय द्वारा निर्णीत प्रकरणों में इस प्रकार की लापरवाही और उदासीनता के पीछे की मंशा क्या हो सकती है? यह गंभीर प्रश्न है।
SLP(c)no. 030907/2025

श्योपुर में बड़ा हादसा, मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 40 घायल

 श्योपुर

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से एक बड़े हादसे की खबर आ रही है। यहां आवदा थाना इलाके के भोजका गांव के पास तेंदूपत्ता तोड़कर लौट रहे मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में ट्रॉली में सवार करीब 40 मजदूर घायल हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि सभी मजदूर काम खत्म करके वापस लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां 6 मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

 

खंडवा में मासूम पर कुत्तों का हमला, 6 डॉग्स ने 50 मीटर तक घसीटा

खंडवा

 जिले के छैगांव माखन ब्लाक अंतर्गत ग्राम सुरगांव जोशी में आवारा श्वानों के हमले से छह वर्षीय मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। बच्चे की हालत इतनी गंभीर हो गई कि उसे खंडवा से इंदौर रेफर करना पड़ा, जहां उसकी प्लास्टिक सर्जरी तक करनी पड़ी। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने प्रशासन से आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।

जानकारी के अनुसार अवि पुत्र अनिल पटेल, निवासी ग्राम चिचगोहन भेरू खेड़ा, अपनी बुआ के घर सुरगांव जोशी आया हुआ था। 14 मई को दोपहर करीब एक बजे वह घर के बाहर शौच के लिए गया था। इसी दौरान वहां घूम रहे 6 से 7 आवारा श्वानों ने उसे घेर लिया और हमला कर दिया। कुत्ते बच्चे को करीब 50 मीटर दूर खेत तक घसीटकर ले गए और बुरी तरह नोच डाला।

एमपी पुलिस में 10 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी, परीक्षा एजेंसी पर अभी संशय

भोपाल

भोपाल में 11 मई को केएफ रुस्तम जी सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस आरक्षकों सहित पुलिस में 10 हजार पदों पर शीघ्र भर्ती किए जाने की घोषणा की। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि भर्ती कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) से होगी या पुलिस भर्ती बोर्ड से। पुलिस मुख्यालय भी भ्रम की स्थिति में है। मुख्यालय ने भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इसमें 1,041 पद उप निरीक्षक और सूबेदारों के भी हैं।

भर्ती बोर्ड के गठन का प्रस्ताव अब भी लंबित
भर्ती प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद चयन की प्रक्रिया प्रारंभ होनी है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारी चाहते हैं कि इसके पहले भर्ती बोर्ड गठित हो जाए जिससे तेज गति से इन पदों पर भर्ती की जा सके।

मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष अप्रैल में पुलिस मुख्यालय में एक बैठक के दौरान पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने के लिए कहा था, जिससे भर्तियों में देरी नहीं हो। घोषणा के एक माह बाद पुलिस मुख्यालय ने शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया था, पर तब से परीक्षण ही चल रहा है।

गृह विभाग करेगा व्यवहार्यता का अध्ययन
अब गृह विभाग के नए एसीएस संजय शुक्ला प्रस्ताव का परीक्षण करेंगे। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) और विधि विभाग के साथ बैठक कर प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड बनाने के संबंध में व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) अध्ययन किया जा रहा है। शीघ्र ही गठन को लेकर निर्णय हो जाएगा।

अन्य राज्यों की तर्ज पर तैयारी
बता दें, मुख्यमंत्री ने प्रतिवर्ष 7500 पदों के मान से तीन वर्ष में 22,500 पदों पर भर्ती करने के लिए कहा है। ईएसबी में अन्य परीक्षाओं का दबाव होने के कारण कई बार लिखित परीक्षा आयोजित कराने में देरी होती है। इसी कारण पुलिस भर्ती बोर्ड बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश सहित 15 से अधिक राज्यों में पुलिस की भर्ती के लिए अलग भर्ती बोर्ड बने हुए हैं।

 

MP में शक्ति प्रदर्शन करने वाले नेताओं पर सख्ती, पीएम मोदी की अपील अनसुनी पड़ने पर तलब

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कह दिया था कि नेता सादगी से काम करें और बड़े-बड़े काफिले न निकालें। वहीं, मध्यप्रदेश में कई भाजपा नेताओं ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया। सैकड़ों गाड़ियों के साथ दौरे किए, जेसीबी से फूल बरसवाए और पूरे इलाके में जाम जैसे हालात बना दिए थे। इन सबके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं।

अब पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। मध्यप्रदेश भाजपा सरकार और संगठन ने ऐसे सात नेताओं को दिल्ली से फटकार लगाने के बाद भोपाल तलब किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 17 मई को इन नेताओं को बुलाया है। वन टू वन बात होगी और संतोषजनक जवाब न मिला तो कार्रवाई होगी।

दिल्ली स्थित भाजपा हाईकमान ने भी पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। 15 मई को पीएम की अपील के बावजूद नेताओं द्वारा वाहन रैलियां निकालने और कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश भाजपा से जवाब मांगा।

8-9 जगह निकलीं वाहन रैलियां, आलाकमान नाराज
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की 10 मई की अपील के बाद भी मध्य प्रदेश में 8-9 स्थानों पर बड़े वाहन काफिलों के साथ स्वागत रैलियां निकाली गईं। इसे सीधे पीएम की अपील की अवहेलना माना जा रहा है। प्रदेश भाजपा ने तत्काल कदम उठाते हुए संबंधित नेताओं को 17 मई को भोपाल बुलाया है।

बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी और अन्य जिम्मेदार नेता मौजूद रहेंगे। नेताओं से पूछा जाएगा कि पीएम की अपील के बावजूद रैलियां क्यों निकाली गईं। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आगे कार्रवाई भी हो सकती है।

इन पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
    सज्जन सिंह यादव (भिंड जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष) – सौ वाहनों के काफिले के साथ बग्घी पर सवार होकर रैली निकाली। नियुक्ति रद्द कर दी गई।

    सौभाग्य सिंह ठाकुर (मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष) – 700 गाड़ियों का काफिला लेकर उज्जैन से भोपाल आए। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कुछ अधिकार छीन लिए गए।

इन नेताओं की रैलियों पर सवाल उठे, भोपाल तलब किया

    टिकेंद्र प्रताप सिंह (देवास जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष) – 200 गाड़ियों (कुछ वापस लौटीं) के साथ जिला कार्यालय पहुंचे।

    पवन पाटीदार (ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष) – 24 गाड़ियों का काफिला लेकर चंबल दौरे पर गए।

    वीरेंद्र गोयल (सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष) – 30 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला, खुद ई-रिक्शा में बैठे।

    रेखा यादव (महिला आयोग की अध्यक्ष) – छतरपुर में सैकड़ों लग्जरी गाड़ियों का काफिला निकाला, ट्रैफिक जाम हुआ।

    सत्येंद्र भूषण सिंह (लघु उद्योग निगम अध्यक्ष) – खुद ई-रिक्शा से आए, पर समर्थकों का बड़ा कार-बाइक काफिला साथ चला।

    राकेश सिंह जादौन (खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड उपाध्यक्ष) – ई-रिक्शा से पहुंचे, लेकिन पीछे काफिला होने की खबर है।.

मुख्यमंत्री ने काफिले से कम कर दिए 5 वाहन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद अपने काफिले से 5 वाहन कम कर दिए हैं। डिप्टी सीएम व अन्य मंत्रियों ने भी काफिले में गाड़ियां कम की है। पार्टी अब इस बात पर जोर दे रही है कि प्रधानमंत्री की अपील सभी स्तरों पर लागू होनी चाहिए।

17 मई को भोपाल में होने वाली पूछताछ के बाद अनुशासनहीनता पाए जाने पर और कार्रवाई हो सकती है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए किसी भी नेता को छूट नहीं देगी।

‘मैं घोर सनातनी हूं…’ धर्म और भोजशाला पर दिग्विजय सिंह-उषा ठाकुर के बीच जुबानी जंग, Video वायरल

 इंदौर

“मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कह रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म का मानने वाला हूं।” पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने न सिर्फ यह कहा बल्कि भाजपा विधायक उषा ठाकुर को यह भी कह दिया कि मेरे कहने के बाद ही आपने सनातन धर्म को स्वीकार किया, पहले आप हिंदू-हिंदू धर्म करती थीं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और भाजपा विधायक उषा ठाकुर शनिवार को इंदौर में एक-दूसरे से मिले। इस बीच धर्म पर चर्चा छिड़ी और उनके संवाद का वीडियो शनिवार को वायरल हो गया।

दिग्विजय-उषा ठाकुर की मुलाकात

शुक्रवार देर रात कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह इंदौर पहुंचे थे। रेसीडेंसी कोठी में ठहरे सिंह शनिवार सुबह जब निकल रहे थे तो परिसर में उनकी मुलाकात भाजपा विधायक उषा ठाकुर से हुई। औपचारिक मुलाकात के दौरान उषा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह का स्वागत करते हुए उन्हें “बड़े भाई” कहकर पुकारा।

इसके बाद दिग्विजय सिंह ने कहा, “मैं घोर सनातन को मानने वाला हूं, मेरे कहने के बाद आपने सनातन कहना शुरू किया।” इस पर उषा ठाकुर ने जवाब दिया, “हम अनादि काल से सनातनी हैं।” दिग्विजय सिंह ने कहा, “अनादि काल से सनातनी तो तुम हो, हम क्या दुश्मन हैं उसके।”

नर्मदा परिक्रमा, एकादशी व्रत और भोजशाला फैसले पर चर्चा

बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने उषा ठाकुर से पूछा, “तुमने नर्मदा परिक्रमा की है क्या?” इस पर उषा ठाकुर ने कहा, “नहीं करी।” फिर दिग्विजय ने पूछा, “एकादशी का व्रत करती हो क्या?” उषा ठाकुर ने जवाब में कहा, “आप व्यक्तिगत रूप से तो पक्के सनातनी हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं करते।” इस पर दिग्विजय सिंह ने तुरंत कहा, “मैं सार्वजनिक रूप से ही तो कह रहा हूं, अब और कैसे सार्वजनिक करूं? मैं सही सनातनी हूं।”

बातचीत के दौरान उषा ठाकुर ने हाई कोर्ट के भोजशाला फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सिंह को फैसले का सम्मान करना चाहिए। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, “तूने कैसे मान लिया कि मैंने विरोध किया?” उषा ठाकुर ने कहा, “अब ये किसी ने बोला…” तो दिग्विजय सिंह मुस्कुराते हुए बोले, “किसी ने बोला…!” दोनों नेताओं के बीच यह संवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

एक व्यक्ति एक पद की पैरवी

शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के पास संगठन का पद है और निगम में नेता प्रतिपक्ष का भी। दिग्विजय सिंह ने एक व्यक्ति एक पद की बात छेड़ते हुए किसी एक पद को त्यागने की सलाह कांग्रेसियों के बीच दे दी। दरअसल दोपहर में भोजन के लिए सिंह पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्डा के घर पहुंचे थे।

वहां उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी व संगठन के अन्य जिम्मेदारों को भी एक व्यक्ति एक पद की नीति लागू करने का सुझाव दिया है, क्योंकि दो पदों की जिम्मेदारी पर कोई भी व्यक्ति एक साथ न्याय नहीं कर सकता। दिग्विजय सिंह ने जब यह बात कही उस दौरान शहर के तमाम कांग्रेसी भी उनके साथ मौजूद थे।

 

मध्य प्रदेश में शहीद परिवारों को बड़ा सम्मान, हर कोर्स में पत्नी और बच्चों के लिए सीट आरक्षित

भोपाल

प्रदेश में अब पुलिस और होमगार्ड की सेवा दे रहे कर्मचारियों, अधिकारियों की ड्यूटी के दौरान शहादत पर उनके परिजनों को ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए सरकार हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में सीट रिजर्व करेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं।

इस व्यवस्था में तय किया गया है कि अगर किसी शहीद की पत्नी या उसके पुत्र या पुत्री को ग्रेजुएशन की पढ़ाई करनी है तो ऐसे लोगों के लिए हर पाठ्यक्रम में कम से कम एक सीट रिजर्व रखी जाएगी और उन्हें एडमिशन दिया जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस संबंध में पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि प्रवेश मार्गदर्शिका 2026-27 में एक अतिरिक्त सीट का आरक्षण करना अनिवार्य है। यह अतिरिक्त सीट प्रदेश के सभी स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में आरक्षित रखी जाएगी। इसमें पुलिस, होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) के शहीदों की विधवा और उनके आश्रित बच्चों के लिए रिजर्वेशन दिया जाएगा।

आयुक्त उच्च शिक्षा ने कहा है कि हर स्नातक पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीट के अलावा एक सीट सुपर न्यूमेरेरी सीट बनाई गई है। यह सीट नियमित सीट्स की संख्या को प्रभावित नहीं करेगी यानी प्रवेश के लिए जितनी सीट्स पहले से तय हैं उनकी संख्या में कोई कमी नहीं होगी।

ये होंगे इस अतिरिक्त सीट के लिए पात्र

    उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि जो अतिरिक्त सीट तय की गई है उसमें केवल ऐसे उम्मीदवार पात्र होंगे जो पुलिस, होमगार्ड या नागरिक सुरक्षा के शहीद की विधवा या उनके आश्रित पुत्र या पुत्री होंगे।

    इसके लिए सक्षम प्राधिकारी घोषित किए गए गृह विभाग या अन्य संबंधित विभाग द्वारा जारी आश्रित होने का प्रमाण पत्र और अन्य सामान्य प्रवेश संबंधी दस्तावेज लिए जाएंगे।

    ऐसे उम्मीदवार को ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल पर अलग कैटेगरी या विकल्प के माध्यम से आवेदन करना होगा।

    हर पाठ्यक्रम में अधिकतम एक अतिरिक्त सीट ही इसके लिए दी जा सकेगी।

    यदि एक से अधिक पात्र अभ्यर्थी हैं तो मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा।

    यदि किसी पाठ्यक्रम में पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होता है तो सीट रिक्त रखी जाएगी। यह सीट किसी अन्य श्रेणी या अभ्यर्थी को आवंटित नहीं की जाएगी।

मोहन कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें, रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कई मंत्रियों की छुट्टी तय?

भोपाल
 मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व वाली सरकार 13 जून को अपने ढाई साल पूरे करने जा रही है, लेकिन उससे पहले सत्ता के गलियारों में कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। खबर है कि बीजेपी आलाकमान ने सरकार और संगठन दोनों की परफॉर्मेंस का फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। 17 और 18 मई को पार्टी के केंद्रीय समीक्षक भोपाल पहुंचेंगे, जहां मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो इस बार समीक्षा सिर्फ औपचारिक नहीं होगी, बल्कि मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, जिलों में पकड़, संगठन के साथ तालमेल और जनता के बीच उनकी छवि तक का आकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस संभावित फेरबदल की जद में कुछ बड़े और वरिष्ठ चेहरे भी आ सकते हैं।

आमने-सामने होगी जवाबदेही की परीक्षा
पार्टी सूत्र बताते हैं कि मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से बैठाकर उनसे सवाल-जवाब किए जाएंगे। चर्चा का फोकस सिर्फ योजनाओं की फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में कितने सक्रिय हैं, संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ उनका व्यवहार कैसा है और जनता के बीच सरकार की छवि मजबूत करने में उनकी भूमिका कितनी प्रभावी रही है। समीक्षक मंत्रियों द्वारा पेश किए गए दावों की जमीनी हकीकत भी जांचेंगे। यही रिपोर्ट आगे कैबिनेट में बने रहने या बाहर होने का आधार बन सकती है।

मॉनसून सत्र से पहले हो सकता है बड़ा बदलाव
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जुलाई में प्रस्तावित मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा बदलाव संभव है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में चार पद खाली हैं। ऐसे में सिर्फ विस्तार ही नहीं, बल्कि कई मंत्रियों की छुट्टी और नए चेहरों की एंट्री का रास्ता भी साफ हो सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अभी से नई रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे नेताओं को मौका देने की तैयारी है, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाने वाला माना जाता है।

पुराने दिग्गजों की वापसी के संकेत
कैबिनेट विस्तार को लेकर जिन नामों की चर्चा है, उनमें कुछ पूर्व मंत्री और लंबे समय से संगठन में सक्रिय चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं। पिछले ढाई साल से कई नेता सत्ता और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्हें मौका देकर पार्टी क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।

बीजेपी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि अगर अभी बदलाव होता है, तो नए मंत्रियों को 2028 चुनाव से पहले करीब दो साल का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में सरकार की पकड़ मजबूत कर सकें।

सत्ता और संगठन दोनों की अग्निपरीक्षा
मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए आने वाले महीने बेहद अहम माने जा रहे हैं। एक तरफ संगठन सरकार के प्रदर्शन को कसौटी पर कस रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में मोहन कैबिनेट का संभावित फेरबदल सिर्फ मंत्रियों की अदला-बदली नहीं, बल्कि 2028 के चुनावी रण की शुरुआती बिसात माना जा रहा है।

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