Indore Honey Trap केस में सभी आरोपी जेल पहुंचे, निजी वीडियो को लेकर नया खुलासा

इंदौर 
 इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार सभी सात आरोपियों को बालेबाले मजिस्ट्रेट के घर पर पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसी बीच सामने आया कि हनी ट्रैप-2 के नाम से चर्चा में आए गैंग की मास्टरमाइंड रेशू और श्वेता ने पुराने हनी ट्रैप प्रकरण के वीडियो का इस्तेमाल कर पांच लोगों को टारगेट बनाया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है।

इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है। क्राइम ब्रांच पुलिस ने घटना के लिए जिम्मेदार सभी सात आरोपियों को औपचारिक कार्यवाही के बाद सीधे बाले बाले मजिस्ट्रेट के घर ले जाकर पेश किया। सोमवार सुबह हुई इस पेशी में अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए, जिसके बाद सातों को जेल रवाना कर दिया गया। पुलिस के इस कदम को मामले की गंभीरता और सुरक्षा कारणों से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस बीच जांच में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। हनी ट्रैप-2 नाम से सामने आए इस नए जालसाजी नेटवर्क में मुख्य भूमिका रेशू और श्वेता बताई जा रही है। दोनों ने पुराने हनी ट्रैप कर कई अन्य मामले के संवेदनशील वीडियो हासिल कर लिए थे और इन्हीं के आधार पर पांच लोगों को ब्लैकमेल किया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी पहले भरोसा जीतते थे, फिर निजी पलों के वीडियो दिखाकर पैसों की मांग की जाती थी।

मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका भी इसी गिरोह के संचालन, तकनीकी काम और पैसे की वसूली से जुड़ी बताई जा रही है। क्राइम ब्रांच पिछले कुछ दिनों से लगातार इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही सभी सात आरोपियों श्वेता जैन, रेशु चौधरी, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन जितेंद्र पुरोहित और पुलिस कर्मी  विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल कर दिया है। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, लेन-देन और पुराने मामलों के लिंक की गहराई से जांच कर रही है साथ ही आरोपियों से जब्त मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं जिनका डेटा रिकवर किया जा रहा है। त्रिपाठी का कहना है कि यह गैंग संगठित रूप से काम कर रहा था और आगे और खुलासे संभव हैं।

ट्विशा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- ‘जान चली गई, वजह चाहे जो हो’

भोपाल 

मध्यप्रदेश के चर्चित मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान मामले पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी एम पंचोली की बेंच ने अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने मीडिया से इस मामले में आरोपियों के इंटरव्यू न चलाने का आग्रह किया. साथ ही कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो इस मामले की पूरी जांच को आज ही अपने हाथों में ले रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया है। 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि सीबीआई तुरंत जांच अपने पास लेकर इस पर कड़े स्तर की सुनवाई शुरू करेगी. कोर्ट ने कहा कि एक मासूम युवती की जान गई है, वजह चाहे जो हो ,उसका पता चलना चाहिए. उसके स्वतंत्र निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी जरूरी है. क्योंकि मामले में अपराधिक साजिश का भी एंगल शुरुआती जांच और आरोपों से सामने आ रहा है। 

CBI को सौंपी जा रही है जांच
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम मीडिया और जनता की अटकलें नहीं चाहते हैं. सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जांच आज सीबीआई को सौंपी जा रही है. सुनवाई के दौरान अदालत को ये भी बताया गया कि एक मृत बेटी होने की तुलना में समाज में एक तलाकशुदा बेटी होना कहीं ज्यादा बेहतर है। 

इस पर अदालत ने सुनवाई के दौरान दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उसे एक युवा बेटी को असमय खोने पर पीड़ित परिवार की असीम पीड़ा के साथ पूरी मानवीय सहानुभूति है। 

ट्विशा के पति और सास के खिलाफ FIR दर्ज
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पति समर्थ सिंह और उनकी सास जो कि एक पूर्व जिला न्यायाधीश हैं, गिरिबाला सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि रसूख के कारण स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हो रही थी. सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसी प्रक्रियागत अनियमितता को दूर करने के लिए आज ही जांच सीबीआई को सौंपी जा रही है। 

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच को लेकर भी टिप्पणी की. कोर्ट ने ऐसे मामलों में जांच के संचालन पर दु:ख व्यक्त किया और जांच को लेकर चल रही प्रक्रियागत अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच का निर्देश दिया है। 

12 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार
राज्य सरकार की निगरानी में भोपाल में हुए पहले शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) पर जब पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए, तब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कड़े आदेश पर दिल्ली एम्स (AIIMS) की चार सदस्यीय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मृतका का दूसरा पोस्टमार्टम किया. इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के कारण घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद आखिरकार ट्विशा का अंतिम संस्कार किया जा सका। 

आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि  ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं. उसके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में लापरवाही का आरोप लगाया है। 

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य ऐतिहासिक : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य ऐतिहासिक : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड, देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड
वक्फ सुधारों के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी
मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम में 849 बेटे-बेटियों को मिली स्कॉलरशिप
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने पूर्व राष्ट्रपति महान वैज्ञानिक डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम और भारत-पाक युद्ध में शौर्य के प्रतीक कैप्टन हमीद का किया स्मरण

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड विभिन्न नवाचारों से देश में सबसे आगे है। प्रदेश में वक्फ बोर्ड के माध्यम से वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन की गई, इसके लिए भारत सरकार से स्कॉच अवार्ड मिला। यह पारदर्शी व्यवस्था पूरे देश के लिए उदाहरण बनी है। म.प्र वक्फ बोर्ड देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रवीन्द्र भवन भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

रहीम और रसखान ने दिया समरसता का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा देश रहीम और रसखान की मेलजोल की संस्कृति में विश्वास रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की जनता कानून में भरोसा रखती है, चाहे किसी भी समुदाय की हो। इसलिए भारत पूरे विश्व में आदर्श है।

कश्मीर की जनता ने पड़ोसी दरिंदों को खदेड़ा, यह भारत की आदर्श संस्कृति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब जम्मू कश्मीर में पड़ोसी राष्ट्र से दरिन्दे आए तब वहां की जनता ने उनका सीधा विरोध किया और उन्हें खदेड़ दिया। हमारे देश की जनता बुद्धि और विवेक का उपयोग करती है। भारत की यह सुदृढ़ परम्परा और आदर्श संस्कृति है।

प्रधानमंत्री की पहल और मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने नए वक्फ कानून के माध्यम से सुशासन और पारदर्शिता की व्यवस्था लागू करवाई है। अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश इस कार्य में अग्रणी है।

वक्फ सुधार के कार्य ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक वक्फ सुधार में इतना बड़ा कार्य नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड अभिनंदन का पात्र है। वक्फ संपत्तियों का संरक्षण और सुधार हो रहा है। नया वक्फ भवन भी बनाने की पहल हुई है, जिसका नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया।

पोर्टल से पारदर्शिता आई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब पारदर्शी कार्य प्रणाली लागू है। उम्मीद पोर्टल के माध्यम से सभी वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन हैं और रिकॉर्ड में दर्ज हुई हैं। वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण हटाने का कार्य बोर्ड द्वारा किया जा रहा है जो प्रशंसनीय है।

अब वक्फ संपत्तियां सुरक्षित, वक्फ बोर्ड के माध्यम से आय वृद्धि का अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। मध्यप्रदेश में अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। बोर्ड को आय वृद्धि का अवसर भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है।

बेटे बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें सरकार देगी पूरा सहयोग

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बेटे-बेटियां शिक्षा के माध्यम से प्रोत्साहित हों और भविष्य के सपनों को साकार करें। मध्यप्रदेश सरकार इनका पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न तरह के दान से भी निर्धन बच्चों को पढ़ाने का कार्य हो रहा है। दान दाताओं की भूमिका प्रशंसनीय है। ऐसे कार्यों में राज्य सरकार भी पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न धार्मिक प्रमुखों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाले 849 बेटे बेटियों को हार्दिक बधाई दी।

कैप्टन हमीद के साहस और शौर्य का स्मरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत पाक युद्ध में कैप्टन हमीद ने साहसी कारनामा करते हुए पाकिस्तान के अनेक टैंक नष्ट कर दिखाए, इसे कौन भूल सकता है। कैप्टन हमीद शहीद हुए, उन्होंने राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा को सर्वोपरि माना।

पढ़ो-पढ़ाओ और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना में छात्रवृत्ति का लाभ लें विद्यार्थी – डॉ. सनवर पटेल

मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि आज पढ़ो-पढ़ाओ- राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को विकसित और स्वर्णिम बनाने के लिए कार्य हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी वक्फ की चुनौतियों से निपटने के लिए नए कानून लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार नए कानूनों के माध्यम से आमजन की भलाई और बेटा-बेटियों की पढ़ाई के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में वक्फ माफियाओं पर अंकुश लगा है, मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति ऑनलाइन दर्ज हुई है। इस कार्य के लिए मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला और प्रदेश को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। संपत्तियों के ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ी है, छुप कर मिली भगत से काम करने वाले बेनकाब हुए हैं। माफिया और भू-माफिया किसी धर्मस्थल का शोषण न कर पाएं, इस बात का वक्फ बोर्ड विशेष ध्यान रख रहा है। वक्फ की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है।

स्कूल-कॉलेजों में बेटियों के ड्राप आउट को रोकने में मिली सफलता

डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के सभी मेधावी विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। इसी का परिणाम है कि आज 849 मेधावी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर उनका सम्मान किया जा रहा है। गरीब-जरूरतमंद बेटा-बेटियों को मेडिकल कॉलेज तक की पढ़ाई करने में मदद दी जा रही है। नए कानूनों के कारण वक्फ बोर्ड की आय बढ़ी है। हमारा वक्फ बोर्ड गरीब बेटियों की पढ़ाई में सहायता करता है। औकाफ-ए-आम्मा के प्रयास स्कूल-कॉलेजों में बेटियों के ड्राप आउट को रोकने में कारगर सिद्ध हुये है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्तियों में इस वर्ष 5 लाख पौधे रोपने का निर्णय लिया है। वक्फ के एक स्कूल की नई बिल्डिंग का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा जाएगा। कार्यक्रम में वक्फ बोर्ड की सीईओ श्रीमती फरजाना गजाल, शहर काजी मुस्ताक अली नदमी, जिलाध्यक्ष वक्फ बोर्ड असलम भाई सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में मुस्लिम छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

 

डिजिटल दीदी पूनम खेल-खेल में संवार रही नौनिहालों का भविष्य

डिजिटल दीदी पूनम खेल-खेल में संवार रही नौनिहालों का भविष्य

भोपाल 

डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही इस्तेमाल अगर समाज को बदलने के लिए किया जाए, तो परिणाम कितने सुखद हो सकते हैं, इसकी मिसाल पेश की है मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने। परासिया परियोजना के वार्ड क्रमांक 12 की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूनम चौरसिया आज सोशल मीडिया पर एक चर्चित नाम बन चुकी हैं। पूनम अपनी आंगनवाड़ी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने और उनके संपूर्ण विकास के लिए अनूठे प्रयोग कर रही हैं।

पूनम चौरसिया के यूट्यूब चैनल ‘@parasiawalipoonam’ की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस चैनल पर 71 हजार 600 से अधिक सब्सक्राइबर्स जुड़ चुके हैं। खेल-खेल में प्रारंभिक बाल्याव्यस्था, देखभाल और शिक्षा गतिविधियों को सिखाते हुए पूनम अब तक 6 हजार 800 से ज्यादा वीडियो अपलोड कर चुकी हैं, जिन्हें 7 करोड़ 48 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। यूट्यूब ही नहीं, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी उनकी वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं।

स्थानीय संसाधनों से शिक्षा को बनाया मजेदार

एम.कॉम (M.Com) शिक्षित पूनम साल 2020 से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे रही हैं। वे भारत सरकार के 48 सप्ताह के ‘आधारशिला पाठ्यक्रम’ को रटाने के बजाय बेहद मनोरंजक तरीके से बच्चों को सिखाती हैं। पूनम बच्चों के लिये पाठ्यक्रम को इतना आसान और मजेदार बना देती हैं कि बच्चे खुद व खुद पढ़ाई की ओर खिचें चले आते है। खास बात यह है कि इन गतिविधियों के लिए वे किसी महंगे सामान का इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों जैसे कंकड़, पत्थर, रंग-बिरंगे कागज और घरेलू वस्तुओं के जरिए बच्चों को अक्षर ज्ञान, रंगों की पहचान, शेप और शैडो (आकृतियां और परछाईं) जैसी पेचीदा चीजें सहजता से सिखा देती हैं।

पढ़ाई भी और पोषण भी: आंगनवाड़ी बनी ‘स्मार्ट क्लास’

मध्यप्रदेश के 98 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में 30 लाख से अधिक बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और शाला पूर्व शिक्षा दी जा रही है। आंगनवाड़ी देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां पोषण के साथ पढ़ाई भी होती है। पूनम ने इस अवधारणा को पूरी तरह धरातल पर उतारा है। उन्होंने भारत सरकार के ‘पोषण भी-पढ़ाई भी’ (PBPB) अभियान के तहत प्रथम चरण का प्रशिक्षण लिया और उत्कृष्ट कार्य के चलते दूसरे चरण में वे ‘स्टार चैंपियन कार्यकर्ता’ के रूप में चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने ‘निपसिड’ (NIPCCD) से मास्टर ट्रेनर के रूप में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में उनके केंद्र में 3 से 6 आयु वर्ग के 43 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें से 22 बच्चे नियमित रूप से शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

अभिभावकों में बढ़ा भरोसा, निजी स्कूलों को मिल रही टक्कर

पूनम के इस अभिनव प्रयास का सबसे बड़ा असर स्थानीय समाज पर पड़ा है। क्षेत्र के अभिभावक निजी स्कूलों को छोड़कर अपने बच्चों को पूनम की आंगनवाड़ी केंद्र में भेज रहे हैं। माता-पिता स्वयं बच्चों को केंद्र पर छोड़ने और लेने आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूनम ने आंगनवाड़ी के पारंपरिक ढर्रे को बदलकर उसे एक आधुनिक शिक्षा केंद्र का रूप दे दिया है। स्थिति यह है कि जब यहां के बच्चे आगे चलकर प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश लेते हैं, तो अभिभावक गर्व से कहते हैं कि ‘ये पूनम की आंगनवाड़ी से पढ़कर आए हैं।’

अन्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्त्रोत

पूनम चौरसिया की यह अनूठी पहल अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिये प्रेरणा है। डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग कर सरल गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित किया जा सकता है।

 

धार से CM का बड़ा ऐलान, भोजशाला में बनेगा ‘सरस्वती लोक’

धार
 स्‍थानीय मोतीबाग चौक में आयोजित विशाल आमसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि मालवा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है. उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले समय में भोजशाला परिसर को विकसित कर यहां ‘सरस्वती लोक’ बनाया जाएगा. सीएम ने कहा कि राजा भोज की परंपरा, विद्या और संस्कृति को दुनिया में नई पहचान दिलाने का समय आ गया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में वर्षों पुराना मुद्दा समाधान की दिशा में पहुंचा है और हाईकोर्ट का फैसला भी उसी परिवर्तन का परिणाम है. मुख्यमंत्री ने मंच से यह भी कहा कि धार का गौरव अब नई ऊंचाइयों तक जाएगा। 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पहले भोजशाला के नाम पर तनाव और दंगे का माहौल बनाया जाता था, लेकिन अब विकास और विरासत संरक्षण की राजनीति हो रही है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को सम्मान मिला है. सीएम ने धार में चल रहे विकास कार्यों, पीएम मित्रा पार्क, जल संरक्षण योजनाओं और रोजगार के नए अवसरों का जिक्र करते हुए कहा कि धार अब तेजी से विकसित होने वाला जिला बनेगा. उन्होंने यह भी कहा कि राजा भोज और विक्रमादित्य की भूमि होने के कारण मालवा की सांस्कृतिक पहचान पूरे देश के लिए गौरव का विषय है. मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान सभा में मौजूद लोगों ने कई बार जयकारे लगाए और भोजशाला को लेकर किए गए ऐलान का स्वागत किया। 

भोजशाला को बताया मालवा की धरोहर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला का नाम आते ही राजा भोज की विद्वता और मालवा की समृद्ध संस्कृति याद आती है. उन्होंने कहा कि यह केवल इतिहास नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पहचान है. सीएम ने कहा कि धार की धरती ने दुनिया को ज्ञान और संस्कृति दी है. ऐसे में भोजशाला का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। 

‘सरस्वती लोक’ बनाने का ऐलान
मोहन यादव ने मंच से घोषणा की कि भोजशाला क्षेत्र को विकसित कर ‘सरस्वती लोक’ बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह परियोजना मालवा की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगी. सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम करेगी. इससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। 

कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- पहले समाज को बांटने की कोशिश होती थी
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले ऐसे मुद्दों पर समाज को बांटने की कोशिश होती थी. उन्होंने कहा कि आज विकास और विरासत संरक्षण साथ-साथ चल रहा है. हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह लंबे संघर्ष का परिणाम है। 

पीएम मोदी का किया अभिनंदन
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सांस्कृतिक धरोहरों को सम्मान दिलाने का काम किया है. उन्होंने पीएम मित्रा पार्क का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना जन्मदिन भी धार में मनाया था. इससे धार और मालवा को राष्ट्रीय पहचान मिली है। 

जल संरक्षण पर भी बड़ा बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के मामले में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है. उन्होंने बताया कि राज्य में ढाई हजार करोड़ रुपये से जल संरक्षण के काम किए जा रहे हैं. 105 अमृत सरोवरों का निर्माण भी कराया गया है. इससे गांवों और किसानों को लाभ मिलेगा। 

करोड़ों के विकास कार्यों का लोकार्पण
धार दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में धार में सड़क, उद्योग, सिंचाई और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव दिखाई देंगे. पीएम मित्रा पार्क के जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा और निवेश बढ़ेगा. सीएम ने अपने भाषण में राजा भोज और सम्राट विक्रमादित्य की वीरता और शासन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मालवा की यह ऐतिहासिक विरासत पूरे देश के लिए प्रेरणा है. राजा भोज का नाम आज भी सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है। 

अमलाहा में बिजली कटौती से भड़के ग्रामीण, हाईवे पर लगाया जाम

सीहोर जिले के अमलाहा में लगातार बिजली कटौती से नाराज ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन, सड़क पर उतरे लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग के खिलाफ की नारेबाजी

सीहोर जिले के अमलाहा क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा सोमवार को सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हाईवे पर जाम लगाकर बिजली विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने विभागीय अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में बार-बार बिजली गुल हो रही है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।

हाईवे जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों द्वारा जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद मामला शांत हुआ और यातायात बहाल कराया गया।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

डॉ मोहन यदव ने ऐतिहासिक भोजशाला में किए मां वाग्देवी के दर्शन, विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

धार जिले स्थित प्राचीन भोजशाला पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत की उन्नति की कामना करते हुए मां वाग्देवी का पूजन किया।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव  ने आज धार जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर भोजशाला पहुंचकर मां वाग्देवी के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली, समृद्धि और शांति की कामना की।

मुख्यमंत्री ने भोजशाला की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल भारतीय संस्कृति, ज्ञान और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

पूजन-अर्चना के दौरान जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

गंगा दशमी पर जल संरक्षण का संकल्प

प्रदेश के सभी 55 जिलों, तहसीलों, ग्राम पंचायतों एवं गांवों में “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत जनसहभागिता से निरंतर जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं।

गंगा दशमी के पावन अवसर पर डॉक्टर मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया है।

“जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से प्रदेशभर में तालाबों, बावड़ियों, नदियों एवं जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के कार्य निरंतर किए जा रहे हैं।

यह अभियान केवल जल बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। प्रदेश के नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिल रही है।

आइए, गंगा दशमी के इस पावन पर्व पर हम सभी जल बचाने, प्रकृति संरक्षित करने और स्वच्छ एवं समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प लें।

ट्विशा केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से रोका

भोपाल 
 ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया इस केस को सनसनीखेज बनाने से बचें। मीडिया परिजनों का इंटरव्यू नहीं चलाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका निष्पक्ष जांच जरूरी है। सच ये है कि लड़की की जान गई है।

मीडिया को बयान देने से बचे पीड़ित और आरोपी के परिवार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम पीड़ित परिवार और आरोपी परिवार दोनों के परिवार वालों से अपील करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं ताकि चल जांच पर किसी तरह का कोई प्रभाव न पड़े।

सॉलिसिटर जनरल बोले- जांच सीबीआई अपने हाथ में लेगी
सॉलिसिटर जनरल (SG) ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा देते हुए कहा कि ट्विशा केस की जांच आज ही CBI अपने हाथ में लेगी। इस बीच ट्विशा परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने FIR दर्ज करने में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।

गिरिबाला को तुरंत जमानत कैसे? रसूख से जांच में बाधा… ट्विशा केस में सुप्रीम कोर्ट में उठे ये सवाल

ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कई सवाल उठाए हैं और सीबीआई को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आरोपी और पीड़ित परिवार से मीडिया में या सार्वजनिक मंचों पर बयान न देने की अपील की है. अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि गिरिबाला अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं. कोर्ट ने ये भी सवाल उठाया कि उन्हें तुरंत जमानत कैसे मिल गई। 

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनलर तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CBI आज ही मामले की जांच अपने पास ले लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर ले लिया. CJI सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि CBI तुरंत और निष्पक्ष जांच करेगी। 

निष्पक्ष हो जांच: SC
अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे ये मौत खुदकुशी हो या फिर कोई अन-नेचुरल डेथ (अप्राकृतिक मौत), हर हाल में इस पूरे मामले की तह तक जाकर एक निष्पक्ष और पूरी जांच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस वक्त मीडिया और आम जनता के बीच चल रही किसी भी तरह की अटकलों को बिल्कुल बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं। 

सरकार के फैसले की सराहना
अदालत में सुनवाई के दौरान ये बात भी सामने आई कि आरोपी पक्ष की गिरिबाला सिंह के एक रिटायर्ड जज होने की वजह से समाज में ये नैरेटिव (विमर्श) सेट किया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है. इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले की सराहना की है, ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी तरह निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके। 

‘जांच में सहयोग नहीं कर रही गिरिबाला’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह अब तक पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं, लेकिन वह लगातार अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू देकर दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने तुरंत ही जमानत भी मिल गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि जांच के लिए उनसे जब उनका मोबाइल मांगा गया तो उन्होंने इस को लेकर भी परेशानियां खड़ी कीं। 

साथ ही ट्विशा के वकील ने कहा कि ट्विशा की सास मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में कॉल डिटेल्स भी दे रही हैं. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की इन बातों को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों (आरोपी-पीड़ित) के परिवारों को सख्त हिदायत दी है कि वो मीडिया में बयान देने के बजाय अपने बयानों को सीधे जांच एजेंसी के पास रिकॉर्ड कराएं। 

‘परिवार आना चाहिए आगे’
शीर्ष अदालत ने कहा कि एक युवा बेटी को खोने पर परिवार को जिस असीम पीड़ा और दुख से गुजरना पड़ता है, उसके प्रति अदालत की पूरी सहानुभूति है. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि परिवारों को सही वक्त पर अपनी बेटियों के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि एक मृत बेटी होने से कहीं बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा होकर उनके साथ सुरक्षित रहे। 

‘प्री-जज नहीं बनाना चाहती कोर्ट’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया और आम जनता से इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की मनगढ़ंत अटकलें लगाने से पूरी तरह दूर रहने की अपील की. सीजेआई ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि लोग देश की इस सबसे प्रीमियर जांच एजेंसी (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा रखें. अदालत अभी उन मुद्दों के परिणाम पर कोई पहले से राय (प्री-जज) नहीं बनाना चाहती है, जिनकी जांच होना अभी बाकी है। 

परिवार दायर कर सकता है ट्रांसफर याचिका
इसके अलावा ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को सूचित किया कि वह इस पूरे मुकदमे की निष्पक्षता के लिए इसे मध्य प्रदेश राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग कर सकते हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है और वो इसके लिए किसी भी समय स्थानांतरण याचिका दायर कर सकते हैं। 

आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं। 

क्या है मामला
बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल के घर की छत पर फंदे से लटकी हुई मिली थीं। ट्विशा शर्मा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए उसका पति और सास जिम्मेदार है। वहीं, ससुराल पक्ष ने आरोप लगाया कि ट्विशा ड्रग्स लेने लगी थीं।

12 दिन बाद ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार 12 दिन बाद हुआ। इस दौरान ट्विशा की मां बदहवास दिखीं। वह दहाड़ मार-मारकर रो रही थीं। परिवार के अन्य सदस्य भी फूट-फूटकर रो रही थी। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स की चार सदस्यीय मेडिकल टीम ने उनका दूसरा पोस्टमार्टम पूरा किया।

 

साध्वियों को कार से कुचलने के विरोध में जैन समाज की मौन रैली, बोले- अहिंसा पर हमला बर्दाश्त नहीं

रीवा/भोपाल/इंदौर/विदिशा/मैहर

मध्यप्रदेश के रीवा में सड़क दुर्घटना में दो आर्यिका माताओं के दर्दनाक निधन के बाद देशभर में जैन समाज में तीव्र आक्रोश फैल गया है। इस घटना को लेकर समाज ने इसे महज सड़क हादसा मानने से इनकार करते हुए सुनियोजित साजिश करार दिया है और उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।

घटना 20 मई को रीवा के कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पास की बताई जा रही है, जहां पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्रुतमती माताजी और आर्यिका उपशममती माताजी को तेज रफ्तार वाहन ने कुचल दिया। दोनों संतों की मौके पर ही मौत हो गई।जैन समाज का आरोप है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज इस घटना को सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हिंसक वारदात साबित करते हैं। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि आरोपी चालक ने पैदल विहार कर रही निहत्थी संतों को निशाना बनाते हुए टक्कर मारी और फरार हो गया।

“अहिंसा पर हमला, अब नहीं सहेंगे” राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ और विभिन्न जैन संगठनों ने संयुक्त रूप से जारी आक्रोश पत्र में कहा है कि यह घटना केवल दो संतों की हत्या नहीं, बल्कि जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा’ पर सीधा हमला है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो देशव्यापी उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

विदिशा में साध्वियों के समाधिमरण पर समाज का मौन मार्च

रीवा में विहार के दौरान सड़क दुर्घटना में 105 श्रुतमति माताजी और 105 उपसमति माताजी के समाधिमरण (निधन) को लेकर जैन समाज में भारी रोष है। इस घटना के विरोध में रविवार को विदिशा में सकल दिगंबर जैन समाज ने एक विशाल मौन मार्च निकाला।

यह मौन मार्च माधवगंज चौराहे स्थित स्टेशन जैन मंदिर के बाहर से शुरू हुआ। इसमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाओं और पुरुषों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। समाज के लोग हाथों में न्याय, श्रद्धांजलि और संत सुरक्षा के स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नीमताल चौराहे तक पहुंचे।

णमोकार मंत्र का जाप कर अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन नीमताल चौराहे पर समाजजनों ने सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके बाद सकल दिगंबर जैन समाज, महिला मंडल और व्यापार महासंघ ने मौके पर मौजूद तहसीलदार को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की अपील की गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर ‘संत सुरक्षा प्रोटोकॉल’ लागू करने की मांग ज्ञापन के माध्यम से समाज ने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पैदल विहार करने वाले साधु-संतों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा गाइडलाइन और एसओपी (SOP) तैयार की जानी चाहिए। इसके तहत विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पुलिस सहायता, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश सरकार को संबोधित करते हुए सौंपा गया है। जैन समाज ने इस मामले में कई सख्त मांगें रखी हैं प्रमुख मांगें

    पूरे प्रकरण की SIT या न्यायिक आयोग से जांच।
    CCTV और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने की व्यवस्था।
    आरोपी और साजिशकर्ताओं पर हत्या (धारा 302) के तहत कार्रवाई।
    देशभर में “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करना।
    ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ बनाना।
    संतों के खिलाफ अपराधों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दायरे में लाना।
    संत भी सुरक्षित नहीं, तो व्यवस्था पर सवाल
    ज्ञापन में कहा गया है कि जैन साधु-संत पूरी तरह निहत्थे और पैदल जीवन जीते हैं।
    ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। बार-बार हो रही घटनाओं से समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।मौन रैली निकालते जैन समाज के लोग।

उग्र आंदोलन की चेतावनी जैन समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरेंगे। ज्ञापन में ‘जेल भरो आंदोलन’, ‘चक्का जाम’ और ‘भारत बंद’ जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई है।

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