गैस त्रासदी के जख्म भरने की पहल, भोपाल की जहरीली मिट्टी और भूजल को किया जाएगा शुद्ध

भोपाल 

मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के खात्मे के बाद अब प्रदेश और भोपाल पर लगे इस त्रासदी के आखिरी दाग को भी धोने की तैयारी शुरू कर दी है। यूनियन कार्बाइड (यूका) परिसर व आसपास के 2 किमी क्षेत्र में दूषित मिट्टी और भूजल का उपचार कराने के साथ जंग लगे यूका प्लांट के ढांचे को हटाने ओर जहर को विसंक्रमण करने का आकलन कराया जा रहा है। प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। जमीन और भूजल में घुले जहर को दूर करने के बाद आगे की योजना पर काम शुरू होगा।

यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआइएल) की शुरुआत 1969 में भोपाल में कीटनाशकों के निर्माण के लिए हुई थी। 1979 में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआइसी) निर्माण के लिए विशेष इकाई लगी। 1984 में गैस त्रासदी के बाद सरकार ने संयंत्र को कब्जे में लिया, फिर यहां कोई काम नहीं हुआ। त्रासदी के बाद यूका के जहरीले कचरे को बोरों में भरकर तलघर में रखवाया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने पीथमपुर में इसे नष्ट कराया।

हाईकोर्ट के निर्देशों पर अमल कर अब सरकार ने परिसर की मिट्टी और भूजल के साथ प्लांट का जहर भी खत्म कराने की तैयारी की है। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने इसके लिए एजेंसियों और संस्थानों से प्रस्ताव मंगाए हैं। 

तीन चरणों में होगा काम

पहले चरण में साइट का प्रारंभिक आकलन होगा। दूसरे चरण में सूक्ष्मता से इन्वेस्टिगेशन और तीसरे चरण में इम्पैक्ट असेसमेंट स्टडी कराई जाएगी।

    पहले चरण में विशेषज्ञों की टीम यूका परिसर के दस्तावेज- नक्शे देखेगी। आसपास के क्षेत्र का अध्ययन व नीरी, सीएसआइआर की पुरानी रिपोर्टों की जांच, फिर परिसर और आसपास के क्षेत्र की हाइड्रोजियोलोजी संबंधी डेटा और रिपोट्र्स देखेगी। परिसर की टोपोग्राफी, जियोलोजी, भूजल के एक्विफर और कैचमेंट एरिया का आकलन होगा। जमीन और भूजल के सैंपल के लिए जगह चिह्नित किए जाएंगे।

    हेल्थ और सुरक्षा प्लान बनेगा ताकि किसी को नुकसान न हो। हाइड्रोजियोलोजिकल स्टडी के दौरान सतह की मिट्टी के साथ तालाब, डंप एरिया से सैंपल लिए जाएंगे। प्रदूषण का फैलाव आंकेंगे। यूका परिसर और आसपास 2 किमी एरिया से मिट्टी के 50 सेंपल और भूजल के 15 सेंपल 189 पैरामीटर पर परखेंगे। संक्रमित कचरे का निपटारा होगा। एक रेमेडियल एंड रिहेबिलिटेशन एकशन प्लान भी बनेगा।

    खतरनाक अपशिष्ट और दूषित मिट्टी की सेंपलिंग और उपचार, भंडारण, निपटान का आकलन अध्ययन पर्यावरण प्रभाव (ईआइए) के सिद्धांतों और नियमों के अनुसार होगा। इसके तहत क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आकलन, मिट्टी, भूजल, सतही जल निकायों, स्वास्थ्य प्रभाव परिवहन- निस्तारण के खतरे का आकलन और उससे निपटने की तरीके भी तय किए जाएंगे।

प्रमुख बिंदु

यूका के दो किलोमीटर क्षेत्र में प्रदूषण
दूषित मिट्टी- भूजल होगा शुद्ध
विशेषज्ञों की टीम से जांच और समाधान की तैयारी
प्रस्ताव मंगाए

MP को बड़ी सौगात, ₹4415 करोड़ से बनेगा बैतूल-खंडवा-जुलवानिया नेशनल हाईवे

खंडवा
खंडवा जिला इकॉनामिक कॉरिडोर के रूप में जल्द ही विकसित होने वाला है। बुधवार को नेशनल हाईवे 347बी हैवारखेड़ी (बैतूल) से जुलवानिया (बड़वानी) तक 233.653 किमी हाईवे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दे दी है। इस रोड की कुल लागत इसकी कुल लागत 4415.60 करोड़ की है। पहले पांच चरण में बनने वाला नेशनल हाईवे अब दो पैकेज में बनेगा। इस हाईवे के निर्माण से खंडवा सीधे गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ जाएगा।

कैबिनेट में दो पैकेज में किया रोड
एनएच-347बी पहले पांच चरणों में बनाया जाना था। इसमें हैवारखेड़ी से रोशनी, रोशनी से आशापुर, आशापुर से रूधि, रूधि से देशगांव और देशगांव से जुलवानिया तक रोड शामिल है। अब कैबिनेट ने इसे दो पैकेज में कर दिया है। इसमें हैवारखेड़ी से व्हाया रोशनी-आशापुर-रूधि तक कुल 125.01 किमी का रोड टू-लेन को पेव्ड शोल्डर स्टैंडर्ड (पक्की पटरी) के साथ बनाया जाएगा। इसमें 70.39 किमी का बायपास भी रहेगा। इसके आगे देशगांव-रूधि बायपास 28.680 किमी का काम पहले से ही चल रहा है, जो लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

देशगांव-जुलवानिया अब फोरलेन
कैबिनेट ने एनएच-347बी के दूसरे पैकेज में देशगांव-जुलवानिया सेक्शन में 108.643 किमी रोड को मंजूरी दी है। इस रोड को पहले टू-लेन बनाया जाना था, लेकिन केबिनेट ने इसे अब अपग्रेड करते हुए फोर-लेन बनाने की स्वीकृति दी है। इस रोड पर 54.273 किमी का बायपास आ रहा है। साथ ही इसमें खरगोन जिले में 16.20 किमी का ग्रीन फिल्ड भी शामिल है। ग्रीन फिल्ड में वन विभाग और खेती की जमीन अधिग्रहण करने की कार्रवाई की जाएगी। नेशनल हाईवे हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर बनाया जाएगा।

खंडवा बनेगा दो नेशनल हाईवे का सेंटर
एनएचएआइ द्वारा पहले ही इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे फोरलेन का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा का काम भी चल रहा है। खंडवा का देशगांव दो नेशनल हाईवे का क्रॉसिंग बन रहा है। दो नेशनल हाईवे के सेंटर में आने से खंडवा का इकानोनिक कॉरिडोर भी मजबूत होगा। बैतूल से आगे ये हाईवे नागपुर से जुड़ा हुआ है। खंडवा से नागपुर, बड़ोदरा के साथ सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इधर इंदौर-इच्छापुर हाईवे से खंडवा सीधे राजस्थान और महाराष्ट्र के मुक्तईनगर से आगे तेलंगाना से जुड़ जाएगा।

आर्थिक, सामाजिक, लॉजिस्टिक्स केंद्रों को कनेक्टिविटी
यह परियोजना पूरे राज्य के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को बिना रुकावट कनेक्टिविटी देगी। यह उन्नत कॉरिडोर 06 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों से जुड़ेगा, जिनमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक औद्योगिक पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। परियोजना 5 सामाजिक केंद्रों को भी एकीकृत करेगी, जिनमें खंडवा और बड़वानी जैसे दो आकांक्षी जिले, साथ ही बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे तीन आदिवासी जिले शामिल हैं। इसके अलावा, दो बड़े रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और एक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क सहित 5 लॉजिस्टिक्स केंद्र भी इस कॉरिडोर से जुड़ेंगे।

व्यापार उद्योग को मिलेगी हाइट
बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा नेशनल हाईवे को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इसमें रूधि-देशगांव और रोशनी-आशापुर के बीच काम चल रहा है। देशगांव जुलवानिया और हैवारखेड़ी-रोशनी के बीच भी जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। नेशनल हाईवे से इकॉनोमिक कॉरिडोर बनेगा और यहां व्यापार-उद्योग को हाइट मिलेगी।
आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

मध्यप्रदेश में HIV के बढ़ते मामले चिंता का कारण, केस दोगुने; जांच और जागरूकता पर सवाल

इंदौर.
 मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय संक्रमण दर लगातार बढ़ रही है, उसी समय जांचों की संख्या में कमी क्यों आ रही है. इंदौर जैसे बड़े शहर में वर्ष 2022 में जहां करीब 1.47 लाख लोगों की एचआईवी जांच की गई थी, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 85 हजार रह गई है. इसके बावजूद पॉजिटिव मरीजों की संख्या 492 से बढ़कर 615 तक पहुंच गई है. संक्रमण दर भी 0.33 प्रतिशत से बढ़कर 0.72 प्रतिशत हो गई है. यानी कम जांच के बावजूद ज्यादा संक्रमित सामने आ रहे हैं. यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर संक्रमण की वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। 

स्थिति केवल इंदौर तक सीमित नहीं है. राज्य एड्स नियंत्रण समिति के आंकड़े बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2020-21 में जहां 3771 संक्रमित गर्भवती महिलाएं दर्ज थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या 7167 तक पहुंच गई. इसी अवधि में 200 से अधिक नवजात बच्चों में संक्रमण मां से पहुंचने के मामले सामने आए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय निगरानी से इस तरह के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है. इसके बावजूद बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। 

इंदौर में क्यों बढ़ रही संक्रमण दर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में एचआईवी पॉजिटिविटी रेट लगभग दोगुना हो गया है. वर्ष 2022 में यह दर 0.33 प्रतिशत थी, जो 2023 में 0.67 प्रतिशत, 2024 में 0.70 प्रतिशत और 2025 में 0.72 प्रतिशत तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध और नशे के दौरान संक्रमित सुइयों का उपयोग संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। 

जांच कम होने से छिप रही असली तस्वीर
एचआईवी नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका व्यापक स्क्रीनिंग और समय पर पहचान है. लेकिन इंदौर में जांचों की संख्या लगातार कम हो रही है. इससे कई संक्रमित व्यक्ति समय पर सामने नहीं आ पा रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम स्क्रीनिंग के कारण संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो रहा है। 

गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ता खतरा
राज्य में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ना सबसे चिंताजनक पहलू माना जा रहा है. वर्ष 2025-26 में 743 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी दर्ज की गई. कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच नहीं हुई या उपचार बीच में छूट गया. परिणामस्वरूप संक्रमण मां से बच्चे तक पहुंचने का जोखिम बढ़ गया। 

क्यों नहीं रुक रहा संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण संक्रमण नियंत्रण में बाधा बन रहे हैं. इनमें समय पर जांच न होना, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी बीच में छोड़ देना, संक्रमण की जानकारी छिपाना, नवजात को आवश्यक दवा न देना और संक्रमित मां द्वारा चिकित्सकीय सलाह के बिना स्तनपान कराना शामिल है। 

केस स्टडी ने बढ़ाई चिंता
एक मामले में महिला की पहली गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच ही नहीं हुई. दूसरी गर्भावस्था में संक्रमण का पता चला. इसके बाद पति और पहला बच्चा भी संक्रमित पाए गए. दूसरे मामले में मां ने उपचार पूरा नहीं लिया और नवजात को निर्धारित दवा भी नहीं दी गई. बाद में बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। 

कमलनाथ ने जांच और निगरानी का मुद्दा उठाया
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से विशेष कदम उठाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी को केवल चिकित्सा नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता के माध्यम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। 

हरित विकास के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा: वीर एस. आडवाणी

विवेक झा, भोपाल। भारत की विकास यात्रा अब केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसे पर्यावरणीय संतुलन और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के साथ आगे बढ़ाना होगा। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरित और समावेशी विकास को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन एवं ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वीर एस. आडवाणी ने कही।

उन्होंने कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक समावेशन और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है।

पश्चिमी भारत को निभानी होगी नेतृत्वकारी भूमिका

वीर एस. आडवाणी ने कहा कि पश्चिमी भारत लंबे समय से देश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। उद्योग, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अग्रणी रहने वाला यह क्षेत्र अब पर्यावरण-अनुकूल और संसाधन-कुशल विकास मॉडल का नेतृत्व भी कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जल, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में पश्चिमी भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान भी संभव होगा।

सस्टेनेबिलिटी अब व्यवसायिक आवश्यकता बन चुकी है

आडवाणी ने कहा कि उद्योग जगत में नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और संसाधन दक्षता में लगातार बढ़ता निवेश इस बात का प्रमाण है कि सस्टेनेबिलिटी अब केवल कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) तक सीमित नहीं रह गई है।

उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में वही उद्योग आगे बढ़ पाएंगे जो पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को अपनी व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाएंगे। हरित तकनीकों और ऊर्जा दक्षता में निवेश से उद्योगों की लागत कम होगी और दीर्घकालिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।

विकसित भारत-2047 के लिए पर्यावरणीय जिम्मेदारी जरूरी

सीआईआई वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन ने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार हो सकता है जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को समान महत्व देना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।

जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती

वीर एस. आडवाणी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट और प्राकृतिक आपदाएं विकास की गति को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में उद्योगों को हरित भवनों, सतत विनिर्माण प्रक्रियाओं और निम्न-कार्बन विकास मॉडल को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

सीआईआई की पहलें बना रहीं सकारात्मक माहौल

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने में सीआईआई के सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सीआईआई-सीईएसडी) तथा इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (सीआईआई-आईजीबीसी) की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं उद्योगों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों, ऊर्जा दक्षता और हरित भवनों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

साझेदारी से ही मिलेगा समाधान

आडवाणी ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल सरकार या उद्योग अकेले नहीं कर सकते। इसके लिए उद्योग, सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा।

भविष्य उन्हीं का जो संतुलन साधेंगे

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वही अर्थव्यवस्थाएं और व्यवसाय सबसे अधिक सफल होंगे जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में सक्षम होंगे। हरित निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ उत्पादन प्रणाली भविष्य की आर्थिक सफलता की कुंजी साबित होंगे।

वीर एस. आडवाणी की प्रमुख बातें

  • विकसित भारत-2047 के लिए हरित विकास अनिवार्य।
  • आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी जरूरी।
  • नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा।
  • उद्योग, सरकार और समाज की साझेदारी से ही मिलेगा समाधान।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक।
  • हरित भवन और निम्न-कार्बन विकास मॉडल को बढ़ावा देने की जरूरत।
  • भविष्य में वही उद्योग सफल होंगे जो सस्टेनेबिलिटी को अपनाएंगे।

मध्य प्रदेश सरकार के टेंडरों और सौदों की जांच करेगी कांग्रेस, भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेरा

भोपाल। मध्य प्रदेश में विपक्षी दल कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद के कुछ सदस्यों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं और सरकार के कई निर्णयों में पारदर्शिता को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ है।

जीतू पटवारी ने दावा किया कि अब पार्टी सरकार के हर टेंडर और हर बड़े सौदे पर नजर रखेगी। पार्टी का कहना है कि वह एक-एक टेंडर की जांच करेगी और यदि कहीं भी अनियमितता या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें जनता के सामने लाया जाएगा।

जीतू पटवारी   ने कहा कि वह सरकारी योजनाओं, खरीद प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए गए टेंडरों की विस्तृत समीक्षा करेगी। पार्टी के अनुसार, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की परतें खोली जाएंगी और तथ्यों के आधार पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा और राज्य सरकार पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए अपनी कार्यप्रणाली को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बता चुकी है।

राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लगातार सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी।

“हर दो साल में देश बचाने की अपील क्यों? जीतू पटवारी का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला”

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि आखिर देश की स्थिति ऐसी क्यों बन रही है कि हर दो साल में देशवासियों से ‘देश बचाने’ की अपील करनी पड़ती है। पटवारी ने सरकार के कामकाज और राजनीतिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जीतू पटवारी ने कहा कि जिस देश को विश्वगुरु बनाने का दावा किया जा रहा है, वहां बार-बार जनता से देश बचाने की अपील किए जाने की नौबत क्यों आ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार की नीतियां सफल हैं तो फिर लगातार संकट और चेतावनियों का माहौल क्यों बनाया जा रहा है।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मूलभूत मुद्दों से जूझ रही है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रचार में व्यस्त दिखाई देती है। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक मायने:
पटवारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी तेज़ है। हाल के दिनों में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच कई मुद्दों पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं।

अब देखना होगा कि जीतू पटवारी के इस बयान पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श में कितना प्रभाव छोड़ता है। ऐसी ही राजनीतिक खबरों के लिए बने रहिए हमारे साथ।

मोहन भैया को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता को संदेश: “गालियों के जवाब में भी फूल देंगे” जीतू पटवारी 

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की विचारधारा का हवाला देते हुए जीतू पटवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ता को राजनीतिक सौहार्द और प्रेम की राजनीति का संदेश दिया है। जीतू पटवारी ने कहा कि उनके नेता राहुल गांधी ने उन्हें “मोहब्बत की राजनीति” सिखाई है।

अपने संदेश में उन्होंने कहा, “मेरे नेता आदरणीय राहुल गांधी जी ने हमें मोहब्बत की राजनीति सिखाई है। मोहन भैया, आप हमें कितनी भी गालियाँ दे दो, हम फिर भी आपको फूल ही देंगे।”

इस बयान को राजनीतिक मतभेदों के बीच संयम, संवाद और सकारात्मक राजनीति के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पी सी सी अध्यक्ष ने यह भी संकेत दिया कि उनकी राजनीति विरोधियों के प्रति कटुता के बजाय प्रेम और सम्मान पर आधारित है।

 

भोपाल के डायल-112 हीरोज घर की राह भटकी 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल

​भोपाल जिले के थाना अशोका गार्डन क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटक गई 03 वर्षीय मासूम बच्ची को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई मदद से बच्ची सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सकी और परिजनों की चिंता दूर हुई।

03 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना अशोका गार्डन क्षेत्र अंतर्गत रूचि रेस्टोरेंट के पास एक छोटी बच्ची अकेली मिली है, जो घर का रास्ता भटक गई है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक श्री प्रदीप दुबे एवं पायलट श्री केदार सिंह मौके पर पहुँचे और बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद डायल-112 जवानों ने बच्ची को डायल 112 वाहन में सुरक्षित बैठाकर आसपास क्षेत्र में परिजनों की तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की।

तलाश एवं पूछताछ के दौरान सेमरा क्षेत्र में बच्ची के परिजनों की जानकारी प्राप्त हुई। डायल-112 टीम ने तत्काल परिजनों से संपर्क किया तथा आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बच्ची को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया।अपनी बच्ची को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों का आभार व्यक्त किया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।

 

पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन में 206 नव आरक्षकों का दीक्षांत समारोह संपन्न

भोपाल

​मध्यप्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण तंत्र की उत्कृष्ट परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पुलिस प्रशिक्षण शाला (पीटीएस) उज्जैन में नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण के पांचवें सत्र का दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में 206 नव आरक्षकों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण कर मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्यधारा में प्रवेश किया।

विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  रवि कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में प्रदेश की विभिन्न पुलिस प्रशिक्षण इकाइयों में नव आरक्षकों को आधुनिक, व्यावहारिक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में पीटीएस उज्जैन में संचालित प्रशिक्षण का समापन दीक्षांत परेड के साथ हुआ।

समारोह के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, उज्जैन जोन  राकेश गुप्ता ने परेड की सलामी लेकर प्रशिक्षुओं से परिचय प्राप्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नव आरक्षक मध्यप्रदेश पुलिस की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्दी का वास्तविक सम्मान जनता के विश्वास से प्राप्त होता है तथा आमजन के प्रति संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार ही पुलिस की वास्तविक पहचान है।

 गुप्‍ता ने नव आरक्षकों से अपेक्षा की कि वे अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ पुलिस सेवा में आने वाली नई चुनौतियों का सामना करेंगे तथा अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ करेंगे। उन्होंने सफल आयोजन एवं उत्कृष्ट परेड के लिए पुलिस प्रशिक्षण शाला के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।

313 दिवसीय प्रशिक्षण में आधुनिक पुलिसिंग पर विशेष जोर

पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन की पुलिस अधीक्षक मती मनीषा पाठक सोनी ने प्रशिक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस बैच के प्रशिक्षणार्थियों ने 313 दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। प्रशिक्षण पुलिस मुख्यालय द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार दो सेमेस्टर में संचालित किया गया, जिसमें 12 विषयों की लिखित परीक्षाओं के साथ विभिन्न आउटडोर गतिविधियां, व्यावहारिक प्रशिक्षण, भ्रमण, प्रदर्शन आधारित शिक्षण तथा आधुनिक हथियारों से फायरिंग प्रशिक्षण शामिल रहा।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान तकनीक आधारित पुलिसिंग पर भी विशेष ध्यान दिया गया तथा साइबर वॉरियर योजना के अंतर्गत इस बैच के 61 नव आरक्षकों का चयन किया गया है।

‘साहस’ स्मारिका का विमोचन, दिलाई गई संविधान एवं पुलिस आचरण संहिता की शपथ

समारोह के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा प्रशिक्षण काल की उपलब्धियों, अनुभवों एवं स्मृतियों को संजोए हुए वार्षिक स्मारिका ‘साहस’ का विमोचन किया गया। इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक पीटीएस द्वारा नव आरक्षकों को संविधान एवं पुलिस आचरण संहिता की शपथ दिलाई गई।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों का सम्मान

मुख्‍य अतिथि ने सत्र का सर्वश्रेष्‍ठ प्रशिक्षणार्थी, बाह्य प्रशिक्षण एवं आंतरिक प्रशिक्षण का पुरस्‍कार शासकीय रेल पुलिस भोपाल के आरक्षक  आदित्य उपाध्याय को प्रदान किया। इसके अलावा बाह्य प्रशिक्षण में द्वितीय पुरस्कार विक्रम दाहिया तथा आंतरिक प्रशिक्षण में द्वितीय पुरस्कार राहुल को प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्‍त प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक संचालित करने वाले अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

 

पर्यावरण संरक्षण एक युग का संकल्प; जल की हर बूंद में भविष्य की धड़कन

भोपाल 

विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म मंथन और संकल्प का अवसर है। यह वह क्षण है जब हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को पुनः स्मरण करते हुए एक ऐसे भविष्य की कल्पना करनी चाहिए, जहां जल, जंगल और जमीन सुरक्षित हों। आज आवश्यकता केवल एक दिन के संकल्प की नहीं, बल्कि आने वाले युगों तक चलने वाले जन-संकल्प की है।

पीढ़ियों से हम सुनते आए हैं. “जल ही जीवन है।” किंतु विडंबना यह है कि इस सत्य को समझने में हमें एक गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा। आज यह संकट किसी एक मोहल्ले, शहर, राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी के अस्तित्व से जुड़ा वैश्विक प्रश्न बन चुका है। भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। बढ़ती जनसंख्या, अनियंत्रित शहरीकरण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक जल स्रोतों को तेजी से क्षीण कर दिया है। ऐसे समय में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजना मानवता का सबसे बड़ा दायित्व बन गया है। जल संकट की गंभीरता केवल पानी की कमी तक सीमित नहीं है। भू-जल स्तर का निरंतर गिरना, नदियों का प्रदूषित होना, पारंपरिक जल स्रोतों का लुप्त होना और वर्षा जल का व्यर्थ बह जाना इस संकट के प्रमुख कारण हैं। गांवों और नगरों की जीवन रेखा रहे तालाब, बावड़ियाँ और कुएं आज उपेक्षा, अतिक्रमण और कचरे के बोझ तले दम तोड़ रहे हैं। दूसरी ओर कृषि और उद्योगों में भूजल के अंधाधुंध दोहन ने स्थिति को और अधिक विकट बना दिया है। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में “जल गंगा संवर्धन अभियान” आशा की एक सशक्त किरण बनकर उभरा है। यह अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक सामाजिक आंदोलन है, जिसका मूल मंत्र है…“जन सहयोग से जल संरक्षण और संवर्धन।” इसका उद्देश्य जल संकट के मूल कारणों का समाधान करते हुए समाज को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना है।

मैंने स्वयं अपने विधानसभा क्षेत्र नरसिंहपुर तथा गृह नगर गोटेगांव में सिंगरी नदी के पुनर्जीवन के लिये सफाई अभियान चलाकर जल स्रोतों के संरक्षण का प्रयास किया है। इसी अनुभव के आधार पर मैं सदैव आह्वान करता हूं—“नदियों को नाला बनाना बंद करें।” वास्तव में नदी का उद्गम स्थल ऊर्जा का केंद्र होता है और जहां नदियों का संगम होता है, वहां जीवन की नई संभावनाएँ जन्म लेती हैं। इसलिए नदियों के उद्गम और उनके प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा करना हमारा सामूहिक दायित्व है। मेरे आराध्य परम पूज्य  बाबा  जी की वाणी है कि संकल्प में विकल्प नहीं होता। संकल्प में विक्लप खोजने पर महानतम कार्य रुक जाते हैं।

“जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और नदियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बारिश का पानी धरती में समाहित होकर भू-जल स्तर को पुनर्जीवित कर सके। जल स्रोतों के आसपास व्यापक वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण की प्राकृतिक प्रक्रिया मजबूत हो सके। साथ ही नदियों में प्रदूषण रोकने और गंदे नालों के प्रवाह को नियंत्रित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस अभियान के परिणाम उत्साहवर्धक हैं। जल संरचनाओं की सफाई और गहरीकरण से भू-जल स्तर में सुधार हुआ है। अनेक ऐतिहासिक तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर जल उपलब्धता बढ़ी है। “पानी चौपाल” जैसे कार्यक्रमों ने लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की है और जल बचाने की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है। कृषि क्षेत्र में भी इस अभियान ने सकारात्मक प्रभाव डाला है। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो । यह न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि किसानों की आर्थिक समृद्धि का भी आधार बन रहा है। जल संकट के स्थायी समाधान के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास भी आवश्यक हैं। शहरों में अपशिष्ट जल का शोधन कर पुनः उपयोग किया जाना चाहिए। औद्योगिक प्रदूषण पर कठोर नियंत्रण आवश्यक है और व्यक्तिगत स्तर पर भी हमें पानी की बर्बादी रोकने की आदत विकसित करनी होगी। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करेगा, तब तक कोई भी अभियान पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकता।

जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व है। आज यदि हम जल को सहेजेंगे, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा। हमें अपनी प्राचीन जल संस्कृति से जोड़ते हुए वैज्ञानिक जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग देखना है।

आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जल की हर बूंद को बचाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। क्योंकि सच यही है—पानी को सहेजना ही आने वाली पीढ़ियों को बचाना है और जल का संरक्षण ही जीवन का संरक्षण है। भारत की भूमी और मौसम दोनों हमें संदेश दे रहे हैं 5 जून से पौधारोपण की तैयारी करें और वर्षा प्रारंभ होने पर पौधरोपण “विश्व पर्यावरण दिवस” आहवान सुफल औऱ सफल होगा।

 

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