“एक साँप… जो सिर्फ अपनी जान बचाना चाहता था”

“एक साँप… जो सिर्फ अपनी जान बचाना चाहता था”

ज़रा इस दृश्य की कल्पना कीजिए…

एक साँप धीरे-धीरे रास्ता बदलकर जंगल या किसी सुरक्षित जगह की ओर जा रहा था।

उसने किसी का पीछा नहीं किया, किसी पर हमला नहीं किया और न ही किसी को डराने की कोशिश की।

उसकी बस एक ही कोशिश थी—किसी तरह इंसानों से दूर निकल जाए और अपनी जान बचा ले।

लेकिन तभी एक व्यक्ति उसके सामने आ गया।

उसने  बार-बार क्यों उसे जाने देने के बजाय बार-बार लात मारकर, डंडे से डराकर और उसे उसी दिशा में धकेलना शुरू कर दिया जहाँ से वह बचकर निकलना चाहता था।

अब ज़रा खुद से कुछ सवाल पूछिए।

अगर कोई जीव आपसे दूर जाना चाहता है, तो क्या उसे रोकना सही है?

क्या किसी बेजुबान जानवर को सिर्फ मनोरंजन के लिए डराना या परेशान करना इंसानियत कहलाता है?

क्या यही एक सभ्य समाज की पहचान है कि जो कमजोर हो, जो बोल न सके, उसे सताया जाए?

हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?

क्या हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि किसी लाचार जीव को तंग करना बहादुरी है?

या फिर यह कि हर जीव के जीवन का सम्मान करना ही असली संस्कार है?

अक्सर लोग कहते हैं कि जंगल के जानवर खतरनाक होते हैं।

लेकिन सच्चाई यह है कि ज़्यादातर जंगली जानवर इंसानों से बचकर निकलना चाहते हैं।

वे तब आक्रामक हो सकते हैं जब उन्हें लगे कि उनकी जान खतरे में है या उन्हें निकलने का रास्ता नहीं दिया जा रहा।

अब सोचिए…

अगर उस साँप ने डर और दर्द में किसी को काट लिया होता, तो अगले ही पल लोग क्या कहते?

“साँप बहुत खतरनाक था…”

लेकिन शायद ही कोई यह पूछता कि उसे बार-बार उकसाया किसने?

यही तो सबसे बड़ा सवाल है।

कई बार हादसे जानवर नहीं, बल्कि इंसानों की लापरवाही और क्रूरता पैदा करती है।

एक सभ्य समाज की पहचान उसकी ताकत से नहीं होती, बल्कि उसकी संवेदनशीलता से होती है।

सभ्य समाज वह है जहाँ इंसान सिर्फ इंसानों का ही नहीं, बल्कि हर जीव के जीवन का सम्मान करे।

अगर रास्ते में कोई साँप, पक्षी, कुत्ता या कोई भी जंगली जीव दिखाई दे, तो सबसे समझदारी का काम यही है कि उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उसे निकल जाने दें। यदि ज़रूरत हो, तो स्थानीय वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

याद रखिए…

इंसान होने का मतलब सिर्फ बोलना या सोच पाना नहीं है।

इंसान होने का मतलब है—दया, संवेदना और ज़िम्मेदारी।

क्योंकि किसी बेजुबान को दर्द देना कभी बहादुरी नहीं हो सकती।

और आप बताइए—क्या सभ्य समाज में किसी बेबस जीव को इस तरह बार-बार परेशान करना सही है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखिए।

नीट परीक्षा को लेकर सीएम मोहन यादव की बड़ी समीक्षा, 30 जिलों में 283 केंद्र तैया

21 जून की नीट परीक्षा पर सख्त निगरानी, सरकार और एनटीए

अलर्ट मोड में

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) 2026 परीक्षा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। प्रदेश के 30 जिलों में बनाए गए 283 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने परीक्षा के सुचारु, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, निगरानी और अभ्यर्थियों की सुविधाओं से जुड़े सभी प्रबंध समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

नीट री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक, एनटीए ने किया स्वागत

इधर, नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले केन्द्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगा दी है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम परीक्षा से जुड़ी फर्जी सूचनाओं, कथित पेपर लीक और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा तथा परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है।

गौरतलब है कि नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए देशभर में सुरक्षा व्यवस्थाएं कड़ी कर दी गई हैं। एनटीए ने अभ्यर्थियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।हेडलाइन सुझाव:

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, कुलपति के इस्तीफे की मांग

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, कुलपति के इस्तीफे की मांग

भोपाल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में कथित अकादमिक अनियमितताओं, प्रशासनिक अव्यवस्था और आर्थिक भ्रष्टाचार के विरोध में बुधवार से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। परिषद ने विश्वविद्यालय के कुलपति के तत्काल इस्तीफे तथा विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर शासन द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने की मांग उठाई है।

एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय में एमबीए प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर सहित कई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणाम लंबे समय से लंबित हैं। वहीं पुनर्मूल्यांकन के नतीजे भी एक वर्ष से अधिक समय से घोषित नहीं किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय का अकादमिक कैलेंडर वर्षों से अस्त-व्यस्त है और पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन भी लंबे समय से नहीं हुआ है।

परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नर्सिंग महाविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई है, शिक्षकों की नियुक्तियां लंबित हैं, छात्रावासों की स्थिति खराब है और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है।

एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में संबद्धता प्रक्रिया, विभिन्न टेंडरों, गोपनीय प्रिंटिंग कार्यों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान कार्यप्रणाली से छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और संबद्ध महाविद्यालय सभी प्रभावित हैं।

परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं होता और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। एबीवीपी ने दोहराया कि कुलपति के इस्तीफे तक यह अनिश्चितकालीन धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

एबीवीपी के इस आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र हितों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : जनसेवा, सुशासन और विकास का नया अध्याय

लोकतांत्रिक नेतृत्व का ऐतिहासिक कीर्तिमान

आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक रूप से सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर सेवा देने का रिकॉर्ड, जो पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के नाम था, उसे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पार कर एक नया इतिहास रचा है। यह उपलब्धि देशवासियों के विश्वास, मजबूत नेतृत्व और निरंतर जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

मजबूत नेतृत्व, सशक्त संगठन

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने देशभर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

17 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार।

22 राज्यों में NDA गठबंधन की सरकार।

केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।

विकास और सुशासन के एजेंडे को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार।

साधारण परिवार से देश के प्रधानसेवक तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक का सफर तय किया और स्वयं को देश के “प्रधानसेवक” के रूप में स्थापित किया।

उनकी प्रेरणादायी यात्रा

साधारण पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर।

जनसेवा को राजनीति का मूल उद्देश्य बनाना।

गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान।

राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्यशैली।

हर वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास और कल्याण को प्राथमिकता दी है।

प्रमुख फोकस  क्षेत्र

गरीब कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा।

महिला सशक्तिकरण।

किसान हित और कृषि विकास।

युवाओं के लिए रोजगार और अवसर।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा का विस्तार।

डिजिटल और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण।

विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी नई पहचान बनाई है। विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

विकास के प्रमुख आयाम

विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण।

डिजिटल परिवर्तन और तकनीकी नवाचार।

आर्थिक विकास और निवेश को बढ़ावा।

वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा।

आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन।

मुख्यमंत्री का संदेश

“आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक रूप से सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर सेवा देने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम दर्ज हुआ है। उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी 17 राज्यों में तथा NDA 22 राज्यों में सरकार का नेतृत्व कर रहा है। एक साधारण परिवार से निकलकर देश के प्रधानसेवक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी जी समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और राष्ट्र के विकास के लिए निरंतर समर्पित हैं।”

डॉ मोहन यदव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मिले कांग्रेस नेता, पेपर लीक मामले पर उठाए सवाल

रतलाम: कांग्रेस नेता ने रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान छात्रों ने बताया कि परीक्षा रद्द होने और उससे जुड़े विवादों के बाद वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण दोबारा तैयारी करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सहित देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्होंने वर्षों की मेहनत और अपने परिवारों की उम्मीदों के साथ परीक्षा की तैयारी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक प्रकरण ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

पोस्ट में उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस लगातार NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार को घेरती रही है। वहीं, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच की गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

छात्रों का कहना है कि वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी मेहनत और करियर प्रभावित न हो।

महिलाओं और बच्चों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता, लापरवाही पर होगी कार्रवाई: सीएम डॉ. मोहन यादव

भोपाल, 1 जून। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनभागीदारी और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो तथा पोषण स्तर सुधारने के लिए स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागों के साथ निजी अस्पतालों और संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और अन्य राज्यों में सफल नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें अपनाने की कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि महिला कर्मियों की अधिक संख्या वाले औद्योगिक क्षेत्रों में पीपीपी मॉडल पर वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित किए जा रहे हैं। देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में ऐसे हॉस्टलों का निर्माण शुरू हो चुका है। वहीं संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद, इंदौर, धार सहित विभिन्न स्थानों पर वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।

बाल संरक्षण के क्षेत्र में चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से 51 जिला स्तरीय और एक राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर द्वारा 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता प्रदान की गई है। जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और मैपिंग का कार्य 13 जिलों में जारी है।

9.28 लाख बच्चों की हुई ग्रेजुएशन सेरेमनी

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिससे स्कूलों में उनका सहज प्रवेश सुनिश्चित हुआ। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

इसके अलावा, सक्षम आंगनबाड़ी उन्नयन कार्यक्रम के तहत एक साथ 12,670 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों में उन्नत किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।

लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं का लाभ

समीक्षा में बताया गया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से मई 2026 तक 1.25 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं को 47,775 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15.84 लाख बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई।

मातृ वंदना योजना में देश में अव्वल मध्यप्रदेश

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 15.51 लाख गर्भवती महिलाओं को 798.68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है। इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश पिछले ढाई वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है।

साथ ही प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बीमा योजना का लाभ प्रदान किया गया है। विभिन्न जिलों में पोषण सुधार के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी समीक्षा बैठक में जानकारी प्रस्तुत की गई।

गंजबासौदा के उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों की पिटाई का आरोप, शिक्षक का वीडियो वायरल

छड़ी से मारने और छात्रों को मुर्गा बनाने का आरोप, स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना के भी गंभीर सवाल

विदिशा जिले के गंजबासौदा स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ एनसीसी शिक्षक अनिल दुबे ने छात्रों की छड़ी से पिटाई की और उन्हें सजा के तौर पर मुर्गा भी बनाया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

बताया जा रहा है कि शासन द्वारा स्कूलों में बच्चों की पिटाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद विद्यालय में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। आरोप यह भी हैं कि प्रभारी प्राचार्य महेश चंद शर्मा और शिक्षक अनिल दुबे द्वारा स्कूल के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मामले की जांच कर संबंधित शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर सात दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ आज से

27 मई से 2 जून तक में होगा आयोजन, मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ; इसरो, बीएचयू और आईआईएम बोधगया के विशेषज्ञ होंगे शामिल

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित सात दिवसीय “सदानीरा समागम” का शुभारंभ 27 मई से भोपाल के भारत भवन में होने जा रहा है। यह आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें जल संरक्षण, पंचमहाभूत, भारतीय ज्ञान परंपरा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ मंथन करेंगे।

समागम का उद्घाटन मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और विभिन्न जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

कार्यक्रम में , और सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेकर अपने विचार साझा करेंगे।

समागम के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। लोकगायन, नृत्य-नाटिकाओं और भारतीय नौसेना बैंड की विशेष प्रस्तुति दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

इसके साथ ही जल संरक्षण विषयक प्रदर्शनियां, चित्रांकन कार्यशालाएं और पुस्तकों का लोकार्पण भी आयोजित किया जाएगा। आयोजन के वैचारिक सत्र प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 6 बजे से में आयोजित होंगे।

भुवनेश्वर में अभाविप की केंद्रीय कार्यसमिति बैठक संपन्न, पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित

शैक्षिक विसंगतियों, नक्सलवाद और छात्र हितों के मुद्दों पर अभाविप का मंथन; देशभर से आए प्रतिनिधियों ने संगठनात्मक विस्तार और राष्ट्रीय विषयों पर की चर्चा

महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरा भुवनेश्वर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एक-दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति बैठक ‘शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान’ विश्वविद्यालय में संपन्न हुई। बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, युवाओं की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक एवं आर्थिक विषयों सहित समसामयिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की।

बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए जनमानस के अभिनंदन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी और राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

बैठक में ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम अभियान’, ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’, ‘छात्रावास सर्वेक्षण अभियान’, ‘प्रा. यशवंतराव केलकर जन्मशती वर्ष’, ‘आपातकाल निषेध के 50 वर्ष’ तथा ‘मिशन साहसी’ जैसे विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था भारतीय दर्शन और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे युवाओं के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके। वहीं राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों, पेपर लीक, छात्रवृत्ति और छात्र हितों से जुड़े विषयों पर लगातार रचनात्मक आंदोलन और संघर्ष कर रही है।

बैठक में यह भी कहा गया कि अभाविप देशभर में छात्राओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण, छात्र सम्मेलनों और छात्र हितों के विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से युवाओं के बीच अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

केंद्रीय कार्यसमिति की यह बैठक आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की दिशा तय करने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक गति देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बवाल रोजगार और भर्ती व्यवस्था को लेकर युवाओं में गुस्सा, प्रयागराज में परीक्षा केंद्र पर हंगामा

प्रयागराज के झूंसी में SSC GD परीक्षा केंद्र पर बवाल, गड़बड़ी के आरोप में छात्रों ने की तोड़फोड़

Prayagraj के झूंसी स्थित Sunita Singh Mahila Mahavidyalaya में SSC GD परीक्षा के दौरान छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए केंद्र परिसर में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों और अव्यवस्थित प्रबंधन की वजह से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इस घटना के बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, युवाओं में बढ़ती नाराज़गी और रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सोशल media पर भी मामले को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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