ऐतिहासिक धरोहरों और जल संरचनाओं का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी प्राचीन बावड़ियाँ और जल संरचनाएँ हमारी समृद्ध वास्तुकला और उत्कृष्ट जल प्रबंधन की प्रतीक हैं। इन ऐतिहासिक धरोहरों को संजोकर रखना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को इंदौर के प्राचीन  वीरगढ़ी हनुमान मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन बावड़ी का अवलोकन कर यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की जनता की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को वैज्ञानिक पद्धति से जीर्णोद्धार, बावड़ी के मूल ऐतिहासिक स्वरूप को बिना नुकसान पहुँचाए, वैज्ञानिक पद्धति से इसकी सफाई और जीर्णोद्धार कार्य तत्काल प्रारंभ के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और आम जन की सुरक्षा के लिए बावड़ी के चारों ओर मजबूत सुरक्षा जाली अथवा रैलिंग अनिवार्य रूप से लगाई जाए। बावड़ी के प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए तकनीकी उपाय किए जाएं, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। मंदिर और बावड़ी के आस-पास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया जाए, जिससे यहाँ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समस्त विकास एवं जीर्णोद्धार कार्य एक निश्चित समय-सीमा तय कर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।

नगरीय विकास प्रशासन एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  शंकर लालवानी, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव,  सुमित मिश्रा,  सुदर्शन गुप्ता, पुलिस कमिश्नर  संतोष कुमार और कलेक्टर  शिवम वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।

 

स्कूली बालिकाओं, आप भविष्य में क्या बनना चाहोगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

“स्कूल चले हम” अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में “स्कूल चले हम” अभियान अंतर्गत बड़ा गणपति के ‘शासकीय शारदा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय’ में छात्राओं से चर्चा की। उन्होंने विद्यालय में स्थापित अत्याधुनिक व आकर्षक खगोलीय प्रयोगशाला  का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्राओं से खगोलीय उपकरणों, वेधशाला और मॉडल्स के संबंध में बात की। उन्होंने छात्राओं से पूछा कि वे भविष्य में क्या बनना चाहेंगी। उन्होंने छात्राओं के वैज्ञानिक कौशल की सराहना भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आकर्षक स्पेस-थीम, रॉकेट मॉडल्स और ‘स्पार्क एस्ट्रोनॉमी’ लैब देखकर प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने स्मार्ट कक्षाओं में जाकर बच्चों से भी आत्मीय संवाद किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यालय की स्मार्ट कक्षाओं में बालिकाओं से अनौपचारिक बातचीत की। उन्होंने अत्यंत सहजता से बालिकाओं से जाना कि वे भविष्य में देश व समाज के लिए क्या योगदान देना चाहती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बालिकाओं ने भी पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी-अपनी रुचि के अनुसार अपने भविष्य के लक्ष्यों और सपनों के बारे में बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, अध्ययन व्यवस्था, विद्यालय में उपस्थिति तथा पढ़ाई से जुड़ी विभिन्न बातों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार शासकीय विद्यालयों के आधुनिकीकरण और बेटियों को शिक्षा, विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में हर संभव अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। शासकीय विद्यालयों में इस स्तर की अत्याधुनिक खगोलीय प्रयोगशालाओं का होना नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को सार्थक करता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान और तकनीक क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं के बीच विद्यार्थियों को नवाचार एवं वैज्ञानिक सोच विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बच्चों को जिज्ञासु बनकर सीखने तथा अपने ज्ञान का निरंतर विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने और जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए सतत प्रयासरत रहने को कहा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार द्वारा विद्यालयीन शिक्षा को और अधिक बेहतर, आधुनिक और सुलभ बनाने के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों एवं योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए स्मार्ट क्लॉस, विज्ञान एवं नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार प्रयोगशालाओं सहित आधुनिक सुविधाओं का विस्तार कर रही है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके।

प्रयोगशाला में दिखे अंतरिक्ष विज्ञान के अनूठे आयाम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को छात्राओं ने आत्मविश्वास के साथ प्रयोगशाला में उपलब्ध विभिन्न खगोलीय उपकरणों, दूरबीन और नक्षत्रों व ग्रहों की ट्रैकिंग प्रणाली के बारे में बताया। इस ‘स्पार्क एस्ट्रोनॉमी’ लैब को ब्रह्मांड की थीम पर बेहद आकर्षक रूप से तैयार किया गया है। प्रयोगशाला में चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण, जल चक्र, ज्वालामुखी और पृथ्वी की आंतरिक संरचना को दर्शाने वाले लाइव चार्ट्स और मॉडल्स प्रदर्शित किए गए हैं। साथ ही वहां रखे रॉकेट व सैटेलाइट मॉडल्स, मानव शरीर की संरचना को समझाने वाले वर्किंग मॉडल, गुरुत्वाकर्षण के नियम, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के बारे में बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ध्यान विशेष रूप से सौर मंडल के आकर्षक भित्तिचित्रों ने आकर्षित किया। यहां प्रमुख रूप से प्राची जैन, वंशिका प्रजापत, गौरवी पहारिया, मोहिनी करोलिया, हर्षिता वर्मा आदि बालिकाओं ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने वैज्ञानिक और खगोलिय मॉडल के बारे में बताया।

 इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  शंकर लालवानी, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, विधायक  रमेश मेंदोला, मती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़,  मधु वर्मा तथा  मनोज पटेल के साथ  सावन सोनकर,  सुमित मिश्रा, पुलिस आयुक्त  संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त  क्षितिज सिंघल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सिद्धार्थ जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने सभी की सहभागिता जरूरी : राष्ट्रपति मुर्मु

भोपाल 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मध्यप्रदेश भ्रमण के पहले दिन गुरुवार को बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन में विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी/स्टॉल का अवलोकन कर जनजातीय समुदाय की महिलाओं के द्वारा निर्मित पारंपरिक उत्पादों की प्रशंसा की। राष्ट्रपति मुर्मु ने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बैतूल में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बैतूल जिले की स्व-सहायता समूह की महिलाएं सतपुडांचल प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से रागी, कोदो, कुटकी ज्वार एवं बाजरा जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अन्न से बने कुकीज, पास्ता, नूडल्स, इंस्टेंट इडली डोसा, मिक्स दलिया तथा अन्य स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों का निर्माण कर रही है। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल, केन्द्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग  दुर्गादास उईके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल भी अवलोकन के दौरान उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने वोकल फॉर लोकल, लखपति दीदी एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में विभिन्न स्व-सहायता समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उत्पादों के निर्माण से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है। स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुए महिलाएं भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अपनी महती जिम्मेदारी निभा रही हैं। प्रदर्शनी में सतपुडांचल प्रोड्यूसर कंपनी में 175 स्व-सहायता समूह के 2075 समूह विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का संचालन कर प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विशेष रूप से  अन्न से बने व्यंजनों की पोषण प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में 18 प्रकार के पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए थे। राष्ट्रपति ने गौशालाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का भी अवलोकन किया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने भरेवा शिल्प कला के स्टॉल का भी अवलोकन किया। जनजातीय महिलाओं द्वारा पीतल, तांबा, कांसा आदि से निर्मित विशिष्ट धातु शिल्पों को प्रदर्शित किया गया। इस स्टॉल में राष्ट्रपति मुर्मु ने डोकरा कला के नाम से प्रसिद्ध धातु शिल्प निर्माण में जनजातीय महिलाओं की कुशलता और निपुणता की सराहना की।  बलदेव बाघमारे ने राष्ट्रपति को पीतल से निर्मित जनजातीय महिला की प्रतिमा भेंट की। राष्ट्रपति मुर्मु ने वन आधारित उत्पादों के स्टॉल का भी अवलोकन किया। स्टॉल में मुख्य रूप से नांदा फॉरेस्ट हनी, बैतूल सागौन और कुकरु कॉफी से आजीविका उद्यमिता एवं ‘वोकल फॉर लोकल’ अंतर्गत निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था।

 

राष्ट्रपति मुर्मु का बैतूल प्रथम आगमन पर परम्परागत लोक नृत्य की प्रस्तुति से किया स्वागत

भोपाल

राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का गुरुवार को बैतूल प्रथम आगमन पर गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने परंपरागत लोक नृत्य की प्रस्तुति कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन में शामिल हुईं। राष्ट्रपति  मुर्मु के साथ ब्रह्मकुमारी संस्था के सदस्यों ने सामूहिक फोटो क्लिक करवाया।

राष्ट्रपति  मुर्मु के आगमन पर घोड़ाडोंगरी विधायक  गंगा उईके, भैंसदेही विधायक श्री महेंद्र सिंह चौहान, मुलताई विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख, आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया।

राष्ट्रपति ने रुद्राक्ष का पौधा रोपा

राष्ट्रपति  मुर्मु ने बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में पवित्र एवं औषधीय गुणों से भरपूर रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग श्री दुर्गादास उइके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

 

PM मोदी के ‘कार पूल’ संदेश की हाईकोर्ट में गूंज, पार्किंग संकट पर वकीलों से साथ आने की अपील

 जबलपुर
कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने गुरुवार को हाई कोर्ट के सामने प्रस्तावित 117 करोड़ रुपये के अधिवक्ता चैंबर और मल्टीलेवल पार्किंग प्रोजेक्ट को लेकर दायर याचिका का महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सहित पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने केवल अधिवक्ता चैंबर निर्माण प्रक्रिया लंबित होने पर असंतोष जताया।

इसके साथ ही हाई कर्ट परिसर के आसपास बढ़ते यातायात और पार्किंग संकट पर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी कर दी। दिलचस्प यह है कि अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए गए कार पूलिंग और यातायात अनुशासन के संदेशों की प्रतिध्वनि भी सुनाई दी।

युगलपीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष धन्य कुमार जैन की याचिका का निराकरण करते हुए स्पष्ट किया कि अब जबकि टेंडर प्रक्रिया जारी हो चुकी है, याचिका को लंबित रखने का औचित्य नहीं रह जाता। हालांकि कोर्ट ने यह रास्ता खुला रखा कि यदि भविष्य में राज्य सरकार परियोजना को लेकर अनावश्यक विलंब करती है तो याचिकाकर्ता पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष जताया
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि हाई कोर्ट के गेट नंबर-चार के सामने आधुनिक अधिवक्ता चैंबर और बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसका टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष व्यक्त किया।

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष पार्किंग व्यवस्था को लेकर रहा। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे हाई कोर्ट परिसर के निकट अनावश्यक वाहन खड़े करने के बजाय पिक एंड ड्राप व्यवस्था को बढ़ावा दें। अधिवक्ताओं से भी वाहन साझा (कार पूलिंग) करने की व्यवस्था अपनाने की अपेक्षा जताई गई। वहीं यातायात पुलिस को क्षेत्र की सतत निगरानी कर पार्किंग अनुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं
दरअसल, चार मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एससी शर्मा, न्यायमूर्ति सूर्यकांत व तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की उपस्थिति में परियोजना का भूमिपूजन हुआ था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से बार एसोसिएशन ने चिंता जताई थी।

न्यायालय के आदेश ने यह संदेश भी दिया है कि केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं है। यातायात अनुशासन, कार पूलिंग और पिक एंड ड्राप संस्कृति अपनाए बिना न्यायालय परिसर की भीड़भाड़ कम नहीं होगी। यही कारण है कि एक साधारण दिखने वाली याचिका का पटाक्षेप, न्यायालय परिसर की भावी यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण नजीर बनकर उभरा है।

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति मुर्मु

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु

जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक
सेवा और अध्यात्म के संगम से ही समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बैतूल में “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज के सशक्तिकरण”कार्यक्रम को किया संबोधित

बैतूल
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगी। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

   राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पायी जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मू ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्य योजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवन शैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन बिताना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा—को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है, यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है। आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु द्वारा कलश एवं ध्वज को ब्रह्मकुमारी बहनों को प्रदान कर अध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन का शुभारंभ किया। महासम्मेलन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु और राज्यपाल मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों का राजयोगिनी मंजू दीदी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।

 राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने महासम्मेलन परिसर में बैतूल जिले की सांस्कृतिक झलक और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है तथा इसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां भी बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती भारत की मूल परंपरा रही है और आज देश पुनः उसी दिशा में लौट रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मन, शरीर और आध्यात्मिक चेतना को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान लंबे समय से जनजातीय समाज के साथ मिलकर प्राकृतिक जीवन शैली और प्रकृति संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहा है।

  राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि तेजी से बदलते वर्तमान दौर में जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना आवश्यक है, जिससे वे आधुनिक संसाधनों का लाभ उठा सकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत सुरक्षित बनी रहे।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान पिछले कई दशकों से बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों के प्रसार, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से संस्थान ने हजारों लोगों के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार किया है। जनजातीय समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जब सेवा और अध्यात्म का संगम होता है, तब समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। यह महासम्मेलन उसी संगम का सशक्त उदाहरण है और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष @2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए अधिक प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक चेतना और मानव कल्याण ही समावेशी एवं विकसित भारत की आधारशिला बनेंगे।

आध्यात्मिक जागृति जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम : राज्यपाल पटेल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक मूल्यों के माध्यम से समाज को उन्नत, संस्कारित एवं सम्मानपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन के लिए प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए संस्था के सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि उनका प्रजापिता ब्रह्मकुमारी संस्था से वर्ष 1995 से आत्मीय जुड़ाव रहा है। नवसारी में उनके निवास के सामने स्थित ब्रह्मकुमारी केंद्र से लेकर माउंट आबू, गांधीनगर सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में उन्हें सहभागी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा आध्यात्मिक जागरण के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य सराहनीय एवं अनुकरणीय है।

राज्यपाल पटेल ने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कहा कि प्रतिदिन कुछ समय ध्यान एवं मेडिटेशन के लिए निकालने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है। ऐसे आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव का संचार करते हैं तथा समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण: केंद्रीय मंत्री उइके

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उईके ने कहा कि ओडिशा के एक छोटे से जनजातीय गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संविधान की महानता और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल हैं। केंद्रीय मंत्री उइके ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष, समर्पण, सेवा और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपनी कर्मठता, धैर्य और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर न केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित किया है, अपितु देश की प्रत्येक बेटी, जनजातीय समाज और आम नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के बैतूल आगमन से जिले का प्रत्येक जनजातीय परिवार स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनका नेतृत्व सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति सभी को प्रेरित करता है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के आगमन पर अनहद संगीत महाविद्यालय बैतूल की 7 सदस्यीय कलाकारों द्वारा आकर्षक और मनमोहक स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, ब्रह्मकुमारी संस्थान से राजयोगिनी शैलजा दीदी, राजयोगिनी मंजू दीदी, राजयोगी डॉ बी के नथमल जी उपस्थित हैं।

 

मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून की मार, 13 जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं; एक्सपर्ट बोले- 4 इंच पानी के बाद ही करें बोवनी

भोपाल 

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति धीमी पड़ने से कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। राज्य के कई जिलों में जून के पहले 17 दिनों में बहुत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे सोयाबीन, मूंग, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई रुक गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी के बिना बोवनी करने से फसल खराब हो सकती है।

राज्य में इस महीने अब तक औसत बारिश सामान्य से काफी कम रही है। कुछ जिलों में तो बारिश का आंकड़ा शून्य या आधा इंच से भी नीचे है। इससे बारिश पर निर्भर छोटे और मध्यम किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन इलाकों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वहां किसान इंतजार कर रहे हैं।

प्रभावित जिलों की स्थिति
मौसम विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, अलीराजपुर, टीकमगढ़, दमोह, रीवा, शहडोल, बालाघाट, कटनी, भिंड, दतिया, धार, खरगोन, बड़वानी और मैहर जैसे जिलों में बारिश बेहद कम या न के बराबर रही है। कई अन्य जिलों में भी 1-2 इंच से कम पानी गिरा है, जो बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। भोपाल और आसपास के कुछ इलाकों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई, लेकिन पूरे राज्य का औसत सामान्य से 25-35 प्रतिशत कम रहा।

आज तीन जिलों में हीटवेव का अलर्ट, 28 में बारिश होगी
मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के 3 जिले रतलाम, छिंदवाड़ा-बालाघाट में हीट वेव का अलर्ट है। वहीं, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी-बारिश का दौर रहेगा। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया और शहडोल में गर्मी का असर रहेगा।

मानसून की रफ्तार धीमी, सामान्य तारीख निकल चुकी
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। पिछले वर्षों में 2021 में मानसून सबसे जल्दी 9 जून को पहुंचा था, जबकि 2018 में सबसे देर से 25 जून को प्रवेश हुआ था। वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी। इस वर्ष मानसून की प्रगति धीमी बनी हुई है और इसके लगभग एक सप्ताह देरी से पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि जून महीने की बारिश का आंकड़ा अभी काफी पीछे चल रहा है।

जून में अब तक 35% कम बारिश
1 जून से 16 जून के बीच मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। जहां इस अवधि तक औसतन करीब डेढ़ इंच बारिश होनी चाहिए थी, वहां वास्तविक वर्षा इससे काफी कम रही है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य का आधा पानी भी नहीं बरस पाया है।

इन 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश
अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, इंदौर, झाबुआ, खरगोन, रतलाम, उज्जैन और विदिशा जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। 

बीज खराब होने का खतरा बढ़ा मानसून के समय पर आने की संभावना के चलते प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर दी। उन पर बीज खराब होने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि पानी के अभाव में बीज खराब हो सकता है। ऐसे में किसानों को दोबारा बोवनी करना पड़ेगी। हालांकि, उन किसानों के लिए राहत है, जिनके पर सिंचाई के लिए पानी है।

भोपाल-राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा इससे पहले बुधवार को प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिर गया। बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी बारिश दर्ज की गई।

मौसम में ठंडक घुलने से दिन के तापमान में भी गिरावट आई है। बैतूल में एक ही दिन में 10 डिग्री की गिरावट हुई और पारा 26.5 डिग्री पर आ गया। शिवपुरी-पचमढ़ी में पारा 34 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.9 डिग्री, रायसेन में 26.6 डिग्री, सागर में 37 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.2 डिग्री, श्योपुर-धार में 37.4 डिग्री, मंडला में 37.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 34.8 डिग्री, इंदौर में 37.2 डिग्री, उज्जैन में 39 डिग्री, जबलपुर में 39.3 डिग्री और ग्वालियर में 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों की चेतावनी
कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि बुवाई के लिए मिट्टी में कम से कम 4 इंच (लगभग 100 मिमी) बारिश का होना जरूरी है। इससे जमीन में पर्याप्त नमी बनी रहेगी और बीज अच्छे से अंकुरित होंगे। जल्दबाजी में बोई गई फसल सूखे के कारण नष्ट हो सकती है, जिससे किसानों को दोबारा खर्च उठाना पड़ सकता है।

मानसून की संभावना
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्य प्रदेश में 21 से 24 जून के आसपास पहुंच सकता है। इस बार समग्र मौसम पूर्वानुमान सामान्य से थोड़ा कम बारिश का इशारा कर रहा है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।

 

जनजातीय महासम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन, बोलीं- अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण से बनेगा विकसित भारत

बैतूल 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के बैतूल में आयोजित ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महासम्मेलन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार करती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

राष्ट्रपति बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन का शुभारंभ करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सराहना की।

राष्ट्रगीत के साथ शुरुआत, दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने दीप प्रज्ज्वलित कर महासम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। मंच पर उन्हें मोमेंटो भेंट कर उनका सम्मान किया गया।इस अवसर पर कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसके बाद महासम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई।

राष्ट्रपति बोलीं- जनजातीय समाज ने परंपरा काे संभालकर रखा उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा है। उनके जीवन में संवेदना, सहयोग, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों की गहरी जड़ें हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदाय का प्रकृति के प्रति जुड़ाव और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण का दृष्टिकोण आज के समय में पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

बोलीं- राष्ट्र निर्माण में सबकी भूमिका अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी को याद करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश का हर हिस्सा भारत की आत्मा का अभिन्न अंग है और राष्ट्र निर्माण में सभी समुदायों की समान भागीदारी जरूरी है।

राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देगा। साथ ही उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी से मिलकर काम करने की अपील की।

मंच पर मौजूद रहे राज्यपाल और विशिष्ट अतिथि इस विशाल महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। मंच पर उनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, प्रदेश के राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल और संस्था के ओडिशा प्रभारी डॉ. नथमल मौजूद रहे।

साथ ही, माउंट आबू से आईं लीना बहन और शैलजा बहन सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

नेशनल कराटे चैंपियनशिप में इंदौर का जलवा, नन्हे खिलाड़ियों ने जीते गोल्ड मेडल

इंदौर 

उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित हुई राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिता में इंदौर के होनहार खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 4 से 7 जून 2026 तक संचालित हुई केआईओ (KIO) राष्ट्रीय सब-जूनियर, कैडेट एवं जूनियर कराटे चैंपियनशिप 2026 में इंदौर के युवा कराटेबाजों ने उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय दिया। इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल छह पदक अपने नाम किए, जिसमें एक स्वर्ण पदक और पांच कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार सफलता से खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी वॉरियर मार्शल आर्ट्स अकादमी का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है।
 
पदक विजेताओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन
कराटे अकादमी के मुख्य कोच राहुल जाट ने प्रतियोगिता के परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि चैंपियनशिप में इंदौर की प्रतिभावान खिलाड़ी यशस्वी सोनी ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अपनी श्रेणी में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ ही अकादमी के अन्य होनहार खिलाड़ियों में होमेश गुर्जर, मानवी मिश्रा, श्रुत जैन, पहर शर्मा और स्तुति गौर ने भी कड़े मुकाबलों में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए देश भर से आए प्रतिद्वंदियों को मात दी और कांस्य पदक जीतकर शहर का गौरव बढ़ाया।

राष्ट्रीय मंच पर खिलाड़ियों का सराहनीय प्रयास
पदक विजेताओं के अतिरिक्त इंदौर के अन्य कराटे खिलाड़ियों ने भी इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपनी तकनीकी और जुझारू क्षमता से सभी को प्रभावित किया। कोच राहुल जाट के अनुसार प्रतियोगिता के विभिन्न मुकाबलों में दिया चतुर्वेदी, काव्या गुर्जर, राजविका परमार, अद्विका चौधरी, भाव्या परमार तथा रोनित थापा ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। भले ही ये खिलाड़ी पदक तालिका में स्थान बनाने से चूक गए, लेकिन राष्ट्रीय मंच पर उनके इस जुझारू खेल प्रदर्शन ने खेल अकादमी के सम्मान को और अधिक बढ़ाया है।

खेल प्रेमियों और पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
इंदौर के मार्शल आर्ट्स खिलाड़ियों की इस अभूतपूर्व राष्ट्रीय उपलब्धि पर स्थानीय खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों के अभिभावकों ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। खिलाड़ियों की इस बड़ी सफलता पर इंदौर जिला सेइकोकाई के अध्यक्ष अजय शुक्ला, संगठन के सचिव मयूर यादव तथा अमेय शर्मा ने सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी। पदाधिकारियों ने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर के इन बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर पर शहर का मान बढ़ाया है और उन्होंने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। 

 

आरएसएस, कांग्रेस और यूसीसी पर मंत्री विश्वास सारंग का बड़ा बयान

आरएसएस, कांग्रेस और यूसीसी पर मंत्री विश्वास सारंग का बड़ा बयान

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे के आरएसएस संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खड़गे की हैसियत आरएसएस पर टिप्पणी करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कारण देश की एकता और अखंडता मजबूत बनी हुई है तथा करोड़ों स्वयंसेवक राष्ट्र निर्माण के कार्य में समर्पित भाव से जुटे हुए हैं। सारंग ने कहा कि आरएसएस को सत्ता की राजनीति करने वाली कांग्रेस के नेताओं से किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।

NSUI जिला अध्यक्षों को नोटिस पर कांग्रेस पर हमला

एनएसयूआई के 22 जिला अध्यक्षों को नोटिस दिए जाने के मामले में भी मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार कांग्रेस को अपनी निजी जागीर की तरह चला रहा है। सारंग ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में कांग्रेस ने स्वयं उनका नामांकन निरस्त करवाया, क्योंकि पार्टी को क्रॉस वोटिंग की आशंका थी। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीतिक नाटक कर रही है।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस अनुशासन के मामले में पूरी तरह विफल है। भाई-भतीजावाद और नेताओं की परिक्रमा करने वालों को पद देने की संस्कृति के कारण पार्टी कमजोर हुई है। सारंग ने कहा कि छोटे नेताओं को नोटिस देने से कुछ नहीं होगा, यदि कार्रवाई करनी है तो बड़े नेताओं पर करनी चाहिए।

यूसीसी पर सरकार की तैयारी

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि देश के वर्तमान और सुनहरे भविष्य के लिए यूसीसी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने वाले निर्णय लिए हैं और यूसीसी भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सारंग ने दावा किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार यूसीसी लागू करने की दिशा में पूरी तैयारी कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह देश की एकता को कमजोर करना चाहती है और हर सकारात्मक निर्णय का विरोध करती है। साथ ही उन्होंने कहा कि बिना वजह विवाद और सनसनी फैलाना राहुल गांधी की राजनीतिक शैली बन गई है।

परीक्षा व्यवस्था पर भी दिया बयान

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, ताकि विद्यार्थियों को निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

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