श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने एक दिन में रिकार्ड 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का किया निस्तारण

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने एक दिन में रिकार्ड 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का किया निस्तारण

भोपाल

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगलिया ने फ्लाई ऐश के उपयोग एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना में गत दिवस एक ही दिन में कुल 284 बल्करों के माध्यम से लगभग 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का परिवहन कर अब तक सर्वाधिक फ्लाई ऐश परिवहन करने का रिकार्ड बनाया गया। इनमें 114 बल्कर परियोजना के विद्युत गृह क्रमांक एक से और 170 बल्कर विद्युत गृह क्रमांक दो से लोड कर निस्तारित किए गए।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना द्वारा 30 मार्च 2025 को 236 बल्करों के माध्यम से 9429 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश परिवहन का रिकॉर्ड स्थापित किया गया था। उस दौरान विद्युत गृह क्रमांक 1 से 132 बल्कर व विद्युत गृह क्रमांक 2 से 104 बल्कर लोड किए गए थे। इस नवीन उपलब्धि ने न केवल इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, बल्कि फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं निस्तारण के क्षेत्र में परियोजना की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाया है।

 

नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ आसान, सरल संयोजन पोर्टल से करें ऑनलाइन आवेदन

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिये सरल और सुविधाजनक तरीके से त्वरित नवीन बिजली कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में घर बैठे ही नवीन कनेक्शन उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

गौरतलब है कि कंपनी द्वारा विगत जुलाई 2023 से शुरू किये गये ऑनलाइन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से अब तक भोपाल शहर एवं भोपाल ग्रामीण वृत्त में एक लाख 21 हजार 619 नए कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में 6 लाख 11 हजार से अधिक नए कनेक्शन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक दिये गए हैं। इनमें 10 किलोवॉट तक के अस्थायी कनेक्शन भी शामिल हैं।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल पर आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में तत्काल नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। नये कनेक्शन लेने के लिये उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी के पोर्टल https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home अथवा UPAY ऐप पर जाकर जरूरी दस्तावेज अपलोड कर समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। आवेदक द्वारा विधिवत ऑनलाइन आवेदन और भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत बिजली कंपनी द्वारा सर्वे एवं अन्य औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर उपभोक्ता के परिसर में नया कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा।

 

UCC ड्राफ्ट की कमान जज रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में, जानिए किन बड़े पदों पर दे चुकी हैं सेवाएं

भोपाल 
मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है. राज्य सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने और इसकी व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में UCC का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा. इसके लिए न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनकी अध्यक्षता में बनी कमेटी भोपाल पहुंच चुकी है. 22 जून से कमेटी ने काम शुरू भी कर दिया है. अब सवाल है कि न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को यूसीसी ड्राफ्ट के लिए क्यों चुना गया है. जानते हैं कौन है न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई जिनकी निगरानी में तैयारी हो रही है? वहीं, कांग्रेस यूसीसी को लेकर बीजेपी पर लगातार हमले कर रही है। 

न्यायमूर्ति रंजना की अध्यक्षता में बनी कमेटी प्रदेश की एससी, एसटी और महिला सहित सभी आयोग के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगी. इसके अलावा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, धर्म गुरुओं के साथ चर्चा की जाएगी. छह सदस्यों वाली इस कमेटी में जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रसाद देसाई के साथ रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और समाजसेवी बुधपाल सिंह शामिल हैं. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया को कमिटी का सचिव नियुक्त किया गया है। 

कौन हैं जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई देश की सबसे अनुभवी सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में मानी जाती हैं और कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समितियों का नेतृत्व कर चुकी हैं. उनका जन्म 30 अक्टूबर 1949 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था. उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से बीए और साल 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई से LLB की पढ़ाई पूरी की. उनके पिता एक मशहूर आपराधिक वकील थे। 

30 जुलाई 1973 से उन्होंने वकालत शुरू की. शुरुआत में उन्होंने न्यायमूर्ति प्रताप के सहायक के तौर पर काम किया. 1979 में वह सरकारी वकील बनी और 1 नवंबर 1995 को उन्हें मुंबई हाईकोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया. वह 1996 में बॉम्बे हाई कोर्ट की जज बनीं और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की न्यायाधीश नियुक्त हुईं. 29 अक्टूबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुईं। 

रिटायरमेंट के बाद मिली जिम्मेदारियां
लोकपाल चयन समिति की सदस्य
डिलिमिटेशन कमीशन (सीमांकन आयोग) की अध्यक्ष
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष
उत्तराखंड UCC समिति की अध्यक्ष
गुजरात UCC समिति की अध्यक्ष
8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) की अध्यक्ष

केन-बेतवा परियोजना: किसानों को बड़ी सौगात, जमीन के बदले मिलेगा सरकारी रेट से 4 गुना मुआवजा

 छतरपुर
 देश की पहली नदी जोड़ परियोजना छतरपुर में आकार ले रही है। पहले चरण में करीब 3400 करोड़ का ढोडन बांध बनाया जा रहा है। इस बांध से जिलेभर में नहरें बनाई जाएंगी। जिससे जिले के गांव सिंचाई क्षेत्र से जुड़ सकें। नहरें कहां से डाली जानी हैं और कौन से गांवों से होकर गुजरेंगी इसकी पूरी प्लानिंग की जा चुकी है। जिन किसानों की जमीनें नहरों के दायरे में आएंगी उनको भी सरकार जमीन की कीमत से चार गुना मुआवजा देगी। जिससे किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आए। जिलेभर के 54 गांवों से होकर केन बेतवा की नहरें निकलेंगी। जिसका सर्वे भी किया जा चुका है।

केन बेतवा लिंक परियोजना का ढोड़न बांध बनने से 14 गांव डूब में आए थे। इन गांवों को सरकार ने दूसरी जगहों पर विस्थापित किया है। साथ ही उनके लिए कालोनियों बनाई गई हैं। मुआजवा के तौर पर साढ़े बारह लाख रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया गया है। अब सरकार ने मुआवजा नीति को बदलते हुए ग्रामीण क्षेत्र की जमीनों का मआवजा चार गुना तक कर दिया गया है। बांध के डूब क्षेत्र में करीब पांच हजार परिवार प्रभावित हुए। पहले चरण में बांध बनने के बाद दूसरा चरण नहरों का होगा।

बांध से बरूआसागर तक बनेगी 218 किमी लंबी कैनाल
सरकार का लक्ष्य केन बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड को सिंचाई से जोड़ना है। ढोड़न बांध से यूपी के बरुआसागर तक करीब 218 किमी लंबी केनाल बनाई जाएगी। इस लंबी कैनाल से छोटी टोटी माइनर नहरें निकाली जाएंगी। जिले में सबसे ज्यादा नौगांव के गांव आ रहे हैं जो करीब 21 गांव हैं। जहां से होकर नहरें गुजरेंगी।

सरकार ने अपडेट किया मुआवजे का प्रविधान
जमीन अधिग्रहण के तहत सरकार अधिग्रहण पर कलेक्टर रेट से दोगुना मुआवजा दिया जाता था लेकिन अब सरकार ने नया आदेश जारी कर मुआवजा राशि को चार गुना कर दिया है। अगर किसी किसान की जमीन की कीमत एक लाख होगी तो सरकार किसान को 4 लाख का मुआवजा देगी। भू अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब सिर्फ किसानों को भुगतान होना है। यह भुगतान 54 गांव के चिन्हित किसानों को किया जाएगा।

सरकार ने जमीन अधिग्रहण को लेकर नया आदेश दिया है। इस आदेश के तहत किसानों को उनकी जमीन का सरकारी रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है अब सिर्फ किसानों को पैसा दिया जाना है। बांध से लेकर बरुआसागर तक बड़ी कैनाल बनेगी उससे माइनर नहरें जोड़ी जाएंगी।- उमा गुप्ता, ईई, केन बेतवा लिंक परियोजना

 

प्रदेश में आधार सेवा अधोसंरचना का हुआ विस्तार

भोपाल 

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा मध्यप्रदेश में आधार सेवाओं को नागरिकों तक अधिक सुगमता, पारदर्शिता और दक्षता के साथ पहुंचाने के लिए आधार सेवा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इस पहल से प्रदेश के नागरिकों को आधार नामांकन एवं अद्यतन संबंधी सेवाएं अपने निकट ही उपलब्ध हो सकेंगी। वर्तमान में यूआईडीएआई द्वारा संचालित आधार सेवा केंद्र (एएसके) प्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, विदिशा एवं भिण्ड में संचालित हैं। ग्वालियर और शिवपुरी में मंगलवार से आधार सेवा केंद्रों का संचालन प्रारंभ हो गया है। इस प्रकार प्रदेश के 10 जिलों में आधार सेवा केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं।

आधार केंद्रों पर नागरिकों को आधार नामांकन, डेमोग्राफिक एवं बायोमेट्रिक अपडेट सहित विभिन्न आधार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए इन केन्द्रों पर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। प्रदेश में आधार सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 26 अन्य जिलों में नए आधार सेवा केंद्र स्थापित किए जाने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इन केंद्रों के शुरू होने से नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं अपने निकट ही उपलब्ध होंगी और आधार संबंधी कार्यों में समय और संसाधनों की बचत होगी।

यूआईडीएआई द्वारा संचालित आधार सेवा केंद्रों के अतिरिक्त प्रदेश में लगभग सभी लोक सेवा केंद्र, राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालय जैसे नगर निगम, कलेक्टर कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय, जनपद पंचायत, शिक्षा विभाग के ब्लॉक संसाधन केंद्र, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और चयनित बैंक शाखाओं के माध्यम से भी आधार सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

यूआईडीएआई राज्य कार्यालय, भोपाल के निदेशक  सुमित मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में 2 हजार 800 से अधिक आधार नामांकन केंद्र कार्य कर रहे हैं। नागरिक यूआईडीएआई की वेबसाइट के माध्यम से अपने निकटतम आधार केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आधार में मोबाइल नंबर सहित अन्य विवरण अपडेट रखें। आधार संबंधी किसी भी जानकारी अथवा सहायता के लिए यूआईडीएआई हेल्पलाइन 1947 पर संपर्क किया जा सकता है।

 

10 साल से एयरपोर्ट विस्तार का इंतजार कर रहा इंदौर, 143 एकड़ जमीन की तलाश में अटका प्रोजेक्ट

इंदौर
देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा मिले लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद, शहर को आज भी सीधी वैश्विक कनेक्टिविटी नहीं मिल पा रही है। इस गतिरोध की मुख्य वजह एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक महज 143 एकड़ जमीन का आवंटन रुकना है। सालाना 40 लाख यात्री और 80 फ्लाइट्स का दबाव झेल रहे इस एयरपोर्ट का विस्तार बेहद जरूरी हो गया है।

जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया भूमि अधिग्रहण का यह प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस संबंध में कई बार पत्र भी लिख चुका है, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। यदि यह जमीन मिल जाए, तो इंदौर से सीधे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमान उड़ान भर सकेंगे और यात्रियों को दिल्ली-मुंबई की कनेक्टिंग फ्लाइट्स के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। विलंब के कारण संरक्षित जमीन पर अतिक्रमण और अन्य प्रोजेक्ट के लिए आवंटन का डर है। कुछ जमीन मेट्रो के स्टेशन के लिए दी जा चुकी है। हालांकि, अफसरों का दावा है कि इस पर तेजी से काम चल रहा है।

विस्तार का गणित: दो चरणों में बदलना है नक्शा
एयरपोर्ट प्रबंधन और प्रशासन ने वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए विस्तार के मूल प्लान को दो चरणों में रीडिजाइन किया है:

    पहला चरण (89 एकड़ की जरूरत): रनवे की लंबाई 2700 मीटर से बढ़ाकर 3500 और फिर 4000 मीटर करना है। इससे प्रति घंटे 15 के बजाय 24 फ्लाइट आ-जा सकेंगी।

    दूसरा चरण (54 एकड़ की जरूरत): नया आधुनिक टर्मिनल बनाया जाएगा। विमान पार्किंग की क्षमता 26 से बढ़कर 54 हो जाएगी, जिससे रात में भी बड़े विमान पार्क हो सकेंगे।

विजन 2047: जब 729 एकड़ का परिसर तीन गुना होगा
इंदौर एयरपोर्ट वर्तमान में केवल 729 एकड़ में है। वर्ष 2047 तक की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आसपास के गांवों—सिंहासा और कोड़िया बड़ी की 1100 एकड़ जमीन मिलाकर 1950 एकड़ का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। तब तक यात्री क्षमता 10 से 12 गुना बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, आरक्षित जमीन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बड़े हिस्से पर अतिक्रमण हो चुका है, जिससे फनल और लाइट एरिया भी प्रभावित हुआ है।

चापड़ा योजना निरस्त, अब उज्जैन भी रेस में आगे
जमीन की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को देखते हुए पूर्व में इंदौर से 45 किलोमीटर दूर चापड़ा में एक नया ‘ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट’ बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके चलते इंदौर एयरपोर्ट के मूल विस्तार प्लान को सीमित कर दिया गया था, लेकिन अब चापड़ा का प्रस्ताव पूरी तरह निरस्त हो चुका है। वहीं, उज्जैन में नया प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है।

सबसे बड़ा पेंच… भूमि अधिग्रहण का मुआवजा
मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास के तहत पड़ोसी धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ के मद्देनजर नए एयरपोर्ट की प्लानिंग तेजी से आगे बढ़ी है, जिसके लिए 45 करोड़ की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है। इंदौर के विस्तार प्रस्ताव में सबसे बड़ा पेंच भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की राशि को लेकर फंसा है, जिसकी व्यवस्था राज्य सरकार को करनी है।

देरी का खामियाजा… मेट्रो को दी 20 एकड़ जमीन
पूर्व में जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट प्रबंधन को सुविधा विस्तार के लिए 20 एकड़ जमीन सौंपी थी। लंबे समय तक उपयोग नहीं किया गया और योजनाएं कागजों में ही घूमती रहीं। परिणाम यह हुआ कि अब उस आवंटित जमीन पर मेट्रो ट्रेन का स्टेशन बनाया जा रहा है, जिससे एयरपोर्ट के पास उपलब्ध आंतरिक स्पेस और कम हो गया है।

वंदे भारत यात्रियों को बड़ा तोहफा, मिलेगा फ्री भोजन और पानी; रेलवे ने रखी एक खास शर्त

भोपाल 
 इंडियन रेलवे की सबसे आधुनिक ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं यात्रियों को दी जा रही हैं. ये ट्रेन तूफानी स्पीड और बेहतरीन सुविधाओं के साथ फिक्स टाइमिंग के लिए जान जाती है. अब रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए और खुशखबरी दी है। 

2 घंटे लेट होने पर यात्रियों को ऑफर
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के अनुसार वंदे भारत एक्सप्रेस अगर अपने फिक्स टाइम से लेट आती है या स्टेशन से देरी से रवाना होती है तो यात्रा के दौरान यात्रियों को फ्री में भोजन उपलब्ध कराया जाएगा. रेलवे के इस ऑफर से यात्रियों का भरोसा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर और बढ़ेगा. इस ऑफर का मकसद यात्रियों को सफर के दौरान होने वाली असुविधा से बचाना है. रेलवे के अनुसार अगर वंदे भारत एक्सप्रेस अपने तय समय से 2 घंटे या उससे अधिक की देरी से चल रही है, तो यात्रियों को आईआरसीटीसी की तरफ से मुफ्त में खाना, नाश्ता और पीने का पानी दिया जाएगा। 

सुबह और रात के हिसाब से खाने का मेनू तय
रेलवे ने साफ किया है कि इसके तहत यात्रियों से एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा. बुकिंग के समय भी इस मद का कोई चार्ज नहीं जोड़ा जाएगा. ट्रेन के लेटलतीफ होने पर समय के अनुसार खाने का मेन्यू तय होगा. अगर ट्रेन सुबह 2 घंटे से ज्यादा लेट है तो चाय-कॉफी के साथ हेवी ब्रेफास्ट पैसेंजर्स को सर्व किया जाएगा. यदि ट्रेन दोपहर या रात के भोजन के समय लेट होती है, तो यात्रियों को पूरा शाकाहारी भोजन मिलेगा. यात्रियों को रेल नीर (पीने का पानी) भी अतिरिक्त रूप से मुफ्त दिया जाएगा। 

बुकिंग के समय नो फूड विकल्प चुनने पर भी सुविधा
इस ऑफर में ध्यान रखने योग्य बात ये है कि अगर आपने बुकिंग के दौरान नो फूड का ऑप्शन चुना है तो भी ट्रेन के लेट होने पर फ्री में भोजन व पानी मिलेगा. रेलवे ने साफ किया है कि फ्री मील सर्विस सभी यात्रियों के लिए होगी. टिकट बुक कराते समय आपने फूड का विकल्प चुना हो या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 

मध्य प्रदेश से चलती है 5 वंदे भारत एक्सप्रेस
मध्य प्रदेश को कुल 5 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात मिल चुकी है. ये ट्रेनें राज्य के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और खजुराहो को आपस में और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ती हैं. ये हैं रानी कमलापति (भोपाल)- हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली), भोपाल- इंदौर-नागपुर ट्रेन, भोपाल-जबलपुर-रीवा वंदे भारत ट्रेन, खजुराहो- हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, वाराणसी से खजुराहो के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस। 

भोपाल रेल मंडल के जनसम्पर्क अधिकारी नवल अग्रवाल ने बताया “वंदे भारत एक्सप्रेस के 2 घंटे या उससे अधिक लेट होने पर यात्रियों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए रेलवे द्वारा बिल्कुल मुफ्त भोजन, नाश्ता और रेल नीर की सुविधा दी जाएगी. ट्रेन के देरी से चलने के समय के आधार पर यात्रियों को भारी नाश्ता या पूरा शाकाहारी भोजन निःशुल्क परोसा जाएगा. यह रेलवे की तरफ से मिलने वाली पूरी तरह से काम्प्लीमेंट्री सेवा है। 

मोहन कैबिनेट विस्तार का काउंटडाउन! महिला विधायकों समेत 5 चेहरे रेस में, सिंधिया खेमे की दावेदारी मजबूत

भोपाल 
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अपने मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। दरअसल, हाल ही में सीएम मोहन यादव ने बड़े संकेत दिए हैं जिसके बाद से मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई है। 20 जुलाई से विधानसभा के  मानसून सत्र से पहले ही नई मोहन टीम के गठन की पूरी संभावना है। सूत्रों की मानें तो 4-6 मंत्री सीएम की रडार पर हैं जिन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। वहीं खबर है कि 4-5 विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। जिनमें दो महिला विधायकों का जिक्र है।

वर्तमान में मोहन कैबिनेट में शामिल होने वाले मंत्रियों की संख्या के गणित की बात करें तो मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरा जा सकता है। इसके साथ ही नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है।

सीएम मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षी और उनके रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि इसके लिए उन्होंने खुद विभागों की समीक्षा कर मंत्रियों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट ली है। अटकलें है कि मंत्री विजय शाह, वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, पंचायत विभाग की राज्यमंत्री राधा सिंह, संपतिया उइके और कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना की शिकायतों के बाद उनपर गाज गिरना लगभग तय है।

तीन सीनियर मंत्रियों के बदले जा सकते हैं विभाग
अटकलें है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सरकार के दिग्गज मंत्रियों के विभागों में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है। दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट विस्तार के बाद नई भूमिका में देखें जा सकते हैं।

इन विधायकों को मिल सकती है एंट्री
कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए सांसद से विधायक बनी रीति पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। इनके अलावा सागर से प्रदीप लारिया, पन्ना से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। सिंधिया खेमे से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

MP Transfer Policy: शादी बन रही कर्मचारियों के तबादले में बाधा, मैरिज सर्टिफिकेट के बिना नहीं भर पा रहे ऑनलाइन फॉर्म

भोपाल
मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शिक्षकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है. पोर्टल की तकनीकी खामियों और नई अनिवार्य शर्तों के कारण हजारों शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों के सामने आ रही है. दरअसल इस बार पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वालों के लिए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र को अनिवार्य कर दिया गया है। 

पुराने कर्मचारियों के लिए नई शर्त परेशानी
शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के अनुसार “स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी हैं, जिनका विवाह 15 से 20 वर्ष पूर्व हुआ था. उस समय विवाह पंजीयन की व्यवस्था व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी और न ही विभागीय सेवाओं में इसकी कभी अनिवार्यता रही है. ऐसे में अचानक विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की अनिवार्यता लागू होने से हजारों पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। 

पुराने विवाहित कर्मचारियों के सामने संकट
संगठन के अनुसार ऐसे लोक सेवक, जिनमें पति-पत्नी दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं या उनमें से एक अन्य विभाग में पदस्थ है, वे पति-पत्नी आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन पोर्टल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के बिना आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा। शिक्षकों का कहना है कि उनके पास विवाह से जुड़े अन्य वैध दस्तावेज, सेवा अभिलेख, परिवार समग्र आईडी, नामांकन रिकॉर्ड और शासकीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें आवेदन से वंचित किया जा रहा है।

तकनीकी खामियों से बढ़ी मुश्किल
विवाह पंजीयन के अलावा दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र, पारस्परिक स्थानांतरण, जिला विकल्पों की अनुपलब्धता और विभिन्न पदों के विकल्प नहीं खुलने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इससे बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

शिक्षक संगठन ने मांगा वैकल्पिक प्रावधान
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अ
ध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। जिन कर्मचारियों के पास विवाह पंजीयन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, समग्र आईडी, पति-पत्नी की शासकीय सेवा संबंधी जानकारी अथवा अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार करने का विकल्प दिया जाए। संगठन ने कहा कि यदि विभाग ने जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई तो हजारों शिक्षक केवल दस्तावेजी बाधा के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।

अंतिम तिथि बढ़ाने की भी मांग
शिक्षक संगठन ने शासन से पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने, विवाह पंजीयन संबंधी शर्त में संशोधन करने तथा आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर देना विभाग की जिम्मेदारी है और किसी भी शिक्षक को तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।  

वैकल्पिक दस्तावेजों को मिले मान्यता
संगठन का कहना है कि पति-पत्नी संबंध प्रमाणित करने के लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, नामांकित सदस्य रिकार्ड, आधार कार्ड, समग्र आईडी अथवा अन्य विभागीय दस्तावेज पहले से उपलब्ध हैं. इन दस्तावेजों को मान्य नहीं किए जाने से शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

तिम तिथि नजदीक, बढ़ी चिंता
बता दें की स्थानांतरण के आवेदन की अंतिम तिथि 24 जून निर्धारित है. ऐसे में जिन शिक्षकों के पास विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए निर्धारित समय में पंजीयन करवाकर आवेदन करना लगभग असंभव है. इससे पात्र शिक्षक अपने स्थानांतरण के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। 

संगठन ने शासन से की मांग
शासकीय शिक्षक संगठन ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता में तत्काल संशोधन किया जाए. अन्य वैध दस्तावेजों को स्वीकार करने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए. साथ ही पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, जिससे कोई भी पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित न रहे। 

केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाना प्राथमिकता : बारेलाल अहिरवार

जिला स्तर पर जल्द शुरू होंगे जन शिकायत निवारण शिविर

मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य बारेलाल अहिरवार ने कहा है कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

बारेलाल अहिरवार ने कहा कि उनकी विशेष प्राथमिकता अनुसूचित जाति, पिछड़े एवं अशिक्षित परिवारों को समय पर न्याय और शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना है। उन्होंने बताया कि आयोग लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहा है तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि पात्र हितग्राहियों तक केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचे।

उन्होंने जानकारी दी कि आयोग अब तक प्रदेश के 12 से अधिक जिलों का दौरा कर चुका है। इस दौरान अनुसूचित जाति सहित अन्य वर्गों के लोगों से प्राप्त शिकायतों का मौके पर ही संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए जा रहे हैं।

अहिरवार ने बताया कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को शासन की योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही जिला स्तर पर जन शिकायत निवारण शिविरों का आयोजन शुरू किया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से लोगों की शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसी भी पीड़ित परिवार को न्याय के लिए भटकना न पड़े।

उन्होंने कहा कि भोपाल प्रवास के दौरान भी वे नियमित रूप से आमजन की शिकायतें सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देते हैं। साथ ही, शासन की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे पात्र हितग्राहियों को अधिकतम लाभ मिल सके।

बारेलाल अहिरवार ने बताया कि इसी माह एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें जनजागरूकता अभियान, जन शिकायत निवारण शिविरों की रूपरेखा और अनुसूचित जाति वर्ग के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

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