भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व सेवाएँ होंगी अधिक प्रभावी, भूमि रिकॉर्ड प्राप्त करना होगा आसान

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व सेवाएँ होंगी अधिक प्रभावी, भूमि रिकॉर्ड प्राप्त करना होगा आसान

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम का जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग में प्रथम चरण पूर्ण
भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई से शुरू होगा अगला चरण

भोपाल

प्रदेश के नागरिकों को भूमि संबंधी सरकारी अभिलेखों की सहज, त्वरित और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पुराने भू-अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में चरणबद्ध रूप से डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से राज्य के लगभग 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसके लिए दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली और डीबीईएस सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं।

वर्ष 2008 में शुरू हुए राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को 1 अप्रैल 2016 से डीआईएलआरएमपी के रूप में पुनर्गठित किया गया था। इसके तहत मॉडर्न रिकॉर्ड रूम (एमआरआर) के अंतर्गत पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की रूपरेखा तैयार की गई। योजना के फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3,18,82,222 दस्तावेजों और फेज-2 (2021-22) में लगभग 2,39,24,462 दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। अब फेज-3 के तहत 15 करोड़ रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है।

परियोजना में जिला स्तर पर अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। अंतिम रूप से सत्यापित रिकॉर्ड ‘भूलेख पोर्टल’ पर ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।

योजना के प्रथम चरण में जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी कर ली गई है। इन जिलों में डेटा एंट्री का कार्य निरंतर जारी है। दूसरे चरण में भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही नागरिकों को अपने भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन देखने और प्राप्त करने में आसानी होगी। इससे भूमि अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में भी वृद्धि होगी।

 

Modi Cabinet Expansion: MP से किस सांसद को मिलेगा मंत्री पद? महिला सांसद का नाम सबसे आगे, सियासी हलचल तेज

भोपाल
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है। मध्य प्रदेश से भी कुछ सांसदों के नाम गंभीरता से चर्चा में हैं, जिनमें भिंड सांसद संध्या राय और हाल ही में राज्यसभा पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग प्रमुख माने जा रहे हैं।

जाटव वोट बैंक पर नजर, संध्या राय का नाम सबसे आगे
भिंड से दूसरी बार सांसद बनीं संध्या राय को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जाटव समाज से आने वाली संध्या राय को केंद्रीय जिम्मेदारी देकर भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दलित और जाटव मतदाताओं तक मजबूत संदेश देना चाहती है। भिंड का भौगोलिक और सामाजिक समीकरण उत्तर प्रदेश से जुड़ता है, इसलिए उनका राजनीतिक उपयोग केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं माना जा रहा।

तरुण चुग को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुग का नाम भी केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए मजबूत दावेदारों में शामिल है। संगठन में लंबे अनुभव और पंजाब की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव की रणनीति में भी उन्हें अहम भूमिका सौंपी जा सकती है।

पुराने चेहरों की भूमिका बदलने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव है। लंबे समय से केंद्र में मंत्री रहे कुछ नेताओं को संगठन में नई भूमिका दी जा सकती है, जबकि उनकी जगह नए सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व वाले चेहरों को अवसर मिल सकता है।

वीडी शर्मा और गणेश सिंह भी चर्चा में
खजुराहो सांसद एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर उनकी भूमिका को लेकर मंथन जारी बताया जा रहा है। वहीं सतना से लगातार पांचवीं बार सांसद गणेश सिंह को भी कुर्मी-पटेल समाज के प्रभावशाली प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देती है तो उन्हें भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है।

आदिवासी प्रतिनिधित्व पर भी नजर
यदि आदिवासी नेतृत्व में बदलाव होता है तो शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और खरगोन सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल के नाम भी सामने आ सकते हैं। दोनों नेताओं की संगठन में सक्रियता और अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ को भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

चुनावी रणनीति से जुड़ा हो सकता है विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होगा, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी होगी। ऐसे में मध्य प्रदेश के कई सांसदों की राजनीतिक भूमिका आने वाले दिनों में बदल सकती है।हालांकि, केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित नामों को लेकर अभी तक भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व की सहमति के बाद ही सामने आएगा।

भाजपा विधायक रीति पाठक बनने वाली हैं मंत्री? वायरल खबरों के बीच खुद बता दी पूरी सच्चाई

मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। इसी बीच सीधी से भाजपा विधायक और दो बार की पूर्व सांसद रीति पाठक का बयान सामने आने के बाद इन अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन उन्होंने स्वयं इन खबरों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से उन्हें इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है।

रीति पाठक ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी की एक समर्पित कार्यकर्ता हैं और संगठन जिस भी जिम्मेदारी का निर्णय करेगा, उसका पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पालन करेंगी। उन्होंने कहा कि मंत्री पद को लेकर जो खबरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि पिछले कुछ दिनों से मंत्री बनाए जाने को लेकर भ्रामक और तथ्यहीन खबरें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी मनगढ़ंत अफवाहें फैलाने वालों से उनका कोई संबंध नहीं है और जनता को ऐसी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

गौरतलब है कि रीति पाठक वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सीधी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुई थीं। इससे पहले वह इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए दो बार लोकसभा सदस्य भी रह चुकी हैं। विधानसभा में आने के बाद से समय-समय पर उनके राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चाएं उठती रही हैं, लेकिन अब उनके ताजा बयान ने इन सभी अटकलों को फिलहाल विराम दे दिया है।
हालांकि राज्य सरकार या भाजपा संगठन की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चाएं भले जारी हों, लेकिन फिलहाल मंत्री पद को लेकर सामने आ रही खबरों की पुष्टि नहीं हुई है।

मध्य प्रदेश में ‘VB-G राम जी’ योजना लागू करने की तैयारी पूरी, अब 125 दिन रोजगार की गारंटी

भोपाल
 मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी जीराम जी) योजना एक जुलाई से स्थान लेने जा रही है। मध्य प्रदेश में इसकी तैयारी हो गई है। सभी जिलों को एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा गया है। इसके पहले मनरेगा के अंतर्गत उन कार्यों को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है, जो नई योजना में नहीं है।

ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि इस अवधि तक काम पूरे नहीं हुए तो बचे कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का बोझ राज्य सरकार पर आएगा। इनमें गैर अनुमत कार्य जैसे तालाबों में पानी का कटाव रोकने के लिए पत्थर का बधान बनाना आदि शामिल हैं।

नई योजना में कई अहम बदलाव
नई योजना लागू होने के बाद कई बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा यह कि मनरेगा में 266 तरह के कार्य थे, जबकि नई योजना में 318 तरह के सम्मिलित किए गए हैं। वर्ष में 125 दिन रोजगार की गारंटी रहे है, जबकि मनरेगा में सौ दिन की थी। वर्ष में 60 दिन का ड्राई पीरियड रहेगा, यानी इस अवधि में काम नहीं होंगे।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। हालांकि, खेती की कटाई का समय इसके लिए रखा जा सकता है। कारण, इस समय मजदूर कटाई में व्यस्त रहते हैं।

ग्रामीण मजदूरों को अब 100 की जगह 125 दिन का मिलेगा रोजगार
उन्होंने कहा कि एकाध राज्य सरकारों ने बताया है कि “जी राम जी” कानून को नोटिफाई करने की तैयारी चल रही है, इसके बावजूद योजना 1 जुलाई से लॉन्च हो जाएगी. जी राम जी कानून के लागू होने के बाद 01 जुलाई से ग्रामीण मज़दूरों को 100 दिन की जगह 125 दिन का रोजगार मिलने लगेगा. इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए सरपंचों को ट्रेनिंग दी गयी है, ग्राम पंचायत कैसे ग्रामीण विकास की योजनाएं बनाएंगे उससे जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर ली गयी हैं। 

भारत सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी कानून को लागु करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है. सभी राज्यों को फंड आवंटित कर दिया गया है. राज्य भी तैयार है, केंद्र भी तैयार है.राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। 

जल संग्रहण जरूरी है
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने लगातार यह कोशिश की है और निर्देश दिए हैं कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. जितनी नयी वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं. छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं और जल के संरक्षण के जितने भी प्रकार के काम हैं. उनको इस योजना के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर पानी कम भी गिरे तो हम बारिश के पानी को संग्रहित कर सकें और इसका उपयोग खेती के लिए और पीने के पानी के लिए भी हम सही उपयोग कर सकें। 

अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की कर ली है पहचान
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उन 111 ज़िलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पढ़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है.हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से ज़िले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले ज़िलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी “जी राम जी” कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा. हमारी तैयारी है कि बिना किसी परेशानी के ये ट्रांजीशन मनरेगा से “जी राम जी” कानून में हो जाएगा. हमारी कोशिश है कि कोई भी मजदूर एक दिन तो क्या 1 घंटे भी बिना रोजगार के ना रहे. कोई परेशानी उसको ना आए. E-KYC में अगर कहीं कमी रह गयी है तो सारे रास्ते हमने निकाल लिए हैं.  हमने यह सुनिश्चित कर लिया है। 

बनेंगे नए जॉब कार्ड
मजदूरों के नए जॉब कार्ड बनाए जाएंगे, लेकिन जब तक नहीं बनते पुराने कार्ड के आधार पर ही उन्हें रोजगार दिया जाएगा। पंचायतों को तीन श्रेणी में बांटकर विकास कार्य कराए जाएंगे। पिछड़ी, जिला मुख्यालय से दूर और अधिक एससी-एसटी आबादी वाली पंचायतों को ‘सी’ श्रेणी में रखा जाएगा। यानी, यहां ज्यादा काम कराए जाएंगे। इसके बाद बी श्रेणी की पंचायतों में इससे कम और ए श्रेणी वाली में सबसे कम काम होंगे। वर्गीकरण का आधार अभी तक हुए विकास कार्य होंगे।

 

देर रात बारिश में नाले में फंसे बुजुर्ग की पुलिस ने बचाई जान, जवान ने जान जोखिम में डालकर किया रेस्क्यू

देर रात बारिश में नाले में फंसे बुजुर्ग की पुलिस ने बचाई जान, जवान ने जान जोखिम में डालकर किया रेस्क्यू

भोपाल: लगातार हो रही बारिश के बीच राजधानी भोपाल में पुलिस की मुस्तैदी ने एक बुजुर्ग की जान बचा ली। हनुमानगंज थाना क्षेत्र में देर रात गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों ने नाले से मदद की आवाज सुनी और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

घटना रात करीब 12 बजे की है। आरक्षक मोहित शिवहरे और राजेंद्र रघुवंशी छोला रोड इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पुट्ठा मिल, अग्रवाल तिराहा के पास नाले से “बचाओ-बचाओ” की आवाज सुनाई दी।

मौके पर पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने देखा कि करीब 60 वर्षीय एक अज्ञात बुजुर्ग सिर में चोट लगने के बाद तेज बहाव वाले नाले में गिर गया था। बुजुर्ग दलदल और तेज पानी के बीच फंसा हुआ था और बाहर निकलने में असमर्थ था।

बिना समय गंवाए एक आरक्षक नाले में उतरा और साथी पुलिसकर्मी की मदद से बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर लाने के बाद पुलिसकर्मियों ने तत्काल सीपीआर देकर उसकी सांसें सामान्य करने की कोशिश की, जिससे उसकी जान बच गई।

इस पूरे रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मियों का साहस और त्वरित कार्रवाई साफ दिखाई दे रही है। लगातार बारिश के बीच पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।

पन्ना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल दस्तयाब

पन्ना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल दस्तयाब

10 लाख रुपये की फिरौती की मांग करने वाले आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश जारी

पन्ना

“देशभक्ति, जनसेवा” के मूल मंत्र के अनुरूप मध्यप्रदेश पुलिस ने पन्ना जिले में अपहरण के एक गंभीर प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपहृत युवक को सकुशल दस्तयाब कर मानवीय संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता एवं प्रभावी पुलिसिंग का परिचय दिया है। विषम परिस्थितियों में पूरी रात चलाए गए सर्च ऑपरेशन के परिणामस्वरूप युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

27 जून की रात्रि लगभग 8:00 बजे थाना पवई क्षेत्र से सूचना प्राप्त हुई कि स्थानीय कपड़ा व्यापारी श्री राजेश कुमार डेंगरे के 20 वर्षीय पुत्र अंशुल उर्फ कान्हा का अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण कर लिया गया है तथा उसकी रिहाई के लिए 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग की जा रही है। सूचना मिलते ही थाना पवई पुलिस ने मामले की गंभीरता से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया।

पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। साथ ही तकनीकी विश्लेषण एवं डिजिटल इनपुट के लिए साइबर सेल को तत्काल सक्रिय किया गया।

पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर संभावित स्थानों पर लगातार तलाश की। रात्रि के दौरान लगातार वर्षा, घने जंगल एवं दुर्गम मार्ग जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पुलिस बल ने कई किलोमीटर तक पैदल सर्च अभियान संचालित किया। लगातार प्रयासों एवं सुनियोजित रणनीति के परिणामस्वरूप पुलिस टीम ने हथकुरी के समीप जंगल क्षेत्र से अपहृत युवक अंशुल उर्फ कान्हा को सकुशल दस्तयाब कर लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार दबिशें दी जा रही है।

पुलिस द्वारा प्रकरण के सभी पहलुओं की गंभीरता एवं निष्पक्षता के साथ जांच की जा रही है। मामले में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर ली गई है तथा उनकी शीघ्र गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी गंभीर अपराध की सूचना पर त्वरित, प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सतत कार्यरत है।

 

मध्यप्रदेश में जनजातीय छात्रावास-आश्रम के विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति दरों में बढ़ोतरी

भोपाल 
मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग ने वर्ष 2026-27 में छात्रावास एवं आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति की दरों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों की बेहतर शिक्षा के लिए सतत‍निर्णय ले रही है। इसी क्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि अनुसूचित जनजाति के छात्रावास/आश्रमों में रहने वाले छात्र/छात्राओं की शिष्यवृत्ति की दरों को प्रत्येक वर्ष माह मार्च के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर निर्धारित कर माह जुलाई में छात्रावास / आश्रम प्रारंभ होने से प्रभावशील होगी।

जारी आदेश के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर वर्ष 2026-27 के लिए शिष्यवृत्ति की नई दरें निर्धारित की गई हैं। अब छात्रावास एवं आश्रमों में रहने वाले बालक विद्यार्थियों को 1,720 रुपये प्रतिमाह तथा बालिका विद्यार्थियों को 1,770 रुपये प्रतिमाह शिष्यवृत्ति प्रदान की जाएगी।

 

MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पेंशन बढ़ोतरी, एरियर और अतिरिक्त इंक्रीमेंट की मांग खारिज

जबलपुर
 हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने वेतन पुनरीक्षण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वेतन पुनरीक्षण के समय कर्मचारियों द्वारा चुना गया विकल्प बाद में बदला नहीं जा सकता।

कोर्ट ने अतिरिक्त वेतनवृद्धि के आधार पर पेंशन और एरियर बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि स्वेच्छा से संशोधित वेतनमान स्वीकार करने वाला कर्मचारी बाद में पुरानी वेतन व्यवस्था का लाभ नहीं मांग सकता।

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका निरस्त
मामले में पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में अतिरिक्त इंक्रीमेंट को आधार बनाकर पेंशन के पुनर्निर्धारण और एरियर भुगतान की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2009 के नियम-नौ में कर्मचारियों को दो स्पष्ट विकल्प दिए गए हैं।

संशोधित वेतनमान स्वीकार करने के बाद पुरानी व्यवस्था का लाभ नहीं
युगलपीठ ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने एक जनवरी, 2006 से संशोधित वेतनमान लागू करने का विकल्प चुना है तो वह बाद में पुरानी वेतन व्यवस्था में अतिरिक्त इंक्रीमेंट जोड़कर पेंशन पुनर्निर्धारण की मांग नहीं कर सकता।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नियम कर्मचारियों को स्वतंत्र रूप से विकल्प चुनने का अधिकार देते हैं, लेकिन विकल्प चुनने के बाद उसके परिणामों से पीछे हटने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

नियम-नौ को कोर्ट ने माना वैध
हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2009 के नियम-नौ को वैध ठहराते हुए कहा कि कर्मचारी एक साथ दो वित्तीय लाभ का दावा नहीं कर सकते। इसी आधार पर कोर्ट ने पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया।

उज्जैन में कांग्रेस नेता पर किसान को रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप, मामला गरमाया

उज्जैन
 उज्जैन जिले के ग्राम डेलचीबुजुर्ग में खेत के पास खाई खोदने का विरोध करने पर एक किसान और उसके परिवार को रिवाल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेता प्रतापसिंह गुर ने किसान को धमकाया था। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है।

महिदपुर रोड पुलिस ने बताया कि डेलचीबुजुर्ग निवासी किसान गोविंद सेन व उसका भाई 18 जून की शाम करीब साढ़े छह बजे ईसनखेड़ी तिराहे के पास स्थित खेत पर रखा सूकला भरने गया था। इसी दौरान कांग्रेस नेता प्रतापसिंह गुर्जर अपने दो साथियों के साथ वहां पहुंचा और जेसीबी मशीन बुलाकर खेत के समीप खाई खुदवाने लगा।

खेत के पास खाई खोदने का विरोध करने पर विवाद
किसान का आरोप है कि उसने और उसके भाई ने खेत के पास खाई खोदने का विरोध किया तो प्रतापसिंह और उसके साथ आए लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां देना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने अपने स्वजनों को मोबाइल फोन से सूचना दी। कुछ देर में उसके पिता दिनेश सेन, चाचा राजाराम सेन, मुन्नालाल सेन तथा अन्य परिजन मौके पर पहुंच गए।

शिकायत के अनुसार स्वजनों ने जब विवाद शांत कराने का प्रयास किया तो प्रतापसिंह गुर ने कमर से रिवाल्वर निकालकर उनकी ओर तान दी और कहा कि जेसीबी यहीं चलेगी, यहां से चले जाओ, नहीं तो जान से खत्म कर दूंगा। घटना के बाद पीड़ित परिवार थाने पहुंचा और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें प्रतापसिंह के हाथ में रिवाल्वर नजर आ रही है। वह किसान को धमकाते हुए भी दिखाई दे रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि खेत का विवाद है। मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर केस दर्ज किए गए हैं।

MP Cabinet Expansion: कैबिनेट विस्तार पर सस्पेंस बरकरार, कई मंत्रियों को अचानक हटाए जाने से अटकलें तेज

भोपाल
 मध्यप्रदेश की राजनीति में से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में से कई मंत्रियों को हटाया गया है। खास बात यह है कि ये मंत्री संघ, संगठन और सिंधिया गुट से आते हैं। इसके चलते राज्य कैबिनेट के विस्तार को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बता दें कि हाल ही में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बहुप्रतिक्षित सूची में 106 सदस्यों को शामिल किया, जबकि 40 नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनने का मौका मिला। वहीं, स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में केवल 70 साल की उम्र पार कर चुके नेताओं को ही जगह मिली।

जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सूची में से चार कैबिनेट मंत्रियों को हटाया गया है। जिसमें कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला, प्रद्युम्न सिंह तोमर, करण सिंह वर्मा, नागर सिंह चौहान का नाम शामिल है। यह मंत्री संघ, संगठन और सिंधिया गुट से आते हैं। अब इन मंत्रियों की बैचेनी बढ़ी हुई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इन मंत्रियों को कार्यसमिति में से इसलिए हटाया गया है क्योंकि ये पार्टी के लिए प्रभावशाली काम करने में असमर्थ रहे। बताया जा रहा है ये मंत्री पार्टी समीकरण में फिट नहीं बैठ रहे थे। अब कार्यसमिति में सीएम सहित 18 मंत्रियों को जगह मिली है। जिसमें कैबिनेट मंत्री सहित राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कृष्णा गौर का नाम शामिल है।

भिंड के मेहगांव से विधायक राकेश शुक्ला को कार्यसमिति में जगह नहीं मिली। वर्तमान में वह नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा का बतौर कैबिनेट मंत्री जिम्मा संभाल रहे हैं। 1998 में पहला चुनाव लड़ा था और जीते भी। लेकिन 2013 में पार्टी द्वारा टिकट काटने से नाराज होकर बगवात कर निर्दलीय लड़े और हार गए। 2018 में भी चुनाव हारे लेकिन 2023 में दोबारा विधायक चुने और मंत्री बने। आलीराजपुर विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार निर्वाचित हुए नागर सिंह को पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया। नागर को भी कार्यसमिति में जगह नहीं दी गई।

कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे प्रद्युम्न सिंह तोमर कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे। लेकिन बाद में बगावत के दौर में सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थामा और शिवराज सरकार में भी मंत्री बने। उसके बाद मोहन सरकार में भी ऊर्जा मंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं। सिंधिया के करीबी नेताओं में माने जाते हैं, लेकिन इस बार कार्य समिति से इन्हें बाहर कर दिया। सिंधिया खेमे के मंत्री तुलसीराम सिलावट को जगह मिली है।

वर्मा सीहोर जिले की इछावर सीट से 8वीं बार विधायक चुने गए। तीसरी बार मंत्री बने हैं और लगातार दूसरी बार राजस्व मंत्री बने हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह के दौरान भी राजस्व मंत्री रहे लेकिन कार्यसमिति में जगह नहीं बना पाए। प्रदेश कार्यसमिति की सूची सामने आने के बाद समूची पार्टी और कार्यकर्ताओं को सिर्फ मंत्री मंडल विस्तार का इंतजार है। लेकिन उससे पहले मौजूदा 4 कैबिनेट मंत्रियों को कार्यसमिति में जगह नहीं मिलने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरम है।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल ने की शिष्टाचार भेंट

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मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचारों, सेफ क्लिक 2.0 एवं नशे से दूरी है जरूरी अभियान पर हुई सार्थक चर्चा

भोपाल

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के मुंबई स्थित कॉन्सुल जनरल (Consul General) नबील ताउआती ने आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर कॉन्सुल जनरल के साथ मुंबई के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार कौस्तुभ परिहार एवं कृषि सलाहकार प्रसाद पारते भी उपस्थित रहे।

भेंट के दौरान पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण, आधुनिक पुलिसिंग, तकनीकी नवाचार एवं नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से संचालित राज्यव्यापी ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस अभियान के माध्यम से नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं विभिन्न संस्थानों तक व्यापक स्तर पर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता पहुंचाई जा रही है।

पुलिस महानिदेशक ने प्रदेश सरकार एवं मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान की भी जानकारी देते हुए बताया कि युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने, समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से नशामुक्त एवं सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस निरंतर कार्यरत है।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच जनसुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा, जागरूकता अभियानों तथा आपसी सहयोग एवं अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जनहित में संचालित नवाचारों एवं व्यापक जन-जागरूकता अभियानों की सराहना करते हुए भविष्य में पारस्परिक सहयोग एवं संवाद को और सुदृढ़ बनाने की इच्छा व्यक्त की।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रकार के सौहार्दपूर्ण संवाद से आपसी समझ एवं सहयोग को नई दिशा मिलेगी तथा जनहित एवं सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।

 

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