राजा रघुवंशी मर्डर केस पर बन रही फिल्म, फर्स्ट लुक देख दहल उठे दर्शक

इंदौर

इंदौर से जुड़े चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस (Raja Raghuvanshi Case) की गूंज अब बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया तक पहुंच गई है। इस हाई प्रोफाइल केस से प्रेरित बताई जा रही फिल्म सुंदर पूनम का फर्स्ट लुक सामने आ चुका है। खास बात ये है कि यह फिल्म देश की बड़ी प्रोडक्शन कंपनी Tips Industries के बैनर तले बनाई जा रही है।

फिल्म का निर्देशन जाने माने डायरेक्टर पुलकित कर रहे हैं, जो पहले भी सच्ची घटनाओं पर आधारित एक गंभीर फिल्म ‘भक्षक’ का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म (Sundar Poonam) के फर्स्ट लुक सामने आने के बाद कहानी की शुरुआती डीटेल्स ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। उनके बीच चर्चा है कि सुंदर पूनम फिल्म इंदौर के रौंगटे खड़े कर देने वाले राजा रघुवंशी केस (Raja Raghuvanshi Case) जैसी सच्ची घटनाओं पर आधारित है।

फिल्म में दिखेगी ये कहानी
अब तक मिल रही जानकारी के मुताबिक फिल्म सुंदर पूनम में बताया गया है कि एक नवविवाहित कपल कश्मीर में हनीमून मनाने गया था, जो रहस्यमयी तरीके से अचानक लापता हो जाता है। इसके बाद दुल्हन पूनम से जुड़ा एक खौफनाक सच सामने आने लगता है, जो हर किसी को चौंकाकर रख देता (Raja Raghuvanshi Case) है। कहानी में उसके जुनूनी प्रेम, धोखा और अतीत के राज और हत्या जैसे कई सस्पेंस भरे मोड़ दिखाई देंगे, जो उसके आसपास के हर व्यक्ति को एक जानलेवा भंवर में खींच लेते हैं।

इंदौर का खौफनाक राजा रघुवंशी केस
सुंदर-पूनम फिल्म का प्लॉट सामने आने के बाद चर्चा है कि यह फिल्म इंदौर के खौफनाक राजा रघुवंशी केस पर आधारित है। वह केस जिसने देशभर में सनसनी मचाकर रख दी थी। पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ मेघालय के शिलॉन्ग में हनीमून ट्रिप पर गए इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की संदिग्ध मौत (Raja Raghuvanshi Case) और उसके बाद सामने आए रिश्तों के उलझे सच ने देशभर के लोगों को झकझोर कर रख दिया था।

सूत्रों का कहना है कि उसी तरह की घटनाओं से प्रेरणा लेकर इस फिल्म की कहानी तैयार की गई है। बता दें कि राजा रघुवंशी की तरह ही एमपी में अब तक ऐसे नये और कई केस भी सामने आ चुके हैं, जो बार-बार राजा रघुवंशी मर्डर केस से मिलते-जुलते रहे और इसी केस की यादें ताजा करते रहे हैं।

क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर मिलता है जबरदस्त रेस्पॉन्स
क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर आधारित कंटेट को ओटीटी पर लगातार जबरदस्त रेस्पॉन्स मिल रहा है। यही वजह है कि सुंदर पूनम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। चूंकि अब इसका फर्स्ट लुक सामने आ चुका है, तो सोशल मीडिया पर लोग इसकी रिलीज डेट और स्टारकास्ट के साथ ही ट्रेलर को लेकर भी सवाल करते नजर आ रहे हैं।

कब रिलीज होगी फिल्म?
हालांकि डायरेक्टर ने अभी सिर्फ इस कहानी की झलक ही शेयर की है। फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) कब रिलीज होगी, ओटीटी पर आएगी या डायरेक्ट थियेटर में इस पर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म आने वाले समय की सबसे चर्चित क्राइम थ्रिलर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकती है।

सुंदर पूनम स्टार कास्ट में सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में
सुंदर पूनम फिल्म के स्टार कास्ट की बात करें तो दमदार अभिनय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। उनके साथ अभिनेता आदित्य रावल और विक्रम मल्होत्रा भी फिल्म में अहम भूमिका निभाते फिल्म में नजर आएंगे।

बता दें कि डायरेक्टर पुलकित को ट्रू या रियल लाइफ स्टोरी बेस्ड और सेंसिटिव आपराधिक मामलों को पर्दे पर बारीकी और गहराई के साथ उतारने के लिए जाना जाता है। ऐसे में क्राइम थ्रिलर जॉनर के शौकीनों के लिए यह फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) बेहद खास होने वाली है।

हनीमून इन शिलॉन्ग भी रही थी चर्चा में
बता दें कि इससे पहले भी एक फिल्म हनीमून इन शिलॉन्ग (Raja Raghuvanshi Case) बनाए जाने की खबरें भी सामने आ चुकी हैं। बताया गया था कि राजा रघुवंशी के परिवार ने इस प्रोजेक्ट को सहमति भी दी थी। बता दें कि तब राजा रघुवंशी के बड़े भाई सचिन का बयान भी सामने आया था, उन्होंने कहा था कि हमने हत्या के इस मामले पर बनने वाली आगामी फिल्म के लिए अपनी सहमति दे दी है। हमारा मानना ​​है कि अगर हम अपने भाई की हत्या की कहानी बड़े पर्दे पर नहीं लाते, तो लोगों को यह पता नहीं चल पाएगा कि कौन सही था और कौन गलत? इसके बाद सामने यह भी आया था कि फिल्म के ज्यादातर हिस्से की शूटिंग इंदौर और मेघालय में की गई थी। हालांकि अब इस बारे में कोई अपडेट नहीं है।

अब लोगों को सुंदर पूनम का इंतजार
अब चर्चा सुंदर पूनम को लेकर है। Amazon Prime Video पर इसका (Sundar Poonam)फर्स्ट लुक जारी किया गया है।लोगों को इस फिल्म की आधिकारिक घोषणा, रिलीज डेट और ट्रेलर का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म बड़े पर्दे पर भी चर्चा का विषय बनेगी।

भोपाल में हर तीसरी प्रेग्नेंसी हाईरिस्क, कम उम्र में गर्भधारण बना बड़ी चिंता

भोपाल
भोपाल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आया है। डॉक्टरों के मुताबिक हाल ये है कि पहले जहां कुल गर्भवतियों में 20 से 25 प्रतिशत मामले हाई रिस्क श्रेणी में आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और समय पर जांच नहीं होने से मां और नवजात दोनों की जान पर खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कम उम्र में गर्भधारण से मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। एनीमिया इसकी सबसे बड़ी वजह है।

विशेषज्ञों के अनुसार कोविड के बाद हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों में तेजी आई है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हर महीने करीब 3 हजार प्रसव हो रहे हैं, जिनमें 900 से 1200 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई जा रही हैं। इनमें गंभीर एनीमिया, हाई बीपी, शुगर, समय से पहले प्रसव और कम उम्र में गर्भधारण जैसे मामले प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही

भोपाल के अस्पतालों में सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम सहित कई जिलों से गंभीर गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अधिकांश मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड सेवन और हाई बीपी-शुगर की मॉनिटरिंग हो तो इसकी आशंका कम हो जाती है।

प्रदेश में एनीमिया सबसे बड़ी वजह
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार मध्यप्रदेश में 52 प्रतिशत से ज्यादा गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीडि़त हैं। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 54 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यही स्थिति हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का सबसे बड़ा कारण बन रही है।

बता दें कि राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में आने वाली लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन सामान्य से कम पाया जा रहा है। कई मामलों में यह स्तर 7 ग्राम से नीचे पहुंच जाता है।

प्रमुख बिंदु
भोपाल में बढ़े हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस
हर तीसरी गर्भवती जटिल श्रेणी में
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
शुगर के कारण बढ़ी मुश्किलें
समय से पहले प्रसव भी अहम वजह
कम उम्र में गर्भधारण मुख्य कारण
एनीमिया सबसे बड़ी वजह

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान

जनजातीय वर्ग के लिए 25 सेवाओं के “लाभार्थी संतृप्ति” शिविर होंगे आयोजित

भोपाल 

जनजातीय वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 से 25 मई तक राष्ट्रव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को सफलतापूर्वक शिविर लगाने एवं लक्षित समूह को लाभ पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त सह संचालक जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जनजातीय समुदाय के हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की सभी जनपद पंचायतों के चयनित ग्रामों में लाभार्थी संतृप्ति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं से लाभान्वित भी किया जाएगा।

अभियान के तहत आयोजित शिविरों में 18 विभागों की कुल 25 सेवाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र हितग्राही अनुसार शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। अभियान को सफल बनाने के लिये जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शिविरों के आयोजन के लिये अपर संचालक श्रीमती रीता सिंह को राज्‍य स्‍तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। जबकि जिला स्‍तर पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मध्‍यप्रदेश में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत कुल 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 ग्राम लाभान्वित होंगे। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत कुल 122 विकासखंडों के 5 हजार 113 ग्राम लाभान्वित होंगे।

MP में सरकारी कर्मचारियों की अटेंडेंस पर सख्ती, सीट छोड़ते ही लगेगी ‘शॉर्ट लीव’

भोपाल 

 मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए नई खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 5.50 लाख सरकारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद यह काम एमपीएसईडीसी को सौंप दिया गया है। साथ-ही साथ सरकारी ऑफिसों में मशीनों की खरीदी और वेंडर चयन का काम भी शुरु हो गया है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं।

एमपीएसईडीसी जो सिस्टम तैयार कर रहा है, उसमें कर्मचारी के मशीन पर पंच करते ही उसका लॉग-इन सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें ऑटोमेशन फीचर को भी ऐड किया जा रहा है। जिसके जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शुरुआत में ये सॉफ्टवेयर मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल और राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों से होगी। इसके बाद इसे कमिश्नर कार्यालय, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तरों में लागू किया जाएगा।

अब लगेगी शॉर्ट लीव और हॉफ डे
नए सॉफ्टवेयर के आने के बाद कर्मचारियों के पंच करते ही सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के लिए पंच लग जाएगा। इसका समय सीधे क्रेंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा। साथ ही यदि कोई कर्मचारी अपनी सीट से जाता है तो ये सॉफ्टवेयर अपने आप शॉर्ट लीव और हॉफ डे दर्ज कर देगा। ये सिस्टम खुद ही बता देगा कि कौन कर्मचारी डेस्क पर है और कौन फ्रील्ड पर है।

बदलेंगे ये 2 पुराने नियम
मोहन सरकार अपने कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। वर्षों पहले ‘दो ही बच्चे अच्छे’ वाली जो बंदिशें लगाई थी, उसे हटाने पर सहमति बन गई है। आदेश कभी भी जारी हो जाएंगे। जिसके बाद उन सैकड़ों कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट जाएगी, जिन्होंने जाने अनजाने में दो से अधिक बच्चे पैदा किए हैं। सरकार का यह फैसला राहत देने वाला होगा।

दूसरी तरफ कुछ शर्तों के साथ अधिकारी, कर्मचारियों के लिए गिफ्ट लेना पहले से आसान हो जाएगा। ये एक वर्ष के भीतर अपनी एक सैलरी के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। ज्यादा कीमती गिफ्ट लेने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे। अधिकारी, कर्मचारियों को निवेश भी सोच समझकर ही करना होगा।

गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाया तो खैर नहीं
निवेश की जाने वाली रकम, कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये सभी प्रावधान नए सिरे से तैयार किए जा रहे सिविल सेवा आचरण नियमों में किया जा रहा है। संशोधित सेवा नियम जारी होने बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार उक्त नियमों में संशोधन कर एक तरफ जहां राहत देने जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाने से रोकने को लेकर भी कई कड़े प्रावधान किए जाने पर विचार चल रहा है।

विद्यार्थियों को रेडक्रॉस के सिद्धांतों से करें संस्कारित: राज्यपाल पटेल

विद्यार्थियों को रेडक्रॉस के सिद्धांतों से करें संस्कारित: राज्यपाल पटेल

जूनियर और युवक रेडक्रॉस शाखा की समीक्षा बैठक में हुए शामिल
राज्यपाल पटेल ने अपने कारकेड को किया आधा

भोपाल 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि रेडक्रॉस के सिद्धांत बच्चों में सेवा, सद्भाव, करूणा और संवेदनशीलता विकसित करते हैं। उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उनका सर्वांगीण विकास कर, उन्हें आदर्श नागरिक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए सक्षम पीढ़ी के निर्माण के लिए शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों में रेडक्रॉस की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सभी शिक्षण संस्थानों को हर विद्यार्थी को रेडक्रॉस से जोड़ने की ज़िम्मेदारी उठाना चाहिए।

राज्यपाल पटेल सोमवार को रेडक्रॉस की मध्यप्रदेश राज्य शाखा इकाई द्वारा आयोजित जूनियर रेडक्रॉस एवं युवक रेडक्रॉस शाखा की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक का आयोजन होटल पलाश रेसीडेंसी में किया गया। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल पटेल ने ईंधन बचत के दृष्टिगत अपने कारकेड के वाहनों की संख्या को आधा कर दिया है।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, बच्चों में ज्ञान और संस्कार को प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। संस्थानों को विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए। उन्हें समसामयिक चुनौतियों और जीवन की प्रतिस्पर्धाओं के लिए जुझारू बनाएं। सफलताओं के दबाव और तनाव प्रबंधन से निपटने का हुनर सिखाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में बच्चों और युवाओं का विशेष योगदान रहेगा। ऐसे में विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना होगा। कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। आदर्श नागरिक बनाकर मानवता के ध्वजवाहक के रूप में तैयार करना होगा।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, प्रदेश और जिला रेडक्रास इकाईयों के साथ सक्रिय समन्वय करें। रेडक्रॉस की वार्षिक गतिविधियों का कैलेंडर अनुसार नियमित आयोजन करें। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में रेडक्रॉस के नवाचारों का अध्ययन कर प्रदेश की परिस्थिति के अनुरूप समावेश करने की बात कही। राज्यपाल पटेल ने जूनियर और युवक रेडक्रॉस के लिए गठित समिति को शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। प्रदेश के सभी जिलों में रेडक्रॉस की गतिविधियों को सक्रियता के साथ संचालित करने के लिए कहा है।

बैठक में जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह ने रेडक्रॉस के माध्यम से ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सेनेटरी नैपकिन को कम दाम पर उपलब्ध कराने के संबंध में विचार के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और निचले स्तर पर कम से कम दामों में सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने से कमजोर वर्ग की महिलाओं को विशेष लाभ मिलेगा। आर्थिक बचत के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य का स्तर भी बेहतर होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में जूनियर और युवक रेडक्रॉस की गतिविधियों के सतत आयोजन की बात कहीं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों में भी रेडक्रॉस, एन.सी.सी. और एन.एस.एस. के माध्यम से मिलने वाले प्रोत्साहनों के संबंध में चर्चा की।स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल स्तर पर जूनियर और युवक रेडक्रॉस के पंजीयन, सदस्यता आदि प्रक्रियाओं के लिए सक्रिय समन्वय की आवश्यकता बताई।

राज्यपाल 4 कारकेड वाहनों के साथ पहुँचे

राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर अपने कारकेड के वाहनों की संख्या आधी कर दी है। राज्यपाल पटेल सोमवार को जूनियर और युवक रेडक्रॉस की बैठक में शामिल होने के लिए केवल 4 वाहनों के साथ कार्यक्रम स्थल पहुँचे। विदित हो कि राज्यपाल के कारकेड में पूर्व में 8 वाहन शामिल रहते थे। 

राज्यपाल पटेल का बैठक के प्रारंभ में रेडक्रॉस की मध्यप्रदेश राज्य शाखा के चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। जनरल सेक्रेटरी रामेंद्र सिंह ने जूनियर और युवक रेडक्रॉस के पंजीकरण, शुल्क निर्धारण, वार्षिक ऑडिट, निर्धारित गतिविधियों के आयोजन आदि प्रस्तावों की जानकारी दी। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अनुपम राजन और राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उच्च और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा शासकीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु उपस्थित थे। 

हवाला लूटकांड की आरोपी SDOP पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 2 साल के बच्चे का दिया गया हवाला

सिवनी 

सिवनी के बहुचर्चित हवाला डकैती कांड में मुख्य आरोपी और निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए राहत प्रदान की। इस फैसले के बाद प्रदेशभर में चर्चित यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, पूजा पांडे ने पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता 22 वर्षीय महिला हैं और एकल माता भी हैं। उनका दो से तीन वर्ष का बच्चा भी जेल में उनके साथ रह रहा है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें नियमित जमानत दे दी।

पुलिस वर्दी और सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल से मचा था हड़कंप
पूरा मामला सिवनी जिले के खैरीटेक क्षेत्र में हुई कथित हवाला रकम की लूट से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार करीब तीन करोड़ रुपये की हवाला राशि को बेहद सुनियोजित तरीके से लूटा गया था। आरोप है कि वारदात को अंजाम देने के लिए पुलिस की वर्दी, सरकारी वाहन और हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। इसी वजह से मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया था और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे।

शुरुआती जांच में यह भी सामने आया था कि इस कथित डकैती की साजिश में पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। मामला उजागर होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। इसके बाद सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर जांच शुरू कराई थी।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े कई अहम खुलासे
एसआईटी जांच के दौरान एजेंसियों ने मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और बैंकिंग ट्रांजैक्शन समेत कई महत्वपूर्ण प्रमाण जुटाए थे। पूछताछ में कई पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई भी शुरू हुई। इसके बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि पूरी वारदात को पेशेवर तरीके से अंजाम देने की तैयारी की गई थी। आरोपियों ने कथित तौर पर हवाला रकम की मूवमेंट की जानकारी जुटाई और फिर पुलिसिया रौब का इस्तेमाल करते हुए रकम पर कब्जा कर लिया।

अधिकांश आरोपियों को पहले ही मिल चुकी है जमानत
इस मामले में गिरफ्तार अधिकांश आरोपियों को पहले ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वहीं, दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर बाद में निरस्त कर दी गई थी। अब मुख्य आरोपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, मामले की जांच और ट्रायल अभी जारी है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की ओर से अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेंगे।

 

MP में 48 घंटे के भीतर भरने होंगे सड़क गड्ढे, सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी सख्त

भोपाल 
 सड़क हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सड़कों पर बने गड्ढों, खुले नालों, मैनहोल और जलभराव वाले इलाकों में बैरिकेडिंग करना अनिवार्य होगा। समिति ने राज्यों से कहा है कि किसी भी खतरनाक जगह की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों में पर्याप्त लाइटिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि रात में सड़क हादसे रोके जा सकें।

खुले मैनहोल और जलभराव पर विशेष सख्ती

समिति ने कहा है कि खुले नाले, मैनहोल और बिना सुरक्षा वाले जलभराव क्षेत्र लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। कई हादसों में लोगों की मौत और गंभीर चोटें सामने आई हैं। इसी वजह से अब स्थानीय प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। अगर किसी राज्य में लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

48 घंटे में कार्रवाई के निर्देश
समिति ने निर्देश दिए हैं कि सड़क पर किसी भी गड्ढे, खुले मैनहोल या खतरनाक जलभराव की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। इसके तहत:

    गड्ढों की तत्काल मरम्मत
    खुले नालों और मैनहोल पर मजबूत बैरिकेडिंग
    रिफ्लेक्टिव टेप लगाना
    रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था

जैसे कदम उठाने होंगे।
बारिश में हादसे रोकने पर फोकस

सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने कहा है कि बारिश के मौसम में अंधेरे और जलभराव वाले इलाकों में दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए रात में प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वाहन चालकों को खतरे का पहले से अंदाजा हो सके।

दो महीने में मांगी रिपोर्ट
समिति ने सभी राज्यों से दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पिछले पांच वर्षों में गड्ढों की वजह से हुए हादसे, खुले जलभराव क्षेत्रों में मौतें और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में घायल लोगों का डेटा भी शामिल करना होगा।

IRC मानकों के अनुसार होगा सड़क निर्माण
निर्देशों में साफ कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। यदि किसी राज्य ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

जिला सड़क सुरक्षा समितियों को भी जिम्मेदारी
समिति ने जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है।

पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश
सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी इससे पहले 2018 में भी सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दे चुकी है। इनमें:

    हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना
    स्पीड मॉनिटरिंग
    सड़क किनारे बैरियर लगाना
    ब्लैक स्पॉट ऑडिट
    स्कूल वाहनों की सुरक्षा

जैसे कदम शामिल थे।

पांच साल के हादसों का डेटा भी मांगा

सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने राज्यों से पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा मांगा है। इसके अलावा खुले जलभराव और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में हुई मौतों और घायलों की जानकारी भी मांगी गई है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं। समिति का कहना है कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश

इससे पहले साल 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी ने सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दिए थे। इनमें हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना, स्पीड मॉनिटरिंग, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का ऑडिट और स्कूल वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था। अब बारिश के मौसम को देखते हुए एक बार फिर राज्यों को सख्ती से सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत केस ने पकड़ा तूल, मां के साथ आखिरी चैट ने बढ़ाए सवाल

भोपाल 

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. कथित तौर पर ससुराल की प्रताड़ना की वजह से मौत के इस मामले में जहां एक तरफ पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, वहीं हर दिन कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं. बीते 12 मई को छत के सरिये से फांसी पर लटकी मिली ट्विशा को लेकर आरोपियों में से एक उसकी सास गिरिबाला सिंह ने कोर्ट में अग्रिम जमानती आवेदन दिया था. आवेदन में उन्होंने दावा किया कि ट्विशा परिवार में एडजस्ट नहीं हो पा रही थी और वह ड्रग्स लेती थी। 

‘ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं’
इस बीच ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई आखिरी व्हाट्सएप चैट आजतक के हाथ लगी. मां के बात करते हुए वह काफी परेशान दिख रही है. इसमें ट्विशा ने अपने ससुराल वालों को लेकर कई गंभीर बातें लिखीं और पति पर चरित्र पर शंका करने जैसे आरोप लगाए। 

व्हाट्सएप चैट के मुताबिक, ट्विशा ने मां को भेजे मैसेज में लिखा था ‘बहुत परेशान हूं… ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं. समर्थ पूछता है कि मेरे पेट में किसका बच्चा है. इतना ही नहीं, ट्विशा ने अपनी मां से उसे वहां से ले जाने की गुहार भी लगाई थी. उसने लिखा, ‘मुझे यहां से आकर ले जाओ, ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे। 

‘मेरा जीवन नरक हो गया है, ले जाओ यहां से’
यही नहीं चैट में ट्विशा ने एक जगह अपनी मां को लिखा है ‘मेरा जीवन नरक हो गया है’. ट्विशा ने लिखा है कि ‘ये लोग बहुत निर्दयी है. समर्थ तो ठीक से मुझसे बात तक नहीं करता। 

इधर ससुराल वालों द्वारा हत्या का आरोप लगा रहा ट्विशा का परिवार उसके दोबारा पोस्टमार्टम के लिए आज आवेदन देगा. ट्विशा के माता पिता का कहना है कि इससे पहले जो बेल्ट ट्विशा के गले में मिली थी, उसके इंस्पेक्शन के बिना ही पोस्टमार्टम कर दिया गया था। 

‘मैं फंस गई हूं, तू मत फंसना’
बता दें कि इससे पहले भी ट्विशा की उसकी दोस्त मीनाक्षी के साथ इंस्टाग्राम चैट सामने आई थी जिसमें वह उससे कह रही थी- मैं फंस गई हूं तू मत फंसना, ज्यादा बात नहीं कर पाउंगी। 

‘बहू ड्रग्स न ले तो हाथ कांपते थे’
मृतका की सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट ने शुक्रवार को ही अग्रिम जमानत दे दी है. अपने जमानती आवेदन में गिरबाला ने दावा किया था कि बहू ड्रग्स लेती थी और ड्रग्स न मिल पाने की स्थिति में उसके हाथ कांपने लगते थे.  उन्होंने बताया कि ट्विशा विवाह के पूर्व फिल्म एक्ट्रेस और मॉडल थी और उन्होंने तेलगू और अन्य भाषाओं की फिल्मों में हीरोइन के रूप में और एड फिल्मों में काम किया था. शादी के समय ट्विशा दिल्ली की प्रायवेट कंपनी में वर्कफार्म होम काम कर रही थी. घर पर रहते हुए हम लोगों को ट्विशा के व्यवहार से संदेह हुआ कि वह ड्रग्स लेती हैं.  बाद में उसका पापा ने ही इस बात की पुष्टी की। 

‘प्रेग्नेंट हुई तो सामान बांधकर निकल गई’
उन्होंने कहा कि ट्विशा शादी के दिन यानी 09 दिसंबर 2025 से  12 मई 2026 के बीच पांच बार सुसराल से मायके और अन्य जगहों पर गयी थी. हाथों में कंपन और कुछ समय तक डग्स न ले पाने के कारण उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन नजर आता था. ट्विशा के पिता ने ही हमें बताया कि वह ड्रग्स लेती है। 

गिरिबाला का कहना है कि 17 अप्रैल 2026 को पहली बार ट्विशा को अपने प्रेग्नेंट होने की जानकारी हुई. उसी दिन ट्विशा अपने पति के साथ हजेला अस्पताल गयी. इसके बाद उसका व्यवहार मेरे और मेरे बेटे के प्रति  काफी अधिक परेशान करने वाला था. अस्पताल से आने के बाद ट्विशा ने अपना सामान बैग में भरा ओर बोली कि वह अपने घर नोएडा जाना चाहती हैं . वह 17 अप्रैल को निकलकर 18 अप्रैल 2026 को हवाई जहाज से दिल्ली पहुंची. लेकिन सीधा घर नहीं गई और घर पहुंचने में इतना समय लगने का कोई कारण भी नहीं बताया. इधर, मामले में फरार ट्विशा के पति समर्थ सिंह की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही हैं। 

ट्विशा शर्मा का गलने लगा शव

भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मृतका का शव पिछले पांच दिनों से भोपाल एम्स (AIIMS) की मर्चुरी में रखा हुआ है, जो अब डीकंपोज (गलने) लगा है. इस बीच, ट्विशा शर्मा के परिजनों ने रविवार को सीएम हाउस के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद उनके पिता नवनिधि शर्मा और भाई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी (OSD) से मुलाकात की. दूसरी ओर, पुलिस शव को सौंपने के लिए परिजनों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है। 

कानूनी सुनवाई किसी अन्य राज्य में की जाए
सीएम हाउस में मुख्यमंत्री के ओएसडी से मुलाकात के दौरान ट्विशा के पिता और भाई को इस मामले में उचित और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन मिला है. OSD से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा, “हमारी मुख्य रूप से दो मांगें हैं. पहली मांग यह है कि बेटी का दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स में कराया जाए, और दूसरी यह कि इस पूरे मामले की कानूनी सुनवाई मध्य प्रदेश के बजाय किसी अन्य राज्य में की जाए.” उन्होंने बताया कि इस विषय पर अभी परिवार में चर्चा होगी और उसके बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा। 

क्या है ट्विशा शर्मा भोपाल मौत का पूरा मामला?
31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और उन्होंने एक मॉडल के रूप में भी काम किया था. शादी से पहले वह दिल्ली में जॉब करती थीं. वैवाहिक वेबसाइट ‘शादी डॉट कॉम’ के जरिए उनका रिश्ता भोपाल की रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बेटे वकील समर्थ सिंह से तय हुआ था. दोनों ने दिसंबर 2025 में शादी की थी. शादी के कुछ समय बाद ट्विशा का गर्भपात हो गया और इसके बाद 12 मई 2026 को उन्होंने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। 

शरीर पर चोटों के निशान, मौत का कारण फांसी
मृतका के परिजनों ने उनकी सास (रिटायर्ड जज) और पति (वकील) पर गंभीर रूप से प्रताड़ित करने और हत्या करने के आरोप लगाए हैं. शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं और मौत का कारण फांसी बताया गया है. इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है. वहीं, आरोपियों ने कोर्ट से अग्रिम जमानत ले रखी है. वर्तमान में कटारा हिल्स थाना प्रभारी (TI) दुबे इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। 

पत्थरों पर मिले 1000 साल पुराने पदचिन्ह, जैन इतिहास से जुड़ने के संकेत

रायसेन.

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के जंगलों में पुरातत्वविदों को एक बेहद प्राचीन और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। रायसेन के जामगढ़ गांव में पथरीले रास्तों के बीच करीब 800 मीटर के दायरे में फैले पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन पदचिन्हों (पैरों के निशान) की खोज की गई है।

इसके साथ ही वहां शुरुआती ‘नागरी लिपि’ में लिखा एक शिलालेख भी मिला है, जोकरीब 10वीं-11वीं शताब्दी (परमार काल) का माना जा रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि पत्थरों पर बने ये कदम किसी महान संत या जैन मुनि के हो सकते हैं, जो एक हजार साल पहले इस क्षेत्र से गुजरे थे। यह महत्वपूर्ण खोज इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के भोपाल चैप्टर की पुरातत्वविद नैन्सी शर्मा और उनके सहयोगी मिलनाथ पेटेले द्वारा किए फील्ड सर्वे के दौरान हुई है।

समय के साथ धुंधले हो गए हैं निशान
सर्वे का नेतृत्व करने वाली नैन्सी शर्मा ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर वे इस दुर्गम पहाड़ी स्थल पर पहुंचीं। समय के साथ कुछ निशान जरूर धुंधले हुए हैं, लेकिन अधिकांश पदचिह्न आज भी सुरक्षित हैं। इन्टेक (INTACH) मध्य प्रदेश के संयोजक एम.एम. उपाध्याय के अनुसार, पहले प्रमुख चरण चिह्न के पास पत्थरों पर दो लाइनों का एक प्राचीन शिलालेख खुदा हुआ है। इसमें ‘सिद्ध’, ‘पद’, ‘पंडित’ और ‘कृत’ जैसे शब्दों का उल्लेख है, जो पवित्र स्मारक परंपराओं से जुड़े हैं।

एएसआई (ASI) के पूर्व एपिग्रैफी निदेशक रवि शंकर ने इस लिपि की पहचान परमार राजवंश के समय की आरंभिक नागरी लिपि के रूप में की है। इतिहास विशेषज्ञों का कहना है कि 10वीं-11वीं शताब्दी के दौरान मध्य प्रदेश में कई जैन मंदिरों और स्मारकों का निर्माण हुआ था, जिसके चलते इस खोज के तार सीधे जैन इतिहास से जुड़ रहे हैं।

बदलने जा रहा MP के रेल नेटवर्क का नक्शा, इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन पर बड़ा अपडेट सामने आया

भोपाल 

इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में मांगलिया रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां एक ओर यात्री सुविधाओं के विस्तार का काम तेज रफ्तार से चल रहा है तो दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी फोकस किया गया। पत्रिका न्यूज टुडे की टीम ने मौके पर काम का जायजा लेकर हकीकत जानी। स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से होते नजर आए तो कई काम अधूरे दिखाई दिए। वर्तमान में यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है जो भविष्य में बड़ी सुविधा बन सकती है।

टीम जब स्टेशन पहुंची तो प्लेटफॉर्म और बीच के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया। नया एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं।

पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई के लिए हब
स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बायप्रोड क्ट्स की सह्रश्वलाई के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक कनेक्टिविटी और लोडिंग सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है।

10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट
इंदौर के इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रॉसिंग और 7 नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा।

इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क
इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रॉसिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता मिला। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर बेस मजबूत किया जा रहा है। रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है, आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है।

ये भी जानें- पहले कैसा था रूट
    अभी इंदौर से भोपाल या जबलपुर जाने के लिए ट्रेनों को उज्जैन और सीहोर के साथ ही संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) होकर जाना पड़ताहै। ऐसे में इस घुमावदार रास्ते की दूरी भी बढ़ जाती है।

    वहीं उज्जैन-भोपाल रूट पहले से ही दिल्ली – मुंबई और अन्य रूट की ट्रेनों के कारण बेहद व्यस्त रहता है, इससे गाड़ियां लेट होती हैं। इससे ट्रेन के संचालन में कम से कम 20-30 मिनट का समय बर्बाद होता था।

अब क्या बदलेगा, कैसे बचेंगे 2 घंटे
    इंदौर-बुधनी प्रोजेक्ट यानी नई रेल लाइन करीब 204 किमी लंबी है। इसके बनने से इंदौर सीधे भोपाल-जबलपुर की मुख्य रेल लाइन से जुड़ेगा।

    इंदौर बुधनी और आगे भोपाल या जबलपुर जाने की दूरी 45 किमी तक कम हो जाएगी। इसके बाद सीधे-सीधे 2 घंटे का सफर कम किया जा सकेगा।

    मांगलिया को महा जंक्शन बनाया जाना है। यानी ये अब छोटा स्टेशन नहीं रहेगा। बल्कि मालवा और महाकौशल को जोड़ने एक विशाल बिजनेस और लॉजिस्टिक हब बन जाएगा। यहां से पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई पूरे देशभर में तेजी से की जा सकेगी।

    10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट बनने से ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्थानीय व्यापार को पंख लग जाएंगे

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