मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली बैठक होगी उज्जैन में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली (27वीं) बैठक वर्ष 2027 में उज्जैन में होगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने 19 मई को बस्तर में परिषद् की 26वीं बैठक में इस आशय की सहमति दे दी है। मध्य क्षेत्रीय परिषद् की बैठक लेने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री  शाह उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को लेकर हो रही व्यापक नागरिक व्यवस्थाओं, मानव प्रबन्धन एवं आपदा प्रबंधन का भी मुआयना करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री  शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद् की 26वीं बैठक बस्तर में करके देश में नक्सलवाद की समाप्ति का जन संदेश दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से बीते सप्ताह राज्य में हुई विशेष गतिविधियों और सरकार को मिली उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए पुलिस अधिकारी सम्मानित, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सल मुक्त करने में अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री  शाह द्वारा पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना, विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव सहित ‘नक्सल उन्मूलन अभियान’ में सक्रिय योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया है।

भोजशाला पर उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत, मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा लाने का प्रयास करेगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार जिले की भोजशाला परिसर को लेकर मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है। प्रदेश में कानून व्यवस्था नियंत्रण हमारी प्राथमिकता है। इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जायेगी। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने करीब 750 साल पुराने और धार्मिक/ईश वंदना से जुड़े इस मसले का सकारात्मक एवं शांतिपूर्ण समाधान किया है। सरकार इस विषय से जुड़े सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मां वाग्देवी की वास्तविक प्रतिमा विदेश से स्वदेश लाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ हर जरूरी प्रयास एवं समन्वय करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महत्वपूर्ण फैसले के मद्देनजर मध्यप्रदेश में शांति, सौहार्द और सद्भावना बनाए रखने के लिए प्रदेशवासियों को सरकार की ओर से बधाई भी दी।

प्रधानमंत्री का सम्मान – देश का सम्मा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  मोदी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें विदेश में मिल रहा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पूरे देश का सम्मान है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि, किसानों को मिली नई सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धान, ज्वार-बाजरा, कपास, तिल, सोयाबीन और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने के लिए केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के किसानों को यह नई सौगात दी है।

इंडो-फ्रांस कॉन्क्लेव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह हुए इंडो-फ्रांस कान्क्लेव (भारत-फ्रांस निवेश सम्मेलन) के सफल आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी सरकार फ्रांस के साथ हर  क्षेत्र में मिलकर काम करेगी। फ्रांस के राजदूत  थियरी माथू, आईएफसीसीआई की महानिदेशक सु पायल एस कंवर और लगभग 150 प्रतिनिधियों से इसमें हिस्सा लिया, जिसमें भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राजनियक, नीति निर्माता, शासकीय अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोमा रोपवेस, एआई वैनसिटी एण्ड मेडिकेप्स यूनीवर्सिटी, डासाल्ट सिस्टमस, सफलेट, सियस्ट्रा, एन्जी सहित विश्व के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सीईओ-सीओओ और बहुराष्ट्रीय कंपनी प्रतिनिधियों की इस कान्क्लेव में सहभागिता मध्यप्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों के प्रति दिनों-दिन बढ़ रहे वैश्विक विश्वास का प्रतीक है।

निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मिला प्रशिक्षण, सरकार ने प्रारंभ किया नवाचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राज्य सरकार के अधीन विभिन्न निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग, प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की हाल ही में नियुक्ति की गई है। शासकीय विभागों के प्रमुख निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग एवं प्राधिकरण के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों के लिए प्रदेश में पहली बार कार्य प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार का एक नवाचारी प्रयास है। इसमें सभी नये पदाधिकारियों को उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन की रीति-नीति, नियम-कायदे और वित्त प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देकर सभी से प्रदेश के विकास के लिए काम करने की अपील की। 

भोपाल के प्रकाश तरण पुष्कर स्विमिंग पूल में गैस लीक, चार बच्चों की हालत बिगड़ी

भोपाल

टीटी नगर लिंक रोड नंबर-1 स्थित प्रकाश तरण पुष्कर में बुधवार शाम स्विमिंग के दौरान क्लोरीन गैस लीक होने से चार बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। घटना शाम करीब पांच बजे की है। उस समय पूल में करीब 20 से 25 बच्चे स्विमिंग कर रहे थे।

तभी अचानक कुछ बच्चों को खांसी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत बच्चों को इलाज के लिए जयप्रकाश अस्पताल लेकर पहुंचे।

डाॅक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों को घर भेज दिया, लेकिन एहतियात के तौर पर 24 घंटे तक निगरानी रखने की सलाह दी है। परिजन सचिन जैन ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी आध्या जैन भी स्विमिंग कर रही थी। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे लगातार खांसी आने लगी।

हालत इतनी खराब हो गई कि वह बेहोशी जैसी स्थिति में पहुंच गई थी। वहां मौजूद महिलाओं ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। डाॅक्टरों ने जरूरी इलाज किया, जिसके बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।

प्रकाश तरण पुष्कर के मैनेजर हेमंत जारिया ने बताया कि पाइपलाइन में समस्या आने से क्लोरीन गैस लीक हुई थी। हवा के कारण गैस तेजी से फैल गई। बच्चों को खांसी और घबराहट की शिकायत होने पर तुरंत अस्पताल भेजा गया। उन्होंने कहा कि गैस लीक का पता चलते ही टंकी बदल दी गई। फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र बना जनजातीय महिला उद्यमिता का प्रतीक

भोपाल 

कन्दा वन धन विकास केन्द्र जनजातीय महिला उद्यमिता का प्रतीक बन गया है। दक्षिण पन्ना में स्किल इस केन्द्र ने म.प्र. में सर्वाधिक राजस्व प्राप्त किया है।

केंद्र द्वारा इस वर्ष लगभग 21.4 लाख रुपये का रिकॉर्ड राजस्व एवं लगभग 5 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया है, जो पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में राजस्व में 400 प्रतिशत से अधिक तथा लाभ में 800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। पूर्व वर्षों में केंद्र का राजस्व एवं लाभ क्रमशः वर्ष 2021-22 में 6.5 लाख रुपये एवं 17 हजार रुपये, वर्ष 2022-23 में 4.7 लाख रुपये एवं 67 हजार रुपये, वर्ष 2023-24 में 2.6 लाख रुपये एवं 63 हजार रुपये और वर्ष 2024-25 में 5.1 लाख रुपये एवं 22 हजार रुपये रहा था। यह वृद्धि स्थानीय संग्राहकों को बेहतर मूल्य, गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण एवं प्रभावी विपणन रणनीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

वन-धन विकास केंद्र कल्दा के माध्यम से स्थानीय जनजातीय संग्राहकों को लघुवनोपज का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी अधिक प्राप्त हो रहा है। इसमें अचार/चिरौंजी चरवा का समर्थन मूल्य 130 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है, जबकि गुणवत्ता के आधार पर संग्राहकों को वन-धन केंद्र के माध्यम से लगभग 160 रुपये से 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक मूल्य प्राप्त हुआ। बाद में इसी उपज का प्रसंस्करण, डीसीडिंग, सफाई एवं आकर्षक पैकेजिंग कर “कल्दा चिरौंजी” ब्रांड के रूप में विपणन किया गया। इस पहल से स्थानीय संग्राहकों की आय में वृद्धि हुई है तथा बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है।

वन-धन विकास केंद्र की गतिविधियों से विशेष रूप से जनजातीय महिला सदस्यों को बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है। कई महिला सदस्य, जिन्हें पूर्व में कोई आय प्राप्त नहीं होती थी, वे वर्तमान में वन-धन केंद्र से जुड़कर लगभग 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, जिससे जनजातीय महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिली है।

वर्ष 2025-26 में केंद्र को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब प्राप्त हुई जब जेके सीमेंटt के साथ सीएसआरसाझेदारी स्थापित हुई, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ियों एवं विद्यालयों के लिये महुआ लड्डुओं की नियमित मासिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इससे वन आधारित उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध हुआ तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसरों में वृद्धि हुई।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र द्वारा चिरौंजी, प्राकृतिक शहद, महुआ लड्डू, आंवला आधारित उत्पाद, त्रिफला चूर्ण, दहीमन, सूखा आंवला, बाल हर्रा एवं बहेड़ा छिलका जैसे विविध लघु वनोपज आधारित उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं पोषणीय मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2025-26 में केंद्र के अधिकांश प्रमुख उत्पादों का एफएसएसएआई मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया, जिसमें उनकी उच्च गुणवत्ता, शुद्धता एवं पोषणीय मूल्य की पुष्टि हुई। परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक शहद में HMF शून्य तथा Fiehe’s Test निगेटिव पाया गया, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि शहद ताजा एवं बिना किसी चीनी मिलावट के है। इसी प्रकार चिरौंजी में उच्च ऊर्जा, प्राकृतिक वसा एवं प्रोटीन पाए गए, जबकि ट्रांस फैट एवं कोलेस्ट्रॉल नहीं पाये गये। महुआ लड्डुओं में संतुलित पोषणीय तत्व पाए गए तथा उनमें किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थ, कृत्रिम रंग अथवा मिलावट का उपयोग नहीं पाया गया।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र की उपलब्धियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना प्राप्त हुई है। भोपाल में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 2025” में केंद्र के उत्पादों को पूरे मध्यप्रदेश में दूसरा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। वहीं नई दिल्ली में आयोजित “भारत ट्राइब्स फेस्ट (आदि महोत्सव) 2026” में कल्दा वन-धन विकास केंद्र का चयन मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि के रूप में किया गया, जहां चिरौंजी, प्राकृतिक शहद एवं महुआ लड्डुओं सहित विभिन्न उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने। आगंतुकों एवं विशेषज्ञों द्वारा उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग एवं प्रभावी ब्रांडिंग की विशेष सराहना की गई। दक्षिण पन्ना वन विभाग द्वारा निकट भविष्य में पन्ना, पवई एवं शाहनगर में रिटेल आउटलेट स्थापित करने की योजना भी प्रस्तावित है, जिससे स्थानीय नागरिकों को शुद्ध एवं पोषक वन उत्पाद सहज रूप से उपलब्ध हो सकेंगे तथा वन आधारित जनजातीय आजीविका को और अधिक मजबूती मिलेगी।

सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रदर्शित किए जाएं मानसिक स्वास्थ्य सहायता हेल्पलाइन नंबर

भोपाल 

अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन की अध्यक्षता में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए गठित Monitoring and Implementation Framework Committee की आज मंत्रालय में बैठक हुई।

अपर मुख्य सचिव  राजन ने प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता से संबंधित टेली मानस-14416, उमंग हेल्पलाइन-14425 तथा इमरजेंसी डायल-112 प्रदर्शित करने, हेल्पलाइन नंबरों का स्कूलों एवं महाविद्यालयों में व्यापक प्रचार-प्रसार तथा विद्यार्थियों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक करने को कहा।

 राजन ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला स्तर पर जिला स्तरीय टास्क फोर्स एवं राज्य स्तर पर स्टेट टास्क फोर्स का गठन किया जा चुका है। अपर मुख्य सचिव  राजन ने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समितियों की बैठक प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित की जाए तथा उसकी जानकारी राज्य स्तर पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलों में आयोजित होने वाली समय-सीमा बैठकों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, जिससे संबंधित व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  राजन ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पैरा-35 में जारी दिशा-निर्देशों का सभी संबंधित विभाग गंभीरता से अध्ययन करें और उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। प्रत्येक संस्थान में काउंसलर की नियुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य रेफरल प्रणाली विकसित की जाए। गार्जियन ट्यूटर योजना/मेंटरशिप प्रणाली को प्रभावी बनाने, भेदभाव, सार्वजनिक अपमान एवं अत्यधिक शैक्षणिक दबाव पर रोक लगाने, हेल्पलाइन एवं आपात मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा शिक्षक एवं कर्मचारियों को नियमित मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देने को कहा।

 राजन ने एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एलजीबीटीक्यू एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील एवं समावेशी वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही रैगिंग, बुलिंग एवं उत्पीड़न की रोकथाम तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने अभिभावकों के लिए जागरूकता एवं मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करने, मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने तथा खेल, कला एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। नियमित करियर काउंसलिंग एवं वैकल्पिक करियर मार्गदर्शन, छात्रावासों को नशा मुक्त एवं सुरक्षित बनाए रखने तथा कोचिंग हब में विशेष मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण  के.जी. तिवारी, जनजातीय कार्य विभाग आयुक्त  तरुण राठी, तकनीकी शिक्षा आयुक्त  अवधेश शर्मा सहित स्कूल शिक्षा विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

राजेश दाहिमा
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अगले पांच साल तक जारी रहेगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

भोपाल 

किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के किसानों को बडा तोहफा देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला लिया है। योजना के प्रभावी क्र‍ियान्वयन के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 11608.47 करोड़ रूपये स्वीकृत किये हैं।

प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति होने पर किसानों को सहायता देने योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के क्रियान्वयन, फसल स्थिति और उपज निर्धारण में तकनीकी के उपयोग में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है।

वर्ष 2023-24 में 35.18 लाख कृषक आवेदनों पर राशि रूपये 961.68 करोड़ का दावा भुगतान किया गया। वर्ष 2024-25 में 35.56 लाख कृषक आवेदनों पर राशि रूपये 275.86 करोड़ का दावा भुगतान किया गया।

प्रदेश में वर्ष 2016 से किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिल रहा है। योजना में भागीदार किसानों को फसल नुकसान या क्षति होने पर वित्तीय सहायता मिलती है। खरीफ मौसम में बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी मौसम में 1.5 प्रतिशत अधिकतम प्रीमियम किसानों द्वारा देय होता है। किसानों द्वारा देय प्रीमियम और बीमांकित प्रीमियम की दर के अंतर को सामान्य प्रीमियम सब्स‍िडी की दर माना जाता है। इसकी भागीदारी केन्द्र और राज्य द्वारा बराबर वहन की जाती है।

केन्द्र सरकार द्वारा सिंचित और असिंचित जिलों की फसलों में केन्द्र सरकार की प्रीमियम सब्स‍िडी की सीलिंग क्रमश: 25 प्रतिशत और 30 प्रतिशत की सीमा तक रखी गई है। यदि इस सीलिंग के अधिक दरें प्राप्त होती हैं तो अतिरिक्त भार राज्य शासन को वहन करना होता है। मध्यप्रदेश में क्षतिपूर्त‍ि स्तर का 80 प्रतिशत निर्धारित है। आगामी वर्षो में भी सभी फसलों के लिये क्षतिपूर्त‍ि का स्तर 80 प्रतिशत रखा गया है।

वैकल्पिक क्रियान्वयन मॉडल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन के लिये राज्य अपनी आवश्यकता अनुसार उपयुक्त मॉडल चुन सकता है।

पहला कप एण्ड सरप्लस शेयरिंग 80-110 मॉडल और दूसरा कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 60-130 मॉडल। कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 80-110 मॉडल के अंतर्गत कुल प्रीमियम के 110 प्रतिशत तक का क्लेम बीमा कम्पनी द्वारा वहन किया जाता है। 110 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्लेम राशि का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। 80 प्रतिशत से कम क्लेम बनने पर क्लेम एवं 80 प्रतिशत के अंतर की सरप्लस राशि बीमा कम्पनी द्वारा राज्य शासन को वापस की जाती है।

कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 60-130 मॉडल के अंतर्गत कुल प्रीमियम के 130 प्रतिशत तक का क्लेम बीमा कम्पनी द्वारा वहन किया जाता है। 130 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्लेम राशि का वहन राज्य शासन एवं केन्द्र सरकार द्वारा बराबर अनुपात में किया जाता है। 60 प्रतिशत से कम क्लेम बनने पर क्लेम एवं 60 प्रतिशत के अंतर की सरप्लस राशि बीमा कम्पनी द्वारा राज्य शासन एवं केन्द्र सरकार को वापस की जाती है। मॉडल पर निर्णय गुण-दोष के आधार पर लिया जायेगा।

किसानों को फायदें

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं के कारण आर्थिक हानि होने पर किसानों को मदद करती है। इस योजना के तहत किसानों के द्वारा भुगतान की जाने वाली बीमा की प्रीमियम राशि को बहुत ही कम रखा गया है। छोटे किसान भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। यह योजना 2 प्रतिशत (खरीफ फसलें), 1.5 प्रतिशत (रबी फसलें) और 5 प्रतिशत (वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलें) की प्रीमियम दर पर किसानों के व्यय को कम करने और किसानों की आय को स्थिर करने के उद्देश्य से फसल विफलता होने पर एक व्यापक बीमा कवर देती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन प्रदेश के जिलों में 11 क्लस्टर्स में किया जा रहा है। प्रत्येक क्लस्टर के लिये बीमा कंपनियों का चयन निविदा के माध्यम से किया गया है।

फसल उपज का आंकलन सेटेलाईट आधारित रिमोट सेसिंग तकनीक से किया जा रहा है। इसके लिये कृषि विभाग द्वारा नेशनल रिमोट सेसिंग केन्द्र (इसरो), मध्यप्रदेश काउसिंल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन से समझौता किया गया है। मौसम सूचना तंत्र एवं डाटा प्रणाली का उपयोग कर योजना का क्र‍ियान्वयन किया जायेगा।

 

ब्रिक्स राष्ट्र नवाचार, उद्यमिता और वैश्विक सहयोग के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं : मंत्री सारंग

भोपाल 

मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने इंदौर में आयोजित ब्रिक्स यूथ इन्ट्रेप्रेन्योरशिप वर्किंग ग्रुप मीटिंग-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि आज ब्रिक्स राष्ट्र विकासशील देशों की आकांक्षाओं, ऊर्जा, नवाचार क्षमता एवं आर्थिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत सरकार की युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री मती रक्षा खडसे, युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव मती पल्लवी जैन गोविल, अतिरिक्त सचिव  नितेश कुमार मिश्रा, ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि, स्टार्टअप लीडर्स, नीति निर्माता, शिक्षाविद् एवं युवा उद्यमी उपस्थित रहे।

प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए  सारंग ने कहा कि भारत सदैव शांति, साझेदारी, मानवीय मूल्यों एवं वैश्विक सहयोग में विश्वास रखने वाला देश रहा है। उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम् – विश्व एक परिवार है” की भारतीय अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत विश्व को सद्भाव, समावेशी विकास एवं सामूहिक कल्याण की दिशा प्रदान करती रही है।

मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत नवाचार, उद्यमिता, युवा सशक्तिकरण, जलवायु उत्तरदायित्व एवं ग्लोबल साऊथ के विकास के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में भारत सहित चार देशों से प्रारंभ हुआ ब्रिक्स समूह आज 11 सदस्य देशों तक विस्तारित हो चुका है, जो विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है तथा वैश्विक जीडीपी में लगभग 35–40 प्रतिशत योगदान देता है। मंत्री  सारंग ने कहा कि ब्रिक्स केवल एक आर्थिक गठबंधन नहीं, बल्कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं सतत विकास के भविष्य को दिशा देने वाला परिवर्तनकारी वैश्विक मंच है।

मंत्री  सारंग ने कहा कि विश्व अब “सूचना युग” में प्रवेश कर चुका है, जहाँ डेटा, तकनीक एवं ज्ञान नवाचार और उद्यमिता की सबसे बड़ी शक्ति बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब मानव मस्तिष्क को जानकारी, तकनीक एवं ज्ञान से सशक्त किया जाता है, तब वही विचार स्टार्टअप, उद्यमिता और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की शक्ति बनते हैं।

मंत्री  सारंग ने 20 मई के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी दिन वर्ष 1498 में पुर्तगाली खोजकर्ता वास्को-डी-गामा समुद्री मार्ग से भारत पहुँचे थे, जिसने वैश्विक व्यापार एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क का नया अध्याय प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि सदियों बाद आज विश्व पुनः भारत में एकत्रित हुआ है, लेकिन इस बार उद्देश्य व्यापार मार्गों की खोज नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता, तकनीक एवं वैश्विक सहयोग के नए मार्ग निर्मित करना है।

मंत्री  सारंग ने 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय मानव संसाधन दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार मधुमक्खियाँ टीमवर्क, समन्वय एवं सतत पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक हैं, उसी प्रकार मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी एवं कुशल मानव संसाधन क्षमता है, जो नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है।

मध्यप्रदेश के विषय में बोलते हुए  सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश नवाचार, निवेश, औद्योगिक विकास एवं स्टार्टअप ग्रोथ का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने राज्य की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, औद्योगिक कॉरिडोर, निवेश-अनुकूल वातावरण एवं आईटी, एग्रीटेक, रिन्यूएबल एनर्जी तथा इनोवेशन क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंदौर, जो भारत का सबसे स्वच्छ शहर एवं मध्य भारत का इनोवेशन हब है, आधुनिक भारत की स्वच्छता, उद्यमिता, संस्कृति एवं आतिथ्य भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्री  सारंग ने प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं प्रसिद्ध व्यंजनों, विशेष रूप से इंदौरी पोहा एवं जलेबी का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।

पवित्र धार्मिक ग्रंथ मद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए  सारंग ने कहा कि भारत की 18वीं ब्रिक्स समिट की अध्यक्षता का विशेष सांकेतिक महत्व है, क्योंकि मद्भगवद्गीता के भी 18 अध्याय हैं, जो मानवता को कर्तव्य, निष्काम कर्म एवं विश्व कल्याण का संदेश देते हैं। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास सदैव मानव-केंद्रित, समावेशी एवं समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के प्रति समर्पित होना चाहिए।

मंत्री  सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि ब्रिक्स यूथ एन्ट्रेप्रेन्योरशिप वर्किंग ग्रुप मीटिंग-2026 ब्रिक्स देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को सुदृढ़ करेगी तथा भारत एवं मध्यप्रदेश को नवाचार, निवेश, उद्यमिता एवं युवा-नेतृत्व वाले विकास के महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्रों के रूप में स्थापित करेगी।

अंत में उन्होंने सभी प्रतिनिधियों का अभिनंदन करते हुए आशा व्यक्त की कि भारत एवं मध्यप्रदेश की उनकी यात्रा नवाचार, संस्कृति, सहयोग एवं मित्रता का अविस्मरणीय अनुभव बनेगी।

 

पुलिस प्रशिक्षण शाला भौंरी में चतुर्थ नव आरक्षक बैच का दीक्षांत परेड समारोह संपन्न

भोपाल 

स्वाभिमान से ऊँचा मस्तक, अनुशासित कदम, अदम्य साहस से भरा सीना और देशभक्ति के जज्बेा के साथ जब आर्कषक दीक्षांत परेड आगे बढ़ी तो सभी रोमांचित हो गए। मौका था पुलिस प्रशिक्षण शाला भौंरी भोपाल में चतुर्थ नव आरक्षकों के भव्य दीक्षांत समारोह का। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल  संजय कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि दीक्षांत परेड की सलामी ली और खुली जिप्सी में सवार होकर परेड का निरीक्षण किया। दीक्षांत परेड समारोह के बाद 521 आरक्षक विधिवत रूप से मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्य धारा में शामिल हो गए। जिनमें 322 महिला नव आरक्षक एवं 199 पुरूष आरक्षक शामिल हैं।

समारोह को संबोधित करते हुए पुलिस आयुक्त  संजय कुमार ने कहा कि “Passing Out Parade अर्थात दीक्षांत परेड पुलिस विभाग में भर्ती प्रत्येक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात एक पुलिसकर्मी पूर्ण रूप से तैयार होकर फील्ड में जाता है, जहां उसे समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होता है।”

उन्होंने कहा कि पुलिस ऐसा विभाग है, जिससे जनसामान्य की अपेक्षाएं अत्यधिक होती हैं। कमजोर एवं पीड़ित व्यक्ति के लिए विषम परिस्थितियों में पुलिस ही उम्मीद की किरण बनती है। आपराधिक न्याय प्रणाली में पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रथम सोपान पुलिस है। किसी दुर्घटना या अनहोनी के समय वर्दीधारी पुलिस जवान घायल एवं पीड़ित व्यक्तियों को साहस और भरोसा प्रदान करता है।

 संजय कुमार ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पुलिस विभाग का प्रतिनिधित्व करती है। एक पुलिसकर्मी के आचरण एवं कार्यशैली से ही विभाग की छवि निर्मित होती है। अतः सभी नव आरक्षकों को ईमानदारी, संवेदनशीलता, अनुशासन एवं जनसेवा की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान नव आरक्षकों को आधुनिक पुलिसिंग की अवधारणा एवं व्यवहारिक दक्षताओं के अनुरूप तैयार किया गया, जिससे वे भविष्य में कुशल एवं जनसेवा के प्रति समर्पित पुलिसकर्मी के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं को शपथ दिलाई।

पुलिस प्रशिक्षण शाला भौंरी में चतुर्थ नव आरक्षक बैच का प्रशिक्षण 30 जून 2025 से प्रारंभ हुआ था, जो दीक्षांत परेड के साथ पूर्ण हुआ। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रशिक्षुओं को पुलिस कार्य प्रणाली, कानून व्यवस्था, साइबर अपराध, सामुदायिक पुलिसिंग एवं व्यवहारिक पुलिस कार्यों से संबंधित थाना प्रबंधन जैसे विषयों का व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त बाह्य प्रशिक्षण के अंतर्गत शारीरिक दक्षता, आर्म्स प्रशिक्षण, यूएसी, योगा तथा हार्टफुलनेस का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे प्रशिक्षुओं में अनुशासन, मानसिक संतुलन एवं सेवा भावना का विकास हो सके।

अंत में मुख्य अतिथि एवं उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवालने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट रहे प्रशिक्षु नवआरक्षकोंको शील्ड व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।

समारोह में इनकी भी रही मौजूदगी

पुलिस महानिरीक्षक मती रूचिवर्धन मिश्र, उप पुलिस महानिरीक्षक (पीएसओटू डीजीपी) डॉ. विनीत कपूर, उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण  मनीष कुमार अग्रवाल, कमाण्डेंट सशस्त्र सीमा बल  देवानन्द, सहायक निदेशक प्रशिक्षण मती रश्मि पाण्डेय, एसपी पीटीएस मती यास्मीन ज़हरा, सहायक निदेशक बाह्य प्रशिक्षण मती ज्योति उमठ एवं संस्थान के स्टाफ सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गरिमामयी दीक्षांत समारोह के साक्षी बने। साथ ही प्रशिक्षु नव आरक्षकों के परिजन भी उत्साहवर्धन के लिए पहुंचे थे।

इन्हें मिले पुरस्कार

मुख्य अतिथि ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षणार्थी का पुरस्कार नव आरक्षक रामनिवास मिश्रा को प्रदान किया। इसके अलावा बाह्य प्रशिक्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का पुरस्कार नव आरक्षक  मनीष राठौर तथा आंतरिक प्रशिक्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का पुरस्कार महिला नव आरक्षक सु माधुरी को प्रदान किया गया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले गूगल क्लाउड इंडिया के पदाधिकारी

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बुधवार को मंत्रालय में गूगल क्लाउड इंडिया के पदाधिकारियों ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पदाधिकारियों के साथ प्रदेश में प्रशासनिक दक्षता संवर्धन, एआई आधारित सुशासन और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में एआई आधारित तकनीकी सहयोग के संबंध में राउंड टेबल मीटिंग की। मीटिंग में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेल्वेन्द्रन, गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर)  आशीष वत्तल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक  मदन ओबरॉय,  पंकज शुक्ला,  लोकेश लोहिया, डॉ. श्रुति गाडगिल,  विजय गुंजाटे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में अपर मुख्य सचिव  मंडलोई ने बताया कि राज्य सरकार और गूगल क्लाउड इंडिया के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोग स्थापित किया जा रहा है। इसमें इंदौर में “सेंटर फॉर एक्सीलेंस” स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए शीघ्र ही एमओयू होगा। यह सेंटर एआई आधारित नवाचार, अनुसंधान, स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी समाधान विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। सेंटर से 10 हजार से अधिक एआई डेवलपर्स को जोड़ा जाएगा, जो मध्यप्रदेश सहित देश और साउथ ग्लोबल की आवश्यकताओं के अनुरूप रियल टाइम तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगे।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के पश्चात हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया ने “समृद्ध मध्यप्रदेश” की अवधारणा के अनुरूप एआई आधारित विकास और सुशासन के लिए एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। बैठक में सिंहस्थ-2028 को स्मार्ट और तकनीक-सक्षम आयोजन के रूप में विकसित करने पर विशेष चर्चा हुई। गूगल द्वारा प्रस्तुत एआई फ्रेमवर्क में रियल टाइम भीड़ प्रबंधन, प्रेडिक्टिव ट्रैफिक एवं सुरक्षा विश्लेषण, एआई आधारित इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम और डिजिटल ट्विन मॉडल जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं शामिल हैं।

बैठक में “सहायक” नामक बहुभाषीय एवं वॉइस-सक्षम एआई एप्लिकेशन की अवधारणा भी प्रस्तुत की गई, जो सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़ की स्थिति, मार्गदर्शन, ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की रियल टाइम जानकारी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराएगा। इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आयोजन प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार होगा।

गूगल क्लाउड इंडिया के पदाधिकारियों ने बताया कि एआई समिट के दौरान मध्यप्रदेश शासन से मिले अभूतपूर्व समर्थन और सहयोग से गूगल क्लाउड द्वारा राज्य की प्राथमिकताओं अनुसार कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, महिला एवं बाल विकास और अन्य विभागों में एआई आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में “ओजस एआई” फ्रेमवर्क के माध्यम से दूरस्थ क्लीनिकल निर्णय सहायता, उच्च जोखिम गर्भावस्था की पूर्व पहचान और रियल टाइम स्वास्थ्य डैशबोर्ड विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।कृषि क्षेत्र में किसानों को स्थानीय सलाह, बाजार मूल्य जानकारी एवं वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के लिए जेमिनी संचालित ओपन एआई नेटवर्क विकसित करने की योजना प्रस्तुत की गई।

शिक्षा क्षेत्र में एआई आधारित वर्चुअल ट्यूटर, व्यक्तिगत शिक्षण प्रणाली और शिक्षक सहायता उपकरण विकसित कर 5 लाख से अधिक विद्यार्थियों और एक लाख शिक्षकों को बहुभाषीय एवं अनुकूलित शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की गई। वहीं पुलिसिंग और जन-सुरक्षा के क्षेत्र में प्रेडिक्टिव लॉ एनफोर्समेंट, बिहेवियरल एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक्स आधारित एआई समाधान प्रस्तुत किए गए, जिससे जाँच और प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।

बैठक में शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए संवादात्मक नागरिक सेवा प्लेटफॉर्म, स्वचालित शिकायत निवारण प्रणाली, इंटेलिजेंट डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग, एकीकृत नागरिक डेटा प्रणाली जैसे एआई सक्षम समाधानों पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त वन्य जीव संरक्षण और मानव-वन्य जीव संघर्ष कम करने के लिए कंप्यूटर विजन एवं रियल टाइम अलर्ट सिस्टम आधारित समाधान प्रस्तुत किए गए।

गूगल ने प्रदेश में “एआई फॉर ऑल” स्किलिंग कार्यक्रम, उन्नत क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर एवं एआई/एमएल आधारित पायलट परियोजनाओं, स्टार्ट-अप इको सिस्टम संवर्धन और साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बैठक में आगामी कार्य योजना, विभागवार प्राथमिकताओं, विस्तृत क्रियान्वयन रणनीति और नियमित समीक्षा तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी। राज्य सरकार और गूगल ने इस साझेदारी को रणनीतिक विचार विमर्श से आगे बढ़ाकर जमीनी स्तर पर लागू करने और राज्यभर में नागरिक केंद्रित परिणाम सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। गूगल के साथ यह साझेदारी प्रदेश में एआई आधारित सुशासन, सेवा वितरण और समावेशी विकास को नई दिशा देगी।

 

ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार इनके हित की चिंता करेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्राम रोजगार सहायक ग्रामीण विकास और ग्राम को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी भूमिका हनुमान की तरह होती है। राज्य सरकार ग्राम रोजगार सहायकों के हित संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में हुए ग्राम रोजगार सहायकों के राज्य स्तरीय महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रोजगार सहायक प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास की मुख्य धुरी है। प्रधानमंत्री  मोदी के डिजिटल भारत के स्वप्न को साकार करने ग्राम रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। ग्राम रोजगार सहायक इस महत्वपूर्ण कार्य के सारथी हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में आगे हैं ग्राम सहायक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। उन्होंने ग्राम स्वराज का सपना देखा था। हमारे प्रधानमंत्री  मोदी ने डीबीटी व्यवस्था को लागू कर इसे लोकप्रिय बनाया है। हितग्राहियों तक योजनाओं की राशि पहुंचाने का कार्य इस पद्धति से हो रहा है। जिसका श्रेय रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों को जाता है। शासन और जनता के लिए कार्य करते हुए यही वर्ग अपनी बुद्धि, पराक्रम, पुरूषार्थ और कुशलता से समाज को आदर्श रूप में दिखाई देता है। अनेक असंभव कार्य भी वे कर दिखाते हैं। इस नाते जमीनी स्तर पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। समाज के निर्धन और जरूरतमंद व्यक्ति जो समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े हैं, उन्हें लाभान्वित करने में अपनी भूमिका निभाते है।

महिला, किसान, युवा और गरीब कल्याण में ग्राम सहायकों की महत्वपूर्ण है भूमिका

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी महिला, किसान, युवा और गरीबों के हित को प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रहे हैं। ग्राम सहायकों की भूमिका भी इन वर्गों के विकास में पुरुषार्थ के रूप में समाज को आदर्श रूप में दिखाई देती है। ग्राम सहायक और पंचायत सचिव युक्ति और बुद्धि का उपयोग कर शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे- वीबी जी-राम-जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन) के क्रियान्वयन और जनता की विभिन्न समस्याओं का समाधान का रास्ता निकालते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर गेहूं उपार्जन कार्य में भी ग्राम सहायकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए घोषणा की कि प्रदेश में जिन किसानों के उपार्जन के लिए स्लॉट 23 मई तक बुक थे। उन किसानों के लिये आवश्यकतानुसार उपार्जन कार्य 28 मई तक बढ़ाने का प्रबंध किया जायेगा।

जल गंगा संवर्धन के अच्छे परिणाम लाने में जुटे हैं ग्राम सहायक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यो में अग्रणी है। प्रदेश को ग्राम सहायकों के परिश्रम से इस कार्य में प्रथम स्थान आने का यश मिला है। कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नदियों को उपयोगी बनाने, आम जनता को पानी बचाने और जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे ग्राम सहायक निष्ठा से कार्य कर रहे हैं।

ग्राम सहायकों की चिंता करेगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम सचिवों के मानदेय बढ़ाने और उन्हें अन्य सुविधायें प्रदान करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार पूरी चिंता करते हुए आवश्यक कदम उठाएगी। पूर्व में भी पारिश्रमिक दोगुना करने का निर्णय लिया जा चुका है। ग्राम सहायकों के हित में जनप्रतिनिधियों के साथ और संगठन के पदाधिकारियों के परामर्श से बैठक में विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिया जायेगा।

दुर्घटना का शिकार हुए रोजगार सहायकों के परिवारों को आर्थिक सहायता की घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस महासम्मेलन के लिए भोपाल आ रहे दो ग्राम सहायक  मीणा और  लखन के दुर्घटना में असामयिक देवलोक गमन का समाचार पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए, दोनों के परिजन को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की राशि प्रदान करने की घोषणा की। इसके साथ ही गंभीर घायल को 1 लाख रुपये और अन्य सामान्य घायलों को समुचित उपचार के लिए 50-50 हजार रुपये की राशि देने की घोषणा की।

सम्मेलन में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष  रमेशचंद्र शर्मा, भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री  कुलदीप गुर्जर के अलावा  रवि भट्ट,  राकेश पंडया और अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लखनऊ में स्व. प्रतीक यादव के परिजन से भेंट कर सांत्वना दी

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को लखनऊ प्रवास के दौरान उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व.  मुलायम सिंह यादव के पुत्र स्व. प्रतीक यादव के निवास स्थान पहुंचकर शोकाकुल परिजन से भेंट की। इस अवसर पर वरिष्ठ नेता डॉ. महेंद्र सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. प्रतीक यादव की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और स्व. प्रतीक की धर्मपत्नी मती अर्पणा यादव और परिवार के अन्य सदस्यों को सांत्वना दी। गत 13 मई को  प्रतीक यादव का निधन हुआ।

 

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