इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर पर हाईकोर्ट की रोक, किसानों को लौटाना होगा मुआवजा

इंदौर/उज्जैन 

 मध्य प्रदेश में स्थित इंदौर और उज्जैन के बीच बनाए जाने वाले ग्रीन फील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस प्रणय वर्मा की कोर्ट ने इसमें जिन किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है, उनकी जमीनों का कब्जा लेने पर रोक लगा दी है। साथ ही, जिन किसानों ने मुआवजा ले भी लिया है और वे अपना मुआवजा वापस करते हैं तो उनकी जमीन अधिग्रहण पर भी स्टे लागू कर दिया जाएगा।

अभिभाषक पूनम महाजन ने बताया, सरकार ने इंदौर से उज्जैन के बीच सिंहस्थ को लेकर 48.1 किलोमीटर का फोरलेन रास्ता बनाने की योजना बनाई है, जिसे ग्रीन फील्ड कॉरिडोर नाम दिया गया है। पितृ-पर्वत से शुरू होकर ये रास्ता सीधे चिंतामण गणेश मंदिर के पास उज्जैन बायपास तक बनना है। इससे इंदौर-उज्जैन के बीच की दूरी केवल 30 मिनट में ही पूरी होने का दावा किया गया है। इसके तहत इंदौर की हातोद तहसील में आने वाले ग्राम सागवाल की 16.496 हेक्टेयर जमीन भी अधिग्रहित की कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन अधिग्रहण के खिलाफ नाराज किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका में आरोप : जारी नोटिफिकेशन में सिर्फ एक्सपर्ट ग्रुप की राय ही दी
इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि किसानों की जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कानूनी रूप से गलत है। जमीन अधिग्रहण के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसमें केवल एक्सपर्ट ग्रुप की राय को ही जारी किया गया है, जबकि नोटिफिकेशन में सामाजिक संग्रहात रिपोर्ट की समरी को नोटिफिकेशन में दिया जाना था। इसके साथ ही अन्य कई कानूनी गड़बडि़यां की गई हैं।

सरकार बोली कोई उल्लंघन नहीं किया, किसानों ने मय फोटे के साक्ष्य दिए
इस याचिका के दायर होने के बाद राज्य के महाधिवक्ता ने 13 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में बयान दिया था कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कानून के सभी प्रावधानों का पालन करेगी। इसका उल्लंघन करते हुए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। बावजूद किसानों की जमीनों को अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकी फोटो सहित जानकारी कोर्ट के समक्ष रखकर मांग की थी कि कोर्ट इस पर स्टे जारी करे अन्यथा किसानों के याचिका दायर करने का कोई अर्थ नहीं रहेगा।

महाधिवक्ता बोले- कुछ किसान मुआवजा ले चुके हैं और अन्य भी तैयार
महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि, याचिका दायर करने वाले किसानों के मामले में जो भी कार्यवाही की जाएगी, वो कानून के मुताबिक ही की जाएगी। साथ ही बताया कि याचिका दायर करने वाले कुछ किसान पहले ही मुआवजा ले चुके हैं और कुछ अन्य भी मुआवजा लेने को तैयार हैं।

जो केस लड़ना चाहते हैं उन्हें मुआवजा राशि वापस करनी होगी- कोर्ट
कोर्ट ने माना, चूंकि कोर्ट में याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और अगर इस बीच जमीनों का कब्जा ले लिया जाता है तो इसकी संभावना ज्यादा है कि, उस स्थिति में याचिकाओं का कोई मतलब नहीं रहेगा। इसके चलते जिन्होंने मुआवजा प्राप्त नहीं किया है, उनकी जमीन की जो स्थिति है उसे वैसे ही रखा जाएगा और जिन्होंने मुआवजा प्राप्त कर लिया है, किंतु जो इस केस को लड़ना चाहते हैं उन्हें मुआवजे की राशि वापस करनी होगी। जिस तारीख से वो पैसा वापस करेंगे, उस तारीख से उनकी जमीन पर स्टे रहेगा। बावजूद कोई यदि मुआवजा लेने का इच्छुक है तो वो ऐसा कर सकता है। उस स्थिति में सरकार तय कानून के हिसाब से आगे की कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगी।

 

ग्वालियर में 15 साल से विराजमान है भोजशाला की ‘मां वाग्देवी’, 35 दिन में तैयार हुई थी हूबहू प्रतिमा

ग्वालियर 

मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर कोर्ट ने इसे मंदिर मानते हुए सालभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भोजशाला के गर्भगृह के लिए तैयार की गई मां वाग्देवी (सरस्वती) की मुख्य अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 सालों से ग्वालियर में ही कड़ी सुरक्षा के बीच रखी हुई है।

साल 2011 की बसंत पंचमी पर इस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होनी थी, लेकिन उस समय उपजे सांप्रदायिक और प्रशासनिक विवाद के बाद इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था। अब कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद ग्वालियर के मूर्तिकार के घर में भी उम्मीद का दीया जल उठा है।

लंदन म्यूजियम वाली ‘ओरिजिनल’ मूर्ति का हूबहू रूप ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे ने मां वाग्देवी की इस प्रतिमा और उसकी बनावट से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं को साझा किया।

    लंदन म्यूजियम जैसी हूबहू बनावट: धार की मूल वाग्देवी प्रतिमा वर्तमान में लंदन के म्यूजियम में रखी हुई है। ग्वालियर में तैयार की गई यह मूर्ति हूबहू उसी डाइमेंशन (आकार) और बनावट में बनाई गई है।

    अष्टधातु से निर्माण: यह प्रतिमा पवित्र अष्टधातु (आठ अलग-अलग धातुओं के मिश्रण) से बनाई गई है, जिसका धार्मिक रूप से बेहद खास महत्व है।

    वजन और ऊंचाई: साढ़े 3 फीट ऊंची और करीब सवा फीट चौड़ी इस भव्य प्रतिमा का कुल वजन 250 किलोग्राम (ढाई क्विंटल) से भी अधिक है।

    लागत और कारीगर: साल 2011 में इस मूर्ति को बनाने में करीब ढाई से तीन लाख रुपए की लागत आई थी। मूर्तिकार प्रभात राय के साथ कुल 26 कलाकारों की टीम ने महज 35 से 40 दिनों की दिन-रात की मेहनत के बाद इसे तैयार किया था।

आरएसएस नेता ने दिया था ऑर्डर
मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज
ने बताया कि साल 2011 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर जी ने उन्हें इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया था। “2011 में जब मूर्ति बनकर तैयार हुई और इसे धार भेजने की तैयारी थी, तभी वहां धार्मिक और प्रशासनिक विवाद भड़क गया।

प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोकने का आदेश दिया। उस समय विवाद इतना बढ़ा कि लगभग दो हफ्तों तक 2 से 5 पुलिसकर्मी हमारे घर पर सुरक्षा में तैनात रहे। इसके बाद भी साल 2011 से 2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस प्रोटेक्शन के साये में ही 2 से 3 दिन के लिए मूर्ति रखी जाती थी।”

अब मौन धारण किया नवल किशोर ने
ग्वालियर आरएसएस पदाधिकारी लोकेंद्र मिश्रा ने बताया कि 2011 के बाद आरएसएस प्रचारक नवल किशोर अब वर्तमान में चेतन दास जी महाराज बन गए हैं और अभी महेश्वर में है। उन्होंने अब मौन धारण कर लिया हैं। ऐसे में मूर्ति का अब आगे क्या होगा इसके बारे में से नवल किशोरी बता सकते थे लेकिन अब मूर्ति का क्या होगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

भावुक हो गए मूर्तिकार
प्रभात राय के बेटे अनुज का कहना है कि कोर्ट का फैसला आने के बाद से वे भी बेहद उत्साहित हैं। हालांकि फिलहाल अभी किसी पक्ष या प्रशासन ने उनसे मूर्ति ले जाने के लिए संपर्क नहीं किया है, क्योंकि सभी कोर्ट के लिखित आदेश और उसकी कानूनी बारीकियों का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अगर भविष्य में भी कोई इस मूर्ति को लेने नहीं आता है, तो मैं इसे बेहद खुशी और गर्व के साथ अपने पास रखूंगा, क्योंकि यह भारत के गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत हिस्सा है।”

मूल प्रतिमा को स्थापति करने की हो रही तैयारी
धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने कहा कि वर्तमान में लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाकर भोजशाला परिसर में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि यह प्रतिमा खंडित अवस्था में है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से उसका विशेष महत्व है।

सुमित चौधरी ने बताया कि आंदोलन के दौरान जिन-जिन मूर्तियों का उपयोग किया गया, उन सभी मूर्तियों की “मुक्ति” कराकर उन्हें सम्मानपूर्वक स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भोजशाला में हिंदू महासभा द्वारा रखी गई मूर्ति को लेकर भी आगे प्रक्रिया की जाएगी।

ग्वालियर की मूर्ति की सिर्फ चर्चा
सुमित चौधरी ने स्पष्ट किया कि ग्वालियर में रखी प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने को लेकर फिलहाल केवल चर्चा चल रही है। अभी इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह केवल योजना स्तर पर विचाराधीन है।

सुमित चौधरी का कहना है कि प्रतिमा स्थापना को लेकर न्यायालय का आदेश पहले ही आ चुका है। कोर्ट ने शासन और प्रशासन को प्रतिमा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन और मांग पत्र भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें कोर्ट के आदेश के पालन की मांग की गई है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र भेजा गया है। हिंदू पक्ष ने मांग की है कि लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को जल्द भारत लाकर भोजशाला परिसर में स्थापित किया जाए।

सुमित चौधरी ने कहा कि एएसआई केवल परिसर की देखरेख और संरक्षण का कार्य करता है। प्रतिमा स्थापना का निर्णय पूरी तरह कोर्ट के आदेश के अनुसार ही होगा। उन्होंने कहा कि मूर्ति आएगी तो कोर्ट के आदेश से ही आएगी, इसमें एएसआई के हस्तक्षेप का कोई सवाल नहीं उठता।

मध्यप्रदेश में बनेगा हाई कैपेसिटी रेल नेटवर्क, 11 हजार करोड़ से बदलेगी रेलवे की तस्वीर

 कटनी/बीना
 मध्यप्रदेश में रेलवे नेटवर्क विस्तार की दो बड़ी परियोजनाओं को केंद्र सरकार ने मंजूरी देकर प्रदेश के यात्री और माल परिवहन ढांचे को नई दिशा दी है। इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड पर चौथी रेल लाइन और न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी- चौथी रेल लाइन परियोजना शुरू होने से रेलवे की संचालन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। दोनों परियोजनाओं पर मिलाकर 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजनाओं से न केवल ट्रेनों की इन लेटलतीफी कम होगी, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड देश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल
इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड देश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। यहां यात्री और मालगाडिय़ों का भारी दबाव रहता है। इधर पश्चिम मध्य रेलवे के न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना से सिंगरौली की कोयला तथा कटनी के सीमेंट उद्योगों को फायदा पहुंचेगा।

करीब 4329 करोड़ रुपए की इस परियोजनाा में 9 सुरंगें, 39 बड़े और 151 छोटे पुल, 43 ओवरब्रिज और 39 अंडरब्रिज बनेंगे
रेलवे ने इटारसी-भोपाल-बीना रेलखंड चौथी रेल लाइन बनाने का निर्णय लिया है। यह लाइन 237 किमी लंबी बनेगी। करीब 4329 करोड़ रुपए की इस परियोजनाा में 9 सुरंगें, 39 बड़े और 151 छोटे पुल, 43 ओवरब्रिज और 39 अंडरब्रिज बनेंगे। रेलवे ने इस वित्तीय वर्ष में इसके लिए 100 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए हैं।

जबलपुर मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार ने स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया
वहीं पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन से सिंगरौली तक तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार ने स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया है। 264 किमी के इस कॉरिडोर पर 6779.87 करोड़ खर्च होंगे। परियोजना कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली जिलों से होकर गुजरेगी। इसके सिंगरौली की कोयला और ऊर्जा बेल्ट तथा कटनी के सीमेंट व खनिज उद्योगों को इससे सबसे अधिक फायदा होगा।

बता दें कि एमपी का कटनी जिला, प्रदेश के माइनिंग सेेंटर के रूप में उभर रहा है। यहां बाक्साइट की खदानों के साथ ही अब सोना भी मिला है। खदानों में प्रचुर मात्रा में स्वर्ण अयस्क होने का दावा किया जा रहा है। कटनी का सीमेंट उद्योग देशभर में विख्यात है।

इन परियोजनाओं को हरी झंडी

इटारसी-भोपाल-बीना चौथी रेल लाइन
लंबाई: 237 किमी
लागत: 4329 करोड़
समयसीमा: 4 वर्ष
आवंटन: 100 करोड़ रुपए

न्यू कटनी जंक्शन-सिंगरौली तीसरी-चौथी रेल लाइन
लंबाई: 264.070 किमी
ट्रैक विकास: 578.675 किमी
लागत: 6779.87 करोड़ रुपए
समयसीमा: 4 वर्ष

मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली बैठक होगी उज्जैन में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली बैठक होगी उज्जैन में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

केन्द्रीय गृह मंत्री शाह बैठक के बाद सिंहस्थ की तैयारियों का करेंगे मुआयना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को सरकार की उपलब्धियों की दी जानकारी

उज्जैन 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली (27वीं) बैठक वर्ष 2027 में उज्जैन में होगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 19 मई को बस्तर में परिषद् की 26वीं बैठक में इस आशय की सहमति दे दी है। मध्य क्षेत्रीय परिषद् की बैठक लेने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री शाह उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को लेकर हो रही व्यापक नागरिक व्यवस्थाओं, मानव प्रबन्धन एवं आपदा प्रबंधन का भी मुआयना करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद् की 26वीं बैठक बस्तर में करके देश में नक्सलवाद की समाप्ति का जन संदेश दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से बीते सप्ताह राज्य में हुई विशेष गतिविधियों और सरकार को मिली उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए पुलिस अधिकारी सम्मानित, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सल मुक्त करने में अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री शाह द्वारा पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव सहित ‘नक्सल उन्मूलन अभियान’ में सक्रिय योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया है।

भोजशाला पर उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत, मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा लाने का प्रयास करेगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार जिले की भोजशाला परिसर को लेकर मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है। प्रदेश में कानून व्यवस्था नियंत्रण हमारी प्राथमिकता है। इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जायेगी। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने करीब 750 साल पुराने और धार्मिक/ईश वंदना से जुड़े इस मसले का सकारात्मक एवं शांतिपूर्ण समाधान किया है। सरकार इस विषय से जुड़े सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मां वाग्देवी की वास्तविक प्रतिमा विदेश से स्वदेश लाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ हर जरूरी प्रयास एवं समन्वय करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महत्वपूर्ण फैसले के मद्देनजर मध्यप्रदेश में शांति, सौहार्द और सद्भावना बनाए रखने के लिए प्रदेशवासियों को सरकार की ओर से बधाई भी दी।

प्रधानमंत्री का सम्मान – देश का सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें विदेश में मिल रहा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पूरे देश का सम्मान है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि, किसानों को मिली नई सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धान, ज्वार-बाजरा, कपास, तिल, सोयाबीन और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने के लिए केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के किसानों को यह नई सौगात दी है।

इंडो-फ्रांस कॉन्क्लेव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह हुए इंडो-फ्रांस कान्क्लेव (भारत-फ्रांस निवेश सम्मेलन) के सफल आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी सरकार फ्रांस के साथ हर  क्षेत्र में मिलकर काम करेगी। फ्रांस के राजदूत थियरी माथू, आईएफसीसीआई की महानिदेशक सुपायल एस कंवर और लगभग 150 प्रतिनिधियों से इसमें हिस्सा लिया, जिसमें भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राजनियक, नीति निर्माता, शासकीय अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोमा रोपवेस, एआई वैनसिटी एण्ड मेडिकेप्स यूनीवर्सिटी, डासाल्ट सिस्टमस, सफलेट, सियस्ट्रा, एन्जी सहित विश्व के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सीईओ-सीओओ और बहुराष्ट्रीय कंपनी प्रतिनिधियों की इस कान्क्लेव में सहभागिता मध्यप्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों के प्रति दिनों-दिन बढ़ रहे वैश्विक विश्वास का प्रतीक है।

निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मिला प्रशिक्षण, सरकार ने प्रारंभ किया नवाचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राज्य सरकार के अधीन विभिन्न निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग, प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की हाल ही में नियुक्ति की गई है। शासकीय विभागों के प्रमुख निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग एवं प्राधिकरण के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों के लिए प्रदेश में पहली बार कार्य प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार का एक नवाचारी प्रयास है। इसमें सभी नये पदाधिकारियों को उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन की रीति-नीति, नियम-कायदे और वित्त प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देकर सभी से प्रदेश के विकास के लिए काम करने की अपील की।

 

MP में थमेंगे ट्रकों के पहिये, देशव्यापी हड़ताल से ग्वालियर-चंबल का कारोबार प्रभावित

 ग्वालियर

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर 21 मई यानी आज से ट्रकों के पहिये देश भर में थम जाएंगे। इस वजह से न तो शहर से माल की लोडिंग हो पाएगी और न ही बाहर से शहर में माल आ पाएगा।

यह हड़ताल दिल्ली एनसीआर में कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट और दिल्ली नगर निगम के खिलाफ है। साथ ही बार-बार डीजल-पेट्रोल की दरों में बढ़ाने को लेकर है। हड़ताल तीन दिन चलेगी। इससे ग्वालियर-चंबल का बाजार काफी हद तक प्रभावित होगा।

स्थानीय तीन सौ और बाहर जाने वाले चार सौ ट्रकों के चक्के थमेंगे

स्थानीय ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष राजीव मोदी के मुताबिक शहर व आसपास के जिलों में माल लाने ले जाने वाले करीब तीन सौ लोडिंग वाहन खड़े हो जाएंगे। इस वजह से स्थानीय स्तर पर कोई भी सामान इधर से उधर नहीं जा सकेगा।

इसी तरह आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील माहेश्वरी के मुताबिक वर्तमान में ग्वालियर चंबल से 400 ट्रक दिल्ली माल लेकर जाते हैं और माल लेकर आते हैं। ऐसे में ये चार सौ ट्रक भी बंद रहेंगे। पिछले तीन दिन से दिल्ली एनसीआर में वाहनों में लोडिंग ही नहीं हुई है।

जानिए किन-किन चीजों पर पड़ेगा सीधा असर

किन-किन चीजों पर पड़ेगा असर ग्वालियर चंबल में किराना, रेडीमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि का सामान दिल्ली से आता है। साथ ही अंचल से तेल सहित अन्य चीजें दिल्ली जाती हैं। ऐसे में तीन दिन तक ट्रकों की हड़ताल की वजह से ये चीजें न तो अंचल में आ सकेंगी और न जा सकेंगी।

इससे पूरे बाजार पर असर पड़ेगा। यदि कुछ ट्रक आ भी गए तो स्थानीय स्तर पर माल की ढुलाई करने वाले वाहन भी नहीं चलेंगे। ऐसे में यह माल भी अंचल के जिलों में नहीं पहुंच सकेगा।

सागर के डायल 112 हीरोज कार में फँसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल

सागर जिले के थाना बंडा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की त्वरित प्रतिक्रिया और साहसिक कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में कार के अंदर फँसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। हादसे के बाद तत्काल मौके पर पहुँचकर डायल-112 टीम ने मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दिया।

19-20 मई की मध्यरात्रि थाना बंडा क्षेत्र अंतर्गतसोनी पेट्रोल पंप के आगे सागर रोडपर एक कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई, जिसमें तीन व्यक्ति घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना एक राहगीर द्वारा अपने नोडल प्वाइंटबड़ा चौराहापर तैनात डायल-112 टीम को दी गई। इसके बाद सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल में दर्ज की गई।

सूचना मिलते ही डायल-112 स्टाफआरक्षक  सोवरन यादव एवं पायलट  सोने सिंह लोधीतत्काल घटनास्थल पर पहुँचे। दुर्घटना में कार क्षतिग्रस्त हो गई थी और घायल वाहन के अंदर फँसे हुए थे।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने राहगीरों की सहायता से कार में फँसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद एक घायल व्यक्ति को तत्काल एफआरव्ही वाहन सेबंडा अस्पतालपहुँचाया गया, जबकि अन्य दो घायलों को परिजनों के साथ निजी वाहन से उपचार हेतु सागर रवाना किया गया।

डायल-112 जवानों की त्वरित और साहसिक कार्यवाही से घायलों को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी।

डायल 112 हीरोजश्रृंखला की यह घटना दर्शाती है किडायल-112 सेवा केवल सूचना मिलने पर सहायता पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपात स्थिति में मौके पर तत्काल राहत, रेस्क्यू और मानवीय सहायता प्रदान कर आमजन के जीवन की सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

 

जिन किसानों के स्लॉट बुक हैं, उनसे 28 मई तक गेहूं खरीदेगी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गेहूं उपार्जन के लिए जिन किसानों के स्लॉट 23 मई तक बुक हो चुके हैं, सरकार उनका गेहूं 28 मई तक खरीदेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान कल्याण के प्रतिबद्ध है। इस साल 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि किसान कल्याण वर्ष में हमारी सरकार लगातार किसान हितैषी निर्णय ले रही है। इस बात की प्रसन्नता है कि गेहूँ उपार्जन में हमने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बीते वर्ष हमने लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस साल 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं किसानों से खरीदा जायेगा। पूरे देश में अगर सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदा गया, तो वो हमारे मध्यप्रदेश में खरीदा गया है। अभी तक हम 93 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद चुके हैं।

गेहूँ उपार्जन के लिए अंतिम तारीख 23 मई निर्धारित थी। किसानों द्वारा बताया गया कि उन्होंने स्लॉट तो बुक कर लिए, लेकिन लाइन लंबी है। हमने निर्णय किया है कि जिनके भी स्लॉट बुक हुए हैं, ऐसे सभी किसानों से हम गेहूं खरीदेंगे। किसानों के गेहूं उपार्जन की तारीख 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक की जाती है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच समाधान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार किसान हितैषी सरकार है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसान-गरीब-महिला-युवा, चारों वर्गों के कल्याण के लिये हम प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। किसान भाई-बहन चिंता मत करिए, हम स्लॉट बुकिंग का गेहूं खरीदने का प्रबंधन कर रहे हैं।

 

अब तक 12.56 लाख किसानों से 93.31 लाख मीट्रिक टन से अधिक हुआ गेहूँ का उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल 

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 56 हजार 952 किसानों से 93 लाख 31 हजार 177 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है।

मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 19 हजार 423 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 81 लाख 47 हजार 675 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है।

मंत्री  राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।

 

विगत एक सप्‍ताह मेंदिल्ली, गुजरात, बिहार एवं उत्तरप्रदेश से 5 नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर लौटाई परिवारों की मुस्कान

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपहृत एवं गुमशुदा नाबालिग बालक-बालिकाओं की खोज हेतु निरंतर, समन्वित एवं तकनीकी रूप से सशक्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत एक सप्‍ताह में पुलिस टीम ने प्रदेश के अन्‍य राज्‍यों से5 गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया है।

उज्जैन

जिले के उन्हेल थाना पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत त्वरित कार्यवाही करते हुए गुमशुदा 16 वर्षीय बालिका को महज 24 घंटे के भीतर राजकोट (गुजरात) से सकुशल दस्तयाब कर परिजनों को सौंपा। पुलिस की तत्परता एवं तकनीकी जांच के चलते बालिका सुरक्षित वापस लाई जा सकी, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली।

कटनी

जिले में भी ऑपरेशन मुस्कान के तहत लगातार प्रभावी कार्रवाई की गई। बरही थाना पुलिस ने अपहृत बालिका को दिल्ली से सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया।

वहीं थाना स्लीमनाबाद पुलिस ने एक अन्य गुमशुदा नाबालिग बालिका को बिहार के पटना जिले से सुरक्षित खोज निकाला।

मुरैना

जिले के थाना कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुमशुदा 16 वर्षीय नाबालिग बालिका को प्रकरण दर्ज होने के 16 दिवस के भीतर हापुड़ (उत्तरप्रदेश) से सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया।

गुना

जिले में अपहृत अथवा गुमशुदा नाबालिगों की दस्तयाबी हेतु सतत एवं संवेदनशील कार्रवाई के तहत कोतवाली पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए लापता किशोरी को दिल्ली से सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन मुस्कान केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा एवं परिवारों की भावनाओं से जुड़ा मानवीय प्रयास बन चुका है। प्रदेश पुलिस द्वारा तकनीकी संसाधनों, साइबर ट्रैकिंग, स्थानीय पुलिस समन्वय एवं निरंतर मैदानी प्रयासों के माध्यम से गुमशुदा बच्चों की तलाश में लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी बालक अथवा बालिका के गुम होने की स्थिति में तत्काल निकटतम थाना अथवा डायल-112 पर सूचना दें, ताकि त्वरित कार्रवाई कर बच्चों को सुरक्षित खोजा जा सके। अभियान के अंतर्गत गुमशुदा बच्चों की तलाश एवं दस्तयाबी की कार्यवाही आगे भी लगातार जारी रहेगी।

 

सजगता, सहयोग और सावधानी से सिकल सेल उन्मूलन संभव : राज्यपाल पटेल

भोपाल

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवांशिक बीमारी के उन्मूलन में जागरूकता और जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और समुचित उपचार से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। जानकारी के अभाव में यह बीमारी माता-पिता से बच्चों तक पहुंच जाती है, लेकिन सजगता, सहयोग और सावधानी से इसका उन्मूलन संभव है। राज्यपाल  पटेल बुधवार को बैतूल के भीमपुर में सिकल सेल स्वास्थ्य शिविर एवं हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री  दुर्गादास उईके भी मौजूद थे।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को सिकल सेल मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही हैं। देशभर में लगभग 7 करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आज का आयोजन इसी दिशा में मजबूत कदम है। राज्यपाल  पटेल ने बैतूल जिले में सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सराहना की। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास” के संकल्प से सिकल सेल उन्मूलन का आह्वान किया।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि कोई भी बच्चा सिकल सेल से प्रभावित नहीं हो। इसके लिए विवाह से पूर्व लड़का और लड़की के स्वास्थ्य कार्ड का मिलान अवश्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी में शोध एवं उपचार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्यपाल  पटेल ने सिकल सेल और टी.बी. मरीजों को तैलीय एवं फास्ट फूड नहीं खाने, पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम करने तथा अनुशासित जीवन शैली अपनाने की सलाह दी।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बैगा, सहरिया और भारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना, जनजातीय ग्रामों की अधोसंरचना विकास और मूलभूत सुविधाओं की दृष्टि से अभूतपूर्व है।  उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों का मानचित्र तैयार कर सरकार के प्रयासों को आवश्यकताओं के अनुरूप पहुँचाने के निर्देश दिए।  राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा ही प्रगति और सफलता का सबसे बड़ा माध्यम है। बेटियों को प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों को अच्छी शिक्षा देने का आग्रह किया।

केंद्रीय मंत्री जनजातीय मामले  दुर्गादास उइके ने कहा कि भीमपुर में सिकल सेल जांच मशीन का लोकार्पण जनजातीय एवं वंचित समुदायों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। केंद्रीय मंत्री  उईके ने राज्यपाल  पटेल के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में चल रहे सिकल सेल जागरूकता एवं उन्मूलन प्रयासों की सराहना की।

सिकल सेल एवं थैलेसीमिया जांच मशीन “गजेल” का लोकार्पण

राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम में सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जांच की अत्याधुनिक मशीन “गजेल” का लोकार्पण किया। राज्यपाल  पटेल को बताया गया कि मशीन जनजातीय बाहुल्य भीमपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्थापित की जाएगी। सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियों की त्वरित एवं सटीक जांच में सहायक होगी।

“मिशन रानी” अभियान का किया शुभारंभ

राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम में “मिशन रानी” अभियान का भी शुभारंभ किया। अभियान में स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा जनजातीय कार्य विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। यह अभियान महिलाओं, किशोरी बालिकाओं एवं गर्भवती माताओं में एनीमिया नियंत्रण के लिए प्रारंभ किया गया है। अभियान का उद्देश्य एनीमिया में कमी लाना, रक्त में हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार करना तथा सिकल सेल एवं थैलेसीमिया जैसी बीमारियों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना है। अभियान के तहत हीमोग्लोबिन जांच, संपूर्ण रक्त जांच, सीरम फेरिटिन, विटामिन बी-12 एवं विशेष रक्त परीक्षण किए जाएंगे।

हितलाभ वितरण और प्रदर्शनी अवलोकन

राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया। सिकल मित्र प्रमाण पत्र, जेनेटिक कार्ड, फूड बास्केट, मां गंगा आजीविका स्वयं सहायता समूह, सी.सी.एल. राशि प्रदान की। सी.बी.एस.ई. कक्षा 12वीं में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सेजल उईके, राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी शिवानी उईके तथा अंतर्राष्ट्रीय कराटे में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कल्याणी कोड़पे को सम्मानित किया। उन्होंने महिला एवं बाल विकास, पशुपालन, राष्ट्रीय आजीविका मिशन, वन और स्वास्थ्य विभाग के स्टालों का भी निरीक्षण किया। विभागीय गतिविधियों, योजनाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।

 

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