मैपकास्ट के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग में विज्ञान आधारित कार्यशालाओं का हुआ आयोजन

मैपकास्ट के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग में विज्ञान आधारित कार्यशालाओं का हुआ आयोजन

विद्यार्थियों ने वर्चुअल वैज्ञानिक उपकरणों एवं ध्वनि विज्ञान की प्रयोगात्मक गतिविधियों से बढ़ाई वैज्ञानिक समझ

भोपाल

मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के अंतर्गत संचालित “सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग” में “वर्चुअल साइंस फन कैंप” एवं “साइंस ऑफ साउंड्स” विषयक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, रचनात्मक चिंतन एवं तकनीकी समझ विकसित करना था। कार्यशालाओं में विभिन्न विद्यालयों से आए 34 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े आधुनिक डिजिटल उपकरणों, प्रयोगात्मक गतिविधियों एवं व्यवहारिक वैज्ञानिक अवधारणाओं की जानकारी प्राप्त की। मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रवि भारद्वाज, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण डिगर्रा, संयुक्त परियोजना संचालक डॉ. मनोज राठौर और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. समीर द्वारा प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

मैपकास्ट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास शेंडे, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौधरी और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी भूपेश सक्सेना ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विज्ञान शिक्षा में प्रयोगात्मक अधिगम, जिज्ञासा एवं रचनात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को ऑनलाइन वैज्ञानिक उपकरणों एवं डिजिटल लैब टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई। वर्चुअल माइक्रोस्कोप, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, ओरिगामी और विभिन्न डिजिटल प्रयोगशाला उपकरणों के वैज्ञानिक उपयोग एवं महत्व को विद्यार्थियों ने समझा।

कार्यशाला में रोचक गतिविधियों एवं हैंड्स-ऑन प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली बताई गई। ब्रेन एक्टिविटीज़ के जरिए विद्यार्थियों को मस्तिष्क की कार्यप्रणाली एवं उसकी सुरक्षा के लिए हेलमेट के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही “साइंस ऑफ साउंड्स” कार्यशाला में विद्यार्थियों को ध्वनि विज्ञान से संबंधित वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं व्यवहारिक प्रयोगों से अवगत कराया गया।

विद्यार्थियों ने फ्रीक्वेंसी, वेवलेंथ, एम्प्लिट्यूड एवं विभिन्न प्रकार की तरंगों के वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझा। माउथ ऑर्गन किट एवं विभिन्न प्रकार की साउंड किट्स तैयार कर ध्वनि के उत्पन्न होने एवं उसके संचरण की प्रक्रिया को जाना। साथ ही उन्हें वैक्यूम में ध्वनि के संचरण न होने के वैज्ञानिक कारणों की जानकारी भी दी गई। विद्यार्थियों ने विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों से उत्पन्न ध्वनियों के भेद एवं उनकी विशेषताओं को भी समझा।

कार्यशालाओं में वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझने और दैनिक जीवन में उसके उपयोग के प्रति प्रेरित किया।

 

सड़क सुरक्षा में देवास पुलिस का प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन — राहत, उपचार और जागरूकता के समन्वित मॉडल से बनी नई पहचान

सड़क सुरक्षा में देवास पुलिस का प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन — राहत, उपचार और जागरूकता के समन्वित मॉडल से बनी नई पहचान

देवास मॉडल से सड़क सुरक्षा को मिली नई दिशा, दुर्घटनाओं में 18% एवं मृत्यु में 25% की ऐतिहासिक कमी
हिट एंड रन योजना, राह वीर योजना एवं पीएम राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में देवास प्रदेश में प्रथम

देवास
​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने संबंधी निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन में देवास जिला प्रदेशभर में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। कलेक्टर देवास ऋतुराज सिंह एवं पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के संयुक्त प्रयासों से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। समन्वित कार्यवाही, वैज्ञानिक विश्लेषण, मानवीय दृष्टिकोण एवं त्वरित राहत व्यवस्था के कारण वर्ष 2026 में देवास जिले में वर्ष 2025 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 18 प्रतिशत तथा सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों में 25 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है।

देवास जिले में सड़क सुरक्षा को केवल प्रशासनिक कार्यवाही तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी आधारित अभियान का स्वरूप दिया गया। प्रत्येक सड़क दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एसडीओपी द्वारा मौके पर पहुँचकर दुर्घटना का विस्तृत विश्लेषण किया गया तथा इन रिपोर्टों की प्रति माह आयोजित रोड सेफ्टी समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की गई। दुर्घटना संभावित स्थलों पर NHAI, PWD एवं MPRDC द्वारा त्वरित इंजीनियरिंग सुधार कराए गए। वहीं ट्रैफिक पुलिस एवं जिला पुलिस द्वारा गाँव-गाँव चौपाल लगाकर हेलमेट एवं सीट बेल्ट के प्रति जागरूकता अभियान चलाया गया तथा हजारों हेलमेट निःशुल्क वितरित किए गए।

राह वीर योजना में भी देवास प्रदेश में प्रथम

सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन ऑवर” के महत्व को ध्यान में रखते हुए देवास जिले में “राह वीर योजना” का भी प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचाने वाले नागरिकों को चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजे गए। जिले से भेजे गए 14 प्रकरणों में से 4 नागरिकों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा “राह वीर” के रूप में सम्मानित करते हुए प्रशंसा पत्र एवं 25 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। राह वीरों को सम्मानित करवाने में भी देवास जिला प्रदेश में प्रथम रहा।

पीएम राहत योजना से 200 से अधिक घायलों को मिला जीवनदान

प्रधानमंत्री राहत योजना अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को 1 लाख 50 हजार रूपए तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी देवास जिले में प्रभावी रूप से लागू किया गया। मात्र दो माह की अवधि में 200 से अधिक घायलों का निःशुल्क उपचार कराया गया, जिनमें से 150 से अधिक घायल पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।

हिट एंड रन योजना में 68 परिवारों को मिली 61 लाख रुपये की राहत राशि

देवास पुलिस द्वारा “हिट एंड रन योजना” के अंतर्गत भी उल्लेखनीय कार्य किया गया। ऐसे मामलों में, जहाँ दुर्घटना करने वाला वाहन अज्ञात रहता है और पीड़ित परिवारों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती, शासन द्वारा घायल को 50 हजार रूपए एवं मृतक के परिवार को 2 लाख रूपए तक की राहत राशि प्रदान की जाती है। देवास जिले में वर्ष 2022 से 2026 के मध्य हिट एंड रन के कुल 130 प्रकरणों का प्रभावी निराकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 68 पीड़ित परिवारों को लगभग 61 लाख रूपए की राहत राशि उनके खातों में दिलाई जा चुकी है।

कलेक्टर देवास ऋतुराज सिंह ने बताया कि रोड सेफ्टी बैठकों को औपचारिकता तक सीमित न रखकर परिणाम आधारित एवं विश्लेषणात्मक बनाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम आज सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिट एंड रन योजना के शेष प्रकरणों में भी शीघ्र राहत राशि प्रदान करवाई जाएगी तथा राह वीर योजना के लंबित प्रस्तावों को भी प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कराया जाएगा।

पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद ने बताया कि जिले में “360 डिग्री रोड सेफ्टी मॉडल” के तहत कार्य किया जा रहा है, जिसमें दुर्घटनाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण के साथ-साथ शासन की सभी सड़क सुरक्षा योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी केवल आँकड़े नहीं हैं, बल्कि वे अनेक परिवारों की बची हुई खुशियाँ और सुरक्षित जीवन हैं।

 

मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन

मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन

देव मीणा ने जीता स्वर्ण, कुलदीप कुमार, विनोद सिंह ने रजत पदक
समरदीप सिंह गिल शॉटपुट में रहे स्वर्ण विजेता
पुरुष पोल वॉल्ट में 5.45 मीटर प्रदर्शन के साथ बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026, एशियन गेम्स एवं एशियन अंडर-23 के लिए हासिल किए क्वालीफाइंग मार्क

भोपाल 

रांची में 22 से 25 मई 2026 तक आयोजित 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। अकादमी के प्रतिभाशाली खिलाड़ी देव मीणा ने पुरुष पोल वॉल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक अर्जित किया, जबकि कुलदीप कुमार ने रजत पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों ने 5.45 मीटर का शानदार प्रदर्शन करते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया।

इसके साथ ही अकादमी के खिलाड़ी विनोद सिंह ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ स्पर्धा में 14:15.50 सेकेंड का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अर्जित किया। वहीं शॉटपुट स्पर्धा में समरदीप सिंह गिल ने 20.46 मीटर के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीतकर अकादमी को एक और बड़ी सफलता दिलाई।

कॉमनवेल्थ गेम्स एवं एशियन गेम्स के लिए हासिल किया क्वालीफाइंग मार्क

देव मीणा और कुलदीप कुमार ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए निर्धारित 5.25 मीटर क्वालीफाइंग मार्क को पार करते हुए प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया। साथ ही दोनों खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स के लिए निर्धारित 5.45 मीटर क्वालीफाइंग मानक भी हासिल कर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत दावेदारी प्रस्तुत की है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश एवं देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण है।

इसी क्रम में समरदीप सिंह गिल ने पुरुष शॉटपुट स्पर्धा में 20.46 मीटर का प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए निर्धारित 20.36 मीटर क्वालीफाइंग मानक एवं एशियन गेम्स के लिए निर्धारित 19.41 मीटर क्वालीफाइंग मार्क भी हासिल किया।

एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप के लिए भी किया क्वालिफाई

विनोद सिंह ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ में 14:15.50 सेकेंड का प्रदर्शन करते हुए चीन के ओरोडोस में आयोजित होने वाली प्रथम एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 के लिए निर्धारित 14:22.00 सेकेंड के क्वालीफाइंग मार्क को पार कर प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया।

प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति

खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण एवं अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। खिलाड़ियों की यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति और खेल अधोसंरचना का प्रमाण है।

खेल मंत्री सारंग ने दी बधाई

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने देव मीणा, कुलदीप कुमार, विनोद सिंह एवं समरदीप सिंह गिल को इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास, तकनीकी दक्षता एवं उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। दबावपूर्ण मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर पदक अर्जित करना खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस उपलब्धि में अकादमी के प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया गया, जिसका परिणाम इस ऐतिहासिक सफलता के रूप में सामने आया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिलाड़ी आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।

युवा खिलाड़ियों के लिए बने प्रेरणास्रोत

मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों की यह सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनका प्रदर्शन यह दर्शाता है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

 

जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में

जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में

डिजिटल जनगणना अभियान को प्रदेशवासियों का व्यापक सहयोग
30 मई तक पूर्ण होगा मकान सूचीकरण कार्य

भोपाल

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य तेज गति से अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। प्रदेश में 01 मई से प्रारंभ हुआ यह फील्ड कार्य 30 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है। राज्य के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार एवं अन्य संरचनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से संकलित की जा रही है।

सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में जनगणना कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुसार निरंतर प्रगति पर है। राज्य में 1 लाख 37 हजार से अधिक मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। दिनांक 25 मई 2026 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 लाख 34 हजार 309 मकान सूचीकरण ब्लॉक में कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 2 करोड़ 39 लाख 9 हजार 808 मकानों की गणना की जा चुकी है। शेष कार्य भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण किए जाने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं तथा 30 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

इसके पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया संचालित की गई थी, जिसमें 7 लाख 46 हजार 158 परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की। नागरिकों की इस सक्रिय भागीदारी से जनगणना अभियान को गति एवं व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ।

इस बार जनगणना प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। प्रगणकों द्वारा एचएलओ ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज की जा रही है तथा कार्य की निगरानी भी डिजिटल प्रणाली से की जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं गति सुनिश्चित हो रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनगणना कार्य अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से संपादित किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 को सफल बनाने के लिये जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, प्रगणकों एवं आमजन द्वारा सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।

प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे प्रगणकों को आवश्यक एवं सही जानकारी उपलब्ध कराकर जनगणना कार्य में सहयोग प्रदान करें। जनगणना से प्राप्त आँकड़े शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान

धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का हुआ शुभारंभ

 धार 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का शुभारंभ कर स्वयं श्रमदान भी किया। जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत गंगा दशहरा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी तालाब में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रमदान कर जल बचाने में जन-सहभागिता का संदेश भी दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक अभियान है। प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विधायिका श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि गंगा दशहरा उत्सव प्रदेशभर में एक साथ मनाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में जल स्रोतों का पूजन किया गया तथा गंगा कलश यात्राएं भी निकाली गईं। कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया।

धार के देवीसागर तालाब का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

देवी सागर तालाब धार के ऐतिहासिक साढ़े बारह तालाबों में से एक प्रमुख जल संरचना है। ऐतिहासिक जल प्रबंधन धार के परमार राजाओं और बाद में पवार शासकों ने जल संरक्षण की अद्भूत तकनीकों का विकास किया था। यह बरसों से धार नगर को जलापूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार नगर के साढ़े बारह तालाब कुशल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। देवी सागर तालाब के संरक्षण के लिए नगरीय निकाय द्वारा प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से तालाब की निरंतर सफाई कराई जाती है। इस तालाब की निर्माण योजना ऐसी थी कि अन्य ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी बहकर इस झील में आता था, जो शहर की जलापूर्ति हमेशा बनाए रखने में सहायक है। इस तालाब के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित गढ़ कालिका माता मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। शांत और सुरम्य वातावरण के कारण यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण स्थल है।

 

Development Drive: एक नई सड़क बदलेगी खंडवा की तस्वीर, तीन ग्रोथ सेंटर होंगे सीधे कनेक्ट

खंडवा
शहर की किस्मत एक बायपास रोड से खुलने की संभावना है। खंडवा-इंदौर रोड के बाद रूधि-देशगांव बायपास मार्ग पर सबसे ज्यादा विकास की संभावनाएं देखी जा रही है। इस रोड पर एक निर्माणाधीन, एक प्रस्तावित और एक पूर्व से चल रहा औद्योगिक सेंटर आ रहा है। जिसके चलते खंडवा-रूधि बायपास नए उद्योग धंधों का हब बनने की कगार पर है। इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में इस रोड पर जमीन के भाव भी बेतहाशा बढ़े हैं।

521 करोड़ की लागगत से बन रहा फोरलेन
देशगांव से रूधि तक बन रहे फोरलेन रोड की लंबाई 28.68 किमी है और इसकी लागत 521.21 करोड़ की है। भविष्य में यह रोड बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी से बड़ोदरा तक जाएगा। जिसमें मप्र में इसकी लंबाई 105.778 किमी की रहेगी। फिलहाल इस रोड का काम लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रोड में दो बड़े रेल ओवर ब्रिज है, जिनका काम रेलवे के सुपरविजन में चल रहा है। चार माइनर ब्रिज में से तीन पूरी तरह से कंपलिट हो चुके हैं और चौथे माइनर ब्रिज का काम भी अंतिम चरण में है। इस रोड पर 12 अंडर पास ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं।

इंवेस्टर्स की पहली पसंद बन रहा
रूधि-देशगांव बायपास पर कुल 15 गांव स्थित है। पिछले तीन-चार में पंजीयक विभाग का रेकॉर्ड देखा जाए तो सबसे ज्यादा बिल्डर्स, इंवेस्टर्स, उद्योगपतियों सहित कॉलोनी डेवलपर्स ने इस रोड पर ही निवेश किया है। इस रोड पर कई उद्योगपतियों, इंवेस्टर्स द्वारा भविष्य में बड़े होटल्स, मॉल, बिजनेस पार्क तक खोले जाने की योजनाएं है। यहां जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए पंजीयक विभाग भी इस रोड पर सिंचित और असिंचित जमीनों के भाव एक समान कर चुका है। दो साल में यहां जमीन के भाव करीब 120 प्रतिशत तक बढ़े हैं।

रूधि औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगी ग्रोथ
इस रोड पर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर देशगांव दो नेशनल हाईवे का सेंटर बन रहा है। यहां जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र द्वारा एक लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित है। एक कॉलोनाइजर भी यहां बिजनेस पार्क डेवलप करने वाले है। इस मार्ग पर खंडवा के पास सुरगांव निपानी ग्रोथ सेंटर का काम तेजी से चल रहा है, जो इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इंदौर-महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी के चलते ग्रोथ सेंटर में कई उद्योग आने को तैयार है। वहीं, रूधि ग्रोथ सेंटर जो कई वर्षों से खाली पड़ा है, उसे भी ग्रोथ मिलने की पूरी संभावना है।

महाराष्ट्र, गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी
एनएचएआइ द्वारा नागपुर-बड़ोदरा मार्ग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें सबसे मुख्य रूधि-देशगांव बायपास है। बड़ोदरा-बैतूल हाईवे पर भी पांच चरण में से दो का काम चल रहा है। बैतूल से ये रोड आगे महाराष्ट्र के नागपुर से जुड़ रहा है। बैतूल के हैवारखेड़ी से जुलवानिया (बड़वानी) तक सात चरणों में 286 किमी की रोड बनेगी। इसमें खंडवा जिले अंतर्गत इस मार्ग के पहले चरण का काम रूधि-देशगांव बायपास के रूप में चल रहा है।

दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य
देशगांव-रूधि फोरलेन हाईवे का काम 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यह रोड महाराष्ट्र और गुजरात के साथ इंदौर-इच्छापुर-एदलाबाद से जुडऩे पर दक्षिण और उत्तर भारत से भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। भविष्य में इस मार्ग पर विकास की अपार संभावनाएं हैं।
आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

महिलाओं के नाम बढ़ीं संपत्तियां, 1 अप्रैल से अब तक 10 हजार महिलाओं के नाम हुई रजिस्ट्रियां

भोपाल 

मौजूदा वित्तवर्ष में हुई रजिस्ट्री में आधी आबादी की संपत्ति की हिस्सेदारी 65 फीसदी तक हो गई है। हर साल 7 फीसदी की दर से ये बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, कुल संपत्तियों में महिलाओं का हिस्सा 19 फीसदी ही है। मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में पंजीयन को लेकर सामने आ रही रोजाना की रिपोर्ट से ये स्थिति सामने आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं को रजिस्ट्री में दो फीसदी तक मिलने वाली छूट को बताया जा रहा है।

संपत्ति के क्रय विक्रय को लेकर हो रहे पंजीयन में रोजाना महिलाओं के नाम जिले में औसतन 75 नए पंजीयन किए जा रहे हैं। ये क्रय विक्रय के औसत पंजीयन का 65 फीसदी है।

बीते साल महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति हुई
भोपाल की शहरी संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी साल दर साल बढ़ोतरी कर रही है। बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें तो प्रदेश भर में महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदी गई थी। इसमें भोपाल में 5900 करोड़ रुपए की संपत्ति महिलाओं के नाम पर दर्ज हुई थी। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में ये दो फीसदी ज्यादा था। जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदकर छूट का लाभ नियम से 128 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी बचाई जा सकी थी।

पंद्रह दिन में महिलाओं के नाम 9000 संपत्तियां
इस संबंध में जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा का कहना है कि, पंजीयन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि, हर पंद्रह दिन में प्रदेश भर में महिलाओं के नाम पर 9400 संपत्तियां रजिस्टर्ड हो रही है। जबकि पुरुषों के नाम 7700 संपत्तियां दर्ज हो रही हैं। जाहिर है कि, महिलाओं के नाम 626 संपत्तियां रोजाना रजिस्टर्ड हो रही है। शासन के तय नियमों के अनुसार, संपदा 2.0 से पंजीयन की प्रक्रिया की जा रही है। अब पोर्टल पर किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही है।

हर तरह की प्रॉपर्टी की डिमांड ज्यादा
खास बात ये है कि, मौजूदा समय में जिलेभर में फ्लैट, प्लॉट, डुप्लेक्स, फार्म हाउस और कृषि भूमि हर श्रेणी की प्रॉपर्टी की खरीदारी हो रही है। खासकर शहर के विस्तार वाले इलाकों में निवेशकों की रुचि सबसे ज्यादा देखी जा रही है। रजिस्ट्री कार्यालय के अफसरों का कहना है कि, ज्यादा संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि, उनका ये भी कहना कि, भारतीय कल्चर के के चलते यहां आम दिनों के मुकाबले त्योहारी सीजन में लोग प्रॉपर्टी की खरीदी ज्यादा करते हैं।

MP में Township Development पर सख्ती, सरकार ने लागू किए नए नियम

भोपाल 

मध्यप्रदेश में टाउनशिप और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स के विकास को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव कर दिए हैं। अब मास्टर प्लान में लैंड यूज परिवर्तन करवाकर छोटे क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करना आसान नहीं रहेगा। नगरीय विकास विभाग ने नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि टाउनशिप विकास के मामलों में अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के प्रावधान प्रभावी होंगे। इसके बाद प्रदेश में 10 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में टाउनशिप विकसित नहीं की जा सकेगी।

अब नहीं टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य
अभी तक एमपी के कई शहरों में मास्टर प्लान के तहत लैंड यूज बदलवाकर 2 हेक्टेयर जैसी छोटी जमीन पर भी आवासीय कॉलोनियां और टाउनशिप विकसित की जा रही थीं। सरकार ने फरवरी 2026 में इस संशोधन का प्रारूप जारी किया था। दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद मई से इसे अधिसूचित कर प्रभावी कर दिया गया है। संशोधन में नई धारा जोड़कर यह स्पष्ट किया है कि मास्टर प्लान या लैंड यूज परिवर्तन संबंधी प्रावधानों के बावजूद टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य होंगे।

इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्लान में ये संशोधन

    अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के नियम प्रभावी होंगे

    5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 10 हेक्टेयर तो इससे अधिक आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 20 हेक्टेयर जमीन अनिवार्य।
    नगरीय सीमा या प्लानिंग एरिया के बाहर कम से कम 40 हेक्टेयर में ही टाउनशिप विकसित होगी।
    24 से 30 मीटर चौड़ी सड़क से कनेक्टिविटी जरूरी
    सड़क, पेयजल, सीवेज, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था डेवलपर को स्वयं ही करनी होगी।
    डेवलपर के लिए 5 करोड़ नेटवर्थ और 6 करोड़ टर्नओवर अनिवार्य।
    लैंड यूज परिवर्तन के लिए अब 10 फीसदी राशि जमा करनी होगी।
    प्रस्तावों पर सचिव नगरीय विकास या कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी।

ये होंगे फायदे

    बड़े और नियोजित टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा।
    अव्यवस्थित कॉलोनियों पर नियंत्रण लगेगा।
    सड़क, पानी, बिजली और सीवेज जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी।
    पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा और शहरी विकास अधिक व्यवस्थित और दीर्घकालिक होगा।

ये नुकसान भी

    छोटे और मझोले डेवलपर्स बाजार से बाहर हो सकते हैं
    एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स कम होने की आशंका
    मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सस्ते घरों की उपलब्धता घट सकती है
    बड़े भूखंड जुटाना कठिन होने से प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है
    भोपाल-इंदौर में आवासीय प्रोजेक्ट्स की रगतार कम होगी

एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर

नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है।
साधिकार समितियां करेंगी अनुमोदन

अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है।

भोपाल सिटी बस सेवा में खत्म होगा राजनीतिक दखल, अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन संचालन

भोपाल

भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होने वाला है। यह सेवा अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन हो गई है। इसका प्रभार अब महापौर या एमआईसी की जगह स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा।

भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड‎(बीसीएलएल) ‎राज्य सरकार की नई ‘मुख्यमंत्री सुगम‎परिवहन सेवा’ का हिस्सा बन गई है। ‎इसका आधिकारिक पत्र भोपाल नगर निगम ‎को सौंप दिया गया है। अब तक बीसीएलएल में महापौर‎और एमआईसी (मेयर इन काउंसिल)‎ सदस्यों (पार्षदों) का सीधा दखल होता ‎था, लेकिन अब कमान पूरी तरह ‎प्रशासनिक अफसरों के हाथ में होगी। जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी ‎तरह आकार नहीं ले लेता, तब तक वर्तमान ‎व्यवस्था के तहत सीईओ के पद पर अंजू‎ अरुण ही प्रभारी बनी रहेंगी।‎

नई नीति में प्रदेश को सात जोन में बांटा
नई नीति के तहत पूरे प्रदेश को 7 जोन ‎में बांटा गया है। इसमें भोपाल क्षेत्र के साथ ‎नर्मदापुरम संभाग को भी जोड़ा गया है।‎दोनों संभागों के कलेक्टर इसके बोर्ड में‎ होंगे, जो बस सेवा को नियंत्रित करेंगे।‎ सिफारिशें नहीं चलेंगी

जानकारी के अनुसार, रूट्स तय करने, बसों के स्टॉपेज या‎नई बसें चलाने में अब पार्षदों या ‎एमआईसी की सिफारिशें नहीं चलेंगी। पूरा‎ नियंत्रण क्षेत्रीय कंपनी के पास होगा। इससे ‎सेवा के संबंध में फैसले तेजी से और‎ व्यावहारिक आधार पर लिए जाएंगे।‎

भोपाल क्षेत्रीय कंपनी ही अब तय करेगी ‎कि शहर और उप नगरीय इलाकों में कौन‎ से रूट पर कितनी बसें चलेंगी। किराया‎ निर्धारण और परमिट की पूरी व्यवस्था भी ‎यही कंपनी संभालेगी। जिससे नगर निगम‎पर निर्भरता खत्म होगी।‎

बीसीएलएल की बसों में अक्सर आने‎ वाली शिकायतों (जैसे चालकों की‎मनमानी, समय पर बस न मिलना) को‎दूर करने के लिए इसे टेलिजेंट ट्रांसपोर्ट‎ मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा। ‎इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग और सुचारू‎ मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी।‎ कार्रवाई भी समय पर हो सकेगी।‎

भोपाल क्लस्टर में चलेंगी 398 बसें‎ योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 ‎मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने का खाका तैयार ‎किया गया है। ये बसें भोपाल शहर के मुख्य‎ मार्गों से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम ‎संभाग के प्रमुख रूट्स को आपस में जोड़ेंगी।‎ सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी‎ ऑपरेटरों के जरिए इन 398 बसों का संचालन‎ पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल‎पर कराएगी। जिससे बीसीएलएल की तरह नगर‎ निगम पर वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।‎

बता दें कि पहले साढ़े तीन सौ से ज्यादा सिटी बसें भोपाल शहर में दौड़ती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में करीब 70 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है। इस वजह से टैक्सी, ऑटो पर यात्रियों की निर्भरता बढ़ गई है।

 

मंत्री श्री विश्वास सारंग ने 23 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

वार्ड 78 के विश्वकर्मा नगर में सीवेज परियोजना से 35 हजार से अधिक नागरिकों को मिलेगा लाभ

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री,”विश्वास कैलाश सारंग”,”मध्य प्रदेश के मंत्री” ने नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड 78 स्थित विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से होने वाली सीवेज परियोजना एवं अन्य विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, जनप्रतिनिधि एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मंत्री श्री सारंग ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री,”नरेंद्र मोदी”,”भारत के प्रधानमंत्री”के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री,”मोहन यादव”,”मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री” के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास कार्य करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाना है।

उन्होंने बताया कि इस सीवेज परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी तथा नागरिकों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण प्राप्त होगा।

42 किलोमीटर लंबा बनेगा सीवर नेटवर्क

परियोजना के अंतर्गत लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से 42 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क तैयार किया जाएगा। वहीं, लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से 8079 हाउस सीवर कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। इस परियोजना से लगभग 35,306 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्रवासियों को आधुनिक सीवेज व्यवस्था, बेहतर स्वच्छता और सुगम नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी और नागरिकों का जनजीवन अधिक सुविधाजनक बनेगा।

क्षेत्रवासियों ने किया भव्य स्वागत

कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रवासियों ने मंत्री श्री विश्वास सारंग का पुष्पवर्षा एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया। साथ ही, करोड़ों रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों के लिए आभार भी व्यक्त किया।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu