धरती की बुझी प्यास से दक्षिण पन्ना की झिरियों में फिर लौटी जैव-विविधता

भोपाल

दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में स्थित रामडोल की झिरिया एवं दाने बाबा की झिरिया में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्राकृतिक झिरियों की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य कराया गया। इसके परिणामस्वरूप इन झिरियों को पुनर्जीवन मिला और भीषण गर्मी में भी इनमें जल बना हुआ है। इससे झिरियों के आसपास के वन क्षेत्रों में वन्य पक्षियों की वापसी हुई है तथा क्षेत्र की जैव-विविधता पुनर्जीवित हो उठी है।

प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते अब शहद से भरे दिखाई दे रहे हैं। पक्षियों के घोंसले फिर आबाद हो गए हैं और अन्य वन्यजीवों की सक्रियता भी बढ़ी है। वन क्षेत्र में दूधराज (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर), ब्लैक-नैप्ड मोनार्क, किंगफिशर, बाज, उल्लू, मोर, हरियल तथा जंगली मुर्गा सहित अनेक पक्षी प्रजातियाँ विहार कर रही हैं। कई पक्षियों के घोंसलों में अंडे भी पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि यह क्षेत्र अब वन्यजीवों, स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल प्राकृतिक आवास बन गया है।

स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों ने बताया कि पिछली गर्मियों तक भीषण गर्मी के दौरान यहां की प्राकृतिक झिरियाँ सूख जाया करती थीं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वन विभाग ने इन झिरियों की पहचान कर उनकी सफाई और मरम्मत कराई। वन विभाग के प्रयासों से इस वर्ष इन झिरियों में जल निरंतर प्रवाहित हो रहा है। जल स्रोतों से वन्यजीवों और पक्षियों को राहत मिल रही है। साथ ही मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य छोटे जीवों के लिए भी यह वन क्षेत्र महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आश्रय बन गया है।

जल संरक्षण और जैव-विविधता संरक्षण का यह समन्वित प्रयास दक्षिण पन्ना वनमंडल में प्राकृतिक संरक्षण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।

 

100 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध हुई 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ है। मध्यप्रदेश को गेहूं खरीदी के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नम्बर-1 है, वहीं गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों से सबसे पहले गेहूं की खरीदी की गई। कुल 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया।

सतत मॉनिटरिंग

प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये थे, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी थी।

किसानों को हुआ 23,708.13 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 23,708.13 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी किया जा चुका है। यह उपार्जित गेहूं का 93 प्रतिशत है। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया है।

संभागवार उपार्जन

रीवा संभाग में 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन, जबलपुर में 12 लाख 73 हजार 667, शहडोल में 70 हजार 666, सागर में 8 लाख 56 हजार 968, भोपाल में 28 लाख 47 हजार 284, नर्मदापुरम में 9 लाख 22 हजार 508, उज्जैन में 22 लाख 84 हजार 47, इंदौर में 8 लाख 62 हजार 719, ग्वालियर में 4 लाख 36 हजार 805 और चंबल संभाग में 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है।

 उपार्जन के समुचित प्रबंध

प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया गया। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई थी। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं।

 

भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन से मिलेगी वैश्विक पहचान — मंत्री पटेल

भोपाल 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आज का दिन भारत और मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। यह पावन अस्थि अवशेष न केवल हमारी अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर हैं, बल्कि वैश्विक शांति और सौहार्द के प्रतीक भी हैं। मंत्री पटेल राजा भोज एयरपोर्ट पर भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया रवाना करने के कार्यक्रम के संबोधित कर रहे थे। मंत्री पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन करने से वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि भगवान बुद्ध के इन महान शिष्यों की पवित्र अस्थियां संपूर्ण विश्व में केवल तीन देशों—भारत,लंका एवं म्यांमार में ही संरक्षित हैं, जो हमारे प्रदेश और देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है। इससे मंगोलिया सहित सभी देशों के बौद्ध अनुयायी प्रदेश में आने के लिए प्रेरित होंगे।

मंत्री पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सांस्कृतिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार जन-जन की आस्था और देश के आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल का स्मरण करते हुए बताया कि जब वे भारत के संस्कृति मंत्री थे, तब एक विशेष नीति बनाई गई थी कि जिस देश से एक लाख से अधिक पर्यटक भारत आएंगे, वहां उनकी स्थानीय भाषा में साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। इसी नीति के तहतलंका से दो लाख से अधिक पर्यटकों के आगमन पर सांची में उनकी भाषा में साइन बोर्ड लगाए गए, जिससे श्रद्धालुओं को सांची और अन्य बौद्ध स्थलों की यात्रा के दौरान सुगमता और आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने बल देकर कहा कि सांची केवल अपने पाषाण स्तूपों के कारण विश्व धरोहर स्थल नहीं है, अपितु इन चैतन्य अस्थि अवशेषों की पावन उपस्थिति के कारण वैश्विक श्रद्धा का केंद्र है, जिसके कारण विश्व भर से पर्यटक यहाँ खिंचे चले आते हैं। पूर्व में इन अवशेषों की सफल थाईलैंड यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध अत्यंत प्राचीन और प्रगाढ़ हैं, और यह यात्रा इन संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

सांची आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना — पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित बौद्ध धर्मगुरु बड़े गुरु पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने सांची की महत्ता को बताते हुए कहा कि सांची केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वैभव का एक अनमोल खजाना है। बौद्ध जगत में इस स्थान की महिमा अतुलनीय है। उन्होंने पूर्व के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब ये पवित्र अस्थि अवशेष पूर्व में थाईलैंड प्रवास पर गए थे, तब वहां लगभग 5.5 मिलियन (55 लाख) से अधिक श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धाभाव से इनकी पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा में इन अवशेषों (रेलिक्स) का स्थान सर्वोपरि है और उन्हें सांची जैसी पवित्र धरा का कस्टोडियन (संरक्षक) बनने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व की एक अमूल्य निधि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मूल मंत्र ‘विकास भी, विरासत भी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय और आध्यात्मिक प्रकल्प संपूर्ण विश्व को यह दिग्दर्शित करते हैं कि भारत आदि काल से विश्वगुरु रहा है और अपनी इसी सांस्कृतिक संपन्नता के कारण सदैव विश्वगुरु के पद पर सुशोभित रहेगा।

कलेक्टर मिश्रा ने अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियों को साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ है, जो स्वयं भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल और उनसे जुड़े अत्यंत पवित्र क्षेत्रों से घिरा हुआ है। ऐसे में भोपाल की धरती पर इस पावन विदाई समारोह का साक्षी बनना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस गरिमामयी आयोजन के माध्यम से मध्यप्रदेश की पहचान मध्य एशिया के देश मंगोलिया तक सुदृढ़ रूप से पहुंचेगी। भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रम अन्य देशों के साथ आयोजित किए जाएंगे, जो हमारे प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण हैं क्योंकि मध्यप्रदेश ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध प्रदेश है।

इस गरिमामयी प्रस्थान समारोह में छोटे गुरु पूज्य बानगल विमल तिस्स थेरी, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) के संचालक कर्नल यश सक्सेना, संस्कृति विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी राजेश कुमार गुप्ता सहित अनेक प्रबुद्ध जन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी गणमान्य नागरिकों ने मंत्रोच्चार और पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के बीच भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया यात्रा के लिए भावभीनी और श्रद्धापूर्वक विदाई दी।

 

 

MP में नौतपा का कहर, 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री के पार

भोपाल

नौतपा के चौथे दिन भी मध्य प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में रहा। प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। खजुराहो सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बड़े शहरों में ग्वालियर का पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग ने प्रदेश के 48 जिलों में हीटवेव और तेज गर्मी का अलर्ट जारी किया है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले तीन दिनों में कई जिलों में आंधी और वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार भोपाल में 43.8 डिग्री, जबलपुर में 44 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। इधर, दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में गुरुवार शाम अचानक मौसम बदला और करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई। इसके बाद वर्षा का दौर जारी रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

नौतपा के बीच आंधी-बारिश का भी अनुमान

नौतपा के दौरान इस बार गर्मी के साथ वर्षा और तेज आंधी का असर भी देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं वर्षा दर्ज की गई है। 29 से 31 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश जिलों में वर्षा और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट

मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं सागर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली सहित 10 जिलों में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। भोपाल, ग्वालियर, रायसेन, विदिशा और उज्जैन समेत 32 जिलों में येलो अलर्ट जारी है।
लू से बचने के लिए सावधानी जरूरी

मौसम विज्ञानियों ने लोगों को दोपहर 12 से तीन बजे तक घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मई के अंतिम दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और वर्षा का असर बढ़ेगा, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है।

 

त्विषा केस में बड़ा एक्शन, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह गिरफ्तार

भोपाल

नोएडा की अभिनेत्री व मॉडल त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में सास रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार शाम को सीबीआई टीम ने उन्हें घर से गिरफ्तार किया।

इसके लिए टीम सुबह 10 बजे घर पहुंच गई थी और करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। सीबीआई ने उन्हें भोपाल के मैनिट स्थित कैंप में रखा है। वहीं, त्विषा के पति समर्थ सिंह को पहले ही सीबीआई रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और जांच की

समर्थ 29 मई तक की रिमांड पर है। सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम ने डीआईजी अब्दुल जब्बार के नेतृत्व में गुरुवार को सुबह गिरिबाला के घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और विभिन्न बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की। इसके बाद गिरिबाला से लगातार पूछताछ की गई।

देर शाम गिरफ्तारी के दौरान घर के बाहर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। सीबीआई टीम ने सुरक्षा कारणों से अपनी गाड़ी घर के अंदर पार्क कराई और उसी में गिरिबाला को बैठाकर मैनिट स्थित सीबीआई कैंप कार्यालय ले गई।
तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सवाल किए

पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने गिरिबाला, त्विषा व समर्थ के रिश्तों को लेकर सवाल किए। उन्होंने मामले से जुड़े कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी सवाल किए। जांच एजेंसी पहले ही इस मामले में कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त कर चुकी है।
हाई कोर्ट ने इसलिए रद की थी अग्रिम जमानत

बता दें कि बुधवार देर रात एक बजे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को भोपाल न्यायालय से 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। हाई कोर्ट ने माना था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। जबकि वाट्सएप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रहीं। इन तथ्यों के आधार पर न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

न्यायिक सेवा में कई अहम पदों पद रहीं हैं गिरिबाला

भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से 2024 में रिटायर्ड हुईं गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा की वरिष्ठ और अनुभवी न्यायिक अधिकारी रही हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई की।

उन्होंने 1988 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर सिविल जज (क्लास-2) के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। 2010- 2011 में उच्च न्यायिक सेवा का हिस्सा बनीं। 2018 में भोपाल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं।

इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलसचिव रह चुकी हैं। गैस राहत कोर्ट भोपाल की न्यायाधीश भी रहीं। वर्तमान में भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-2 की अध्यक्ष हैं।

 

संवेदनशील और प्रभावशाली शायरी के माध्यम से बद्र ने साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रख्यात शायर एवं साहित्यकार बशीर बद्र के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी संवेदनशील और प्रभावशाली शायरी के माध्यम से साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी ग़ज़लों और रचनाओं ने मानवीय भावनाओं, रिश्तों और सामाजिक संवेदनाओं को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। उनकी लेखनी आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।

श्री शुक्ल ने कहा कि बशीर बद्र का निधन साहित्य एवं कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनाएँ सदैव साहित्य प्रेमियों के हृदय में जीवित रहेंगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों, प्रशंसकों एवं साहित्य जगत के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।

 

त्विषा केस में बड़ा एक्शन: सास गिरिबाला गिरफ्तार, मेडिकल टेस्ट के बाद आज कोर्ट में पेश करेगी CBI

नई दिल्ली. 
त्विषा शर्मा डेथ केस में एक बड़ी खबर सामने आई है। त्विषा की सास गिरबाला सिंह को गुरुवार को सीबीआई ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जा रही है। 

यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद किए जाने और 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई राहत को खारिज किए जाने के एक दिन बाद हुई है। बता दें आज ही सिंह को कोर्ट ने सामने पेशा किया जाएगा। 

एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने क्या कहा?
इस मामले में मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कहा, ‘हाई कोर्ट ने इस मामले में कुछ बातों को गंभीरता से लिया है, जैसे त्विषा शर्मा के शरीर पर मौत से पहले की सात चोटें, जो एक गंभीर अपराध की ओर इशारा करती हैं। इसके साथ ही कई नोटिसों के बावजूद गिरिबाला सिंह का जांच में मदद न करना और WhatsApp चैट, जो त्विषा के मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करती हैं। इन सभी बातों को देखते हुए, हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब यह CBI को तय करना है कि हिरासत में पूछताछ की जानी चाहिए या नहीं।’

बेटे ने 10 दिन बाद किया था सरेंडर
इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने उन आरोपों का भी गंभीरता से संज्ञान लिया कि गिरिबाला सिंह, जो एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और जिन्हें साइबर क्राइम, साइबर फोरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में ट्रेनिंग मिली हुई है, उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने और जांच की दिशा को प्रभावित करने के लिए किया हो सकता है।

पिछले हफ्ते, गिरिबाला के बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने 10 दिनों तक फरार रहने के बाद एक अदालत के सामने सरेंडर किया था। बता दें गिरिबाला सिंह की सास रिटायर्ड जज हैं और उनके वकील बेटे समर्थ पर दहेज उत्पीड़न से जुड़े आरोप हैं। CBI ने सोमवार को औपचारिक रूप से 12 मई को हुई त्विषा शर्मा की मौत की जांच अपने हाथ में ले ली।

सीबीआई ने दर्ज की थी FIR
सीबीआई ने राज्य पुलिस द्वारा समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ पहले से दर्ज की गई FIR को फिर से दर्ज किया था। CBI की FIR के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने विदाई के समय त्विषा के परिवार से 2 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे पीड़िता के परिवार ने उनके जोर देने पर दे दिया था।

सुनवाई के दौरान, त्विषा के परिवार की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि पीड़िता कथित तौर पर मानसिक उत्पीड़न का शिकार थी। हाई कोर्ट ने पाया कि त्विषा के माता-पिता और रिश्तेदारों के दर्ज बयानों में जांच के पहले ही दिन से लगातार यह आरोप लगाया गया है कि समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह, दोनों ही त्विषा का उत्पीड़न कर रहे थे।

धार भोजशाला विवाद पहुंचा फिर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसले को तीसरी चुनौती

धार

धार भोजशाला विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका लगी है। सुप्रीम कोर्ट अब भोजशाला से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर सकता है। तीसरी याचिका जिब्रान अंसारी ने प्रस्तुत की है। तीनों याचिकाओं पर अब तक कोर्ट ने सुनवाई शुरू नहीं की है। उधर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिकाओं को लेकर तैयारी कर रहा है। पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला मामले में कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि बिना पक्ष सुने स्टे न मिल सके।

भोजशाला को इंदौर हाईकोर्ट ने हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की है। पहले शहर काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और अब जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। पिछली याचिकाओं पर अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट का फैसला आने के छह दिन बाद मुस्लिम पक्ष ने रात साढ़े आठ बजे कोर्ट में याचिका लगाई थी।

आधी रात दाखिल हुई नई याचिका
भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल होने की जानकारी सामने आते ही विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार “Jebran Ansari Vs Union of India” नाम से यह याचिका डायरी नंबर 33643/2026 के तहत दर्ज की गई है। बताया गया कि याचिका 26 मई 2026 की रात करीब 11:30 बजे दाखिल की गई, जिससे यह स्पष्ट माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष इस मामले में कानूनी तैयारी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती
नई याचिका में इंदौर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने भोजशाला विवाद को लेकर अहम फैसला सुनाया था। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताया जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मामले की एंट्री सुप्रीम कोर्ट में होते ही दोनों पक्षों की सक्रियता बढ़ गई है।

धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज
भोजशाला विवाद लंबे समय से संवेदनशील धार्मिक मामलों में गिना जाता रहा है। ऐसे में नई याचिका के बाद धार्मिक संगठनों और विभिन्न पक्षों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ सकती है। विवाद को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, जिससे प्रदेश का माहौल फिर गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।

कानूनी लड़ाई अब नए चरण में
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब यह विवाद नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ अदालत में मजबूती से उतरने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस प्रकरण की सुनवाई राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन सकती है। फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

संवेदनशील मामले पर बढ़ी निगरानी
भोजशाला विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। संवेदनशील माहौल को देखते हुए स्थानीय स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने धार सहित प्रदेश की राजनीति और धार्मिक चर्चाओं को फिर केंद्र में ला दिया है।

कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि हमारे पास सरकारी दस्तावेज और पुख्ता प्रमाण हैं, जिनके आधार पर हम सुप्रीम कोर्ट में साबित करेंगे कि धार का परिसर मंदिर नहीं, मस्जिद है। हाईकोर्ट ने एएसआई की जिस रिपोर्ट में भोजशाला को मंदिर बताया, वही पूर्व की रिपोर्ट में भोजशाला को मस्जिद बताती रही है।

धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा दावा, बोले- गाय को लेकर देश की सोच बदल रही है

खजुराहो

पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है। यह अभियान आगामी 27 जुलाई को भारत के सभी जिलों में चलाया जाएगा, जिसमें ज्ञापन सौंपने और हस्ताक्षर अभियान शामिल होगा।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री वर्तमान में उत्तराखंड स्थित श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर हैं। 21 दिवसीय कठिन साधना पूरी करने के बाद उन्होंने बद्रीनाथ धाम में श्री सत्यनारायण भगवान की पांच दिवसीय कथा का शुभारंभ किया। कथा के पहले दिन व्यासपीठ से उन्होंने देशभर के सनातनियों, गौ सेवकों और संत समाज से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया।

पंडित शास्त्री बोले-गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए। साथ ही, सड़कों पर भटक रही गौ माताओं को सम्मानपूर्वक गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की जाएगी। उन्होंने गौ सेवकों और सनातनियों से अपने-अपने जिलों में एकत्र होकर गौ संरक्षण के लिए आवाज उठाने का आग्रह किया।

व्यासपीठ से संबोधित करते हुए बागेश्वर सरकार ने एक समाचार का उल्लेख किया, जिसमें मुस्लिम समाज के लोग भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में सामने आ रहे हैं।

बाबा बोले-गाय को खाने वाले भी राष्ट्र माता बनाने की मांग कर रहे
उन्होंने मौलाना मदनी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी भारत सरकार से यह मांग की है। इस दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हम लोग गाय को रोटी खिलाते हैं, कुछ लोग रोटी के साथ गाय खाते हैं, लेकिन अब वे भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में आगे आ रहे हैं। देश बदल रहा है।”

उन्होंने संत समाज से भी आग्रह किया कि सभी संत महात्मा और सनातनी दिल्ली पहुंचकर गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की मांग को मजबूती प्रदान करें। बद्रीनाथ धाम में चल रही श्री सत्यनारायण कथा के दौरान यह घोषणा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और देशभर के गौ भक्तों में इस अभियान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

राजा रघुवंशी मर्डर केस में नया मोड़! सोनम की जमानत रद्द कराने हाई कोर्ट पहुंची मेघालय सरकार

इंदौर

देश को झकझोर कर रख देने वाले मेघालय के चर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मेघालय राज्य सरकार ने शिलॉन्ग की एक निचली अदालत द्वारा इस खौफनाक हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत के खिलाफ मेघालय हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शिलॉन्ग कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत अप्रैल 2026 में सोनम को बेल दी गई थी. पुलिस और अभियोजन पक्ष का तर्क है कि मामला बेहद संगीन और सुनियोजित हत्या का है, इसलिए मुख्य आरोपी का जेल से बाहर आना जांच और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

यह पूरा मामला मई 2025 का है, जब मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी (29 साल) की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी (25 साल) से हुई थी. शादी के कुछ ही दिनों बाद 20 मई को यह नवविवाहित जोड़ा हनीमून मनाने के लिए मेघालय की खूबसूरत वादियों में पहुंचा था. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह रोमांटिक ट्रिप एक खौफनाक मर्डर सीन में तब्दील होने वाला है. 23 मई 2025 को चेरापूंजी (सोहरा) के नोंगिर्यत गांव में एक होमस्टे से चेकआउट करने के बाद यह जोड़ा अचानक लापता हो गया था. शुरुआत में इसे एक सामान्य लापता होने या दुर्घटना का मामला माना जा रहा था, लेकिन जब 2 जून 2025 को एनडीआरएफ के ड्रोन ने सोहरा के वेई सावदोंग झरने के पास एक गहरी खाई में राजा रघुवंशी का सड़ा-गला शव बरामद किया, तो इस पूरे रहस्य से पर्दा उठा।

मेघालय पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए. पुलिस के अनुसार, यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोनम रघुवंशी द्वारा रची गई एक सोची-समझी और बर्बर हत्या थी. सोनम का इंदौर में ही राज कुशवाहा नाम के एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था और उसने शादी के महज तीन दिन बाद ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली थी. इस साजिश के तहत राज कुशवाहा ने अपने तीन दोस्तों को 50,000 रुपये देकर कॉन्ट्रैक्ट किलर के रूप में मेघालय भेजा था. जब राजा और सोनम ट्रैकिंग कर रहे थे, तभी इन भाड़े के हत्यारों ने राजा पर धारदार हथियार से हमला किया और उन्हें गहरी खाई में धक्का दे दिया, जबकि सोनम चुपचाप खड़ी यह सब देखती रही।

हत्या को अंजाम देने के बाद सोनम खुद को पीड़ित दिखाने के लिए गायब हो गई और अलग-अलग राज्यों में छिपती रही, जबकि बाद में उसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के एक ढाबे से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने इस मामले में सोनम, उसके प्रेमी राज कुशवाहा और तीनों कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इस सनसनीखेज मामले में अप्रैल में शिलॉन्ग की एक अदालत ने सोनम को जमानत दे दी थी, जिसका अब मेघालय सरकार पुरजोर विरोध कर रही है. हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में सरकार ने दलील दी है कि निचली अदालत ने अपराध की क्रूरता और साजिश की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए जमानत दी है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

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