आमजन सामाजिक दायित्‍वों के निर्वहन के साथ कंपनी का करें सहयोग

आमजन सामाजिक दायित्‍वों के निर्वहन के साथ कंपनी का करें सहयोग

विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के प्रति सतर्कता बरतें

भोपाल

विद्युत वितरण कंपनियों ने कतिपय प्राकृतिक और मानवीय कारणों से होने वाली विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के लिए आमजनों और उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे विद्युत लाइनों, वितरण ट्रांसफार्मरों तथा अन्‍य विद्युतीय उपकरणों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड न करें तथा सजगता और सतर्कता बरतते हुए अपने दैनिक कार्यों का निर्वहन करें। आमजन अमूल्‍य जीवन और विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देते हुए पूर्व से विद्यमान विद्युतीय उपकरणों, लाइनों तथा वितरण ट्रांसफार्मरों के समीप भवन निर्माण, कालोनी के निर्माण और रोड के विस्तार के दौरान विद्युत सुरक्षा के मापदण्डों के अनुसार उचित दूरी का ध्यान रखें।

विद्युत उपकरणों के साथ छेड़खानी करना या उन्‍हें नुकसान पहुंचाना अथवा चुराकर ले जाना कानूनी अपराध है और इसके लिए जुर्माने और सजा का प्रावधान है। आम लोगों से अपील की गयी है कि वे इस प्रकार की घटना होने पर तत्‍काल इसकी सूचना नजदीकी विद्युत वितरण केन्द्र पर दें। साथ ही इस प्रकार से गैर कानूनी कार्य करने वालों को रोकने के लिए आमजन अपना सामाजिक दायित्‍व समझकर इस तरह की अव्‍यवस्‍थाओं पर अंकुश लगाने में कंपनी का सहयोग करें।

अक्सर यह देखने में आया है कि कालोनी के विद्युतीकरण के दौरान कालोनाइज़र अपनी सुविधा से बिजली के खम्बों को लगा देता है तथा सड़क विस्तार के दौरान सड़क को ऊंचा कर दिया जाता है। कई बार यह पाया जाता है कि रोड ऊंची कर ली जाती है परन्तु बिजली के खम्बों से रोड के बीच का विस्तार और दूरी को ध्यान में नहीं रखा जाता तथा सुरक्षा के नियमों को अनदेखा कर दिया जाता है। फलस्वरूप दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और कभी-कभी दुर्घटनाएं हो भी जाती है।

कंपनी ने कहा है कि भवन निर्माण और विस्तार के दौरान यदि कोई भवन निर्माता/संस्था निर्धारित प्रावधान के अनुसार काम नहीं करता है तो संबंधित संस्थाओं अथवा व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्युत लाइनों की पेट्रोलिंग कराते समय यदि कहीं रोड, भवन, स्ट्रक्चर का निर्माण नियम विरूद्ध होता हुआ पाया जाता है तो संबंधित उपभोक्ता, एजेन्सी और भवन स्वामी को विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार सुरक्षित अंतराल रखने के लिये रजिस्टर्ड नोटिस जारी करें तथा नोटिस की अवधि के दौरान सुरक्षित अंतराल बनाये रखने के लिये कार्यवाही नहीं किये जाने पर उसके विरूद्ध वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार त्वरित कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें।

नई लाइनों के निर्माण में रोड, भवन या स्ट्रक्चर से नियमानुसार निर्धारित सुरक्षित दूरी रखते हुए ही कार्य कराए जाएं। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बनने वाली सड़क मार्गों के ऊपर से गुजरने वाली लाइनों का अंतराल यदि प्रस्तावित सड़क के कारण कम हो रहा है तो विद्युत लाइन के खम्बों की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव कम्पनी के प्रचलित नियमानुसार संबंधित एजेन्सी को नोटिस के साथ भेजें और साथ ही सुनिश्चित करें कि निर्धारित सुरक्षित अंतराल मेन्टेन करने के बाद ही उस लोकेशन पर सड़क निर्माण हों।

 

मध्य प्रदेश में बियर का बड़ा संकट! सरकारी आंकड़ों में 14% कमी, ठेकेदार बोले- असली शॉर्टेज 45%

भोपाल
 मध्य प्रदेश में इस बार गर्मियों का सीजन बियर के शौकीनों के लिए काफी मायूस करने वाला साबित हो रहा है। राज्य में बियर की सप्लाई में भारी गिरावट आई है, जिससे कई बड़े शहरों के आउटलेट्स खाली पड़े हैं। इस संकट की मुख्य वजह आबकारी विभाग द्वारा इसी साल फरवरी में रायसेन स्थित एक निजी मैन्युफैक्चरिंग और बॉटलिंग यूनिट को बंद किया जाना है। इस फैक्ट्री के बंद होने से बाजार में अचानक बड़ा गैप आ गया, जिसकी भरपाई समय रहते नहीं की जा सकी।

सरकार का दावा बनाम इंडस्ट्री की हकीकत
आबकारी कमिश्नर दीपक सक्सेना के मुताबिक, विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए दूसरे राज्यों और स्थानीय डिस्टिलरीज से बैकअप अरेंजमेंट किया है। सरकार का दावा है कि शुरुआती 45% के घाटे को अब घटाकर सिर्फ 14% पर ले आया गया है। हालांकि, शराब कारोबारियों और इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जमीनी स्तर पर यह किल्लत अभी भी 45% के आसपास बनी हुई है, क्योंकि सरकार समय पर वैकल्पिक टेंडर जारी करने में नाकाम रही। दरअसल, पीक सीजन में राज्य में रोजाना दो लाख क्रेट बियर की मांग रहती है, जिसमें से आधी सप्लाई अकेले रायसेन की इसी बंद पड़ी यूनिट से होती थी।

मध्य प्रदेश का सिस्टम उत्तर प्रदेश जैसा नहीं है, जहां कंपनियां सीधे ठेकेदारों से संपर्क करती हैं। यहां सरकार के मदर डिपो से सप्लाई होती है। जब सरकार हमसे भारी आबकारी ड्यूटी लेती है, तो मांग के मुताबिक स्टॉक देना भी उसी की जिम्मेदारी है। विभाग रायसेन प्लांट के बंद होने के बाद के हालात का अंदाजा लगाने में पूरी तरह फेल रहा।

देशव्यापी है बियर की कमी
इसके अलावा, भोपाल के सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ ने बताया कि बियर की कमी इस बार देशव्यापी है। इस साल नए सिरे से हुए ठेकों और नीलामी में देरी के कारण वेंडर गर्मियों के लिए एडवांस स्टॉक जमा नहीं कर पाए। रही सही कसर छोटे कस्बों के वेंडर्स ने पूरी कर दी, जिन्होंने प्रीमियम बियर के बड़े स्टॉक पहले ही बुक कर लिए, जिससे भोपाल जैसे मुख्य शहरों में हाई-एंड ब्रांड्स की भारी कमी हो गई है।

 

नौतपा के बीच मौसम का यू-टर्न! 29 मई से MP में आंधी-बारिश का अलर्ट, गर्मी होगी गायब

भोपाल
 पूरे देश में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. हर कोई बारिश का इंतजार कर रहा है. इसी बीच मौसम विभाग से भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अनुमान है कि 29 मई से मध्य प्रदेश में प्री मानसून की दस्तक दे सकता है. भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर देखने को मिलेगा।

29 मई से प्री मासनून की बारिश
प्री मानसून सबसे पहले केरल में दस्तक देगा. वहीं 29 मई को प्री मानसून के मध्य प्रदेश में पहुंचने के स्ट्रॉन्ग चांसेस हैं. जिससे प्रदेश के कई इलाकों में तेज आंधी और हवाएं चलेंगी. भोपाल सहित कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है. मौसम विभाग का कहना है कि, प्रदेश के चंबल इलाके के ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, दतिया, भिंड, दतिया, शिवपुरी में बारिश होगी. वहीं टीकमगढ़, निवाड़ी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट में भी बारिश हो सकती है. बारिश होने से तापमान में भी गिरावट आएगी. पारा 2 से 3 डिग्री नीचे जाने का अनुमान है।

​आगामी दिनों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ”मध्य प्रदेश में मानसून आमतौर पर 15 जून के आसपास पहुंचना शुरू होता है और 22 जून तक ग्वालियर-चंबल के कुछ इलाकों को छोड़कर ज्यादातर जिलों में पहुंच जाता है. 7-8 जून के बाद प्रदेश में जो बारिश शुरू होगी, उसे प्री-मानसून गतिविधि कहा जाता है. ऐसे में माना जा रहा है की 29 मई से प्री मानसून की गतिविधियां शुरु हो सकती हैं।

भीषण गर्मी से जूझ रहा मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में नौतपा की शुरुआत के साथ ही भीषण गर्मी की शुरुआत हो गई है. मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं और आगामी दिनों में राहत के आसार फिलहाल कम दिख रहे हैं. प्रदेश में चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है।

जल्द मिलेगी नौतपा की गर्मी से राहत
रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर और निवाड़ी में तीव्र हीटवेव का असर रहेगा. वहीं टीकमगढ़ में दिन में हीट वेव के साथ वार्म नाईट और छिंदवाड़ा में हीट वेव के साथ वार्म नाईट की चेतावनी जारी की गई है. इनके साथ ही शिवपुरी, भिंड, मुरैना और श्योपुरकलां में भी सीवियर हीट वेव चलेगी, जबकि ग्वालियर और दतिया में वार्म नाईट के साथ के साथ तीव्र हीट वेव का प्रभाव रहेगा।

आगामी दिनों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी
​प्रदेश में तीव्र हीटवेव को देखते हुए मौसम विभाग ने आगामी दो से तीन दिनों के लिए कई जिलों में हीट वेव और सीवियर हीट वेव का अलर्ट जारी किया है. इनमें टीकमगढ़, निवाड़ी, पन्ना, सतना और भिंड जैसे जिलों के लिए रेड और आरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इसके साथ ही सागर, विदिशा, राजगढ़, रायसेन, दमोह, कटनी, सीधी और सिंगरौली सहित कई अन्य जिलों में भी गुरुवार और शुक्रवार को भी भीषण गर्मी जारी रहने की संभावना है।

भोपाल मेट्रो की ब्लू लाइन पर संकट! भदभदा-भेल रूट में अटकी रफ्तार, 2028 डेडलाइन पर खतरा

भोपाल
शहर को आधुनिक यातायात व्यवस्था से जोड़ने के लिए तैयार की जा रही मेट्रो की ‘ब्लू लाइन’ (भदभदा से रत्नागिरी-भेल) का काम तेजी से आगे तो बढ़ रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई ऐसी अड़चनें सामने आने लगी हैं जो इसकी रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। अधिकारियों ने पहले इस लाइन को ऑरेंज लाइन (एम्स से करोंद) से पहले पूरा करने के संकेत दिए थे, मगर अब इसके दिसंबर 2028 के टारगेट टाइमलाइन पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।

जमीन के नीचे छिपी चुनौतियां
मेट्रो रूट पर अंडरग्राउंड पाइपलाइनों और अन्य यूटिलिटी नेटवर्क को शिफ्ट करने में काफी वक्त लग रहा है। इसके चलते कई इलाकों में ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। भदभदा और जवाहर चौक जैसे व्यस्त इलाकों में संकरी सड़कों के कारण ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ा है, जिससे रोजाना लंबा जाम लग रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आने वाले मानसून सीजन में ये मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। निर्माण स्थलों के पास उड़ती धूल और ध्वनि प्रदूषण ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

मेट्रो परियोजना का मकसद सिर्फ तेज सफर कराना नहीं है, बल्कि शहरी गतिशीलता को बदलना और ट्रैफिक के दबाव को स्थायी रूप से कम करना है। जहां भी एलिवेटेड कॉरिडोर बन रहे हैं, वहां सड़कों को दो से तीन मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है ताकि भविष्य में ट्रैफिक सुगम हो सके।

क्या ऑरेंज लाइन से सबक लेगा प्रबंधन?
सड़क किनारे काम कर रहे न्यू मार्केट के व्यापारियों को डर है कि अगर काम में लंबा खिंचाव हुआ तो व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। तुलनात्मक रूप से देखें तो ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर को ही बनने में 5 साल से अधिक का समय लग गया और पूरी लाइन अब भी अधूरी है। ऐसे में ब्लू लाइन के टुकड़ों-टुकड़ों में हो रहे निर्माण से डेडलाइन टूटने का जोखिम बढ़ गया है।

काटे गए दशकों पुराने पेड़

झीलों के शहर भोपाल में विकास की रफ्तार अब पेड़ों पर भारी पड़ने लगी है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के ब्लू लाइन एलिवेटेड कॉरिडोर का रास्ता साफ करने के लिए ऐतिहासिक मिंटो हॉल यानी पुरानी विधानसभा के ठीक सामने लगे दशकों पुराने छायादार पेड़ों को काट दिया गया है।

मुसाफिरों का आसरा खत्म
ये पेड़ महज हरियाली का हिस्सा नहीं थे, बल्कि पास के व्यस्त बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों के लिए तपती गर्मियों में कुदरती छतरी का काम करते थे। अब वहां सिर्फ सन्नाटा और कंक्रीट का मलबा नजर आता है।

‘सब नियमों के तहत हुआ’
पेड़ों की कटाई को लेकर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि यह काम जरूरी था। एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए खाली जगह की जरूरत होती है। अफसरों के मुताबिक, पेड़ों को काटने के लिए सभी जरूरी कानूनी अनुमतियां ली गई थीं। नुकसान की भरपाई के लिए अब कैपिटल प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेशन को दोबारा पौधारोपण की जिम्मेदारी दी गई है।

ब्लू लाइन प्रोजेक्ट: एक नजर में
यह कटाई 12.9 किलोमीटर लंबे ब्लू लाइन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह लाइन भदभदा चौराहे से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहे तक जाएगी।

 

कॉरिडोर का नाम       ब्लू लाइन (Blue Line)
कुल दूरी                   12.9 किलोमीटर
स्टेशनों की संख्या     13 एलिवेटेड स्टेशन
समय सीमा               2025 में काम शुरू, 3 साल का लक्ष्य
रूट                        भदभदा से रत्नागिरी तिराहा

विकास बनाम पर्यावरण
पर्यावरणविदों का मानना है कि भले ही काटे गए पेड़ों की संख्या कम हो, लेकिन ऐतिहासिक इमारतों के पास से हरियाली का गायब होना चिंताजनक है। यह मामला एक बार फिर शहर के बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच के तनाव को उजागर करता है। जहां एक ओर मेट्रो शहर में यातायात को आधुनिक बनाएगी, वहीं दूसरी ओर पुराने पेड़ों के कटने से भोपाल की ग्रीन सिटी वाली छवि पर सवाल उठ रहे हैं।

बेकाबू बैल का विकलांग व्यक्ति पर हमला, लोगों की बहादुरी से बची जान

सड़क पर मचा हड़कंप: बेकाबू बैल ने व्हीलचेयर पर बैठे दिव्यांग व्यक्ति पर किया हमला, लोगों ने दिखाई इंसानियत और बहादुरी

शहर की सड़क पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक बेकाबू बैल ने व्हीलचेयर पर बैठे एक दिव्यांग व्यक्ति पर अचानक हमला कर दिया। आसपास मौजूद लोग कुछ पल के लिए सहम गए, लेकिन फिर कई लोगों ने साहस दिखाते हुए तुरंत मौके पर पहुंचकर व्यक्ति को बचाने की कोशिश शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बैल काफी उग्र था और लगातार व्यक्ति की ओर बढ़ रहा था। इसी बीच कुछ युवकों और स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बैल को वहां से भगाया और व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग बहादुरी दिखाने वाले युवकों की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं इस घटना ने शहर में आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय प्रशासन से अब इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आवारा पशुओं पर नियंत्रण की मांग की जा रही है।

गुना के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल दो बुजुर्ग व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

गुना जिले के थाना राघौगढ़ क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दो बुजुर्ग व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से दोनों घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी।

27 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना राघौगढ़ क्षेत्र अंतर्गत वृंदावन होटल के सामने ए.बी. रोड पर एक मोटर साइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, जिसमें 02 व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना राघौगढ़ क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक शशि कपूर राजावत एवं पायलट रवि शर्मा ने मौके पर पहुँचकर पाया कि सड़क पर अचानक सामने आई गाय को बचाने के प्रयास में मोटर साइकिल अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना में मोटर साइकिल सवार दो बुजुर्ग व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को सुरक्षित डायल 112 वाहन की सहायता से तत्काल अस्पताल पहुँचाया।

डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से दोनों बुजुर्गों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। इस मानवीय सहायता के लिए परिजनों एवं स्थानीय नागरिकों ने डायल-112 टीम का आभार व्यक्त किया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों की सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मृत पाये गए नर बाघ का हुआ पोस्टमॉर्टम

भोपाल 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया अंतर्गत पनपथा बफर क्षेत्र के ग्राम खेरवा टोला में 24 मई 2026 को मृत पाए गए नर बाघ का पोस्टमॉर्टम 25 मई 2026 को किया गया। पोस्टमॉर्टम 3 वन्यजीव चिकित्सकों के पैनल और 2 आमंत्रित विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ। पोस्टमॉर्टम में बाघ के सभी अंगों का गहन परीक्षण किया गया और आवश्यक नमूने संग्रहित किए गए। पोस्टमॉर्टम में एकत्रित नमूनों को बीमारी, अन्य आंतरिक रोगों, तनाव अथवा विषाक्तता जैसी संभावनाओं की जांच के लिए मानक प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। पोस्टमॉर्टम में डायरेक्टर, स्टेट वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक हेडक्वार्टर (एसडब्ल्यूएफएच) जबलपुर, क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व तथा एनटीसीए के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।

पोस्टमॉर्टम के बाद क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एवं एनटीसीए प्रतिनिधि की उपस्थिति में 25 मई 2026 को जबलपुर में बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

पोस्टमॉर्टम में चिकित्सकों और विशेषज्ञों के पैनल ने पाया कि मृत नर बाघ का स्वास्थ्य अत्यंत खराब था। उसकी मांसपेशियां पीली एवं सूखी थीं, पाचन तंत्र खाली था और त्वचा खुरदरी और बेजान हो चुकी थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट दाहिने कंधे पर लगा था, जहां रक्तस्राव नहीं पाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि डार्ट बाघ की मृत्यु के बाद लगाया गया था। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में ‘कंजेस्टिव एवं हेमरेजिक’ परिवर्तन पाए गए, जो कमजोर रक्त संचार के संकेतक हैं। पोस्टमॉर्टम करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार बाघ की मृत्यु कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण हुई होगी।

 

भोपाल में चार्जिंग पर लगा मोबाइल बना साइबर ठगी का जरिया, खाते से उड़े ₹1 लाख

भोपाल

ऐशबाग में रहने वाले एक ऑटो इलेक्ट्रिक वर्कशाप संचालक साइबर ठगी का शिकार हो गए। अज्ञात साइबर जालसाजों ने उनका मोबाइल हैक कर बैंक खाते से एक लाख रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चार्जिंग पर लगे मोबाइल का लॉक हुआ था हैंग

ऐशबाग थाना प्रभारी संदीप पवार के अनुसार अफाक कालोनी, बाग फरहत अफजा निवासी मोहम्मद शरीफ (39) गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ऑटो इलेक्ट्रिक वर्कशाप संचालित करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 24 मई को उनका मोबाइल घर पर चार्जिंग पर लगा था।

घर से निकलते समय जब उन्होंने मोबाइल उठाया तो स्क्रीन लॉक नहीं खुल रहा था। कई बार प्रयास करने के बाद मोबाइल चालू हुआ और उन्होंने सामान्य रूप से फोन का उपयोग भी किया।

बिना ओटीपी और बिना संदिग्ध लिंक के हुई ठगी

इसी दौरान सुबह करीब 11 बजे उनके मोबाइल पर सेंट्रल बैंक खाते से एक लाख रुपए डेबिट होने का संदेश मिला। रकम किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर की गई थी।

पीड़ित के अनुसार उन्होंने न तो कोई संदिग्ध लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड की थी और न ही किसी को ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा की थी। उन्हें शंका है कि मोबाइल हैक कर साइबर ठगी की गई है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत व पारदर्शी बनाने पर जोर

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं, अधोसंरचना विकास एवं मानव संसाधन संबंधी विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिये विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती, नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण कार्यों की प्रगति, चिकित्सालयों के संधारण एवं रख-रखाव, सागर स्थित कैंसर हॉस्पिटल के लिये पदों की स्वीकृति, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण (लैब स्ट्रेंदनिंग) और स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने संबंधी विषयों की समीक्षा की गई।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि अंडर सर्व्ड एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, जिससे अंतिम पंक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने कहा कि केवल चिकित्सकों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता भी सशक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में प्रभावी एवं ठोस प्रयास किए जाएँ।

सीएम केयर्स के अंतर्गत अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) से जुड़े प्रकरणों में अतिरिक्त व्यय की प्रतिपूर्ति संबंधी विषय पर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि जरूरतमंद मरीजों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने के लिये आवश्यक प्रावधान किए जाएँ।उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार पैकेज को शामिल किए जाने के लिये आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे कैंसर रोगियों को उपचार में अधिक आर्थिक सहायता मिल सके और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक उनकी पहुँच आसान हो।

स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सहज एवं संवेदनशील बनाए

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विभागीय स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सहज एवं संवेदनशील बनाए जाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गंभीर बीमारी, पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पदस्थापना, दिव्यांग आश्रित, विधवा एवं परित्यक्ता जैसे संवेदनशील प्रकरणों को स्थानांतरण प्रक्रिया में प्राथमिकता प्रदान की जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

धरती की बुझी प्यास से दक्षिण पन्ना की झिरियों में फिर लौटी जैव-विविधता

भोपाल

दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में स्थित रामडोल की झिरिया एवं दाने बाबा की झिरिया में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्राकृतिक झिरियों की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य कराया गया। इसके परिणामस्वरूप इन झिरियों को पुनर्जीवन मिला और भीषण गर्मी में भी इनमें जल बना हुआ है। इससे झिरियों के आसपास के वन क्षेत्रों में वन्य पक्षियों की वापसी हुई है तथा क्षेत्र की जैव-विविधता पुनर्जीवित हो उठी है।

प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते अब शहद से भरे दिखाई दे रहे हैं। पक्षियों के घोंसले फिर आबाद हो गए हैं और अन्य वन्यजीवों की सक्रियता भी बढ़ी है। वन क्षेत्र में दूधराज (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर), ब्लैक-नैप्ड मोनार्क, किंगफिशर, बाज, उल्लू, मोर, हरियल तथा जंगली मुर्गा सहित अनेक पक्षी प्रजातियाँ विहार कर रही हैं। कई पक्षियों के घोंसलों में अंडे भी पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि यह क्षेत्र अब वन्यजीवों, स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल प्राकृतिक आवास बन गया है।

स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों ने बताया कि पिछली गर्मियों तक भीषण गर्मी के दौरान यहां की प्राकृतिक झिरियाँ सूख जाया करती थीं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वन विभाग ने इन झिरियों की पहचान कर उनकी सफाई और मरम्मत कराई। वन विभाग के प्रयासों से इस वर्ष इन झिरियों में जल निरंतर प्रवाहित हो रहा है। जल स्रोतों से वन्यजीवों और पक्षियों को राहत मिल रही है। साथ ही मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य छोटे जीवों के लिए भी यह वन क्षेत्र महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आश्रय बन गया है।

जल संरक्षण और जैव-विविधता संरक्षण का यह समन्वित प्रयास दक्षिण पन्ना वनमंडल में प्राकृतिक संरक्षण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।

 

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