लाडली बहनों के लिए खुशखबरी, जल्द खातों में आएगी 37वीं किस्त; जानिए नया अपडेट

भोपाल 

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर माह 1500-1500 रुपए दिए जाते हैं। जून 2023 से मई 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है।

13 मई 2026 को नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी से सीएम डॉ. मोहन यादव ने ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किस्त जारी की थी। इसके तहत प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ से अधिक की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की गई। अब जून 2026 में 37वीं किस्त जारी की जाएगी। संभावना है कि 10 से 15 जून के बीच सीएम द्वारा किस्त की राशि जारी की जा सकती है, हालांकि फाइनल तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

गौरतलब है कि मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरूआत की गई थी। 10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया।

वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह (18000 रु सालाना) दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रुपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

इन्हें मिलता है योजना का लाभ:

    मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो ।
    विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी योजना की पात्र हैं।
    महिलाओं की आयु 21 से 60 वर्ष तक होनी चाहिए ।
    स्वयं का बैंक खाता और बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी होना चाहिए।
    समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई किया होना चाहिए ।

ये योजना से बाहर :

    स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।
    जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​
    जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।
    स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के
    शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/ संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो।

लाभार्थी सूची में कैसे चेक करें अपना नाम

    लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।
    वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर
    क्लिक करें।
    दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।
    कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।
    मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।
    ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

 

स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना से नागरिकों के भू-खण्ड अधिकार होंगे सुरक्षित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा है। इस जन-कल्याणकारी संकल्प को धरातल पर मूर्त रूप देते हुए मंत्रि-परिषद द्वारा ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के रूप में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, जिसके तहत ग्रामीण आबादी को दिए जाने वाले अधिकार अभिलेखों के पंजीयन पर लगने वाली स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ कर दिया गया है। जनता को स्वामित्व अधिकार देने पर लगने वाली शुल्क संबंधी संपूर्ण व्यय राशि 3 हजार 800 करोड़ रुपए का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा और हितग्राहियों से पंजीयन के समय कोई भी शुल्क या राशि नहीं ली जाएगी।

स्वामित्व योजना में भू-खण्डधारियों को बेहद आसानी से मिलेगा ऋण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि स्वामित्व योजना में अधिकार अभिलेख प्राप्त करने वाले भू-खण्डधारियों को अब विभिन्न बैंकों से बेहद आसानी से ऋण उपलब्ध हो सकेगा। नागरिकों को आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, नया व्यवसाय शुरू करने एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त करने में सुगमता होगी। इसके लिए स्वामित्व योजना अंतर्गत निर्मित अधिकार अभिलेखों के आधार पर ‘डीड ऑफ कन्वेयेंस’ (हस्तांतरण विलेख) का निष्पादन एवं पंजीयन कराया जाएगा।

जनता को स्वामित्व अधिकार देने के लिये चलाया जायेगा विशेष अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनता को स्वामित्व संबंधी अधिकार देने के लिए विशेष अभियान चला कर समय सीमा में कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। इस ऐतिहासिक योजना के केंद्र में पूरी तरह से नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके आर्थिक सशक्तिकरण को रखा गया है। बैंकिंग संस्थाएँ इन पंजीकृत अभिलेखों के आधार पर भूखंड की कीमत का सटीक आंकलन कर सहजता से ऋण स्वीकृति प्रदान कर सकेंगी। इससे ग्रामीण नागरिकों को अपनी ही संपत्ति के विरुद्ध त्वरित आर्थिक लोन की सुविधा मिलेगी और साथ ही आधुनिक ड्रोन तकनीक से हुए डिजिटल मानचित्रण के कारण संपत्ति संबंधी आपसी और वैधानिक विवादों में भी भारी कमी आएगी।

स्वामित्व योजना में 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का हुआ निर्माण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि स्वामित्व योजना में अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें से 48.32 लाख निजी संपत्तिधारकों के स्वामित्व अधिकार संबंधी अभिलेख निर्मित किए जा चुके हैं, जबकि 19.79 लाख शासकीय संपत्तियों से संबंधित हैं। वर्तमान में प्रदेश के 55 जिलों के 41,586 ग्रामों में ड्रोन सर्वेक्षण का कार्य संपादित किया जा चुका है, जिनमें से 40,645 ग्रामों में योजना का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो गया है। इस प्रकार लगभग 98 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर मध्यप्रदेश देश के शीर्ष 10 अग्रणी राज्यों में शामिल है। इस मजबूत वैधानिक आधार के चलते अब तक 1,905 लाभार्थियों को 19 वित्तीय संस्थानों द्वारा लगभग 175.75 करोड़ रूपये के ऋण भी स्वीकृत किए जा चुके हैं। अब इस नई निष्पादन एवं पंजीयन योजना से शेष बचे कार्यों को भी विशेष अभियान के तहत तेजी से पूरा किया जाएगा जिससे हर पात्र ग्रामीण नागरिक को उसका वैधानिक और प्रमाणित अधिकार मिल सके।

प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिये आयुक्त भू-संसाधन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का होगा गठन

मंत्रि-परिषद द्वारा योजना के प्रभावी व पारदर्शी क्रियान्वयन, विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण और समय-समय पर प्रगति की समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति के गठन को भी मंजूरी दी गई है। इस समिति में वाणिज्यिक कर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रतिनिधि के रूप में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त या संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी सदस्य होंगे। यह समिति आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को भी इसमें संयोजित कर सकेगी। इसके अतिरिक्त, योजना के जमीनी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय और जन-जागरूकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये की राशि पृथक से स्वीकृत की गई है। राजस्व विभाग को इस योजना का विस्तृत परिपत्र तथा समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित होंगे और उनके विकास को एक नई गति मिलेगी।

 

मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, 5 साल में ₹21,485 करोड़ खर्च; स्वास्थ्य और किसानों पर खास फोकस

भोपाल 

जनता की सहूलियत के कामों पर सरकार 21 हजार 485 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह राशि अगले 5 साल में खर्च होगी। सबसे ज्यादा 17 हजार 59 करोड़ रुपए स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होंगे। धार स्थित भोजशाला में सरस्वती लोक बनाया जाएगा। भोज शोध संस्थान की स्थापना भी होगी। यहां पूर्व के वर्षों में भोजशाला आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को आर्थिक मदद दी जाएगी।

किसानों को भी दी खुशखबरी
किसानों द्वारा कुल पैदा की जाने वाली गर्मी की मूंग का 25 फीसद हिस्सा खरीदा जाएगा। जबकि उड़द के एक-एक दाने की खरीदी होगी। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 21 हजार 485 करोड़ की विभिन्न योजनाओं की निरंतरता को मंजूरी दे दी है। जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाकी के विषयों की मंत्रियों को बैठक से पहले ब्रीफिंग में जानकारी दी।

बरगी कू्रज हादसे की न्यायिक जांच कराए जाने का अनुसमर्थन
संघ के 100 वर्ष फिल्म को एसजीएसटी से छूट दिए जाने व बरगी बांध में हुए भीषण हादसे की न्यायिक जांच कराए जाने संबंधी निर्णय का अनुसमर्थन किया। जबकि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश-2026 और मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया है।

यहां खर्च होंगे 17 हजार 59 करोड़ 

-मेडिकल कॉलेजों के लिए चिकित्सालय योजना को 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया। इस पर 14,363.95 करोड़ खर्च होंगे। यह राशि लोगों को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधा देने और चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किए जाने पर खर्च होगी।

-मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम को मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए 657 करोड़ की मंजूरी मिली। मेडिकल कॉलेजों में केंद्र के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में बढ़ोतरी होगी।

-उज्जैन ,सिवनी, छतरपुर, दमोह और बुदनी में बनाए जा रहे नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली।

-एमबीबीएस की सीट बढ़ाने संबंधी योजना के लिए 838 करोड़ रुपए मिले। इस राशि से मेडिकल कॉलेजों में अधोसंरचना निर्माण, आधुनिक उपकरणों की स्थापना, पठनपाठन एवं महाविद्यालयीन गतिविधियों शुरू की जाएंगी।

-इंदौर के पिपल्याहाना में जिला न्यायालय भवन के लिए पुनरीक्षित लागत 626 करोड़ 61 लाख रुपए को स्वीकृति दी।

जनकल्याण अभियान में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देना करें सुनिश्चित : मुख्य सचिव जैन

जनकल्याण अभियान में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देना करें सुनिश्चित : मुख्य सचिव जैन

“एक पेड़ माँ के नाम”-स्वच्छता अभियान-जनकल्याण शिविर-प्राकृतिक खेती कार्य-शालाएं और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में प्रदेश को अग्रणी बनाने का है लक्ष्य
मुख्यसचिव जैन ने कलेक्टर्स के साथ अभियान संबंधी तैयारियों की समीक्षा की

भोपाल

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर्स से कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की प्राथमिकता के अनुरूप 5 जून से आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय जनकल्याण अभियान में पात्र हितग्राहियों को केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं का लाभ देना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा है कि इस दौरान विश्व पर्यावरण दिवस पर “एक पेड़ माँ के नाम” और स्वच्छता अभियान, जनकल्याण शिविर, प्राकृतिक खेती कार्य-शालाएं तथा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस गतिविधियों का उत्कृष्ट क्रियान्वयन हो जिससे देश में मध्यप्रदेश अग्रणी हो। मुख्य सचिव जैन बुधवार को मंत्रालय से संभाग के कमिश्नर, कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत को वीडियो कांफ्रेसिंग के साथ अभियान की तैयारियों की समीक्ष कर रहे थे।

मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा है कि प्रदेश के लिए यह गौरान्वित करने वाली बात है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के 25 दिन पूर्व खजुराहो से काउंट-डाउन शुरू हुआ है। ऐसे में हम सबका यह उत्तरदायित्व है कि शरीर को निरोगी रखने वाले योग से जन-जन को जोड़ें और नया रिकार्ड कायम करें। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स प्रयास करें कि योग का एक कार्यक्रम जिले की ऐतिहासिक धरोहर अथवा पर्यटन स्थल पर जरूर आयोजित हो। बैठक में बताया गया कि गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के लिए योग की व्यक्तिगत श्रेणी की गतिविधि 14 जून को भी होगी जिससे लोग टोल-फ्री नंबर 18003157008 पर पंजीयन करवा सकते हैं। इस दिन यह आयोजन सुबह 6.15 से 7.35 बजे तक होगा।

मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि प्रभारी मंत्री से समन्वय कर कलेक्टर्स विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तक होने वाली सभी गतिविधियों के लिए प्लान तैयार करें। उन्होंने पिछले वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम में मध्यप्रदेश की देश में टॉप रैंक होने पर बधाई देते हुए कहा कि इस वर्ष भी प्रदेश को अग्रणी रखने के लिए पूरी प्लानिंग से नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में पौध-रोपण किया जाए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5 जून को भोपाल से अभियान का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान पूरे प्रदेश में जल चेतना और पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। पौध-रोपण जियो टैगिंग और क्यू आर कोड के साथ किया जाएगा। इस गतिविधि के तहत स्वच्छता अभियान चलाकर ठोस और प्लास्टिक अपशिष्ट की सफाई के साथ जल स्त्रोतों की सफाई और गहरीकरण के कार्य भी किए जाएंगे।

मुख्य सविच जैन ने 12 से 18 जून की अवधि में हर ब्लाक में 3 दिवसीय जनकल्याण शिविर लगाने पर सर्वाधिक फोकस करने के कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हितग्राही का योजनाओं के लिए चयन और प्रचलित योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने में पूरी गंभीरता बरतें। उन्होंने इस दौरान लोक सेवा गारंटी में प्राप्त शिकायतों के साथ ही समाधान एक दिन में प्राप्त आवेदनों का संतुष्टि पूर्ण समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रयास हो कि समय-सीमा में ही आवेदकों की जायज मांगो और शिकायतों का समाधान हो जाए। उन्होंने कहा है कि संबंधित विभाग संवदेनशील रहें और यह सुनिश्र्चित करें कि कोई भी वंचित पात्र हितग्राही शासन की योजनाओं के लाभ से नहीं छूटे।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि 19 और 20 जून को हर जिले में अनिवार्य रूप से प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी और कार्यशालाएं दो-दो स्थानों पर आयोजित की जाएं। उन्होंने कृषि भूमि को अधिक उपजाऊ बनाए रखने के लिए सही अर्थों में फर्टिलाइजर के उपयोग को हतोत्साहित करने और प्राकृतिक खेती को अपनाने पर फोकस करने के लिए कहा है। संपूर्ण प्रदेश में अभियान के अंतिम दिन 21 जून को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम को समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से देश में अग्रणी बनाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, संजय शुक्ला, श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

बुरहानपुर में आंधी-बारिश से तबाह केला फसल, CM मोहन यादव ने तय की मुआवजा राशि

बुरहानपुर 
 तेज आंधी और बेमौसम के कारण बुरहानपुर जिले में केले की फसलों को भारी नुकसान हुआ. खासकर शाहपुर और खकनार तहसील क्षेत्रों में फसलें तबाह हो गईं. किसान बर्बादी की कगार पर हैं. संकट की इस घड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के जख्मों पर मरहम लगाया है. उन्होंने कलेक्टर को तुरंत सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं. अब उम्मीद है कि किसानों को जल्द ही 2 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिल सकता है। 

सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल मिले मुख्यमंत्री से
किसानों की मांगों को लेकर भोपाल में मंगलवार को खंडवा-बुरहानपुर से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट की. उन्होंने मुख्यमंत्री को बुरहानपुर जिले के विभिन्न गांवों में आई प्राकृतिक आपदा की स्थिति से अवगत कराया. सांसद ने नुकसान की जानकारी उपलब्ध कराई. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुरवासियों के नाम संदेश जारी किया। 

बुरहानपुर कलेक्टर को सर्वे कराने के निर्देश
सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र पाटिल ने बताया “प्राकृतिक आपदा से जिलेभर में भारी नुकसान हुआ है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टर हर्ष सिंह को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र सर्वे कर राहत एवं सहायता कार्यों को तत्परता से करने को कहा है. इसके अलावा खंडवा जिले की ग्राम पंचायत हंडियाखेड़ा में हुई आगजनी की घटना के बारे में भी जिक्र किया है. हंडियाखेड़ा में 20 से अधिक आवासीय मकान प्रभावित हुए हैं। 

विधायक अर्चना चिटनीस पहुंची खेतों में
मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक अर्चना चिटनीस ने लोनी और बिरोदा गांव के खेतों का जायजा लिया. वह प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खेतों में पहुंची. किसानों से सीधा संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनी. अर्चना चिटनिस ने कहा “किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं. प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और किसानों को राहत दिलाना हमारी प्राथमिकता है। 

पिछली बार 2 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिला
मध्य प्रदेश सरकार ने पिछली बार केला फसल नुकसान का मुआवजा बढ़ाया था, अब प्रभावित किसानों को उनकी फसल नुकसानी 2 लाख रुपये तक प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिलता है, इस बार जिलेभर भारी नुकसान हुआ है, जिसके कारण अब प्रभावित किसानों ने मुआवजा राशि को दोगुना करने और मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू किए जाने की मांग उठाई है। 

लोनी गांव के किसान हेमंत पाटिल और बिरोदा गांव के किसान भास्कर झोपे ने सरकार से मुआवजा बढ़ाकर देने की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि जिले में एक सप्ताह के भीतर तीसरी बार नुकसान हुआ है, इससे किसानों की कमर टूट गई है. किसान सदमे में हैं। 

बुरहानपुर के कई गांवों में फसलें तबाह
बीते शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को बे-मौसम बारिश और तेज तूफान किसानों की फसलों पर आफत बनकर बरसे. इस बार फिर प्राकृतिक आपदा से सैकड़ों किसान प्रभावित हुए हैं. शाहपुर क्षेत्र के खामनी, भावसा, मोहद सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों में फसल बर्बादी हो चुकी है. इसी तरह आदिवासी बाहुल्य खकनार क्षेत्र के दर्यापुर, सिंधखेड़ा, सिरपुर, टेंभी, मांजरोद कला, मांजरोद खुर्द, ढाबा, डोईफोडिया सहित अन्य गांवो में किसानों की खड़ी फसल गिर गई है। 

इंदौर नगर निगम में 92 करोड़ का फर्जी बिल घोटाला, ED ने कसा शिकंजा; 3 आरोपी गिरफ्तार

इंदौर 

दौर नगर निगम के चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड और निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ED की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी प्रमाण सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी कर अर्जित राशि से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी गईं। इसी के तहत 43 संपत्तियों को अटैच किया गया है।

फर्जी बिलों के जरिए निकाली गई करोड़ों की राशि
जांच में सामने आया है कि ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर ऐसे कामों के भुगतान मंजूर कराए, जो या तो धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर वास्तविक कार्य की तुलना में कई गुना अधिक दर्शाए गए।

ED के अनुसार कई प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपएका भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर जांच के दौरान संबंधित कार्यों का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जांच के प्रमुख बिंदु

    करीब 92 करोड़ रुपएके कथित घोटाले के साक्ष्य मिले।
    पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार।
    स्पेशल कोर्ट ने तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर की।
    मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की 43 संपत्तियां अटैच।
    फर्जी निर्माण कार्यों और जाली बिलों के माध्यम से राशि निकाले जाने का आरोप।
    अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की भूमिका जांच के दायरे में।

घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद
ED की कार्रवाई के बाद नगर निगम के /यह चर्चित घोटाले में फिर चर्चाओं में है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से रुपयों के लेन-देन, संपत्तियों की खरीद और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

MP में फिर बनेगा स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, 23 साल बाद मोहन सरकार की बड़ी तैयारी

भोपाल 
म.प्र. के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर सहमति बन चुकी है। वर्तमान में जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों के भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े करीब साढ़े चार लाख मामले लंबित हैं। ट्रिब्यूनल के गठन से इन मामलों का अलग से और तेजी से निपटारा हो सकेगा। दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान इसे बंद कर दिया गया था जिसे अब एक नए स्वरूप में फिर से चालू किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) गठित करने की तैयारी में है।

इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच बनी सहमति बन चुकी है। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसके गठन का खाका तैयार करने में जुटा है। उधर, एमपी हाईकोर्ट में पेंडिंग केस बढ़ने के कारण न्यायाधीशों के नए पद सृजित किए जाने के प्रस्ताव भी सरकार तक पहुंचे हैं।

राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन की कवायद को लेकर सरकार का मानना है कि इससे एमपी के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों और शिकायतों के मामले कोर्ट के बजाय ट्रिब्यूनल के जरिए निराकृत हो सकेंगे।

सरकार का यह भी मानना है कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (एसएटी) के गठन के बाद एमपी के मुख्य हाईकोर्ट जबलपुर, खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में हो सकेगी। ऐसे में इन न्यायालयों पर पड़ने वाले न्यायालयीन मामलों का बोझ कम हो सकेगा।

कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल के फैसले की अपील के लिए ही किए जा सकेंगे। सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी मिलते ही तीनों ही न्यायालय में कर्मचारियों से संबंधित साढ़े 4 लाख मामलों की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से इस फैसले को जल्दी ही लागू करने के संकेत भी दिए हैं।

दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की वर्किंग की स्टडी
मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश के एसएटी के गठन के पहले दूसरे राज्यों में संचालित राज्य प्रशासनिक अधिकरण की वर्किंग और वक्त के हिसाब में किए गए बदलाव की स्टडी भी करने का निर्णय लिया है।

इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की जानकारी लेकर एमपी की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करेंगे जिसे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। फिर इसे विधानसभा में विधेयक लाकर मंजूरी दी जाएगी।

दिग्विजय सरकार में बंद किया गया था प्रशासनिक ट्रिब्यूनल
मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को राज्य सरकार ने 2001 में ही बंद कर दिया था। इसके पीछे तब की दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा एमपी का पुनर्गठन और प्रशासनिक कारण बताए गए थे।

इसके बाद राज्य सरकार के आग्रह पर भारत सरकार द्वारा एक अधिसूचना के माध्यम से 17 अप्रैल 2003 को आधिकारिक रूप से ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था।

13 साल ही काम कर पाया था ट्रिब्यूनल
इस अधिकरण को राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 4(2) के अंतर्गत 29 जून 1988 को स्थापित किया गया था। इसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों का निपटारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य बेंच (जबलपुर) और खंडपीठों (इंदौर और ग्वालियर) द्वारा किया जाता है।

मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण राज्य के कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में त्वरित और सस्ता न्याय दिलाने के लिए यह एक प्रमुख संस्था थी जिसमें वर्ष 2001 से काम बंद हुआ और 2003 में केंद्र ने इसको मंजूरी दे दी थी।

भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवाद, शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार
जब यह ट्रिब्यूनल काम कर रहा था तो इसमें उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा न्यायिक व प्रशासनिक सदस्य नियुक्त किए जाते थे। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती थी।

ट्रिब्यूनल को राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवादों और शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार था।

इसमें यह व्यवस्था भी थी कि ट्रिब्यूनल के निर्णयों के खिलाफ अपील सीधे उच्च न्यायालय में की जा सकती थी। प्रशासनिक न्याय अधिकरण को जब बंद किया गया था, तब प्रदेश में कर्मचारियों से संबंधित लंबित मामलों की संख्या 30 हजार थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया था।

 

भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर बड़ा एक्शन, कोलार की 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी

भोपाल

भोपाल प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कोलार इलाके की 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें 15 दिनों के भीतर संबंधित अनुमति दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है. पूरे शहर में कुल 576 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, और उनसे जुड़े मामलों के संबंध में अब तक 300 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. कॉलोनी सेल की एक बैठक के दौरान, सभी ज़ोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करें, जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। 

हालांकि पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। शहर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गईं और बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज हुईं, लेकिन किसी भी मामले में कार्रवाई अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच सकी।

आंकड़ों में सख्ती, जमीनी स्तर पर असर नहीं
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों के तहत राहत देते हुए वैधीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया। बाकी कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए।

300 एफआईआर दर्ज, फिर भी नहीं हुई गिरफ्तारी
अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई जगहों पर केवल औपचारिक कार्रवाई के तहत बाउंड्रीवाल या निर्माण के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में विकास कार्य लगातार जारी रहे।

आंकड़ों में बड़ी कार्रवाई, जमीन पर नतीजे शून्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों में छूट देकर वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई। शेष कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए।

300 एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी एक भी नहीं अवैध कॉलोनियों के मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई स्थानों पर केवल प्रतीकात्मक तौर पर बाउंड्रीवाल या निर्माण का हिस्सा तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में गतिविधियां जारी रहीं।

कोलार की इन 15 कॉलोनियों पर कार्रवाई नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र में 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा क्षेत्र की कई निर्माणाधीन कॉलोनियां शामिल हैं। संबंधित कॉलोनाइजरों से स्वीकृत नक्शे, डायवर्जन और अन्य वैधानिक अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए हैं।

फिर शुरू हुआ नोटिस अभियान 1 जून को हुई कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध निर्माण या बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।

कोलार क्षेत्र की 15 कॉलोनियां जांच के दायरे में
नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र के रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा सहित विभिन्न इलाकों में विकसित हो रही 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। कॉलोनाइजरों से सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है।

इन कॉलोनाइ्रजर्स को नगर निगम का नोटिस
मनीष शर्मा (चित्रांश ग्रुप, ग्राम रतनपुर), खान, (राधापुरम, ग्राम बैरागढ़ चीचली), दूलीचंद यादव (माइल स्टोन स्कूल के पास, ग्राम अकबरपुर), संजय राठौर, (ऐन्जल होम्स कान्हाकुंज के पास, ग्राम अकबरपुर), घनश्याम पाटीदार (ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन पलिया, (हेवेन्स पार्क, ग्राम बैरागढ़ चीचली),चंदप्रताप सिंह, (कुसुमा विहार, ग्राम बैरागढ़ चीचली), राघवेंद्र सिंह (ग्राम बैरागढ़ चीचली), दीपक शर्मा, (हिल्स व्यू सिटी, ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन मारन (दुर्गा विहार कॉलोनी, नयापुरा कोलार रोड), दिनेश पाल (व्यंकटेश्वर धाम, नयापुरा कोलार), रमेश मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), गोविंद मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), अशोक पवार (ग्राम बैरागढ़ चीचली) और अशोक मीणा (सांई रेसीडेन्सी, ग्राम बैरागढ़ चीचली)

बाहरी दीवारें गिराकर खानापूर्ति
रिकॉर्ड बताते हैं कि अवैध कॉलोनियों पर अब तक 300 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद एक भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई और किसी भी मामले में अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर दीवारें गिराकर खानापूर्ति की गई।

सिटी प्लानर अनिल साहनी के अनुसार 1 जून को हुई 10 सदस्यीय कॉलोनी सेल की बैठक के बाद 15 नए नोटिस जारी किए गए हैं। सेल में जिला प्रशासन, नगर निगम, टीएंडसीपी, सहकारिता और भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

जोन अधिकारी बना रहे कार्रवाई की सूची सभी जोन अधिकारियों को अवैध कॉलोनियों की लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार के निर्माण की सूचना मिलने या संदिग्ध पाए जाने पर उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – नीरज आनंद लिखार, ग्राम तथा नगर निवेश

सभी ज़ोन को मिले जांच और नई सूची बनाने के निर्देश

कॉलोनी सेल की बैठक में अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि आम जनता की गाढ़ी कमाई को ठगने वाले भू-माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। सभी जोन के अधिकारियों को अपने इलाकों में सक्रिय अवैध कॉलोनियों की पूरी जांच करने और उनकी सूची अपडेट करने को कहा गया है। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने से पहले नगर निगम या रेरा (RERA) से उसके वैध होने की जांच जरूर कर लें।

फिर शुरू हुआ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान
1 जून को आयोजित कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों और संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा से युवा प्रेरणा लें : राज्यपाल पटेल

हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा से युवा प्रेरणा लें : राज्यपाल पटेल

सप्रे संग्रहालय में राज्यपाल पटेल की जीवनी का हुआ लोकार्पण
राज्यपाल ने पोस्टर प्रदर्शनी : “पुरखों को प्रणाम” का किया अवलोकन

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का प्रारंभिक काल अत्यंत चुनौती पूर्ण था। कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत की अनेक कठिनाईयों के बावजूद पत्रकारिता के आदर्शों और शुचिता को बनाए रखा। हिन्दी पत्रकारिता की इसी गौरवशाली परंपरा से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

राज्यपाल पटेल बुधवार को “हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव, पुरखों को प्रणाम : पोस्टर प्रदर्शनी” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा किया गया है। राज्यपाल ने महान पूर्वजों के स्मरण की अनुकरणीय पहल के लिए संस्थान को बधाई और साधुवाद दिया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि ऐतिहासिक हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं और युग निर्माता संपादकों की पोस्टर प्रदर्शनी, पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक ले जाने का प्रेरक प्रयास है। प्रदर्शनी का आयोजन, राष्ट्र धर्म और जन सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले युग निर्माता संपादकों के त्याग और समर्पण को सजीव कर दर्शक का मन उन सभी महान विभूतियों की साधना और समर्पण के प्रति आदर भाव से भर देता है।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि पत्रकारिता कोई साधारण व्यवसाय नहीं, यह समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। गौरव की बात है कि हिन्दी पत्रकारिता ने अपने आरंभ से ही समाचार प्रसार की सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य किया। समाज के दिशा दर्शन, जनमत को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के कठिन दौर में भी हिन्दी पत्रकारिता ने जन जागरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने में कारगर भूमिका निभाई है। यही कारण है कि हिन्दी पत्रकारिता का योगदान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा उसने विशाल पाठक वर्ग तैयार कर ज्ञान का प्रसार भी है।

हिन्दी पत्रकारिता को डिजिटल माध्यमों और युवाओं से जोड़ना जरूरी

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता आज भी हमारे लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने, नागरिक चेतना जगाने और राष्ट्र निर्माण प्रयासों में प्रभावी भूमिका निभा रही है। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में हिन्दी पत्रकारिता को वीडियो, पॉडकास्ट, वेबसाइट और मोबाइल मंचों के माध्यम से युवा पीढ़ी से जोड़ना आवश्यक है। पत्रकारों का आह्वान किया कि युवाओं को पत्रकारिता की विश्वसनीयता, सत्य निष्ठा, निष्पक्षता के मूल्यों की प्रेरणा दें। उनमें नवाचार, कौशल विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भाव और भावनाएं विकसित करें। अपनी लेखनी से सामाजिक सरोकारों और वंचितों के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत बनाए।

राज्यपाल ने जीवनी के लोकार्पण के लिए माना आभार

कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक “पीर पराई जाने रे” का लोकार्पण किया गया। पुस्तक का लेखन लोकभवन की कंट्रोलर श्रीमती शिल्पी दिवाकर और मुद्रण-प्रकाशन माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा किया गया है। राज्यपाल पटेल ने जीवनी लेखन, प्रकाशन से संबंधित सभी लोगों का आभार माना।   

पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन : महापौर श्रीमती राय

महापौर श्रीमती मालती राय ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। हमारी ज्ञान परंपरा में भी देखा जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल पटेल के जन कल्याण प्रयासों में सक्रियता, सहयोग और संवेदनशीलता की सराहना की। वरिष्ठ पत्रकार और संपादक महेश श्रीवास्तव ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, व्यावसायिकता आदि की चुनौतियों के संदर्भ में विचार व्यक्त किए।

राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने कहा कि देश में पत्रकारिता की समृद्ध संस्कृति है। इसकी झलक पौराणिक ग्रंथों के संदर्भ से लेकर आधुनिक विकास यात्रा मिलती है। महाभारत के पात्र संजय को आधुनिक लाइव प्रसारण का अग्रदूत माना जा सकता है, क्योंकि वे धृतराष्ट्र को युद्ध का प्रत्यक्ष वर्णन सुनाते थे। नारद ऋषि ने लोक-कल्याण के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान किया, उसी परंपरा को आज पत्रकार आगे बढ़ा रहे हैं।

राज्यपाल पटेल का माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल को हिन्दी भवन द्वारा पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेषांक भेंट किया गया।

स्वागत उद्बोधन विजयदत्त श्रीधर ने दिया। आभार प्रदर्शन डॉ. मंगला ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में लोकभवन के अधिकारी, जनसंपर्क विभाग के सेवा निवृत्त अपर संचालक सुरेश गुप्ता, हिन्दी पत्रकारिता से जुड़े विद्वान, पत्रकार और साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

 

31 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण की धड़कन रोकने से हाईकोर्ट का इंकार, दुष्कर्म पीड़िता मामले में बड़ा फैसला

जबलपुर 

हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक होने के कारण गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया। बता दें कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की अनुमति के लिए मंडला जिला न्यायालय द्वारा भेजे गए प्रकरण की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में हाईकोर्ट कर रहा था। पीड़िता की उम्र 15 साल 10 माह है और मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद एकलपीठ ने पाया कि 27 अप्रैल 2026 की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की गर्भावस्था 26 हफ़्ते और 5 दिन थी। मेडिकल जांच को हुए 32 दिनों से अधिक का समय हो गया है। वर्तमान में उसकी गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक है। उसका हीमोग्लोबिन 7.5 है। मेडिकल बोर्ड की राय के अनुसार भ्रूण जीवित है और यह एक व्यवहार्य गर्भावस्था है। इस चरण में गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करना संभव नहीं है।

एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता भी नहीं चाहती थी कि यह न्यायालय ऐसा कोई निर्देश जारी करे। सुनवाई के दौरान उसने न्यायालय को इस बारे में सूचित किया था। दिल की धड़कन रोकने का निर्देश न होने की स्थिति में जीवित भ्रूण को जीवन भर शारीरिक और मानसिक विकलांगता का गंभीर खतरा बना रहेगा। मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टें अपने आप में सब कुछ स्पष्ट कर देती हैं। बच्चे का जन्म जीवित अवस्था में होता है, तो राज्य उस बच्चे की पूरी देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 

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