आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार : मंत्री टेटवाल

भोपाल 

कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गौतम टेटवाल ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार हैं। वर्तमान डिजिटल युग में डेटा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा बन चुका है।इसके संरक्षण और सुरक्षित उपयोग में साइबर सुरक्षा की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सैनिक देश की भौतिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राष्ट्र की डिजिटल सीमाओं के प्रहरी हैं।

मंत्री  टेटवाल शुक्रवार को ग्लोबल स्किल पार्क, भोपाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 के दूसरे दिन आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न तकनीकी एवं इंजीनियरिंग संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

मंत्री  टेटवाल ने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नवाचार को अपनाने, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने, रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजक बनने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और तकनीकी रूप से सशक्त मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

एमपीएसईडीसी की मुख्य महाप्रबंधक सु शिवांगी जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश को प्रौद्योगिकी एवं नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एसएसआरजीएसपी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गिरीश शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा उद्योगोन्मुख कौशल विकास पर बल दिया।

एसएसआरजीएसपी-गोप के वरिष्ठ निदेशक  नीरज सहाय ने ग्लोबल स्किल पार्क को भारत का पहला एकीकृत बहु-कौशल प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य वैश्विक मानकों के अनुरूप दक्ष एवं भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में “साइबर डिफेंस फंडामेंटल्स” विषय पर विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों, साइबर खतरों तथा सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को मालवेयर, रैनसमवेयर, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और इनसाइडर रिस्क जैसे प्रमुख साइबर खतरों से अवगत कराया गया। साथ ही साइबर किल चेन फ्रेमवर्क के माध्यम से साइबर हमलों की प्रक्रिया और उन्हें रोकने के उपायों की जानकारी भी दी गई।

सत्र में ‘डिफेंस इन डेप्थ’ की अवधारणा, सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, साइबर हाइजीन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट एवं पैचिंग जैसी सुरक्षा प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं करियर अवसरों, विशेष रूप से एसओसी एनालिस्ट जैसी उभरती भूमिकाओं की जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है।

 

मध्य प्रदेश में 65 साल बाद सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव, हत्या और भ्रष्टाचार के दोषी होंगे अपात्र

भोपाल

 राज्य सरकार 65 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। वर्ष 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी।
परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण को लेकर बड़ा फैसला

परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा।

नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार

प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए।
अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम

एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है।
 

वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास

वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा।

 

ऊर्जा मंत्री तोमर ने विषम परिस्थितियों में बिजली कार्मिकों द्वारा व्‍यवधानों के त्‍वरित निराकरण और उपभोक्‍ताओं के धैर्य की सराहना की

भोपाल

ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ने बीते गुरूवार की शाम राजधानी में तेज आंधी, तूफान एवं बारिश के दौरान प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न विद्युत व्यवधान के दौरान बिजली उपभोक्‍ताओं के अपार धैर्य और परिपक्वता की प्रशंसा की है। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के दौरान उपभोक्‍ताओं का सहयोग सराहनीय है। आमजन और बिजली उपभोक्‍ताओं का यह विश्वास ही बिजली कार्मिकों को विपरीत परिस्थितियों में भी त्वरित कार्य करने की ऊर्जा देता है।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने भोपाल शहर की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बहाली के दौरान बिजली उपभोक्‍ताओं द्वारा किए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने सभी उपभोक्‍ताओं को अनवरत बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए कृतसंकल्पित है। प्रबंध संचालक ने बिजली कंपनी के सभी मैदानी अधिकारियो एवं कर्मचारियों की तत्परता सजगता और सक्रियता से न्यूनतम समय मे बिजली आपूर्ति बहाल करने पर प्रशंसा की है।

भोपाल शहर की विद्युत आपूर्ति सामान्‍य

 भोपाल शहर में बीते गुरूवार को सायं लगभग 7:30 बजे 70-80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली अत्यंत तेज आंधी एवं भारी वर्षा के कारण बाधित हुई विद्युत आपूर्ति को बहाल कर दिया गया है। तेज हवाओं के चलते बड़ी संख्या में वृक्ष उखड़कर एवं उनकी शाखाएं टूटकर विद्युत लाइनों पर गिरने से अनेक स्थानों पर विद्युत लाइनें एवं पोल क्षतिग्रस्त होने के कारण शहर के 350 से अधिक 11 केवी फीडर बाधित हुए थे।  

मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मैदानी अमले ने चुनौतीपूर्ण एवं विकट परिस्थितियों के बावजूद तत्‍परता से युद्धस्तर पर कार्य करते हुए चरणबद्ध तरीके से विद्युत आपूर्ति बहाल की गई। रात्रि 8:30 बजे तक 165 फीडरों की आपूर्ति पुनः प्रारंभ कर दी गई। इसके पश्चात रात्रि 9:30 बजे तक अतिरिक्त 66 फीडरों की विद्युत आपूर्ति भी बहाल कर दी गई। पूरी रात सतत कार्य करते हुए सुबह तक सभी प्रभावित 11 केवी फीडरों के अधिकांश भागों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई। कंपनी की 10 से अधिक विशेष टीमों ने  विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावित विद्युत आपूर्ति शुक्रवार दोपहर तक पूरी तरह बहाल कर दिया।  कंपनी की लगभग 30 से अधिक टीमों ने उपभोक्‍ताओं की व्‍यक्तिगत शिकायतों (एफओसी) को भी शत-प्रतिशत निराकृत कर दिया है। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिलीं पर्वतारोही अंजना यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को रायसेन जिले के सेमरी गांव की रहने वाली पर्वतारोही बेटी सुश्री अंजना यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुश्री अंजना को उसकी अतुल्नीय उपलब्धि के लिए बधाई दी। उल्लेखनीय है कि सुश्री अंजना यादव ने हाल ही में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउण्ट एवरेस्ट (कुल 8848.86 मीटर ऊंची) के टॉप पाइंट पर सफलतापूर्वक फतह हासिल कर देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रौशन किया है।

 

डिजिटल सुशासन और साइबर सुरक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर हुआ पुरस्कृत मध्यप्रदेश : मंत्री विजयवर्गीय

भोपाल 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने डिजिटल सुशासन, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा तथा नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व नवाचार किए हैं। यह राष्ट्रीय पुरस्कार मध्यप्रदेश द्वारा उत्कृष्ट नागरिक सेवाओं के वितरण और तकनीकी सुधारों की दिशा में किए गए निरंतर प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का एक गौरवशाली प्रतीक है।

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन को मध्यप्रदेश पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रभावी रूप से आगे बढ़ा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग नागरिकों को उत्कृष्ट, सरल एवं पारदर्शी डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए निरंतर कार्यरत है और साथ ही साइबर सुरक्षा एवं डेटा संरक्षण के प्रति भी समान रूप से संवेदनशील है। विभाग का उद्देश्य केवल सेवाओं का डिजिटलीकरण करना नहीं, बल्कि प्रदेश में एक ऐसा सुरक्षित डिजिटल इको सिस्टम स्थापित करना है, जहां तकनीक, सुरक्षा और नागरिकों के विश्वास साथ आगे बढ़ें।

मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा है कि ई-नगर पालिका परियोजना को नागरिक सेवाओं को सरल, तेज़ एवं पारदर्शी बनाने एवं नागरिकों के डेटा की सर्वोच्च सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म आधुनिक क्लाउड अवसंरचना, जीरो ट्रस्ट ऑर्किटेक्चर, डेटा एन्क्रिप्शन, निरंतर साइबर निगरानी और उन्नत साइबर सुरक्षा मानकों पर आधारित है। इससे नागरिकों की जानकारी की गोपनीयता, अखंडता एवं उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है, साथ ही सभी आवश्यक सुरक्षा एवं अनुपालन मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। विभाग द्वारा संचालित ई- नगर पालिका परियोजना को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाना प्रसन्नता का विषय है।

मंत्री  विजयवर्गीय ने ई-नगरपालिका 2.0 की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि इसके अंतर्गत जीआईएस आधारित संपत्ति प्रबंधन, क्लाउड आधारित डेटा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाएं और उमंग सहित विभिन्न शासकीय डिजिटल प्लेटफॉर्मों से एकीकरण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में इस सिस्टम के माध्यम से 20 से अधिक मॉड्यूल एवं 24 नागरिक सेवाओं का एकीकृत संचालन सफलता पूर्वक किया जा रहा है, जिससे नगरीय निकायों की कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश में नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा और ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।

मंत्री  विजयवर्गीय ने विभाग की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए उनके उत्कृष्ट व समर्पित कार्यों की सराहना की और भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि यह राष्ट्रीय पुरस्कार पूरी टीम के कड़े परिश्रम, नवाचार और राज्य में पारदर्शी डिजिटल सुशासन स्थापित करने के संकल्प का एक सुखद प्रतिफल है।

 

मंत्री टेटवाल ने वर्ल्ड स्किल्स फाइनलिस्ट् अजय अहिरवार से किया वर्चुअल संवाद

मंत्री टेटवाल ने वर्ल्ड स्किल्स फाइनलिस्ट् अजय अहिरवार से किया वर्चुअल संवाद

वर्ल्ड स्किल्स काम्पिटिशन सितम्बर 2026 शंघाई चीन में होंगे शामिल
ग्लोबल स्किल्स चैलेंज जून 2026, ऑस्ट्रेलिया में भी होंगे शामिल

भोपाल

कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली युवा अजय अहिरवार से संवाद किया। अजय अहिरवार ने इंडिया स्किल्स नेशनल काम्पिटिशन 2025-26 में ब्रिकलेइंग स्किल में स्वर्ण पदक अर्जित कर मध्यप्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है तथा अब उनका चयन वर्ल्ड स्किल्स काम्पिटिशन 2026 के लिए हुआ है, जो सितम्बर 2026 में शंघाई (चीन) में आयोजित होगी। अजय अहिरवार वर्तमान में वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता की तैयारी के लिये कानपुर में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उनका चयन ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 के लिए भी हुआ है, जो 23 से 29 जून 2026 तक ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होगी, जिसमें वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

मंत्री टेटवाल ने अजय को उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अजय अपनी प्रतिभा मेहनत एवं समर्पण के बल पर विश्व मंच पर भारत एवं मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि अजय की सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है तथा यह सिद्ध करती है कि प्रतिभा और परिश्रम के बल पर सीमित संसाधनों के बावजूद वैश्विक स्तर तक पहुंचा जा सकता है।

अजय की उपलब्धियों तथा उनकी तैयारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड द्वारा उन्हें विशेष वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है जिससे वे आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें।

मध्यप्रदेश शासन युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है तथा भविष्य में भी ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

 

वृक्ष धरती को केवल हरियाली नहीं देता, बल्कि मानवता को जीवन, ऊर्जा और भविष्य प्रदान करता है : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

वृक्ष धरती को केवल हरियाली नहीं देता, बल्कि मानवता को जीवन, ऊर्जा और भविष्य प्रदान करता है : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा किवृक्ष धरती को केवल हरियाली नहीं देता, बल्कि मानवता को जीवन, ऊर्जा और भविष्य प्रदान करता है। उन्होंनेविश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत भोपाल के महाराणा प्रताप मंडल में आरोग्य वाटिका में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहभागिता कर पौध-रोपण किया।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की भी सबसे बड़ी पूंजी है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वह प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। एक पौधा लगाना केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि स्वच्छ वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रेरणादायी संकल्प ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़कर हम न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, बल्कि अपनी मातृशक्ति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता भी व्यक्त कर रहे हैं। आईये, हम सभी अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लें और हरित, स्वच्छ एवं समृद्ध भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, प्रदेश मंत्री एवं राज्यसभा प्रत्याशी रजनीश अग्रवाल, पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह, महापौर श्रीमती मालती राय एवं टोली के सदस्य उपस्थित रहे।

गर्मियों की छुट्टियों में जैन बच्चे सीख रहे सात्विक जीवन का पाठ — अभिषेक पूजा से शुरू होती है हर सुबह

  • बाल एवं युवा शिक्षण शिविर में प्रतिदिन स्वाध्याय और सामूहिक आराधना के साथ बच्चे जीवन को सही दिशा देने का अभ्यास कर रहे हैं।

विवेक झा, भोपाल। जहाँ एक ओर गर्मी की छुट्टियों में अधिकांश बच्चे मोबाइल और टेलीविजन में समय बिताते हैं, वहीं भोपाल के जैन समाज के बच्चों ने इस वर्ष की ग्रीष्मकालीन अवकाश को एक विशेष और सार्थक रूप दिया है। चौक जिनालय में आयोजित बाल एवं युवा शिक्षण शिविर में बच्चे प्रतिदिन प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र का अभिषेक पूजा अर्चना करके अपने दिन की शुरुआत करते हैं।

अष्ट द्रव्य से हुई प्रभु शांतिनाथ की आराधना

चौक जिनालय में शिविर के अंतर्गत बच्चों ने भक्तिभाव के साथ भगवान शांतिनाथ की अष्ट द्रव्य — जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप एवं फल — से पूजा अर्चना की। यह क्रिया केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को जैन सिद्धांतों के अनुरूप अपनी संपूर्ण दिनचर्या को ढालने का अभ्यास कराया जा रहा है। शिविर के दौरान दिन भर जैन आगम के अनुसार आचरण करना अनिवार्य है।

फास्ट फूड का त्याग, सात्विक जीवन का संकल्प

शिविर प्रभारी मोहित बड़कुल ने बताया कि इस शिविर में एक उल्लेखनीय बात यह रही कि अनेक बच्चों ने स्वेच्छा से फास्ट फूड और अन्य अनुपयोगी आहार का त्याग किया है। शिविर के माध्यम से बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि जीवन में सरलता और सात्विकता ही वास्तविक सुख का मार्ग है। प्रतिदिन सामूहिक स्वाध्याय एवं आराधना के सत्र आयोजित किए जाते हैं जिनमें सभी आयु वर्ग के बच्चे सक्रिय भागीदारी करते हैं।

बाहर से पधारे विद्वान दे रहे जीवन-दिशा

शिविर में बच्चों और युवाओं को जैन दर्शन एवं जीवन-मूल्यों की शिक्षा देने के लिए विशेष रूप से बाहर से विद्वान आमंत्रित किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से पं. अशोक मांगुलकर तथा पं. रितेश शास्त्री (इंदौर) शामिल हैं। ये विद्वान सभी आयु वर्गों को अत्यंत सरल और व्यावहारिक भाषा में जीवन की सही दशा और दिशा प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। अन्य विद्वान भी शिविर में नियमित योगदान दे रहे हैं।

संस्कृति और संस्कारों की रक्षा है मुख्य उद्देश्य

शिविर प्रभारी बड़कुल ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य परस्पर सहयोग की भावना को सुदृढ़ करते हुए भारत की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों की रक्षा करना है। शिविर में हर आयु वर्ग के प्रतिभागी सम्मिलित हैं — बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी एक साथ सीख रहे हैं। यह शिविर न केवल धार्मिक ज्ञान, बल्कि व्यावहारिक जीवनशैली के संस्कार भी प्रदान कर रहा है।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य

मुमुक्षु मंडल के अध्यक्ष अशोक जैन · मंत्री देवेंद्र बड़कुल · राजीव मोदी · अनुभव जैन · आशुतोष जैन · संजीव जैन एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

प्रदेश में सड़क एवं परिवहन नेटवर्क निर्माण के साथ हरित विकास को दिया जा रहा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में सड़क एवं परिवहन नेटवर्क निर्माण के साथ हरित विकास को दिया जा रहा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सड़क निर्माण में पर्यावरण संरक्षण के लिये 7,871 वृक्षों के स्थान पर 80 हजार पौधों का होगा रोपण
अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाये जायेंगे 10 हजार पौधे
मुख्यमंत्री के विजन को साकार करेगा अयोध्या बायपास परियोजना का ग्रीन मॉडल
मुख्य सचिव जैन ने की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के दिये निर्देश

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को पर्यावर्णीय संवेदनशीलता और दीर्घकालिक सतत विकास की अवधारणा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता आधुनिक सड़क एवं परिवहन नेटवर्क के निर्माण के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अयोध्या बायपास परियोजना इस सोच का उदाहरण है, जहाँ विकास और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगभग 10 हजार पौधे लगाकर इसे एक हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावर्णीय संतुलन को सुदृढ़ करने के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी नया आयाम प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बेहतर सड़क अधोसंरचना का निर्माण करना नहीं है, बल्कि ऐसी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना है जो आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों को भी पूरा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अयोध्या बायपास परियोजना प्रदेश में सतत एवं समावेशी विकास के मॉडल के रूप में स्थापित होगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य शासन द्वारा परियोजना के विभिन्न पहलुओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव जैन ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, उन्नयन एवं विस्तार कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान भोपाल की महत्वपूर्ण अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में अयोध्या बायपास की डिज़ाइन क्षमता लगभग 40 हजार वाहन प्रतिदिन की है, जबकि इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 45 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है। भोपाल के तेजी से हो रहे शहरीकरण और आसपास विकसित हो रहे नए आवासीय क्षेत्रों के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में बायपास का चौड़ीकरण न केवल यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह राजधानी क्षेत्र की भावी आवश्यकताओं को भी पूरा करेगा।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलित मॉडल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन को मूर्त रूप देते हुए अयोध्या बायपास परियोजना के अंतर्गत व्यापक पौधरोपण एवं हरित विकास योजना तैयार की गई है।

परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। इनमें से लगभग 10 हजार पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे, जिससे यह मार्ग भविष्य में एक आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा। इसके अतिरिक्त झिरनिया एवं झगरिया खुर्द क्षेत्रों में लगभग 70 हजार पौधों के रोपण की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। आगामी मानसून में प्रस्तावित यह व्यापक पौधरोपण अभियान भोपाल क्षेत्र में हरित आवरण के विस्तार और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पौधों के संरक्षण, देखभाल एवं अनुरक्षण की जिम्मेदारी आगामी 15 वर्षों तक एनएचएआई द्वारा वहन की जाएगी। इसके लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक अधोसंरचना निर्माण और पर्यावरणीय दायित्व एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता

मुख्य सचिव जैन ने अयोध्या बायपास परियोजना में भोपाल की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने के लिए की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन को अवगत कराया गया कि एनएचएआई और भोपाल नगर निगम के बीच निरंतर समन्वय स्थापित कर कार्य योजना तैयार की गई है। इसमें पाइप लाइन शिफ्टिंग सहित सभी तकनीकी कार्य चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। नगर निगम के तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में कार्य संपादित किए जाने से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान नागरिकों को पेयजल आपूर्ति संबंधी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

बैठक में बताया गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा एनएचएआई द्वारा प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक गतिविधियों, निवेश, पर्यटन तथा औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन अधोसंरचना के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

भोपाल
 विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसआई) ने 5 जून को भोपाल के गांधी भवन में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मणिपुर, असम, ओड़ीशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और पानी एवं वैश्विक गर्मी जैसे चार सत्रों में इस चर्चा को आयोजित किया गया।  

सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में काम से जुड़ी सेहत और सुरक्षा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, लाखों मजदूर उद्योगों, खनन, निर्माण, घरेलू काम और दूसरे अनौपचारिक क्षेत्रों में खतरनाक हालात का सामना करते हुये काम कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने मजदूरों की सेहत की सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों, काम से जुड़ी सुरक्षा के मानकों को बेहतर ढंग से लागू करने और संगठित प्रयास करने की जरूरत पर चर्चा की। सिलिकोसिस से प्रभावित कुछ मजदूरों ने अपनी कहानियां और मदद पाने में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया। ऐसे सम्मेलनों के महत्व को बताते हुए, अमूल्य निधि ने कहा कि हमें अपनी जागरूकता बढ़ानी होगी और पर्यावरण की रक्षा तथा काम से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाव के लिए मिलकर काम करना होगा।

व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ जगदीश पटेल ने कहा कि काम से जुड़े स्वास्थ्य खतरों के मामले में हर जगह जोखिम है, और हमें उनकी पहचान करने की जरूरत है। 90 से ज्यादा ऐसे काम हैं जिनसे सिलिकोसिस हो सकता है। 70 से ज्यादा देशों ने एस्बेस्टस पर रोक लगा दी है, भारत ने सिर्फ एस्बेस्टस की माइनिंग पर रोक लगाई है, लेकिन इसके इंपोर्ट की इजाजत है। काम से जुड़े खतरों के बारे में बात करते हुए सुश्री चुन्नी ने कहा कि काम के दौरान मजदूरों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। वे अपने अंग खो देते हैं और कुछ हादसों में उनकी जान भी चली जाती है। हम उन्हें मुआवजा और दूसरी तरह की मदद दिलाने में सहायता करते हैं।

दूसरा मुख्य सत्र “पर्यावरण, जलवायु और स्वास्थ्य” पर केंद्रित था, जिसमें खनन और उससे जुड़े उद्योगों में काम से जुड़े खतरों, पर्यावरण को हो रहे नुकसान, सुरक्षित पानी की चुनौतियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के असर पर चर्चा की गई। अरावली बचाने के संघर्ष में शामिल कैलाश मीणा ने कहा कि हमे अपने संसाधनों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हुये उसे संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। अरावली पहाड़ को जिस प्रकार से काटा गया है वो एक संकट पैदा कर रहा है। अपने विचार रखते हुए राजकुमार ने कहा कि हम तेजी से अपने प्राकृतिक संसाधन खो रहे हैं। 50 साल पहले हमारे पास 15 हजार नदियां थी जिसमे से 4500 नदियां खत्म हो चुकी है। भारत में वायु प्रदूषण से लगभग 20 लाख मौतें प्रत्येक वर्ष होती है। हमने हवा, पानी और मिट्टी केपी जहरीला बना दिया जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर होता है। राकेश दीवान ने कहा कि हमें आत्महंता समाज बनते जा रहे है, हमे उनसे सीखना होगा जिंहोने जंगल को आज हैती  बचा कर रखा है हमें उस पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए, जिसने हमारे पर्यावरण की रक्षा की है। 

आखिरी सत्र में भविष्य की व्यावसायिक स्वास्थ्य रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिसमें राज्य-स्तर पर किए जाने वाले कामों को मजबूत करना प्रमुख रहा। अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस 10 दिसंबर 2026 को जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में घोषणा पत्र जारी करते हुये आगामी कार्ययोजना कि रूपरेखा भी बताई गई जिसमें व्यावसायिक स्वास्थ्य की स्थितियों का अंकलन रिपोर्ट प्रस्तुत करना,घातक उद्योगों में कार्यरत मजदूरों के लिए बने कानून, नीति एवं सुरक्षा संबंधी प्रभावों का अंकलन रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। देश के 5 राज्यों में विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का स्वास्थ्य सर्वे कर स्थिति रिपोर्ट जारी किया जाएगा। साथी ही स्वास्थ्य सेवाओं और ईएसआई कि स्थिति का सर्वे भी किया जाएगा।  
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा इस वर्ष देश के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में स्वास्थ्य दिवस अभियान चलाया गया था जिसे और मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन में निर्णय लिया गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार कोर्स चलाया जाएगा, जिसका पहला कार्यक्रम श्रीनगर में 1-7 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।   
कार्यक्रम को सफल बनाने में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के उत्तरप्रदेश संजीव सिन्हा, ओड़ीशा के गोरांग महापात्रा, छत्तीसगढ़ के चंद्रकांत यादव, पुनिता कुमार, प्रकाश गार्डिया, दिल्ली से इफत राग, जम्मू कश्मीर के रही रियाज, राजस्थान कि हेमलता कंसोटिया, असम के मुकुट लोचन, मणिपुर के ऋषिकान्त आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।    

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