सहकारिता समाज के सामूहिक उत्थान का बड़ा माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सहकारिता क्षेत्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हमारी सरकार इसे और अधिक सशक्त बनाकर किसानों, ग्रामीणों तथा छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनायेगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता एक व्यवस्था ही नहीं, यह समाज के सामूहिक उत्थान का प्राचीन और बड़ा माध्यम है। हम इसे आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ जोड़कर नई ऊंचाइयों तक ले जायेंगे। उन्होंने कहा कि हम सहकारी मॉडल का समयबद्ध, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे आमजन को इसका वास्तविक और अधिकतम लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को सरल और प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे किसानों को ऋण, बीज, उर्वरक और विपणन जैसी सुविधाएं सहजता से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सहकारिता क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। नई योजनाओं के जरिए युवाओं और किसानों को जोड़कर सहकारिता को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की सहकारी संस्थाओं की दैनंदिन कार्यप्रणाली को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर इन्हें अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने के साथ ही इनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सहकारी संस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से नवाचार, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता दी जा रही है। हमारी सरकार सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। सहकारिता विभाग के सहयोग से हम किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जनजातीय अंचलों के विकास सहित ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं को भी गति दे रहे हैं।

सहकारिता की बेहतरी के लिए केंद्र सरकार से लगातार कर रहे समन्वय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सहकारिता को नई दिशा देने के लिए हमारी सरकार केंद्र सरकार से लगातार समन्वय कर रही है। हमने प्रदेश के 4 हज़ार 536 से अधिक पैक्स का सफलतापूर्वक कंप्यूटराइजेशन पूरा करा लिया है। इन सभी पैक्स की जानकारी केन्द्र सरकार की अपेक्षानुसार एनसीडी पोर्टल पर अद्यतन भी कर दी गई है। दूध (श्वेत) क्रांति 2.0 को प्रभावी एवं सफल बनाने तथा वित्तीय समावेशन के लिए दुग्ध समितियों एवं सदस्यों के खाते जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में खोले गये हैं। अन्य संस्थाओं को भी सहकारी बैंकों में लेन-देन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीसीएसएसएल) तथा मप्र राज्य सहकारी बीज संघ के मध्य एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। इससे करीब 17 करोड़ रुपए का व्यवसाय हुआ और 844 पैक्स द्वारा सदस्यता प्राप्त कर ली गई है। राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड (एनसीओएल) तथा मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ के मध्य भी समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। करीब 1335 पैक्स द्वारा इसकी सदस्यता ले ली गयी है। इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) और मप्र राज्य सहकारी संघ के साथ भी एक पृथक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो गया है। इसमें अबतक 1612 पैक्स द्वारा सदस्यता ले ली गयी है।

 

नरेला में बारिश पूर्व तैयारियों की जमीनी हकीकत जांचने निकले मंत्री सारंग

भोपाल 

आगामी मानसून को देखते हुए नरेला विधानसभा क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग रविवार सुबह स्वयं सड़कों पर उतरे और नरेला विधानसभा के प्रमुख नाले-नालियों की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान नगर निगम एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मंत्री  सारंग ने प्रभात चौराहा, महामाई की पुलिया, द्वारका नगर, भानपुर खंती सहित विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति देखी और अधिकारियों को बरसात के पहले सफाई और मरम्मत करने के निर्देश दिए।

सफाई व्यवस्था में लापरवाही पर अधिकारियों को लगाई फटकार

निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर नाले-नालियों की सफाई कार्य संतोषजनक नहीं पाए जाने पर मंत्री  सारंग ने नगरनिगम के अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले सभी नाले-नालियों की पूरी तरह सफाई होना अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री  सारंग ने कहा कि बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए, आम नागरिकों को बाढ़ जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़े, इसलिए पहले से ही पूरी तैयारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई युद्ध स्तर पर की जाए ताकि पानी की निकासी सुचारू बनी रहे।

पातरा नाले का किया विशेष निरीक्षण

दौरे के दौरान मंत्री  सारंग ने भोपाल शहर के सबसे बड़े पातरा नाले का भी निरीक्षण किया, जो नरेला विधानसभा क्षेत्र से होकर गुजरता है। मंत्री  सारंग ने कहा कि पातरा नाला पूरे भोपाल शहर की जल निकासी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि इसकी सफाई समय पर नहीं हुई तो बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

एनएचएआई के कार्य पर जताई नाराजगी

भानपुर क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान मंत्री  सारंग ने देखा कि एनएचएआई द्वारा निर्माणाधीन 10 लेन प्रोजेक्ट के कार्य के चलते पातरा नाले में बड़ी मात्रा में मिट्टी डंप की गई है। इस पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की और नगर निगम एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नाले में मिट्टी डंप होने से पानी का प्रवाह बाधित होगा और इसका असर पूरे भोपाल शहर पर पड़ेगा। बारिश के समय यह स्थिति बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सकती है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

 तत्काल शुरू कराया मिट्टी हटाने का कार्य

मंत्री  सारंग के निर्देश के बाद मौके पर ही पातरा नाले से डंप मिट्टी हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नाले की गहराई और चौड़ाई को बनाए रखते हुए सफाई कार्य तेजी से पूरा किया जाए। बारिश शुरू होने से पहले सभी संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि कहीं भी जलभराव की स्थिति निर्मित न हो।

नालों पर अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री  सारंग ने नालों पर हो रहे अतिक्रमण को भी गंभीर समस्या बताते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जहां कहीं भी नालों पर अवैध कब्जे या निर्माण हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। अतिक्रमण के कारण पानी की निकासी प्रभावित होती है और बारिश के दौरान इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर लिखित रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बारिश से पहले पूरी हो सफाई

मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मानसून आने से पहले सभी सफाई कार्य हर हाल में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि नगर निगम और जिला प्रशासन को समन्वय के साथ काम करते हुए सफाई व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को बारिश के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाना है और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी गंभीरता से कार्य किया जाएगा।

 

पीएम सूर्य घर योजना में 1.33 लाख से ज्यादा सौर संयंत्र स्थापित : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा को लेकर नागरिकों में उत्साह लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 33 हजार 121 सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। प्रदेश में कुल 498.03 मेगावॉट सौर क्षमता विकसित की जा चुकी है। साथ ही हितग्राहियों को अब तक 942.19 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है। ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि इस योजना से परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भर बन रहे हैं। पीएम सूर्य घर योजना मध्यप्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और आमजन को आर्थिक राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान के रूप में स्थापित हो रही है।

तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में उल्लेखनीय प्रगति

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी है। यहां 54 हजार 773 संयंत्र स्थापित किए गए। इससे 56 हजार 247 परिवारों को लाभ मिला है। क्षेत्र में 202.07 मेगावॉट क्षमता विकसित हुई है और 389.31 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी जारी की गई है।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में अब तक 47 हजार 734 सौर संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे 50 हजार 323 परिवार लाभान्वित हुए हैं। कंपनी क्षेत्र में 185.09 मेगावॉट क्षमता के संयंत्र स्थापित हुए हैं तथा 339.28 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी जारी की गई है।

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 30 हजार 614 सौर संयंत्र स्थापित किए गए, जिनसे 30 हजार 899 परिवार लाभान्वित हुए हैं। कंपनी क्षेत्र में 110.87 मेगावॉट क्षमता के संयंत्र स्थापित हुए हैं तथा 213.60 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी वितरित की गई है।

उपभोक्ताओं को मिल रहा सीधा लाभ

योजना के तहत 1 किलोवॉट सौर संयंत्र पर 30 हजार रुपये, 2 किलोवॉट पर 60 हजार रुपये तथा 3 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के संयंत्र पर 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इससे उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में उल्लेखनीय कमी आ रही है और वे स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

प्रदेश सरकार और विद्युत वितरण कंपनियां योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयासरत हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अधिकृत वेंडरों के माध्यम से ही सौर संयंत्र स्थापित कराएं तथा सब्सिडी प्राप्ति के लिए बैंक खाते, आधार कार्ड और बिजली कनेक्शन में दर्ज नाम एक समान रखें।

 

टीटी नगर स्टेडियम से गूंजा फिट इंडिया का संदेश मंत्री सारंग ने किया साइकिल रैली का शुभारंभ

भोपाल     

विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में रविवार सुबह फिटनेस और जागरूकता का उत्साह देखने को मिला। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम पहुंचकर “संडे ऑन साइकिल” अभियान का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस दौरान हजारों की संख्या में युवाओं, खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों, सामाजिक संगठनों, स्कूली विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने साइकिल रैली में भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

कार्यक्रम का आयोजन भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। विश्व साइकिल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य लोगों को फिटनेस, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। सुबह से ही टीटी नगर स्टेडियम परिसर में युवाओं और नागरिकों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। हाथों में फिट इंडिया और हेल्थ अवेयरनेस के संदेश लिए प्रतिभागियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में “फिट इंडिया मूवमेंट” को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है। “संडे ऑन साइकिल” उसी संकल्प का हिस्सा है, जिसके माध्यम से नागरिकों को स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल और व्यस्त जीवन में फिटनेस को दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद आवश्यक है और साइकिलिंग स्वास्थ्य के लिए सबसे सरल एवं प्रभावी माध्यमों में से एक है।

मंत्री  सारंग ने कहा कि साइकिल केवल फिटनेस का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी मजबूत संदेश देती है। इससे प्रदूषण कम होता है और व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल और स्क्रीन टाइम से बाहर निकलकर खेल, योग, साइकिलिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियों से जुड़ें। उन्होंने बताया कि “संडे ऑन साइकिल” अभियान आज केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के स्वस्थ भारत के विजन को साकार करने के लिए यह पहल जनभागीदारी के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों, खेल प्रशिक्षकों, फिटनेस क्लबों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों ने भाग लेकर फिट इंडिया के संदेश को मजबूती प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान पूरे टीटी नगर स्टेडियम क्षेत्र में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। प्रतिभागियों ने साइकिल रैली निकालकर “फिट रहो, स्वस्थ रहो” और “फिट इंडिया” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। मंत्री  सारंग ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि स्वस्थ युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं और मध्यप्रदेश सरकार युवाओं को खेल एवं फिटनेस से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इस आयोजन ने राजधानी भोपाल में फिटनेस और जनजागरूकता का सकारात्मक संदेश देने के साथ युवाओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।

 

“ज्ञानमेव शक्ति” की चेतना ही मनुष्य को नर से नारायण बनने का मार्ग करती है प्रशस्त : मंत्री परमार

भोपाल

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि भारतीय परम्परा में ज्ञान का सर्वोच्च स्थान रहा है। भारत का सनातन दर्शन केवल ज्ञान अर्जन का नहीं, बल्कि ज्ञान को साधना बनाकर आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त करने का दर्शन है। “ज्ञानमेव शक्ति” की चेतना से प्रेरित होकर “नर से नारायण” बनने का यह सतत उपक्रम ही भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महानता का आधार रहा है।

मंत्री  परमार रविवार को भोपाल स्थित रविन्द्र भवन के गौरांजनी सभागार में आयोजित “मध्यप्रदेश : वैश्विक बौद्ध धरोहर केंद्र (Madhya Pradesh as a Global Buddhist Heritage Hub)” विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश को वैश्विक बौद्ध धरोहर केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु आवश्यक प्रयासों एवं पहलों पर अपने विचार व्यक्त किए।

 परमार ने कहा कि भारत का मूल दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम्” का रहा है, जिसमें संपूर्ण सृष्टि के कल्याण का भाव निहित है। इसी सनातन विचारधारा को भगवान गौतम बुद्ध ने वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया।  परमार ने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े तीर्थस्थलों को आस्था एवं पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किए जाने से भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक वैभव विश्वमंच पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित होगा।  परमार ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु और विश्वमंच का मुकुटमणि बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बुद्ध का शांति संदेश आज पूरे विश्व की आवश्यकता : मंत्री  कुशवाह

सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उनका मानव कल्याण, करुणा और शांति का संदेश वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक और आस्था केंद्रों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सतत कार्य कर रही है।

सांची केंद्रित बौद्ध सर्किट के विकास पर सरकार का विशेष फोकस

संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि आज जब विश्व हिंसा, असहिष्णुता, मानसिक तनाव और नैतिक संकटों से जूझ रहा है, तब भगवान बुद्ध का दर्शन और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सांची को केंद्र में रखते हुए सतधारा, सोनारी, अंधेर, मुरेलखुर्द तथा बाघ गुफाओं को जोड़कर एक सुव्यवस्थित “मध्यप्रदेश बौद्ध हेरिटेज सर्किट” विकसित कर रही है। इसके अंतर्गत आधारभूत संरचना और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के बौद्ध स्थलों को बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर और राजगीर जैसे प्रमुख राष्ट्रीय बौद्ध तीर्थों से जोड़ते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध यात्रा पैकेज विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में बौद्ध धरोहर संरक्षण, मध्यप्रदेश बौद्ध हेरिटेज सर्किट के विकास, सांस्कृतिक पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा पवित्र बौद्ध अवशेषों की पुनर्प्राप्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक और सार्थक विमर्श हुआ। यह आयोजन प्रदेश को वैश्विक बौद्ध अध्ययन, आध्यात्मिक पर्यटन तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर ओडिशा की राजमाता डॉ. राज देवी, भोपाल नगर निगम अध्यक्ष  किशन सूर्यवंशी, पद्म  नारायण व्यास, उद्योगपति  रोहित पिशाल तथा सम्मेलन के आयोजक भंते शाक्यपुत्र सागर सहित विभिन्न देशों से आए बौद्ध भिक्षु, विद्वान, शोधार्थी और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

 

प्रदेश की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता पहुँची 85 हजार एमवीए के पार : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल

ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी (पारेषण क्षमता) को 85,000 एमवीए के पार पहुँचा दिया है। अब एमपी ट्रांसको की कुल ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी (पारेषण क्षमता) बढ़कर 85284 एमवीए की हो गई है। इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा 400 केवी सबस्टेशन बीना में 315 एमवीए क्षमता के अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर की स्थापना एवं उसके सफल ऊर्जीकरण का योगदान रहा है।

ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि बीना क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक विकास तथा विद्युत मांग को ध्यान में रखते हुए इस महत्वपूर्ण सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की गई है जो अब बढकर 1260 एमवीए की हो गई है।

1052 अति उच्च वोल्टेज पावर ट्रांसफार्मर स्थापित

एमपी ट्रांसको के पास वर्तमान में कुल 85284 एमवीए ट्रांसफार्मेशन कैपेसिटी हो गई है। कंपनी के नेटवर्क में कुल 1,052 अति उच्च वोल्टेज पावर ट्रांसफार्मर स्थापित हैं, जिनमें 400 केवी के 41 और 220 केवी के 220 तथा 132 केवी के 791 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनी द्वारा 43,079 सर्किट किलोमीटर लंबी अति उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में कंपनी के कुल 417 सबस्टेशन कार्यरत हैं, जिनमें 400 केवी के 14 और 220 केवी के 88 तथा 132 केवी के 315 सबस्टेशन शामिल हैं।

 

जल संरक्षण पर मध्यप्रदेश की पहल को मिली अंतर्राष्ट्रीय सराहना

भोपाल

जल ही जीवन है और इस जीवनदायी संपदा को सहेजने की दिशा में मध्यप्रदेश अब समूचे विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अभिनव पहल पर प्रदेश में शुरू किया गया ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब केवल एक सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि जनभागीदारी का एक सशक्त जन-आंदोलन बन चुका है। नदियों, तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन की इस भागीरथी कोशिश को अब अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी अभूतपूर्व सराहना मिल रही है। भोपाल के ऐतिहासिक भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ ने जल संरक्षण को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस भव्य आयोजन में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर के राजनयिकों ने न केवल सहभागिता की, बल्कि जल प्रबंधन के इस ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ को आज की सबसे बड़ी वैश्विक जरूरत बताते हुए इसे अपने देशों में भी लागू करने की प्रबल इच्छा जताई है। जल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते प्रदेश के ये कदम वैश्विक पटल पर एक नया इतिहास रच रहे हैं।

साइप्रस और फिजी ने सराहा ‘मध्यप्रदेश मॉडल’

इस सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में साइप्रस के उच्चायुक्त  इवागोरस वराईओनाइडेस ने कहा कि जल संकट एक गंभीर वैश्विक चुनौती है और इसके समाधान के लिए जन-जागरूकता बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने वीर भारत न्यास के साथ संवाद को सार्थक बताते हुए जानकारी दी कि साइप्रस का सांस्कृतिक दल 20-21 जून 2026 को भोपाल में अपनी प्रस्तुतियां देगा। वहीं, फिजी गणराज्य के उच्चायुक्त  जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि भारत और फिजी के संबंध 1948 से अत्यंत प्रगाढ़ हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस दूरदर्शी पहल की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों की भौगोलिक दूरी भले ही हो, किंतु पर्यावरण और मानव जीवन की रक्षा जैसे हमारे सरोकार पूरी तरह समान हैं।

मेक्सिको और नेपाल ने जल संरक्षण को बताया साझा जिम्मेदारी

मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख सु वनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को एक साझा वैश्विक समस्या बताते हुए कहा कि जल और नदियों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना अत्यंत सराहनीय कदम है। उन्होंने भारत और मेक्सिको को प्राचीन सभ्यताओं का उत्तराधिकारी बताते हुए आपसी सहयोग से साझा समाधान विकसित करने पर बल दिया। इसी तरह, नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव  दीपक पोरखिरे ने कहा कि यह आयोजन प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का बोध कराता है। उन्होंने ट्राइबल म्यूजियम के भ्रमण का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की सांस्कृतिक परंपराओं, जीवन मूल्यों और सामाजिक संवेदनाओं में इतनी गहरी समानता है कि भारत आकर उन्हें अपने ही गांव जैसा आत्मीय अनुभव हुआ।

त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर अपनाएंगे यह अभिनव पहल

त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त महामहिम  चंद्रदत्त सिंह ने इस आयोजन को पर्यावरणीय सरोकारों को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का उत्कृष्ट प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल वैश्विक स्तर पर एक साझा जिम्मेदारी का सशक्त संदेश देती है। वहीं, इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन  जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने मध्यप्रदेश शासन और वीर भारत न्यास के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने यह ऐतिहासिक घोषणा की कि मध्यप्रदेश की इस प्रेरणादायी पहल से सीख लेते हुए वे भी शीघ्र ही इक्वाडोर में जल संरक्षण को समर्पित ‘सदानीरा संगम’ का आयोजन करेंगे।

जल आत्मनिर्भरता का नया इतिहास लिख रहा मध्यप्रदेश

एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और कैरेबियन देशों से आए राजनयिकों ने न केवल इस समागम में हिस्सा लिया, बल्कि जनभागीदारी आधारित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के नवाचारों को गहन रुचि से समझा। मध्यप्रदेश सरकार जल आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच रही है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण किया जा चुका है और सरकार का लक्ष्य 3 लाख 66 हजार तक पहुँचने का है। इस अभियान को जिस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और स्वीकार्यता मिल रही है, वह प्रदेश के लिए किसी वैश्विक सम्मान से कम नहीं है। सीमाओं से परे जाकर यह ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ अब समूचे विश्व समुदाय के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन रहा है।

 

भागवत कथा श्रवण से मिटते हैं दुःख-दर्द, संसार का होता है कल्याण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मद्भागवत कथा का पुण्य-प्रताप ऐसा है कि इसे सुनने मात्र से ही मनुष्य के दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं। भागवत कथा श्रवण से कष्टों का शमन होता है और पूरे संसार का कल्याण होता है। इस कथा का श्रवण मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ऐसे धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है। ये समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं और सबके जीवन में सद्भाव एवं आत्मिक शांति का संचार करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मद्भागवत कथा मानव जीवन को धर्म के मर्म एवं नैतिकता का भान कराती है। यह मनुष्य को उसके कर्तव्यों और मानव सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ज्ञानामृत है। भगवान कृष्ण के आदर्शों और उनके संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में भागवत गीता कथा एक पवित्र माध्यम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को उज्जैन जिले के ग्राम टंकारिया पंथ में एक से सात जून तक हुई मद्भागवत कथा के समापन समारोह को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कथा समापन समारोह में सहभागिता की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन में नाना प्रकार के कष्ट थे, परंतु उन्होंने अपने कष्टों से इतर कुशासन (कंस) का अंत किया। वे सदैव धर्म मार्ग पर बने रहे। उन्होंने समारोह में बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं से कहा कि वे गीता के संदेश को अपने जीवन में भी अपनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां-जहां भगवान कृष्ण ने लीलाएं कीं, वहां-वहां हमारी सरकार भव्य कृष्ण तीर्थ बनाने जा रही है। उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले के नारायणा गांव और धार जिले के अंका-झंका माताजी परिसर में भव्य कृष्ण तीर्थ बनाया जायेगा। ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम टंकारिया पंथ से लेपड़ तक एवं इसी गांव से रानापुर फाटक तक पक्की सड़क बनाई जायेगी। यहां धर्मशाला में शेड निर्माण के लिए भी राशि और गौशाला निर्माण के लिए अनुदान दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाली राखी में भी हमारी सरकार लाड़ली बहनों को शगुन के रूप में राशि भेजेगी, बुजुर्गों से कहा कि सभी पात्र व्यक्तियों को हमारी सरकार तीर्थ यात्रा करायेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कथा आयोजन को समाज में आध्यात्मिक जागृति और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। सात दिवसीय भागवत् कथा के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति के सभी सदस्यों, संतजनों एवं श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि आप सभी के सामूहिक प्रयासों से क्षेत्र में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना का व्यापक प्रसार हुआ है। ऐसे आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और संस्कारों को सुदृढ़ करने में मददगार होते हैं।

इस अवसर पर प्रसिद्ध मद्भागवत कथावाचक  राकेश शर्मा ‘शास्त्री’,  मनोहर चौधरी,  लीलाधर पटेल,  जगदीश पटेल,  सुदामा पटेल,  सोहन पटेल,  कान्हा पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। कथा समापन पर आयोजन समिति द्वारा भण्डारा भी कराया गया।

 

रायसेन में आत्महत्याओं से दहशत, 10 दिन में 3 युवाओं ने फंदे पर झूलकर दी जान

सलामतपुर/रायसेन.

जिले के सलामतपुर थाना क्षेत्र में महज 10 दिनों के भीतर दो युवतियों और एक युवक द्वारा फांसी लगाकर जान देने की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। तीनों मृतकों की उम्र 19 से 21 वर्ष के बीच थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने न केवल ग्रामीणों को हैरान कर दिया है, बल्कि पुलिस के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे ताजा मामला ग्राम जमुनिया का है, जहां शुक्रवार रात 21 वर्षीय रचना लोधी ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया गया है कि घटना के समय उसने अपने भाई को दुकान भेजा था। जब भाई वापस लौटा तो घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला। अंदर झांककर देखने पर रचना फंदे पर लटकी हुई मिली। परिजन और ग्रामीण तत्काल उसे निजी क्लीनिक लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर दीवानगंज चौकी प्रभारी सुनील शर्मा मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। घटनास्थल से बाद में एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसकी जांच की जा रही है।

पहले भी हो चुकी हैं दो घटनाएं
इससे पहले 28 मई को सलामतपुर के गोसाईं मोहल्ले में 19 वर्षीय अभिषेक उर्फ भोला ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। उसकी बहन ने उसे कमरे में फंदे पर लटका देखा था। पुलिस को अब तक आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। वहीं 31 मई को ग्राम सेमरा में 21 वर्षीय पूजा अहिरवार ने भी घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के समय परिवार के सदस्य करीला धाम दर्शन के लिए गए हुए थे और युवती घर पर अकेली थी। इस मामले में भी कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं।

पुलिस कर रही जांच
तीनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। जमुनिया वाली घटना में सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस परिजनों और परिचितों से पूछताछ कर आत्महत्या के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
– दिनेश सिंह रघुवंशी, थाना प्रभारी, सलामतपुर

नरेला में बारिश पूर्व तैयारियों का जायजा लेने सड़क पर उतरे मंत्री विश्वास सारंग, पातरा नाले में मिट्टी डंपिंग पर जताई नाराजगी

भोपाल, 7 जून 2026। आगामी मानसून को देखते हुए नरेला विधानसभा क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ जैसी संभावित समस्याओं की रोकथाम के लिए मध्यप्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने रविवार सुबह क्षेत्र के विभिन्न नाले-नालियों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ प्रभात चौराहा, महामाई की पुलिया, द्वारका नगर, भानपुर खंती सहित कई क्षेत्रों का दौरा कर बारिश पूर्व तैयारियों की जमीनी हकीकत परखी।

निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर नाले-नालियों की सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिलने पर मंत्री सारंग ने नगर निगम अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई युद्धस्तर पर पूरी की जाए, ताकि जल निकासी व्यवस्था सुचारू बनी रहे और नागरिकों को जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े।

पातरा नाले का किया विशेष निरीक्षण

दौरे के दौरान मंत्री सारंग ने शहर के प्रमुख जल निकासी मार्गों में शामिल पातरा नाले का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह नाला पूरे भोपाल की ड्रेनेज व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी समय पर सफाई नहीं होने पर कई क्षेत्रों में गंभीर जलभराव की स्थिति बन सकती है।

10 लेन प्रोजेक्ट के कार्य पर जताई नाराजगी

भानपुर क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान मंत्री ने पाया कि सड़क निर्माण कार्य के चलते पातरा नाले में बड़ी मात्रा में मिट्टी डंप की गई है। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नाले में मिट्टी जमा होने से पानी का प्रवाह बाधित होगा और बारिश के दौरान बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो सकते हैं।

मौके पर ही शुरू कराया मिट्टी हटाने का कार्य

मंत्री के निर्देश के बाद पातरा नाले से मिट्टी हटाने का कार्य तत्काल प्रारंभ किया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नाले की मूल चौड़ाई और गहराई बनाए रखते हुए सफाई कार्य तेजी से पूरा किया जाए। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखने के भी निर्देश दिए।

नालों पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने नालों पर हो रहे अतिक्रमण को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने अधिकारियों को अवैध कब्जों और निर्माणों को हटाने की कार्रवाई तेज करने तथा इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बारिश से पहले सभी कार्य पूरे करने के निर्देश

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाना है। इसके लिए नगर निगम और जिला प्रशासन को समन्वय के साथ काम करते हुए सभी सफाई एवं मरम्मत कार्य समय सीमा में पूर्ण करने होंगे, ताकि बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति न बने।

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