4 घंटे से ज्यादा बिजली गुल तो मिलेगा मुआवजा! उपभोक्ताओं को राहत देने की नई व्यवस्था

भोपाल 

मध्य प्रदेश विद्युत विभाग ने जबलपुर में बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी खुशखबरी दी है। शहर में 4 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा। बिजली सप्लाई बंद होने के कारणों का पता लगाने के बाद बिजली विभाग मुआवजे की राशि निर्धारित करेगा।

प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही ऐसा नया नियम लागू होने वाला है, जिसके बाद बिना सूचना के होने वाली बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने के लिए अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

बिजली कंपनी की गलती साबित होने पर मुआवजे की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू होगी। यानी अब घंटों बिजली गुल रहने और शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या पर लगाम लग सकती है।

अब खुद मिलेगा मुआवजा
सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है। इसमें इस व्यवस्था को बहुत कड़ा और साफ कर दिया गया है। इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बदलाव करके बिजली सप्लाई की क्वालिटी और उसे ठीक करने का एक समय तय किया जा रहा है।

अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो मुआवजा अपने आप आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

स्मार्ट मीटर से खुलेगी कंपनियों की पोल
अक्सर बिजली कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि बिजली सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही कटी थी। अब ऐसा नहीं चल पाएगा। जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कब कटी और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा।

इस डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से कंपनियां झूठ नहीं बोल पाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को उनका हक आसानी से मिल जाएगा।

अभी ऐसी स्थिति
अभी विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों ने अघोषित या तय सीमा से ज्यादा बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को हर्जाना देने का प्रावधान तय किया है। सामान्य फॉल्ट जैसे फ्यूज उडना या तार टूटना को 1 से 3 घंटे के भीतर ठीक करना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे का समय तय है। ट्रांसफार्मर जलने पर 12 घंटे में आपूर्ति का समय है। प्रतिघंटा 25 रुपए से 100 रुपए तक है।

इस संशोधन से स्मार्ट मीटर दिलाएगा मुआवजा
नए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में इस व्यवस्था को और स्पष्ट बनाया जा रहा है। नए संशोधन बिल की धारा 58 में संशोधन के तहत बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बहाली की बेसलाइन तय की जा रही है। स्मार्ट मीटर में क्षेत्र की बिजली कटौती का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होगा।

ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे और शहरों में 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं आई, तो स्वतः मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जो सीधे उनके बिजली खाते या अगले बिल में क्रेडिट होगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कटने और जुड़ने का समय सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे कंपनियों को यह झूठ बोलने का मौका नहीं मिलेगा कि बिजली सिर्फ 10 मिनट के लिए कटी थी।

बिजली गुल हो तो ये रखें ध्यान
बिजली कटते ही तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत नंबर रखें। बिजली कब कटी और कितने घंटे बाद आई, इसका रिकॉर्ड रखें। कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 45 दिनों में समस्या का समाधान करना अनिवार्य है।

बिजली सुधारने के लिए अभी के नियम?
विद्युत नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह के फॉल्ट को ठीक करने का एक समय तय किया गया है। कंपनियां इस समय के अंदर बिजली बहाल नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा।

खराबी का प्रकार  शहर के लिए समय सीमा  ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय सीमा 
सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) 1 से 3 घंटे 4 घंटे
ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना 12 घंटे 12 घंटे
बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना 2 घंटे 4 घंटे

यदि आपके इलाके में बिना किसी पहली सूचना के 4 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति  बंद रहती है, तो आप अभी भी उपभोक्ता फोरम से मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

बिजली गुल होने पर इन 4 बातों का रखें ध्यान

  • बिजली कटते ही सबसे पहले बिजली कंपनी के टोल-फ्री नंबर या व्हाट्सएप नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
  • शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को कहीं लिख कर सुरक्षित रख लें।
  • बिजली किस समय कटी थी और कितने घंटे बाद वापस आई। इसका अपने पास एक रिकॉर्ड जरूर रखें।
  • अगर कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी आपके बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती है, तो बिजली उपभोक्ता, उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपनी शिकायत दे सकते हैं। इस फोरम के लिए 45 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो ने कहा कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

नए बिजली बिल के तहत यदि उपभोक्ताओं को शिकायत करने या मुआवजा पाने का अधिकार मिलता है, तो पात्र लोगों को उसका फायदा जरूर दिया जाएगा।

बीएमएचआरसी में 12 किलो के जटिल ओवरी ट्यूमर की सफल सर्जरी

बीएमएचआरसी में 12 किलो के जटिल ओवरी ट्यूमर की सफल सर्जरी 

-बड़ी आंत, पेशाब की नली और प्रमुख रक्त वाहिकाओं के निकट था ट्यूमर, पांच घंटे चला ऑपरेशन

 भोपाल 
 भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में अंडाशय के कैंसर (ओवरी कैंसर) से पीड़ित 60 वर्षीय गैस पीड़ित महिला की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। महिला के शरीर में विकसित ट्यूमर का आकार लगभग 12 किलो तक पहुंच गया था और वह ओवरी से फैलकर पेट के अन्य हिस्सों तक पहुंच चुका था। ट्यूमर के अत्यधिक बड़े आकार और कई महत्वपूर्ण अंगों से चिपके होने के कारण यह सर्जरी अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली थी। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
बीएमएचआरसी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनवीर गौतम ने बताया कि मरीज पिछले लगभग तीन वर्षों से इस समस्या से जूझ रही थी। शुरुआती दो वर्षों तक बीमारी का पता नहीं चल पाया। बाद में पेट का आकार बढ़ने, भारीपन और तकलीफ होने पर जांच कराई गई। सीटी स्कैन में पता चला कि पेट में अत्यंत बड़ी गांठ मौजूद है, जो बड़ी आंत, पेशाब की नली तथा पेट की प्रमुख रक्त वाहिकाओं के अत्यंत निकट और उनसे चिपकी हुई थी।
उन्होंने बताया कि ट्यूमर के कारण मरीज को हर्निया भी हो गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई थी। ट्यूमर कई महत्वपूर्ण अंगों से जुड़ा होने के कारण ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था। मरीज को मधुमेह (डायबिटीज) भी थी, जिससे सर्जरी का जोखिम और बढ़ गया था। ट्यूमर के कुछ हिस्सों में रक्त प्रवाह प्रभावित होने के कारण संक्रमण और पस बनने की स्थिति भी उत्पन्न हो गई थी। समय पर सर्जरी नहीं होने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता था, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता था। डॉ. गौतम ने बताया कि करीब पांच घंटे चली इस जटिल सर्जरी के दौरान चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक ट्यूमर को हटाया। सर्जरी में एनेस्थीशियोलॉजी विभााग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संध्या इवने ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। सर्जरी करने वाली टीम में सीनियर रेजिडेंट डॉ ऋषि आथ्या, डॉ श्रेया भारद्वाज, डॉ जेश्ना और जूनियय रेजिडेंट डॉ आशीष वैद्य शामिल थे।
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रकार की जटिल सर्जरी के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता, अनुभव और विभिन्न विभागों के समन्वय की आवश्यकता होती है, जो बीएमएचआरसी के विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में गंभीर एवं जटिल बीमारियों के लिए उन्नत, समग्र और विशेषज्ञ उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के मरीजों को उपचार के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
पैंक्रियाज़ कैंसर मरीज को मिली राहत : बीएमएचआरसी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में पैंक्रियाज़ कैंसर से पीड़ित 60 वर्षीय पुरुष की भी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनवीर गौतम ने बताया कि कैंसर पैंक्रियाज़ से बढ़कर पोर्टल वेन नामक महत्वपूर्ण रक्त वाहिका तक पहुंच गया था, जिससे सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण हो गई थी। ऑपरेशन के दौरान छोटी सी चूक भी मरीज के लिए घातक साबित हो सकती थी। चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक सर्जरी कर ट्यूमर हटाया। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज का निःशुल्क उपचार किया गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की वैश्विक गूंज, 6 देशों ने सराहा मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल

भोपाल
मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और जल आत्मनिर्भरता की दिशा में चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संचालित यह अभियान जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का सफल मॉडल बनकर उभरा है, जिसकी सराहना अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी होने लगी है।

भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित सात दिवसीय ‘सदानीरा समागम’ में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा इक्वाडोर के राजनयिकों ने हिस्सा लिया। सभी देशों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के जल संरक्षण मॉडल की सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक आवश्यकता बताया और अपने-अपने देशों में इस तरह की पहल लागू करने की इच्छा जताई। साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने जल संकट को वैश्विक चुनौती बताते हुए जन-जागरूकता आधारित अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल की सराहना की और कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत और फिजी के सरोकार समान हैं। 

मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को साझा वैश्विक जिम्मेदारी बताते हुए नदियों और जल स्रोतों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की अवधारणा की प्रशंसा की। नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने कहा कि यह आयोजन प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध कराता है और भारत-नेपाल की सांस्कृतिक समानताओं को भी मजबूत करता है।

त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने इस पहल को पर्यावरणीय जागरूकता का प्रभावी माध्यम बताया, जबकि इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने घोषणा की कि वे मध्यप्रदेश के अनुभवों से प्रेरणा लेकर अपने देश में भी जल संरक्षण पर केंद्रित ‘सदानीरा संगम’ जैसा आयोजन करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार प्रदेश में अब तक 2 लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन कार्य पूरा किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 3 लाख 66 हजार तक पहुंचाना है। जनभागीदारी और नवाचार पर आधारित यह अभियान जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिला रहा है। 

अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन भोपाल मंडल में सुरक्षा जागरूकता अभियान रहा जारी

अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन भोपाल मंडल में सुरक्षा जागरूकता अभियान रहा जारी

मिसरोद, हरदा, खिरकिया एवं रुठियाई स्टेशन के समपार फाटक पर सड़क उपयोगकर्ताओं को किया जागरूक

भोपाल
 संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत 06 जून से 12 जून 2026 तक विशेष जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है।

अभियान के तीसरे दिन भी मंडल के विभिन्न समपार फाटकों पर सड़क उपयोगकर्ताओं को समपार सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

अभियान के अंतर्गत संरक्षा विभाग द्वारा 08 जून 2026 को मिसरोद स्टेशन के समपार फाटक संख्या 246 पर 50 सुरक्षा पंपलेट वितरित किए गए तथा 50 सड़क उपयोगकर्ताओं की काउंसिलिंग की गई। इसी प्रकार हरदा स्टेशन के समपार फाटक संख्या 204 पर 60 पंपलेट वितरित कर 60 लोगों को समपार सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। खिरकिया स्टेशन के समपार फाटक संख्या 196 पर 30 पंपलेट वितरित किए गए तथा 30 व्यक्तियों की काउंसिलिंग की गई। वहीं रुठियाई स्टेशन के समपार फाटक संख्या 71 पर 50 पंपलेट वितरित किए गए तथा 60 सड़क उपयोगकर्ताओं को समपार फाटक सुरक्षा नियमों के संबंध में जागरूक किया गया।

रेल प्रशासन सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से अपील करता है कि समपार फाटकों पर निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करें, बंद फाटक को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षित रेल संचालन में सहयोग प्रदान करें। जनसहभागिता एवं जागरूकता से ही समपार दुर्घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।

 

गर्भावस्था में समय पर जांच एवं उच्च जोखिम स्थितियों की शीघ्र पहचान से सुरक्षित मातृत्व होता है सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

गर्भावस्था में समय पर जांच एवं उच्च जोखिम स्थितियों की शीघ्र पहचान से सुरक्षित मातृत्व होता है सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने पर 9 जून को प्रदेश में विशेष मातृत्व स्वास्थ्य शिविर होंगे आयोजित

शिविर का लाभ लेने की अपील

भोपाल

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व प्रत्येक महिला का अधिकार है। राज्य सरकार गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदेश की सभी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से अपील की है कि वे 9 जून को आयोजित विशेष प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान शिविरों में पहुंचकर निःशुल्क जांच, परामर्श एवं उपचार सुविधाओं का लाभ अवश्य लें। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था दी समय पर जांच एवं उच्च जोखिम स्थितियों की शीघ्र पहचान से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा है कि इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में संचालित करते हुए प्रत्येक गर्भवती महिला तक गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और कमी लाई जा सके।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में 2.94 लाख उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उचित उपचार का किया गया प्रबंधन

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के अंतर्गत मध्यप्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभियान के तहत पंजीकृत 14.31 लाख गर्भवती महिलाओं में से 10.25 लाख महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) की गई, जो कुल पंजीकृत गर्भवतियों का लगभग 72 प्रतिशत है। जांच के दौरान 2.94 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी-एचआरपी) के रूप में चिन्हित किया गया, जिनमें से 2.60 लाख अर्थात 88 प्रतिशत महिलाओं को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक उपचार, प्रबंधन एवं रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

अपर मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सुश्री दिशा प्रणय नागवंशी ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 9 जून को प्रदेश के सभी जिलों में विशेष पीएमएसएमए शिविर आयोजित किए जाएंगे। राज्य के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। विशेष शिविरों में गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व एवं प्रसवोत्तर जांच, नवीन एवं छूटी हुई गर्भवतियों का पंजीयन, उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान, उपचार एवं नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाएगा। महिलाओं की रक्तचाप, वजन, बीएमआई, मेडिकल एवं प्रसूति इतिहास की जांच के साथ ही आवश्यक प्रयोगशाला परीक्षण भी किए जाएंगे।

अभियान के अंतर्गत हीमोग्लोबिन, यूरिन एल्बुमिन एवं शुगर, एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सिफलिस, मलेरिया, सिकल सेल स्क्रीनिंग, ब्लड ग्रुपिंग और ओजीटीटी जैसी महत्वपूर्ण जांचें उपलब्ध कराई जाएंगी। आवश्यकता अनुसार सोनोग्राफी एवं विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आयरन-फोलिक एसिड, कैल्शियम सहित आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों तथा सुमन हेल्प डेस्क की सक्रिय भागीदारी रहेगी। जरूरतमंद महिलाओं के लिए 108 एम्बुलेंस के माध्यम से निःशुल्क परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी संचालित किया जाएगा। ग्राम स्तर पर प्रचार-प्रसार, सोशल मीडिया अभियान, वीएचएसएनडी, जन आरोग्य समितियों, स्व-सहायता समूहों एवं पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

 

ट्विशा केस में नए खुलासे: रस्सी AIIMS नहीं भेजी गई, SI की कार में रखी रही; जांच पर उठे सवाल

भोपाल
 एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अब मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस बीच, सीबीआई जांच से पहले हुई स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जांच से जुड़े बेहद गोपनीय और अहम तथ्य पहले ही उन तक पहुंच रहे थे। इसी का फायदा उठाकर वह समय रहते अग्रिम जमानत लेने में कामयाब हो गई थीं, जिसे बाद में 27 मई को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।

शुरुआती जांच में पुलिस की बड़ी लापरवाही
ट्विशा के परिजनों की ओर से भोपाल कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अंकुर पांडे का आरोप है कि शुरुआत में ही मृतका की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को संदिग्ध माना जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, 13 मई 2026 की सुबह सब इंस्पेक्टर (SI) दिनेश शर्मा ने फंदे की रस्सी तो जब्त की, लेकिन लिखापढ़ी में उस व्यक्ति का स्पष्ट विवरण ही दर्ज नहीं किया गया जिसने रस्सी की पहचान की थी। इसके अलावा, उस महत्वपूर्ण रस्सी को तुरंत फॉरेंसिक जांच के लिए एम्स अस्पताल भेजने के बजाय सब इंस्पेक्टर ने अपनी निजी कार में रख दिया था और बाद में उसे जांच के लिए भेजा गया। इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके अलावा, केस डायरी का हिस्सा रहे जब्ती से जुड़े दस्तावेज भी आरोपियों तक पहुंच गए थे। कानूनी नियमों के मुताबिक, उस समय समर्थ और गिरिबाला आरोपी नहीं थे, इसलिए उन्हें इन दस्तावेजों को देखने का कोई अधिकार नहीं था। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के साथ इन गोपनीय दस्तावेजों को अदालत में दाखिल कर दिया गया, जिससे साफ है कि जांच की जानकारी लीक हो रही थी।

मनोचिकित्सक से पूछताछ और मेडिकल पर्चे की जांच
केस को आगे बढ़ाते हुए सीबीआई की टीम ने अब ट्विशा का इलाज करने वाले प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से विस्तृत पूछताछ की है। दरअसल, आरोपी पक्ष ने भोपाल कोर्ट में कुछ ऐसे मेडिकल दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक रूप से परेशान थी और उसका मनोरोग का इलाज चल रहा था।

सीबीआई अब इन मेडिकल पर्चों की असलियत खंगाल रही है। जांच एजेंसी ने डॉक्टर से पूछा कि ट्विशा कब-कब इलाज के लिए आई थी, उसे क्या समस्याएं थीं और काउंसलिंग के दौरान उसने अपनी निजी जिंदगी को लेकर क्या बातें साझा की थीं। इस पूछताछ पर डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने सीबीआई से संपर्क की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज की गोपनीयता और उसके अधिकारों को देखते हुए वह काउंसलिंग की व्यक्तिगत बातों का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकते।

पूर्व जज की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन अलर्ट
मामले में गिरफ्तारी के बाद 29 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। शुरुआत में दोनों को जेल के अस्पताल वार्ड में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के आरोप लगे थे, जिसके बाद जेल प्रबंधन ने उन्हें सामान्य बैरक में शिफ्ट कर दिया है।

अदालत के निर्देश के बाद जेल में गिरिबाला सिंह की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उनकी बैरक के पास अतिरिक्त प्रहरियों की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बढ़ाने की मुख्य वजह यह है कि गिरिबाला सिंह जब 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल जिला कोर्ट में जज के पद पर तैनात थीं, तब उन्होंने जिन अपराधियों को सजा सुनाई थी, उनमें से 29 कैदी वर्तमान में इसी जेल में बंद हैं। ऐसे में किसी भी अनहोनी या आपसी रंजिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

मानसून से पहले ही मेहरबान मौसम! MP में कोटे से 65% ज्यादा बारिश, ग्वालियर समेत कई जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट

भोपाल
 मध्यप्रदेश में मानसून की औपचारिक एंट्री भले ही अभी नहीं हुई हो, लेकिन प्रदेश में बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। जून महीने में अब तक औसत से करीब 65 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। कई जिलों में तो सामान्य से कहीं अधिक पानी गिर चुका है।

कई जिलों में रिकॉर्ड बारिश
प्रदेश में औसतन जून में जहां लगभग 8.3 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार अब तक इससे कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गई है। भोपाल, आगर-मालवा और शाजापुर में करीब 2 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि नीमच में ढाई इंच तक पानी गिर चुका है।

मानसून से पहले ही सक्रिय हुआ मौसम
रविवार को मानसून महाराष्ट्र में प्रवेश कर चुका है, जिसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में 15 से 18 जून के बीच मानसून दस्तक दे सकता है। पिछले वर्ष मानसून 16 जून को प्रदेश में पहुंचा था।

मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने आज भी प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश का अलर्ट जारी किया है। जबकि, कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर मौजूदा मौसम प्रणाली इसी तरह सक्रिय रही तो मध्य प्रदेश में मानसून तय समय के आसपास यानी 15 से 18 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून की दस्तक के साथ प्रदेशभर में तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना भी है।

तापमान में आई गिरावट
वहीं, राजधानी भोपाल समेंत प्रदेश के कई जिलों में बीते 24 घंटों के दौरान अच्छी बारिश दर्ज हुई, जिससे तापमान में गिरावट देखी जा रही है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। बारिश के कारण कई इलाकों का मौसम सुहावना हो गया है और कई क्षेत्रों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

नीमच जिले में 2.5 इंच बारिश
अबतक प्रदेशभर में सबसे अधिक नीमच जिले में करीब 2.5 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं, कई अन्य जिलों में भी एक इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। लगातार सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेशभर में प्री-मानसून बारिश का दौर जारी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी तथा पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण के असर के चलते प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। यही कारण है कि, मानसून आने से पहले ही कई जिलों में अच्छी बारिश हो रही है।

भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी
राजधानी में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर दिखा है। 3 साल तो तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। वहीं, रात का तापमान 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई थी। वहीं, 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। ये 10 साल में दूसरी बार था जब शहर में इतनी बारिश हुई। उस समय 24 घंटे में ही करीब 5 इंच बारिश हुई थी।

कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग (IMD) भोपाल के अनुसार, सोमवार को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सागर, दमोह, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी सहित कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

लगातार बदल रहा मौसम
प्रदेश में जून की शुरुआत से ही रुक-रुक कर बारिश और आंधी का दौर जारी है, जिससे तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी इसी तरह के मौसम बने रहने की संभावना जताई है।

मानसून की एंट्री से पहले बारिश का दौर प्रदेश में मानसून की एंट्री से पहले आंधी-बारिश का दौर चल रहा है। जून की शुरुआत से ही बारिश हो रही है। रविवार को देवास, सीहोर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर बना रहा।

ऐसा ही मौसम सोमवार को भी रहेगा। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो आज ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सागर, दमोह, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी में आंधी-बारिश का अलर्ट है।

अब तक इन जिलों में 1 इंच से ज्यादा बारिश सतना, सीधी, आगर-मालवा, भोपाल, बुरहानपुर, हरदा, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर में 1 इंच या इससे ज्यादा बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग की माने तो मानसूनी बारिश 1 जून से ही रिकॉर्ड की जाती है, जो 30 सितंबर तक चलती है। इस दौरान होने वाली वाली मानसूनी बारिश कहलाती है। वर्तमान में प्रदेश में प्री-मानसूनी एक्टिविटी चल रही है।

 

भोजशाला गर्भगृह में गुपचुप रखी गई मां वाग्देवी की प्रतिमा, ASI ने तुरंत हटाया; सुरक्षा बढ़ाई गई

  धार 
धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर में  मां वाग्देवी की अष्टधातु की प्रतिमा विराजित किए जाने की घटना के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। परिसर के अंदर सुरक्षा चौकसी बढ़ा दी गई है। मामला संज्ञान में आने के तुरंत बाद प्रतिमा को प्रशासन ने हटा दिया है। अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि, परिसर के अंदर इस प्रतिमा को कौन लेकर आया था।

गर्भगृह में पूर्व की भांति मां वाग्देवी का प्रतीकात्मक स्वरूप स्थापित था, जिसकी पूजा – अर्चना की गई। वहीं, घटनाक्रम को लेकर कोई भी जवाबदार अधिकारी बयान देने की स्थिति में नहीं है। एएसआई अधिकारी प्रशांत पाटनकर ने अधिकृत बयान देने से साफ इंकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि, शनिवार दोपहर को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भोजशाला परिसर में प्रवेश करने के साथ गर्भगृह में मां वाग्देवी की अष्टधातु की प्रतिमा को रख दिया था, जिसकी जानकारी लगने के बाद कई लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे।

लंदन संग्रहालय से मूर्ति लाने की मांग
मां वाग्देवी की प्राचीन मूर्ति लंदन संग्रहालय में रखी है, जिसे बिटिश शासन में ले जाया गया था। हाल ही में भोजशाला को हाईकोर्ट द्वारा मंदिर घोषित किए जाने के बाद हिंदू समाज द्वारा मूर्ति को लंदन से वापस लाने की मांग की जा रही है। मां वाग्देवी की एक प्रतिमा ग्वालियर के प्रभात स्टूडियो में रखी हुई है। इस प्रतिमा का निर्माण वर्ष 2011 में संघ के पूर्व प्रचारक नवल किशोर शर्मा द्वारा करवाया गया था। किन्हीं कारणों से ये प्रतिमा धार नहीं आ पाई है।

जानकारी मिलते ही एएसआई के उड़े होश, हटवाई प्रतिमा
 शाम करीब साढ़े 6 बजे जैसे ही यह जानकारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों तक पहुंची तो उनके होश उड़ गए. परिसर में हड़कंप मचने के बाद एएसआई की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर प्रतिमा को हटाया गया. हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रतिमा को परिसर में कौन लेकर आया, किसने स्थापित किया और सुरक्षा तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। 

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, गर्भगृह तक कैसे पहुंची प्रतिमा?
हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने और मुख्यमंत्री द्वारा यहां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान की घोषणा के बाद भोजशाला परिसर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. ऐसे माहौल में प्रतिमा की अचानक स्थापना और फिर उसे हटाए जाने की घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. हाईकोर्ट के आदेश के बाद यहां की पूरी जिम्मेदारी एएसआई को दी गई है। 

इधर, मुस्लिम समाज ने घटनाक्रम पर जताया ऐतराज, सौंपा ज्ञापन
कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने भोजशाला – कमाल मौला मस्जिद परिसर में अनधिकृत प्रवेश और प्रतिमा स्थापित करने की घटना पर गहरा रोष जताया है। कमेटी ने रविवार को थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी के नायब सदर इरशाद मंसूरी ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए इसे कानून का उल्लंघन और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करार दिया। मंसूरी ने स्पष्ट किया कि यह परिसर एक संरक्षित स्मारक है और यहां धार्मिक स्वरूप में हस्तक्षेप करना दंडनीय अपराध है। कमेटी ने मांग की है कि, संबंधित अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की गई है।

शिकायत की वैधता नहीं
वहीं, मामले को लेकर धार पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा है कि, ‘प्रतिमा रखने या ना रखने की कोई गाइडलाइन नहीं है। एक पक्ष अगर इसकी शिकायत कर भी रहा है तो उसकी वैधता नहीं है।’

कई लेयर की सुरक्षा व्यवस्था के साथ सीसीटीवी से निगरानी
वैसे तो भोजशाला परिसर में हमेशा से ही सुरक्षा व्यवस्था तैनात रही है लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद संवेदनशीलता को देखते हुए यहां कई लेयर में सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है. स्थानीय पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास सुरक्षा का जिम्मा है. परिसर के बाहरी हिस्से में पुलिस चौकी बनाई है और यहां 24 घंटे जिला पुलिस के साथ विशेष सुरक्षा बल तैनात रहते हैं. इसके अलावा यह पूरा परिसर सीसीटीवी से लैस है. परिसर में अंदर जाने के लिए मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ता है। 

चूंकि यह परिसर एएसआई के अधीन है इस कारण इसके अंदर एएसआई के सुरक्षा गार्ड भी 24 घंटे निगरानी करते हैं. इसके बावजूद मां वाग्देवी की अष्टधातु जैसी भारी धातु की प्रतिमा का भोजशाला परिसर में पहुंचना और गर्भगृह में स्थापित हो जाने पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह भी है कि प्रतिमा अंदर पहुंचने के बाद स्थापना की पूरी प्रक्रिया कैसे संपन्न हो गई और किसी अधिकारी या सुरक्षाकर्मी को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। 

घटना से पहले ही पहुंचे थे एएसआई अधीक्षक
जानकारी के अनुसार शनिवार की दोपहर एएसआई के अधीक्षक डॉ शिवाकांत बाजपेई भोजशाला पहुंचे थे. उन्होंने परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया था. उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों से हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लागू सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की थी. उनके निरीक्षण के कुछ घंटे बाद ही प्रतिमा स्थापना का मामला सामने आने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी हैं। 

बाल कायस्थ प्रतिभाओं का नेतृत्व कमाल: 33 मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, नई पीढ़ी को सौंपी जिम्मेदारी

बाल कायस्थ प्रतिभाओं ने संभाली आयोजन की कमान, 33 मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
समाज की नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने की अभिनव पहल, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रतिभा सहित विशिष्ट सम्मान प्रदान

भोपाल
 अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, मध्य भारत प्रदेश एवं जिला भोपाल इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “कायस्थ प्रतिभा सम्मान समारोह एवं चित्रांश पारिवारिक मासिक बैठक” समाज की प्रतिभाओं, संस्कारों और संगठनात्मक शक्ति का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा, संचालन एवं व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी समाज के युवा बच्चों ने संभाली। अधिकांश बच्चे विद्यालयी स्तर के विद्यार्थी थे, जिन्होंने अपने अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और संगठन कौशल से सभी को प्रभावित किया।

यह पहल वरिष्ठ राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश शासन के मंत्री माननीय विश्वास कैलाश सारंग की उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसमें बच्चों को केवल दर्शक नहीं बल्कि समाज के भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करने पर बल दिया गया है। इसी भावना को मूर्त रूप देते हुए प्रदेश अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में संपूर्ण कार्यक्रम युवा प्रतिभाओं द्वारा संचालित कराया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय विश्वास कैलाश सारंग तथा विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अजातशत्रु श्रीवास्तव थे। भगवान चित्रगुप्त के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

अपने संबोधन में विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि “जो समाज अपनी प्रतिभाओं का सम्मान करता है, वही समाज भविष्य में नेतृत्व करता है।” उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया तथा समाज को संगठित एवं प्रगतिशील बनाने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि अजातशत्रु श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने बच्चों से उच्च प्रशासनिक, तकनीकी एवं राष्ट्रीय स्तर के पदों तक पहुंचने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय महामंत्री अजय श्रीवास्तव ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं उत्कृष्टता की भावना विकसित करते हैं और ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि अखिल भारतीय कायस्थ महासभा केवल एक संगठन नहीं बल्कि एक सशक्त सामाजिक परिवार है। उन्होंने मासिक चित्रांश पारिवारिक बैठकों की अवधारणा, सामाजिक एकता, युवा सहभागिता, महिला सशक्तिकरण, धार्मिक यात्राओं, गरबा महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं विभिन्न सामाजिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि समाज का विकास केवल आर्थिक प्रगति से नहीं बल्कि संस्कार, संगठन और शिक्षा से होता है। उन्होंने सभी परिवारों से समाजहित में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वर्ष 2025-26 की बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 33 मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया। समारोह में केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय एवं विशिष्ट उपलब्धियों को भी सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के अंतर्गत प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने वाली कुमारी पूजा सिंह को “विशिष्ट कायस्थ सम्मान” से सम्मानित किया गया। वहीं कुमारी पायल सक्सेना को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि एवं सुरक्षा अध्ययन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “विशिष्ट कायस्थ सम्मान” प्रदान किया गया।
स्मृति पुरस्कारों ने समारोह को बनाया भावनात्मक और प्रेरणादायी
समारोह में समाज के दिवंगत वरिष्ठजनों की स्मृति को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से विभिन्न स्मृति पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
कक्षा 12वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कुमारी अदिति श्रीवास्तव को स्वर्गीय सोमेंद्र कुमार कुलश्रेष्ठ की पुण्य स्मृति में ₹3100 की सम्मान राशि सौरभ भावना कुलश्रेष्ठ द्वारा प्रदान की गई।कक्षा 12वीं में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कुमारी तान्या श्रीवास्तव तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिवांश सक्सेना को स्वर्गीय श्रीमती फूलमती देवी प्रधान एवं श्यामाचरण प्रधान की स्मृति में दो बच्चों के समान अंक होने की वजह  से एक समान राशि ₹1100-₹1100 की सम्मान राशि अभय वंदना प्रधान द्वारा प्रदान की गई।
कक्षा 12वीं में तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कृतार्थ श्रीवास्तव को स्वर्गीय श्रीमती सरजू देवी सक्सेना की स्मृति में ₹1100 की सम्मान राशि एवं प्रशस्ति पत्र दिनेश सविता सक्सेना प्रदान किया गया।

कक्षा 10वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कुमारी अनिका सक्सेना को स्वर्गीय श्रीमती शांति देवी श्रीवास्तव की पुण्य स्मृति में ₹3100 की सम्मान राशि सुनील अनुराधा ‌श्रीवास्तव द्वारा प्रदान की गई।कक्षा 10वीं में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कुमारी नम्रता सक्सेना को स्वर्गीय श्रीमती कमलेश प्रधान एवं प्रेमचरण प्रधान की स्मृति में ₹2100 की सम्मान राशि अभय वंदना प्रधान द्वारा प्रदान की गई।कक्षा 10वीं में तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली कुमारी लेविता सक्सेना को स्वर्गीय माधव प्रसाद सक्सेना स्मृति शैक्षणिक उत्कृष्टता सम्मान के अंतर्गत ₹1100 की सम्मान राशि एवं प्रशस्ति पत्र दिनेश सविता सक्सेना द्वारा प्रदान किया गया।

जिला अध्यक्ष महेंद्र श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में समाज सेवा एवं संगठनात्मक योगदान के लिए विभिन्न पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया।

कार्यक्रम के सफल संचालन एवं आयोजन में सौरभ कुलश्रेष्ठ (संयोजक), अमोल सक्सेना, व्योम खरे, अभय प्रधान, दिवाकर श्रीवास्तव, राजकुमार श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, चंद्रेश सक्सेना, मीना श्रीवास्तव, धर्मेश खरे, सहित समस्त युवा टीम एवं पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि शिक्षा, संस्कार, सेवा और संगठन की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज की नई पीढ़ी को नेतृत्व एवं राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार किया जाएगा।
“प्रतिभा का सम्मान ही समाज का सम्मान है, और संस्कारित युवा ही राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य हैं।”

इस अवसर पर सारंग ने कहा कि मैं सभी प्रतिभाशाली बच्चों को बधाई देता हूं और यह कामना करता हूं कि आप सभी बच्चे अपने जीवन में स्वामी विवेकानंद जी व डा राजेन्द्र प्रसाद जी के आदर्शों को बेहतर शिक्षा के साथ उच्चतम संस्कारों के  साथ आत्मसात कर सदैव सफलता के कीर्तिमान स्थापित करें और सदैव सभी को यथासंभव सहयोग भी प्रदान करें।

अजातशत्रु श्रीवास्तव ने कहा कि आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन प्राथमिकता आपको तय करना है। मैं आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं।

कार्यक्रम में अजय श्रीवास्तव नीलू, सुनील श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव,   आरती सारंग, अभय प्रधान, अवंतिका सीजेपी व्यौहार, दिनेश सक्सेना, चन्द्रेश सक्सेना, अनिल श्रीवास्तव, डीके श्रीवास्तव, के के भावना सक्सेना, डा धर्मेश कीर्ति खरे, महेन्द्र श्रीवास्तव, ओपी श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव, डा संजय श्रीवास्तव, मीना अरूण श्रीवास्तव, अमोल सक्सेना, सौरभ कुलश्रेष्ठ, व्योम खरे, विनय सक्सेना, आलोक श्रीवास्तव, राजेश नारायण श्रीवास्तव, गौरव खरे, संजीव श्रीवास्तव, जीएम जौहरी, राजेश वर्मा, सुशील श्रीवास्तव, संजीव श्रीवास्तव, राजीव श्रीवास्तव, अरविंद सक्सेना, सतीश खरे, डा बृजेश श्रीवास्तव, एम के भटनागर, शेखर वर्मा, सुधीर सक्सेना, विश्वनाथ भटनागर, आशीष श्रीवास्तव, दीप श्रीवास्तव, भारत-भूषण माथुर, तान्या श्रीवास्तव, अभिलाषा ब्यौहार, डा अनिल प्रकाश श्रीवास्तव, डा सुनील कुलश्रेष्ठ, आशी सक्सेना, सरिता सक्सेना, प्रांजल निगम,  रूचि सक्सेना, अंशिका सक्सेना, सहित अनेक सामाजिक बंधु उपस्थित रहे।

आरंभ में मां सरस्वती जी का पूजन व गान हुआ।

गुना के डायल-112 हीरोज घायल हिरण के शावक को सुरक्षित वन विभाग के सुपुर्द किया

भोपाल 

गुना जिले के थाना म्याना क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से घायल हिरण के एक शावक को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करते हुए वन विभाग के सुपुर्द किया गया। समय पर की गई इस कार्यवाही से वन्यजीव को उपचार एवं आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा सकी।

07 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना म्याना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जमरा जंगल के पास एक हिरण का शावक घायल अवस्था में है, जिसे कुत्ते ने काट लिया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही म्याना थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक  देवदत्त वर्मा एवं पायलट  राजेश राजपूत ने मौके पर पहुँचकर पाया कि वन क्षेत्र से अपने झुंड से बिछड़कर आया हिरण का शावक घायल हो गया था।

डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल हिरण के शावक को सुरक्षित संरक्षण में लिया तथा एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं देखभाल हेतु फॉरेस्ट चौकी पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया, जहाँ उसका उपचार किया जा रहा है।

डायल-112 जवानों की मानवीय एवं संवेदनशील कार्यवाही से एक वन्यजीव को समय पर उपचार एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी समान रूप से संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

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