बड़वाह-ओंकारेश्वर-खेड़ीघाट को मिलाकर बनेगा विकास प्राधिकरण, सिंहस्थ समिति का बड़ा फैसला

भोपाल 

प्रदेश में सिंहस्थ 2028 के लिए बनाई गई मंत्रिमंडलीय समिति ने ओंकारेश्वर में बड़वाह, ओंकारेश्वर और खेड़ी घाट क्षेत्र को मिलाकर नया विकास प्राधिकरण गठित करने को मंजूरी दे दी है। इससे खंडवा और खरगोन जिले के विकास कार्यों में तेजी आएगी। इसके साथ ही समिति ने ओंकारेश्वर में हेलीपैड और अस्पताल बनाने को भी स्वीकृति दी है। यह निर्माण कार्य किसी भी तरह की आपदा के दौरान सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

यह निर्णय आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सिंहस्थ 2028 के लिए गठित मंत्रिमंडलीय समिति की छठवीं बैठक में लिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में सिंहस्थ के लिए 17 नए कार्यों को स्वीकृति दी गई। इनमें उज्जैन सहित ओंकारेश्वर के कार्य भी शामिल हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर में बड़ा अस्पताल बनाने और हेलीपैड बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह निर्माण आपदा के स्थिति में विशेष रूप से सहायक होंगे।

विकास प्राधिकरण को मंजूरी
मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वाह, ओंकारेश्वर, खेड़ी घाट क्षेत्र के आसपास होने वाले निर्माण कार्यों के लिए अलग से प्राधिकरण गठित किया जाए। इससे खंडवा- खरगोन जिलों में होने वाले कार्यों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा और विकास गतिविधियां समय से पूर्ण करने में मदद मिलेगी।

वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भी निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने ओंकारेश्वर के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में शिप्रा नदी के साथ विकसित हो रहे घाटों का निर्माण चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। घाटों तक आने-जाने के मार्गों और पार्किंग व्यवस्था का निर्माण भी साथ-साथ किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि शिप्रा नदी पर बन रहे घाटों के पास मौजूद आश्रमों तथा गुरुकुलों को घाटों के प्रबंधन से जोड़ा जाए। इससे आश्रम और गुरुकुलों को मदद मिलेगी और सिंहस्थ के बाद भी घाटों का लंबे समय तक उपयोग हो सकेगा।

भोजशाला पहुंचे विधायक रामेश्वर शर्मा, बोले- मुस्लिम समाज सत्य स्वीकार कर धरोहर हिंदुओं को सौंपे

धार
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार को हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना की। उन्होंने भोजशाला को राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती का पावन मंदिर बताया। विधायक ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे ऐतिहासिक सत्य को स्वीकार करता है। विधायक शर्मा ने कहा कि भोजशाला को लेकर सदियों से चला आ रहा संघर्ष अब सत्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। न्यायपालिका ने भी इससे जुड़े तथ्यों और ऐतिहासिक सत्य को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने सभी पक्षों से सच्चाई को स्वीकार करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह केवल एक मंदिर का विषय नहीं है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रश्न है।

हिंदू समाज के 700 वर्षों के संघर्ष की सराहना धार के हिंदू समाज की जमकर सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने लगभग 700 वर्षों तक इस संघर्ष की ज्योति को जलाए रखा है। मां सरस्वती का यह मंदिर ज्ञान, संस्कृति और भारतीय परंपरा का प्रतीक है। राजा भोज द्वारा निर्मित यह धरोहर पूरे देश की आस्था का केंद्र है, इसलिए इसका गौरव हर हाल में पुनर्स्थापित होना चाहिए।

देशभर में गूंजेगी धार से उठी आवाज अपने संबोधन में रामेश्वर शर्मा ने विश्वास जताया कि भोजशाला का मुद्दा केवल धार तक सीमित नहीं रहेगा। यहां से उठने वाली यह आवाज देशभर में गूंजेगी और सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण को लेकर जनजागरण का माध्यम बनेगी। भोजशाला परिसर में उनके आगमन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे। पूजा-अर्चना के बाद विधायक ने पूरे मंदिर परिसर का अवलोकन भी किया।

नर्मदापुरम में भूकंप से कांपी धरती, 3.8 तीव्रता के झटकों से दहशत में ग्रामीण

नर्मदापुरम

 नर्मदापुरम जिले के केसला ब्लॉक के ग्राम चिचवानी और छीतापुरा क्षेत्र में सोमवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। अचानक आए कंपन से ग्रामीणों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है।

रात करीब 9:38 बजे महसूस हुआ कंपन
मौसम केंद्र भोपाल और नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, 8 जून 2026 की रात करीब 9:39 बजे भूकंप दर्ज किया गया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.8 मैग्नीट्यूड मापी गई। जबकि इसकी गहराई जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे बताई गई।

छीतापुरा गांव तक महसूस हुए झटके
चिचवानी गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर छीतापुरा में भी लोगों ने झटके महसूस किए। स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य संतोष सल्लाम ने बताया कि वह रात में छत पर सो रहे थे, तभी अचानक कुछ सेकंड के लिए कंपन महसूस हुआ। शुरुआत में ऐसा लगा कि घर हिल रहा है, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई।

हल्की श्रेणी का माना जाता है 3.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप
विशेषज्ञों के अनुसार 3.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है। ऐसे भूकंप में आमतौर पर बड़े नुकसान की संभावना कम रहती है, लेकिन इसके झटके लोगों को स्पष्ट रूप से महसूस हो सकते हैं।

छत सो रहा था, अचानक से कंपन हुआ
ग्राम चिचवानी से 2 किमी दूर स्थित छीतापुरा में भी झटके महसूस हुए। जनपद पंचायत सदस्य संतोष सल्लाम ने बताया रात करीब 9.30 बजे के आसपास जब में छत पर सो रहा था, तब कुछ पलभर के लिए कंपन हुआ। ऐसा लगा मानो घर हिल गया है लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ।

3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है
जानकारों के अनुसार 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है। इसमें आमतौर पर बड़ा नुकसान नहीं होता, लेकिन झटके साफ महसूस होते हैं। एसडीएम निलेश शर्मा ने बताया मुझे इसकी जानकारी मिली है। अधिकृत पता करके थोड़ी देर में बताऊंगा।

हल्की श्रेणी का भूकंप, नुकसान की खबर नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे भूकंपों में आमतौर पर बड़े नुकसान की संभावना कम होती है, लेकिन झटके स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं। प्रशासन ने भी फिलहाल किसी तरह की क्षति की पुष्टि नहीं की है।

प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
एसडीएम निलेश शर्मा ने बताया कि भूकंप की जानकारी प्राप्त हुई है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अब तक किसी गांव से नुकसान या घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

मप्र पुलिस का मानवीय चेहरा: आरक्षकों ने सीपीआर देकर बचाई आगंतुक की जान

मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशीलता और दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण
आरक्षकों ने सीपीआर देकर बचाई आगंतुक की जान
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने आरक्षकों को पुरस्कृत करने की घोषणा की
समय पर दिए गए सीपीआर से अचेत आगंतुक को मिला नया जीवन

भोपाल
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिसकर्मियों को नियमित रूप से प्रदान किए जाने वाले सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण का सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे है। इसी के परिणामस्‍वरूप आज पुलिस आयुक्त कार्यालय, भोपाल में पदस्थ दो आरक्षकों ने त्वरित सूझबूझ, तत्परता एवं सीपीआर कौशल से एक अचेत नागरिक को समय रहते जीवनरक्षक सहायता प्रदान कर उसकी जान बचाई। इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने दोनों पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यालय पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल में एक आगंतुक अचानक अस्वस्थ होकर अचेत अवस्था में जमीन पर गिर पड़ा। घटना को देखते हुए वहां मौजूद चालक आरक्षक क्रमांक 858 मुकेश साहू एवं गनमैन आरक्षक क्रमांक 3685 रंजीत रघुवंशी ने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए प्राथमिक उपचार प्रारंभ किया।
दोनों आरक्षकों ने प्रशिक्षित दक्षता का परिचय देते हुए अचेत व्यक्ति को तत्काल सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। उन्होंने बारी-बारी से लगातार सीपीआर प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप कुछ ही समय में आगंतुक को होश आ गया। प्राथमिक उपचार के उपरांत उसे बेहतर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल भेजा गया।

उल्‍लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा समय-समय पर पुलिसकर्मियों को सीपीआर एवं अन्य आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि दुर्घटना, हृदयाघात अथवा अन्य आपात स्थितियों में नागरिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। आज की यह घटना ऐसे प्रशिक्षणों की उपयोगिता और प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा एवं सेवा के अपने संकल्प के अनुरूप कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आपात परिस्थितियों में मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रतिबद्ध है।
 

प्रदेश में सुपोषण का नया रोडमैप, विदिशा के पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल

प्रदेश में सुपोषण का नया रोडमैप

विदिशा के पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल

भोपाल

प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर अभिनव और नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विदिशा जिले से सफलता की एक ऐसी गौरवशाली गाथा सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामने प्रशासनिक सूझबूझ और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘स्वस्थ मध्यप्रदेश’ के संकल्पों को जमीनी धरातल पर उतारते हुए विदिशा जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए ‘पोषण संजीवनी अभियान’ ने गंभीर कुपोषण के खिलाफ एक निर्णायक और प्रभावी जंग छेड़ दी है। यह अभियान इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया है कि जब जिला प्रशासन और समाज की संवेदनशील ताकतें एक साथ कदम बढ़ाती हैं, तो कठिन से कठिन सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान सहज संभव हो जाता है।

अमूमन यह देखा जाता है कि पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में उपचार के बाद जब बच्चे घर लौटते हैं, तो परिवारों की सीमित आर्थिक क्षमता और माताओं में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी के कारण वे दोबारा कुपोषण चक्र में फंस जाते हैं। जून 2025 में हुए एक व्यापक सर्वे के दौरान जिले में 1,307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर समस्या की गंभीरता और स्पष्ट हो गई। इसी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदलते हुए विदिशा जिला कलेक्टर अंशुल गुप्ता के नेतृत्व में ‘पोषण संजीवनी अभियान’ की परिकल्पना की गई, जिसका मूल ध्येय बच्चों का तात्कालिक उपचार नहीं बल्कि उनका दीर्घकालिक सुपोषण सुनिश्चित करना था।

अभियान के तहत प्रत्येक चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चे को तीन महीने तक अतिरिक्त पोषण देने के लिए ₹3000 मूल्य की विशेष ‘सुपोषण किट’ प्रदान की जा रही है। उच्च गुणवत्तायुक्त पौष्टिक तत्वों से भरपूर इस किट में दो किलो मूंगदाल, एक किलो बेसन, पंद्रह सौ ग्राम मुरमुरा, एक लीटर खाद्य तेल, एक किलो शुद्ध घी, डेढ़ किलो मूंगफली, एक किलो गुड़ पाउडर, दो किलो मल्टीग्रेन आटा, एक किलो सत्तू, दो किलो चावल और पांच सौ ग्राम तिल जैसी अत्यंत पौष्टिक सामग्रियां शामिल की गई हैं। यह संतुलित आहार बच्चों को प्रतिदिन लगभग 750 अतिरिक्त कैलोरी प्रदान करता है, जो उनके शारीरिक विकास के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।

इस पूरे अभियान की सफलता के पीछे जनभागीदारी एक प्रमुख कारण बना। इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता का परिचय दिया। समाज के सामूहिक प्रयासों से देखते ही देखते ₹39.21 लाख की सम्मानजनक राशि स्वेच्छा से एकत्र हो गई, जिसके माध्यम से अब तक सभी 1,307 बच्चों तक सुपोषण किट पहुंचाई जा चुकी है। यह जनसहयोग इस बात का सशक्त प्रतीक है कि समाज अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति कितना सजग और उत्तरदायी है।

तकनीक और जमीनी निगरानी से सफल परिणाम

प्रशासन ने केवल राशन वितरण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि माताओं के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को पूरी मुस्तैदी से काम पर लगाया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा माताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से सरल और पौष्टिक व्यंजन जैसे लड्डू, हलवा और सत्तू पेय बनाने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आनंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें खिलौना किट और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए टिफिन व पानी की बोतलें भी उपहार स्वरूप दी गईं। तकनीक और कड़े पर्यवेक्षण के मोर्चे पर भी यह मॉडल बेहद सुदृढ़ है। ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप के माध्यम से प्रत्येक बच्चे के चयन से लेकर उसकी शारीरिक प्रगति का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से घर-घर जाकर बच्चों की वृद्धि निगरानी की गई। वहीं विभाग के पर्यवेक्षक लगातार बच्चों का वजन मापकर उनकी वास्तविक स्थिति का जमीनी आकलन कर रहे हैं।

63%  से अधिक बच्चे हुए सामान्य

इस बेहद सुनियोजित और समन्वित प्रयास के जो परिणाम निकलकर आए हैं, वे राज्य स्तर पर बेहद उत्साहजनक और प्रेरणादायी हैं। जिले के कुल 1,307 कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं, जिससे 63.02% की उल्लेखनीय और ऐतिहासिक रिकवरी दर दर्ज की गई है। यह शानदार सफलता इस अभियान को मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय ‘रोल मॉडल’ के रूप में स्थापित करती है। यह अभियान अब एक प्रशासनिक पहल से आगे बढ़कर विदिशा में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जिला प्रशासन के सशक्त नेतृत्व में अब स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रबुद्ध समाज सेवियों एवं विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रिय अंतर-विभागीय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विभाग द्वारा इन गंभीर कुपोषित बच्चों की सतत और गहन निगरानी की जा रही है ताकि परिवर्तन केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य के संकल्प में बदले।

भविष्य की तैयारियों को लेकर भी सरकार और प्रशासन की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। आगामी तिमाही के लिए 650 नए गंभीर कुपोषित बच्चों को इस अभियान से जोड़कर कुपोषण मुक्त करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से जून माह में लटेरी, सिरोंज एवं कुरवाई जैसी दूरस्थ परियोजनाओं के चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों के बीच 500 अतिरिक्त सुपोषण किट के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। विदिशा का यह सुपोषण मॉडल यह संदेश देता है कि जब शासन, प्रशासन, समाज और संस्थाएं एकजुट होकर पूरी संवेदनशीलता से कार्य करते हैं, तो कुपोषण जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जीत सुनिश्चित हो जाती है।

पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना दे रही विदेश अध्ययन के सपने को उड़ान

पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना दे रही विदेश अध्ययन के सपने को उड़ान

बालाघाट के राजवर्धन का ‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ में चयन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्यमंत्री श्रीमती गौर का जताया आभार

भोपाल

बालाघाट की वारासिवनी तहसील के ग्राम सांवगी निवासी राजवर्धन राणा ने अपनी प्रतिभा और लगन के बल पर पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। राजवर्धन का चयन इंग्लैंड की प्रसिद्ध शिक्षण संस्था ‘द लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस’ में ‘मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर वैश्विक स्तर की इस प्रतिष्ठित संस्था तक पहुँचने में मध्यप्रदेश शासन की ‘पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना’ ने अहम भूमिका निभाई है।

आर्थिक रूप से सीमित किंतु होनहार विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना’ के तहत राज्य शासन राजवर्धन को पूर्ण वित्तीय सहयोग प्रदान कर रहा है। पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष की फीस के रूप में 40 लाख 70 हजार 736 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्वाह भत्ता (लिविंग अलाउंस), आकस्मिकता भत्ता, बीमा राशि और हवाई यात्रा का किराया भी राज्य शासन द्वारा वहन किया जा रहा है।

राजवर्धन राणा ने अपनी इस सफलता पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर समेत पूरे प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दूरदर्शी योजना के बिना उनके लिए इतने बड़े संस्थान में पढ़ने का सपना साकार करना संभव नहीं था। राजवर्धन ने कहा यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, परिश्रम निष्ठापूर्वक किया जाए और शासन की योजनाओं का समुचित लाभ उठाया जाए, तो सीमित संसाधन सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकते। वे भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।

राजवर्धन जैसे कई छात्र विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के ज़रिए विदेश में पढ़ाई के अपने सपनों को साकार कर रहे हैं। इस योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार उन मेधावी और होनहार युवाओं को एक मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करती है, जो प्रतिभा के धनी हैं, लेकिन आर्थिक सीमाओं के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं।

योजना के बारे में जानिए

पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना’ प्रदेश के युवाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। इस योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पोस्ट-ग्रेजुएशन, पीएचडी या रिसर्च की पढ़ाई के लिए ट्यूशन फीस का भुगतान शासन द्वारा किया जाता है। पढ़ाई के खर्च के साथ-साथ रहने और यात्रा का खर्च भी सरकार वहन करती है। योजना में निर्वाह भत्ता (लिविंग अलाउंस), आकस्मिक व्यय, स्वास्थ्य बीमा, वीज़ा शुल्क और विदेश जाने-आने का हवाई यात्रा (इकोनॉमी क्लास) का खर्च भी शामिल है।

योजना के लिए पात्रता

    छात्र-छात्रा मध्यप्रदेश के मूल निवासी और पिछड़ा वर्ग श्रेणी (नॉन क्रीमी लेयर) के अंतर्गत आते हों।

    पिछली परीक्षा प्रथम श्रेणी (कम से कम 60% अंक) के साथ उत्तीर्ण की हो।

    आवेदक की आयु 35 वर्ष से कम हो।

    विद्यार्थी ने विदेश के किसी मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान में प्रवेश प्राप्त कर लिया हो।

 

मांगलिया रेलवे स्टेशन बनेगा नया जंक्शन! इंदौर के पास विकास कार्यों ने पकड़ी रफ्तार

इंदौर
 इंदौर से बुधनी को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेल परियोजना के तहत मांगलिया गांव रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्टेशन पर एक ओर यात्री की सुविधाओं को देखते हुए विस्तार का काम चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से चलते दिखाई दिए, लेकिन अभी भी कई काम अधूरे हैं। यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नईदुनिया की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर काम की स्थिति देखी। टीम मांगलिया स्टेशन पहुंची तो प्लेटफार्म के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया।

नया फुट ओवरब्रिज (एफओबी) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि, स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेन का इंतजार करने को मजबूर हैं।

आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं
जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, प्रस्तावित कार्यों में विभिन्न गुड्स शेड्स पर आल वेदर एप्रोच रोड, पीसीसी फ्लोरिंग, सर्कुलेशन एवं हैंडलिंग एरिया का विकास, कवर शेड निर्माण, हाई मास्ट लाइट, पेयजल सुविधा, महिला एवं पुरुष विश्राम कक्ष, शौचालय ब्लाक, गुड्स ऑफिस एवं ट्रेडर्स रूम जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

मांगलिया गांव गुड्स शेड पर अतिरिक्त हाई मास्ट लाइट, कवर शेड, महिलाओं के लिए विश्राम कक्ष एवं शौचालय तथा प्लेटफार्म क्षेत्र के सुधार कार्य किए जाएंगे।

पेट्रोलियम और सोयाबीन आपूर्ति के लिए मजबूत
स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं, ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बाय-प्रोडक्ट्स की आपूर्ति के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक जुड़ाव व संपर्क और लादना व भरने की सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है।

10 नए क्रासिंग एवं सात हाल्ट
इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रासिंग और सात नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं, आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा।

इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क
इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रासिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता दिखाई दिया। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर आधार मजबूत किया जा रहा है।

रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि, अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है। इसके आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है।

संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन का शिखर प्रदर्शन: यूनिट-3 ने लगातार 100 दिन बिजली उत्पादन कर रचा इतिहास

संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन का शिखर प्रदर्शन: यूनिट-3 ने लगातार 100 दिन बिजली उत्पादन कर रचा इतिहास

भोपाल

प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन बिरसिंगपुर (SGTPS) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। स्टेशन की यूनिट नंबर 3 ने बीते 27 फरवरी से बिना रुके लगातार 100 दिनों तक बिजली पैदा करने का स्वर्णिम आंकड़ा छू लिया है। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भी कंपनी की कुल 13 उत्पादन इकाइयों ने 100 से अधिक दिनों तक लगातार निर्बाध बिजली उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया था। इस शानदार ट्रैक रिकॉर्ड में अकेले संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर का दबदबा रहा; जहां इसी यूनिट-3 ने पहले भी एक बार यह मुकाम हासिल किया था, वहीं स्टेशन की यूनिट-4 दो बार और यूनिट-5 ने एक बार इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अपने नाम दर्ज कराया था।

सटीक परिचालन से गढ़े गए दक्षता के नए मानदंड

इस रिकॉर्ड परिचालन अवधि के दौरान यूनिट ने 89.18 प्रतिशत का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF) बनाए रखा, जो बिजली उत्पादन के लिए इस इकाई की उच्च उपलब्धता और तकनीकी मजबूती को प्रमाणित करता है। इसके साथ ही, इकाई ने 80.07 प्रतिशत का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) दर्ज कर अपनी वास्तविक उत्पादन क्षमता के कुशल उपयोग का लोहा मनवाया। ऊर्जा दक्षता के मोर्चे पर भी प्रबंधन का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा, जहां आंतरिक सहायक विद्युत खपत (APC) को महज 9.17 प्रतिशत पर सीमित रखकर बिजली की बड़ी बचत की गई।

उत्पादन इकाइयाँ उच्चतम विश्वसनीयता के साथ काम करने में सक्षम

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा, “हमारे इंजीनियरों और तकनीकी टीम ने उत्कृष्ट संधारण (Maintenance) और कुशल संचालन (Operation) के दम पर बार-बार यह साबित किया है कि कंपनी की बिजली उत्पादन इकाइयाँ उच्चतम विश्वसनीयता के साथ काम करने में पूरी तरह सक्षम हैं। यही वजह है कि हमारी इकाइयाँ लगातार राष्ट्रीय स्तर के कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन का एक बेहद मजबूत रिकॉर्ड बना रही हैं।” उन्होंने कहा यह उपलब्धि तकनीकी कार्मिकों एवं ठेका श्रमिकों की सतत निगरानी, समर्पण तथा समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण संधारण का परिणाम है।

डायरेक्टर टेक्न‍िकल सुबोध निगम ने कहा कि यह सफलता पूरी टीम के आपसी तालमेल, सक्रिय कार्यप्रणाली और संकट के समय त्वरित फैसलों का नतीजा है। उन्होंने विश्वास जताया कि हमारे सभी विद्युत गृह भविष्य में भी प्रदेश को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली देने में हमेशा आगे रहेंगे।

 

मध्यप्रदेश 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कर देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

मध्यप्रदेश 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कर देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि जनभागीदारी, स्वास्थ्य अमले की प्रतिबद्धता और प्रभावी नेतृत्व के बल पर बड़े से बड़े जनस्वास्थ्य अभियानों को समय से पहले सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने अभियान से जुड़े चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम, शिक्षकों, जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें सफलता के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाकर सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को देशव्यापी एचपीवी(ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया था। महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान में मध्यप्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है। स्वास्थ्य अमले, सहयोगी विभागों की प्रतिबद्धता एवं सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप प्रदेश में 7.63 लाख से अधिक पात्र बालिकाओं का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है। यह अभियान मूल रूप से 90 दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन मध्यप्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य को मात्र 60 दिनों में ही पूर्ण कर लिया जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है तथा इसके अधिकांश मामलों का प्रमुख कारण एचपीवी संक्रमण होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसा कैंसर है जिसे प्रभावी टीकाकरण के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन बालिकाओं को भविष्य में इस गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने का सुरक्षित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपाय है। अभियान की सफलता में स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जनजागरूकता, सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लानिंग) एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।

 

इंदौर में आज से BRICS कृषि मंत्रियों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि करेंगे मंथन

इंदौर
 मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक बेहद बड़े और प्रतिष्ठित आयोजन का मुख्य केंद्र बनने जा रही है। जी-20 शिखर सम्मेलन और प्रवासी भारतीय दिवस की शानदार सफलता के बाद अब इस साफ-सुथरे शहर को ‘ब्रिक्स’ (BRICS) देशों की बेहद महत्वपूर्ण कृषि बैठक की मेजबानी करने का गौरव मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय समागम में भारत सहित दुनिया के 11 प्रमुख सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और केंद्रीय मंत्री शामिल होने जा रहे हैं। आपको बता दें कि यह आयोजन इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि ब्रिक्स देशों के पास पूरी दुनिया की करीब 42 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि मौजूद है। ऐसे में यह शक्तिशाली समूह खेती-किसानी से जुड़ी वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श करेगा।

सोमवार से ही विदेशी मेहमानों और राजनयिकों का इंदौर आगमन शुरू हो जाएगा। बैठक के साथ-साथ इन विदेशी प्रतिनिधियों को मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से रूबरू कराने की भी विशेष तैयारी की गई है। इसके तहत उनके भ्रमण कार्यक्रम में इंदौर के मशहूर खान-पान केंद्र ‘छप्पन दुकान’, ऐतिहासिक ‘राजवाड़ा पैलेस’ और पारंपरिक ‘ग्रामीण हाट-बाजार’ जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थलों को शामिल किया गया है।

यह महा-मंथन एक ऐसे नाजुक समय में होने जा रहा है जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज), वैश्विक खाद्य संकट और तेजी से बढ़ती आबादी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच पर पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए कृषि उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर व सीमित उपयोग पर जो भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे, वे आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि रणनीतियों और नीतियों को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

तकनीक, डिजिटल खेती और किसानों की आय पर रहेगा मुख्य फोकस
आगामीआज 9 जून से शुरू होने जा रही ब्रिक्स कृषि कार्य समूह (AWG) की इस तीन दिवसीय बैठक में कई तकनीकी और नीतिगत विषयों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना, बदलते मौसम का फसलों पर पड़ने वाला असर, कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का विस्तार और किसानों की आर्थिक स्थिति व आय को मजबूत करने के उपाय इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल रहेंगे।

बदलते दौर को देखते हुए इस बैठक में पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक विषयों पर विशेष मंथन किया जाएगा। इसके तहत डिजिटल कृषि (डिजिटल एग्रीकल्चर), प्रिसिजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा आधारित फसल प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर बात होगी। वैज्ञानिक और नीति-निर्धारक यह साझा रणनीति तैयार करेंगे कि किस तरह इन तकनीकों के दम पर कम से कम संसाधनों, कम पानी और कम लागत में अधिक से अधिक पैदावार हासिल की जा सके। इसके अलावा, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान के बीच खेती को टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और घाटे से उबारकर लाभकारी बनाने के लिए सभी सदस्य देश अपने-अपने सफल अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे।

ब्रिक्स समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएं 
1. खाद्य सुरक्षा, पोषण-किसानों की आजीविका
2. कृषि व्यापार और आपसी सहयोग
3. जलवायु अनुकूल और सतत कृषि
4. नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी

 42 फीसदी खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास
केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा- ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ यह विश्व के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बन गया है। वैश्विक नजरिए से यह समूह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की लगभग 42 फीसदी कृषि भूमि, 68  प्रतिशत कृषि और करीब 42 फीसदी खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास है।

अधिकारियों ने अब तक आठ बैठकें की
संवाददाताओं से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी हर नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी।

20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । भारत की अध्यक्षता में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 सत्रों में 8 सफल बैठकें होंगी।

चार वर्गों पर मुख्य फोकस
छोटे और सीमांत किसान हमारी हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे। कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषयों-खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी को सशक्त बनाने पर विशेष काम किया जा रहा है।

भारत पहले भी तीन सम्मेलनों की अध्यक्षता कर चुका
इस मंच पर होने वाला सहयोग पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है । भारत इससे पहले भी साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है, जिसके दौरान 2016 में ‘ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच’ जैसी बड़ी पहल शुरू की गई थी।

‘हमारी नीति में छोटे जोत वाले किसान’
शिवराज सिंह चौहान ने कहा अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी प्रत्येक नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं।

रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी।

20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
इस बार इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 सत्रों में 8 सफल बैठकें होंगी।

4 वर्गों पर फोकस
इस वर्ष के आयोजन में छोटे और सीमांत किसान हमारी हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे । कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी । इस बार मुख्य रूप से चार विषयों—खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका; कृषि व्यापार एवं सहयोग; जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि; तथा कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी को सशक्त बनाने पर विशेष काम किया जा रहा है ।

आज  यानी 9 जून से होगी शुरुआत
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती पर बात करते हुए कृषि मंत्री ने पुनर्योजी कृषि, सतत पद्धतियों और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को छोटे किसानों तक पहुँचाने पर जोर दिया । इसके साथ ही कृषि के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए महिलाओं और युवाओं के नेतृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है । इसी सिलसिले में 12 जून को “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर एक विशेष मंत्री स्तरीय संवाद भी होगा ।

तय कार्यक्रम के मुताबिक, 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी और इसके बाद 12 से 13 जून को मुख्य कृषि मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया जाएगा । इस दौरान खाद्य हानि को कम करने, पशुपालन, मत्स्य पालन और किसानों के अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी गंभीर मंथन होगा ।

ब्रिक्स वाटिका भी बनेगी भारत की प्रकृति से जुड़ी संस्कृति को दर्शाने के लिए इस भव्य आयोजन के दौरान सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों की सहभागिता से एक विशेष “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण किया जाएगा और सामूहिक वृक्षारोपण होगा, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी साझी प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगा ।

इसके अलावा, इंदौर आने वाले विदेशी मेहमानों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू कराने के लिए राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू जैसे ऐतिहासिक व प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि मंत्री ने पूरा विश्वास जताया है कि इंदौर की यह बैठक ब्रिक्स देशों के कृषि सहयोग को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगी और वैश्विक एजेंडे में करोड़ों छोटे किसानों के हितों को मजबूती से स्थापित करेगी ।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और मेहमाननवाजी की भव्य तैयारी
इस हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स सम्मेलन की संवेदनशीलता को देखते हुए इंदौर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के बेहद कड़े और पुख्ता इंतजाम किए हैं। देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर होटलों और मुख्य कार्यक्रम स्थलों तक सुरक्षा चक्र को बेहद मजबूत किया गया है। वीवीआईपी रूट पर विशेष पुलिस बल तैनात रहेगा और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों व आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

विदेशी मेहमानों के स्वास्थ्य और आपातकालीन जरूरतों के लिए डॉक्टरों की विशेष टीमें और अत्याधुनिक एंबुलेंस आयोजन स्थल पर चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी, जबकि शहर के कुछ चुनिंदा बड़े अस्पतालों को भी किसी भी आपात स्थिति के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है।

कार्यक्रम के तय शेड्यूल के अनुसार, 11 जून को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा विदेशी प्रतिनिधियों के सम्मान में एक भव्य रात्रि भोज (डिनर) का आयोजन किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 12 जून को कृषि मंत्री स्तर की मुख्य बैठक संपन्न होने के बाद, सभी विदेशी मेहमानों को धार जिले में स्थित ऐतिहासिक पर्यटन नगरी ‘मांडू’ के वैभव और ऐतिहासिक किलों की सैर कराई जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल कृषि सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी रिश्तों को भी एक नई ऊंचाई देगा।

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