RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, EMI पर फिलहाल नहीं पड़ेगा असर

नई दिल्ली
केंद्रीय बैंक RBI ने 3 से 5 जून तक चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट 5.25 पर बरकरार रखने का फैसला लिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने शुक्रवार सुबह 10 बजे MPC मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रेपो रेट नहीं बढ़ाने के फैसले को जानकार, एक राहत की तरह मान रहे हैं. इस फैसले से स्‍पष्‍ट है कि अगर आपने रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह का बैंक लोन लिया है, तो आपके लोन की EMI नहीं बढ़ेगी। 

कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ? 
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान मामूली रूप से कम कर दिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रियल GDP ग्रोथ अनुमान  6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया है। 

    जून 2026 तिमाही: 6.6%
    सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%
    दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%
    मार्च 2027 तिमाही: 6.8%

 
इस साल अनुमान से ज्‍यादा रह सकती है महंगाई

महंगाई दर पर RBI का अनुमान है कि इस साल देश में महंगाई थोड़ी ज्‍यादा रह सकती है. इसमें तेल और गैस की बढ़ी कीमतों का बड़ा रोल रहेगा. मार्च में महंगाई दर 3.4 फीसदी और अप्रैल में 3.5 फीसदी रही थी, जबकि इससे पहले फरवरी 2026 में महंगाई दर 3.2 रही थी.  ये आंकड़े केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्‍य से कम थे. हालांकि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है. RBI के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 5.1 फीसदी रह सकती है। 

    जून 2026 तिमाही: 4.2%
    सितंबर 2026 तिमाही: 5.1%
    दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9%
    मार्च 2027 तिमाही: 5.4%

हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी।

RBI MPC मीटिंग के अन्य बड़े फैसले
    ग्रोथ का अनुमान घटाया: वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते RBI ने आर्थिक विकास दर
यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ आउटलुक को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।

    स्टांस ‘न्यूट्रल’ रखा: महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बावजूद मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। कमेटी स्थिति पर नजर रखते हुए डेटा के आधार पर आगे कदम उठाएगी।

    महंगाई को लेकर चिंता: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं।

    कमजोर मानसून का डर: पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी (कम बारिश) के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।

    सर्विस सेक्टर मजबूत: अच्छी बात यह है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर है और GST रेशनलाइजेशन व स्थिर रोजगार के चलते शहरी क्षेत्रों में कंजम्पशन (खपत) को सहारा मिल रहा है।

रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है?

RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं।

रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?
किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है।

पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।

इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

FPI की वापसी की तैयारी! सरकार हटाएगी बड़ा टैक्स, विदेशी निवेशकों को लुभाने की कवायद तेज

 नई दिल्ली

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों के निकलने का सिलसिला लगातार जारी है और FPIs की भारी बिकवाली का दबाव शेयर मार्केट में साफ नजर आ रहा है. इस साल सिर्फ फरवरी महीने को छोड़ दें, तो हर महीने एफपीआई ने बाजार से पैसे निकाले हैं. अब इन निवेशकों की वापसी के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिससे इन निवेशकों के यू-टर्न (FPIs U-Turn) की उम्मीद जागी है। 

दरअसल, विदेशी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के तहत मोदी सरकार (Modi Govt) ने भारतीय सरकारी बांडों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर पूंजीगत लाभ कर यानी कैपिटल गेन टैक्स को हटाने का निर्णय लिया है। 

मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी
सूत्रों के हवाले से ये बात सामने आई है कि कैश फ्लो को बढ़ावा देने, भारतीय करेंसी रुपये (Indian Rupee) को सपोर्ट करने और ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल की हाई कीमतों के प्रभाव से इकोनॉमी को बचाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के तहत मोदी कैबिनट ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। 

इसे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इसका सीधा उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स के जटिल जंजाल को कम करना है ताकि वे अपनी पूंजी भारत से बाहर ले जाने के बजाय यहीं निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों. एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों को मिलने वाली इस प्रस्तावित टैक्स राहत से न सिर्फ घरेलू शेयर बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ेगी, बल्कि रुपये पर बना भारी दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा। 

रिजर्व बैंक भी कर सकता है महत्‍वपूर्ण घोषणा
सरकार का यह अध्यादेश भारतीय रिजर्व बैंक के साथ बनाई गई एक संयुक्त और समन्वित रणनीति का हिस्सा है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो चुकी है. शुक्रवार को एमपीसी के फैसलों की घोषणा होगी. ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक इस अध्यादेश को सपोर्ट करने वाले कुछ और बड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय बदलावों का ऐलान भी कर सकता है। 

अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने की तैयारी
विदेशी निवेशकों को लुभाने और रुपये को मजबूत करने के साथ ही सरकार विभिन्न क्षेत्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए अन्य नीतिगत कदमों पर भी काम कर रही है. विभिन्न उद्योगों और कारोबारों को मंदी से बचाने के लिए सरकार समर्थित क्रेडिट लाइन दी जा सकती है. वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण संकट से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों (Exporters) के लिए विशेष राहत पैकेज लाया जा रहा है.

कैबिनेट ने आयकर अधिनियम में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी है, जिससे इन बदलावों को लागू किया जा सके. बता दें कि राष्ट्रपति से अप्रूवल मिलने के बाद यह निर्णय प्रभावी हो जाएगा। 

सरकार ने क्यों लिया फैसला? 
मोदी सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जबकि देश वेस्ट एशिया संघर्ष से विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली से जूझ रहा है. इसके साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से लेकर बढ़ती ऊर्जा लागत की मार भी पड़ रही है। 

सूत्रों के अनुसार, इन सबके बीच सरकार का उद्देश्य भारतीय ऋण बाजारों में अधिक विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना है, जिससे Iran War के चलते पैदा हुए चुनौतियों का कुछ समाधान किया जा सके. इस कदम के तहत सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) में किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह समाप्त करेगी। 

अभी कितना लगता है टैक्स? 
गौरतलब है कि फिलहाल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए बॉन्ड और लिस्टेड शेयरों पर 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना होता है. इसके अलावा, उन्हें सरकारी बॉन्ड से मिले ब्याज पर 20% का विदहोल्डिंग टैक्स भी चुकाना पड़ता है. इस पर पहले मिलने वाली 5% की रियायत को सरकार ने 2023 में समाप्त कर दिया था। 

2026 में अब तक ₹2.50 लाख करोड़ निकाले
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs का बीते लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार को लेकर मूड खराब है. इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 2026 में फरवरी महीने को छोड़कर हर महीने बिकवाली हुई है और अब तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. इस हिसाब ये साल विदेशी निवेश जाने के मामले में अब तक के सबसे खराब सालों में से एक बन गया है। 

E85 पेट्रोल की होगी एंट्री, रेगुलर फ्यूल से सस्ता विकल्प; पेट्रोलियम मंत्री ने दिए संकेत

  नई दिल्ली

पेट्रोल के बढ़ते खर्च से अगर आप भी परेशान रहते हैं, तो आने वाले समय में राहत की खबर मिल सकती है. सरकार अब ऐसे फ्यूल पर बड़ा दांव लगाने जा रही है जो पेट्रोल से काफी सस्ता होगा और देश में पहले से मौजूद इथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा देगा. बात हो रही है E85 फ्यूल की, जिसमें 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है. सरकार इसकी कीमत कम रखने, देशभर में फ्यूल स्टेशन बढ़ाने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी में जुटी है. हीरो की नई फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स और मारुति की फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर इसी बदलाव की शुरुआत मानी जा रही हैं। 

दरअसल, केंद्र सरकार E85 फ्यूल को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है. आज मारुति सुजुकी ने अपनी मशहूर फैमिली कार Maruti Wagon R के नए फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) वर्जन को पेश किया. इस मौके पर मौजूदा केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि, “E85 फ्यूल सामान्य पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता होगा. उनका कहना है कि यह फ्यूल केवल उन वाहनों में इस्तेमाल किया जाएगा जो E85 के अनुकूल होंगे. सरकार जल्द ही ऐसी नीतियां लाने पर काम कर रही है जिससे लोगों के लिए इस नए फ्यूल को अपनाना आसान और किफायती बन सके। 

पुरी ने कहा कि, “आज देश में तकरीबन 30 करोड़ दोपहिया वाहन और तकरीबन 37 लाख पैसेंजर वाहन मौजूद हैं. जब फ्लेक्स फ्यूल का इस्तेमाल इन वाहनों में बड़े पैमाने पर होगा तो इसका असर भी बड़ा होगा. फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से देश में एथेनॉल की खपत में बड़ा इजाफा हो सकता है.” केंद्रीय मंत्री के अनुसार यदि नए बिकने वाले वाहनों में से 50 प्रतिशत वाहन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस हो जाते हैं, तो इथेनॉल की मांग में करीब 400 करोड़ लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे न केवल वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की फ्यूल इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। 

E85 फ्यूल क्या है और क्यों है खास?
E85 एक विशेष प्रकार का फ्यूल है जिसमें 85 प्रतिशत तक इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है. यह फ्यूल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है. सरकार जल्द ही E85 से जुड़े ड्राफ्ट नियम जारी कर सकती है. वहीं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय पहले ही E85, E100, बायोडीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दे चुका है। 

सरकार E85 फ्यूल की उपलब्धता बढ़ाने की भी योजना बना रही है. शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 E85 फ्यूल स्टेशन शुरू किए जाएंगे. इसके बाद इस साल दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 500 स्टेशन करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार की योजना है कि वर्ष 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में करीब 5,000 E85 फ्यूल स्टेशन स्थापित किए जाएं। फलेक्स-फ्यूल वाहनों की एंट्री
सरकार की इस पहल के साथ वाहन निर्माता कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च करने लगी हैं. हीरो मोटोकॉर्प ने हाल ही में स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश किए हैं. ये मोटरसाइकिलें E20 से लेकर E85 तक के इथेनॉल बलेंडिंग पर चल सकती हैं. HF Deluxe Flex Fuel की कीमत 72,792 रुपये रखी गई है, जबकि Splendor+ Flex Fuel की कीमत 82,710 रुपये ( एक्स-शोरूम) तय की गई है। 

वहीं आज मारुति सुजुकी ने अपनी वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल कार को भी पेश किया है. यह देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार मानी जा रही है. कंपनी के 1.2-लीटर K12N पेट्रोल इंजन पर बेस्ड यह कार E20 से E85 तक के इथेनॉल ब्लेंडिंग पर चल सकती है. फिलहाल इसे केवल फ्लीट ऑपरेटरों और ओला-उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. बाद में कंपनी इसे प्राइवेट व्हीकल के तौर पर भी लॉन्च कर सकती है। 

 

PM Kisan की अगली किस्त का इंतजार खत्म! जानें कब खाते में आएंगे ₹2,000

नई दिल्ली
 PM Kisan Yojana 23rd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त का इंतजार क्या खत्म होने वाला है? ऐसे सवाल इस समय देशभर के करोड़ों किसानों के मन में उठ रहे हैं। अगर आप भी किसान हैं और पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके मतलब की हो सकती है।

दरअसल, अब तक पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana) की 22 किस्तें जारी हो चुकी है। हर किस्त के जरिए किसानों के खाते में 2 हजार रुपये की राशि भेजी जाती है। हालांकि, कई बार तकनीकी कारणों से लाखों किसानों की कई किस्तें अटक भी चुकी हैं। लेकिन आगामी किस्त में उन किसानों के खाते में पिछली किस्त का भी पैसा आ जाता है। अगर आपकी भी 22वीं किस्त अटक गई है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, 23वीं किस्त में पिछली किस्त का पैसा आ सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर 23वीं किस्त का इंतजार कब खत्म होगा?

PM Kisan Yojana 23rd Installment: कब खत्म होगा 23वीं किस्त का इंतजार?
पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त के तहत आखिर किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये कब क्रेडिट होंगे? यह सवाल हर किस्त से पहले होता है कि आखिर पैसा कब आएगा। दरअसल, केंद्र सरकार के तहत आने वाला कृषि मंत्रालय ही इस योजना को देखता है। वही किसानों का डेटा तैयार करता है और किस्त भेजने की पूरी तैयारी करता है। इस समय भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। वह समय-समय पर अलग-अलग राज्य जाकर किसानों के साथ बातचीत करते हैं। कई तरह के कृषि कार्यक्रमों में भी वो शामिल होते है।

इन कार्यक्रमों के जरिए वह किसानों से जुड़ी योजनाओं के बारे में बताते हैं। कई बार पीए किसान योजना का भी जिक्र करते हैं। हालांकि, अभी 23वीं किस्त को लेकर उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। और ना ही कृषि मंत्रालय की ओर से यह सूचना दी गई है कि 23वीं किस्त का पैसा कब आएगा।

लेकिन पीएम किसान योजना के शुरू होने के बाद से ही वित्त वर्ष की पहली किस्त भेजने को जो समय रहा है वह जून-जुलाई का रहा है। यानी हर साल वित्त वर्ष की पहली किस्त फरवरी या मार्च और कैलेंडर वर्ष की दूसरी किस्त जून या जलुाई में जारी होती रही है। अगर थोड़ा लेट हुआ तो यह तारीख अगस्त के पहले या दूसरे सप्ताह तक भी गई है। लेकिन अधिकतर जून और जुलाई में ही आने का ट्रेंड रही है। पिछले साल (2025) 20वीं किस्त 2 अगस्त को जारी हुई थी। उससे पहले 2024 में 17वीं किस्त 18 जून को जारी की गई थी।

ऐसे में अगर पिछली तारीखों को देखें तो संभावना है कि पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त 18 जून के बाद आ सकती है। यानी किसानों का इंतजार 18 जून के बाद खत्म हो सकता है। हालांकि, किसानों को आधिकारिक सूचना आने तक इंतजार करना चाहिए।

कैसे चेक करेंPM Kisan Yojana का ताजा स्टेटस

पीएम किसान योजना का ताजा स्टेटस चेक करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें।

स्टेप 1: PM-KISAN के आधिकारिक पोर्टल https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं।

स्टेप 2: होमपेज पर “Know Your Status” (अपनी स्थिति जानें) विकल्प पर क्लिक करें।

स्टेप 3: अब, दिए गए फ़ील्ड में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।

 अगर आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर याद नहीं है

“Know Your Registration Number” (अपना रजिस्ट्रेशन नंबर जानें) पर क्लिक करें
मोबाइल नंबर या आधार कार्ड से खोजें
OTP का इस्तेमाल करके वेरीफाई करें, और आप अपना रजिस्ट्रेशन नंबर देख पाएँगे।

स्टेप 4: अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP का इस्तेमाल करके अपना वेरिफिकेशन पूरा करें।

स्टेप 5: वेरिफिकेशन के बाद, आप स्क्रीन पर अपनी PM-KISAN की जानकारी देख पाएंगे, जिसमें ये शामिल हैं:

किसान का नाम
रजिस्ट्रेशन की स्थिति
eKYC की स्थिति
किस्त के भुगतान का इतिहास
बैंक खाते की जानकारी
लंबित या अस्वीकृत स्थिति (यदि कोई हो)

मध्य प्रदेश सरकार के टेंडरों और सौदों की जांच करेगी कांग्रेस, भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेरा

भोपाल। मध्य प्रदेश में विपक्षी दल कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद के कुछ सदस्यों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं और सरकार के कई निर्णयों में पारदर्शिता को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ है।

जीतू पटवारी ने दावा किया कि अब पार्टी सरकार के हर टेंडर और हर बड़े सौदे पर नजर रखेगी। पार्टी का कहना है कि वह एक-एक टेंडर की जांच करेगी और यदि कहीं भी अनियमितता या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें जनता के सामने लाया जाएगा।

जीतू पटवारी   ने कहा कि वह सरकारी योजनाओं, खरीद प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए गए टेंडरों की विस्तृत समीक्षा करेगी। पार्टी के अनुसार, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की परतें खोली जाएंगी और तथ्यों के आधार पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा और राज्य सरकार पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए अपनी कार्यप्रणाली को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बता चुकी है।

राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लगातार सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी।

“हर दो साल में देश बचाने की अपील क्यों? जीतू पटवारी का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला”

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि आखिर देश की स्थिति ऐसी क्यों बन रही है कि हर दो साल में देशवासियों से ‘देश बचाने’ की अपील करनी पड़ती है। पटवारी ने सरकार के कामकाज और राजनीतिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जीतू पटवारी ने कहा कि जिस देश को विश्वगुरु बनाने का दावा किया जा रहा है, वहां बार-बार जनता से देश बचाने की अपील किए जाने की नौबत क्यों आ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार की नीतियां सफल हैं तो फिर लगातार संकट और चेतावनियों का माहौल क्यों बनाया जा रहा है।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मूलभूत मुद्दों से जूझ रही है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रचार में व्यस्त दिखाई देती है। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक मायने:
पटवारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी तेज़ है। हाल के दिनों में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच कई मुद्दों पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं।

अब देखना होगा कि जीतू पटवारी के इस बयान पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श में कितना प्रभाव छोड़ता है। ऐसी ही राजनीतिक खबरों के लिए बने रहिए हमारे साथ।

मोहन भैया को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता को संदेश: “गालियों के जवाब में भी फूल देंगे” जीतू पटवारी 

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की विचारधारा का हवाला देते हुए जीतू पटवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ता को राजनीतिक सौहार्द और प्रेम की राजनीति का संदेश दिया है। जीतू पटवारी ने कहा कि उनके नेता राहुल गांधी ने उन्हें “मोहब्बत की राजनीति” सिखाई है।

अपने संदेश में उन्होंने कहा, “मेरे नेता आदरणीय राहुल गांधी जी ने हमें मोहब्बत की राजनीति सिखाई है। मोहन भैया, आप हमें कितनी भी गालियाँ दे दो, हम फिर भी आपको फूल ही देंगे।”

इस बयान को राजनीतिक मतभेदों के बीच संयम, संवाद और सकारात्मक राजनीति के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पी सी सी अध्यक्ष ने यह भी संकेत दिया कि उनकी राजनीति विरोधियों के प्रति कटुता के बजाय प्रेम और सम्मान पर आधारित है।

 

रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मिले कांग्रेस नेता, पेपर लीक मामले पर उठाए सवाल

रतलाम: कांग्रेस नेता ने रतलाम में NEET अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान छात्रों ने बताया कि परीक्षा रद्द होने और उससे जुड़े विवादों के बाद वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण दोबारा तैयारी करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सहित देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्होंने वर्षों की मेहनत और अपने परिवारों की उम्मीदों के साथ परीक्षा की तैयारी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक प्रकरण ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

पोस्ट में उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस लगातार NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार को घेरती रही है। वहीं, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच की गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

छात्रों का कहना है कि वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी मेहनत और करियर प्रभावित न हो।

आसमान में आज फिर नजर आया अद्भुत दृश्य, सूरज के चारों ओर बना इंद्रधनुष

आज आसमान में एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सूरज के चारों ओर रंग-बिरंगा गोलाकार घेरा दिखाई दिया, जिसे देखकर कई लोग हैरान रह गए। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखे दृश्य की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, सूरज के चारों ओर दिखाई देने वाले इस रंगीन घेरे को “सोलर हेलो” या “सन हेलो” कहा जाता है। यह घटना तब होती है जब ऊंचाई पर मौजूद पतले सिरस बादलों में बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टलों से होकर सूर्य का प्रकाश गुजरता है। प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन के कारण सूरज के चारों ओर इंद्रधनुष जैसा घेरा बन जाता है।

हालांकि यह दृश्य देखने में बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन यह कोई अलौकिक या दुर्लभ खगोलीय घटना नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे हेलो अक्सर मौसम में बदलाव का संकेत भी हो सकते हैं, खासकर जब ऊंचाई पर नमी बढ़ रही हो।

आज इस खूबसूरत नजारे ने लोगों को कुछ पल के लिए रुककर आसमान की ओर देखने पर मजबूर कर दिया। कई लोगों ने इसे प्रकृति की अद्भुत कलाकारी बताया।

क्या आपने भी आज सूरज के चारों ओर बना यह रंगीन घेरा देखा? हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

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आम तोड़ने उतरा यात्री, बाग मालिक ने लाठी से किया ‘स्वागत’; वीडियो वायरल

आम तोड़ने गया यात्री, बाग मालिक ने लाठी से कर दी पिटाई, वीडियो वायरल

लखनऊ/मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के लखनऊ-मुरादाबाद रेल मार्ग से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक यात्री को आम के बाग में आम तोड़ना भारी पड़ गया।

जानकारी के मुताबिक, ट्रेन आउटर सिग्नल पर कुछ देर के लिए रुकी हुई थी। इसी दौरान एक यात्री ट्रेन से उतरकर पास स्थित आम के बाग में आम तोड़ने पहुंच गया। बताया जा रहा है कि आम तोड़ते समय बाग मालिक की नजर उस पर पड़ गई।

इसके बाद बाग मालिक ने कथित तौर पर यात्री को पकड़ लिया और लाठी से उसकी जमकर पिटाई कर दी। घटना का वीडियो मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि बाग मालिक यात्री को सबक सिखाने के अंदाज में उसकी पिटाई कर रहा है, जबकि आसपास मौजूद लोग तमाशबीन बने हुए हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही घटना को लेकर किसी आधिकारिक बयान की जानकारी सामने आई है।

फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस घटना पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे चोरी की सजा बता रहे हैं, तो कुछ कानून अपने हाथ में लेने को गलत ठहरा रहे हैं।

यूपी के लखनऊ-मुरादाबाद रेल मार्ग पर ट्रेन रुकने के दौरान आम तोड़ने उतरे यात्री की बाग मालिक ने कथित तौर पर लाठी से पिटाई कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

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