भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया पौधारोपण

भोपाल के स्मार्ट सिटी पार्क में केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत बरगद का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश देते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की।

पौधारोपण कार्यक्रम में कृषि मंत्री Aidal Singh Kansana भी शामिल हुए। दोनों नेताओं ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने भी भागीदारी की। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से लोगों को अपनी मां के सम्मान में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर नमो वन में हुआ पौधारोपण

भोपाल, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत भदभदा रोड स्थित नमो वन में “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के तहत पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी ने क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों एवं भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ पौधे लगाए।

गौरतलब है कि नमो वन में पिछले वर्ष भी विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया गया था। इस वर्ष भी अभियान के तहत वृहद स्तर पर वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया गया है, जिसकी शुरुआत विश्व पर्यावरण दिवस पर की गई।

इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी ने शहरवासियों से वर्षा ऋतु में अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील करते हुए कहा कि पौधारोपण केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल कर उन्हें सुरक्षित एवं विकसित करना भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष हेमंत बढ़िया, पंकज त्रिपाठी, आशुतोष तिवारी, राजेंद्र राठौड़, मुन्ना पुरी, अर्जुन यादव, सुधा सिंह, सुषमा मिश्रा, प्रदीप त्रिवेदी, हरि मालवीय, आशीष सिगोर सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

विश्व पर्यावरण दिवस पर “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के तहत पौधारोपण

भोपाल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत मंदोरी स्थित बुल मदर स्टेट डेयरी फार्म परिसर में “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से भाजपा कार्यकर्ताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, हरित भविष्य और सतत विकास के संकल्प के साथ पौधारोपण किया तथा समाज को अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान मातृत्व सम्मान और प्रकृति संरक्षण का सशक्त जन-अभियान बन चुका है।

कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने सभी से अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का समापन “हरित भारत – स्वच्छ भारत” के संकल्प के साथ हुआ।यह संस्करण वेबसाइट, न्यूज़ पोर्टल और विभागीय वेबसाइट प्रकाशन के लिए उपयुक्त है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित, “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण

 

भोपाल, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रकोष्ठ के अंतर्गत उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण, जिला स्तरीय स्लोगन एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता तथा पर्यावरण जागरूकता विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भरत व्यास (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, कार्यालय माननीय उच्च शिक्षा मंत्री, वरिष्ठ शिक्षाविद्, विचारक एवं चिंतक) रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में राज्य एनएसएस समन्वयक श्री मनोज अग्निहोत्री, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनंत कुमार सक्सेना तथा कार्यक्रम अधिकारी एवं ईटीआई प्रशिक्षक श्री राहुल सिंह परिहार उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार से सम्मानित आयुषी सिन्हा की विशेष उपस्थिति भी कार्यक्रम का आकर्षण रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण से हुआ। इस दौरान मुनगा (सहजन), नीम एवं पीपल के पौधे लगाए गए। इसके पश्चात मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।

आयुषी सिन्हा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयामों से अवगत कराया। उन्होंने RRR (Reduce, Reuse, Recycle), सीड बॉल निर्माण, मिट्टी के खिलौनों के उपयोग तथा वर्षा जल संचयन जैसे नवाचारों को अपनाने का संदेश देते हुए इन्हें दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि डॉ. भरत व्यास ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से करनी होगी। उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, बिजली की अनावश्यक खपत रोकने, भोजन की बर्बादी से बचने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े सामाजिक और पर्यावरणीय परिवर्तन का आधार बनते हैं। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई।

कार्यक्रम के दौरान श्री राहुल सिंह परिहार ने विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों को अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से अपने घर, मोहल्ले और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने तथा जनजागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा प्रकृति संरक्षण के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम का सफल आयोजन उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. इंदिरा बर्मन के नेतृत्व में संपन्न हुआ। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवाओं को प्रेरित करने और समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

विश्व पर्यावरण दिवस पर सांसद आलोक शर्मा ने किया पौधारोपण, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का किया आह्वान

भोपाल, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने गुरुवार को राजा भोज एयरपोर्ट परिसर स्थित पार्क में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने नागरिकों से प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की अमूल्य धरोहर भी है। पर्यावरण संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान देशभर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण का प्रभावी माध्यम बना है। इस अभियान से प्रेरणा लेते हुए प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उसके संरक्षण और संवर्धन का संकल्प भी लेना चाहिए।

सांसद शर्मा ने कहा कि पौधारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

कार्यक्रम में भाजपा जिला उपाध्यक्ष अभय पंडित, जिला मीडिया प्रभारी राजेंद्र गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष गुंजन चौकसे, जिला मंत्री राकेश कुकरेजा, योगेश वासवानी सहित एयरपोर्ट के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

सांसद आलोक शर्मा के प्रयास रंग लाए, सीहोर में फिर रुकेगी ओवरनाइट एक्सप्रेस

सीहोर | सीहोर जिले के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इंदौर से जबलपुर के बीच चलने वाली ओवरनाइट एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 22191 और 22192 का सीहोर रेलवे स्टेशन पर ठहराव एक बार फिर शुरू किया जाएगा। कोरोना काल के दौरान इस ट्रेन का स्टॉपेज बंद कर दिया गया था, जिससे स्थानीय यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

सीहोरवासियों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भोपाल सांसद आलोक शर्मा से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। जनता की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सांसद ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर ओवरनाइट एक्सप्रेस का सीहोर में पुनः ठहराव शुरू करने की मांग की थी।

अपने पत्र में सांसद आलोक शर्मा ने उल्लेख किया था कि सीहोर जिले के बड़ी संख्या में यात्री इस ट्रेन का नियमित उपयोग करते हैं। स्टॉपेज बंद होने के कारण यात्रियों को अन्य स्टेशनों तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी, जिससे समय और धन दोनों की हानि हो रही थी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद की मांग को स्वीकार करते हुए ओवरनाइट एक्सप्रेस के सीहोर स्टेशन पर ठहराव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से सीहोर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा तथा उनकी यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।

इस अवसर पर सांसद आलोक शर्मा ने रेल मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे क्षेत्र की जनता की सुविधाओं और आवश्यकताओं को लेकर लगातार प्रयासरत हैं। वहीं, सीहोरवासियों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की और सांसद के प्रयासों की सराहना की।

 

— रिपोर्ट, सीहोर

मॉनसून ने दी दस्तक: 16 राज्यों में बारिश का अलर्ट, यूपी से बंगाल तक झमाझम बरसेंगे बादल

तिरुवनन्तपुरम

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल में दस्तक देते ही उत्तर भारत का मौसम भी करवट लेने लगा है। मौसम विभाग ने 5 जून को यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं मॉनसून केरल के बाद अब कर्नाटक, तमिलनाडु के इलाकों की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून का असर उत्तर और पश्चिमी भारत में दिखाई देगा। अगले 24 घंटे में कम से कम 16 राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसकेसाथ ही 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

केरल और कर्नाटक में भारी बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान केरल और कर्नाटक के बड़े इलाके में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु के भी बड़े क्षेत्र में बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि कम से कम 9 जून तक वे बंगाल की खाड़ी में ना उतरें।

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौम विभाग ने कहा है कि 5 जून को दक्षिण में केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, और सिक्किम में बारिश का अनुमान है। उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कम से कम 16 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है।

दिल्ली का मौसम
राजधानी दिल्ली में 4 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 जून को भी ादल छाए रहेंगे। हवा की गति 40 से 60 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इसके अलावा 5 जून को दोपहर में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश और हवा की वजह से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी।

यूपी का मौसम
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 ओर 6 जून को आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी कया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ,वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया, जौनपुर और गाजीपुर में 5 जून को बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, आगरा और मथुरा में भी मध्यम बारिश का अनुमान है। हवाओं की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रह सकती है। पूर्वी यूपी में 7 से 10 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार का मौसम
बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में आंधी के साथ बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बड़े इलाके में आंधी के साथ बारिश की संभावना है।

पहाड़ी इलाकों का मौसम
हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, कांगड़ा. चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है। इसके अलावा हवाओँ की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटे की रहने की संभावना है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग, चोमील, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, पिथौरागढ़. उत्तर काशी और टिहरी जिलों में मध्यम बारिश की संभावा है। 5 जून को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

एनएमडीसी ने मनाया पर्यावरण दिवस 2026

हैदराबाद

 भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक और एक जिम्मेदार खनन कंपनी एनएमडीसी ने हैदराबाद में अपने मुख्यालय और देश भर में स्थित अपनी परियोजनाओं में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया,  जो सतत खनन और पर्यावरण प्रबंधन के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है ।

कंपनी ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जो पर्यावरण सुस्थिरता की दिशा में सामूहिक कार्रवाई के महत्व को उजागर करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस की थीम  “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” पर केंद्रित रहा । समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जो हरित भविष्य के निर्माण के लिए एक साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है । श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन), श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), श्री अनुराग कपिल, निदेशक (वित्त), और श्री सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने पर्यावरण की शपथ दिलवाते हुए कर्मचारियों को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सुस्थिर प्रथाओं को बढ़ावा देने में योगदान करने के लिए प्रेरित किया । 

कार्यक्रम के भाग के रूप में, पर्यावरण के प्रति जागरूकता संबंधी अनेक वीडियो दिखाए गए और एनएमडीसी की पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और सुस्थिर खनन प्रथाओं के लिए चल रही पहलों को प्रदर्शित करने वाला एक वृत्तचित्र दिखाया गया ।
अपनी सभी परियोजनाओं में, एनएमडीसी ने वृक्षारोपण अभियान चलाए और कर्मचारियों तथा छात्रों के लिए पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने और सुस्थिरता पर अभिनव सोच को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। कंपनी ने सुस्थिर विकल्पों को बढ़ावा देने और रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का वितरण भी किया ।

अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पृथ्वी अपने अस्तित्व के अधिकांश समय तक मनुष्यों के बिना जीवित रही है और अस्तित्व उल्लेखनीय रहा है । मुझे यकीन है कि अगर भविष्य में मनुष्य का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, तो भी पृथ्वी का अस्थित्व आराम से बना रहेगा । इसलिए, यह हमारे ही हित में है कि हम भूमंडल की देखभाल करें और यह सुनिश्चित करें कि यह यह हमारे रहने योग्य बना रहे। यह पृथ्वी के लिए नहीं बल्कि मानवता की उत्तरजीविता की रणनीति है । व्यावसायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार से हम जो भी कदम उठाते हैं, उसे उठाने से पहले हम उनपर जिम्मेवारीपूर्वक विचार अवश्य करें ।“ 

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार संगठन के रूप में, एनएमडीसी जिम्मेदार खनन में विश्वास रखता है और उसका पालन करता है । आज हम जो करते हैं वह हमें गर्व महसूस कराता है, न केवल इसलिए कि हम व्यवसाय में निरंतर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि हम पर्यावरण और समुदायों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं ।“ 

इस अवसर पर वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर एनएमडीसी की आंतरिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने रचनात्मकता और भागीदारी के माध्यम से पर्यावरणीय चेतना को बढावा देने का प्रयास किया । 

आज जब देश एक सुस्थिर भविष्य की ओर बढ़ रहा है, एनएमडीसी यह प्रदर्शित करता है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण प्रबंधन साथ-साथ चल सकते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि पृथ्वी की सतह से नीचे जो पोषित होता है वह उसके ऊपर मौजूद जीवन में भी सार्थक योगदान देता है ।

बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी पर बढ़ा तनाव, BGB के इनकार से बॉर्डर पर टकराव जैसे हालात

कलकत्ता

भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती के बाद सीमा पर टकराव की नौबत है. बांग्लादेश गार्ड बॉर्डर (BGB) अपने ही नागरिकों को अपने देश में एंट्री नहीं दे रहा है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से सैकड़ों बांग्लादेशी घर वापसी के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन BGB इन्हें बांग्लादेशी मानती ही नहीं है। 

BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स पर अपने 33 लोगों को बांग्लादेश में घुसने नहीं दिया. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बार्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को अंदर भेजने की बीएसएफ की कोशिश को सफल नहीं होने दिया। 

अखबार ने लिखा है, “BGB अधिकारियों के अनुसार आज सुबह-सुबह भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की, जिसे बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने रोक दिया. BGB-16 और 61 बटालियन के अधिकारियों ने बताया कि ये घटनाएं सुबह करीब 5:00 बजे बॉर्डर पर अलग-अलग जगहों पर हुईं। 

BGB-15 लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहदी इमाम ने दावा किया कि सभी लोगों को ज़ीरो लाइन पर रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और BGB हाई अलर्ट पर है; साथ ही इस घटना को लेकर BSF के साथ बातचीत भी चल रही है। 

BGB मीडिया सेल ने दावा किया कि सबसे पहले BGB-61 तीस्ता बटालियन के तहत बाराखाटा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) इलाके से 11 लोगों को बांग्लादेश की तरफ पुश-इन करते हुए देखा गया. आगे BGB ने दावा किया कि फिर उसी समय पैशात्तीबारी BOP इलाके से भी 10 और लोगों को अंदर धकेला जा रहा था। 

जानकारी मिलने के बाद BGB की पेट्रोलिंग टीमें तुरंत दोनों जगहों पर पहुंचीं और स्थिति को काबू में किया. BGB ने उन लोगों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और वे भारतीय सीमा में ही रहे। 

पश्चिम बंगाल में अवैध रुप से घुसे बांग्लादेशियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया जा रहा है. इसके बाद देश में अवैध रूप से घुसे कई बांग्लादेशी स्वेच्छा से वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार और सेना इन लोगों को अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर रही है। 

अखबार के अनुसार दुर्गापुर और दिघलतारी BOP की BGB KR पेट्रोलिंग टीमों ने भारतीय सीमा की तरफ से बॉर्डर पिलर 925 और 927 के पास 12 लोगों बांग्लादेश में घुसने से रोक दिया। 

बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने बंगाबाडी बॉर्डर इलाके में 28 लोगों बांग्लादेश घुसने रोक दिया। 

इस मामले को लेकर गुरुवार दोपहर BGB और BSF के बीच एक फ्लैग मीटिंग हुई. बंगाबाड़ी बॉर्डर पर हुई इस मीटिंग में BSF ने BGB को बताया कि वे इस मुद्दे पर अपने सीनियर अधिकारियों से बात करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे। 

भारत में इस समय सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस/प्रशासनिक अभियान चलाये जा रहे हैं. ये अभियान अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित हैं। 

भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई दमदार रफ्तार: FY26 में 7.7% GDP ग्रोथ, अगले साल भी मजबूत रहने के संकेत

नई दिल्‍ली
 भारत की वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रोथ बढ़कर 7.7% हुई। मार्च तिमाही के आंकड़े पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहे। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आर्थिक विकास दर 2025-26 में बढ़कर 7.7% हो गई, जो एक साल पहले 7.1% थी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के कारण इस रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में यह 8% थी। भारत अब नई जीडीपी (GDP) सीरीज के तहत आंकड़े जारी कर रहा है। इसमें महंगाई मापने वाले बास्केट में हालिया बदलाव, 2022-23 को नया आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाना और अपडेटेड बैक-सीरीज डेटा शामिल है। यह सब महामारी के बाद खपत के बदलते पैटर्न और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेज़ी से विस्तार को बेहतर ढंग से समझने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही. हालांकि, यह इससे पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के 8% के मुकाबले थोड़ी कम है. इसका मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार में आई कमी रही. मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जो तीसरी तिमाही में 12.8% पर थी, वह आखिरी तिमाही में गिरकर 7.3% पर आ गई। 

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.9% रही GVA ग्रोथ
ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) की बात करें तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसकी ग्रोथ रेट 7.9% दर्ज की गई. चौथी तिमाही में भी जीवीए ग्रोथ 7.9% रही, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देती है. बता दें कि जीवीए से पता चलता है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे खेती, उद्योग) में कुल कितनी असली कमाई या वैल्यू जुड़ी। 

पूरे साल की यह ग्रोथ सरकार के फरवरी के दूसरे अनुमान 7.6% से भी ज्यादा है। वहीं पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2024-25 में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.1% रही थी।

नॉमिनल जीडीपी में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि
मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी (वर्तमान कीमतों पर) के मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार कायम रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी के 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 318.07 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया था। यह स्पष्ट रूप से 8.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर को रेखांकित करता है। जीडीपी के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। 7.8 प्रतिशत की मजबूत तिमाही वृद्धि और 7.7 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर न सिर्फ भारतीय बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह देश के लगातार बढ़ते आर्थिक परिदृश्य को भी मजबूती प्रदान करता है। 

मैन्युफैक्चरिंग में दिखी सुस्ती
    वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही। यह तीसरी तिमाही की 8% की ग्रोथ के मुकाबले थोड़ी कम है।

    तिमाही-दर-तिमाही आधार पर विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दर्ज की गई सुस्ती है।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ जहां तीसरी तिमाही में 12.8% के उच्च स्तर पर थी, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गई है।

GVA ग्रोथ 7.9% रही, नॉमिनल जीडीपी की रफ्तार भी धीमी

    आर्थिक विकास को करीब से दर्शाने वाली ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.9% दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में भी GVA की विकास दर ठीक इतनी ही यानी 7.9% रही।

    दूसरी ओर, अगर मौजूदा बाजार भाव पर आधारित नॉमिनल जीडीपी की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें 8.9% की बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले वित्त वर्ष-25 के 9.7% की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से कम है।

भविष्य का अनुमान: वित्त वर्ष-27 में 6.6% रह सकती है ग्रो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जारी अनुमानों के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले साल देश की ग्रोथ रेट 110 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.10% घटकर 6.6% पर आ सकती है।

RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की जीडीपी दर में कमी का अनुमान जताया है. आरबीआई के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है. पहले आरबीआई ने रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी का अनुमान जारी किया था। 

नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी हुआ डेटा
सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे साल के जीडीपी आंकड़ों को एक नए बदलाव के साथ पेश किया है। इस बार पूरे साल के डेटा को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट करके जारी किया गया है।

नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया
GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है।

आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर
समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई।

1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे
सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत ‘बैक-सीरीज’ डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है।

नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए
आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें थीं ही नहीं। इसीलिए ये जरूरी था। 2022-23 को ही आधार वर्ष क्यों चुना गया? यह साल ‘सामान्य’ था। कोरोना खत्म हो चुका था। अर्थव्यवस्था स्थिर थी। डिजिटल इंडिया स्थापित हो चुका था। आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुनते हैं जब न बहुत उछाल हो, न गिरावट।

इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? जेब पर सीधा असर नहीं, लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बनाएगी। सही जगह पैसा लगेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। आंकड़े बदले या कुछ छुपाया तो नहीं गया? नहीं। नए पैमाने से नापने पर माप बदलती है, यह स्वाभाविक है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सब यही करते हैं। आंकड़े बदलना सटीकता की निशानी है।

​कितने अंतराल पर इसे बदलना चाहिए? अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 वर्ष में बदलना चाहिए। देश में 5 साल तय, पर 2017-18 में नोटबंदी व जीएसटी के कारण देरी हो गई। इसके बाद कोविड आ गया, इसलिए अब किया।

नॉलेज पार्ट: क्या होता है बेस ईयर
बेस ईयर वह साल है जिसकी कीमतों को ‘फिक्स’ मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की ‘असली’ ग्रोथ दिखाने में मदद करता है।

उदाहरण: अगर 2011 में एक पेन 5 रुपए का था और आज 10 रुपए का है। अगर हम आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से जीडीपी 500 रुपए दिखेगी।

वहीं ये आज के हिसाब से 1000 रुपए होगी। बेस ईयर हमें यह समझने में मदद करता है कि हम पेन ज्यादा बना रहे हैं या सिर्फ पेन महंगा हो गया है।

बेस ईयर क्यों बदला जाता है?
समय के साथ बाजार में आ रहे बदलावों, नई तकनीकों और उपभोग के नए तरीकों को जीडीपी की गणना में शामिल करने के लिए आधार वर्ष (Base Year) को बदला जाता है, ताकि आर्थिक विकास के सटीक और सही आंकड़े मिल सकें।

GVA क्या होता है?
ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था के प्रमुख सेक्टर्स (जैसे खेती, इंडस्ट्री और सर्विस) में कुल कितना प्रोडक्शन और वैल्यू एडिशन हुआ है। यह जीडीपी में से टैक्स और सब्सिडी के तालमेल को हटाकर देखा जाने वाला शुद्ध पैमाना है।

इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP
GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है।

दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल
रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं।

नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी।

कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती?

जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है:

$GDP = C + G + I + NX$

C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं।

G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च।

I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश।

NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।

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