नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों ने प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल से की सौजन्य भेंट

नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों ने प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल से की सौजन्य भेंट

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद श्री तरुण चुघ, श्री रजनीश अग्रवाल तथा श्री महेश केवट ने गुरुवार को राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के पश्चात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल से सौजन्य भेंट की।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों का मुंह मीठा कराकर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

भेंट के दौरान प्रदेश शासन के मंत्री श्री राकेश शुक्ला, तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री विनोद गोटिया, वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय नगायच, भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री राहुल कोठारी, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष उषा अग्रवाल तथा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री जयपाल सिंह चावड़ा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। :::

बीजेपी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, प्रमाण पत्र सौंपे गए; कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदें अब कोर्ट पर

बीजेपी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, प्रमाण पत्र सौंपे गए; कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदें अब कोर्ट पर

मध्यप्रदेश की राजनीति में बीजेपी को बड़ी सफलता मिली है। पार्टी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने सभी विजयी उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र भी सौंप दिए।

बताया जा रहा है कि नामांकन और जांच प्रक्रिया के बाद किसी अन्य प्रत्याशी के मैदान में नहीं रहने से बीजेपी उम्मीदवारों की जीत निर्विरोध तय हो गई। इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों ने औपचारिक घोषणा करते हुए उन्हें निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया।

वहीं कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन इस पूरी प्रक्रिया से बाहर हो गई हैं। पार्टी की ओर से उठाए गए कानूनी और प्रक्रियागत मुद्दों के बावजूद फिलहाल स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

अब कांग्रेस की नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं। पार्टी को उम्मीद है कि कोर्ट में चल रही प्रक्रिया से उसे राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत पर मुहर लग चुकी है और उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र भी मिल चुका है।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को बीजेपी की बड़ी रणनीतिक और संगठनात्मक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कांग्रेस के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है। अब आगे की दिशा काफी हद तक अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।

8th Pay Commission से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को खुशखबरी! DA में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी

  नई दिल्ली

केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके तहत कितनी सैलरी बढ़ेगी और कब तक खातों में आएगी, इसे लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. इस बीच महंगाई के आंकड़ों से ऐसी संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं, 8th Pay से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी (DA Hike) का तोहफा मिल सकता है। 

इंतजार के बीच मिलेगी राहत!
एक ओर जहां लाखों केंद्रीय कर्मचारी 8th Pay Commission के तहत वेतन में बड़े संशोधन की सिफारिशें लागू होने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं इस इंतजार के बीच उन्हें महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के रूप में एक छोटी, लेकिन तत्काल राहत मिल सकती है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रम ब्यूरो द्वारा जारी नए महंगाई के आंकड़ों ने इस उम्मीद को और मजबूत किया है। 

आठवें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संघ यह तर्क मजबूती के साथ रख रहे हैं कि महंगाई के चलते बढ़ती कीमतों ने जीवन यापन की लागत को लगातार बढ़ाने का काम किया है और खर्च करने की शक्ति कमजोर हुई है। 

महंगाई के आंकड़ों से क्या संकेत? 
औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW), जो महंगाई भत्ता (DA) तय करने में अहम रोल निभाता है, वो मार्च 2026 में 149.1 से बढ़कर अप्रैल 2026 में 149.9 हो गया है. इस दौरान औद्योगिक श्रमिकों के लिए रिटेल महंगाई दर भी 4.27% से बढ़कर 4.46% हो गई है। 

इस आधार पर डीए में बढ़ोतरी का गणित समझें, तो अप्रैल 2026 तक AICPI-IW आंकड़ों के आधार पर, 12 महीने का औसत 147.51 है. 2016 की आधार सीरीज  को 2001 की आधार सीरीज में कन्वर्ट करने के लिए 2.88 के लिंकिंग फैक्टर को लागू करें, तो DA की कैलकुलेशन करीब 62.51% आती है, जिसे संभवतः 63% माना जा सकता है। 

3% मिल सकता है DA Hike
केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 60% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है और ताजा कैलकुलेशन के आधार पर देखें, तो ये 63% हो सकता है यानी 3% DA Hike की उम्मीद है. हालंकि, अंतिम दर मई-जून 2026 के लिए AICPI-IW के आंकड़ों और उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी पर निर्भर करेगी। 

कर्मचारियों की 8वें वेतन आयोग से ये डिमांड 
कई कर्मचारी संगठनों ने तर्क दिया है कि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के बढ़ते खर्चों के लिए वेतन में महत्वपूर्ण संशोधन की आवश्यकता है. 8th Pay Commission के सामने रखी गईं प्रमुख मांगों में हाई फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन में संशोधन, महंगाई भत्ता (डीए) का मूल वेतन में विलय और मजबूत पेंशन सुरक्षा शामिल हैं. कुछ कर्मचारी यूनियनों ने 3.83 Fitment Factor का प्रस्ताव दिया है। 

गौरतलब है कि वेतन और पेंशन को लेकर चर्चा जारी रहने के बीच, 8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन प्रस्तुत करने की अंतिम समय सीमा को बढ़ाकर 15 जून, 2026 कर दिया है. आयोग ने यह भी कहा है कि ज्ञापन सिर्फ उसकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा किए जाने चाहिए और हार्ड कॉपी, भौतिक दस्तावेज, ईमेल या पीडीएफ पर विचार नहीं किया जाएगा। 

ओमान के पास भारतीय जहाज ‘जलवीर’ पर हमला, तीन दिन में तीसरे शिप को बनाया गया निशाना

 नई दिल्ली

ओमान तट के पास बुधवार को हुए हमले के 24 घंटे बीतने तक एक और हमला रिपोर्ट किया गया है. ये हमला ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज पर हुआ है. इस शिप का नाम MT जलवीर है और सामने आई तस्वीरों में समुद्र के बीच इस शिप को जलते हुए देखा जा सकता है. इस घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। 

अधिकारियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्हें आज (गुरुवार को) शिनास बंदरगाह के पास एक पोत (वेसल) से संबंधित घटना की सूचना मिली है. मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है. बयान के अनुसार, घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है. फिलहाल घटना के कारणों और संभावित प्रभावों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। 

इस हमले की जानकारी ओमान में भारतीय एंबेसी की ओर से दी गई है. मामले में और जानकारी जुटाई जा रही है।  

बुधवार को भी हुआ था हमला
बता दें कि ओमान तट के पास बीते बुधवार को भी एक कमर्शियल जहाज पर हमला होने की बात सामने आई थी. इस जहाज पर कुल 28 लोग सवार थे. इनमें से 24 भारतीय थे. दुखद बात यह है कि इस हमले के बाद 3 भारतीय लापता बताए जा रहे हैं. जबकि 21 भारतीय को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है. ये घटना 10 जून की है. भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा की है.  इस हमले में लापता तीन भारतीयों में से 2 के शव मिलने की जानकारी भी सामने आ गई है। 

जिस जहाज पर हमला किया गया था उसका नाम सेटेबेलो था. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जहाज पर मौजूद 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से अब तक 21 भारतीयों को बचा लिया गया. मंत्रालय ने कहा कि ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चल रहे खोज और बचाव अभियान में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है। 

रॉयटर्स ने ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप एम्ब्रे के हवाले से लिखा है कि, “यह शायद ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने के लिए अमेरिकी ऑपरेशन का नतीजा था. पहले भी क्रू को चेतावनी दी गई है कि हमले की स्थिति में वे जहाज के पिछले हिस्से के बजाय अगले हिस्से (बो) पर इकट्ठा हों। 

तीन दिन में तीन शिप पर हमला
सामने आया है कि MT जलवीर पर हुए हमले से पहले ओमान में ही समुद्री तटों पर बीते दो दिनों से हमले हो रहे हैं. यह लगातार तीसरे शिप पर हमला है. दरअसल, बुधवार को भारत ने टैंकर सेटेबेलो पर हुए हमले की कड़ी आलोचना की थी. भारत ने इस मामले में अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय बुलाकर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के US डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को बुलाने के फैसले और दो जहाजों पर हमलों के बारे में एक सवाल के जवाब में, स्टेट डिपार्टमेंट के एक प्रवक्ता ने कहा, “डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट इस मामले में भारत सरकार के सीधे संपर्क में है। 

 

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर बड़ी राहत, सरकार ने एक्साइज ड्यूटी हटाने का किया ऐलान

  नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण सप्लाई लाइन प्रभावित हुई है. पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित होने का असर कीमतों पर नजर भी आ रहा है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इस बीच अब भारत सरकार ने ईंधन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने एथेनॉल के अधिक मिश्रण वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त कर दी है. अब अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। 

भारत सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 22 से 30 फीसदी तक एथेनॉल के मिश्रण वाला पेट्रोल अब एक्साइज ड्यूटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है. यानी अब ई-22, ई-25, ई-27 और ई-30 श्रेणी के पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं देनी होगी। 

सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस फैसले का तेल कंपनियों से लेकर आम किसान और उपभोक्ता तक, सभी को फायदा होगा. सरकार के इस कदम को पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. एथेनॉल के ज्यादा मिश्रण से पेट्रोल की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिल सकेगी। 

एथेनॉल का मिश्रण अधिक होने को किसानों के लिए भी लाभदायक बताया जा रहा है. एथेनॉल का कनेक्शन कृषि क्षेत्र से है. सरकार के इस फैसले का तत्कालिक प्रभाव जो भी रहे, इसके पीछे दीर्घकालिक रणनीति बताई जा रही है. ज्यादा एथेनॉल के मिश्रण वाले पेट्रोल एक्साइज ड्यूटी शून्य हो जाने के बाद ई-20 या प्रीमियम पेट्रोल के मुकाबले कहीं सस्ते होंगे। 

इससे इसकी मांग बढ़ेगी. हालांकि, ये पेट्रोल सभी वाहनों में अभी से ही इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे, लेकिन वाहन बनाने वाली कंपनियां ऐसे इंजन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित होंगी जो ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर चल सकें. बता दें कि हाल ही में ई-85 पेट्रोल भी लॉन्च कर दिया गया था. हालांकि, यह पेट्रोल केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में ही इस्तेमाल हो सकेगा। 

 

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तनाव! घुसपैठियों को खदेड़ते ही BSF-BGB के बीच बढ़ी तनातनी, हुई पत्थरबाजी

कलकत्ता

पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को बवाल हो गया. दरअसल, सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा कथित रूप से एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजने की कार्रवाई के बाद दोनों देशों की सीमा पर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव की घटनाएं सामने आईं. घटना मेघालय के दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के महेंद्रगंज क्षेत्र स्थित नंदिर चार सीमा इलाके की बताई जा रही है। 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में लेने के बाद BSF ने उसे बांग्लादेश की ओर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की. हालांकि मामला उस समय उलझ गया जब बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) और सीमा पार मौजूद स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 

बताया जा रहा है कि BGB के इनकार के बाद वह व्यक्ति दोनों देशों की सीमा के बीच फेंसिंग के पास ही फंस गया. इससे इलाके में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया था, लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश की ओर से उसे अपने कब्जे में लेने से इनकार कर दिया गया. घटना की खबर फैलते ही सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे. देखते ही देखते सैकड़ों लोग सीमा के पास पहुंच गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। 

दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सीमा पर जुटी भीड़ के बीच कहासुनी के बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी बाड़ के आर-पार पत्थर फेंके गए, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई. हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. BSF और BGB दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। 

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल होने लगे हैं. इन वीडियो में सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और तनावपूर्ण माहौल दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। 

हालात पर नजर, बातचीत से समाधान की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, मामले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत बातचीत की संभावना है. BSF और BGB के अधिकारी स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार संपर्क में हैं और स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. फिलहाल नंदिर चार सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और सीमा पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से सहयोगात्मक सीमा प्रबंधन की व्यवस्था रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों की एजेंसियां बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाल लेंगी और सीमा क्षेत्र में शांति बहाल हो जाएगी। 

भारत की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा, 12 परमाणु हथियारों की तैनाती से बदला सुरक्षा समीकरण

बेंगलुरु 

भारत की परमाणु रणनीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने बड़ा दावा किया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ईयरबुक 2026 के मुताबिक भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है. अगर यह आकलन सही साबित होता है तो इसे भारत की परमाणु नीति और सैन्य तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। 

रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब SIPRI ने दुनिया को चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर एक नई परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो चुकी है. भू-राजनीतिक तनाव, सैन्य आधुनिकीकरण और हथियार नियंत्रण समझौतों के कमजोर पड़ने के कारण परमाणु जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। 

भारत ने बदली परमाणु नीति?
SIPRI के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 180 बताई गई थी. रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से करीब 12 परमाणु वारहेड अब ऑपरेशनल फोर्स के साथ तैनात हो सकते हैं. अब तक माना जाता रहा है कि भारत शांति काल में अपने परमाणु हथियार और मिसाइल सिस्टम को अलग-अलग रखता है, ताकि किसी भी परमाणु कार्रवाई पर अंतिम नियंत्रण राजनीतिक नेतृत्व के पास रहे । 

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संख्या में वारहेड की तैनाती भारत की अधिक तेज और प्रभावी प्रतिरोध क्षमता की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है. खासकर तब, जब भारत अपनी समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। 

आक्रमण नहीं, हिफाजत के लिए परमाणु हथियार
भारत की परमाणु नीति लंबे समय से ‘नो फर्स्ट यूज’ और ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ यानी विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता के सिद्धांत पर आधारित रही है. इसका मतलब यह है कि भारत परमाणु हथियारों को आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन को हमले से रोकने के लिए रखता है. SIPRI की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में बदलाव हुआ है, लेकिन यह जरूर संकेत दिया गया है कि रणनीतिक बलों की तैयारियों का स्तर पहले से अधिक मजबूत हुआ है। 

चीन भी तेजी से बढ़ा रहा परमाणु जखीरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की परमाणु आधुनिकीकरण प्रक्रिया पर सबसे बड़ा प्रभाव चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमता का है. SIPRI के मुताबिक चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपना परमाणु जखीरा बढ़ा रहा है. इसी वजह से भारत ने ऐसी नई मिसाइल प्रणालियां विकसित की हैं जो चीन के भीतर दूर तक स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत की रणनीतिक सोच अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही है। 

हालांकि पाकिस्तान भी भारत की सुरक्षा गणनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है. पिछले एक दशक में दोनों देशों ने नई मिसाइल प्रणालियों और परमाणु हथियारों को ले जाने वाले प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. ऐसे में दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भारत की प्राथमिकता बना हुआ है। 

दुनियाभर में कितने परमाणु हथियार?
वैश्विक स्तर पर भी परमाणु हथियारों का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है. SIPRI के अनुसार दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु वारहेड हैं. इनमें से लगभग सभी देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण में जुटे हुए हैं. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सुरक्षा रणनीतियों में परमाणु हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दुनिया धीरे-धीरे एक नए न्यूक्लियर आर्म्स रेस की ओर बढ़ रही है। 

इसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य में भारत की कथित ऑपरेशनल तैनाती को भी देखा जा रहा है. भले ही इसकी संख्या सीमित हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की प्रतिरोध क्षमता को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है. खासकर ऐसे दौर में जब चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। 

सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा! 8वें वेतन आयोग के फॉर्मूले से ₹53 लाख तक एरियर की चर्चा, लखनऊ में अहम बैठक

नई दिल्ली

भारत के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों की आयोग के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। 8वें वेतन आयोग में अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो लेवल-14 के कर्मचारियों का 20 महीने में अनुमानित एरियर करीब 53 लाख के पार पहुंच सकता है। 15 जून 2026 तक आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 22-23 जून को लखनऊ में भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी और उन्हें कितना एरियर (Arrears) मिल सकता है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए दिए गए 18 महीने के समय को देखते हुए इसका क्रियान्वयन 2027 की दूसरी छमाही में हो सकता है। नवंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल तय किया गया था और अगर यह मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपता है, तो उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इस स्थिति में अगस्त या सितंबर 2027 तक नई सैलरी लागू होने की संभावना है। चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है। अगर लागू होने में लगभग 20 से 21 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिल सकती है।

वेतन स्तर (Pay Level) सामान्य प्रारंभिक बेसिक वेतन प्रमुख पद (Common Designations)
लेवल 11 ₹67,700 उप सचिव (Deputy Secretary), ग्रुप-A में पदोन्नत वरिष्ठ सेक्शन अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer), डिप्टी कमांडेंट
लेवल 12 ₹78,800 निदेशक (Director), संयुक्त निदेशक (Joint Director), केंद्रीय संस्थानों में प्रोफेसर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
लेवल 13 ₹1,23,100 कुछ संगठनों में संयुक्त सचिव स्तर के पद, वरिष्ठ निदेशक, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), उच्च ग्रेड के वैज्ञानिक
लेवल 14 ₹1,44,200 वरिष्ठ संयुक्त सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) स्तर के अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बड़े विभागों के प्रमुख

लेवल 11 से 14 के कर्मचारी, जो आमतौर पर ग्रुप-A अधिकारी होते हैं, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा लाभ पाने वालों में शामिल हो सकते हैं। इनमें डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर, प्रोफेसर, चीफ इंजीनियर, वैज्ञानिक, वरिष्ठ संयुक्त सचिव और अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में लेवल 11 का शुरुआती बेसिक वेतन ₹67,700, लेवल 12 का ₹78,800, लेवल 13 का ₹1,23,100 और लेवल 14 का ₹1,44,200 है।

अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से लेकर 2.86 तक का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल 11 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर पर ₹1.35 लाख और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लगभग ₹1.94 लाख तक पहुंच सकती है। इसी तरह लेवल 14 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹4 लाख रुपये के करीब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 20 महीने के एरियर की गणना की जाए तो कई कर्मचारियों को लाखों रुपये का एकमुश्त भुगतान मिल सकता है।

8वें वेतन आयोग (2.0 फिटमेंट फैक्टर) पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,35,400 ₹67,700 ₹13,54,000
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,57,600 ₹78,800 ₹15,76,000
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,46,200 ₹1,23,100 ₹24,62,000
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹2,88,400 ₹1,44,200 ₹28,84,000

8वें वेतन आयोग (2.15 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,45,555 ₹77,855 ₹15,57,100
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,69,420 ₹90,620 ₹18,12,400
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,64,665 ₹1,41,565 ₹28,31,300
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,10,030 ₹1,65,830 ₹33,16,600

8वें वेतन आयोग (2.28 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,54,356 ₹86,656 ₹17,33,120
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,79,664 ₹1,00,864 ₹20,17,280
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,80,668 ₹1,57,568 ₹31,51,360
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,28,776 ₹1,84,576 ₹36,91,520

8वें वेतन आयोग (2.57 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर 20 माह के संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,73,989 ₹1,06,289 ₹21,25,780
लेवल 12 ₹78,800 ₹2,02,516 ₹1,23,716 ₹24,74,320
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,16,367 ₹1,93,267 ₹38,65,340
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,70,594 ₹2,26,394 ₹45,27,880

2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 11-14 के कर्मचारियों को मिलने वाले 20 महीनों के अनुमानित एरियर

लेवल वर्तमान मूल वेतन संशोधित मूल वेतन मूल वेतन में वृद्धि 20 महीनों का एरियर
11 67,700 1,93,622 1,25,922 25,18,440
12 78,800 2,25,368 1,46,568 29,31,360
13 1,23,100 3,52,066 2,28,966 45,79,320
14 1,44,200 4,12,412 2,68,212 53,64,240

 

ध्यान देने वाली बात यह है कि एरियर केवल बढ़ी हुई बेसिक सैलरी पर मिलता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) जैसे अन्य भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता, क्योंकि नए वेतन आयोग में इनकी दरें अलग से संशोधित की जाती हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की रहने वाली है।

8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर रिपोर्ट 2027 में लागू होती है और कर्मचारियों को 20 महीने का एरियर मिलता है, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों के खातों में बड़ी रकम आ सकती है। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा।

रूस ने भारत को दिया सस्ते तेल का बड़ा ऑफर, एक के बाद एक डील से बदले ऊर्जा समीकरण

नई दिल्ली

ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है। 

रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है। 

क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा
सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी। 

चीन ने कर द‍िया था मना
चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं। 

मंत्री विश्वास सारंग के निर्देश पर प्रगति नगर में अवैध अतिक्रमणों पर कार्रवाई

मंत्री विश्वास सारंग के निर्देश पर प्रगति नगर में अवैध अतिक्रमणों पर कार्रवाई”

भोपाल, 9 जून 2026। नरेला विधानसभा क्षेत्र के प्रगति नगर में शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमणों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की गई। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग के निर्देश पर नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर अवैध निर्माणों को हटाया।

प्रगति नगर क्षेत्र में अवैध कब्जों को लेकर स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री श्री सारंग ने पूर्व में क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उन्हीं निर्देशों के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर प्रशासन ने अतिक्रमण विरोधी अभियान संचालित किया।

मंत्री श्री सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र के सुनियोजित विकास, नागरिक सुविधाओं के संरक्षण और शासकीय भूमि की सुरक्षा के लिए अवैध अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर अतिक्रमण की स्थिति पर निगरानी रखने तथा भविष्य में किसी भी नए अवैध कब्जे को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने के निर्देश भी दिए हैं।

मंत्री श्री सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और विकास कार्यों में बाधा बनने वाले कब्जों के विरुद्ध प्रशासन की कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। :::

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