पेरिस में गूंजा भारतीय आयुर्वेद का परचम: योग-पंचकर्म पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उज्जैन के डॉ. चंद्र शर्मा का शोध बना आकर्षण

अमृत काल में योग एवं पंचकर्म की वैश्विक भूमिका पर मंथन, भारत के कई राज्यों के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने रखा वैज्ञानिक दृष्टिकोण

पेरिस में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में योग और पंचकर्म की वैश्विक उपयोगिता पर गहन मंथन हुआ। 23 और 24 जून को वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लेकर आयुर्वेद एवं योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर अपने शोध प्रस्तुत किए।

इस संगोष्ठी में उज्जैन के प्रसिद्ध पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. चंद्र शर्मा ने अस्थिक्षय (ऑस्टियोपोरोसिस) के उपचार प्रबंधन में तिक्तक्षीर बस्ती की प्रभावशीलता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध को विशेषज्ञों ने विशेष रुचि के साथ सुना और इसकी उपयोगिता पर चर्चा की।

आरडी आयुर्वेद कॉलेज, भोपाल के पूर्व प्राचार्य डॉ. मणिंद्र व्यास ने योग के मूल स्वरूप से हटकर उसके विकृत प्रचार-प्रसार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि योग की प्रामाणिकता और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, नई दिल्ली के गुरु डॉ. एस.एन. पांडे ने मूत्र नलिका अवरोध के उपचार में उत्तर बस्ती की प्रभावशीलता पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। वहीं शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, भोपाल की पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी सोनी ने आधुनिक जीवनशैली के कारण युवतियों में बढ़ रहे पीसीओडी के उपचार में पंचकर्म आधारित शोधन चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी में डॉ. आनंद सराफ ने योग और आयुर्वेद के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में गुवाहाटी, मुंबई, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए शोधार्थियों ने भी अपने शोध प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन के मुख्य समन्वयक डॉ. विनोद वैरागी ने की। उन्होंने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर विख्यात पंचकर्म विशेषज्ञ यू.एस. निगम की पुस्तक “क्लीनिकल पंचकर्म एवं अनुभूत चिकित्सा प्रबंधन” के तृतीय संस्करण की जानकारी डॉ. मोहन वर्मा (देवास) ने दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजन विशद (बरेली) ने किया तथा आभार डॉ. प्रणव शर्मा शास्त्री (पीलीभीत) ने व्यक्त किया।

मुख्य बातें

पेरिस में 23-24 जून को वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।

विषय: अमृत काल में योग एवं पंचकर्म की भूमिका।

डॉ. कामिनी सोनी ने पीसीओडी के उपचार में पंचकर्म आधारित शोधन चिकित्सा की अहम भूमिका बताई।

उज्जैन के डॉ. चंद्र शर्मा ने अस्थिक्षय के उपचार में तिक्तक्षीर बस्ती पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।

डॉ. मणिंद्र व्यास ने योग के विकृत स्वरूप के बढ़ते प्रचार पर चिंता जताई।

डॉ. एस.एन. पांडे ने मूत्र नलिका अवरोध में उत्तर बस्ती की उपयोगिता बताई।

देश के कई राज्यों के शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने सम्मेलन में भाग लिया।

प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए और पंचकर्म पर नई पुस्तक के तृतीय संस्करण का परिचय कराया गया।

ट्रंप की ईरान को चेतावनी, हत्या की साजिश पर विनाशकारी जवाब की धमकी

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जारी तनाव एक बेहद खतरनाक और अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को ‘स्टैंडिंग ऑर्डर्स’ दे रखे हैं कि अगर ईरान उनकी हत्या की साजिश को अंजाम देता है, तो तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी पलटवार किया जाए।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान की तरफ से उन्हें “जान से मारने या हत्या के प्रयास” की लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 1,000 मिसाइलें “पूरी तरह से तैयार” हैं और उनका रुख ईरान की तरफ है। अगर ईरान ने कोई भी हिमाकत की, तो हजारों और मिसाइलें पीछे से दाग दी जाएंगी।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और अमेरिकी संविधान के मुताबिक, ट्रंप का यह दावा व्यावहारिक और कानूनी रूप से संभव नहीं है। अमेरिकी कानून में किसी भी ऑटोमेटिक या पहले से अधिकृत “डैड मैन्स स्विच” का कोई प्रावधान नहीं है, जो राष्ट्रपति की मौत होते ही सेना को अपने आप युद्ध शुरू करने का अधिकार दे दे।

राष्ट्रपति की मौत के बाद क्या होता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा प्रणाली में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जहां राष्ट्रपति की गैर-मौजूदगी में कोई कंप्यूटर या पूर्व-लिखित आदेश सीधे परमाणु या मिसाइल हमले शुरू कर दे।

अगर राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या होती है, तो अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और ‘प्रेसिडेंशियल सक्सेशन एक्ट 1947’ के तहत राष्ट्रपति की शक्तियां तत्काल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पास चली जाएंगी।

नए कमांडर-इन-चीफ के रूप में यह पूरी तरह जेडी वेंस पर निर्भर करेगा कि वे ट्रंप के आदेशों को लागू करते हैं, उनमें बदलाव करते हैं या उन्हें पूरी तरह खारिज कर देते हैं।

इतिहासकार और लेखक गैरेट एम. ग्रैफ ने कहा, “अमेरिका ने कई तरह के कारणों से कभी भी तकनीकी ‘डैड मैन्स स्विच’ का उपयोग नहीं किया है।”

ग्रैफ के मुताबिक, अमेरिका के पास आपातकालीन स्थितियों और परमाणु हमलों से निपटने के लिए बेहद विस्तृत ‘कंटिन्यूटी-ऑफ-गवर्नमेंट’ (सरकार चलाने की निरंतरता) की योजनाएं जरूर हैं, लेकिन वे योजनाएं भी राष्ट्रपति की मौत के बाद किसी भी स्वचालित सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं देती हैं।

ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने खाई बदले की कसम
ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराया। बता दें कि अयातुल्ला अली खामेनेई इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए थे, जिसके बाद यह युद्ध शुरू हुआ था।

मोजतबा खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, “हम इस आपराधिक और अपमानजनक हत्यारों से अपने पिता और दोनों युद्धों के सभी शहीदों के पवित्र खून का बदला लेने की कसम खाते हैं। यह बदला हमारे देश की इच्छा है और इसे निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा।”

ईरान में इस हफ्ते हुए अंतिम संस्कार के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत के नारे वाले पोस्टर और बैनर भी देखे गए।

ट्रंप को निशाना बनाने की नई साजिश, सुरक्षा में बदलाव
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों को ट्रंप को निशाना बनाने की ईरान की नई और बेहद गंभीर साजिशों के बारे में अलर्ट किया है। खुद ट्रंप ने तुर्की में हुए नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान इन खतरों का जिक्र करते हुए कहा था, “वे अमेरिकी नेता— यानी मुझे, रास्ते से हटाना चाहते हैं।”

सुरक्षा को लेकर चिंताएं क्यों बढ़ीं?
राष्ट्रपति ट्रंप इस हफ्ते तुर्की से वापस लौटते समय कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए अत्याधुनिक विमान के बजाय एक पुराने ‘एयर फोर्स वन’ (Air Force One) विमान से यात्रा करते दिखे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 400 मिलियन डॉलर के रेनोवेशन के बावजूद नए कतरी विमान में कुछ ऐसे मिसाइल डिटेक्शन और काउंटर-मेजर (मिसाइल रोधी) सिस्टम नहीं थे, जो पुराने विमानों में मौजूद हैं। सुरक्षा कारणों से यह बड़ा समझौता माना जा रहा है।

यह सुरक्षा चिंताएं ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका और ईरान ने एक बार फिर एक-दूसरे पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पिछले महीने हुआ युद्धविराम समझौता पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

सहारा मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनेगा SEBI की चुनौती याचिका

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) के उस फैसले के एक हिस्से को चुनौती दी गई है, जिसमें सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईसीसीएल) के प्रबंधकों और कंपनी सचिव को राहत दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। सेबी की याचिका के अलावा, शीर्ष अदालत ने सहारा समूह से जुड़े सभी लंबित मामलों, जिनमें निवेशकों के धन की वापसी का मामला भी शामिल है, को भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

निदेशकों की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को को इस मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए सहारा समूह के चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया था और इस याचिका को कंपनी से जुड़े लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया था। अदालत ने अधिकारियों को 13 जुलाई तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।
इससे पहले, नौ मार्च को सैट ने एसआईसीसीएल के खिलाफ सेबी की नियामकीय कार्रवाई को बरकरार रखते हुए कंपनी और उसके निदेशकों की अपील खारिज कर दी थी।

क्या है पूरा मामला?
मामला 1998 से 2008 के बीच कथित रूप से वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) के अवैध निर्गम से जुड़ा है। सैट की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि इस अवधि में एसआईसीसीएल द्वारा जारी ओएफसीडी सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक ऑफर) की श्रेणी में आते हैं, इसलिए वे सेबी के नियामकीय अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत हैं।

न्यायाधिकरण के अनुसार, कंपनी ने इन डिबेंचर के माध्यम से लगभग 1.98 करोड़ निवेशकों से करीब 14,106 करोड़ रुपये जुटाए थे। इतने बड़े पैमाने पर इतनी बड़ी संख्या में निवेशकों से धन जुटाने को निजी नियोजन नहीं माना जा सकता, जैसा कि कंपनी का दावा था। हालांकि, सैट ने कंपनी और उसके निदेशकों की अपील खारिज करते हुए चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव की अलग अपील स्वीकार कर ली थी।

सेबी ने सैट को उच्चतम न्यायालय में दी चुनौती
न्यायाधिकरण ने कहा था कि कर्मचारी होने के नाते उन्हें कंपनी के कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। सैट ने यह भी कहा था कि कंपनी सचिव ने निदेशकों द्वारा दी गई ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के आधार पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे और इस कारण अंतिम जिम्मेदारी निदेशकों की ही बनती है।
सेबी ने अब सैट के इसी हिस्से को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। यह मामला सेबी के अक्टूबर, 2018 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एसआईसीसीएल को ओएफसीडी के जरिये जुटाई गई राशि निवेशकों को लौटाने, अपनी परिसंपत्तियों का ब्योरा देने और कुछ अधिकारियों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया था।

 

अमेरिका-ईरान जंग फिर भड़की: 300 ठिकानों पर हमले, होर्मुज बंद होने से दुनिया पर तेल संकट का खतरा

नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव शुरू हो गया है. पिछले तीन दिन में ईरान ने अमेरिका का 6 बेस पर हमला किया तो अमेरिका ने तीन रातों में 300 टारगेट्स को निशाना बनाया. सीजफायर अब खत्म हो चुका है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी है. अमेरिका ने इसके जवाब में ईरान के सैकड़ों ठिकानों पर हमले किए हैं.

इस संघर्ष में दोनों तरफ से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं, जिसमें अमेरिकी बेसेस पर ईरानी मिसाइल हमले और अमेरिकी हमलों में ईरानी तटवर्ती इलाकों में विस्फोट शामिल हैं. इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है. दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं.

फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से कई बार युद्धविराम की कोशिशें हुईं, लेकिन वे टिक नहीं पाईं. हाल ही में एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसमें ईरान को कुछ छूट दी गई थी. लेकिन ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश की.

जब कुछ जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया और निर्धारित रूट से हट गए, तो ईरानी क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने उन पर हमला कर दिया. एक साइप्रस-ध्वज वाले कंटेनर जहाज M/V GFS Galaxy को नुकसान पहुंचा, एक क्रू मेंबर लापता है. जहाज में आग लग गई. ईरान का कहना है कि यह चेतावनी का गोला था, लेकिन अमेरिका इसे साफ हमला मानता है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान पर जवाबी कार्रवाई शुरू की. तीन रातों में 300 से ज्यादा ईरानी ठिकानों – मिसाइल साइट्स, ड्रोन बेस, नौसैनिक सुविधाएं, गोला-बारूद स्टोर और संचार नेटवर्क – को निशाना बनाया गया. ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास, सिरिक, क़ेश्म द्वीप, बुशहर और जास्क जैसे इलाकों में विस्फोटों की खबर दी. इस हमले के बाद ईरान ने जवाब दिया.

ईरान की जवाबी कार्रवाई: क्षेत्रीय बेस पर हमले
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर जवाब दिया. सबसे महत्वपूर्ण हमला जॉर्डन के मुवाफक सल्ती एयर बेस पर हुआ, जहां अमेरिकी F-35 विमान तैनात हैं. यह बेस पूरे युद्ध में ईरानी मिसाइलों से बचता रहा था, लेकिन इस बार सायरन बज गए और कुछ मिसाइलें लक्ष्य के करीब पहुंचीं.

IRGC का दावा है कि उन्होंने प्रिंस हसन एयर बेस पर कमांड सेंटर और MQ-9 रीपर ड्रोन हैंगरों को नष्ट कर दिया. इसके अलावा ईरान ने बहरीन में अमेरिकी 5वीं फ्लीट मुख्यालय, कुवैत, जॉर्डन, कतर, बहरीन, UAE और ओमान में अमेरिकी बेस पर हमले किए. बहरीन में धुआं उठता दिखा, जो ईरानी हमले की पुष्टि करता है.

ओमान में पेंटागन रिफ्यूलिंग स्टेशन पर भी सरप्राइज अटैक की खबर है. ईरान का कहना है कि यह अमेरिका के तीसरे हमले के जवाब में था. ईरानी वायुसेना अब हवा में एक्टिव है. तेहरान के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम चालू हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक अर्थव्यवस्था का गला
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है. ईरान ने इसे बंद कर दिया है. कहा है कि जब तक ‘ईरानी व्यवस्था’ नहीं बनेगी, यह खुला नहीं रहेगा. ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलना चाहता है. दक्षिणी रूट (ओमान के पानी) को अमेरिका बढ़ावा दे रहा है.

इस बंद से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, हालांकि तेल की कीमतें पहले के 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से कुछ कम हुई हैं. ईरान का मानना है कि वह इस युद्ध से क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में उभरा है. अमेरिका और इजराइल के मुख्य लक्ष्य पूरे नहीं हुए, इसलिए तेहरान लंबी खेल खेल रहा है.

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि हॉर्मुज केवल ‘ईरानी व्यवस्था’ के साथ खुलेगा. संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ भी इसी रुख पर हैं.

अमेरिका की रणनीति और ट्रंप प्रशासन
अमेरिका का कहना है कि वह नागरिक जहाजों की आजादी सुनिश्चित करने के लिए ईरान की क्षमता को कमजोर कर रहा है. डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने गलत चुनाव किया, अब उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी. अमेरिका ने ईरानी तेल बिक्री पर छूट वापस ले ली है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर और हमलों की धमकी दी है.

ओमान के साथ ईरान की बैठक हुई थी, जिसमें सुरक्षित जहाज आवागमन पर बातचीत हुई. लेकिन अमेरिका इसे पर्याप्त नहीं मानता. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि केवल आपसी सामंजस्य ही काम कर सकता है.

क्षेत्रीय प्रभाव और चुनौतियां
इस टकराव से खाड़ी के राजशाही देशों पर खतरा मंडरा रहा है. ईरान क्षेत्रीय वर्चस्व चाहता है, जिसे ‘पैक्स इरानिका’ कहा जा रहा है. लेकिन अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है. फिर भी ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की शपथ ली है.

जॉर्डन जैसे देश बीच में फंस गए हैं. जॉर्डन ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है. बहरीन, कुवैत, UAE और कतर में अमेरिकी बेसेस होने से ये देश भी लक्ष्य बन सकते हैं.

वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने से महंगाई बढ़ सकती है. चीन और भारत जैसे आयातक देशों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. अगर यह संघर्ष लंबा चला तो समुद्री व्यापार रुक सकता है. बीमा लागत

लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त जारी, महिलाओं के खातों में पहुंचे 1500 रुपये

भोपाल
मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने 12 जुलाई को भिंड जिले के लहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त जारी (Ladli Behna Yojana 38th Installment) की। इस अवसर पर पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 1,500 रुपये की राशि भेजी गई।मुख्यमंत्री ने मंच से प्रदेश की 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को सिंगल क्लिक से 1835 करोड़ राशि ट्रांसफर की।

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल
मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) का संचालन कर रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के साथ परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका को मजबूत करना है।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
योजना का लाभ 21 से 60 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को दिया जाता है। इसके लिए लाभार्थी के परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। योजना के लिए पात्र महिलाएं ऑनलाइन या ग्राम पंचायत एवं वार्ड कार्यालयों के माध्यम से पंजीकरण करा सकती हैं।

ऐसे चेक करें पेमेंट स्टेटस
यदि लाभार्थी यह जानना चाहती हैं कि किस्त की राशि उनके खाते में पहुंची है या नहीं, तो वे मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर “आवेदन और भुगतान की स्थिति” विकल्प चुनें। इसके बाद आवेदन क्रमांक या समग्र आईडी दर्ज करें, मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी भरकर सबमिट करें। इसके बाद स्क्रीन पर भुगतान की स्थिति दिखाई दे जाएगी।

इन तरीकों से भी कर सकते हैं जांच
लाभार्थी अपने बैंक की पासबुक अपडेट कराकर खाते में राशि की एंट्री देख सकते हैं। बैंक के मिस्ड कॉल नंबर के जरिए भी बैलेंस की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इसके अलावा यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आधार बैंक खाते से लिंक हो और डीबीटी (DBT) सुविधा सक्रिय हो। आवश्यकता पड़ने पर आधार की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से बैंक लिंकिंग स्टेटस भी जांचा जा सकता है।

 

MP परिवहन विभाग में 25 अधिकारियों को पदोन्नति, 2 साल का प्रोबेशन पीरियड रहेगा लागू

भोपाल.

परिवहन विभाग ने राज्य शासन स्तर द्वारा नियुक्त 25 सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को पदोन्नति (MP Promotion) देकर अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी-परिक्षेत्रीय जिला परिवहन अधिकारी के पद पर नियुक्त किया है।

परिवहन आयुक्तालय के आदेश अनुसार यह पदोन्नति मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1961 के तहत दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए होगी।

जितेन्द्र कुमार शर्मा बने सीनियर डीटीओ
साथ ही यह पदोन्नति मध्यप्रदेश लोक सेवा आरक्षण अधिनियम 1994 के प्रावधानों के अनुसार की गई है। पदोन्नत अधिकारियों में भोपाल में सहायक आरटीओ के पद पर पदस्थ जितेन्द्र कुमार शर्मा को अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी-सीनियर डीटीओ बनाया गया है।

किन लोगों को मिला प्रमोशन?
इसके अलावा जिन लोगों को प्रमोशन मिला है, उनमें रमा दुबे, सुनील कुमार शुक्ला, विमलेश कुमार गुप्ता, विक्रम सिंह राठौर, मनोज कुमार तेहनगुरिया, राजेश गुप्ता, रंजना कुशवाह, जगदीश बिल्लोरे, ज्ञानेंद्र वैश्य, सुरेंद्र सिंह गौतम, देवेश बाथम, अनुराग शुक्ला, रीतेश तिवारी, रितु अग्रवाल, दीपक मांझी, हृदेश यादव, जया बसावा, बरखा गौड़, रिंकू शर्मा, मनीष कुमार त्रिपाठी, स्वाति पाठक, आशुतोष सिंह भदौरिया, अनिमेष गढपाल और कृतिका मोहटा का नाम शामिल हैं।

ट्विषा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, दिल्ली AIIMS की पोस्टमार्टम रिपोर्ट CBI को सीलबंद लिफाफे में सौंपी

भोपाल.

पूर्व मॉडल व अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले की जांच में अहम प्रगति हुई है। एम्स, नई दिल्ली ने दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जांच एजेंसी को दी गई है, जिसकी जानकारी फिलहाल केवल सीबीआई के पास है।

मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी और इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत में आगे की कार्रवाई होगी।

सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अंकुर पांडेय ने बताया कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष हैं, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई इसी रिपोर्ट के आधार पर होगी।

12 मई को त्विषा की हो गई थी मौत
गौरतलब है कि 12 मई को कटारा हिल्स भोपाल स्थित ससुराल में त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच पर सवाल उठने के बाद मामला सीबीआई को सौंपा। जांच के दौरान सीबीआई ने पति समर्थ सिंह और उनकी मां, पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया था। दोनों वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। अब 14 जुलाई की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

सूरजपुर के पर्यटन स्थल पर कार से खतरनाक स्टंट, युवकों का वीडियो चर्चा में

सूरजपुर.

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद खतरनाक मामला सामने आया है, जहां के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल अजबनगर के मोरभंज में कुछ युवकों द्वारा कार से जानलेवा स्टंट किया जा रहा है, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवक चलती कार से खतरनाक करतब दिखा रहे हैं। कोई ड्रिफ्टिंग तो कोई डोनट्स कर रहा है। इस दौरान ना सिर्फ नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई बल्कि अपनी और दूसरों की जान भी जोखिम में डाली गई। जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो सूरजपुर जिले के अजबनगर स्थित मोरभंज पर्यटन स्थल का बताया जा रहा है। वीडियो में कुछ युवक चलती कार की खिड़कियों और दरवाजों से बाहर निकलकर स्टंट करते दिखाई दे रहे हैं। उनकी यह हरकत न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकती थी।

वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस तरह की लापरवाही पर चिंता जताई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि ये वीडियो कब की है, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और न ही प्रशासन या पुलिस की ओर से इस मामले में कोई बयान जारी किया गया है।

अमेरिका-ईरान युद्ध फिर तेज, होर्मुज बंद होने से बढ़ा वैश्विक संकट

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध तेज हो गया है. जून में हुए युद्धविराम और समझौते के बाद बनी शांति अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है. अमेरिका ने लगातार तीन रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जबकि जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही खाड़ी के कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 11 जुलाई को ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, नौसैनिक ठिकाने, हथियार भंडार, संचार नेटवर्क और तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया.

CENTCOM का दावा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर पिछले तीन दिनों में कुल 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को तबाह किया गया है. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Galaxy पर हुए ईरानी हमले के जवाब में की गई.

IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को किया बंद
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट को “अगले आदेश तक” बंद करने का ऐलान कर दिया. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में दखल देना बंद नहीं करता, तब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर उसकी शर्तें लागू रहेंगी. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट केवल “ईरान की व्यवस्था” के तहत ही खुलेगा, किसी अमेरिकी दबाव में नहीं.

इस बीच संघर्ष खाड़ी के दूसरे देशों तक भी फैल गया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया. बहरीन में दूसरी बार पूरे देश में सायरन बजाए गए. कुवैत ने भी रॉकेट और ड्रोन हमलों को रोकने की पुष्टि की, जबकि कतर ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी करने के बाद खतरा टलने की जानकारी दी.

ब्रेंट क्रूड की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंची
इस पूरी घटना का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होती है. संघर्ष बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो तेल और गैस की कीमतों में बड़ी तेजी आ सकती है.

भारत के लिए भी यह संकट चिंता का विषय है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है. हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में होर्मुज पर निर्भरता कम की है, लेकिन रसोई गैस (LPG) के मामले में स्थिति अलग है. भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और उसमें से करीब 90 प्रतिशत सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है. ऐसे में यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों पर असर पड़ सकता है.

अरब मुल्कों में ईरान के हमले
इसके अलावा खाड़ी के छह देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. इनमें बड़ी संख्या कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत में है, जहां हाल के दिनों में मिसाइल हमलों और एयर डिफेंस अलर्ट की घटनाएं सामने आई हैं. संघर्ष के दौरान अब तक कई भारतीयों की मौत की खबरें भी आई हैं. भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाजों तथा नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है.

कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो दुनिया को तेल संकट, महंगाई और क्षेत्रीय अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है.

डी-मार्ट का शानदार प्रदर्शन, पहली तिमाही में मुनाफा बढ़कर 860 करोड़ रुपये पहुंचा

 नई दिल्ली
रिटेल आउटलेट्स डी-मार्ट का संचालन करने वाली कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 11.33 प्रतिशत बढ़कर 860.44 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में 772.81 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। एवेन्यू सुपरमार्ट्स ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसकी ऑपरेटिंग रेवन्यू अप्रैल-जून तिमाही में 14.9 प्रतिशत बढ़कर 18,794.53 करोड़ रुपये हो गई, जो 2025-26 की समान तिमाही में 16,359.70 करोड़ रुपये थी। बता दें, इस कंपनी के प्रमोटर्स राधाकिशन दमानी है। Trendlyne के डाटा के अनुसार उनके पास 23 प्रतिशत हिस्सा है।

कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 74.50 प्रतिशत है। पब्लिक के पास 7.6 प्रतिशत हिस्सा है। एफआईआई के पास 9 प्रतिशत हिस्सा है। म्यूचुअल फंड्स के पास 6.8 प्रतिशत हिस्सा है। बता दें, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फंड और एसबीआई म्यूचुअल फंड की कंपनी में हिस्सेदारी है।

सोमवार को फोकस में रहेंगे शेयर
तिमाही नतीजे के सामने आने के बाद अब सोमवार को कंपनी के शेयरों फोकस में रहेंगे। शुक्रवार को बाजार के बंद होने के समय स्टॉक 0.09 प्रतिशत की तेजी के साथ 4083.05 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। बीते 6 महीने के दौरान कंपनी के शेयरों की कीमतों में 7.30 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। 2026 में यह स्टॉक 9.83 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। हालांकि, इसके बाद भी एक साल में यह स्टॉक 2.03 प्रतिशत गिरा है। इस दौरान सेंसेक्स इंडेक्स में 6.76 प्रतिशत लुढ़का है।

दो साल में एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड के शेयरों का दाम 15.63 प्रतिशत गिरा है। तीन साल में कंपनी के शेयरों का दाम 8.58 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। 5 साल में यह स्टॉक 20.84 प्रतिशत चढ़ा है। हालांकि यह सेंसेक्स इंडेक्स के 48.07 प्रतिशत के रिटर्न की तुलना में काफी कम है।

कंपनी के सीईओ ने क्या कुछ कहा
पारंपरिक स्टोर व्यवसाय के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कंपनी के एमडी एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अंशुल असावा ने कहा कि दो साल या उससे अधिक पुराने डी-मार्ट स्टोरों की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 5.5 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह 7.1 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा, “बड़े महानगरों में पुराने स्टोरों की वृद्धि दर इस तिमाही में स्थिर रही, जहां प्रति वर्ग फुट राजस्व काफी अधिक है। हालांकि, छोटे शहरों में स्टोरों की वृद्धि अच्छी बनी हुई है।”

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