कर्नाटक में बड़ा सियासी उलटफेर! राज्यपाल ने स्वीकार किया सिद्धारमैया का इस्तीफा, डीके शिवकुमार का रास्ता साफ

बेंगलुरु
 कर्नाटक सरकार में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता शुक्रवार सुबह साफ हो गया है. राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने आज सुबह सीएम सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. बता दें, सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने आवास ‘कावेरी’ पर आयोजित ब्रेकफास्ट मीटिंग में इस मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था. राज्यपाल अभी कर्नाटक से बाहर इंदौर में हैं. इसके बाद दोपहर 3 बजे वे लोकभवन गए और राज्यपाल के सचिव को अपना त्यागपत्र सौंपा. इस्तीफा स्वीकार करते ही राज्य में नई सरकार के गठन होने का रास्ता बिल्कुल साफ हो गया है। 

कर्नाटक में आज 29 मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चुनाव होगा. जानकारी के मुताबिक यह बैठक शाम 5 बजे के करीब होनी है. नई सरकार को लेकर नई दिल्ली में भी कवायद शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व सीएम सिद्धारमैया दिल्ली पहुंच चुके हैं। 

राज्य के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी दिल्ली पहुंचे हैं. जहां दोनों नेता पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे. ऐसा माना जा रहा है कि सरकार में किन नेताओं को मंत्रिपद मिलेगा, इसकी मंत्रणा की जाएगी। 

इससे पहले सिद्धारमैया के आवास पर आयोजित ब्रेकफास्ट मीटिंग में पूरी कैबिनेट शामिल हुई थी, जहां सिद्धारमैया ने पद से हटने की घोषणा की. वहीं, डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पहले गले मिले और उसके बाद पैर छूकर आर्शीवाद लिया. आपको बता दें, राज्य में काफी दिनों से नेतृत्व परिवर्तन की बात चल रही थी, जिसका अब पटाक्षेप हो गया है. सूत्रों से जानकारी मिली है कि रविवार को नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। 

राज्यसभा चुनाव में बढ़ेगा सियासी रोमांच, क्रॉस वोटिंग हुई तो कई सीटों पर फंस सकता है खेल

नई दिल्ली

राज्यसभा की 24 सीटों के चुनाव में संख्याबल के बावजूद विपक्षी दलों में अपने उम्मीदवार की जीत का भरोसा पैदा नहीं हो पा रहा है। पिछले कई मौकों पर बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग ने भाजपा विरोधी खेमे को कई बड़े झटके दिए हैं। इस बार भी मध्य प्रदेश, झारखंड एवं कर्नाटक में काग्रेस और उसके सहयोदी दलों को क्रॉस वोटिंग की चिंता सता रही है।

झारखंड की 2 सीटों पर चुनाव
झारखंड में सत्तारूढ़ झामुमो और उसकी सहयोगी कांग्रेस के पास खाली हो रही दोनों सीट जीतने के लिए पर्याप्त नंबर हैं, लेकिन भाजपा के द्वारा चुनाव लड़ने की तैयारी से समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में दो राज्यसभा सीटों के चुनाव में एक सीट की जीत के लिए 28 वोट चाहिए। झामुमो के नेतृत्व वाली INDIA गठबंधन की सरकार के पास 56 विधायक हैं। यानी दोनों सीटें जीती जा सकती हैं।

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक हैं। यानी चार सीटों की क्रॉस वोटिंग से तो मामला पलट ही सकता है, एक दो वोट इधर उघर होने पर दूसरी वरीयता से दूसरी सीट का फैसला होगा।

कर्नाटक में रोचक हुआ चुनाव
कर्नाटक में कांग्रेस में सरकार के भीतर खींचतान जारी है। ऐसे में, वहां की चार सीटों का चुनाव रोचक है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पास 135 व भाजपा-जदएस के पास 85 विधायक हैं। एक सीट के लिए 45 वोट की जरूरत है। इसमें कांग्रेस तीन एवं भाजपा के एक सीट जीतने के आंकड़े हैं, लेकिन भाजपा दूसरी सीट के लिए उतरती है तो उसे बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग करानी पड़ेगी या फिर मामला दूसरी वरीयता के वोटों पर जा सकता है।

मध्य प्रदेश में चाहिए 58 वोट
मध्य प्रदेश में तीन सीटों के चुनाव में एक सीट के लिए 58 वोट की जरूरत है। भाजपा के पास दो सीट जीतने के बाद भी 48 वोट अतिरिक्त हैं। यानी उसे एक और सीट जीतने के लिए दस और वोटों का जुगाड़ करना होगा। कांग्रेस के पास 62 वोट हैं। यानी आसानी से एक सीट आ सकती है, लेकिन अगर भाजपा एक ज्यादा उम्मीदवार उतारती है तो क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ जाएगा।

गौरतलब है कि इस बार कांग्रेस से दिग्विजय सिंह की सीट खाली हो रही है। वह फिर से लड़ते हैं तो भाजपा दांव खेल सकती है। पिछली बार दिग्विजय सिंह के चलते हुए राज्यसभा सीट के विवाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी थी। सिंधिया अब भाजपा में हैं। भाजपा यहां पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है।

इन राज्यों में चुनाव
18 जून को होने वाले चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीट, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीट, झारखंड की दो सीट तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा।

जिन 26 सीटों के लिए चुनाव और उपचुनाव हो रहा है उनमें एनडीए के पास 18 सीटें हैं और इनमें भी 12 सीटें भाजपा की हैं। इसके अलावा चार सीटें कांग्रेस, तीन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और एक झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास हैं। भाजपा की खाली होने वाली सीटों में गुजरात से तीन, कर्नाटक, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान से दो-दो और अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और मणिपुर से एक-एक सीट शामिल हैं।

दिग्विजय सिंह के बयान पर सियासी बवाल, BJP ने कांग्रेस को बताया ‘एंटी-हिंदू’

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक और धार्मिक ध्रुवीकरण की तीखी जंग छिड़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर दिए गए एक बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने दिग्विजय सिंह और कांग्रेस पार्टी को सीधे तौर पर हिंदू विरोधी करार देते हुए आरोप लगाया है कि जवाहरलाल नेहरू के जमाने से लेकर आज तक कांग्रेस नेताओं ने हमेशा हिंदुओं को एक आंख नहीं भाया और उन्हें हमेशा दुश्मनों की तरह देखा है।

दिग्विजय सिंह के किस बयान पर मचा बवाल?
दरअसल, कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने नेहरू के विचारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि देश में इस समय बहुसंख्यक सांप्रदायिकता का खतरनाक उभार देखा जा रहा है। नेहरू ने सांप्रदायिकता को एक ऐसा जहरीला तत्व बताया था जो देश के भीतर नफरत फैलाता है। दिग्विजय सिंह ने आगे जोड़ा कि नेहरू के मुताबिक, अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता की तुलना में बहुसंख्यक सांप्रदायिकता देश के लिए कहीं अधिक खतरनाक होती है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति और अर्थव्यवस्था की दिशा पर भी तीखे सवाल उठाए।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस हमेशा बहुसंख्यक समाज को निशाना बनाती है। कांग्रेस पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता का बचाव किया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि दिग्विजय सिंह ने केवल वही बात दोहराई है, जो देश की वास्तविक चिंता है।

उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आते ही वोट बैंक के लिए समाज में सांप्रदायिकता का जहर घोलती है।

कुछ दिन पहले इंदौर में भाजपा नेत्री उषा ठाकुर के सामने खुद को दिग्विजय ने घोर सनातनी बताया था। इस पर भाजपा नेता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि दिग्विजय का सनातनी रूप केवल चुनाव और राजनीतिक लाभ के लिए एक ढोंग है। वह वोट बैंक की राजनीति के तहत बहुसंख्यक समाज (हिंदुओं) को निशाना बनाते हैं।

बीजेपी का तीखा पलटवार: दागे कई सवाल
दिग्विजय सिंह के इस बयान पर भोपाल से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और अल्पसंख्यक राजनीति के नाम पर अलगाववाद व कट्टरपंथ फैलाने का आरोप लगाया। शर्मा ने इतिहास का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या 1947 में भारत के विभाजन के लिए हिंदू जिम्मेदार थे? क्या मोहम्मद अली जिन्ना हिंदू थे? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस तब भी विभाजनकारी ताकतों के साथ खड़ी थी और आज भी देश को बांटने वाले तत्वों को संरक्षण दे रही है।

केरल में ED रेड पर बवाल: पी विजयन के करीबी ठिकानों पर कार्रवाई, समर्थकों ने गाड़ियों में की तोड़फोड़

ईडी की छापेमारी के दौरान माहौल हुआ तनावपूर्ण, समर्थकों के विरोध के बीच कई वाहनों को नुकसान पहुंचाने का आरोप

केरल में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई के दौरान बड़ा हंगामा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के करीबी ठिकानों पर ईडी की रेड के बीच समर्थकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कुछ समर्थक उग्र हो गए और ईडी की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। घटनास्थल पर तनावपूर्ण माहौल बन गया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी।

बताया जा रहा है कि ईडी की टीम कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच के लिए पहुंची थी। हालांकि, विपक्ष ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है, जबकि जांच एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। घटना के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ गई है।

2028 में मध्य प्रदेश में किसानों की सरकार बनेगी

हम पूरे देश के सामने एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करेंगे, जहां किसान केवल कर्ज और संकट की बात नहीं करेगा, बल्कि सम्मान, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ेगा।

“सालों से मध्य प्रदेश का किसान दिन-रात मेहनत करता रहा।

कभी बारिश की चिंता, कभी फसल के दाम की लड़ाई,

कभी कर्ज का बोझ, तो कभी व्यवस्था की अनदेखी।

जिस किसान ने पूरे देश का पेट भरा,

उसी किसान को अपने भविष्य के लिए संघर्ष करना पड़ा।

लेकिन अब समय बदलने वाला है।

2028 में मध्य प्रदेश में किसानों की सरकार बनेगी।

ऐसी सरकार…

जहां किसान सिर्फ वोट नहीं,

बल्कि व्यवस्था का केंद्र होगा।

हम एक ऐसा मॉडल बनाएंगे,

जहां खेत सिर्फ मेहनत का प्रतीक नहीं,

बल्कि समृद्धि का रास्ता बनेंगे।

जहां हर किसान को उसकी फसल का सम्मानजनक दाम मिलेगा।

जहां गांवों में रोजगार पैदा होगा।

जहां युवा खेती को मजबूरी नहीं, अवसर समझेगा।

जहां आधुनिक तकनीक, सिंचाई और मजबूत बाजार व्यवस्था

किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी।

हम ऐसा मध्य प्रदेश बनाएंगे

जहां किसान कर्ज और संकट की बात नहीं करेगा,

बल्कि सम्मान, विकास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा।

यह सिर्फ चुनाव का वादा नहीं…

यह किसानों के सम्मान का संकल्प है।

आइए,

मिलकर बनाएं एक नया मध्य प्रदेश।

किसान मजबूत होगा,

तो प्रदेश समृद्ध होगा।”

‘आलाकमान का फैसला मंजूर’, इस्तीफे के बाद बोले सिद्धारमैया; DK शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान

बेंगलुरु

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है. बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे. सत्ता परिवर्तन के इस बड़े कदम के बीच सिद्धारमैया ने यह भी साफ किया कि राज्य में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत बरकरार है, इसलिए संविधान के अनुसार नई सरकार बनाने का अधिकार भी उनकी पार्टी को ही मिलना चाहिए. इस बड़े सियासी उलटफेर के दौरान उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का यह अवसर प्रदान किया था. अब पूरे राज्य की नजरें राजभवन और अगले मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिक गई हैं।

कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे सत्ता हस्तांतरण के विवाद पर आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने निर्णायक कदम उठा लिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी. बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान सिद्दारमैया से कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुराने वादे का सम्मान जरूरी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने दोनों नेताओं (सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार) से संयुक्त और अलग-अलग बैठकें कर पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की।

बताया जाता है कि बैठक के दौरान सिद्दारमैया ने यह तर्क दिया कि 2025 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था, लेकिन राहुल गांधी अपने रुख पर कायम रहे. पार्टी नेतृत्व ने यह भी कहा कि सिद्दारमैया पहले ही आठ वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं, इसलिए अब दूसरे नेताओं को अवसर देने का समय है. सूत्रों के मुताबिक, बाद में सिद्दारमैया ने वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से चर्चा की, जिन्होंने भी हाईकमान के निर्देश को मानने की सलाह दी. शाम को सिद्दारमैया ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने करीबी सहयोगियों से मुलाकात की। कुछ मंत्रियों ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन सिद्धारमैया ने साफ कहा कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे. सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया ने अपने सहयोगियों से कहा, ‘मैं शुरू से कहता आया हूं कि राहुल गांधी जब कहेंगे, मैं इस्तीफा दे दूंगा. अब जब उन्होंने कहा है, तो मैं तुरंत पद छोड़ दूंगा।

कांग्रेस के लिए अहम
कांग्रेस नेतृत्व इस फैसले को पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण के लिहाज से अहम मान रहा है. 2014 के बाद कांग्रेस कई राज्यों में क्षेत्रीय नेताओं पर नियंत्रण बनाए रखने में संघर्ष करती रही है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता साझा करने के वादों के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो सका था. ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान का यह कदम पार्टी के भीतर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व के फैसले सर्वोपरि होंगे।

 इस्तीफा देने के प्रेस को संबोधित करते हुए भावुक हुए सिद्धारमैया
सीएम सिद्दारमैया का इस्तीफा: कर्नाटक के राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है. कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सिद्धारमैया काफी भावुक नजर आए. उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘हाई कमान के पहले ही इस्तीफा देने के लिए कहने के बाद, मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मुझे पूरा भरोसा है कि जब राज्यपाल आएंगे, तो वे इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि यह संविधान के अनुसार ही किया जाना है.’ सिद्धारमैया ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और संवैधानिक रूप से नई सरकार बनाने का अधिकार भी कांग्रेस को ही मिलना चाहिए. इस अवसर पर उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का मौका दिया।

BJP का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, दिल्ली-हरियाणा समेत 4 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त

नई दिल्ली

बीजेपी संगठन में बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी ने गुरुवार (28 मई) को चार राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदलने का ऐलान किया है. दिल्ली में वीरेंद्र सचदेवा की जगह केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को कमान सौंपी गई है. इसके अलावा, भाजपा ने पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा के नए प्रदेश अध्यक्ष के नामों का ऐलान किया है. इसको लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने नोटिफिकेशन जारी किया है।

बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

कौन हैं दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा?
हर्ष मल्होत्रा बीजेपी के सीनियर नेता और दिल्ली से सांसद हैं. वह अभी तक केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं. लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय मल्होत्रा ने दिल्ली भाजपा में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह जनसंपर्क, संगठन क्षमता और विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के लिए जाने जाते हैं।

अर्चना गुप्ता बनीं हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष
डॉ. अर्चना गुप्ता को हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, जबकि सरदार केवल सिंह ढिल्लो को पंजाब और अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कौन हैं पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष
केवल सिंह ढिल्लों बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं. उन्होंने 2022 की संगरूर लोकसभा की उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा की उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था. ढिल्लों देश और पंजाब के एक बड़े उद्योगपति हैं. वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी रहे हैं, उन्हें बरनाला के लोग विकास पुरुष के तौर पर जानते हैं, उन्होंने अपनी राजनीति हमेशा विकास के मुद्दे पर लड़ी है, जबकि विरोधी खेमे के नेताओं के साथ कभी भी विवाद की राजनीति में वह नहीं पड़े।

पंजाब बीजेपी की कमान केवल सिंह ढिल्लों को
सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वह बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में संगरूर लोकसभा उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था।

उद्योगपति से नेता तक का सफर
केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी भी रहे हैं। बरनाला में लोग उन्हें विकास कार्यों के लिए जानते हैं।

हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा में भी नए चेहरे को मौका मिला है। बीजेपी ने अर्चना गुप्ता को हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, अभिषेक देवराय को त्रिपुरा बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है।

भोपाल में शराब के नशे में युवकों का हुड़दंग, कार की छत पर चढ़कर किया डांस

नर्मदापुरम रोड स्थित पेट्रोल पंप पर कर्मचारियों से बदतमीजी, बागसेवनिया थाना क्षेत्र की घटना

राजधानी भोपाल में शराब के नशे में धुत युवकों का हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मामला बागसेवनिया थाना क्षेत्र के नर्मदापुरम रोड स्थित एक पेट्रोल पंप का है, जहां कुछ युवक कार की छत पर चढ़कर डांस करते नजर आए।

बताया जा रहा है कि युवक शराब के नशे में थे और पेट्रोल पंप परिसर में जमकर हुड़दंग मचाया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ बदतमीजी भी की। युवकों की हरकतों से पेट्रोल पंप पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना का वीडियो वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद बागसेवनिया थाना पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गई है।

पुलिस का कहना है कि वीडियो के आधार पर युवकों की पहचान की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल में बढ़ता जनता का भरोसा, भाजपा बन रही समाधान की आवाज़

भाजपा की शिकायत एवं सहायता व्यवस्था से आम नागरिक सीधे जनप्रतिनिधियों तक पहुँचा रहे हैं अपनी समस्याएँ — जनता को मिल रही है नई उम्मीद और भरोसेमंद नेतृत्व

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। प्रतिदिन भाजपा कार्यालयों के बाहर उमड़ती जनता की भीड़ इस बात का संकेत है कि अब लोग केवल वादे नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान चाहते हैं।

भाजपा द्वारा शुरू की गई शिकायत एवं सहायता व्यवस्था आम नागरिकों के लिए एक मजबूत माध्यम बनकर सामने आई है। अब लोग अपनी समस्याएँ सीधे लिखकर जनप्रतिनिधियों तक पहुँचा रहे हैं और उन्हें सुनवाई की उम्मीद भी मिल रही है। यही कारण है कि जनता का विश्वास लगातार भाजपा के प्रति बढ़ रहा है।

वर्षों तक कांग्रेस, लेफ्ट और तृणमूल सरकारों के दौरान आम लोगों की समस्याएँ अनसुनी रहीं। व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी थी कि लोगों को अपनी बात रखने के लिए कोई प्रभावी मंच नहीं मिलता था। लेकिन आज स्थिति बदलती दिखाई दे रही है।

भाजपा जनसेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही के संकल्प के साथ पश्चिम बंगाल की जनता के बीच लगातार काम कर रही है। यही वजह है कि राज्य के हर वर्ग के लोग भाजपा से जुड़ रहे हैं और इसे बदलाव की नई उम्मीद के रूप में देख रहे हैं।

आज बंगाल की जनता को यदि कहीं विश्वास और समाधान की उम्मीद दिखाई दे रही है, तो वह भाजपा की जनसेवा और मजबूत नेतृत्व में दिखाई दे रही है। 🚩

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गंजबासौदा के उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों की पिटाई का आरोप, शिक्षक का वीडियो वायरल

छड़ी से मारने और छात्रों को मुर्गा बनाने का आरोप, स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना के भी गंभीर सवाल

विदिशा जिले के गंजबासौदा स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ एनसीसी शिक्षक अनिल दुबे ने छात्रों की छड़ी से पिटाई की और उन्हें सजा के तौर पर मुर्गा भी बनाया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

बताया जा रहा है कि शासन द्वारा स्कूलों में बच्चों की पिटाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद विद्यालय में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। आरोप यह भी हैं कि प्रभारी प्राचार्य महेश चंद शर्मा और शिक्षक अनिल दुबे द्वारा स्कूल के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मामले की जांच कर संबंधित शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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