देश के पहले CM बने डॉ. मोहन यादव, काफिले में शामिल की इलेक्ट्रिक कार; दिया विकसित भारत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक नई पहल करते हुए अपने आधिकारिक काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शामिल कर देशभर में मिसाल पेश की है। इसके साथ ही वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने अपने काफिले में इलेक्ट्रिक कार को जगह दी है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता और पर्यावरण संरक्षण की सोच को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के काफिले में अब महिंद्रा की XEV 9e इलेक्ट्रिक कार शामिल हो गई है। कंपनी के अनुसार यह कार एक बार फुल चार्ज होने पर लगभग 500 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 जून को इस नई इलेक्ट्रिक कार से मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर तक यात्रा की।

इस कार का पंजीयन नंबर MP-02-VB-2047 है। ‘VB’ को ‘विकसित भारत’ और ‘2047’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस इस इलेक्ट्रिक कार में 360 डिग्री कैमरा समेत कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है

पर्यावरण और सौर ऊर्जा पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर्यावरण संरक्षण और सौर ऊर्जा को लेकर लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे विभिन्न योजनाओं और अभियानों के माध्यम से हरित विकास को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के तहत विभिन्न क्षेत्रों में गिद्धों और मगरमच्छों को छोड़े जाने की पहल भी की थी। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के बिना विकास की कल्पना अधूरी है।

सादगी और मितव्ययता की लगातार मिसाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कार्यकाल में सादगी और मितव्ययता को प्राथमिकता देते रहे हैं। हाल ही में इंदौर दौरे के दौरान उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ टेम्पो ट्रैवलर बस में सफर किया था। वहीं सिंगरौली दौरे में भी वे टूरिस्ट बस से कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री काफिले में शामिल वाहनों की संख्या भी कम कर दी है।

मुख्यमंत्री की यह नई पहल न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और विकसित भारत के संकल्प का भी मजबूत संदेश देती है।

अल नीनो के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली। अल नीनो की संभावित परिस्थितियों और दक्षिण-पश्चिम मानसून पर उसके प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में कृषि, मौसम और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों एवं एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

बैठक में मानसून की प्रगति, अल नीनो के संभावित प्रभाव और किसानों के हितों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक की प्रमुख बातें

 अल नीनो की स्थिति पर लगातार निगरानी के निर्देश

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को अल नीनो से जुड़ी परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए।

मानसून की प्रगति पर विशेष फोकस

बैठक में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्तमान स्थिति और उसके संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को मौसम संबंधी अपडेट पर सतत निगरानी रखने को कहा गया।

राज्यों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत की जाए।

त्वरित कार्रवाई की तैयारी

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी रखी जाएं।

किसानों को समय पर सलाह और सहायता

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों तक मौसम और फसल प्रबंधन से संबंधित जरूरी सलाह समय पर पहुंचाई जाए तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

फसलों पर प्रभाव कम करने की रणनीति

बैठक में फसलों पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न वैकल्पिक योजनाओं और प्रबंधन रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया।

विभागों की तैयारियों की समीक्षा

कृषि, मौसम विज्ञान और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों की तैयारियों का आकलन किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वित रूप से कार्य करने और किसी भी संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के निर्देश दिए।

विधायक ट्रॉफी 2026 का भव्य शुभारंभ, 32 टीमें लेंगी हिस्सा

भोपाल, 1 जून। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विधायक ट्रॉफी 2026 का भव्य शुभारंभ आतिशबाजी, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खिलाड़ियों के उत्साह के बीच नेहरू नगर पुलिस ग्राउंड में हुआ। टूर्नामेंट के उद्घाटन अवसर पर करुणाधाम आश्रम के पीठाधीश्वर सुदेश शांडिल्य महाराज, विधायक भगवानदास सबनानी एवं भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यती विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान चालीसा एवं राष्ट्रगान के साथ हुई। इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी ने खिलाड़ियों और दर्शकों का स्वागत करते हुए कहा कि खेल जीवन में अनुशासन, मानसिक विकास, चरित्र निर्माण और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र प्रतिभाओं से समृद्ध है और उनका निरंतर प्रयास क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का है।

विधायक श्री सबनानी ने कहा कि खेल केवल हार-जीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संघर्ष, टीम भावना, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की सीख भी देते हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

नवप्रयास सांस्कृतिक एवं सामाजिक विकास समिति द्वारा आयोजित यह टेनिस बॉल नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट 1 जून से 9 जून तक चलेगा। प्रतियोगिता में 32 टीमें भाग ले रही हैं और मुकाबले नॉकआउट प्रारूप में खेले जाएंगे। फाइनल मैच 9 जून को आयोजित होगा।

उद्घाटन समारोह के बाद डॉक्टर एवं पत्रकारों के बीच एक रोमांचक शो मैच भी खेला गया, जिसने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतिदिन 8 ओवर के 3 से 4 मैच आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

महिलाओं और बच्चों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता, लापरवाही पर होगी कार्रवाई: सीएम डॉ. मोहन यादव

भोपाल, 1 जून। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनभागीदारी और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो तथा पोषण स्तर सुधारने के लिए स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागों के साथ निजी अस्पतालों और संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और अन्य राज्यों में सफल नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें अपनाने की कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि महिला कर्मियों की अधिक संख्या वाले औद्योगिक क्षेत्रों में पीपीपी मॉडल पर वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित किए जा रहे हैं। देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में ऐसे हॉस्टलों का निर्माण शुरू हो चुका है। वहीं संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद, इंदौर, धार सहित विभिन्न स्थानों पर वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।

बाल संरक्षण के क्षेत्र में चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से 51 जिला स्तरीय और एक राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर द्वारा 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता प्रदान की गई है। जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और मैपिंग का कार्य 13 जिलों में जारी है।

9.28 लाख बच्चों की हुई ग्रेजुएशन सेरेमनी

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिससे स्कूलों में उनका सहज प्रवेश सुनिश्चित हुआ। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

इसके अलावा, सक्षम आंगनबाड़ी उन्नयन कार्यक्रम के तहत एक साथ 12,670 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों में उन्नत किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।

लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं का लाभ

समीक्षा में बताया गया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से मई 2026 तक 1.25 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं को 47,775 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15.84 लाख बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई।

मातृ वंदना योजना में देश में अव्वल मध्यप्रदेश

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 15.51 लाख गर्भवती महिलाओं को 798.68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है। इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश पिछले ढाई वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है।

साथ ही प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बीमा योजना का लाभ प्रदान किया गया है। विभिन्न जिलों में पोषण सुधार के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी समीक्षा बैठक में जानकारी प्रस्तुत की गई।

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए आपके सुझाव आमंत्रित हैं

क्या आप एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान अवसर प्राप्त हों?

मध्यप्रदेश सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस संबंध में नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक विद्वानों, महिलाओं, युवाओं एवं सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार, गोद लेने तथा अन्य पारिवारिक एवं नागरिक मामलों में समानता, न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश

“मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने से पूर्व नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। यह व्यवस्था विभिन्न धर्मों से आने वाली बहनों एवं महिलाओं को विवाह, विवाह-विच्छेद तथा अन्य पारिवारिक एवं नागरिक मामलों से संबंधित समस्याओं के समाधान में अधिक सुविधा और समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।”

राज्य सरकार द्वारा गठित समिति विभिन्न जिलों में जाकर सभी समुदायों और धर्मों के नागरिकों से संवाद कर रही है। अब आपकी भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

आपके सुझाव क्यों महत्वपूर्ण हैं?

– समान और न्यायपूर्ण व्यवस्था के निर्माण में योगदान

– महिलाओं और परिवारों के अधिकारों को सशक्त बनाने में सहभागिता

– सामाजिक समरसता और कानूनी स्पष्टता को बढ़ावा

– राज्य के भविष्य को आकार देने में सक्रिय भूमिका

अपने सुझाव साझा करें

आपके विचार, सुझाव और अनुभव मध्यप्रदेश में एक प्रभावी एवं समावेशी समान नागरिक संहिता के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

आज ही अपने सुझाव दर्ज करें और जनभागीदारी के इस अभियान का हिस्सा बनें।

“आपका सुझाव – मध्यप्रदेश का भविष्य”

ट्विशा शर्मा डेथ केस: सीबीआई ने घर पहुंचकर किया सीन रीक्रिएशन, 80 किलो की डमी से समझी घटना की परिस्थितियां

पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ की मौजूदगी में हुई जांच प्रक्रिया, करीब दो घंटे तक चला रीक्रिएशन

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच में जुटी सीबीआई ने सोमवार (1 जून) को मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए घटनास्थल पर सीन रीक्रिएशन किया। जांच टीम पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को साथ लेकर उनके घर पहुंची, जहां घटना से जुड़ी परिस्थितियों को दोबारा समझने का प्रयास किया गया।

 

सीबीआई अधिकारियों ने मौके पर 80 किलो वजन की डमी का इस्तेमाल कर यह जानने की कोशिश की कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ होगा। जांच के दौरान टीम ने उपलब्ध तथ्यों और घटनास्थल की परिस्थितियों का मिलान करने पर फोकस किया।

जानकारी के अनुसार, डमी का वजन ट्विशा शर्मा के वजन के बराबर करने के लिए उसके अंदर रेत भरी गई। इसके बाद अतिरिक्त वजन संतुलित करने के लिए डमी के पैरों में लोहे के भारी डंबल बांधे गए। फिर डमी को फंदे पर लटकाने और उतारने की प्रक्रिया दोहराई गई, ताकि घटनाक्रम को तकनीकी रूप से समझा जा सके।

सीबीआई की यह कवायद इस बात का पता लगाने के लिए की गई कि घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अब तक सामने आए तथ्यों में कितना सामंजस्य है। रीक्रिएशन की पूरी प्रक्रिया करीब दो घंटे तक चली।

फिलहाल सीबीआई मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और रीक्रिएशन से मिले निष्कर्षों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कांग्रेस के लिए 2028 बना ‘करो या मरो’ का साल, दिग्गज नेता बोले- BJP नहीं, अपने ही कमजोर करते हैं पार्टी

भोपाल 

मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने हरदा में कार्यकर्ताओं के बीच संगठन को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 2028 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए आखिरी मौका साबित हो सकता है, इसलिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर संगठन के लिए त्याग और समर्पण दिखाना होगा।कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अजय सिंह ने कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी भी खुलकर गिनाई। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही पार्टी में हर कोई दावेदार बन जाता है या फिर किसी गुट का समर्थक बनकर खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि कांग्रेस कई बार भाजपा से नहीं, बल्कि अपनी ही अंदरूनी खींचतान से चुनाव हार जाती है।

उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि कांग्रेस 2028 में सत्ता में वापसी नहीं कर पाई, तो पार्टी के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए अभी से संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर की गई टिप्पणी को लेकर भी अजय सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए और राजनीतिक विरोध के बावजूद मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

इस दौरान अजय सिंह ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं, जबकि कांग्रेस की राजनीति हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति के हितों को केंद्र में रखकर चलती रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से राहुल गांधी के संघर्ष और जनसरोकारों से प्रेरणा लेने की अपील की।

कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं के बीच हल्की-फुल्की राजनीतिक नोकझोंक भी देखने को मिली। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व नपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि भाजपा में रहते हुए वे कांग्रेस की एकजुटता तोड़कर चुनावी लाभ दिलाते थे। इस पर कांग्रेस नेता हेमंत टाले ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि अब वही रणनीति भाजपा के खिलाफ अपनाने का समय आ गया है।

कुल मिलाकर हरदा का यह संवाद कार्यक्रम कांग्रेस के भीतर एकजुटता, संगठनात्मक मजबूती और 2028 की चुनावी तैयारी को लेकर गंभीर संदेश देने वाला साबित हुआ, जहां अजय सिंह ने साफ कर दिया कि सत्ता में वापसी का रास्ता पहले पार्टी के अंदर से होकर गुजरता है।

क्या टीएमसी में होगा ‘शिंदे मॉडल’? ऋतब्रत बनर्जी को लेकर बंगाल की राजनीति में हलचल

  कोलकाता

पश्चिम बंगाल की सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी के सामने सियासी संकट गहराता जा रहा है. चुनाव में मिली करारी हार के बाद एक-एक करके टीएमसी के पत्ते झड़ते जा रहे हैं. टीएमसी के एक के बाद एक नेता बागी तेवर अपनाता जा रहा है. ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. टीएमसी से निष्कासित विधायक रि ऋतब्रत बनर्जी क्या अब टीएमसी के ‘एकनाथ शिंदे’ साबित होंगे? 

साल 2022 का महाराष्ट्र में जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर उद्धव ठाकरे के हाथों से सरकार और सियासत दोनों ही छीन ली थी. अब ठीक वैसी ही सियासी स्क्रिप्ट अब पश्चिम बंगाल में लिखे जाने की सुगबुगाहट है. इसके केंद्र में टीएमसी से निष्कासित विधायक  ऋतब्रत बनर्जी हैं। 

 ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने बीती रात कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों से मुलाकात की. टीएमसी के 80 विधायकों में से 60 विधायकों ने ममता बनर्जी की बैठक से दूरी बना ली थी. अब उन्हीं विधायकों से ऋतब्रत बनर्जी की मुलाकात ने बंगाल में सियासी हलचल बढ़ा दी है.  ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई बड़ा खेला होने जा रहा है? 

टीएमसी में बगावत के बढ़ते आसार 
बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की सियासी चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही है. टीएमसी के कार्यकर्ता से लेकर नेता तक का मोहभंग हो रहा है. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर विरोध के सुर टीएमसी में तेज होते जा रहे हैं.  टीएमसीके कई नेता और विधायक पार्टी की इस हालत के लिए खुले तौर पर उन्हें ही दोषी ठहरा रहे हैं. वे उन पर भ्रष्टाचार, घमंड, परिवारवाद, सीनियर नेताओं को किनारे करने और I-PAC के प्रोफेशनल्स के ज़रिए पार्टी को अपनी जागीर की तरह चलाने का आरोप लगा रहे हैं। 

टीएमसी के कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है. सिंडिकेट और ‘कट-मनी’ (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है. वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है.  टीएमसी में टूटने का सबसे खतरा वहीं से आ रहा है जहां से तृणमूल कांग्रेस खड़ी हुई थी, मतलब जमीनी स्तर से विरोध तेज हो गया है। 

ममता बनर्जी ने रविवार को टीएमसी विधायकों की  पीशी-भाईपो की बुलाई थी, जिसमें 80 में से सिर्फ टीएमसी 20 विधायक ही शामिल हुए. इससे पहले विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. कई टीएमसी नेता की बीजेपी के साथ बातचीत कर रहे हैं. कुछ लोग, जैसे फिल्म निर्माता और पूर्व विधायक राज चक्रवर्ती, चुनाव में हार के बाद पूरी तरह से राजनीति छोड़ चुके हैं. इस तरह टीएमसी से नेताओं को मोहभंग हो रहा है, जो ममता बनर्जी के लिए सियासी टेंशन का सबब बनता जा रहा है। 

 ऋतब्रत बनर्जी बनेंगे टीएमसी के ‘शिंदे’
टीएमसी के टिकट पर विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके चलते ममता बनर्जी ने दोनों विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. अब इन्हीं दोनों विधायकों ने टीएमसी के साथ खेला करने की कवायद में जुट गए हैं.  टीएमसी के कई विधायकों के साथ  ऋतब्रत बनर्जी ने देर रात मुलाकात की है. इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि टीएमसी के भीतर एक नया समूह आकार ले सकता है। 

विधायक हॉस्टल में  ऋतब्रत बनर्जी से मिलने वालों में पश्चिमी मिदनापुर की एक महिला विधायक भी शामिल थीं.  ऋतब्रत और संदीपन से मिलने वाले टीएमसी के एक विधायक के मुताबिक हम पार्टी तोड़कर कोई अलग दल बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, हम टीएमसी के झंडे तले ही काम करेंगे. ऐसे में साफ है कि टीएमसी के अंदर कुछ सियासी खिचड़ी जरूर पक रही है.  टीएमसी से निष्कासित विधायक जिस तरह से एक्टिव हैं और अभिषेक पर पार्टी को हाईजैक करने का आरोप लगाया, उससे सियासत तेज हो गई है। 

 ऋतब्रत बनर्जी ने खोला सियासी मोर्चा
 ऋतब्रत बनर्जी ने आजतक से बात करते हुएअभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को सीधे तौर पर चुनौती दी है. मुख्य मुद्दा पार्टी में IPAC के संबंध में जूनियर बनर्जी की भूमिका अहम थी. TMC विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया था कि निकाले गए ये दोनों विधायक पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में कुछ विधायकों के साथ एक गुप्त बैठक की थी, बाद में ऋतब्रत ने इस आरोप से इनकार कर दिया। 

अभिषेक बनर्जी की घटना ने बढ़ाई टेंशन
अभिषेक बनर्जी को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा. वह सोनारपुर गए थे., उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए। कल्याण बनर्जी ने अगले दिन आरोप लगाया कि उनके सिर पर एक पत्थर लगा था, लेकिन इन सबसे ऊपर, जहां भी वे गए, चोर, चोर के नारे लगे. इस तरह का दृश्य हर टीएमसी विधायक और सांसद को सियासी तौर पर चिंतित कर रहा है। 

टीएमसी के कई नेताओं को डर सता रहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ जुड़ाव उनका राजनीतिक करियर बर्बाद कर सकता है.  इसके चलते ही टीएमसी के नेता ममता बनर्जी की बैठक में शामिल नहीं हुए. इससे ममता बनर्जी की सियासी टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि जो विधायक बैठक में नहीं आए, लेकिन उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है. इसके चलते ही माना जा रहा है कि कोई बड़ा खेला होने जा रहा है। 

कुणाल घोष की अपील डूबते जहाज न छोड़े
टीएमसी के 80 विधायकों और 29 सांसदों में से आधे से ज्यादा (लगभग 40-45 विधायक और 15-18 सांसद) ममता बनर्जी से अलग होकर ‘दो घास-फूल’ वाले चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करते हैं, तो यह ममता बनर्जी और उनके भतीजे के पार्टी पर दावे को खारिज करने के लिए काफी हो सकता है. सोमवार को MLA कुणाल घोष ने टीएमसी नेताओं से हाथ जोड़कर गुज़ारिश की कि वे डूबते जहाज को छोड़कर न भागें, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में, उनके नेता को उन पर भी यह भरोसा नहीं है कि वे कोई लाइफबोट छीनकर कूद न जाएं। 

बंगाल चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया. उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया. कआलोचना करने वालों में वे दो विधायकों निकाल दिया गया है. तीसरे विधायक, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे कुणाल घोष हैं। 

दरअसल, ममता बनर्जी जिन्हें कभी जमीनी संघर्ष का चेहरा माना जाता था, लेकिन सत्ता से बाहर होते ही धीरे-धीरे अपना नियंत्रण खोती जा रही हैं.  टीएमसी अध्यक्ष के तौर पर और संगठन पर, दोनों पर ही उन्होंने अपना नियंत्रण लगभग खो दिया है. ऐसे में पार्टी के भीतर की उथल-पुथल से ममता बनर्जी के लिए सियासी टेंशन खड़ी कर दी है, पार्टी में जिस तरह से विरोध के सुर उठ रहे हैं, उससे साफ है कि महाराष्ट्र की तरह सियासी खेला होने जा रहा है। 

बंगाल राजनीति में बड़ा उलटफेर, 58 विधायकों ने ऋतब्रत को अपना नेता माना

कोलकाता
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है। इसी कड़ी में बुधवार को टीएमसी के 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। सूत्रों ने बताया कि ऋतब्रत बनर्जी ने संदीपन साहा और कई अन्य बागी विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाले समर्थन पत्र सौंपे। उन्होंने एक नई नेतृत्व टीम का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें ऋतब्रत को विधायक दल का नेता, जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उप-नेता और रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाया है।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है. ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया था. इसके बाद पार्टी में बगावत हो गई है. 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने से इंकार कर दिया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस से मुलाकात कर उनसे कहा कि वे TMC के असली गुट हैं और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी जाए. विधायकों की अपील पर विचार करते हुए स्पीकर ने  ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है। 

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से चुनाव नतीजे आने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन शाह को TMC से निलंबित कर दिया था। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर दिया। 

स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के कमरे की चाबी दे दी है. टीएमसी के इस गुट में चार उप नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं. इनके नाम हैं- जावेद अहमद खान, शबीना यास्मीन, शीलू साह, और संदीपन साह. अकीरजम्मा सदन में टीएमसी के चीफ व्हिप होंगे। 

स्पीकर के इस फैसले से साफ हुआ है उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाली टीएमसी को असली तृणमूल कांग्रेस माना है।  

यह घटनाक्रम विधानसभा में बागी विधायकों की एक बैठक के बाद सामने आया। विधानसभा में हुई इस बैठक में शामिल कोई भी विधायक मंगलवार को मध्य कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के धरने में मौजूद नहीं था। दूसरी ओर, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नयना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा और कुणाल घोष जैसे नेता बागी विधायकों की बैठक से दूर रहे।बागियों ने ममता को माना पार्टी सुप्रीमोबागी विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में ममता बनर्जी को पार्टी का अध्यक्ष बताया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बागी विधायक अपनी लड़ाई को टीएमसी सुप्रीमो के खिलाफ नहीं, बल्कि मौजूदा विधायक दल के नेतृत्व के खिलाफ पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। बागी गुट के सूत्रों ने बताया कि विधायकों ने यह भी साफ कर दिया है कि वे विधायक दल के मामलों पर फैसले लेने के संबंध में अभिषेक बनर्जी के अधिकार को स्वीकार नहीं करते हैं।पार्टी के साथ विश्वासघात हुआ।

टीएमसीटीएमसी नेतृत्व ने इस पूरी कवायद को विश्वासघात करार देते हुए खारिज कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संगठन के भीतर बातचीत से किसी भी मतभेद को सुलझाया जा सकता था। अगर उन्हें कोई समस्या थी, तो वे पार्टी के भीतर इस पर चर्चा कर सकते थे। इसके बजाय उन्होंने पार्टी को धोखा देना चुना। बागी विधायकों और उनके समर्थकों को गद्दार बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि टीएमसी इस संकट से उबर जाएगी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में एकजुट रहेगी।अयोग्य होने से बच जाएंगे बागी विधायकदल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी अलग हुए गुट को अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। चूंकि, विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायक हैं, इसलिए यह सीमा 54 विधायकों की है। यदि बागी गुट का दावा स्वीकार कर लिया जाता है, तो वे आसानी से इस आंकड़े को पार कर लेंगे और सदन में एक अलग गुट के रूप में मान्यता पाने के अपने दावे को मजबूत करेंगे।

यह है मामलाघटनाक्रम की जड़ें छह मई को ममता बनर्जी के आवास पर चुने गए विधायकों की एक बैठक में थीं, जहां विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व को विपक्ष के नेता, उप-नेता और मुख्य सचेतक के नामों पर फैसला करने का अधिकार दिया था। इसके बाद टीएमसी ने विधानसभा को सूचित किया कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय विपक्ष के नेता होंगे, नयना बंद्योपाध्याय और आशिमा पात्रा उप-नेता होंगी और फिरहाद हकीम मुख्य सचेतक होंगे। हालांकि, विधानसभा सचिवालय ने इस सूचना पर कोई कार्रवाई नहीं की और प्रक्रियागत जरूरतों का हवाला दिया कि ऐसे पदाधिकारियों का चुनाव विधायक दल की एक औपचारिक बैठक में होना चाहिए।हस्ताक्षर पर उठे थे सवालविवाद तब और बढ़ गया जब बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा सचिवालय को भेजे गए पत्र पर किए गए हस्ताक्षर सही नहीं हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस आरोप को खारिज कर दिया और बागियों पर चुनावी झटके के बाद संगठन को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसी क्रम में टकराव तब और तेज हो गया जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया गया।

TMC में बगावत से मचा भूचाल! 59 विधायकों के साथ ऋतब्रत बनर्जी की एंट्री, ममता पर संकट?

कोलकत्ता 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के महज एक महीने के भीतर राज्य की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा और अप्रत्याशित भूचाल आ चुका है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) आधिकारिक तौर पर दोफाड़ होने की कगार पर पहुंच गई है. कोलकाता के सियासी गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, टीएमसी के भीतर की गुटबाजी अब एक खुली जंग में तब्दील हो चुकी है, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस का आड़ा-तिरछा विभाजन तय माना जा रहा है. इस बड़े उलटफेर ने राज्य से लेकर देश भर के राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। 

59 विधायक हुए बागी?
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, बुधवार सुबह ठीक 10 बजे ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में टीएमसी के बागी विधायकों का एक बहुत बड़ा हुजूम अचानक विधानसभा पहुंच गया. सूत्रों का दावा है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से दो-तिहाई से कहीं अधिक, यानी कुल 59 नाराज विधायक अब ऋतब्रता बनर्जी के पाले में खड़े हो चुके हैं. इन सभी विधायकों ने एक संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बसु को सौंपने की तैयारी की जा चुकी है। 

ममता के धरने में दिखी कम संख्या
इस अभूतपूर्व टूट के बीच सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा ममता बनर्जी के खेमे का सामने आया है. राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि अब पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ महज 21 विधायक ही शेष बचे हैं. इस दावे को मंगलवार को तब और हवा मिल गई जब कोलकाता के वाई चैनल पर आयोजित ममता बनर्जी के धरने में पूरी पार्टी से सिर्फ 6 विधायक और 5 सांसद ही शामिल होने पहुंचे. विधायकों की इस बेहद कम संख्या ने खुद टीएमसी नेतृत्व को भी गहरे संकट में डाल दिया है। 

ऋतब्रता को विपक्ष का नेता बनाने का दांव
ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाला यह बागी गुट अब पूरी ताकत के साथ विधानसभा में खुद को असली तृणमूल कांग्रेस के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जुट गया है. बागी विधायकों के दस्तखत वाले पत्र के जरिए विधानसभा अध्यक्ष से मांग की जा रही है कि ऋतब्रता बनर्जी को आधिकारिक तौर पर विपक्ष का नेता घोषित किया जाए. इसके साथ ही संदीपान साहा को उप-विपक्ष का नेता और मुर्शिदाबाद के विधायक अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। 

ममता के पास सिर्फ 21 विधायक?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 59 विधायकों के बागी रुख अख्तियार कर लेने के बाद अब आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास सिर्फ 21 विधायक बचे हैं. विधायकों का ये नंबर गेम बताता है कि टीएमसी इस वक्त पूरी तरह से मुश्किलों में घिरी हुई। 

बताया जा रहा है कि टीएमसी के ये बागी विधायक विधानसभा पहुंच गए हैं, जहां वह विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात करेंगे. इसके लिए स्पीकर भी सदन पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि स्पीकर से मुलाकात के दौरान ऋतब्रत नेता प्रतिपक्ष के लिए अपनी बात रखेंगे। 

क्या है बागी विधायकों की मांग
टीएमसी के इन बागी विधायकों की मांग है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी के किसी अन्य बेहद वरिष्ठ नेता को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (लीडर ऑफ अपोजिशन) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए, जिसके लिए उन्होंने ये कड़ा रुख अपनाया है। उधर, टीएमसी के बागी विधायकों में शामिल मुस्तफिजुर रहमान ने कहा कि टीएमसी के 59 विधायकों ने हस्ताक्षर किया है. हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि किसी वरिष्ठ नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखें तो इस अभूतपूर्व बगावत के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास अब केवल 21 वफादार विधायक ही बचे हैं, जिससे पार्टी के पूरी तरह विभाजित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया। 

दिग्गज और अल्पसंख्यक नेताओं की बड़ी बगावत
इस विद्रोह की सबसे खास बात यह है कि इसमें ममता बनर्जी के पुराने और सबसे भरोसेमंद सिपहसालार शामिल हैं. बागी गुट में पूर्व मंत्री जावेद खान, शूलि साहा, वीरभूम के कद्दावर नेता काजल शेख, पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा, मुर्शिदाबाद के विधायक नियामत शेख, सामशेरगंज के विधायक मोहम्मद नूर आलम, उत्तर दिनाजपुर के विधायक गुलाम रब्बानी, डोमजूर के विधायक तापस मैती और हावड़ा मध्य के विधायक अरूप राय जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं. मालदा की विधायक और पूर्व मंत्री साबीना यास्मीन ने खुलेआम ऋतब्रता बनर्जी का समर्थन कर दिया है. इसके अलावा, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों के अधिकांश अल्पसंख्यक विधायक भी इसी बागी गुट के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। 

फर्जी हस्ताक्षर पर छिड़ी कानूनी जंग
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में एक बड़ा
कानूनी मोड़ तब आया, जब अभिषेक बनर्जी की तरफ से विधानसभा भेजे गए एक पत्र पर बागी विधायकों ने अपने फर्जी हस्ताक्षर होने का आरोप लगा दिया. ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने स्पीकर से लिखित शिकायत की है कि विधायकों की मर्जी के बिना उनके दस्तखत का गलत इस्तेमाल किया गया है. इस गंभीर शिकायत के बाद राज्य की सीआईडी (CID) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 

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