मुंबई जाने वालों के लिए खुशखबरी! मध्य प्रदेश में नहीं लेट होंगी ट्रेनें, तीसरी-चौथी लाइन का काम तेज

बुरहानपुर 
 मध्य प्रदेश से मुंबई जाने वाली ट्रेनें अब इटारसी रूट पर नहीं पिटेंगी, साथ ही साथ अब इस रूट की ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी. दरअसल, भुसावल-इटारसी मुबंई रूट की तीसरी और चौथी लाइन का काम शुरू हो गया है. इस लाइन के बनने से इटारसी जंक्शन पर भी दबाव कम होगा और ट्रेनें तेज रफ्तार से मुंबई रूट पर दौड़ेंगी. मुंबई जाने वाले मध्य प्रदेश के यात्रियों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। 

देश के सबसे व्यस्त रेल रूटों में से एक है भुसावल-इटारसी रूट
मध्य प्रदेश से होकर गुजरा इटारसी-भुसावल रूट देश के सबसे व्यस्ततम रेल रूटों में से एक है. इस रेल रूट से रोजाना 50 नियमित और एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं, जबकि 100 से ज्यादा लंबी दूरी की ट्रेनें गुजरती हैं. वर्तमान में दो लाइनें होने के बावजूद इस रूट पर भारी दबाव होता है. यही वजह है कि केंद्र सरकार द्वारा भुसावल-इटारसी के बीच तीसरी व चौथी लाइन बनाने के कार्य को प्राथमिकता दी गई है। 

मुंबई जाने वाली यात्रियों को होगा फायदा
मध्य प्रदेश के इटारसी जंक्शन से होते हुए महाराष्ट्र के मुंबई व अन्य शहरों को जाने वाले यात्रियों को इससे फायदा होगा. तीसरी व चौथी लाइन तैयार होने से ट्रेनों का वेटिंग टाइम कम होगा और तकनीकी समस्या आने या किसी अन्य ट्रेन की देरी की वजह से सारी ट्रेनें प्रभावित नहीं होंगी. इससे सीधे तौर पर यात्रियों को फायदा होगा। 

तीसरी और चौथी लाइन के लिए काम तेज
बुरहानपुर से लगे लालबाग रेलवे स्टेशन से भुसावल-इटारसी रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है. इस रेलवे लाइन में अड़ंगा बन रहे अतिक्रमणों को भी तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुो गई है. शनिवार को चिंचाला क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ सहित जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई को अंजाम देकर तोड़ दिया ह., एसडीएम अजमेर सिंह गौड़, सीएसपी गौरव पाटिल और लालबाग पुलिस, जीआरपी सहित आरपीएफ ने व्यवस्थाओ को संभाला, इस दौरान रेल भूमि की जद में आ रहे मकानों को हटाया गया है। 

बुरहानपुर के रेलवे स्टेशन के पास ग्राम चिंचाला में भी रेलवे और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने रेल भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की. इस दौरान अतिक्रमण करने वाले करीब 17 मकानों को तोड़ा गया. रेलवे प्रशासन ने करीब दो महीने पहले ही प्रभावित लोगों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए थे। 

एसडीएम अजमेर सिंह के मुताबिक, ” रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि अतिक्रमण की जद में आ रही भूमि खाली होने के बाद जल्द ही तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा, इससे रेलवे यातायात को गति मिलेगी, जिन-जिन स्थानों पर अतिक्रमण हुआ है, वहां अतिक्रमण हटाओ मुहीम शुरू हो चुकी है। 

पहली बार मीडिया के सामने आई सोनम रघुवंशी, चुप्पी तोड़ किए कई चौंकाने वाले खुलासे

इंदौर
 राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी और फिलहाल जमानत पर रिहा सोनम रघुवंशी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब दिया है। मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में सोनम ने साफ कहा कि उसके नेपाल भागने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं और लोगों को ऐसी अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय पत्रकारों ने जब उससे सवाल किए तो उसने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान कर रही है और अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन कर रही है। इंदौर लौटने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी सोनम ने फिलहाल कोई संभावना नहीं जताई और कहा कि अभी उसका वहां जाने का कोई मन नहीं है।

लोकेशन बताने से किया इनकार
सोनम ने यह जरूर स्वीकार किया कि वह शिलांग में रह रही है, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने ठिकाने की जानकारी साझा करने से मना कर दिया। आर्थिक खर्च और जीवन-यापन से जुड़े सवालों को भी उसने निजी विषय बताते हुए टाल दिया।

परिवार के आरोपों पर पलटवार
गौरतलब है कि राजा रघुवंशी के बड़े भाई ने हाल ही में आरोप लगाया था कि सोनम देश छोड़कर नेपाल जा सकती है और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए। अब सोनम ने सामने आकर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

जमानत पर कानूनी लड़ाई जारी
सोनम को निचली अदालत से राहत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। जमानत रद्द कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत का फैसला आना बाकी है।

कैसे बना देशभर में चर्चा का विषय यह मामला?
राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों मेघालय पहुंचे थे। इसके बाद उनके अचानक लापता होने से सनसनी फैल गई। बाद में राजा का शव मिलने और जांच में कई चौंकाने वाले खुलासों के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सोनम को भी आरोपी बनाया गया था।

राष्ट्रपति मुर्मु का कूनो दौरा आज, सहरिया आदिवासियों से करेंगी संवाद; चीता सफारी भी रहेगी खास आकर्षण

ग्वालियर
 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार, 22 जून को चीतों की धरती श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में आ रही हैं। राष्ट्रपति यहां सहरिया आदिवासियों की संस्कृति से रूबरू होंगी और उनसे चर्चा भी करेंगी। इसके अलावा कूनो नेशनल पार्क में दो नंबर बाड़ा और तीन-ए बाड़ा में तैयारियां जारी हैं क्योंकि यहां राष्ट्रपति को सफारी का अनुभव कराए जाने का प्रस्तावित है।

तीन-ए बाड़ा में यहां जन्मी चीता मुखी व उसके चार शावक चीते हैं। कूनो में जोर शोर से तैयारियां की जा रही हैं चार हैलीपेड तैयार किए जा चुके हैं और आदिवासियों को चिन्हित भी किया जा रहा है जिन्हें राष्ट्रपति से मिलवाया जाएगा। इसके अलावा चीता मित्र भी इस दौरान मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति 21 जून को ग्वालियर होकर कूनो पहुंच जाएंगी और रात्रि विश्राम यहीं कर 22 जून को यहां विजिट प्रस्तावित है।

बता दें, राष्ट्रपति दौपद्री मुर्मु इन दिनों मप्र के प्रवास पर हैं जिस क्रम में उनका ग्वालियर चंबल आगमन प्रस्तावित है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में उनके आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सहित मैदानी इंतजाम किए जा रहे हैं। चार हैलीपेड तैयार कर दिए गए हैं और 200 बैरीकेड से हद तैयार की जा रही है। श्योपुर पुलिस प्रशासन की ओर से नो फ्लाइंग जोन के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

आदिवासियों को प्रशिक्षण भी मिलेगा
सहरिया आदिवासियों के गांवों की श्योपुर जिले में काफी संख्या है, इन आदिवासियों को पहले चीते को लेकर जागरूक भी किया जा चुका है और कई चीता मित्र की भूमिका भी निभा रहे हैं। ऐसे में कुछ आदिवासियों को चिन्हित कर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति सहरिया आदिवासियों से चर्चा कर सकती हैं। वन विभाग की ओर से वन रक्षकों को भी चीता मित्रों से संपर्क करने के लिए निर्देश मिले हैं।

मुखी चीता को सफारी में देख सकती हैं राष्ट्रपति
जानकारी के अनुसार मादा चीता मुखी को सफारी के दौरान राष्ट्रपति को दिखाया जा सकता है क्योंकि यह पहली भारतीय मादा चीता है। दोनों बाड़ों में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

 

कॉकरोच अभिजीत दीपके को जयपुर में पड़े थप्पड़! प्रदर्शन के दौरान मचा हंगामा, वीडियो वायरल

राजस्थान की राजधानी जयपुर में उस समय हंगामा मच गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को एक युवक ने सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान थप्पड़ मार दिए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक, दीपके पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित प्रदर्शन में शामिल थे। इसी दौरान एक युवक अचानक उनके पास पहुंचा और उन पर थप्पड़ों की बौछार कर दी। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और समर्थकों ने आरोपी को पकड़ लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरा घटनाक्रम कुछ ही सेकंड में हुआ। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दीपके को लगातार कई थप्पड़ मारे गए, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है और घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं इस घटना को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में बहस तेज हो गई है।

फिलहाल, वायरल वीडियो और इस पूरे विवाद को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

“जयपुर में अभिजीत दीपके को पड़े थप्पड़ों का यह मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। इस खबर से जुड़े हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।”

जीआरपी इटारसी को बड़ी सफलता: ट्रेनों में चोरी करने वाला शातिर बदमाश गिरफ्तार, ₹8.52 लाख का माल बरामद

जीआरपी इटारसी को बड़ी सफलता: ट्रेनों में चोरी करने वाला शातिर बदमाश गिरफ्तार, ₹8.52 लाख का माल बरामद

इटारसी। रेलवे यात्रियों को निशाना बनाकर ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक शातिर बदमाश को जीआरपी इटारसी ने गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी के कब्जे से चोरी के मोबाइल फोन, सोने-चांदी के जेवरात सहित कुल 8 लाख 52 हजार रुपये का मशरुका बरामद किया गया है।

जीआरपी द्वारा लगातार मिल रही चोरी की शिकायतों के आधार पर विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर संदिग्ध आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने ट्रेनों में यात्रियों के सामान और कीमती वस्तुओं की चोरी करना स्वीकार किया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से विभिन्न कंपनियों के मोबाइल फोन, सोने-चांदी के आभूषण तथा अन्य चोरी का सामान बरामद किया है, जिसकी कुल कीमत लगभग ₹8.52 लाख आंकी गई है। बरामद सामान को संबंधित मामलों से जोड़कर जांच की जा रही है।

जीआरपी अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी किसी संगठित गिरोह से जुड़ा है या नहीं तथा उसने अन्य स्थानों पर भी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।

जीआरपी इटारसी की इस कार्रवाई से रेलवे यात्रियों में सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ा है। पुलिस ने यात्रियों से यात्रा के दौरान अपने सामान और कीमती वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।

“जनता मूर्ख थोड़ी है…” – शिवराज सिंह चौहान का बड़ा संदेश

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan का एक बयान इन दिनों चर्चा में है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “जनता मूर्ख थोड़ी है कि बार-बार खड़े हो जाओ, गलत बात है ये।”

इस बयान के जरिए उन्होंने साफ संकेत दिया कि लोकतंत्र में जनता सब कुछ देखती और समझती है। नेताओं के वादे, उनके काम और उनकी जवाबदेही पर जनता की नजर रहती है।

चौहान का कहना है कि केवल भाषणों और दावों से जनता को प्रभावित नहीं किया जा सकता। आज का मतदाता जागरूक है और वह अपने अनुभव के आधार पर फैसला करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान लोकतांत्रिक जवाबदेही और जनमत की ताकत को रेखांकित करता है। जनता विकास, सुशासन और ईमानदार प्रयासों को महत्व देती है, जबकि गलतियों और वादाखिलाफी को भी याद रखती है।

आपका इस बयान पर क्या कहना है? क्या आज की जनता पहले से ज्यादा जागरूक और सजग हो चुकी है?

अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।

धन्यवाद।

**जय हिंद।**

सीमाओं की सुरक्षा की तरह महत्वपूर्ण है डेटा की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति डेटा है। डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। डेटा की सुरक्षा, राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में न केवल देश अपितु पूरी दुनिया में सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हर दिन इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं। अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आधुनिक तकनीक और द्रोण जैसे साधनों के उपयोग से सुरक्षा चुनौतियों का नया स्वरूप देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन है। प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता है कि वह समय से पहले आने वाले वाली चुनौतियों को पहचान लेते हैं और शासन-प्रशासन और जन सामान्य को उसके प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम भी उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सायबर अपराध, डीप फेक और अन्य चुनौतियों पर केंद्रित कार्यशाला में सायबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने में सभी मार्ग खोजे जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” पर सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।

सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा सेंटर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से यह रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अटैक की समय पर पहचान और निगरानी में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस सेंटर की महती भूमिका होगी। यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी।

डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था से हितग्राहियों तक पहुंचने लगा है शत-प्रतिशत लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश बदलते दौर में हर तरह की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सायबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस ने अच्छा काम करके दिखाया है। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जीरो बैलेंस पर बैंक अकाउंट खोलने की शुरुआत की। जनधन खाते खुलने से देशभर में जरूरतमंदों को डीबीटी के माध्यम से हितलाभ सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाने लगा। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से शत प्रतिशत लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने लगा। दुनिया ने भारत की यूपीआई पेमेंट सिस्टम का लोहा माना है। ऐसे समय में जब नागरिकों को डिजिटल और ऑनलाइन माध्यम से लाभ पहुंच रहा है तो सरकार पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करने के लिए राज्य सरकार हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है।

सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये आवश्यक प्रबंधन जरूरी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षा के तमाम चाक-चौबंद उपायों के बाद भी अगर जीवनभर की गाढ़ी कमाई एक झटके में कोई सायबर अपराधी उड़ा ले जाए तो दु:ख होता है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। सायबर क्राइम और डेटा सेफ्टी के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। राज्य का डेटा हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। प्रदेश सरकार सायबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये हो रहा निरंतर कार्य : पी.एस. सेल्वेन्द्रन
प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न डिजिटल नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए नागरिकों के व्यक्तिगत, वित्तीय, भूमि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन ने कहा कि इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो सायबर खतरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई से प्रदेश की सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला सायबर सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और मजबूत किया जाएगा।

एमपी-सीईआरटी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से सुदृढ़ हो रही सायबर सुरक्षा व्यवस्था : एम.डी. वशिष्ठ
प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कहा कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटली नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व भी बढ़ा है। नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि एवं संपत्ति सहित विभिन्न शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। एमडी वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से सायबर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों के अनुभवों के आधार पर राज्य के लिए एक मजबूत, प्रभावी और भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने में सहायता मिलेगी।

प्रदेश में 44 सायबर कमांडो और 3 हजार सायबर वॉरियर तैयार किए जाएंगे : एडीजी मनोहर
एडीजी ए. साई मनोहर ने कहा कि सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा आज डिजिटल युग की प्रमुख चुनौतियां हैं। सायबर हेल्पलाइन 1930, त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था और जागरूकता अभियानों के माध्यम से प्रदेश में सायबर अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे अनेक मामलों में नागरिकों की बड़ी राशि सुरक्षित कराई गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ शासकीय डेटा और प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी, आधुनिक निगरानी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही स्कूलों, महाविद्यालयों और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक सायबर जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

एडीजी मनोहर ने बताया कि प्रदेश में सायबर सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए वर्तमान में 6 सायबर कमांडो कार्यरत हैं और 38 अन्य का चयन किया जा चुका है। राज्य सायबर सेल में सिंहस्थ – 2028 से पहले 44 सायबर कमांडो तैयार कर लिए जाएंगे। सिंहस्थ में सायबर अटैक पर बारीकी से नजर रखने और उसे समय रहते प्रतिबंधित करने के लिए लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों एवं युवा स्वयं सेवकों को ‘सायबर वॉरियर’ के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में रोकथाम, जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया ही सबसे प्रभावी उपाय हैं और राज्य नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सायबर अपराध नियंत्रण, आईएफएमआईएस नेक्स्ट जेन परियोजना के माध्यम से सायबर सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और एनआईसीनेट की सायबर सुरक्षा संरचना जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियाँ दीं। इसके अतिरिक्त डिजिलॉकर, एंटिटी लॉकर, एपीआई सेतु एवं यूएक्स4जी, एंड-पॉइंट सुरक्षा, वेब एवं आईटी अवसंरचना की सायबर सुरक्षा स्थिति और सुरक्षित एआई परिवर्तन यात्रा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) की सहभागिता से विषयगत समूह चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान सायबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर 5 समानांतर समूह गठित कर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।समूह चर्चाओं में जोखिम आधारित आकलन एवं सिक्योरिटी निगरानी, राज्य डेटा सेंटर (एसडीसी) एवं स्वान सुरक्षा, लेगेसी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, सुरक्षा-बाय-डिज़ाइन एवं ज़ीरो-ट्रस्ट मॉडल, डेटा वर्गीकरण एवं डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और सायबर सुरक्षा क्षमता निर्माण, जागरूकता और एमपी-सीईआरटी की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने अपने-अपने विभागों में सायबर सुरक्षा से संबंधित वर्तमान व्यवस्थाओं, प्रमुख चुनौतियों, तकनीकी एवं प्रशासनिक अंतरालों और सुधार की संभावनाओं पर विचार साझा किए। समूहों द्वारा राज्य शासन की डिजिटल परिसंपत्तियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएँ भी प्रस्तुत की गईं। चर्चा में सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में विभागीय समन्वय बढ़ाने, जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना विकसित करने और डेटा संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों और डेटा की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ विभिन्न विभागों के बीच सायबर सुरक्षा संबंधी समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना रहा।

सभी समाजों को, उनकी परम्पराओं को जोड़ें, आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव और श्रावण महोत्सव भी मनायें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आगामी छह-सात माह में बड़े त्यौहार, सांस्कृतिक पर्व एवं मेले मनायें जायेंगे। ये सभी त्यौहार हमारी धार्मिक आस्थाओं और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता के प्रतीक हैं। इन सभी अवसरों पर संस्कृति विभाग सभी समाजों को, उनकी आस्थाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को जोड़कर वृहद आयोजन करें। आल्हा-ऊदल वीर रस गायन के प्रतीक हैं, उनकी स्मृति में आयोजन किए जाएं। श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व भी मनाएं। नागपंचमी पर जैव विविधता संरक्षण (सर्प प्रजातियों के संरक्षण) का संदेश दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग लोगों को जोड़कर ऐसे आयोजन करें, जिनसे हमारी कला और संस्कृति के संवर्धन के साथ ही सरकार के संदेश का भी प्रसार हो।

मुख्यमंत्री सोमवार को मंत्रालय में संस्कृति विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, परम्पराएं और समृद्ध पुरातात्त्विक धरोहरें प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास किए जाएं। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सांस्कृतिक अभ्युदय के लिए हमारी सरकार हर जरूरी प्रयास कर रही है। हम समाज को साथ लेकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बैठक में संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किये गये ‘कला पंचांग’ का विमोचन भी किया। इसमें विभाग द्वारा वर्ष भर की जाने वाली कलात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का पूरा कैलेंडर तैयार किया गया है। अब इन्हें सिलसिलेवार क्रियान्वित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का दायरा और तेजी से बढ़ेगा। विभागीय आंतरिक विशेषताओं और विशेषज्ञताओं का समुचित संयोजन करते हुए संस्कृति विभाग की और बेहतर पुनर्संरचना की जाये। विभागीय गतिविधियों का आधुनिक संदर्भों में विस्तार भी किया जाये। उन्होंने कहा कि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग सभी मिलकर काम करें, ताकि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। इससे प्रदेश में उत्कृष्ट कारीगरी से निर्मित होने वाले क्रॉफ्ट आइटम्स, हैंडलूम आइटम्स और कशीदाकारी को भी पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट वीर विक्रमादित्य के नाम से एक पृथक अकादमी का गठन किया जाये। इसमें विक्रमादित्य के जीवनवृत्त पर समग्र शोध एवं अन्य संगत गतिविधियां भी संचालित की जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के बाहर के प्रसिद्ध मंदिरों और देव स्थानों के अतिरिक्त अब प्रदेश में मौजूद 2 ज्योतिर्लिंगों, जागृत एवं मंशापूर्ण शक्ति पीठों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को भी मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इनके निर्माण कार्यों में और अधिक गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों परियोजनाएं धार्मिक आस्था के केंद्र होने के साथ ही प्रदेश के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका कार्य शीघ्र पूर्ण होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक गतिविधियों में जनसहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग की विभिन्न योजनाओं, संरक्षण कार्यों तथा आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाने पर बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के नजदीक जगदीशपुर स्थित पुराने किले की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि इस किले के इतिहास को जीवंत करने और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भविष्य में जल्द ही यहां स्टेट कैबिनेट मीटिंग की जायेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्मे या यहां से निकलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले गायकों, कलाकारों और अन्य जनों की जानकारी एकत्रित कर इन्हें मध्यप्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए राज़ी किया जाये। इससे मध्यप्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक विविधताओं को देश-दुनिया में नई पहचान और एक्सपोजर मिलेगा और अपनी माटी से जुड़कर ऐसे कलाकारों को भी खुशी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्म पुरस्कारों के लिए प्रदेश के कलाकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों के केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर संस्कृति विभाग भी अपनी ओर से अनुशंसा करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं की आर्थिक मदद के लिए एक स्थायी योजना तैयार की जाये, ताकि जरुरतमंदों को शासन की योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा सके।

अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेख़र शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 17 धार्मिक/सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक संस्कृति विभाग के अधीन करीब 4160 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों पर काम जारी हैं। कुछ काम पूरे भी हो चुके हैं। जल्द ही लोकार्पण भी कराया जायेगा। प्रदेश में श्रीराम वन गमन पथ निर्माण पर 160 करोड़ रुपए के काम जारी हैं। महाकाल लोक में मूर्ति स्थापना के कार्य प्रगति पर है। ओरछा में भगवान राम राजा लोक एकदम नये स्वरूप में (छह नई थीम पर) तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के सभी लोकों के नियमित संचालन के लिए स्थायी प्रबंधन भी किये जा रहे हैं। प्रदेश के सभी संगीत महाविद्यालयों और सांची स्थित बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए भी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के नाट्य विद्यालय में विभाग द्वारा डिग्री कोर्सेस चलाये जा रहे हैं। यह विद्यालय इतना प्रसिद्ध है कि अब नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पदाधिकारी विजिट करके यहां उपलब्ध सुविधाओं और कोर्सेस की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि चित्रकूट के समग्र विकास के लिए उत्तरप्रदेश सरकार के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, आयुक्त पुरातत्व मदन नागरगोजे, संचालक, संस्कृति एनपी नामदेव सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में एग्रो सौर पीवी के लिए हुआ एमओयू

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रदेश में एग्रो सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की मंशा पर एक और उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड तथा जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के मध्य सोमवार को मंत्रालय, भोपाल में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। एग्री वोल्टाइक, कृषि एवं सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया एक संगठन है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ उसी खेत में ही सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जिससे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता कम हो, खाद्य सुरक्षा बनी रहे तथा भूमि संबंधी विवादों से भी बचा जा सके। इस काम में जर्मन कम्पनी सरकार को सहयोग देगी। 

यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के अनुरूप राज्य में विशिष्ट एग्रीवोल्टाइक ढांचा विकसित करने, किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग दक्षता सुधारने, उत्पादित ऊर्जा की सुरक्षा सुदृढ़ करने तथा जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी। यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग श्री मनु श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड श्री अमनवीर सिंह बैंस, भारत में जर्मन दूतावास के पदाधिकारी, एग्री वोल्टाइक संगठन से श्री एलेक्जेंडर, जर्मनी की जीआईजेड कम्पनी के पदाधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

एग्री सौर पीवी के तहत सरकार किसानों को सब्सिडी देगी। इससे किसान अपनी जमीन के मालिकाना हकदार होंगे। किसान जमीन में खेती करेंगे और उसी खेत में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित करेंगे। यह किसानों के लिए डबल सौगात होगी। राज्य सरकार और इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना के मध्य हुई इस परस्पर साझेदारी के अंतर्गत कम्पनी द्वारा एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी एवं आर्थिक मूल्यांकन, डिजाइन, वित्तीय व्यवहार्यता और क्रियान्वयन में सहयोग किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, ऊर्जा विकासकर्ताओं, डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनीज (डिस्कॉम) एवं अन्य संबंधित हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कम्पनी द्वारा राज्य में कृषि उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा को संरक्षित रखते हुए उपयुक्त नीतिगत एवं नियामक ढांचा विकसित करने में भी सहयोग किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले जीनानी कम्पनी के पदाधिकारी

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सोमवार को मंत्रालय में बंगलुरू बेस्ड जीनानी डॉट एआई कम्पनी के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। कम्पनी पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र (आईटी सेक्टर) में निवेश करने की मंशा व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कम्पनी पदाधिकारियों से कहा कि वे निवेश के संदर्भ में ठोस परियोजना प्रस्ताव और स्पष्ट रोडमैप लेकर आएं, सरकार कम्पनी की सभी प्रकार की मदद करेगी।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी विभाग श्री एम सेलवेंद्रम, जीनानी डॉट एआई कम्पनी के सह-संस्थापक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी श्री अनंत नागाराज, कम्पनी के हेड ऑफ एआई ट्रांसफार्मेशन (पब्लिक सेक्टर) कर्नल आदिश वाबुमकर (रिटायर्ड) भी उपस्थित थे।

कम्पनी पदाधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर व्यापक संभावनाएं हैं। जीनानी डॉट एआई के विभिन्न मॉडलों को प्रदेश में कृषि, स्वास्य्व, वन, ग्रामीण विभाग और राजस्व विभागों में प्रभावी रूप से लागू कर दक्षता बढ़ाने और नागरिक सेवाओं में सुधार पर विस्तार से काम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी कम्पनी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर काम करती है, जिसमें शासकीय और निजी क्षेत्र शामिल हैं।

 

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