अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें! मध्य प्रदेश से जुड़े 6 साल पुराने मामले ने गिरफ्तारी की आशंका बढ़ाई

जबलपुर /कोलकाता

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति तत्काल ट्रायल कोर्ट को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।यह मामला नवंबर 2020 में कोलकाता की एक राजनीतिक रैली के दौरान भाजपा नेता आकाश विजय वर्गीय को कथित रूप से ‘गुंडा’ कहे जाने से जुड़ा है। इस टिप्पणी के खिलाफ आकाश विजयवर्गीय ने एमपी-एमएलए कोर्ट का रुख किया था। एमपी/एमएलए कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब हाईकोर्ट ने उस राहत को समाप्त करते हुए अंतरिम स्थगन आदेश रद्द कर दिया है।

हाईकोर्ट ने जानें क्यों जताई नाराजगी?
गौरतलब है कि आठ मई को हुई सुनवाई के दौरान भी उनके वकील की अनुपस्थिति पर अदालत ने नाराजगी जताई थी और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगली तारीख पर बहस नहीं होने की स्थिति में अंतरिम राहत जारी नहीं रहेगी।बीते दिनहुई सुनवाई में भी अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। पासओवर के बाद भी जब कोई पक्षकार अदालत में पेश नहीं हुआ तो हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक समाप्त कर दी।

कोर्ट नाराज क्यों हुआ?
मामले की सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह एक सांसद हैं, ऐसे में उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर हाई कोर्ट की बेंच ने 12 नवंबर 2025 को गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी थी।

हालांकि, बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि या वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसे गंभीरता से लेते हुए बेंच ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता खुद ही इस याचिका को आगे बढ़ाने में विशेष रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसलिए गिरफ्तारी वारंट पर लगाई गई अंतरिम रोक हटाई जाती है।

ईडी की अभिषेक से सुनवाई
वहीं, इस मामले के अलावा अभिषेक बनर्जी से ईडी भी पूछताछ कर रही है। बंगाल के कथित शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर 16 जून को उनसे 11 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। इसके अलावा अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो अन्य मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं। अभिषेक बनर्जी को अपने संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, अभिषेक बनर्जी ने साफ कहा है कि वह इन मामलों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के सामने कभी भी सरेंडर नहीं करेंगे। अभिषेक ने दावा किया कि अगर उनका गला भी काट दिया जाए, तब भी वह डरकर पीछे नहीं हटेंगे।

अभिषेक बनर्जी की हो सकती है गिरफ्तारी
अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट पर लगी रोक को हटा दिया है। इससे बनर्जी की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश पुलिस जल्द ही पश्चिम बंगाल जाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। यह भी संभव है कि एमपी पुलिस के ऐक्शन से पहले वह सुप्रीम कोर्ट जाकर राहत की मांग करें।

6 साल पहले कोलकाता में दिया था बयान
सांसद अभिषेक बनर्जी के अरेस्ट वारंट से स्टे हटाते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की कॉपी तुरंत ट्रायल कोर्ट को भेजी जाए। यह मामला 6 साल पुराना है, जब नवंबर 2020 में एक चुनावी रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने आकाश विजयवर्गीय के लिए कथित तौर पर ‘गुंडा’ वाला बयान दिया था। आकाश विजयवर्गीय ने एमपी-एमएलए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे, जिसके बाद अभिषेक बनर्जी ने हाई कोर्ट की शरण ली थी। याचिका में कहा गया था कि वह वर्तमान में एक सांसद हैं, ऐसे में उनके फरार होने की संभावना नहीं है। इस बीच पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेता अभिजीत दास की शिकायत पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले में दो एफआईआर दर्ज की गई है।

बंगाल में ताबड़तोड़ एक्शन
जानकारी के लिए बता दें कि जब से पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनी है, टीएमसी के कई नेताओं के खिलाफ एक्शन हुआ। कई मामलों में आरोपियों की सार्वजनिक परेड भी निकाली गई। बात चाहे पुष्पा उर्फ जहांगीर खान की हो या फिर शाहीन मोल्ला की, प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई। सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

हालांकि, इस तरह की सार्वजनिक परेड को लेकर टीएमसी ने भी विरोध दर्ज कराया है। मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है जहां राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा गया है।

महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक, उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी के लिए प्रेरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक, उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी के लिए प्रेरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल में हो रही वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक की स्थापना, लोकार्पण जल्द ही
समाज के युवाओं को पार्थ योजना से पुलिस एवं सेना में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलायेगी सरकार
स्कूली कक्षाओं में पढ़ाई जायेगी महाराणा प्रताप की जीवनी
महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती पर हुआ राज्य स्तरीय समारोह
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में सहभागिता कर महाराणा प्रताप को अर्पित किए श्रद्धासुमन

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन वीरता, शौर्य, पराक्रम, त्याग का प्रतीक है। उनका नाम स्मरण करते ही मन श्रद्धा से भर जाता है। महाराणा प्रताप ने तमाम कठिनाइयों के बीच भी ‘राष्ट्र प्रथम’ को सर्वोपरि रखा। समाज का हर वर्ग देश की अस्मिता और आत्म सम्मान के लिए महाराणा प्रताप को एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में देखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि महाराणा प्रताप सिर्फ़ एक राजा नहीं, स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति के अनुपम प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साहस और वीरता मनुष्य का आभूषण है। यह पराक्रमी राजा का नैसर्गिक गुण होता है। महाराणा प्रताप वीरता के पर्याय हैं। उन्होंने जीवन में अनेक कष्ट सहे, पर अपने लक्ष्य से कभी भी विचलित नहीं हुए। उनका जीवन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर भोपाल के महाराणा प्रताप नगर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में यह उद्गार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिसोदिया-राजपूत-क्षत्रिय समुदाय द्वारा आयोजित इस सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता कर महान योद्धा महाराणा प्रताप को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज के प्रतिभाशाली डाक्टर, युवाओं, खिलाड़ियों और समाजसेवियों को मंच से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन किया है और आज इसी बोर्ड के माध्यम से यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम किया गया है। हमारी सरकार महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करते हुए इसे और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सेना और पुलिस बल में युवाओं की भर्ती के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से “पार्थ योजना” की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत तैयारी कर रहे युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश के अधिकांश जिले इस योजना के दायरे में ले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि क्षत्रिय समाज के सभी युवाओं को भी इसी योजना में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटर्नशिप की व्यवस्था और समायोजन के लिए भी प्रभावी पहल की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराणा प्रताप लोक निर्माण का शेष कार्य तेजी से पूरा कराकर इसका बहुत जल्द लोकार्पण किया जाएगा। म.प्र.पर्यटन विकास निगम और महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के समन्वय से सरकार महाराणा प्रताप के स्वर्णिम अतीत को दुनिया के सामने लाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि

मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जिसने महाराणा प्रताप की जयंती पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की जीवनी अब स्कूलों में पढ़ाई जायेगी। हम महाराणा प्रताप के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने जा रहे हैं। इससे हमारी भावी पीढ़ी महाराणा की वीरता और देशभक्ति से प्रेरणा लेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सभी देशों में अपना अग्रणी स्थान बना रहा है। हमारी सरकार विरासत से विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए भारत के गौरवशाली अतीत को दुनिया के सामने लाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप अद्वितीय वीरता, शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणा स्त्रोत हैं। आज इस जयंती समारोह में महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के बैनर तले संपूर्ण क्षत्रिय समाज एक मंच पर आया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अत्यंत बलशाली महाराणा प्रताप का कवच 72 किलो और भाला 80 किलोग्राम वजनी था। यह उनके अद्भुत व्यक्तित्व का परिचायक है। उन्होंने हर युद्ध में महान शौर्य दिखाया। महाराणा प्रताप के घोड़े “चेतक” के साथ उनके लगाव की कहानियां सुनकर मन रोमांचित हो जाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ की स्थापना कर विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से उनके उत्कृष्ट जीवन से दुनिया का परिचय कराया है। युवाओं को सम्राट विक्रमादित्य पर शोक के लिए फैलोशिप प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही उज्जैन में मां क्षिप्रा के किनारे शहीद दुर्गादास राठौर का भव्य संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमें गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का जो संकल्प दिया है, उसकी प्रेरणा हमें महाराणा प्रताप से ही मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराणा प्रताप के संघर्षमय जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मातृभूमि, संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया , परंतु विकट विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया। इतिहास गवाह है कि महाराणा प्रताप को जीवन के कठिनतम समय में घास की रोटियां तक खानी पड़ीं, तब भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। अपने नाम के अनुरूप वे सचमुच प्रतापी थे। उनका गौरवशाली व्यक्तित्व भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अमर रहेगा। मुख्यमंत्री ने देश-प्रदेश के युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन एक प्रकार से प्रदेश में शौर्य की स्थापना करने जैसा है। कुछ व्यक्तित्व समय, युग और जाति के साथ नहीं बंधते हैं। वे सदैव मानव कल्याण, स्वाभिमान और देश के कल्याण के लिए होते हैं। महाराणा प्रताप ने कल्याण बोर्ड बनाकर एक महान वीर के गुणों से परिचित कराने का प्रशंसनीय कार्य किया है। देश के कई राज्य मध्यप्रदेश की योजनाओं का अनुसरण कर रहे हैं। महाराणा प्रताप के समान ही छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह ने भारतीय इतिहास में बलिदान और वीरता का नया इतिहास गढ़ा। आज देश में रामराज्य का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी महाराणा प्रताप की तरह कभी किसी के सामने झुकते नहीं हैं। उन्हें दुनिया के कई देशों ने अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कभी समझौता नहीं किया। हल्दी घाटी के भीषण युद्ध के बाद उन्होंने जंगल में रहकर घास की रोटियां खाईं, लेकिन अपने जीवन में पराधीनता स्वीकार नहीं की। अकबर भी उनकी वीरता का कायल था। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए महाराणा प्रताप के जीवन मूल्य युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

म.प्र. महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केशव सिंह भदौरिया ने कहा कि महाराणा प्रताप की जीवन एक विचार की तरह है, जो कभी खत्म नहीं हो सकता है। महाराणा प्रताप ने अपने समय में अकबर जैसे मुगल शासकों से समझौता नहीं किया और जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने घास की रोटियां तक खाकर अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य किया। हल्दीघाटी का युद्ध उनकी वीरता का प्रतीक है। राज्य सरकार ने महाराणा प्रताप के प्रेरक प्रसंग पाठ्यक्रम में शामिल किए हैं। यह एक वंदनीय प्रयास है। क्षत्रिय युवाओं को शस्त्र बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।

इस राज्य स्तरीय समारोह में खेल एवं युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, राहुल कोठारी, अरविन्द सिंह भदौरिया, जयपाल सिंह, सत्येंद्र भूषण सिंह, राजपाल सिंह और बालाजी जसवंत सिंह, महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अन्य पदाधिकारी, समाजजन एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

 

MP में 7 साल पुराना OBC आरक्षण विवाद निर्णायक मोड़ पर, 24 जून से हाई कोर्ट में नियमित सुनवाई

 जबलपुर
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और सात वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद मामले में अब सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ ने मामले की गंभीरता और इससे प्रभावित हजारों अभ्यर्थियों के हितों को देखते हुए 24 जून 2026 से प्रतिदिन सुनवाई (डे-टू-डे हियरिंग) करने का फैसला लिया है।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की विशेष युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण मामले में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी। इस दौरान ओबीसी आरक्षण विवाद से संबंधित 91 याचिकाएं और संबद्ध प्रकरण सूचीबद्ध थे।

सुनवाई के दौरान ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय से मुख्य याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने वैकल्पिक रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश के संदर्भ में अंतरिम आदेशों को निरस्त करने से जुड़े लंबित आवेदनों पर विचार करने की मांग भी रखी।

अधिवक्ता ठाकुर ने दलील दी कि आरक्षण विवाद के कारण बड़ी संख्या में शासकीय नियुक्तियां वर्षों से लंबित हैं और हजारों अभ्यर्थी करीब सात साल से अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में मामले का शीघ्र निराकरण आवश्यक है।

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पहली बार उनके समक्ष सूचीबद्ध हुआ है और सभी पक्षों को विस्तृत सुनवाई का समुचित अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने व्यापक और बहुस्तरीय विवाद का न्यायसंगत समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएं।

इसी को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने 24 जून से प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि नियमित सुनवाई से लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है और नियुक्तियों का रास्ता भी साफ हो सकता है।

    ओबीसी आरक्षण विवाद से राज्य की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाएं, चयन सूचियां व हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। लिहाजा, अब निगाहें जाहिर तौर पर 24 जून पर टिकी हैं, जब हाई कोर्ट इस बहुप्रतीक्षित मामले की नियमित सुनवाई आरंभ करेगा। उम्मीद की जा रही है कि लगातार सुनवाई से वर्षों से लंबित इस संवेदनशील संवैधानिक विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति हो सकेगी।

    -संदीप जैन, अधिवक्ता, मप्र हाई कोर्ट।

 

भोपाल बार संघ चुनाव में बड़ा झटका, नामांकन फीस 75% तक बढ़ी; प्रत्याशियों का बजट बिगड़ा

भोपाल
 राजधानी भोपाल बार संघ चुनाव इस बार प्रत्याशियों के लिए बेहद खर्चीला साबित हो रहा है, क्योंकि विभिन्न पदों की नामांकन फीस में 42% से लेकर रिकार्ड 75% तक की भारी वृद्धि की गई है। इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्धि (75%) सह-सचिव, कोषाध्यक्ष और पुस्तकालयाध्यक्ष के पदों पर देखी गई है, जिनकी फीस सीधे 20 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये कर दी गई है। वहीं सबसे बड़े यानी अध्यक्ष पद के लिए भी दो वर्ष पहले की तुलना में सीधे 42.85% (15,000 रुपये) का इजाफा किया गया है।

फीस में की गई यह बेतहाशा बढ़ोतरी
इस समय कोर्ट परिसर में उम्मीदवारों और वकीलों के बीच चर्चा और आक्रोश का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती इस बढ़ोतरी पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रियनाथ पाठक ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस प्रकार चुनाव लड़ने के लिए नामांकन शुल्क में 50 से 75 फीसदी तक की वृद्धि की गई है, उससे सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि जो अधिवक्ता आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनके लिए अब चुनाव लड़ना बेहद मुश्किल काम हो गया है।

इसके कारण कई योग्य उम्मीदवार चुनाव मैदान से दूर रहने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं, सचिव पद (जिसमें 60% की वृद्धि हुई है) का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी अनुराग दुबे ने भी इस बढ़ी हुई फीस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे उम्मीदवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है।

नियमों को ताक पर रख उड़ाई जा रही आचार संहिता की धज्जियां
चुनाव का प्रचार और जनसंपर्क कोर्ट परिसर में बहुत तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके साथ ही चुनावी आचार संहिता के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक कोर्ट परिसर के भीतर किसी भी तरह के झंडे, बैनर या पोस्टर लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद, सख्त हिदायतों और पाबंदियों को ताक पर रखकर पूरे परिसर को प्रचार सामग्री से पाट दिया गया है। कोर्ट परिसर की दीवारों, खंभों और दरवाजों पर प्रत्याशियों के पोस्टर और झंडे साफ नजर आ रहे हैं, जिससे आचार संहिता का खुला उल्लंघन दिखाई दे रहा है।

क्यों बढ़ानी पड़ी फीस?
इस बार बारिश के मौसम को देखते हुए वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था करनी होगी, जिसके कारण टेंट का खर्च काफी महंगा होने वाला है। इसके अलावा, समय के साथ स्टेशनरी की लागत भी बढ़ गई है। कुल मिलाकर विगत दो वर्षों में महंगाई में काफी ज्यादा इजाफा हुआ है, इसी व्यावहारिक कारण से इस बार नामांकन फीस में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है।” वासु वासवानी, मुख्य चुनाव अधिकारी, भोपाल बार काउंसिल।

विभिन्न पदों के लिए निर्धारित नामांकन फीस की तुलनात्मक तालिका

पद का नाम -वर्तमान निर्धारित फीस -दो वर्ष पहले की फीस- सीधे हुई बढ़ोतरी -कुल प्रतिशत वृद्धि (%)

अध्यक्ष- 50,000 रुपये -35,000 रुपये- 15,000 रुपये- 42.85% की वृद्धि

उपाध्यक्ष- 45,000 रुपये -30,000 रुपये- 15,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि

सचिव- 40,000 रुपय -25,000 रुपये- 15,000 रुपये- 60.00% की वृद्धि

सह-सचिव- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि

कोषाध्यक्ष- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि

पुस्तकालयाध्यक्ष-35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि

वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-15,000 रुपये- 10,000 रुपये- 5,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि

कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-7,500 रुपये- 5,000 रुपये- 2,500 रुपये- 50.00% की वृद्धि। 

सड़क हादसों में MP के युवा सबसे ज्यादा शिकार, हर दिन 283 एक्सीडेंट; चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने

भोपाल
 राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से रोजाना सड़क हादसों की खबरें सामने आती हैं. तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है. अब सड़क दुर्घटनाओं को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में प्रदेश में 1 लाख 3 हजार से ज्यादा लोग सड़क हादसों का शिकार हुए हैं। 

प्रदेश भर में हर दिन औसतन 283 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए. सबसे चिंता की बात यह है कि इन हादसों का सबसे बड़ा शिकार युवा वर्ग बन रहा है. करीब 61 प्रतिशत युवा सड़क दुर्घटनाओं के शिकार बन रहे हैं। 

सड़क दुर्घटना की भेंट चढ़ रहे एमपी के युवा
मध्य प्रदेश में सड़कों पर बढ़ती रफ्तार अब लोगों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि मई 2025 से 2026 तक में 1 लाख 3 हजार 294 सड़क दुर्घटना हुई हैं, जिनमें चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और इनमें शामिल युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है। 

हादसों में किस उम्र वर्ग के कितने प्रतिशत लोग

    16 से 30 वर्ष आयु – 61 प्रतिशत
    31 से 45 वर्ष आयु – 24 प्रतिशत
    46 से 60 वर्ष आयु – 9 प्रतिशत
    अन्य आयु वर्ग – 6 प्रतिशत

108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने कहा, “मेरी टीम हर आपात स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर पहुंचकर लोगों की जान बचाने का प्रयास करती है. हर कॉल मेरे लिए किसी की जिंदगी बचाने का अवसर होती है. टीम का प्रयास रहता है कि कम से कम समय में घटनास्थल पर पहुंचकर मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। 

108 सेवा उपयोग करने की अपील
उन्होंने आगे लोगों से अपील करते हुए कहा, “किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में निजी वाहन के बजाय 108 एंबुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहता है, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज को आवश्यक उपचार देना शुरू कर देता है। 

108 एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रफ्तार की सनक लोगों पर कितनी भारी पड़ रही है. हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले एक साल में एक लाख तीन हजार से अधिक घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन सड़क पर कुछ सेकंड की लापरवाही किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि रफ्तार नहीं, जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जाए. क्योंकि मंजिल तक पहुंचना जरूरी है, लेकिन सुरक्षित पहुंचना उससे भी ज्यादा जरूरी है। 

राष्ट्रपति मुर्मू आज ओंकारेश्वर पहुंचेंगी, हाई अलर्ट पर प्रशासन; छावनी में तब्दील हुई तीर्थ नगरी

ओंकारेश्वर 

महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश दौरे पर होंगी, जिसमें से 18 और 19 जून को वे ओंकारेश्वर में होंगी।  राष्ट्रपति के दौरे को लेकर तीर्थ नगरी पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील हो गई है. जिला प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है. कार्यक्रम स्थल, मंदिर परिसर, हेलीपेड, वीआईपी मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। 

ओंकारेश्वर रहेगा नो-ड्रोन एरिया
कलेक्टर ऋषव गुप्ता द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ” 17 से 19 जून तक संपूर्ण ओंकारेश्वर क्षेत्र और कोठी हेलीपेड के आसपास दो किलोमीटर का दायरा ‘नो-ड्रोन जोन’ घोषित किया गया है. इस अवधि में किसी भी प्रकार के ड्रोन या ड्रोन कैमरे के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। 

इन वस्तुओं के साथ कार्यक्रम स्थल में प्रवेश प्रतिबंधित
सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन, धारदार हथियार, पानी की बोतलें, ज्वलनशील पदार्थ, पटाखे, लाठी-डंडे, छाते, औजार, तंबाकू उत्पाद, बैग, झोले तथा अन्य संदिग्ध सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. सभी आगंतुकों को सुरक्षा जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा। 

तीन दिन बदली रहेगी ओंकारेश्वर में यातायात व्यवस्था
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए 17 जून से 19 जून दोपहर 12 बजे तक विशेष यातायात व्यवस्था लागू रहेगी. इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा, जिससे ओंकारेश्वर क्षेत्र में यातायात का दबाव कम रहे और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। 

श्रद्धालुओं के लिए विशेष पार्किंग व्यवस्था
इंदौर, खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को ट्रेंचिंग ग्राउंड (नया बस स्टैंड) और ताम्रकर (गणेश नगर) पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा. यहां से श्रद्धालुओं को पैदल मंदिर और घाट क्षेत्र तक जाना होगा. वही, बसों की पार्किंग मोरटक्का में रहेगी, जहां से प्रशासन द्वारा विशेष परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 

राष्ट्रपति के काफिले के दौरान रहेगा नो-व्हीकल जोन
राष्ट्रपति के काफिले के आवागमन के दौरान सुरक्षा कारणों से निर्धारित मार्गों पर अस्थाई रूप से नो-व्हीकल जोन लागू किया जाएगा. राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात को पुनः सामान्य कर दिया जाएगा। 

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जिला प्रशासन और यातायात पुलिस ने श्रद्धालुओं तथा स्थानीय नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे निर्धारित पार्किंग और डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, प्रतिबंधित सामग्री साथ न लाएं और यात्रा के लिए पर्याप्त समय लेकर निकलें। 

भारी वाहनों का रूट बदला गया
    इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले भारी मालवाहक वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा।

    इंदौर से खंडवा जाने वाले भारी वाहन तेजाजी नगर, महू, मानपुर, धामनोद, खरगोन, भीकनगांव और देशगांव होते हुए खंडवा जाएंगे।

    सिमरोल से आने वाले वाहन मंडलेश्वर, कसरावद, खरगोन, भीकनगांव और देशगांव होकर खंडवा पहुंचेंगे।

    बड़वाह से आने वाले वाहन मंडलेश्वर, कसरावद, खरगोन और भीकनगांव के रास्ते खंडवा जाएंगे।

    खंडवा से इंदौर जाने वाले भारी वाहन भीकनगांव, खरगोन और कसरावद होकर जाएंगे।

    मंडलेश्वर से आने वाले वाहन कसरावद और खलघाट के रास्ते इंदौर पहुंच सकेंगे।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
18 और 19 जून को ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को निर्धारित पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा।

    इंदौर की ओर से आने वाले छोटे और मध्यम वाहन बड़वाह, मोरटक्का, सनावद और इनपुन होते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड और ताम्रकर पार्किंग तक जाएंगे।

    खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले वाहन भी सनावद और इनपुन के रास्ते इन्हीं पार्किंग स्थलों तक पहुंचेंगे

    पार्किंग से श्रद्धालुओं को पैदल दर्शन और स्नान के लिए जाना होगा।

बसों के लिए व्यवस्था

    इंदौर और खंडवा से आने वाली श्रद्धालुओं की बसें मोरटक्का में पार्क की जाएंगी।

    वहां से प्रशासन द्वारा लोक परिवहन के जरिए श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर पहुंचाया जाएगा।

    नियमित रूट की बसों को सनावद और इनपुन होते हुए पी-01 पार्किंग तक भेजा जाएगा। इसके आगे पैदल जाना होगा।

    कुछ समय के लिए रास्ते बंद रह सकते हैं।

कुछ मार्ग नो व्हीकल जोन रहेंगे

राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ मार्गों को अस्थायी रूप से नो व्हीकल जोन बनाया जाएगा। राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात सामान्य कर दिया जाएगा।

प्रशासन की अपील
पुलिस और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं एवं आम लोगों से ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था का पालन करने तथा यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने की अपील की है।

महाराणा प्रताप जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बड़ी घोषणा, “महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड” का गठन

महाराणा प्रताप जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बड़ी घोषणा, “महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड” का गठन

महाराणा प्रताप जयंती के पावन अवसर पर Mohan Yadav ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण पहल की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा “महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड” का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य समाज के कल्याण और विकास के लिए प्रभावी कार्य करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि युवाओं को सेना एवं पुलिस भर्ती के लिए बेहतर अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से “पार्थ योजना” संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से युवाओं को व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे भर्ती प्रक्रियाओं में सफल हो सकें।

इसके अलावा, युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था की गई है। साथ ही, इंटर्नशिप के बाद उनके समायोजन और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए भी सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड” के गठन, “पार्थ योजना” के माध्यम से सेना-पुलिस भर्ती प्रशिक्षण तथा युवाओं के लिए इंटर्नशिप एवं समायोजन संबंधी पहल की जानकारी दी।

Rahul Gandhi ने कोटा कार्यक्रम के बाद ट्रेन से दिल्ली रवाना होते समय लोगों का किया अभिवादन

Rahul Gandhi ने कोटा कार्यक्रम के बाद ट्रेन से दिल्ली रवाना होते समय लोगों का किया अभिवादन

कोटा में आयोजित कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संबोधित करने के बाद कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुए। रेलवे स्टेशन पर मौजूद कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम नागरिकों ने उनका उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

दिल्ली के लिए प्रस्थान करते समय राहुल गांधी ने ट्रेन से हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन स्वीकार किया और उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। इस दौरान समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग उन्हें विदा करने स्टेशन पहुंचे और उनके समर्थन में नारे लगाए।

कार्यक्रम के बाद यह आत्मीय दृश्य कार्यकर्ताओं और आम जनता के साथ राहुल गांधी के जुड़ाव को दर्शाता है। स्टेशन परिसर में मौजूद लोगों ने उनके प्रति अपना स्नेह और समर्थन व्यक्त किया, जबकि राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन किया।

कोटा कार्यक्रम के बाद ट्रेन से दिल्ली रवाना होते समय राहुल गांधी ने स्टेशन पर मौजूद समर्थकों और आम नागरिकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। उत्साह और जोश से भरे इस पल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

पूर्व मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू जी की जयंती पर श्रद्धांजलि

पूर्व मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू जी की जयंती पर श्रद्धांजलि

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रख्यात राष्ट्रनेता कैलाशनाथ काटजू जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।

अपने दूरदर्शी नेतृत्व, उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता एवं जनसेवा के प्रति समर्पण से उन्होंने प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री तथा विभिन्न राज्यों के राज्यपाल के रूप में उनकी सेवाएं भारतीय लोकतंत्र और सुशासन की अमूल्य धरोहर हैं।

उनके आदर्श, विचार और राष्ट्रसेवा का भाव हमें सदैव जनहित, लोककल्याण एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों के लिए प्रेरित करता रहेगा।

— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश सरकार।

नीट परीक्षा के सुचारु एवं पारदर्शी आयोजन के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध

नीट परीक्षा के सुचारु एवं पारदर्शी आयोजन के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नीट परीक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में है। परीक्षा के निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि परीक्षार्थियों की सुविधा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। परीक्षा केंद्रों तक उनके सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। साथ ही आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

राज्य सरकार परीक्षा प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए संबंधित विभागों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सतत समन्वय बनाए हुए है।

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