MP में ‘सनातन’ मुद्दे पर आमने-सामने आए किन्नरों के दो गुट, अशोकनगर में किन्नर गुरु के घर पुलिस तैनात

अशोक नगर.

जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच चल रहा वर्चस्व का विवाद अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। काजल ठाकुर और चांदनी नायक ग्रुप के बीच शुरू हुई यह लड़ाई अब केवल इलाकों (गुरु गद्दी) के बंटवारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सनातन बनाम गुरु-शिष्य परंपरा और जातिगत बयानों का एंट्री हो चुकी है।

एक ओर जहां काजल ठाकुर ने इस पूरे मामले को सनातन धर्म से जोड़कर नया मोड़ देने का प्रयास किया है, वहीं अशोकनगर की किन्नर गुरु चांदनी नायक ने पलटवार करते हुए कहा है कि किन्नर की कोई जाति या धर्म नहीं होता, किन्नर की स्वयं किन्नर ही जाति होती है और वे सभी धर्मों का सम्मान करती हैं।

सनातन में वापसी के आग्रह से सुलग उठी विवाद की चिंगारी
मिली जानकारी के अनुसार, कुछ समय पूर्व काजल ठाकुर ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए कई स्थानीय किन्नरों को अपने गुट में शामिल कर लिया था। इसके साथ ही उन्होंने सभी किन्नरों से सनातन धर्म में वापसी करने का आग्रह किया। जब यह मामला प्रदेश के किन्नर समाज के बीच पहुंचा, तो गुरु-शिष्य की सदियों पुरानी परंपरा को बचाए रखने के लिए अशोकनगर की किन्नर गुरु चांदनी नायक ने सबसे पहले मोर्चा खोला और काजल ठाकुर का जमकर विरोध किया। इस विरोध से बौखलाई काजल ठाकुर ने चांदनी नायक पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘जिहादी’ तक कह डाला। इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए चांदनी मौसी ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल अपनी परंपरा को बचाना है।

अशोक नगर में दी गई थी मारपीट की धमकी, तैनात रहा पुलिस बल
विवाद इस कदर बढ़ा कि करीब 15 दिन पहले काजल ठाकुर द्वारा अशोकनगर आकर किन्नर गुरु चांदनी नायक के साथ मारपीट करने की धमकी दी गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चांदनी नायक ने तत्काल अशोकनगर पुलिस और जिला प्रशासन से लिखित शिकायत कर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए किन्नर गुरु को पुलिस प्रोटेक्शन मुहैया कराया और उनके निवास पर पुलिस बल तैनात कर दिया। हालांकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के चलते फिलहाल अशोकनगर में ऐसी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।

इंदौर में झमाझम बारिश से बदला मौसम, 27 जून के बाद पूरे MP में मानसून की दस्तक के आसार

इंदौर.

प्रशांत महासागर में अलनीनो अब सामान्य स्थिति से पाजिटिव में तब्दील हो चुका है। समुद्र तल गर्म होने के कारण इसका दक्षिणी पश्चिमी मानसून पर असर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि भारत में अभी मानसून की गति पर ब्रेक लगने जैसी स्थिति दिखाई दे रहा है।

वहीं, शनिवार दोपहर को शहर में तेज बारिश हुई। इससे सड़कों पर पानी बह निकला और मौसम सुहावना हो गया। विगत वर्षो में 19 जून तक जो मानसून इंदौर सहित मप्र तक पहुंच जाता था। इस बार मानूसन उड़ीसा झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ के मुहाने पर ही अटका हुआ है। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के विज्ञानियों के मुताबिक 23 जून तक छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने की संभावना है। ऐसे में जून के अंतिम सप्ताह में 27 जून के आसपास ही मप्र में मानूसन के प्रवेश करने की संभावना है।

प्रदेश में 45 प्रतिशत कम हुई है वर्षा
प्रदेश में जून माह के 19 दिनों में वर्षा (Rain in Madhya Pradesh) लगभग नदारद ही रही है। प्रदेश में प्री मानसून सीजन (Pre Monsoon in MP) में अब तक 45 फीसद कम वर्षा हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों के जिले ज्यादा प्रभावित है। पूर्वी मप्र में 45 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वही पश्चिमी मप्र में 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई।

इंदौर में बादल के साथ हल्की बूंदाबांदी के आसार
इंदौर शहर में दोपहर में निकली धूप ने शहरवासियों को परेशान किया। दिन में हल्के बादल भी छाए। शुक्रवार को शहर में अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जाएगा। वही न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शुक्रवार को शहर में बादल छाएंगे और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है।

दतिया के पीतांबरा पीठ पहुंचे CM योगी और डिप्टी CM मौर्य, विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

दतिया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को दतिया पहुंचे। जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ में मां बगलामुखी के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने पीतांबरा पीठ परिसर में स्थित महाभारत कालीन वानखंडेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक भी किया। इस दौरान पीठ के पुजारियों ने मंत्रोच्चार के बीच योगी से जलाभिषेक कराया।

एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से हुई अगवानी
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष विमान से दतिया एयरपोर्ट पहुंचे। यहां पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, शिमला विधायक प्रदीप अग्रवाल कलेक्टर स्वप्निल वानखडे व एसपी मयूर खंडेलवाल सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी कर स्वागत किया। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने पार्टीजन से भी मिले। इसके बाद सीधे पीतांबरा पीठ पहुंचे, जहां मंदिर प्रबंधन एवं पुजारियों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई।

पूजा-अर्चना कर ललितपुर हुए रवाना
पीताम्बरा पीठ में दर्शन एवं पूजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद मुख्यमंत्री कुछ समय तक मंदिर परिसर में रहे तथा वहां स्थित अन्य मंदिरों के भी उन्होने दर्शन किए। दर्शन और पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दतिया से उत्तर प्रदेश के ललितपुर के लिए रवाना हो गए। योगी की सुरक्षा के मद्देनजर पीठ के आसपास की दुकानें भी बंद रही।

मौर्य भी पहुंचे दतिया
वही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य भी शनिवार सुबह दतिया पहुंचे। जहां उन्होंने सुबह पीतांबरा पीठ पर दर्शन पूजन किया। इसके बाद वह वापस रतन महल होटल पहुंचे, जहां से अगले गंतव्य के लिए रवाना हुए। दोनों दिग्गज नेताओं की इस दौरान आपस में मुलाकात नहीं हो सकी।

पन्ना की मेडिकल छात्रा की संदिग्ध मौत से हड़कंप, नाराज छात्रों ने किया जमकर हंगामा

जबलपुर/प्रयागराज.

यूनाइटेड इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज में पढ़ने वाली छात्रा सृष्टि मिश्रा की संदिग्ध दशा में मौत हो गई। इससे नाराज छात्रों ने हंगामा किया। मौके पर पुलिस पहुंची, लेकिन भीतर नहीं घुसने दिया गया।

मेडिकल कालेज की ओर से कहा गया है कि छात्रा को थायराइड की समस्या थी और मिर्गी के दौरे पड़ते थे। सृष्टि मिश्रा मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रहने वाली थी।

छात्रा हास्टल के एक कमरे में सोई हुई थी
वह एमबीबीएस फाइनल इयर की छात्रा थी। संस्थान के हास्टल में रहकर पढ़ाई करती थी। छात्रा शुक्रवार रात हास्टल के एक कमरे में सोई हुई थी।

छात्रा के पिता अनुराग मिश्रा के आने का इन्तजार
इसी दौरान उसकी संदिग्ध दशा में मौत हो गई। एयरपोर्ट थाना के प्रभारी राजेश उपाध्याय का कहना है कि छात्रा के पिता अनुराग मिश्रा के आने का इन्तजार किया जा रहा है। शव का पोस्टमार्टम करवाकर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

21 साल बाद MP में लौटेंगी सरकारी बसें, इंदौर से होगी सेवा की शुरुआत

भोपाल.

मध्यप्रदेश के लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी कंपनी की बसें दोबारा सड़कों पर दौड़ने जा रही हैं। इसकी शुरुआत इंदौर से जुलाई-अगस्त 2026 में प्रस्तावित है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ई-बस सेवा (PM E-Bus Service) के तहत इंदौर शहर में 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी जुलाई महीने से शुरू करने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जून को मंत्रालय में मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक ली थी। इस बैठक में प्रदेश की नई परिवहन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने नई परिवहन व्यवस्था को लेकर प्रेजेंटेशन दिया। इसमें बताया गया कि प्रदेश को सात परिवहन क्षेत्रों में बांटा जाएगा। इनमें इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा शामिल हैं।

इंदौर से होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत
बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना और PM ई-बस सेवा के तहत बसों का संचालन सबसे पहले इंदौर क्षेत्र से शुरू किया जाएगा। इंदौर क्षेत्र के अंतर्गत इंदौर संभाग के सभी जिले और इंदौर स्थित अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (AICTSL) मिलकर बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इंदौर से मध्यप्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाले इंटरसिटी मार्गों पर बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा इंदौर शहर में सिटी बस सेवा को भी मजबूत किया जाएगा। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जाने वाले अंतरराज्यीय मार्गों पर भी अनुबंध के अनुसार बसों का संचालन किया जाएगा।

PM ई-बस सेवा के तहत इंदौर में चलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें
प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार इंदौर शहर में PM ई-बस सेवा की 150 इलेक्ट्रिक बसें जुलाई 2026 से चलाने का प्रस्ताव है। इन बसों का उद्देश्य शहर में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना और यात्रियों को आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

सात क्षेत्रों में 620 मार्गों पर चलेंगी 2432 बसें
बैठक में बताया गया कि सात क्षेत्रीय मुख्यालयों के शहरों से प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों तक जाने वाले कुल 620 मार्गों की पहचान की गई है। इन मार्गों पर कुल 2432 बसों के संचालन की योजना बनाई गई है। इंदौर क्षेत्र के लिए प्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाले 121 मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर कुल 608 बसें संचालित की जाएंगी।

इंदौर में सिटी बस सेवा का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सातों क्षेत्रीय मुख्यालयों में सिटी बस सेवा भी संचालित की जाएगी। इन बसों को केवल शहर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आसपास के महत्वपूर्ण उपनगरीय क्षेत्रों तक भी चलाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिल सके। इंदौर में शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए कुल 28 सिटी बस मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर PM ई-बस सेवा की 150 बसों को मिलाकर कुल 784 बसें चलाने की योजना है।

चार राज्यों के लिए चलेंगी अंतरराज्यीय बसें
इंदौर क्षेत्र से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जाने वाले मार्गों के लिए भी बस सेवा शुरू की जाएगी। इन राज्यों के लिए कुल 101 अंतरराज्यीय मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर 276 बसों का संचालन अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (AICTSL) द्वारा किया जाएगा। इस तरह इंदौर से शुरू होने वाली इंटरसिटी, सिटी और अंतरराज्यीय बस सेवाओं को मिलाकर कुल 250 मार्गों पर 1688 बसें संचालित करने की योजना है।

पूरे प्रदेश में 1164 मार्गों पर चलेंगी 5206 बसें
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश के सातों क्षेत्रों में सभी श्रेणी की बस सेवाओं के लिए कुल 1164 मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर कुल 5206 बसों का संचालन किया जाएगा। अन्य छह क्षेत्रीय मुख्यालयों से भी इंदौर की तरह बस सेवा शुरू की जाएगी। संबंधित क्षेत्रीय कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी।

निजी बस संचालकों पर नहीं पड़ेगा असर
बैठक में स्पष्ट किया गया कि नई सरकारी बस सेवा शुरू होने से वर्तमान निजी बस संचालकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मोटरयान अधिनियम 1988 के प्रावधानों के अनुसार योजना लागू की जाएगी। निजी बसों के वर्तमान अनुज्ञा-पत्र पहले की व्यवस्था के अनुसार जारी रहेंगे और उनका संचालन जारी रहेगा।

राज्य स्तरीय कंपनी और सात सहायक कंपनियां होंगी गठित
बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए गठित राज्य स्तरीय कंपनी और सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के संगठनात्मक ढांचे को मंजूरी दी गई। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में सात विभाग काम करेंगे। इनमें आईटी एवं आईटीएमएस विभाग, प्लानिंग एवं अनुबंध विभाग, पॉलिसी एवं अनुसंधान, मानव संसाधन एवं विधि विभाग, अधोसंरचना विभाग, प्रवर्तन एवं गुणवत्ता विभाग और बिजनेस डेवलपमेंट विभाग शामिल हैं। इन विभागों के प्रमुख मुख्य महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी होंगे।

1190 पदों को मिली मंजूरी, चार साल में होगी भर्ती
राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में कुल 140 पद स्वीकृत किए गए हैं। वहीं सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में 150 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों में कुल 1190 पद विभिन्न विभागों के लिए सृजित करने की मंजूरी दी गई है। इन पदों पर अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रतिनियुक्ति, संविदा और संविलयन के आधार पर की जा सकेगी।
सुरक्षा और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष ध्यान
सरकार ने बस संचालन में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी है। बसों की सुरक्षा और प्रवर्तन व्यवस्था के लिए पुलिस एवं विशेष सशस्त्र बल से अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लिया जा सकेगा। वहीं गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अलग विभाग बनाया जाएगा। इन बसों की आवाजाही प्रदेश के सभी ISBT और बस स्टैंड तक हो सकेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए जरूरी निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बस मार्गों और यात्री सुविधाओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को सात शहरों में स्थित कंपनियों की देनदारियों को लेकर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने राज्य स्तरीय कंपनी की अधिकृत पूंजी और पेड-अप कैपिटल को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए। इस नई परिवहन व्यवस्था से प्रदेश में यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बस सेवा और आसान सफर मिलने की उम्मीद है।

एमपी के हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत, पेंशन और पीएफ के लिए अब 4 महीने पहले करना होगा ऑनलाइन आवेदन

भोपाल.

सेवानिवृत्त या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों को किए जाने वाले अंतिम भुगतान की व्यवस्था में प्रदेश सरकार ने परिवर्तन किया है। अब अंतिम भुगतान के प्रकरणों के निराकरण के लिए कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा को भुगतान सहित अन्य सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकृत किया गया है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार भविष्य निधि कटौती का विवरण कर्मचारी प्रतिमाह कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से देख सकेंगे।

चार महीने पहले करना होगा आवेदन
कोई गड़बड़ी नजर आने पर अभ्यावेदन आहरण एवं संवितरण अधिकारी को देंगे। सेवानिवृत्ति से चार माह पूर्व जब अंशदान की कटौती बंद कर दी जाती है, तक कर्मचारी ब्याज की गणना का सत्यापन करेंगे। चार माह पहले ही अपना अंतिम भुगतान आवेदन प्रस्तुत करेंगे। ऑनलाइन आवेदन जमा होने और वास्तविक भुगतान प्राप्त होने तक अपने वेतन से संबंध बैंक खाते में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन करने की अनुमति नहीं रहेगी। ऑनलाइन आवेदन के समय ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे सुरक्षित रखने का दायित्व कर्मचारी का होगा।

सीधे खाते में आएगी राशि
कर्मचारी से प्राप्त आवेदन का मिलान विभाग में संधारित निधि की पासबुक एवं सेवा पुस्तिका से होगा और उसकी प्रविष्टि कराई जाएगी। सत्यापित पृष्ठों को स्कैन कर कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली पर अपलोड किया जाएगा। आहरण एवं संवितरण अधिकारी से प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करने के बाद संचालक पेंशन के द्वारा भुगतान संबंधी आदेश जारी किए जाएंगे। भुगतान की राशि सीधे कर्मचारियों के उसे खाते में अंतरित की जाएगी, जहां सेवानिवृत्ति से पूर्व निरंतर छह माह का वेतन जमा किया गया हो।

कर्मचारियों की मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित कार्यालय द्वारा नाम, जन्मतिथि, बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। विवरण अपूर्ण होने पर स्वजन से जानकारी प्राप्त कर उसे अद्यतन किया जाएगा। नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में भुगतान होगा। नामांकित व्यक्ति के अल्पायु होने पर वैध संरक्षक के साथ संयुक्त बैंक खाते में राशि जमा कराई जाएगी। एक जुलाई 2026 के बाद विभागीय भविष्य निधि जमाशेष में किसी भी प्रकार का संशोधन केवल प्रमाणित साक्ष्यों और विभागाध्यक्ष की अनुशंसा के आधार पर संचालक पेंशन के स्तर से किया जा सकेगा। आनलाइन की प्राधिकार पत्र जारी होने की तिथि से छह माह की अवधि के लिए ही वैद्य रहेगा।

10 साल बाद फिर जुड़ा बिखरा परिवार, सखी की पहल से बेटियों को मिला माता-पिता का साथ

10 साल पहले हुआ था तलाक

सखी की समझाइश से बेटियों के लिए फिर एक हुआ परिवार

भोपाल 

मध्यप्रदेश में संकटग्रस्त, पीड़ित और असहाय महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संचालित ‘वन स्टॉप सेंटर’ (सखी) मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक अविश्वसनीय और दिल को छू लेने वाला मामला मध्यप्रदेश के दतिया जिले से सामने आया है, जहां कानूनी तौर पर तलाक होने के 10 वर्ष बाद वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से एक परिवार को पुनः मिलाया गया। इस पहल ने न सिर्फ दो मासूम बच्चियों को उनके पिता का साया वापस दिलाया, बल्कि टूट चुके एक वैवाहिक रिश्ते में फिर से खुशियों के रंग भर दिए।

यह कहानी दतिया की रहने वाली 36 वर्षीय उर्मिला (बदला हुआ नाम) की है। 10 वर्ष पूर्व न्यायालय द्वारा पति से तलाक होने के बाद उर्मिला अपनी दो मासूम बच्चियों के साथ मायके में रह रही थी। उर्मिला के वृद्ध पिता मजदूरी करके किसी तरह अपनी बेटी और दोनों नातिनों का पेट पाल रहे थे और तंगहाली के बावजूद बच्चियों को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे। वर्तमान समय में महंगाई और बढ़ती उम्र के कारण वृद्ध पिता के लिए पूरे परिवार का खर्च उठाना असंभव हो गया। अपनी बच्चियों के भविष्य को अंधकार में डूबता देख, उर्मिला ने हिम्मत जुटाई और दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाते हुए एक शिकायती पत्र सौंपा।

वन स्टॉप सेंटर से मिली मदद

महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया के जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार उपाध्याय के माध्यम से यह संवेदनशील मामला तुरंत ‘वन स्टॉप सेंटर’ को ट्रांसफर किया गया। सेंटर पर जब उर्मिला को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, तो 10 साल का दर्द और भविष्य की चिंता उसकी आँखों से बह निकली। उसकी बस यही चिंता थी कि क्या तलाक के इतने सालों बाद उसका पति उसे और बच्चियों को स्वीकार करेगा? वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक सुरीना गौतम ने उर्मिला को ढांढस बंधाया और हर संभव प्रयास कर उसका हक दिलाने का अटूट विश्वास दिलाया।

कानूनी पेचीदगियों पर भारी पड़ी ‘समझाइश’

वन स्टॉप सेंटर की टीम ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से उर्मिला के पति और उसके परिवारजनों को कार्यालय आमंत्रित किया। काउंसलिंग के दौरान पति ने 10 साल पुराने तलाक के कानूनी दस्तावेज पेश किए। कानूनी रूप से रिश्ता खत्म हो चुका था, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अभी बाकी था। विभाग के अधिकारियों और वन स्टॉप सेंटर की टीम ने कड़े वैधानिक रुख के बजाय बेहद संवेदनशील तरीके से संयुक्त काउंसलिंग की। उन्होंने पति और उसके परिवार को बच्चियों के भरण-पोषण, शिक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य का अहसास कराया।

और खिल उठे चेहरे, लौट आई खुशियां

इस मैराथन काउंसलिंग और मानवीय समझाइश का असर यह हुआ कि पति और उसके भाइयों का दिल पिघल गया। पति न केवल कानूनी तलाक को भुलाकर उर्मिला को पत्नी के रूप में दोबारा स्वीकार करने को राजी हुआ, बल्कि दोनों बच्चियों की पढ़ाई और पूरी जिम्मेदारी उठाने की सहर्ष सहमति दे दी। 10 साल से मायूसी का जीवन जी रही उर्मिला का चेहरा उम्मीद की नई किरण से खिल उठा। वन स्टॉप सेंटर के दफ्तर में जो परिवार कभी कानूनी तौर पर अलग हुआ था, वह एक-दूसरे का हाथ थामकर, खुशी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुआ। उर्मिला ने नम आंखों से दतिया प्रशासन और वन स्टॉप सेंटर का आभार व्यक्त किया।

 

निर्मला सप्रे दलबदल मामला: हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, जल्द आ सकता है बड़ा फैसला

 जबलपुर
 मप्र हाई कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित दलबदल प्रकरण में सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर हुई सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में भाग लेकर दलबदल कानून का उल्लंघन किया है। याचिका में उनकी विधानसभा सदस्यता शून्य घोषित करने की मांग की गई है।

विधानसभा अध्यक्ष की देरी पर कोर्ट जता चुका है नाराजगी
दरअसल, मामले ने तब और गंभीर स्वरूप ग्रहण कर लिया था, जब पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष लंबित कार्रवाई में हो रही देरी पर तीखी नाराजगी व्यक्त की थी। न्यायालय ने स्पष्ट पूछा था कि जब दलबदल संबंधी मामलों में सुप्रीम कोर्ट 90 दिनों के भीतर निर्णय का मानक तय कर चुका है, तब लगभग दो वर्ष बाद भी अंतिम निर्णय क्यों नहीं हो पाया।

याचिका के अनुसार, 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दलबदल संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के के एक कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से भाजपा के मंच पर पहुंचकर निर्मला सप्रे ने अपनी राजनीतिक निष्ठा बदलने का संकेत दिया था। इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया।

 

पाकिस्तानी हैंडलर का खतरनाक प्लान बेनकाब, युवकों को जिम जाने और पासपोर्ट बनवाने के दिए थे निर्देश

भोपाल
 मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की जांच में देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से जुड़े नए और चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट मीडिया और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने वाला पाकिस्तानी हैंडलर आरोपित युवकों को नियमित रूप से जिम जाने, शारीरिक रूप से फिट रहने और पासपोर्ट बनवाने का निर्देश दे रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उन्हें भविष्य में प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी की जा रही थी।

एटीएस सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर युवकों को कथित तौर पर “लड़ाके” बनने के लिए शारीरिक रूप से तैयार रहने की सलाह देता था। इसी क्रम में पासपोर्ट बनवाने पर भी विशेष जोर दिया गया था। अब तक गिरफ्तार आरोपितों में केवल भोपाल निवासी फराज के पास पासपोर्ट मिलने की पुष्टि हुई है।

चार राज्यों से चार आरोपित गिरफ्तार
इस मामले में एटीएस अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें भोपाल से फराज, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला, राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी से इजहार उल हक को पकड़ा गया है। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए फराज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है।

आतंकी संगठनों से संबंधों की जांच जारी
एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों के संबंध किसी आतंकी संगठन से थे या नहीं। हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में सभी आरोपित किसी बड़े संगठन से जुड़े होने से इन्कार करते रहे हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां इस दावे की गहन पड़ताल कर रही हैं।

डिजिटल सबूतों की होगी फोरेंसिक जांच
जांच का फोकस अब आरोपितों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों पर है। एटीएस इन डिवाइसों से डेटा रिकवर कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क, सोशल मीडिया संपर्कों और चैटिंग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जा रही है, जो इन आरोपितों के संपर्क में थे।

सूत्रों का मानना है कि डिजिटल जांच के बाद इस मामले में और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिससे गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

फंडिंग के सबूत अभी नहीं मिले
जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक किसी संस्था, संगठन या व्यक्ति द्वारा देश विरोधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता दिए जाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि आरोपितों के बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित फंडिंग नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

 

भारत के लिए ऐतिहासिक दिन! अब और मजबूत होगी भारतीय वायुसेना

आज भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वड़ोदरा में निर्मित पहले एयरबस C295 सैन्य विमान ने सफलतापूर्वक अपनी पहली उड़ान भर ली है। यह सिर्फ एक विमान की उड़ान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में एक बड़ी छलांग है।

इस परियोजना के तहत अब अत्याधुनिक C295 सैन्य परिवहन विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इससे न केवल भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश में रक्षा विनिर्माण, रोजगार और तकनीकी कौशल को भी मजबूती मिलेगी। लंबे समय में इससे आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

अब बात राजनीति की।

राहुल गांधी ने संसद में यह कहा था कि भारत में “मेक इन इंडिया” सफल नहीं हो सकता। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है। वहीं, समर्थकों का कहना है कि आज भारत में रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों में हो रहे विनिर्माण विस्तार ऐसे दावों का जवाब हैं।

लेकिन लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है। आपको क्या लगता है? क्या भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सही रास्ते पर है? और क्या इस तरह की उपलब्धियां देश की औद्योगिक नीति की सफलता को दर्शाती हैं?

अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें और ऐसे ही तथ्यात्मक और महत्वपूर्ण अपडेट के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।ध्यान दें कि राहुल गांधी के बारे में “उन्होंने कहा था कि भारत में मेक इन इंडिया हो ही नहीं सकता” जैसी पंक्ति को तथ्यात्मक रूप से उसी संदर्भ में प्रस्तुत करना बेहतर है जिसमें उन्होंने बयान दिया था। यदि आप इसे वीडियो में शामिल कर रहे हैं, तो मूल बयान का सही संदर्भ या उद्धरण देना आपकी सामग्री की विश्वसनीयता बढ़ाएगा।

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