राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के सहयोग से जेल विभाग की ऐतिहासिक पहल

भोपाल 

मध्यप्रदेश जेल विभाग ने बंदियों के समग्र स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया है। महानिदेशक जेल डॉ. वरुण कपूर के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (आर.आर.यू.), गांधीनगर, गुजरात के सहयोग से आयोजित यह सात दिवसीय प्रशिक्षण भोपाल स्थित क्षेत्रीय जेल प्रबंधन एवं शोध संस्थान में संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य जेलों में निरुद्ध बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य की पहचान, संरक्षण, परामर्श एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है।

महानिदेशक जेल डॉ. कपूर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बंदियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा जेल विभाग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। अब तक विभाग द्वारा शारीरिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक प्रभावी प्रयास किए जाते रहे हैं, वहीं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अब वैज्ञानिक एवं संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण बंदियों के पुनर्वास, व्यवहार सुधार तथा जेलों में सकारात्मक वातावरण निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

महानिदेशक जेल डॉ. कपूर ने बताया कि इस प्रशिक्षण में प्रदेश की विभिन्न जेलों से चयनित 30 प्रतिभागी, जिनमें जेल प्रहरी एवं पैरामेडिकल स्टाफ भी शामिल हैं। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी-अपनी जेलों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित बंदियों की पहचान, उनके रिकॉर्ड का वैज्ञानिक संधारण, प्रारंभिक परामर्श, आवश्यक रेफरल तथा प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सक्षम होंगे।

महानिदेशक जेल डॉ. कपूर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में यह पहल जेल प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी। विभाग आगामी चरणों में प्रदेश की विभिन्न जेलों में साइको सोशल काउंसिलिंग सेंटर स्थापित करने, राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के सहयोग से मास्टर ट्रेनर कार्यक्रम संचालित करने तथा इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में डीआईजी  मंशाराम पटेल, केंद्रीय जेल अधीक्षक  मानेन्द्र सिंह परिहार, प्रशासकीय अधिकारी  दिनेश कुमार इमले तथा राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रशिक्षक  गीतेश सिंह एवं  राकेश सिंह उपस्थित रहे। 

मंत्री सारंग ने की नरेला विधानसभा के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक

भोपाल

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को मंत्रालय में नरेला विधानसभा अंतर्गत शहीद भगत सिंह, स्वामी विवेकानन्द, सुभाष एवं सम्राट अशोक मंडल के पदाधिकारियों तथा नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र के विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में मंत्री  सारंग ने मंडल अंतर्गत सभी वार्डों में जलभराव, पेयजल आपूर्ति, ड्रेनेज व्यवस्था, सड़क निर्माण एवं मरम्मत, स्वच्छता तथा विद्युत आपूर्ति सहित नागरिकों से जुड़े सभी मूलभूत विषयों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक वार्ड का विस्तृत सर्वेक्षण कर समस्याओं का आंकलन किया जाए तथा समयबद्ध कार्य योजना तैयार कर उनका त्वरित, प्रभावी एवं स्थायी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक नागरिक तक सरकार की सुविधाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचना चाहिए।

नरेला विधानसभा बनेगी देश की सबसे स्वच्छ विधानसभा

बैठक में मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा को देश की सबसे स्वच्छ विधानसभा के रूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन है। इसके लिए विधानसभा के प्रत्येक वार्ड, गली और मोहल्ले में विशेष स्वच्छता अभियान संचालित किया जाएगा। नगर निगम, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों के सहयोग से नरेला को स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।

समस्त वार्डों में होगी मातृ-पितृ सेवा केंद्र की स्थापना

मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा के प्रत्येक वार्ड में मातृ-पितृ सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन सेवा केंद्रों में वरिष्ठजनों के लिए मनोरंजन एवं मानसिक सक्रियता बढ़ाने वाली लाइब्रेरी, कैरम, शतरंज, फिटनेस संबंधी सहित विभिन्न गतिविधियां उपलब्ध होंगी। जिससे वे अपने समय का सदुपयोग, अपने अनुभव साझा कर सकें और समाज की नई पीढ़ी को अपने ज्ञान एवं संस्कारों से प्रेरित कर सकें। आगे उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में माता-पिता को देव तुल्य माना गया है। उनकी सेवा और सम्मान ही हमारे समाज की सबसे बड़ी पहचान है। मातृ-पितृ सेवा केंद्र इसी भारतीय संस्कार और सेवा भाव को सशक्त रूप देने का एक सार्थक प्रयास होगा।

व्यापक स्तर पर होंगे अधोसंरचनात्मक एवं सामाजिक विकास कार्य

मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए व्यापक स्तर पर अधोसंरचनात्मक एवं सामाजिक विकास कार्य किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विधानसभा के समस्त वार्डों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, पार्क तथा सामुदायिक भवनों का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही क्षेत्र के सभी प्रमुख मंदिरों का चरणबद्ध रूप से जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा, जिससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

विकास कार्यों की होगी नियमित मॉनिटरिंग

मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा प्रत्येक कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण हो। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के निराकरण में संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मंत्री  सारंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा नरेला विधानसभा का समग्र, सुव्यवस्थित एवं जन-केंद्रित विकास सुनिश्चित करना है। नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ, सुविधायुक्त एवं बेहतर जीवन-परिवेश उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनसहभागिता और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से नरेला विधानसभा को विकास, स्वच्छता और सुशासन का राष्ट्रीय आदर्श बनाया जाएगा।

 

मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ की समीक्षा

भोपाल 

राज्य वित्त आयोग ने शुक्रवार को मंत्रालय में राजस्व विभाग, की समीक्षा बैठक ली। प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से स्वाबलंबी बनाने एवं स्वयं के आय के स्त्रोत सृजित करने में राजस्व विभाग की भूमिका के संबंध में राजस्व विभाग के साथ समीक्षा की। आयोग के अध्यक्ष  जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व स्रोतों और बजटीय प्रबंधन को लेकर मैराथन मंथन हुआ। आयोग के अध्यक्ष  पवैया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों की दीर्घकालिक वित्तीय सुदृढ़ता के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किये जाने में उनकी भूमिका को बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जाय।

अध्यक्ष  पवैया ने स्थानीय निकायों को गौशालाओं, सौर ऊर्जा को विकसित करने, वाणिज्यिक एवं आवासीय भवनों के लिये भूमि उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। बैठक में विभागीय अधिकारी ने शासन की नीति तथा इन विषयों पर भविष्य की संभावनाओं की जानकारी आयोग को दी।

आयोग द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि स्थानीय निकायों की केवल अनुदानों पर निर्भरता को कम कर उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना होगा। इसके लिए कर संग्रहण क्षमता को सुदृढ़ करने, वित्त आयोग के अनटाइड अनुदानों के प्रभावी एवं परिणामोन्मुख उपयोग और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए संबंधित विभाग से व्यावहारिक सुझाव प्राप्त किए गए हैं, जिनके आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।

बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य  के.के. सिंह एवं सदस्य सचिव  वीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे। महत्वपूर्ण बैठक में राजस्व विभाग,के प्रमुख सचिव सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

 

विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: कॉल सेंटर सेवाओं का विस्तार

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली उपभोक्ताओं को अधिक सुविधाजनक, त्वरित एवं निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कॉल सेंटर सेवाओं का विस्तार किया है। उपभोक्ताओं की बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कॉल सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त SIP चैनल जोड़े गए हैं। साथ ही एयरटेल नेटवर्क के माध्यम से नया संपर्क नंबर 0755-4314165 भी प्रारंभ किया गया है।

अब उपभोक्ता बीएसएनएल के टोल-फ्री नंबर 1912 के अतिरिक्त 0755-4314165 पर भी कॉल कर विद्युत आपूर्ति, बिल एवं स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायत दर्ज कराने के साथ ही शिकायत की स्थिति तथा अन्य बिजली संबधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश बीएसएनएल के टोल-फ्री नंबर 1912 पर संपर्क स्थापित नहीं हो पाता है, तो उपभोक्ता 0755-4314165 पर संपर्क कर कॉल सेंटर की सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।

कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए विभिन्न डिजिटल एवं दूरभाष माध्यमों से भी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उपभोक्ता निम्न माध्यमों से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं एवं आवश्यक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं-

    टोल-फ्री नंबर: 1912

    हेल्पलाइन नंबर: 0755-4314165

    UPAY App

    चैटबॉट

    व्हाट्सएप बॉट: 0755-2551222

    उपभोक्ता पोर्टल: portal.mpcz.in

कंपनी ने कहा है कि अतिरिक्त SIP चैनल जोड़े जाने से कॉल सेंटर अब एक साथ अधिक संख्या में उपभोक्ताओं की कॉल प्राप्त कर सकेगा। इससे शिकायतों का पंजीयन एवं निराकरण पहले की तुलना में अधिक तेज, प्रभावी एवं सुचारु रूप से किया जा सकेगा तथा व्यस्त लाइन अथवा कॉल न लगने जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी।

मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से उपभोक्ताओं को सरल, सुलभ, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में सेवाओं का निरंतर उन्नयन किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक उपभोक्ता को शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के साथ बेहतर सेवा अनुभव प्राप्त हो सके।

 

मालवा की समृद्धि का नया द्वार बनेगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मालवा अपनी बोली की मिठास और उद्यमशीलता के लिए जाना जाता है। यह कर्मयोगियों और उद्यमियों की भूमि है। हम मालवा के विकास के लिए हर जरूरी प्रबंध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड कॉरीडोर प्रोजेक्ट क्षेत्रीय विकास, समृद्धि और विश्वास का नया मार्ग है। इससे उज्जैन, जावरा और आसपास के क्षेत्रों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरीडोर केवल उज्जैन और रतलाम के लिए विकास का हाइवे नहीं, यह पूरे मालवा क्षेत्र के समग्र विकास और अर्थव्यवस्था का नया स्पीड ट्रैक बनेगा। इस कॉरीडोर से यात्री परिवहन सुगम होगा, यात्रा समय में कमी एवं भाड़ा लागत न्यूनतम हो जाने से लॉजिस्टिक्स को भी उल्लेखनीय गति मिलेगी, जिसका लाभ उद्योग, व्यापार, कृषि और पर्यटन सभी क्षेत्रों को प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नागदा में उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर परियोजना के भूमि पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागदा में अस्थायी भवन में केंद्रीय विद्यालय के संचालन और सड़क सुरक्षा के जन-भागीदारी मॉडल के रूप में ‘जन सेवा प्रहरी अभियान’ का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन जिले में संचालित शासकीय योजनाओं के चयनित पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में यह कॉरीडोर एक महत्वपूर्ण परियोजना है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा के लिये बेहतर अधोसंरचना प्रबंधन करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह कॉरीडोर सिंहस्थ : 2028 से पहले (दिसम्बर 2027 तक) बनकर तैयार हो जाएगा।

प्रमुख घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर उज्जैन-जावरा के मध्य वर्तमान सड़क मार्ग के चौड़ीकरण कार्य को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि नागदा और खाचरौद अब फोरलेन रोड से रतलाम शहर से कनेक्ट किया जाएगा। उन्होंने खाचरौद में नवीन मटर मंडी के लिए अतिरिक्त शासकीय भूमि देने और यहां एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा विधानसभा क्षेत्र में अटलावदा-निनावटखेड़ा चंबल नदी पर नया बांध बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नागदा में नया आईटीआई केन्द्र खोलने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक और विश्वस्तरीय अधोसंरचनात्मक के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट न केवल सिंहस्थ-2028 की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भविष्य में मालवा अंचल के विकास और प्रदेश की प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार भी सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि यह कॉरीडोर क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिखेगा। करीब 100 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से यातायात की सुगमता के साथ औद्योगिकीकरण को भी नई रफ्तार मिलेगी। उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर पहले एक्सेस कंट्रोल्ड था, जिसे नॉन एक्सेस कंट्रोल किया गया है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए यह मार्ग सोने पर सुहागा जैसा होगा। विश्व स्तरीय सिंहस्थ मेले के दौरान राजस्थान, गुजरात और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट अत्यंत सुगम और सुविधाजनक साबित होगा। उज्जैन क्षेत्र बदल रहा है। अब यहां साढ़े 8 करोड़ श्रद्धालु एक वर्ष में आ रहे हैं। राज्य सरकार ने 2 मेट्रोपोलिटन एरिया – इंदौर-उज्जैन-रतलाम और भोपाल-सीहोर-नर्मदापुरम घोषित कर इसमें डेवलपमेंट के काम भी शुरू कर दिए हैं। इसके बाद जबलपुर और ग्वालियर मेट्रोपोलिटन रीजन बनाने का काम प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सबसे अधिक रोजगार देने वाला राज्य भी बना है। मालवांचल के पीथमपुर और विक्रम उद्योगपुरी में विश्व के बड़े कारोबारी अपने उद्योग स्थापित करने के लिए आ रहे हैं। विकास की रफ्तार में अब चंबल अंचल भी पीछे नहीं है। मध्यप्रदेश की धरती पर देशभर में सबसे अधिक सीमेंट प्लांट स्थापित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा निर्धारित की गई GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) सहित हर वर्ग के कल्याण और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए हमारी सरकार काम कर रही है। राज्य सरकार ने GYAN में 2 और श्रेणियां शामिल की हैं- औद्योगिकीकरण और अधोसंरचनात्मक विकास। इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस 2025) में 30 लाख करोड़ का अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ, जिसमें से अब तक 10 लाख करोड़ निवेश जमीन पर उतर चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। किसान फसल लगाएं, सरकार समुचित दाम दिलवाएगी। मालवांचल में मटर की प्रोसेसिंग यूनिट और उज्जैन में पेप्सिको के फूड इंडस्ट्री पार्क का भूमि पूजन किया गया है। प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों को मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों के समान भाव बहुत जल्द उज्जैन में पेप्सिको के जरिए मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने कोई नया कर (टैक्स) नहीं बढ़ाते हुए भी 4.38 लाख करोड़ रुपए का बजट पारित किया है। हमने लाड़ली बहनों के लिए प्रतिमाह 1500 रुपए का प्रावधान किया है। रक्षाबंधन से पहले जल्द ही बहनों को जुलाई माह की राशि भी मिलेगी। राज्य सरकार ने अब तक लाड़ली बहनों को 60 हजार करोड़ रूपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा में डेढ़ साल पहले की गई इस सड़क निर्माण घोषणा को पूरा करते हुए आज इसका भूमि पूजन किया है। यह परियोजना दिसंबर 2027 तक पूरी होगी और इसका भव्य लोकार्पण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-पीथमपुर ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरीडोर से भी क्षेत्र की दिशा बदल जाएगी। इस कॉरिडोर से किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को लाभ मिलेगा। मालवा को नई-नई सड़क परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। सिंहस्थ में 30 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी के दृष्टिगत आवागमन की बेहतर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उज्जैन में शिप्रा के 30 किलोमीटर लंबे स्नान घाटों का निर्माण किया जा रहा है। इंदौर से उज्जैन तक मेट्रो ट्रेन भी जल्द ही आएगी। नई रेलवे लाइनों से नागदा दो रूट से दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग से जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि उज्जैन संभाग देश का मध्य बिंदु है, बहुत जल्द यहां एक नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सौगात भी मिलेगी।

कर्नाटक के राज्यपाल डॉ. थावरचंद गहलोत ने कहा कि उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर आगामी सिंहस्थ 2028 से पहले बनकर पूर्ण होगी। आज उज्जैन जिला प्रशासन के द्वारा जनसेवा प्रहरी की शुरुआत की गई है। यह एक सराहनीय पहल है। नागदा में खुले इस नए केंद्रीय विद्यालय में 30 जुलाई से कक्षाएं भी प्रारंभ हो जाएंगी। इसमें केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य लोग भी अपने बच्चों को प्रवेश दिला सकते हैं।

उज्जैन सांसद  अनिल फिरोजिया ने कहा कि उज्जैन-जावरा के बीच नई सड़क की मांग लंबे समय से की जा रही थी। यह ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा संपर्क मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागदा को नए पीएम विद्यालय की भी सौगात दी है।

नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डेढ़ वर्ष में अपनी घोषणा को पूरा करते हुए उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट की नींव रखी है। यह परियोजना क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से नागदा-खाचरौद को मिलाकर नया जिला बनाने की मांग की।

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर प्रोजेक्ट का भूमि पूजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा और तेज संपर्क मिलेगा। साथ ही यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक, व्यापारिक और कृषि विकास को नई गति प्रदान करेगी। लगभग 5,017 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 98.73 किलोमीटर लंबा यह कॉरीडोर मध्यप्रदेश की सड़क अधोसंरचना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। साथ ही प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का नया आधार भी बनेगा। इससे उज्जैन जिले के 50 गांव और रतलाम जिले के 12 गांव लाभान्वित होंगे। इस कॉरीडोर से उज्जैन, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा के विकास को गति मिलेगी। साथ ही क्षेत्र के करीब 35 लाख नागरिकों को इसका लाभ मिलेगा। इस कॉरीडोर में 7 फ्लाई ओवर, 3 रेल ओवरब्रिज, 8 बड़े पुल, 22 मध्यम पुल, 36 अंडरपास, 2 ओवरपास तथा 430 पुलियाओं का निर्माण किया जाएगा।

नागदा में अस्थायी भवन में केन्द्रीय विद्यालय का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतत् प्रयासों के बाद नागदा में केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर के निर्माण की मंजूरी मिल गई है। अभी यह विद्यालय एक प्रायवेट कॉलेज के अस्थायी भवन में शुरू हो रहा है। अभी यहां पहली से पांचवीं कक्षा संचालित होंगी। राज्य सरकार ने इस विद्यालय के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए 2.01 हैक्टेयर भूमि प्रदान की। इसमें प्राथमिक स्तर पर कुल 200 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत यहां एक-चौथाई यानी 50 सीटें आरक्षित रहेंगी। केंद्रीय विद्यालय में विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है।

जन सेवा प्रहरी अभियान का शुभारंभ

इस अभियान का उद्देश्य दुर्घटना होने के बाद के पहले 60 मिनट (गोल्डन ऑवर) में तत्काल प्राथमिक उपचार देकर घायल व्यक्ति की जान बचाना है। इसके लिए दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स पर मौजूद स्थानीय दुकानदारों, ढ़ाबा व पेट्रोल पंप कर्मियों को प्रहरी बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य, पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा इन प्रहरियों को फर्स्ट एड किट, सीपीआर देने और कानूनी अधिकारों का भी निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी बढ़ाते हुए अब तक क्षेत्र के 1,549 स्वयं सेवकों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें से 155 को जन सेवा प्रहरी होने का प्रमाण-पत्र भी वितरित कर दिए गए हैं। विगत 28 मई 2026 को उज्जैन जिले के खरसौद खुर्द में जन सेवा प्रहरियों द्वारा तीन घायलों को त्वरित उपचार व अस्पताल पहुंचाकर उनकी जीवनरक्षा की।

कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री  गौतम टेटवाल, राज्य सभा सांसद महंत  बाल योगी उमेशनाथ, विधायक घट्टिया  सतीश मालवीय, विधायक बड़नगर  जितेन्द्र पण्ड्या, विधायक जावरा डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय, एमपी हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमेन  ओम जैन, महापौर उज्जैन  मुकेश टटवाल, जिलाध्यक्ष  राजेश धाकड़, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

 

एबीडीएम विकसित भारत @ 2047 के लिए मजबूत और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र का आधार बनेगा : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

भोपाल

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) मिशन संचालन समूह के अध्यक्ष  जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में मिशन संचालन समूह की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि एबीडीएम के अंतर्गत मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना तैयार हुई है और अब देशभर में इसके व्यापक उपयोग, अंतरसंचालनीयता तथा नागरिकों की सहज पहुंच पर विशेष ध्यान देना होगा।

केंद्रीय मंत्री  नड्डा ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, उपचार की निरंतरता तथा नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हितधारकों से सुरक्षित, समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।

बैठक में एबीडीएम की प्रगति, राज्यों में क्रियान्वयन तंत्र, स्वास्थ्य संस्थानों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीयन, सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों से एकीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी, क्षमता निर्माण तथा एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई। देश में अब तक 93.95 करोड़ से अधिक एबीएचए नंबर बनाए गए हैं, 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं, 5.33 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं तथा 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। लगभग 24 करोड़ स्कैन एंड रजिस्टर टोकन भी जारी किए जा चुके हैं।

बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा; मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल; आयुष, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री  प्रतापराव जाधव; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री मती अनुप्रिया पटेल; वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री  जितिन प्रसाद; नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. निवास; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री  मुकेश महालिंग; केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव मती पुण्य सलीला वास्तव; आयुष मंत्रालय के सचिव  वैद्य राजेश कोटेचा; राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नीति आयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, आयुष मंत्रालय एवं अन्य सदस्य संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मध्यप्रदेश में एबीडीएम की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में लगभग 5.86 करोड़ आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। लगभग 20 हजार स्वास्थ्य संस्थान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री तथा लगभग 18 हजार स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। प्रदेश के 533 स्वास्थ्य संस्थानों में स्कैन एंड शेयर सुविधा सक्रिय है, जिसके माध्यम से 1 करोड़ 7 लाख 70 हजार से अधिक ओपीडी पंजीयन टोकन जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित शेष कार्यों को मध्यप्रदेश प्राथमिकता से पूर्ण करेगा।

 

“नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दें – डीजीपी कैलाश मकवाणा

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक संचालित किए जाने वाले राज्यव्यापी नशामुक्ति जन-जागरूकता अभियान “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” के प्रभावी क्रियान्वयन एवं व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, रेंज उप पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल एवं इंदौर के पुलिस आयुक्त, समस्त जिला पुलिस अधीक्षक, रेल पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक पीटीएसतथा समस्‍त सेनानी विसबल की बैठक ली।बैठक में अभियान की विस्तृत कार्ययोजना एवं दिन-प्रतिदिन आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी गई।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी “Vision Document on Narcotics Control 2026-29” की भावना एवं उद्देश्यों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई (Enforcement), सिंथेटिक ड्रग्स एवं प्रीकर्सर के नियंत्रण, नशे की मांग में कमी (Demand Reduction), व्यापक जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को इस अभियान का प्रमुख आधार बनाया गया है। अभियान के माध्यम से कानून प्रवर्तन के साथ-साथ समाज में नशे के प्रति जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर भी विशेष बल दिया जाएगा।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में आयोजित “नशे से दूरी है जरूरी”अभियान को प्रदेशभर में अभूतपूर्व जनसमर्थन मिला था और लाखों नागरिकों की सहभागिता से यह एक सफल जनअभियान बना था। उन्होंने अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि”रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं। इस वर्ष हमें पिछले अभियान से भी अधिक प्रभावी, व्यापक और परिणामोन्मुखी अभियान चलाना है। प्रत्येक जिला अपने नवाचारों, जनसहभागिता और सकारात्मक प्रयासों से नए कीर्तिमान स्थापित करे।”उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना समाज में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिकाधिक लोगों को इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करना होगा।

 मकवाणा ने कहा कि अभियान के दौरान पुलिस, सामाजिक न्याय विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आबकारी विभाग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, नगरीय निकायों तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर प्रत्येक जिले में साझा कार्ययोजना के अनुसार गतिविधियां आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौती भी है, इसलिए इसकी रोकथाम में पूरे समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि प्रत्येक पुलिस अधीक्षक जिला कलेक्टर के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान के सफल संचालन हेतु बहुविभागीयकोर कमेटीका गठन करें, जिसमें सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, श्रम, उद्योग, खाद्य, पंचायत, नगरीय निकाय, आबकारी, जनसंपर्क सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हों।

पुलिस महानिदेशक ने निर्देश दिए कि नगर निगम, नगर पालिका एवं स्थानीय निकायों के सहयोग से प्रमुख चौराहों, सार्वजनिक स्थलों, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टेशनों पर नशामुक्ति संबंधी पोस्टर, बैनर एवं डिजिटल संदेशों का व्यापक प्रदर्शन कराया जाए। साथ ही सिनेमाघरों, एफएम रेडियो, सार्वजनिक परिवहन, एलईडी स्क्रीन तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से अभियान का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अभियान को समाज के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाने के लिए नवाचार, प्रभावी जनसंपर्क, अंतर्विभागीय समन्वय एवं सामुदायिक सहभागिता को प्राथमिकता दें, ताकि प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध यह अभियान केवल पुलिस का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा अभियान है और प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही इसके उद्देश्य सफल होंगे।

बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्‍स  डी निवास वर्मा ने बताया गया कि 15 दिवसीय अभियान के अंतर्गत प्रतिदिन अलग-अलग विषयों पर जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें नशामुक्ति रैली, ड्रग अवेयरनेस रन, शपथ ग्रहण, विद्यालय एवं महाविद्यालयों में व्याख्यान, लघु फिल्मों का प्रदर्शन, चित्रकला, निबंध, पोस्टर, स्लोगन एवं रंगोली प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, मानव श्रृंखला, मोटिवेशनल स्टोरी का प्रसारण, सार्वजनिक स्थलों पर जनसंवाद, बाजारों एवं मॉल में जागरूकता कार्यक्रम, धार्मिक स्थलों, कारखानों एवं जेलों में विशेष कार्यक्रम तथा खिलाड़ियों एवं खेल प्रशिक्षकों के माध्यम से जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। अभियान का समापन 30 जुलाई को स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में किया जाएगा।

बैठक में पीएसओ टू डीजीपी डॉ विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, सहायक पुलिस महानिरीक्षक  संजीव कुमार कंचन,  अमृत मीणासहित अन्‍य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

दिल्ली हाईकोर्ट से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को झटका, बैंक फ्रॉड मामले में अपील खारिज

दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक की 3 साल की सजा बरकरार, सजा के बाद चली गई थी विधायकी

दिल्ली हाईकोर्ट ने दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की बैंक फ्रॉड मामले में दायर अपील खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई तीन साल की सजा बरकरार रहेगी।

राजेंद्र भारती को बैंक फ्रॉड मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा होने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई थी।

अब दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद उनकी सजा पर राहत नहीं मिली है। इस फैसले को पूर्व विधायक के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। मामले में आगे की कानूनी राहत के लिए उनके पास सुप्रीम कोर्ट का विकल्प उपलब्ध है।

म.प्र. में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधारेगी एम्स की तकनीक

भोपाल 

प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के गाँवों तक मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर बदलने वाली है। महिला बाल विकास विभाग और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मध्य एमओयू किया जायेगा। एमओयू से एम्स की हाईटेक तकनीक और विशेषता का लाभ सीधे फ्रंटलाइन वर्कर्स को मिलेगा। महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने गुरूवार को मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक में इस साझेदारी को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आंगवाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण की सटीक पहचान और त्वरित इलाज के लिए एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा स्पेशल क्लिनिकल ट्रेंनिंग दी जाएगी।

डेटा-संचालित निर्णय और फ्रंटलाइन वर्कर्स का सशक्तिकरण

मंत्री भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों और महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य व संपूर्ण पोषण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एम्स भोपाल की तकनीकी विशेषज्ञता से हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स और आंगनवाड़ी केंद्रों को नई मजबूती मिलेगी, जिससे नीतिगत स्तर पर सटीक और डेटा-संचालित निर्णय लिये जा सकेंगे। यह एमओयू महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अंतर्गत संचालित ‘स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ व ‘स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट’ के बीच होगा।

जनजातीय क्षेत्रों से हुई शुरुआत, विशेष प्रशिक्षण पर ज़ोर

इस साझेदारी के तहत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी टीम द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर्स और परियोजना अधिकारियों को विशेष तकनीकी और चिकित्सा प्रशिक्षण दिया जाएगा।मंत्री भूरिया ने जानकारी दी कि राज्य के जनजातीय बाहुल्य जिलों—झाबुआ और धार में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की जा चुकी है, जिसके आने वाले समय में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

कुपोषण पर शोध और व्यवहार परिवर्तन (BCC)

एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टर वर्तमान में गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही, आईसीएमआर (ICMR) और एनसीओई (NCOE) नई दिल्ली के सहयोग से बेहतर अनुपूरक आहार (THR) और परिवारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘व्यवहार परिवर्तन संचार’ पर भी शोध किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक डेटा के माध्यम से सही समय पर गंभीर बीमार या कुपोषित बच्चों को उचित उपचार देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। यह साझेदारी दीर्घकालिक रूप से मध्यप्रदेश में विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के कन्वरजेंस (एकीकरण) को बढ़ावा देगी।

समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त श्रीमती निधि निवेदिता, एम्स भोपाल के सीएफएम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण एम. कोकने (PI & HOD), नोडल अधिकारी डॉ. अभिजीत पाखरे और राज्य समन्वयक श्री दीपक पाण्डेय सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

मध्य प्रदेश के इकलौते यहूदी कब्रिस्तान पर अतिक्रमण का आरोप, तोड़फोड़ से भू-माफियाओं पर उठे सवाल

जबलपुर
 मध्य प्रदेश का एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान अब वैश्विक चर्चा में है। जबलपुर स्थित लगभग सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर कथित अतिक्रमण, तोड़फोड़ और भूमि कब्जे के आरोपों का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

इसी बीच इजरायल में बसे भारतीय मूल के यहूदियों ने भी विरासत बचाने के लिए अपनी सरकार और राजनयिक मिशनों से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही यह विवाद स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय बन गया है।

रानीताल की खामोश जमीन पर दफन इतिहास आज अदालत में संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठा है। यह लड़ाई केवल कुछ कब्रों की नहीं, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की है, जिसने कभी जबलपुर को विविध आस्थाओं का सम्मान करने वाली संस्कारधानी के रूप में पहचान दिलाई है। अब निगाहें हाई कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

यहूदी समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि कब्रिस्तान की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने और विरासत संरक्षण संबंधी याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

ब्रिटिश शासनकाल में जबलपुर में करीब 200 यहूदी परिवार रहते थे। उनके अंतिम संस्कार के लिए तत्कालीन जिला प्रशासन ने लगभग पांच हजार वर्गफीट भूमि आवंटित की थी। आज इस परिसर में 100 से अधिक कब्रें हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे यहूदियों की कब्रें भी हैं, जिन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी थी। आजादी के बाद अधिकांश परिवार इजराइल चले गए और अब शहर में केवल तीन-चार परिवार शेष हैं। उनका आरोप है कि भू-माफिया इस ऐतिहासिक स्थल पर कब्जे की कोशिश कर रहा है।

 

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